Adrenal glands

अधिवृक्क ग्रंथियों को जोड़ा अंतःस्रावी ग्रंथियों कहा जाता है जैसा कि आप नाम से समझ सकते हैं, वे गुर्दे के ऊपर, शीर्ष पर स्थित हैं।
शरीर के लिए अधिवृक्क कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं जैसे ही उनके काम में विवाद शुरू होता है, एक व्यक्ति निश्चित रूप से इसे महसूस करेगा।

अधिवृक्क ग्रंथियों के कार्य क्या हैं ?

अंग कई भागों से मिलकर होते हैं। उनमें से प्रत्येक में, हार्मोन उत्पन्न होते हैं जिनका शरीर पर बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसलिए, अधिवृक्क ग्रंथि के अंतःस्रावी समारोह में सबसे गंभीर माना जाता है।

कोर्टिक परत में, ऐसे हार्मोन का उत्पादन होता है:

मिनरलकोर्टोकोइड्स – पदार्थ जो पानी के नमक चयापचय को नियंत्रित करते हैं;
ग्लूकोकार्टोइकोड्स – शरीर में कार्बोहाइड्रेट के चयापचय के लिए जिम्मेदार;
सेक्स।
मस्तिष्क परत में एड्रेनालाईन उत्पन्न होता है Noradrenaline। तनाव को नियंत्रित करने के लिए – इन हार्मोनों के कारण महिलाओं में शरीर में अधिवृक्क ग्रंथि एक बहुत ही महत्वपूर्ण समारोह में प्रदर्शन कर सकते हैं। अगर हम ज्यादा सरल भाषा में बात करते हैं, noradrenaline लोग तनावपूर्ण स्थितियों आसान बर्दाश्त। स्वास्थ्य समस्याओं में से अधिकांश – नसों से।

अधिवृक्क ग्रंथियों के कार्यों से शरीर को विभिन्न प्रकार के तनाव से बचाया जा सकता है:

शारीरिक – गंभीर भार के परिणामस्वरूप उत्पन्न;
भावनात्मक;

रासायनिक – पर्यावरण के आक्रामकता से उकसाया (आमतौर पर रसायनों द्वारा जहर का एक परिणाम के रूप में होता है)
यदि आवश्यक हो, ग्रंथियों में वृद्धि कर सकते हैंआकार। यह आम तौर पर तब होता है जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तनाव का अनुभव करता है, और बचत हार्मोन के स्टॉक को बढ़ाने के लिए आवश्यक है। अगर समय कार्रवाई नहीं करता है, अधिवृक्क ग्रंथियां समाप्त हो जाती हैं, और उपयोगी पदार्थों का उत्पादन समाप्त हो जाता है।

ये छोटी ग्रन्थियाँ प्रत्येक गुर्दे पर एक ढक्कन-सी सटी रहती हैं। प्रत्येक अधिवृक्क ग्रन्थि में एक मुख्य भाग होता है और एक कवच होता है। अधिवृक्क ग्रन्थि ऐड्रिनल हारमोन बनाता है। यह हारमोन शरीर को लड़ाई, भागदौड, खेलों और कसरत के लिए मदद करता है। इसके असरों में दिल की दर, रक्तचाप और खून में ग्लूकोज़ की मात्रा में वृध्दि शामिल हैं। ऐड्रिनल का कवर तीन स्टीरॉएड स्त्रावित करता है। इन स्टीरॉएड के अलग-अलग काम होते हैं जैसे शरीर में ग्लूकोज़, प्रोटीन और वसा का इस्तेमाल, शोथ प्रक्रिया पर नियंत्रण। इसके अलावा एंड्रोजन वाला हिस्सा (जो वृषण द्वारा भी स्त्रावित होता है) पुरुष गुणों के लिए ज़िम्मेदार होता है।
अगर ऐड्रिनल ग्रन्थियाँ हद से ज्यादा काम करने लगें तो इससे मोटापा हो जाता है इसे कुशिंग सिंड्रोम कहते हैं। इनके कम काम करने से पतलापन हो जाता है, जिसे एडीसन बीमारी कहते हैं।

ऐड्रिनल कम स्त्रावित होना
ऐडिसन बीमारी
यह बीमारी काफी कम देखने में आती है। इसके लक्षण हैं – वजन घटना, कमज़ोरी, भूख न लगना, उबकाई आना, उल्टियाँ, दस्त या कब्ज़, त्वचा के खुले भागों का भूरा हो जाना और शरीर पर बालों में कमी आ जाना। बीमारी में हारमोन के इलाज से मदद मिलती है।

ऐड्रिनल अधिक स्त्रावित होना
कुशिंग सिंड्रोम
यह ऐड्रिनल ग्रन्थियों द्वारा अधिक हारमोन स्त्रावित होने से होता है। इसका कारण ग्रन्थियों का बढ़ जाना होता है। लक्षणों में वजन बढ़ जाना, मानसिक गड़बड़ी, पीठ में दर्द, पेशियों में कमज़ोर, सिर के बाल छड़ जाना, मुँहासे होना, नील और आमाशयी अत्यअम्लता और अल्सर शामिल हैं। औरतों में इससे माहवारी में अनियमितता और पुरुषों जैसे गुण (जैसे चेहरे पर बाल होना और आवाज़ गहरी हो जाना) हो जाते हैं। पुरुषों में इससे नपुंसकता हो जाती है। बहुत से लक्षण बीमारी को साफ दर्शाते हैं जैसे चेहरा गोल हो जाना, मोटापा _ खासकर पेट और कमर पर, उच्च रक्तचाप, पेट और जाँघों पर भूरी लकीरें (खिंचने के कारण) हो जाती हैं। खून में शक्कर की मात्रा ज्यादा होने के कारण त्वचा का संक्रमण ज्यादा होता है। खून की जाँच से ही बीमारी का निदान होता है। इस विवरण से दो दिक्कतें आती हैं। किसी मोटे व्यक्ति को कुशिंग बीमारी है या नहीं यह केवल डॉक्टर द्वारा और खून की जाँच से ही तय किया जा सकता है।

क्या कुशिंग जैसा मोटापा स्टीरॉएड हारमोनों के ज्यादा इस्तेमाल से हो रहा है? कई बार कई मरीज़ों को गलत ढंग से हफ्तों तक स्टीरॉएड दिए जाते हैं। आप मरीज़ से पता करें कि क्या वो रूमटी बुखार या एक्ज़ीमा की दवा तो नहीं ले रहा है। स्टीरॉएड दवाओं के असर दवा रोकने के काफी समय बाद जाकर खत्म होते हैं।

इलाज
इस बीमारी का कारण खून के कुछ टेस्ट के बाद ही पता चलता है। कारण के अनुसार दवाओं या ऑपरेशन की ज़रूरत होती है।

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