जैव-प्रौधोगिकी एवं आनुवांशिकीय-अभियांत्रिकी ( Biotechnology and Genetic Engineering )

जीवाणुओ छोटे जंतुओं पादपों की सहायता से वस्तुओं के उत्पादन की प्रक्रिया जैव प्रौद्योगिकी अथवा जैव तकनीक कहलाती है जैव प्रौद्योगिकी के दो रूप है।

1⃣ अनुवांशिक जैव प्रौद्योगिकी
2⃣ गैर अनुवांशिक प्रोधोगिकी

इसके अंतगत मुख्य रूप से कोशिका एव उत्तक रोग,  प्रतिक्षण, एंजाइम विज्ञान, जैव अभियांत्रिक,  परखनली शिशु अंग’,  प्रत्यारोपण क्लोरीन विधाय आती है। भारत परमाणु अनुसन्धान केंद BARC द्वारा गामा किरणों का उपयोग करके विकसित कीए गए उच्च कोटि के लेग्मिन्स पौधे विकसित किए। कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण जिन अभियांत्रिक द्वारा नही करवाया जा सकता। स्थान परिवर्ती SNA खंडों कुदरती जिन की खोज बोरब्रा मैकलीन टांक ने की थी।

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जैव प्रौद्योगिकी ( Biotechnology )

विज्ञान के नियमों तथा तकनीकों का उपयोग करके सजीव पदार्थों से मानव उपयोगी पदार्थों तथा सेवाओं का सृजन जैव प्रौद्योगिकी के अंतर्गत आता है। यह जीव विज्ञान तथा अभियांत्रिक का मिला जुला रूप है। मानव प्राचीन काल से ही किण्वन के माध्यम से शराब, पनीर तथा दही आदि का उत्पादन करके जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग करता आ रहा है।

आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की शुरुआत 1950 से डीएनए तथा जीन अभियांत्रिकी पर रिसर्च के साथ हुई।। भारत में डॉक्टर हरगोविंद खुराना ने 1973 में जीन संश्लेषण का सफल प्रयोग करके भारत में इस क्षेत्र की संभावनाएं पैदा की। वर्तमान में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग कृषि, ऊर्जा, उद्योग तथा पर्यावरण संरक्षण क्षेत्रों में भरपूर किया जा रहा है।

जैव प्रोधोगिकी भारत में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रक के विकास के लिए शीर्ष प्राधिकरण है। इसकी स्‍थापना देश में विभिन्‍न जैवप्रौद्योगिकीय कार्यक्रमों और क्रियाकलापों की योजना बनाने संवर्धन करने और समन्‍वयन करने के लिए की गई है।

जैव प्रौद्योगिकी या जैवतकनीकी तकनीकी का वो विषय है जो अभियान्त्रिकी और तकनीकी के डाटाऔर तरीकों को जीवों और जीवन तंत्रो से सम्बन्धित अध्ययन और समस्या के समाधान के लिये उपयोग करता है। जिन विश्वविद्यालयों में ये अलग निकाय नहीं होता, वहाँ इसे रासायनिक अभियान्त्रिकी, रसायन शास्त्र या जीव विज्ञान निकाय में रख दिया जाता है।

जैव प्रौद्योगिकी लागू जीव विज्ञान के एक क्षेत्र है कि इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और अन्य bio-products आवश्यकता क्षेत्रों में रहने वाले जीवों और bio processes का इस्तेमाल शामिल है। जैव प्रौद्योगिकी भी निर्माण प्रयोजन के लिए इन उत्पादों का इस्तेमाल करता है।

इसी प्रकार के शब्दों का प्रयोग आधुनिक आनुवंशिक साथ ही इंजीनियरिंग सेल ऊतक और संस्कृति प्रौद्योगिकी भी शामिल है।  अवधारणा जीवित मानव उद्देश्यों के अनुसार जीवों को संशोधित करने के लिए प्रक्रियाओं और (इतिहास) की एक व्यापक श्रेणी शामिल हैं – पशुओं के पौधों की, पालतू खेती के लिए वापस जा और इन के लिए प्रोग्राम है कि कृत्रिम चयन और संकरण रोजगार प्रजनन के माध्यम से “सुधार”. जैव प्रौद्योगिकी की तुलना करके, bio-engineering आमतौर पर जोर देने के साथ एक से संबंधित क्षेत्र के रूप में है के उच्च प्रणाली दृष्टिकोण (बदलकर या जरूरी नहीं कि जैविक सामग्री सीधे का उपयोग करके) के साथ interfacing और जीवित चीजों के बारे में अधिक उपयोग करने के लिए सोचा।

जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन जैव प्रौद्योगिकी के रूप में परिभाषित करता है: “कोई भी प्रौद्योगिकीय अनुप्रयोग है कि जैविक प्रणालियों, रहने वाले जीवों, या उसके डेरिवेटिव का उपयोग करता है, बनाने के लिए या विशिष्ट प्रयोग के लिए उत्पाद या प्रक्रियाओं को संशोधित.” जैव प्रौद्योगिकी अन्य शब्द “जीवन विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के लिए व्यावसायिक उत्पादों को विकसित करने का आवेदन” में है।

जैव प्रौद्योगिकी शुद्ध जैविक विज्ञान (आनुवांशिकी, सूक्ष्म जीव विज्ञान, पशु सेल संस्कृति, आण्विक जीव विज्ञान, जैव रसायन, भ्रूण विज्ञान, कोशिका जीव विज्ञान) और कई मामलों में मिलती भी है। जीव विज्ञान (रसायन इंजीनियरी, बायोप्रोसैस इंजीनियरिंग के क्षेत्र के बाहर से ज्ञान और तरीकों पर निर्भर है, सूचना प्रौद्योगिकी bio-robotics).

इसके विपरीत, आधुनिक जीव विज्ञान (सहित आणविक पारिस्थितिकी के रूप में भी अवधारणाओं) अच्छी तरह जुड़ा हुआ है और जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से विकसित विधियों पर निर्भर है।

जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग ( Use of Biotechnology )

चिकित्सा तथा स्वास्थ्य ( Medical and health)

इसकी सहायता से सस्ती औषधियों के निर्माण, प्रतिरोधी टीकों, असाध्य बीमारियों के इलाज, उन्नत किस्मों के प्रजनन, अंगों के पुनर्विकास के लिए स्टेम सेल का प्रयोग आदि क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी ने उल्लेखनीय कार्य किया है। कैंसर तथा एड्स जैसी बीमारियों का इलाज भी जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से करने की कोशिश की जा रही है।

जीन चिकित्सा द्वारा पार्किंसन जैसे वशांनुगत रोगों इलाज किया जा सकता है। जीन अंतरण के द्वारा इंसुलिन का उत्पादन मधुमेह के रोगियों के लिए वरदान साबित हुआ है। इसे लाल जैव प्रौद्योगिकी कहा जाता है।

पर्यावरण संरक्षण (Environment protection)

बायोरेमेडिएशन वह तकनीक है,जिसमें सूक्ष्मजीवों तथा एंजाइमों का प्रयोग अपशिष्ट प्रबंधन में किया जाता है।आॅयल जैपर इसका एक उदाहरण है,जो तेल रिसाव को नियंत्रण करने में काम में आता हैं।

कृषि (Agriculture)

वर्तमान में बढ़ती हुई जनसंख्या तथा संसाधनों की कमी को देखते हुए कृषि में जैव प्रौद्योगिकी का महत्व बढ़ता जा रहा है। ट्रांसजेनिक फसलों का प्रयोग करके कम लागत में उच्च गुणवत्ता युक्त खाद्य पदार्थों का उत्पादन किया जा सकता है। जो तापरोधकता,कटी सहिष्णुता, शुष्कतारोधी आदि गुणों से भरपूर हो

जीन अभियांत्रिकी से वांछित पोषक तत्वों को खाद्य पदार्थों से प्राप्त किया जा सकता है। जो विकासशील देशों में गरीबी तथा कुपोषण से लड़ने में सहायक हो सकते हैं। बायोफोर्टिफिकेशन का उपयोग करके फसल में वृद्धि के दौरान ही उसके पोषक तत्वों में सुधार किया जा सकता है।रोग प्रतिरोधी तथा दुधारू पशुओं की नस्लों के प्रजनन में भी जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग हो रहा है। इसे हरित जैव प्रौद्योगिकी कहा जाता है।

औधोगिक क्षेत्र (Industrial area)

उद्योग में आवश्यक विभिन्न पदार्थों का उत्पादन तथा ईंधन जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से संभव हो सका हैं। विभिन्न अम्लों,प्रोटीन,विटामिन, स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक्स का वृहद् स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। इसे व्हाइट बायो टेक्नोलॉजी कहा जाता है। विभिन्न जीवाणुओं से उत्पन्न जैव ईंधन जिसमें शर्करा से उत्पादित बायो एथेनाॅल,सरसों आदि के ट्रांसऐस्ट्रिफिकेशन द्वारा निर्मित बायोडीजल में भी जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग होता है।

भारत में जैव प्रौद्योगिकी का क्षेत्र ( Area of ​​Biotechnology in India )

विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन जैव प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना 1986 में की गई थी। जो कि इसकी नोडल एजेंसी हैं। भारत में वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी उद्योग का 2% हिस्सा है। तथा हम शीर्ष 12 देशों में से एक है। भारत में औषधि के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी का सर्वाधिक विकास हुआ है। भारत में नियामक कानूनों के अभाव में वैज्ञानिक जोखिम आकलन कार्य है। जनता में जागरूकता का अभाव तथा वित्तीय संसाधन की कमी से यह क्षेत्र जूझ रहा है।

जैव प्रौद्योगिकी नवाचार संगठन-  (BIO) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-2017

19-22 जून, 2017 के मध्य जैव प्रौद्योगिकी नवाचार संगठन (BIO) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-सैन डिएगो, अमेरिका में आयोजित किया गया बीआईओ का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जैव प्रौद्योगिकी उद्योग का सबसे बड़ा वैश्विक कार्यक्रम है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी जैव प्रौद्योगिकी नवाचार संगठन द्वारा की जाती है।

बीआईओ 1,100 जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों, अमेरिका और 30 से अधिक अन्य देशों में राज्य जैव प्रौद्योगिकी केंद्रों और संबंधित संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। बीआईओ के सदस्य नवाचार स्वास्थ्य सेवा, कृषि, औद्योगिक और पर्यावरण संबंधी जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों के अनुसंधान और विकास में लगे हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री वाई.एस. चौधरी के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल बीआईओ-2017 में भाग लिया।

आनुवांशिकीय अभियांत्रिकी (Genetic engineering)

किसी जीव के (genome, जीनोम) में हस्तक्षेप कर के उसे परिवर्तित करने की तकनीकों व प्रणालियों तथा उनमें विकास व अध्ययन की चेष्टा का सामूहिक नाम है।  मानव प्राचीन काल से ही पौधों व जीवों की प्रजनन क्रियाओं में हस्तक्षेप करके उनमें नस्लों को विकसित करता आ रहा है (जिसमें लम्बा समय लगता है) लेकिन इसके विपरीत जनुकीय अभियांत्रिकी में सीधा आण्विक स्तर पर रासायनिक और अन्य जैवप्रौद्योगिक विधियों से ही जीवों का जीनोम बदला जाता है।

प्रयोग आनुवांशिक अभियांत्रिकी द्वारा प्रकृति में न पाये जाने वाले कई जीव-लक्षणों को बनाया जा चुका है, मसलन कुछ जेलिमछली अंधेरे में स्वयं प्रजवलित होती हैं और इनसे डी एन ए लेकर खरगोश शिशुओं का जीनोम बदलने से रात्री में दमकने वाले ख़रगोश बनाये गये हैं।  इन तकनीकों से कई आनुवंशिक रोगों का उपचार हो सकने की आशा है और यह एक नई औद्योगिक क्रान्ति का अग्रदूत समझा जाने लगा है, जिस कारणवश कई देशों की सरकारें इसे विकसित करने के लिये निवेश कर रही हैं।

18 जनवरी, 2017 को औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (DIPP) द्वारा जैवप्रौद्योगिकी विभाग की मेक इन इंडिया उपलब्धियां रिपोर्ट जारी की गई। भारतीय जैवप्रौद्योगिकी क्षेत्र को 2025 तक 100 बिलयन डॉलर का बनाने का लक्ष्य है। वर्तमान में भारतीय जैव प्रौद्योगिकी उद्योग का वैश्विक बाजार में हिस्सा 2% है।

22 अप्रैल, 2016 को स्वदेशी तकनीक से विकसित भारत के पहले सेल्यूलोजिक एथेनॉल प्रौद्योगिकी संयंत्र का उद्घाटन किया गया। 9 मार्च, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहला स्वदेश में विकसित एवं निर्मित रोटावायरस वैक्सीन ‘रोटावैक (Rotavac) का शुभारंभ किया।

र्मास्यूटिकल्स की ग्रीन फील्ड परियोजनाओं एवं ब्राउनफील्ड परियोजनाओं हेतु स्वचालित मार्ग से क्रमशः 100% एवं 74% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है। 30 दिसंबर, 2015 को ‘राष्ट्रीय जैवप्रौद्योगिकी विकास रणनीति 2015-2020’ का शुभारंभ किया गया।

  • आंध्र प्रदेश द्वारा जैव प्रौद्योगिकी नीति 2015-2020,
  • गुजरात द्वारा जैवप्रौद्योगिकी नीति 2016-2021,
  • राजस्थान द्वारा जैवप्रौद्योगिकी नीति 2015
  • तेलंगाना द्वारा लाइफ साइंसेज पॉलिसी 2015-2020 का शुभारंभ किया गया।

सरकार का लक्ष्य आगामी तीन वर्ष में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 2000 स्टार्ट-अप की स्थापना का लक्ष्य है।

राष्ट्रीय उधानिकी अनुसंधान संस्थान (National Institute of Urology Research)

  1. अखिल भारतीय समन्वित फूल उत्पादन विकास योजना,- नई दिल्ली
  2. केंद्रीय सुगंधित एवं औषधीय पौध संस्थान,-लखनऊ
  3. केंद्रीय कन्द फसल अनुसंधान संस्थान,- तिरूवनंतपुरम,केरल
  4. सब्जी अनुसंधान निदेशालय- वाराणसी, उतरप्रदेश
  5. मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण(राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान)-  हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय,हिसार
  6. भारतीय उधानिकी अनुसंधान संस्थान-बैगलोर
  7. भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान- कालीकट(केरल)
  8. राष्ट्रीय मशरुम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र- चम्बाघाट, सोलन (हिमाचल)
  9. नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट- करनाल, हरियाणा

 

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1. जेनेटिकली मोडीफाइड (आनुवंशिक रूपांतरित) फसलों के संबंध में कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं? 1. ये फसलें सूखे, ठंड, लवणता एवं ताप के प्रति अधिक सहिष्णु होती हैं। 2. इन फसलों की खनिज उपयोग क्षमता अधिक होती है। 3. इन फसलों की कीटों के प्रति प्रतिरोधी क्षमता अधिक होती है। कूटः

Correct! Wrong!

व्याख्याः ऐसे पौधे, जीवाणु, कवक व जंतु जिनके जीन, तकनीक की मदद से परिवर्तित किये जा चुके हैं, आनुवंशिक रूपांतरित जीव (जेनेटिकली मोडीफाइड आर्गेनाइजेशन- जीएमओ) कहलाते हैं। जीएमओ का व्यवहार स्थानांतरित जीन की प्रकृति, परपोषी पौधे, जंतुओं या जीवाणुओं की प्रकृति व खाद्य जाल पर निर्भर करता है। जीएम पौधे का उपयोग कई प्रकार से लाभदायक है। आनुवंशिक रूपांतरण द्वारा- अजैव प्रतिबलों (ठंडा, सूखा, लवण, ताप) के प्रति अधिक सहिष्णु फसलों का निर्माण। रासायनिक पीड़कनाशकों पर कम निर्भरता करना (पीड़कनाशी-प्रतिरोधी फसल)। कटाई पश्चात् होने वाले नुकसानों को कम करने में सहायक। पौधे द्वारा खनिज उपयोग क्षमता में वृद्धि (यह शीघ्र मृदा उर्वरता समापन को रोकता है)। खाद्य पदार्थों के पोषणिक स्तर में वृद्धि उदाहरणार्थ-विटामिन ए से समृद्ध धान। उपरोक्त उपयोगों के साथ-साथ जीएम का उपयोग तदनुकुल पौधे के निर्माण में सहायक है, जिनसे वैकल्पिक संसाधनों के रूप में उद्योगों में वसा, ईंधन व भेषजीय पदार्थों की आपूर्ति की जाती है।

2. कपास के कीट-रोधी पौधे आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा एक जीन को निविष्ट कर निर्मित किये गए हैं, जो लिया गया है-

Correct! Wrong!

व्याख्याः आनुवंशिक इंजीनियरिंग का प्रयोग कर बीटी (Bt) जो एक जीवाणु है, जिसे बैसिलस थुरीनजिएंसीस (संक्षेप में बीटी) कहते हैं से कपास के कीट-रोधी पौधे तैयार किये जाते हैं। बीटी जीव विष जीन जीवाणु से क्लोनिकृत होकर पौधों में अभिव्यक्त होकर कीटों (पीड़कों) के प्रति प्रतिरोधकता पैदा करता है, जिससे कीटनाशकों के उपयोग की आवश्यकता नहीं रह जाती है।

3. गोल्डन चावल एक प्रचुरतम स्रोत है-

Correct! Wrong!

व्याख्याः जेनेटिक इंजीनियरिंग का प्रयोग कर खाद्य पदार्थों के पोषण स्तर में वृद्धि की जाती है। इसका सर्वोत्तम उदाहरण है गोल्डन राइस, जिसमें विटामिन A प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।

4. बीटी (Bt) के विष (toxin) रवे (Crystal) कुछ जीवाणुओं द्वारा बनाए जाते हैं, लेकिन जीवाणु स्वयं को नहीं मारते हैं, क्योंकि-

Correct! Wrong!

व्याख्याः बीटी (बैसीलस थूरीनजिएंसीस) की कुछ नस्लें ऐसे प्रोटीन का निर्माण करती हैं जो विशिष्ट कीटों जैसे कि लीथीडोप्टेशन (तंबाकू की कलिका कीड़ा, सैनिक कीड़ा),कोलियोप्टेरान (भृंग) व डीप्टेरॉन (मक्खी, मच्छर) को मारने में सहायक है। बी. थूरीनजिएंसीस अपनी वृद्धि की विशेष अवस्था में कुछ प्रोटीन रवों का निर्माण करती है। इन रवों में विषाक्त कीटनाशक प्रोटीन होता है। वास्तव में बीटी जीव-विष प्रोटीन, प्राक्जीव में निष्क्रिय रूप में होता है, ज्योंहि कीट इस निष्क्रिय जीव विष को खाता है, इसके रवे आँत में क्षारीय पी एच के कारण घुलनशील होकर सक्रिय रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। सक्रिय जीव विष मध्य आँत के उपकलीय कोशिकाओं की सतह से बँधकर उसमें छिद्रों का निर्माण करते हैं, जिस कारण से कोशिकाएँ फूलकर फट जाती हैं और परिणामस्वरूप कीट की मृत्यु हो जाती है।

5. चिकित्सा के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग के संबंध नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः 1. इस प्रौद्योगिकी द्वारा विकसित औषधियों का शरीर पर अवांछित प्रतिरक्षात्मक (defensive) प्रभाव नहीं पड़ता है। 2. इस प्रौद्योगिकी के द्वारा मानव शरीर में उत्पन्न होने वाले सारे रोगों का उपचार संभव है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

व्याख्याः केवल पहला कथन सत्य है। जैव प्रौद्योगिकी ने स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में अत्यधिक प्रभाव डाला है, क्योंकि इसके द्वारा उत्पन्न सुरक्षित व अत्यधिक प्रभावी चिकित्सीय औषधियों का उत्पादन अधिक मात्रा में संभव है। पुनर्योगज चिकित्सीय औषधियों का अवांछित प्रतिरक्षात्मक (unwanted immunological) प्रभाव नहीं पड़ता है जबकि ऐसा देखा गया है कि उपरोक्त उत्पाद जो अमानवीय स्रोतों से विलगित किये गए हैं, वे अवांछित प्रतिरक्षात्मक प्रभाव डालते हैं।

6. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. मधुमेह रोग से पीड़ित व्यक्ति को इसके नियंत्रण के लिये इंसुलिन लेना पड़ता है। 2. मधुमेह रोग में उपयोग लाया जाने वाला इंसुलिन जानवरों व सुअरों को मारकर उनके अग्नाशय से प्राप्त किया जाता था। 3. वर्तमान में जैव प्रौद्योगिकी की सहायता से जीवाणुओं द्वारा इंसुलिन का निर्माण किया जाता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

व्याख्याः उपरोक्त तीनों कथन सत्य हैं। मधुमेह रोग से पीड़ित व्यक्ति को इसके नियंत्रण के लिये इंसुलिन लेना पड़ता है। मधुमेह रोग में उपयोग में लाया जाने वाला इंसुलिन जानवरों व सुअरों को मारकर उनके अग्नाशय से प्राप्त किया जाता था। वर्तमान में जैव प्रौद्योगिकी की सहायता से जीवाणुओं द्वारा इंसुलिन का निर्माण किया जाता है।

7. आनुवंशिक विकार के साथ पैदा हुए बच्चे के उपचार हेतु जीन चिकित्सा के अंतर्गत जीन को व्यक्ति के शरीर के किस भाग में प्रवेश कराया जाता है? 1. बोनमैरो 2. कोशिका 3. ऊतक 4. माइटोकांड्रिया नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः

Correct! Wrong!

व्याख्याः यदि कोई बच्चा आनुवंशिक रोग के साथ पैदा हुआ है तो इस रोग के उपचार हेतु जीन चिकित्सा ही एकमात्र उपाय है। जीन चिकित्सा में उन विधियों का सहयोग लेते हैं जिनके द्वारा किसी बच्चे या भ्रूण में चिह्नित किये गए जीन दोषों का सुधार किया जाता है। इसमें रोगों के उपचार हेतु जीनों को व्यक्ति की कोशिकाओं या उतकों में प्रवेश कराया जाता है। आनुवंशिक दोष वाली कोशिकाओं के उपचार हेतु सामान्य जीन को व्यक्ति या भ्रूण में स्थानांतरित करते हैं जो निष्क्रिय जीन की क्षतिपूर्ति कर उसके कार्यों को संपन्न करते हैं।

8. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन बायोपाइरेसी को परिभाषित करता है?

Correct! Wrong!

व्याख्याः मल्टीनेशनल कंपनियों व दूसरे संगठनों द्वारा किसी राष्ट्र या उससे संबंधित लोगों से बिना व्यवस्थित अनुमोदन व क्षतिपूरक भुगतान के जैव संसाधनों का उपयोग करना बायोपाइरेसी कहलाता है।

Q9_ इंजाज नाम है विश्व के प्रथम क्लोन।

Correct! Wrong!

Q10_ पहला सफल क्लोन जन्तु था।

Correct! Wrong!

Q11_ बी टी बैगन है।

Correct! Wrong!

Q12_ गोल्डेन धान में सर्वाधिक मात्रा होती हैं

Correct! Wrong!

13.राजस्थान मे नकद हस्तांतरण योजना कहां से प्रारम्भ की गई?

Correct! Wrong!

14. देश मे वाईमैक्स(wimax) तकनीकी ब्राडबैंड की शुरुआत की गई हैं

Correct! Wrong!

15.डाक ग्रामीण बीमा योजना की शुरुआत की गई-

Correct! Wrong!

16. भूकम्प की पूर्व सूचना देने वाले यंत्र 'एकोस्टिक रडार' राज्य में स्थापित किया गया है।

Correct! Wrong!

17. देश मे 'फाइबर टू दी होम सेवा' की शुरुआत की गई-

Correct! Wrong!

प्रश्न18.कोशिकीय एवं आण्विक जीव विज्ञान केंद्र स्थित है-?

Correct! Wrong!

प्रश्न 19. निफ् जीन का कार्य है-?

Correct! Wrong!

प्रश्न 20. जीवाणु Bt संशलेषण करते है-?

Correct! Wrong!

प्रश्न 21.जैव प्रौधोगिकी शब्द निम्न में से किस वैज्ञानिक ने दिया-?

Correct! Wrong!

प्रश्न 22.रॉसलिन संस्था,ऐडिनबर्ग के किस वैज्ञानिक ने भेड़ के प्रतिरूप "डॉली"को बनाने में सफलता प्राप्त की-?

Correct! Wrong!

23. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. पादप एवं जीवों के लिये लैंगिक जनन, अलैंगिक जनन से अधिक लाभकारी है। 2. पौधों एवं जंतुओं के जनन हेतु उपयोग में लाई जाने वाली संकरण विधि से केवल वांछित जीन का ही समावेश होता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

व्याख्याः केवल पहला कथन सत्य है। अलैंगिक जनन आनुवंशिक सूचनाओं को परिरक्षित रखता है, जबकि लैंगिक जनन द्वारा विभिन्नता व विशिष्ट आनुवंशिक व्यवस्था के संयोजन के प्रतिपादन का अवसर मिलता है जो जीव या आबादी हेतु लाभकारी हो सकता है। लैंगिक जनन से विभिन्नता उत्पन्न होती है। अतः अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन अधिक फायदेमंद होता है। दूसरा कथन असत्य है। परंपरागत संकरण की विधियाँ जो पौधों एवं जंतुओं के जनन में उपयोगी है, इनके द्वारा वांछित जीन के साथ-साथ अवांछित जीन का समावेश व गुणन हो जाता है। उपर्युक्त कमियों को दूर करने हेतु आनुवंशिक इंजीनियरिंग तकनीकों में जीन क्लोनिंग एवं जीन स्थानांतरण का उपयोग कर पुनर्योगज डीएनए (रीकॉम्बीनेंट डीएनए) का निर्माण किया जाता है।

24. पुनर्योगज डीएनए तकनीक (रिकॉम्बीनेंट डीएनए टेक्नोलॉजी) के अंतर्गत डीएनए को विभिन्न जगहों से काटने के लिये उपयोग किया जाता है-

Correct! Wrong!

व्याख्याः पुनर्योगज डीएनए तकनीक के अंतर्गत डीएनए को विशिष्ट जगहों से काटने के लिये आण्विक कैंची कहे जाने वाले ‘प्रतिबंधन एंजाइम’ (रिस्ट्रिक्सन एंजाइम) का प्रयोग किया जाता है।

25. जेनेटिक इंजीनियरिंग में निम्न में से किसका प्रयोग होता है?

Correct! Wrong!

व्याख्याः जेनेटिक इंजीनियरिंग में प्लाज्मिड का प्रयोग होता है। एक जीवाणु की सभी सामान्य गतिविधिओं का नियंत्रण इसके एकल गुणसूत्र और जीन के छोटे छल्ले पर निर्भर करता है, जिसे प्लाज्मिड कहते हैं। जिस तरह से मच्छर, कीट संवाहक के रूप में मलेरिया परजीवी को मनुष्य के शरीर में स्थानांतरित करता है, ठीक उसी तरह प्लाज्मिड को संवाहक के रूप में प्रयोग कर विजातीय डीएनए के खंड को परपोषी जीवों में पहुँचाया जाता है। जेनेटिक इंजीनियरिंग में आनुवंशिक पदार्थों (डीएनए या आरएनए) के रसायन में परिवर्तन कर इसे परपोषी जीवों (होस्ट आर्गेनिज्म) में प्रवेश कराकर इसके समलक्षणी (फीनोटाइप) में परिवर्तन करते हैं। जेनेटिक इंजीनियरिंग (आनुवंशिक इंजीनियरिंग) तकनीकों में जीन क्लोनिंग एवं जीन स्थानांतरण का उपयोग कर पुनर्योगज डीएनए (रिकॉम्बीनेंट डीएनए) का निर्माण किया जाता है, जिससे बिना अवांछित जीनों के केवल एक या एक से अधिक वांछित जीन को चुने हुए जीवों में स्थानांतरित करते हैं।

26. पुनर्योगज डीएनए तकनीक (रिकॉम्बीनेंट डीएनए टेक्नोलॉजी) जीनों को स्थानांतरित होने देता है- 1. पौधों की विभिन्न जातियों में। 2. जंतुओं से पौधों में। 3. सूक्ष्मजीवों से उच्चतर जीवों में। नीचे दिये गए कूटों का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः

Correct! Wrong!

व्याख्याः रिकॉम्बीनेंट डीएनए टेक्नोलॉजी की सहायता से जीनों को पौधों की विभिन्न प्रजातियों, जंतुओं से पौधों या पौधों से जंतुओं में तथा सूक्ष्मजीवों से उच्चतर जीवों में स्थानांतरित किया जा सकता है। जीनों को पादप और जंतुओं में स्थानांतरित करना मानव ने जीवाणुओं और विषाणुओं से सीखा है, जिन्हें यह बात चिरकाल से पता थी। जीवाणु और विषाणु जानते थे कि सुकेंद्रीय (यूकैरियोटिक) कोशिकाओं को रूपांतरित करने के लिये जीनों का कैसे उपयोग किया जाए और वे जैसा चाहते हैं वैसे करने के लिये जीनों को बाध्य करते हैं।

27. निम्नलिखित में से कौन-सा पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीव का आनुवंशिक पदार्थ है?

Correct! Wrong!

व्याख्याः बिना अपवाद के पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीवों का आनुवंशिक पदार्थ न्यूक्लिक अम्ल है। अधिकांश जीवों में यह डिऑक्सी राइबो न्यूक्लिक अम्ल है।

28. आनुवंशिक इंजीनियरिंग के अंतर्गत बायोलिस्टीक या “जीन गन” का प्रयोग किया जाता है-

Correct! Wrong!

व्याख्याः परपोषी कोशिकाओं में विजातीय डीएनए को प्रवेश कराने के लिये कई विधियों का प्रयोग किया जाता है। सूक्ष्म अंतःक्षेपण (माइक्रोइंजेक्शन) विधि में पुनर्योगज डीएनए को सीधे जंतु कोशिका केंद्रक के भीतर अंतःक्षेपित किया जाता है। दूसरी विधि है जो पौधों के लिये उपयोगी है। पौधों की कोशिकाओं पर पुनर्योगज डीएनए से विलेपित, स्वर्ण या टंगस्टन के उच्च वेग सूक्ष्म कणों से बमबारी करते हैं जिसे "बायोलिस्टीक" या "जीन गन" कहते हैं।

29. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. डीएनए को प्रतिबंधन एंजाइम (रिस्ट्रिक्सन एंजाइम) द्वारा काटने के लिये दूसरे वृहद्-अणुओं से मुक्त शुद्ध रूप में होना चाहिये। 2. जीन, हिस्टोन प्रोटीन के साथ गुथे हुए डीएनए पर स्थित होते हैं। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

व्याख्याः उपरोक्त दोनों कथन सत्य हैं। डीएनए को प्रतिबंधन एंजाइम (रिस्ट्रिक्सन एंजाइम) द्वारा काटने के लिये दूसरे वृहद्-अणुओं से मुक्त शुद्ध रूप में होना चाहिये। डीएनए झिल्लियों से घिरा रहता है, इसलिये कोशिका को तोड़कर खोलना पड़ेगा ताकि डीएनए दूसरे वृहद् अणुओं जैसे- आरएनए, प्रोटीन, बहुशर्करा, लिपिड के साथ मोचित (रिलीज) हो सके। यह तभी संभव है जब जीवाणु कोशिका/पादप या जंतु ऊतक, लाइसोजाइम (जीवाणु), सेलुलोज (पादप कोशिका), काइटिनेज (कवक) जैसे एंजाइम द्वारा संसाधित किये जाते हैं। जीन डीएनए के लंबे अणुओं पर स्थित होते हैं व हिस्टोन जैसे प्रोटीनों के साथ गुँथे रहते हैं।

30. क्लोनिंग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये- 1. ये किसी समरूप कोशिका या किसी अन्य जीवित भाग अथवा संपूर्ण जीव को कृत्रिम रूप से उत्पन्न करने की प्रक्रिया है। 2. सर्वप्रथम सफलतापूर्ण उत्पन्न क्लोन डॉली नामक एक मादा भेड़ थी। 3. डॉली एक फिन डॉरसेट भेड़ (Finn Dorsett Sheep) की क्लोन थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Correct! Wrong!

व्याख्याः उपर्युक्त तीनों कथन सही हैं। किसी समरूप कोशिका या किसी अन्य जीवित भाग अथवा संपूर्ण जीव को कृत्रिम रूप से उत्पन्न करने की प्रक्रिया क्लोनिंग कहलाती है। सर्वप्रथम इयन विल्मट और उनके सहयोगियों ने एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड के रोजलिन इंस्टीट्यूट में एक भेड़ को सफलतापूर्वक क्लोन किया, जिसका नाम डॉली रखा गया। इस प्रक्रिया में फिन डॉरसेट नामक मादा भेड़ की स्तन ग्रंथियों से ली गई कोशिका के केंद्रक को स्कॉटिश ब्लैकफेस ईव (Scottish Blackface Ewe) से ली गई एक अंडकोशिका के केंद्रक के स्थान पर स्थापित किया गया। इस प्रकार उत्पन्न अंडकोशिका को स्कॉटिश ब्लैकफेस ईव में रोपित किया गया। बाद में स्कॉटिश ब्लैकफेश ईव ने डॉली को जन्म दिया, परंतु डॉली फिन डॉरसेट भेड़ के समरूप थी, जिससे केंद्रक लिया गया था। चूँकि स्कॉटिश ब्लैकफेश ईव के केंद्रक को अंडकोशिका से हटा दिया गया था, इसलिये डॉली में उसके कोई भी लक्षण परिलक्षित नहीं हुए। अतः डॉली फिन डॉरसेट भेड़ की क्लोन थी।

Biotechnology and Genetic Engineering Quiz (जैव-प्रौधोगिकी एवं आनुवांशिकीय)
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P K Nagauri Nagaur, रमेश डामोर सिरोही, दिनेश मीना झालरा टोंक, शाहिन (कोटा), प्रभुदयाल मूण्ड, दिनेश मीना झालरा टोंक