किसी भी परिस्थितिक तंत्र में या बायोम में मिलने वाले जीव जंतुओं के प्रजातियों की विविधता को जैव विविधता कहा जाता है। जीवोम समान जैविक तथा अजैविक दशाओं वाले प्राकृतिक पारितंत्र को जीवोम कहा जाता है। जैव विविधता शब्द का प्रयोग वाटर जी.रोजेन है

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विभिन्न प्रकार के जीव जंतुओं का समूह तथा पृथ्वी पर पाए जाने वाले प्रत्येक वनस्पति विविध विविध प्रकार की पाई जाती है इन सब को समग्र रूप से जैव विविधता के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है जैव विविधता को आसानी से वर्गीकरण से समझा जा सकता है सर्वप्रथम जॉन विटेकर ने जंतुओं और पौधों को समग्र रूप से पंच जगत परिकल्पना के आधार पर वर्गीकृत किया समस्त जीव को इन्होंने 5 जगतो में विभाजित कर दिया

  1. मोनेरा (Monera)
  2. प्रोटिस्टा (Protista)
  3. पादप (Plantae)
  4. कवक (Fungi)
  5. जन्तु (Animal)

1. मोनेरा (Monera)

इस ग्रुप में सभी प्रोकैरियोटिक जीवो को रखा गया है जो आदि प्रकार के जीव है जिनमें केंद्रीय झिल्ली पूर्णत नहीं बनी हुई होती है जैसे जीवाणु माइकोप्लाज्मा नील हरित शैवाल

माइकोप्लाज्मा को जीव जगत का जोकर भी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण जीवाणु तथा फंजाई के मध्य के माने जाते हैं कोशिका भित्ति का अभाव होता है कुछ विशेष प्रकार के जंतु और पादप से संबंधित रोग इन्हीं माइकोप्लाज्मा के कारण होते हैं यह दुनिया के सबसे छोटे जीव होते हैं

2. प्रोटिस्टा (Protista)

इसमें सभी एक कोशिकीय यूकैरियोटिक जंतु और पौधे सब रखे गए हैं उदाहरण प्रोटोजोआ ग्रीन शैवाल अवपंक_फफूंद

3. कवक (Fungi) 

यह वह संरचना है जिस पर कोशिका भित्ति तो पाई जाती है परंतु इनका पोषण विषमपोषी प्रकार का होता है यह हरे रंग के अलावा अन्य सभी रंगों के होते हैं उदाहरण मशरूम पेनिसिलियम

4. पादप (Plantae)

सभी प्रकार के हरे पौधे जो बहुकोशिकीय होते हैं जिनमें पर्णहरित पाया जाता है सभी पौधे इसी की श्रेणी में आते हैं

प्लान्टी इनके चार प्रभाग होते हैं

थैलोफाइटा ( Thalamophyta )- प्लांट बॉडी जड़ तना पत्ती में विभेदित नहीं होती है उदाहरण कवक और शैवाल इनमें वैस्कुलर बंडल नहीं पाया जाता है तथा जनन अंगों का अभाव होता है या छुपे हुए होते हैं इसलिए इन्हें क्रिप्टोगेम्स असंवहनी पादप कहते हैं

ब्रायोफाइट्स ( Bryophytes ) यह पौधे थैलोफाइटा से विकसित प्रकार के होते हैं परंतु क्रिप्टोगेम्स ही कहे जाते हैं पादप जगत का उभयचर भी कहते हैं — रिक्सिया

टेरिडोफाइटा ( Pteridophyta ) – यह संवहनी क्रिप्टोगेम्स कहलाते हैं क्योंकि इन में संवहन उत्तक का विकास हो चुका है-सिलेजिनेला

सपर्मैटोफाइट ( Saparmatoite )-  यह दो भागों में बांट दिए जाते हैं इन पौधों में बीज बनते हैं

  1. नग्न बीजी- यह पौधे पुराने जमाने के समय से है जीवित जीवाश्मविज्ञान भी कहा जाता है साइकस पाइनस विलियम सोनिया
  2. आवृत्तबीजी – इनके बीज के ऊपर कवर पाया जाता है यह पुनः दो प्रकार के होते हैं एक बीजपत्री पादप जैसे सभी घास कुल के पौधे तथा द्विबीजपत्री पादप जैसे सभी दालें और अन्य

5. जन्तु (Animal) 

सभी जंतु जो बहुकोशिकीय होते हैं इसी में आते हैं

जैव विविधता के प्रकार ( Types of biodiversity )

  1. अनुवांशिक जैव- विविधता एक ही प्रजाति में पाई जाने वाली जीन संबंधी विविधता है।
  2. प्रजातीय जैव विविधता- विभिन्न जातियों के मध्य पाई जाने वाली विविधता हैं।
  3. पारिस्थितिकी जैव विविधता

 विषुवत रेखीय वर्षा वन को जैव विविधता का हॉटस्पॉट कहा जाता है। क्योंकि यह विश्व का सर्वाधिक जैव विविधता वाला पारिस्थितिक तंत्र है सर्वाधिक जैव विविधता भूमध्यरेखीय प्रदेश में और विषुवत रेखीय सदाबहार वनों में पाई जाती है तथा ध्रुवों पर जैव विविधता कम पाई जाती है

पारिस्थितिक तंत्र जैव विविधता यह एक क्षेत्र की विविधता या पारितंत्र के आधार पर पाई जाने वाली विविधता है। जैव विविधता की समृद्धि पारितंत्र की स्थिरता तथा संतुलन को निर्धारित करते हैं।

भारत में जैव विविधता के हॉटस्पॉट ( Biodiversity hotspots in India )

ऐसा क्षेत्र जहां पर बहुत अधिक जैव विविधता होती है वहां पर विलुप्ति की कगार पर पहुंचने वाले दुर्लभ प्रजातियों की अधिकता होती है बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट कहलाते हैं  इसकी अवधारणा सर्वप्रथम 1981 में नॉर्मन न्युमर्स ने प्रस्तुत की थी विश्व में कुल 25 हॉट स्पॉट क्षेत्र हैं  भारत में दो –

  • पूर्वी हिमालय तथा
  • पश्चिमी घाट
  1. हिमालय क्षेत्र भारत के उत्तर पूर्वी भाग, दक्षिण-मध्य एवं पूर्वी नेपाल एवं भूटान के क्षेत्रों में फैला हुआ है।
  2. पश्चिमी घाट एवं श्रीलंका क्षेत्र दक्षिणी-पश्चिमी भारत एवं श्रीलंका के दक्षिणी पश्चिमी के उच्च भूमि तक….
  3. इंडो बर्मा हॉटस्पॉट भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र असम एवं अंडमान द्वीप समूह
  • भारत का सबसे बड़ा हॉट स्पॉट- इण्डो बर्षा सीमा
  • भारत का सबसे छोटा हॉटस्पॉट- पश्चिमी घाट
  • सर्वाधिक मानव जनसंख्या घनत्व – पश्चिमी घाट में

 समुद्री संवेदनशील क्षेत्र 

  • वर्तमान में कुल – 50 हाॅटस्पाॅट हैं।
  • भारत में दो- लक्षद्वीप, अंडमान निकोबार दीप समूह समुद्री संवेदनशील क्षेत्र हॉटस्पॉट में हैं।
  • निम्न अक्षांशों में उच्च अक्षांशों से ज्यादा जैव विविधता पाई जाती है।

राजस्थान में जैव विविधता राजस्थान जैव विविधता की दृष्टि से एक समृद्ध प्रांत है  इसे 4 पारिस्थितिकी तंत्रो में बांटा है

  1. मरू पारिस्थितिकी तंत्र
  2. अरावली पारिस्थितिकी तंत्र
  3. पूर्वी मैदानी पारिस्थितिकी तंत्र
  4. दक्षिणी-पूर्वी पारिस्थितिकी तंत्र

राज्य में जैव विविधता संरक्षण

  1. राष्ट्रीय उद्यान 3
  2. कंजर्वेशन रिजर्व 10
  3. वन्य जीव अभ्यारण 26
  4. आखेट निषिद्ध क्षेत्र 33

जैव विविधता संरक्षण की प्रयास

  • राजस्थान जैव विविधता अधिनियम 2010
  • राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड 14 सितंबर 2010

जैव विविधता विरासत स्थल

  1. आकल वुड फॉसिल पार्क जैसलमेर
  2. केवड़ा की नाल उदयपुर
  3. रामकुंड उदयपुर
  4. नाग पहाड़ अजमेर
  5. छापोली मनसा माता झुंझुनू

प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय सवाई माधोपुर के रामसिंहपुरा गांव में है उदयपुर में गम घर को जैव विविधता पार्क बनाया गया है

अत्यधिक जैव विविधता वाले क्षेत्र ( Highly Biodiversity Areas )

1⃣. उष्णकटिबंधीय वर्षा वन

उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों वाले क्षेत्रों में सर्वाधिक जैव विविधता पाई जाती हैं। संसार की 50% प्रजातियां निवास करती हैं इस क्षेत्र को जैव विविधता का भंडार कहा जाता है। दक्षिणी अमेरिका के अमेज़न उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की जैव विविधता विश्व में सर्वाधिक है । विशालता के कारण इसे पृथ्वी का फेफड़ा भी कहा जाता है। यहां पर ज्यादा सौर ऊर्जा उपलब्ध होती हैं। कम मौसमी परिवर्तन होता है। मानव का हस्तक्षेप न्यूनतम होता है।

2⃣. प्रवाल भित्तियां- जीवों के लिए आदर्श पारितंत्र प्रदान करती हैं। इन्हें समुद्री वर्षा वन कहा जाता है। विश्व में सबसे बड़ी प्रवाल भित्ति आस्ट्रेलिया में ग्रेट बैरियर रीफ है।

3⃣ आर्द्रभूमियां ( मैग्रोव वन ) – जलमग्न रहकर लवणीय पर्यावरण में अपना पोषण एवं संवर्धन करते हैं। सर्वाधिक जैव विविधता भूमध्य रेखीय प्रदेशों में और न्यूनतम जैव विविधता ध्रुवों के निकट है सर्वाधिक जैव विविधता वाला महाद्वीप अफ्रीका है 

जैव विविधता कमी के कारण ( Reason of lack of biodiversity )

प्राकृतिक कारण ( Natural reason )

  • ज्वालामुखी उद्गार
  • जलवायु परिवर्तन
  • सूखा एवं अकाल
  • पृथ्वी उल्का पिंड की टक्कर

मानव जनित कारण ( Human reason )

  • प्राकृतिक आवासों का विनाश
  • आवासों का विखंडन
  • वन्यजीवों का अवैध शिकार
  • झूम खेती
  • औद्योगीकरण
  • निर्वनीकरण

आवास विनाश जैव विविधता का मुख्य कारण है। विदेशी जातियों के प्रवेश से जैव विविधता का क्षय होता है। यह स्थानिक प्रजातियों को नष्ट कर देते हैं। जैसे-अमेरिका के गेहूँ के साथ आयातित गाजर घास,  मेक्सिको से लाया गया लैंटाना कमारा

कीटनाशक और ग्लोबल वार्मिंग भी जैव विविधता नष्ट होने का कारण है। भारत का सबसे बड़ा वानस्पतिक उद्यान श्री वेंकटेश्वर तिरुपुर  है।

प्राकृतिक संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ  ( International Union for Conservation of Nature – IUCN )

  • स्थापना – 5 अक्टूबर 1949
  • मुख्यालय-ग्लाण्ट(स्विट्जरलैंड)
  • विश्व का सबसे पुराना एवं सबसे बड़ा वैश्विक नेटवर्क है।
  • सरकारी और गैर सरकारी दोनों संगठनों के सदस्य होते हैं।
  • इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा का पर्यवेक्षक दर्जा प्राप्त है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र संघ का अंग नहीं है।

मुख्य कार्य- वन विश्व वन्यजीव कोष(WWF) के कार्यों के साथ-साथ समन्वय स्थापित कर वैज्ञानिक रूप से संरक्षण तकनीकी को बढ़ावा देता है। अन्य चार क्षेत्रों पर कार्य

  1. जलवायु परिवर्तन
  2. संपोषणीय ऊर्जा
  3. आजीविका
  4. हरित अर्थव्यवस्था

रेड बुक डाटा ( Red book data )

विश्व प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधन संरक्षण संस्थान आईयूसीएन स्थापना 1948 में हुई  IUCN द्वारा 1963 से जारी किया गया है  विलुप्त,असुरक्षित एवं दुर्लभ जीव तथा पादपों से संबंधित पुस्तक है। इस संस्था में 1972 में रेड डाटा बुक का प्रकाशन किया रेड डाटा बुक में जातियों उनके आवास तथा वर्तमान में उनकी संख्या को सूचीबद्ध किया है इसमें क्रांतिक रूप से संकटग्रस्त जीवों को गुलाबी पृष्ठ पर तथा पर्याप्त संख्या में वृद्धि होने पर उन्हें हरे पृष्ठ पर स्थानांतरित किया जाता है।

आईयूसीएन ने विश्व की जीव प्रजातियों को संरक्षण की दृष्टि से 5 वर्गों में बांटा है

  1. विलुप्त प्रजाति
  2. संकटग्रस्त प्रजाति
  3. अतिसंवेदनशील प्रजाति
  4. दुर्लभ प्रजाति
  5. अपर्याप्त रूप से ज्ञात प्रजाति

आईयूसीएन वर्ष 1973 में एक सम्मेलन c i t e s आयोजित किया गया जिसमें अनेक देशों ने संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर नियंत्रण लगाने की सहमति दी

1992 में ब्राजील शहर की रियो डी जेनेरियो में हुए पृथ्वी सम्मेलन के दौरान जैव विविधता संधि अस्तित्व में आई केंद्र सरकार द्वारा जैव विविधता अधिनियम 2002 को फरवरी 2003 में पारित किया गया

भारत में पर्यावरण वन जल व जैव विविधता कानूनों को एक ही दायरे में लाने के लिए 2 जून 2010 को राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल का गठन किया गया इसका मुख्यालय भोपाल में है

कुछ प्रमुख विलुप्त प्रजातियां ( Extinct Species )

  • मैमथ- लाल पांडा
  • डोडो-एशियाई चीता
  • डायनासोर – गुलाबी मस्तक वाली बतख

गंगा डाल्फिन ( Ganga dolphin )

वैज्ञानिक नाम प्लैटीनिस्टा गगेंटिका है यह मछली नहीं अपितु स्तनधारी जीव है। 5 अक्टूबर 2009 को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया। गंगा का टाइगर भी कहा जाता है। घ्राण शक्ति अत्यंत तीव्र होने के कारण इसे सन ऑफ रीवर कहा जाता है। देश का पहला डॉल्फिन रिजर्व हुगली मे स्थापित किया गया था डाल्फिन अनुसंधान केन्द्र पटना में है

नदी सुरक्षा के लिए बायो मॉनिटरिंग ट्रल की संज्ञा। बिहार सरकार ने 5 अक्टूबर को नेशनल डॉलफिन डे मनाने का निर्णय किया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2007 को डॉल्फिन वर्ष घोषित किया था।

गिद्ध ( Vulture )

पर्यावरण प्रकृति का सफाई कर्मी। गिद्ध प्रजनन केंद्र-पिंजौर (हरियाणा) है

शीत ऋतु में प्रवास करने वाले पक्षी 

  • साइबेरियन क्रेन पक्षी
  • यूरेशियन कबूतर
  • ग्रेटर फ्लेमिंगो

ग्रीष्म ऋतु में प्रवास करने वाले?

  • पक्षी एशियाई कोयल
  • नीली पूँछ वाली मक्खी भक्षी

जैव विविधता संरक्षण ( biodiversity conservation ) 

1. स्वस्थाने संरक्षण

इसके अंतर्गत पौधों एवं जीव जंतुओं को उनके प्रगति आवास में अनुकूल दशाएं उपलब्ध कराके संरक्षण प्रदान किया जाता है।

  1. जैव मण्डल रिजर्व
  2. वन्यजीव अभयारण्य
  3. राष्ट्रीय उद्यान
  4. सरंक्षण रिजर्व

जैसे- राष्ट्रीय उद्यान पक्षी विहार, वन्य जीव अभ्यारण, बायोस्फीयर रिजर्व

2. बहिस्थाने संरक्षण 

इसके अंतर्गत संकटग्रस्त जातियों को उनके मौलिक प्राकृतिक आवास से हटाकर अन्यत्र अनुकूल दशाओं वाले कृत्रिम आवास में संरक्षण प्रदान किया जाता है।

  • बोटैनिकल उद्यान
  • टिश्यू कल्चर लैब
  • एक्वेरियम
  • बीज बैंक
  • चिड़ियाघर
  • जीन बैंक
  • प्राणी उद्यान
  • एक्वेरियम
  • वन्यजीव सफारी पार्क

 वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 ( Wildlife Conservation Act of 1972 )

 वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अधीन तीन प्रकार के जैव भौगोलिक क्षेत्रों का गठन किया गया।

1. राष्ट्रीय उद्यान ( National Park )

इनका सीमांकन किसी पारितंत्र के विशेष पशु पक्षियों तथा पेड़ पौधों को संरक्षण देने के लिए किया जाता है।

  • सीमाओं का निर्धारण- विधायिका द्वारा।
  • पर्यटन की अनुमति होती हैं,लेकिन आखेट की नहीं ।
  • स्थापना- वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत
  • उद्देश्य- वन्य जीवों को मानव हस्तक्षेप से मुक्त सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना।

2. वन्य जीव अभ्यारण ( Wildlife sanctuary )

  • सीमांकन- किसी विशेष पशु पक्षी को संरक्षण देने के लिए।
  • इनकी सीमाओं में परिवर्तन एवं संशोधन नहीं किया जा सकता।
  • अनुमति के साथ मानव सीमित रूप से हस्तक्षेप कर सकता है। जैसे-1..लकड़ी काट सकता है।, 2..सीमित पर्यटन की अनुमति होती है। , 3..शोध कार्य की सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती है।

3. जीवमंडल आगार ( Biosphere depot )

  • सीमांकन-अंतरराष्ट्रीय नियमों के द्वारा
  • सीमाओं का निर्धारण- विधि प्रक्रियाओं द्वारा
  • एक से अधिक बार पारितंत्र होते हैं।
  • जैविक ,सांस्कृतिक, प्राकृतिक स्थल ,आकृतियों और संरक्षण।
  • बायोस्फीयर रिजर्व की संकल्पना का उदभव यूनेस्को के 1971 के मनुष्य जीव मंडल कार्यक्रम के अंतर्गत हुआ।
  • भारत में 1986 में प्रारंभ हुआ, भारत का पहला बायोस्फीयर नीलगिरी (1986)
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा- कच्छ

यूनेस्को की सूची में शामिल – कुल 10 

1..नीलगिरी
2..मन्नार की खाड़ी
3..सुंदरवन
4..नंदादेवी
5..नोकरेक
6..पंचमढ़ी
7.. सिमलीपाल
8..अमरकंटक
9..ग्रेट निकोबार
10..अगस्थमाला

जैव-विविधता सम्बन्धी सम्मेलन ( Biodiversity conference )

  1. विश्व विरासत संधि — 1972
  2. रामसर समझौता -1975
  3. जैव-विविधता संधि – 1992
  4. कार्टाजेना प्रोटोकॉल – 2000
  5. नागोया प्रोटोकॉल – 2010 कोप-11 – 2012
  6. कोप-12 – 2014

Biodiversity Question-

1. जैव विविधता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर- जीवधारियों की विभिन्न प्रजातियों तथा उनकी विभिन्नताओं को जैव विविधता कहा जाता है।

2. जैव विविधता के कौन—कौन से स्तर है?
उत्तर- जैव विविधता को अध्ययन की दृष्टि से तीन स्तरों में बांटा जा सकता है। 1) आनुवांशिक विविधता। 2) प्रजातीय विविधता। 
3) पारितंत्रीय विविधता।

3. जैव विविधता ह्रास मुख्यतः किन कारणों से हो रहा है?
उत्तर- वन कटाव, जनसंख्या वृद्धि, जल प्रदूषण, वन्य जीवों का अवैध शिकार तथा मानव एवं वनप्राणी संघर्ष आदि जैव विविधता ह्रास के प्रमुख कारण हैं।

4. जैव विविधता का संरक्षण कैसे किया जा सकता है?
उत्तर- संकटग्रस्त प्रजातियों का संग्रहण करके, शिकार पर प्रतिबंध को प्रभावशाली ढंग से लागू करके, सुरक्षित वन क्षेत्र विकसित करके तथा वनों का विनाश रोककर व खनन कार्य पर रोक लगाकर जैव विविधता का संरक्षण किया जा सकता है

Biodiversity important facts ( महत्वपूर्ण तथ्य )

  • अधिक जैव विविधता वाला पारितंत्र अपनी स्थिरता को कम विविधता वाले पारितंत्र की तुलना में आसानी से कायम रख सकता है।
  • जीन बैंक से जैव विविधता को भारी क्षति पहुंचती है।
  • जैव विविधता विरासत स्थल में अधिसूचित होने वाला भारत का प्रथम जलाशय- तेलगाना (अमीनपुर झील)
  • विश्व का सबसे विशाल बरगद- शिवपुर वानस्पितिक उद्यान(कोलकाता)
  • सबसे बड़ा पुष्प- रेफ्लेशिया
  • सबसे छोटा पुष्प- वोल्फिया
  • सबसे लंबा सबसे वृक्ष- यूकोलिप्टस
  • सबसे विशाल वृक्ष- शिकोया
  • जलकुंभी को जंगल का आतंक कहा जाता है।
  • सबसे बड़ा कपि- गोरिल्ला
  • विलुप्त पक्षी डोडो का निवास स्थल- मारीशस
  • देश का पहला तितली पार्क- बेंगलुरू
  • राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजना – 2008 में।
  • इंडियन बोर्ड आफॅ वाइल्ड लाइफ की स्थापना- 1952
  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना किस अधिनियम के अंतर्गत हुई – जैविक विविधता अधिनियम 2002
  • यूनेस्को के मानव तथा जैवमंडल कार्यक्रम कब प्रारंभ किया गया- 1971
  • सामाजिक वानिकी शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कब किया गया –1976 (भारत सरकार के राष्ट्रीय कृषि आयोग द्वारा )
  • पारितंत्र की बुनियादी प्रजातियां किसे कहा जाता है –फाइकस प्रजातियों को,जिनमें पीपल बरगद आदि शामिल है.
  • खाद्य परिरक्षण में किस फल का प्रयोग किया जाता है – इमली 
  • फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट (ब्यूटीया मोनोस्पमर्मा ) – टिशू (पलाश)
  • किस फल को भारत का जैतून कहा जाता है – आमला 
  • ओलिव रिडले कछुए द्वारा उड़ीसा के तट पर बड़ी संख्या में प्रवास को कहते हैं – अरिबड़ा 
  • हंगुल दुर्लभ कश्मीरी हिरण को कहां संरक्षित किया जा रहा है – डाची ग्राम वन्य जीव अभ्यारण (जेएंडके)
  • द डाइवर्सिटी ऑफ लाइफ पुस्तक के लेखक – एडवर्ड ओ विल्सन 
  • संसार के किस देश के वनों में सर्वाधिक जैवविविधता पायी जाती – ब्राजील
  • टुमारोज बायो डायवर्सिटी पुस्तक के लेखक – डा. वन्दना शर्मा
  • सर्वाधिक जैव विविध्ता – शांत घाटी (केरल )
  • कार्टाजेना प्रोटोकाल – जैव सुरक्षा समझौता से

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड ( Great Indian Bustard )

  • सोहनलाल चिड़िया/शर्मीली पक्षी
  • राजस्थान का राज्य पक्षी
  • संरक्षण के लिए- गोडावण संरक्षण प्रोजेक्ट

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No of Questions-33

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

दिनेश मीना झालरा टोंक, राजवीर प्रजापत तारानगर चुरू, चित्रकूट त्रिपाठी , P K GURU, चंद्रप्रकाश सोनी, प्रीति मिश्रा अहमदाबाद, P K Nagauri Nagaur, सुभाष जोशी

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