संचार की परिभाषा ( Definition of Communication )

कम्युनिकेशन (Communication) शब्द लैटिन भाषा के कम्युनिस (Communis) से बना है जिसका अर्थ है to impart, make common ।

मन के विचारों व भावों का आदान-प्रदान करना अथवा विचारों को सर्वसामान्य बनाकर दूसरों के साथ बाँटना ही संचार है ।संचार शब्द, अंग्रेजी भाषा के शब्द का हिन्दी रूपान्तरण है । जिसका विकास Commune शब्द से हुआ है । जिसका अर्थ है अदान-प्रदान करना अर्थात बाँटना ।

मिलेन ने संचार को प्रशासनिक दृष्टिकोण से परिभाषित किया है । इनके अनुसार, संचार प्रशासनिक संगठन की जीवन-रेखा है ।

डा. श्यामारचरण दूबे के शब्दों में संचार सामाजीकरण का प्रमुख माध्यम है । संचार द्वारा सामाजिक और सांस्कृतिक परम्पराए एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचती है । सामाजीकरण की प्रत्येक स्थिति और उसका हर रूप संचार पर आश्रित है । मनुष्य जैविकीय प्राणी से सामाजिक प्राणी तब बनता है, जब वह संचार द्वारा सांस्कृतिक अभिवृत्तियों, मूल्यों और व्यवहार-प्रकारों को आत्मसात कर लेता है।

बीबर के अनुसार, वे सभी तरीके जिनके द्वारा एक मानव दूसरे को प्रभावित कर सकता है, संचार के अन्तर्गत आते है ।

न्यूमैन एवं समर के दृष्टिकोण में, संचार दा या दो से अधिक व्यक्तियों के तथ्यों, विचारों तथा भावनाओं का पारस्परिक अदान-प्रदान है ।

विल्वर के अनुसार संचार एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा स्रोत से श्रोता तक सन्देश पहुँचता है ।

संचार का महत्व ( Importance of communication )

संचार एक द्वि-मार्गीय प्रक्रिया है जहाँ पर विचारों का आदान-प्रदान होता है ।  बिना संचार के मानवीय संसाधनों को गतिमान किया जाना असंभव है ।  संचार को प्रेषित करने के अनेक माध्यम है ।  संचार को तभी सफल माना जा सकता है जब प्रेषित सन्देश को प्राप्तकर्ता अर्थनिरूपण कर उसकी प्रतिपुष्टि करें ।

मानवीय जीवन के विभिन्न पहलुओं में संचार का अत्याधिक महत्व है । संचार को व्यावहारिक तत्व भी माना जा सकता है क्योंकि एक व्यक्ति का व्यवहार दूसरे व्यक्ति को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है । प्रशासन एवं संगठन में संचार केन्द्रीय स्तर पर रहता है जो मानवीय एवं संगठन की गतिविधयों को संचालित करता है ।

संचार के महत्व के सन्दर्भ में यह भी कहा जा सकता कि विश्व की सभी समस्याओं का कारण एवं समाधान है । प्रभावी संचार के अभाव में प्रबन्ध की कल्पना तक नहीं की जा सकती ।  प्रशासन में संचार के महत्व को स्वीकारते हुए एल्विन डाड लिखते है कि ‘‘संचार प्रबन्ध की मुख्य समस्या है ।’’

थियो हैमेन का कहना है कि ‘‘प्रबन्धकीय कार्यों की सफलता कुशल संचार पर निर्भर करती है।
टेरी के शब्दों में’’ संचार उस चिकने पदार्थ का कार्य करता है जिससे प्रबन्ध प्रक्रिया सुगम हो जाती है।
सुओजानिन के अनुसार’ अच्छा संचार प्रबन्ध के एकीकृत दृष्टिकोण हेतु बहुत महत्वपूर्ण है।

संचार में चरण ( Steps in Communication )

संचार प्रक्रिया में चरणों को चार मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है:-

प्रथम चरण:- प्रेषक संदेश को कूटसंकेत करता है एवं भेजने के लिये उपयुक्त माध्यम का चयन करता है । प्रेषत किये जाने सन्देश मौखिक, अमोखक अथवा लिखित रूप में उचित माध्यम से भेजना है ।

द्वितीय चरण प्रेषक दूसरे चरण में सन्देश को भेजता है तथा यह प्रयास करता है कि सन्देश प्रेषित करते समय किसी भी प्रकार का व्यवधान न उत्पन्न हो तथा प्राप्तकर्ता बिना किसी व्यवधान के संदेश को समझ सकें ।

तृतीय चरण- प्राप्तकर्ता प्राप्त सन्देष का अर्थ निरूपण करता है तथा आवश्यकता के अनुसार उसकी प्रतिपुष्टि करने का प्रयास करता है ।

चर्तुथ चरण- प्रतिपुष्टि चरण में प्राप्तकर्ता प्राप्त सन्देश का अर्थनिरूपण करने के पश्चात् प्रेषक के पास प्रतिपुष्टि करता है ।

प्रभावी संचार की विशेषतायें ( Effective Communication Characteristics )

प्रभावी संचार की विशेषतायें निम्नवत् है –

  • संचार का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए 
  • संचार की भाषा बोधगम्य, सरल व आसानी से समझ में आने वाली होनी चाहिये ।  
  • संचार यथा सम्भव स्पष्ट एवं सभी आवश्यक बातों से युक्त होना चाहिए ।
  • संचार प्राप्तकर्ता की प्रत्याशा के अनुरूप होने चाहिए । 
  • संचार यथासमय अर्थात् सही समय पर होना चाहिये । 
  • संचार पेरषित करने के पूर्व सम्बन्धित विषय में पूर्ण जानकारी का ज्ञान होना आवश्यक है ।
  • संचार करने से पूर्व परस्पर विश्वास स्थापित करना आवश्यक है । 
  • संचार में लोचशीलता होनी चाहिये अर्थात् आवश्यकतानुसार उसमें परिवर्तन किया जा सके ।
  • संचार को प्रभावी बनाने के लिये उदाहरणों तथा श्रव्य दृश्य साधनों का प्रयोग किया जाना चाहिए । 
  • विलम्बकारी प्रवृत्तियों अथवा प्रतिक्रियाओं को व्यवहार में नहीं लाना चाहिए
  • संचार सन्देशों की एक निरन्तर श्रंखला होनी चाहिये
  • एक मार्गीगीय संचार की अपेक्षा द्विमार्गीय संचार श्रेष्ठ होता है । 
  • सन्देश प्रेषित करते समय ऐसा प्रयास किया जाना चाहिये कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक विश्वासों पर किसी प्रकार का कुठाराघात न हो 
  • संचार हमेशा लाभप्रद होना चाहिये क्योकि मनुष्य का स्वभाव है कि किसी भी बात में लाभप्रद सम्भावनाओं को देखता है ।  
  • संचार में प्रयोग की जाने वाली विधियाँ या कार्य खर्चीले नही होने चाहिये अर्थात मितव्यियता के सिद्धान्त का पालन करना चाहिए ।  
  • संचार में विभाज्यता का गुण होना चाहिये क्योंकि प्रेषित सन्देश का उद्श्य पूरे समुदाय या वर्ग के कल्याण में निहित होता है । 
  • संचार बहुहितकारी होना चाहिये अर्थात बहुजन हिताय बहुजन सुखाय की भावना होनी चाहिये ।

Quiz 

Question – 34

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

रमेश डामोर डूंगरपुर, P K Nagaur, S.R.BUNKAR, Shanu, राजेश कुमार सुमन झालावाड़, निर्मला कुमारी

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