राजस्थान में कृषि क्षेत्र के प्रमुख मुददे ( Major points of agricultural sector in Rajasthan )

राजस्थान के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 2017-18 में 24.61 प्रतिशत (2011-12 )कीमतों पर रही है राज्य में अधिक मात्रा में सिंचित फसलों में गन्ना कपास जो और गेहूं का स्थान आता है राज्य में कम मात्रा में सिंचित फसलों में ज्वार बाजरा और मूंगफली का स्थान आता है

राजस्थान देश का एक महत्वपूर्ण कृषि प्रधान राज्य है यहां की कुल आबादी का लगभग 70% हिस्सा कृषि कृषि आधारित उद्योगों और पशुपालन पर निर्भर है प्रदेश के कुल कृषित क्षेत्रफल का लगभग 30% भाग सिंचित है

राज्य में कृषि में सर्वाधिक क्षेत्रफल बाजरे का है राज्य में बाजरे का सर्वाधिक उत्पादन बाड़मेर में होता है राज्य का बाजरे के उत्पादन और क्षेत्रफल दोनों दृष्टि से देश में प्रथम स्थान है 

राज्य में रबी की फसलों में सर्वाधिक क्षेत्र गेहूं का और खरीफ फसलों में बाजरे का है राज्य में बंजर और व्यर्थ भूमि का सर्वाधिक क्षेत्रफल जैसलमेर जिले में मिलता है

राजस्थान में भारत के कुल कृषि क्षेत्रफल का लगभग 11% है लेकिन सतही जल की उपलब्धता देश की मात्र 1% है राज्य में सर्वाधिक सिंचाई कुआं और नलकूपों से होती है

राज्य में कृषि जोतों का औसत आकार 3.65 हेक्टेयर (देश में सर्वाधिक) है जो देश के औसत कृषि जोत आकार ( 1.32 हेक्टेयर ))से अधिक है राज्य में सर्वाधिक कृषि क्षेत्र लगभग 1/4 भाग में बाजरा बोया जाता है

गेहूं राज्य में सर्वाधिक मात्रा में उत्पादित होने वाली फसल है राज्य के कुल क्षेत्रफल का 2/3 बार (लगभग 65%) खरीद के मौसम में बोया जाता है राज्य में कपास की फसल हनुमानगढ़ और गंगानगर में होती है

राज्य में सोयाबीन का सर्वाधिक उत्पादन झालावाड़ जिले में होता है कृषि क्षेत्र का (पशुपालन सहित) राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में सामान्यत: 24-30% हिस्सा रहता है राजस्थान में तिलहन फसलों में सर्वाधिक उत्पादन राई और सरसों का अनाज में गेहूं का और दालों में सर्वाधिक चने का होता है

राजस्थान में सर्वाधिक सिंचित क्षेत्रफल (जिले के कृषि क्षेत्र के प्रतिशत के रूप में) गंगानगर जिले में 70% और न्यूनतम चुरू जिले में 5% है मोटे अनाजों के अधीन बोए गए क्षेत्र में योजना काल (1951 से 2008) में कमी हुई है

राज्य की रेशेदार फसलें कपास और सन है राज्य में कुल कृषि क्षेत्रफल सर्वाधिक बाड़मेर जिले में और न्यूनतम राजसमंद जिले में हैराज्य में प्रथम कृषि नीति 28 जुलाई 2000 को केंद्रीय सरकार द्वारा घोषित की गई सोजत पाली की मेहंदी के अतिरिक्त लाल सुर्ख रंग के लिए गिलूंड राजसमंद की मेहंदी भी प्रसिद्ध है?राजस्थान में प्रथम कृषि विश्वविद्यालय 1962 में उदयपुर में स्थापित किया गया इसका नाम बाद में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय रखा गया

राजस्थान में कृषि पद्धतियों का वर्गीकरण ( Classification of Agricultural Practices in Rajasthan )

शुष्क कृषि (बारानी)➖ 50 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में वर्षा जल का सुनियोजित रूप से संरक्षण और उपयोग कर कम पानी की आवश्यकता वाली और शीघ्र पकने वाली फसलों की कृषि की जाती है यह कृषि राज्य के अधिकांश जिलों में की जाती है राज्य में 1 वर्ष में एक ही खेत में चार फसल उगाने की प्रक्रिया को रिले क्रॉपिंग कहा जाता है

आर्द्र कृषि➖ 100 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में उपजाऊ कांप और काली मिट्टी पर उन्नत व व्यापारिक फसल प्राप्त की जाती है वह आर्द्र कृषि कहलाती है राज्य के बाराँ झालावाड़ कोटा बांसवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में आद्र कृषि की जाती है

झूमिंग कृषि➖ आदिवासियों द्वारा डूंगरपुर उदयपुर प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा क्षेत्र में जंगल में आग लगाकर बची राख फैलाकर वर्षा होने पर अनाज बोकर फसल तैयार की जाती है इसे झूमिंग या स्थानांतरित कृषि कहते हैं आदिवासियों में यह वालरा नाम से जानी जाती है पहाड़ी क्षेत्रों की वालरा चिमाता और मैदानी क्षेत्रों की वालरा दजिया कहलाती है

सिंचित कृषि➖ राज्य की लगभग 32% कृषि भूमि पर वर्षा के अलावा अन्य स्रोतों से पानी देकर फसल तैयार की जाती है यह 50 से 100 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाती है अलवर भरतपुर करौली सवाई माधोपुर भीलवाड़ा अजमेर गंगानगर हनुमानगढ़ जिले में आते हैं

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No of Question- 67

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राज्य की कृषि नीति ( Importance of Agricultural Policy )

राजस्थान में एक कृषि कार्य समूह का गठन किया गया इस समूह में राज्य कृषि नीति का प्रारूप तैयार किया था

  • अध्यक्ष➖ डॉक्टर आर एस परौदा
  • प्रारूप को मंजूरी➖ 26 जून 2013
  • लक्ष्य➖ 4% की वार्षिक कृषि विकास दर
  • मुख्य उद्देश्य➖सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने हेतु पोषण और खाद्य सुरक्षा को सर्वाधिक प्राथमिकता देना

अन्य उद्देश्य➖

  • राजस्थान में जल संरक्षण की प्रणालियों को बढ़ावा देना
  • नवीन वैज्ञानिक भू- उपयोग योजना और संबंधित कृषि प्रणाली को अपनाना
  • वन चारागाह पद्धति को बढ़ावा
  • आधारभूत सुविधाएं विशेषकर विपणन, शीत भंडारण व्यवस्था ,ग्रामीण प्रसंस्करण इकाइयों ,और निर्यात आदि सुविधाओं का विकास करना
  • मिश्रित कृषि और अंतरशस्य फसलो को प्रोत्साहन
  • राज्य के शुष्क क्षेत्रों में कृषि को बढ़ावा देना
  • कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना

बीज विधायन केंद्र➖ बस्ती में डिंडोर कृषि फार्म में 4 जनवरी 2015 को

इंडो इजराइल संतरा उत्पादन कार्यक्रम➖कोटा में नांता कृषि फार्म में उत्कृष्टता केंद्र शुरू किया गया है

कृषि वानिकी नीति ( Agricultural forestry policy )- 6 फरवरी 2014 को अनुमोदित
उद्देश्य➖ भूमि उपयोग प्रणाली को बढ़ावा देना

जैतून तेल रिफाइनरी ( Oil refinery in Rajasthan )

देश की पहली जैतून तेल की रिफाइनरी लूणकरणसर में स्थापित की जा रही है 3 अक्टूबर 2014 को इस रिफाइनरी का उद्घाटन किया गया जैतून तेल को प्रदेश में राज ऑल ब्रांड नाम से बेचा जाएगा

विशेष➖विश्व में सबसे ज्यादा 41 प्रतिशत जैतून तेल का उत्पादन स्पेन में हो रहा है

बजट पहल 2017-18 के तहत ( Budget Initiative Under 2017-18 )

कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राजधानी में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट का भव्य आयोजन किया गया

पार्टनर देश इजराइल के अलावा ऑस्ट्रेलिया जापान नीदरलैंड इरान कजाकिस्तान और नाइजीरिया के पार्टिसिपेट ने ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट मैं भाग लिया

राजस्थान कृषि प्रसंस्करण और कृषि प्रोत्साहन नीति ( Rajasthan Agricultural Processing and Agricultural Promotion Policy )

  • राजस्थान सरकार द्वारा लागू किया गया➖ 20 अक्टूबर 2015 को राज्य सरकार द्वारा इस नीति को लागू किया गया
  • लॉन्च किया➖ 5 नवंबर 2015 को
  • कृषि प्रसार नीति लागू रहेगी➖ 31 मार्च 2019 तक
  • कृषि प्रसार नीति का उद्देश्य➖ कृषकों की आय बढ़ाना ,कृषि प्रसंस्करण और विपणन के लिए नई तकनीकों को बढ़ावा देना ,ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना, उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराना

कृषि के प्रमुख मुद्दे ( Agricultural problems today )

वाटर मैनेजमेंट पार्क➖ श्रीगंगानगर के कृषि विज्ञान केंद्र के पदमपुर फार्म में राजस्थान कृषि विद्यालय के एक करोड़ की लागत से वाटर मैनेजमेंट पार्क की स्थापना की जाएगी

पादप क्लीनिक➖ राज्य सरकार ने राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के मंडोर स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र में राज्य के पहले पादप क्लीनिक को खोलने की मंजूरी दी है

राज्य में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत➖ 10000000 रुपए की लागत से 5 स्थानों पर पादप क्लीनिक खोलना प्रस्तावित है

इजराइल की प्रमुख कृषि कंपनी नान देन एग्रो पीआरओ के द्वारा बस्सी जयपुर के पास 400 एकड़ जमीन पर आधुनिक तकनीक से खेती प्रस्तावित है

धमासा➖ एक प्रकार की खरपतवार है जो जयपुर जिले में पाई जाती है

नरमा कपास➖ प्रदेश में उगाई जाने वाली नरमा कपास के कुल क्षेत्रफल का लगभग 80% श्री गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में है

ग्वार के निर्यात जोन➖ जहाँ उत्पादन वहां बाजार नीति के तहत राज्य के 5 जिलों जोधपुर पाली बाड़मेर बीकानेर और श्री गंगानगर में ग्वार के लिए कृषि निर्यात जोन स्थापित किए जा रहे हैं

निजी क्षेत्र की पहली कृषि मंडी➖ निजी क्षेत्र की पहली कृषि मंडी 29 नवंबर 2005 को कोटा जिले के कैथून मे प्रारंभ की गई जिसे ऑस्ट्रेलिया की कंपनी ने सहयोग किया है

राज्य का पहला टर्मिनल मार्केट➖ किसानों और व्यापारियों को फल सब्जियों के वैश्विक व्यापार में सक्षम बनाने के लिए मुहाना जयपुर में राज्य का पहला टर्मिनल मार्केट स्थापित किया गया है

गोचनी(बेझड़)➖ गेहूं जौ और चने का मिश्रण जो रबी की फसल के दौरान उगाया जाता है

पहली किसान कंपनी➖ झालावाड के बकानी में राज्य की पहली किसान कंपनी गठित की गई है इसका संचालन किसानों के हाथ होगा जो फसल को अच्छा उपलब्ध करवाएगी

राज्य का पहला कृषि रेडियो स्टेशन➖ राज्य का पहला कृषि रेडियो स्टेशन भीलवाड़ा में खोला गया जो प्रतिदिन 2 घंटे कृषि संबंधी समाचार प्रसारित करेगा

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No of Question- 25

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Specially thanks to ( With Regards )

दिनेश मीना टोंक, चंद्रप्रकाश सोनी पाली, राजवीर प्रजापत, प्रकाश कुमावत, ओम प्रकाश बाडमेर. MAMTA SHARMA KOTA

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