भ्रष्टाचार ( केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) )

केंद्रीय सतर्कता आयोग एक केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार रोकने के लिए प्रमुख संस्था है। इसका गठन फरवरी 1964 में के. संथानम समिति (1962-64)की सिफारिश पर किया गया।

इस प्रकार केंद्रीय सतर्कता आयोग है न तो एक सांविधिक संस्था है न ही संविधानिक। सितंबर 2003 में संसद द्वारा पारित विधि द्वारा इसे सांविधिक दर्जा दिया गया है, राष्ट्रपति की मंजूरी 11 सितंबर 2003 को मिली।

भारत सरकार द्वारा सन 1962 भ्रष्टाचार निवारण समिति का गठन किया गया जिसमें संसद के सदस्य के. संथानम अध्यक्ष थे तथा चार अन्य संसद के सदस्य थे साथ में दो वरिष्ठ अधिकारी भी इसके सदस्य के रूप में नियुक्त थे। इसे ही के. संथानम समिति कहा जाता है

केंद्रीय सतर्कता आयोग एक बहुत सदस्य संस्था है जिसमें केंद्रीय सतर्कता आयुक्त अध्यक्ष व दो सतर्कता आयुक्त होते हैं। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक 3 सदस्यीय समिति की सिफारिश पर की जाती है जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता, व केंद्रीय गृहमंत्री होते हैं। प्रधानमंत्री समिति का अध्यक्ष होता है।

इनका कार्यकाल 4 वर्ष अथवा 65 वर्ष तक जो भी पहले हो, तक होता है । अपने कार्यकाल के पश्चात वे केंद्र अथवा राज्य सरकार के किसी भी पद के योग्य नहीं होते हैं।

नितूर श्रीनिवास राव भारत के प्रथम मुख्य सतर्कता आयुक्त थे। वर्तमान में श्री के.वी. चौधरी भारत के मुख्य सतर्कता आयुक्त है।

 

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पूनम छिंपा नेठराना (हनुमानगढ़), कुम्भाराम हरपालिया, मुकेश जी पारीक

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