राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजना ( Rajasthan’s major irrigation project )

राजस्थान में देश के कुल सतही जल का मात्र 1.16 प्रतिशत जल उपलब्ध है। इंदिरा गांधी नहर राजस्थान की सबसे बड़ी तथा महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना है। बीसलपुर बांध राज्य की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है।

राज्य में न्यूनतम सिंचाई, सिंचित क्षेत्र के आधार पर चुरू में व राज्य के कुल सिंचित क्षेत्रफल के आधार पर राजसमंद जिले में तथा अधिकतम सिंचाई गंगानगर व हनुमानगढ़ में होती है।

राजस्थान में गेहूं की फसल का सिंचित क्षेत्र सर्वाधिक है। इसके पश्चात सरसों व कपास का स्थान आता है। राजस्थान में सिंचाई के प्रमुख साधन 

कुएं एवं नलकूप :-

राज्य में कुओं एवं नलकूपों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई (65.67 प्रतिशत) होती है। कुओं एवं नलकूपों से सिंचाई जयपुर (सर्वाधिक), भरतपुर, अलवर, उदयपुर व अजमेर जिलों में होती है। जैसलमेर के पूर्व में स्थित चन्दन नलकूप मीठे पानी का थार का घड़ा कहलाता है।

नहरें :-

भारत में सर्वाधिक सिंचाई नहरों द्वारा लगभग 39 प्रतिशत भाग पर होती है। राजस्थान में 32.84 प्रतिशत क्षेत्र पर नहरों द्वारा सिंचाई एवं 1.02 प्रतिशत क्षेत्र पर अन्य साधनों द्वारा सिंचाई होती है।

राज्य में नहरों द्वारा सिंचाई श्रीगंगानगर ( सर्वाधिक), हनुमानगढ़, जैसलमेर, भरतपुर, कोटा, बूंदी, बारां, सिरोही, डूंगरपुर, बांसवाड़ा व चुरू जिलों में होती है।

तालाब :-

राजस्थान में तालाबों द्वारा 0.47 प्रतिशत सिंचाई होती है। राजस्थान के दक्षिणी एवं दक्षिणी-पूर्वी भागों में तालाबों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई होती है।भीलवाड़ा जिले में तालाबों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई होती है।

उदयपुर, पाली, राजसमंद, चितौड़गढ़, कोटा, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बूंदी, टोंक आदि अन्य जिले है जहां तालाबों द्वारा सिंचाई होती है। जैसलमेर में तालाबों के स्थान पर खड़ीन का उपयोग किया जाता है।

कृषि यंत्रो के कस्टम हायरिंग केन्द्रो की स्थापना ( Establishment of custom hiring centers of agricultural machinery) :- राज्य सरकार गरीब किसानो को उन्नत एव महंगे कृषि यंत्रो का लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य के सभी विकाश खण्डों में ‘कस्टम हायरिंग केन्द्रो’ की स्थापना कर रही है जहाँ से किसान उन यंत्रो को आवश्यकता अनुसार किराये पर ले सकते है

 ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट( Global Rajasthan Agritech Meet- GRAM) 2016 

9 से 11 ,नवम्बर 2016 को सीतापुर ,जयपुर में ग्राम का आयोजन किया गया। ग्राम का मूल उद्देश्य कृषि के क्षेत्र में विकास दर बढ़ाकर सतत विकास एवं आर्थिक तरक्की के माध्यम से किसानो की आय दुगुनी करना एवं उसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है

Note:- इजरायल ग्राम का भागीदार देश बना।

  • ग्राम में हरियाणा में कुरुक्षेत्र के सुनारिया गांव से आया 9 करोड़ का मुर्रा नस्ल का पाडा(युवराज) आकर्षण का केंद्र बना ।
  • दूसरी ग्राम का आयोजन :-24,26 मई 2017 को कोटा में किया गया ।
  • तीसरी ग्राम का आयोजन 7,9 नवम्बर 2017 को उदयपुर में किया गया।

राज्य में खजूर की खेती के लिए 12 जिलो का चयन किया गया है।

देश के पहले आर्गेनिक राज्य सिक्किम की तरह डुंगरपुर को पहला ऑर्गेनिक जिला बनाया गया। राज्य की पहली ऑर्गेनिक मण्डी डूंगरपुर में बनाई गयी।

लसाडिया(उदयपुर) में लघु वन उपज मण्डी स्थापित की गयी। एशिया की सबसे बड़ी फल सब्जी मण्डी मुहाना(जयपुर) में स्थित है। राज्य को गेंहू के सर्वाधिक उत्पादन के लिए कृषि कर्मण अवार्ड मिला है। राज्य में दो कृषि निर्यात जोन -धनिया और जीरे के लिए किर्यशील है।

कृषि के विकास में कार्यरत संस्थाएं (Organizations engaged in the development of agriculture)

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-नई दिल्ली (1929)
  • काजरी-सेंट्रल एरिड जोन रिसर्च इंस्टीट्यूट-जोधपुर (1959) विश्व बैंक के सहयोग से
  • केंद्रीय कृषि फार्म-एशिया का सबसे बड़ा यांत्रिक कृषि फार्म- सूरतगढ़ (1959) रूस के सहयोग से
  • जैतसर कृषि फार्म-गंगानगर- (1956) कनाडा के सहयोग से
  • बेर खजूर अनुसंधान संस्थान (जोडबीड़) बीकानेर-1978
  • राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र (सेवर) भरतपुर-1993
  • राष्ट्रीय बीजीय अनुसंधान केंद्र (तबीजी) अजमेर-1994
  • राजस्थान हॉर्टिकल्चर एंड नर्सरी डेवलपमेंट सोसाइटी -जयपुर-2006

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No of Question- 22

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

दिनेश मीना टोंक, चंद्रप्रकाश सोनी पाली, राजवीर प्रजापत, प्रकाश कुमावत, ओम प्रकाश बाडमेर, नवीन कुमार, झुंझुनूं

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