रक्षा प्रौद्योगिकी ( Defense technology )

रक्षा तकनीक दो प्रकार की होती है
(1) सामरिक तकनीक
(2) नागरिक तकनीक /ज्ञान आधारित तकनीक

1. सामरिक तकनीक –

यह देश की सुरक्षा से संबंधित तकनीकी जिनका पूर्ण नियंत्रण केंद्र सरकार के द्वारा किया जाता है

1. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन DRDO – defence research and development organization

  • स्थापना 1 जनवरी 1958
    प्रथम अध्यक्ष – डॉ. डी  कोठारी
    वर्तमान अध्यक्ष डॉ. एस क्रिस्टोफर
    मुख्यालय दिल्ली
  • उद्देश्य- डीआरडीओ रक्षा के क्षेत्र में उपकरणों का विकास और अनुसंधान कार्य करने वाली भारत की सर्वोच्च संस्था है जिसका प्रमुख उद्देश्य भारत की तीनों सेनाओं के लिए विश्व स्तरीय तकनीक के रक्षा उपकरण जैसे मिसाइल, लड़ाकू विमान, युद्धपोत, टैंक आदि उपलब्ध कराना है

2. भारत का प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम  ( India’s Missile Development Program )

  • 5 घोषित परमाणु देशों (चीन, ब्रिटेन, फ़्रांस, रूस, और संयुक्त राज्य अमेरिका) के बाद, भारत के पास सबसे उन्नत मिसाइल कार्यक्रमों में से एक है| भारत अपने परिष्कृत मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के साथ, देश में ही लंबी दूरी की परमाणु मिसाइलों के विकास में तकनीकी रूप से सक्षम है।
  • बैलिस्टिक मिसाइलों में भारत का अनुसंधान 1960 के दशक में शुरू हुआ। जुलाई 1983 में भारत ने स्वदेशी मिसाइल के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के उद्देश्य के साथ समन्वित निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (Integrated Guided  Missile Development Program- IGMDP) शुरुआत की।
  • आईजीएमडीपी द्वारा देश में ही विकसित सबसे पहली मिसाइल पृथ्वी(पृथ्वी) थी। भारत की दूसरी बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली, अग्नि (आग) मिसाइलों की श्रृंखला है, जिसकी मारक क्षमता पृथ्वी मिसाइलों से ज्यादा है, साथ ही अग्नि मिसाइलों से अधिक उन्नत भी है|
  • अग्नि मिसाइलें भारतीय मिसाइल प्रणाली की रीढ़ हैं| भारत की कुछ प्रमुख मिसाइलें इस प्रकार हैं- बैलिस्टिक मिसाइल Ballistic Missiles , पृथ्वी मिसाइल प्रणाली Prithvi *missile system

मिसाइल के प्रकार (Types of missiles)

1. स्थिति के आधार पर

  1. सतह से सतह -ऐसी मिसाइलें जिनके छोड़ने का स्थान व लक्ष्य दोनों सतह पर हो जैसे- पृथ्वी अग्नि
  2. सतह से हवा -ऐसी मिसाइल ने जिन को छोड़ने का स्थान सतह/ हवा और लक्ष्य हवा /सतह पर होता है जैसे त्रिशूल आकाश
  3. हवा से हवा -ऐसी मिसाइलें जिनको छोड़ने का स्थान व लक्ष्य दोनों हवा में हो जैसे अस्त्र

2. प्रयोग के आधार पर

  1. रणनीतिक -वे मिसाइल जिन्हें युद्ध में लड़ने के लिए बनाया जाता है जैसे अग्नि श्रंखला (2, 3, 4, 5, 6)
  2. सामरिक -वे मिसाइलें जिन्हें युद्ध में लड़ने के लिए नहीं बल्कि बचाव के लिए बनाया जाता है जैसे पृथ्वी त्रिशूल नाग आकाश

3. पथ के आधार पर

  1. बैलेस्टिक मिसाइल- इसका पथ परवलयाकार होता है इससे पहले वाले वायुमंडल में भेजा जाता है और फिर लक्ष्य के पास आकर वायुमंडल से बाहर आती है इन्हें slbm भी कहते हैं
  2. क्रूज मिसाइल –ऐसी मिसाइल में जिनका पूर्व निर्धारित पथ नहीं होता बल्कि स्वयं निर्धारित पथ होता है यह मिसाइल पृथ्वी से समान दूरी बनाकर चलती हैं इसलिए उनका पथ दीर्घवृत्ताकार होता है

पृथ्वी मिसाइल प्रणाली Prithvi missile system

  • भारत में सबसे पहले छोटी दूरी के लिए पृथ्वी मिसाइलों का विकास शुरू किया| इन मिसाइलों का विकास 1983 में हैदराबाद में शुरू किया गया और इसका पहला परीक्षण श्रीहरिकोटा, शार केंद्र (SHAR-‘Sriharikota Range’ now ‘Satish Dhawan Space Centre’) नेल्लोर जिले, आंध्र प्रदेश से 25 फ़रवरी 1988 को किया गया|
  • पृथ्वी-1 भारत में विकसित स्वदेशी तकनीकी से बनी बैलिस्टिक मिसाइल थी, जिसकी क्षमता 150 किमी. थी| पृथ्वी मिसाइलों के कई संस्करण हैं- जिनमे पहला था SS-150 या P1, जिसकी क्षमता 150 किमी. है| इनका उत्पादन 1993 में शुरू हुआ, और 1999 तक लगभग 60 मिसाइलें बनायीं गयीं| इनके प्रक्षेपण के लिए 35 प्रक्षेपण वाहनों (transport erector launcher-TEL)*का भी निर्माण किया गया|
  • दूसरा संस्करण SS-250 या P2 है, जिसकी क्षमता 250 किमी. तक है| इनकोो भारतीय वायु सेना में 1999 में शामिल किया गया और अनुमान के अनुसार लगभग 70 मिसाइलों का निर्माण किया गया| बाद में इनका नियंत्रण, मिसाइल संचालन करने वाले थल सेना के समूह को दे दिया गया, जो अपने लक्ष्यों के लिए वायुसेना के संपर्क में रहता है|
  • 350 किमी तक मारक क्षमता वाली पृथ्वी-III मिसाइलों का परीक्षण सन 2004 में किया गया| पृथ्वी-III मिसाइलों परीक्षण नवम्बर 1993 और अप्रैल 2001 में किया गया, परन्तु अभी यह निश्चित नहीं है की इनका विकास आगे किया जा रहा है या नहीं|
  • पृथ्वी-1 मिसाइलों का प्रयोग भारतीय थल सेना द्वारा किया जाता रहा, और पृथ्वी-II मिसाइलों का प्रयोग भारतीय वायुसेना द्वारा किया जाता है| पृथ्वी मिसाइलों के नौसैनिक संस्करण को धनुष (Dhanush) मिसाइल के नाम से भी जाना जाता है| जो पृथ्वी-1 और पृथ्वी-2 मिसाइलों का ही विकसित रूप है|
  • वास्तव में पृथ्वी मिसाइलों का विकास नाभिकीय अस्त्र लि जाने के लिए किया गया था, परन्तु अधिक उन्नत अग्निमिसाइलों के सफल परीक्षण के बाद इन मिसाइलो पर नाभिकीय अस्त्रों की आवश्यकता नहीं रह गयी| धनुष मिसाइलों का पनडुब्बी संस्करण भी विकसित करने के प्रयास किया जा रहा है|
  • पृथ्वी-I व पृथ्वी-II मिसाइलें तरल ईंधनों से युक्त थीं| पृथ्वी-III मिसाइलें एक चरण वाले ठोस ईंधनो से युक्त होती हैं, जिससे ये मिसाइलें विभिन्न स्थानों और परिस्थितियों में बहुत ही कम समय में तैयार करके दागी जा सकती हैं|
  • पृथ्वी-1 मिसाइलें 1994 में भारतीय सेना में शामिल की गयीं, जिनका संचालन सिकंदराबाद में भारतीय सेना के 333वें मिसाइल समूह द्वारा किया जाता रहा| 444वें मिसाइल समूह की स्थापना मई 2002 में की गयी जो पृथ्वी और अग्नि-1 मिसाइलों के संचालन की देख-रेख करता है|
  •  युद्ध-पोतों से प्रक्षेपित की जा सकने वाली पृथ्वी मिसाइलों के नौसैनिक संस्करण धनुष का परीक्षण आई.एन.एस. सुभद्रा से अप्रैल 2000 में किया गया| यह परीक्षण असफल रहा| इसके दूसरे परीक्षण दिसम्बर 2000 और सितम्बर 2001 में किये गए, जिसमे इन मिसाइलों ने 150 किमी. की निर्धारित दूरी तय की| पृथ्वी मिसाइलें सभी प्रकार के पारंपरिक और सामरिक हथियार ले जाने में सक्षम हैं|

अग्नि मिसाइल प्रणाली Agni missile system

भारत ने मध्यम दूरी की, सतह से सतह पर मार करने वाली, अग्नि मिसाइल प्रणाली पर 1979 में कम शुरू किया और इनका पहला परीक्षण 1989 में किया गया| परन्तु उत्तरोत्तर सरकारों ने अन्तर्राष्ट्रीय दबावों में इसके अगले परीक्षण नहीं किये| अग्नि -1 का परीक्षण 1990 के मध्य में किया गया, और इसे प्रौद्योगिकी का विकास (technology demonstrator) बताया गया| 1998 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की अगुवाई वाली सरकार ने अग्नि मिसाइलों के विकास को नई दिशा दी| इस प्रकार 1999 में अग्नि –II का परीक्षण किया गया, और सन 2002 में अग्नि-I का भी परीक्षण किया गया| अग्नि मिसाइलें अंतरवर्ती दूरी (Intermediate-Range Ballistic Missile-IRBM)  तक प्रहार करने वाला बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र है| इसमें मुख्य रूप से ठोस प्रणोंदकों का ही इस्तेमाल होता है (SLV-3 के समान)| अग्नि मिसाइलों का ताप परिरक्षक (Heat Shield) कार्बन सम्मिश्रणों (composite) का बना होता है, जिसके कारण ये उच्च तापमान लगभग 5000°C, को भी सहन कर सकती हैं| अमेरिका, रूस, फ़्रांस, इजराइल और चीन के बाद भारत ऐसी प्रणाली विकसित करने वाला 6वां देश है|

  1. अग्नि-1 Agni – I- कम दूरी के लिए अग्नि-I का विकास 1999 में शुरू हुआ| यह 1990 में परीक्षण की गयी अग्नि मिसाइलों पर ही आधारित था| अपने पेलोड के साथ इसकी मारक क्षमता 1200 किमी. तक है| अग्नि-I का विकास कम समय में परमाणु क्षमता प्रदान करने के लिए किया गया है|  परमाणु क्षमता संपन्न अग्नि – 1 प्रक्षेपास्त्र का ताजा परीक्षण 25 नवंबर 2010 एवं दिसंबर 2011 में किया गया| अग्नि – 1 को पहले ही भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया है लेकिन सेना से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इसका समय-समय पर प्रायोगिक परीक्षण किया जाता है|
  2. अग्नि-2 Agni – II- 2000 किमी. की मारक क्षमता वाली अग्नि – II मिसाइलों का सबसे पहले परीक्षण अप्रैल 1999 में किया गया था| 2009 में इनका दो बार परीक्षण असफल हो गया था| मई 2010 में इसका सफल परीक्षण किया गया| ये एक टन तक का पेलोड ले जा सकती है| सितंबर 2011 में एक बार फिर अग्नि-2 का सफल परीक्षण किया गया. अग्नि-2 भारतीय सेना में शामिल की जा चुकी है|
  3. अग्नि-3 Agni – III- 3500 किमी. की मारक क्षमता वाली, और 1.5 टन तक का पेलोड लि जा सकने में सक्षम अग्नि-3 मिसाइलों को 2006 में परीक्षण किया जिसे आंशिक रूप से ही सफल बताया गया| 2007 और 2008 में अग्नि-3 का सफल प्रशेपण किया गया| अग्नि-3 का चौथा परीक्षण फरवरी 2010 में उड़ीसा के पास व्हीलर आईलैंड में किया गया|
  4. अग्नि – 4 Agni – IV – 3000 किमी. से अधिक मारक क्षमता, 1000 किग्रा. से अधिक पेलोड ले जाने में सक्षम अग्नि-4 मिसाइलों का सफल प्रक्षेपण नवंबर 2011 में किया गया| ये मिसाइलें अपने पूर्ववर्ती संस्करणों से हल्की, परन्तु तकनीकी रूप से अधिक उन्नत हैं| इनका पहला परीक्षण दिसम्बर 2010 में हुआ था, परन्तु तकनीकी कारणों से ये परीक्षण असफल रहा था| अग्नि-3 मिसाइलें अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (intercontinental ballistic missile, ICBM) हैं| अग्नि मिसाइलें सभी प्रकार के पारंपरिक और सामरिक हथियार ले जाने में सक्षम हैं| नई तकनीकों जैसे अति आधुनिक कम्प्यूटर और नेवीगेशन सिस्टम के इस्तेमाल के कारण ये मिसाइलें अचूक हैं| अग्नि मिसाइलों की श्रृंखला को डीआरडीओ (Defense Research and Development Organization, DRDO) द्वारा विकसित किया गया है और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (Bharat Dynamics Limited) द्वारा इनका  निर्माण किया जाता है|
  5. अग्नि -5 Agni – V- भारत ने अपनी पहली अंतरमहाद्वीपीय दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का परीक्षण अप्रैल 2012 में किया| 5000-8000 किमी की मारक क्षमता वाली इस मिसाइल को भी MIRV के रूप में विकसित किया गया है, जो एक बार में 3 से ज्यादा हथियारों को ले जाने में सक्षम है|
  6. अग्नि-6 Agni-VI-  इनके आलावा अग्नि-VI का विकास, 2008 में आईजीएमडीपी कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद, डीआरडीओ द्वारा किए गए नीति में परिवर्तन के अनुसार स्वतंत्र परियोजनाओं के तहत किया जा रहा है|  अग्नि-VI को भी मल्टीपल इंडिपेंडिबल री- एंट्री व्हीकल यानी एमआईआरवी (Multiple independently targetable reentry vehicle-MIRV) के रूप में विकसित करने के प्रयास किये जा रहें हैं, जो एक बार में 4-6 हथियार ले जाने में सक्षम होगा|

त्रिशूल मिसाइल प्रणाली Trishul Missile System

त्रिशूल मिसाइल सतह से हवा में मार करने वाली पहला स्वदेशी सक्षम प्रक्षेपास्त्र है| इसे सेना के तीनो अंग प्रयोग कर सकते हैं| इसकी मारक क्षमता 500 मी. से लेकर 12 किमी. तक है| यह 5.5 किग्रा. तक के विस्फोटकों को के जा सकती है, इलेक्ट्रॉनिक संसूचकों (detector) की मदद से लक्ष्य के करीब इनमे विस्फोट होता है| इनमे ठोस प्रणोदकों का इस्तेमाल होता है| भारत ने आधिकारिक तौर पर 27 फ़रवरी 2008 के बाद त्रिशूल मिसाइल परियोजना बंद कर दी, परन्तु तकनीकी दक्षता हासिल करने के लिए इसका परीक्षण किया जा सकता है|

धनुष मिसाइल Dhanush Missile

पृथ्वी और अग्नि मिसाइल की सफलता के बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने समुद्र से सतह पर प्रहार करने वाली धनुष मिसाइल को विकसित किया| यह मिसाइल पृथ्वी मिसाइल का ही नौसैनिक संस्करण है| इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है और निर्माण भारत डाइनेमिक्स लिमिटिड द्वारा इसका निर्माण किया जाता है| यह 500 किग्रा. तक के पेलोड ले जाने में सक्षम है|

आकाश मिसाइल प्रणाली Akash missile system

सतह से हवा में मार करने में सक्षम आकाश मिसाइलें माध्यम दूरी के प्रक्षेपास्त्र हैं, जिनकी मारक क्षमता 25-30 किमी. है| आकाश मिसाइलें 2.5 मैक की पराध्वनिक रफ़्तार पर उडती हैं| ये 18 किमी. तक की ऊंचाई तक भी जा सकती हैं| अक्सः मिसाइलें 55 किग्रा. तक के वॉरहेड्स का वहन कर सकती हैं| ये मिसाइलें रैमजेट तकनीक पर आधारित हैं| इनमे दो चरणों वाले ठोस प्रणोदकों का इस्तेमाल होता है| आकाश मिसाइलें देश में ही विकसित राजेन्द्र राडार से एकीकृत होती हैं, जिनके द्वारा इन्हें निर्देश दिया जाता है| इस मिसाइलों का पूर्ण रूप से राडार द्वारा ही नियंत्रण किया जाता है|

आकाश मिसाइलों का विकास 1990 में शुरू किया गया था और इनका पहला परीक्षण मार्च 1997 में किया गया था|

नाग मिसाइल Nag Missile  

दागो और भूल जाओ (Fire-and-forget) के सिद्धांत पर विकसित नाग मिसाइल एक टैंक रोधी (anti-tank missile) है, जिसकी क्षमता 3-7 किमी है| इसमें ठोस प्रणोदकों का इस्तेमाल होता है| नाग मिसाइलों में अवरक्त प्रतिविम्ब प्रणाली (Imaging Infra-Red, IIR) का प्रयोग किया जाता है, जिसके कारन दिन और रात दोनों समय इससे अचूक निशाना लगाया जा सकता है| नाग मिसाइलों का हेलीकाप्टर में प्रयोग किया जा सकने वाला संस्करण भी विकसित किया जा चुका है, जिसे हेलिना (HELINA – HELIcopter NAg) के नाम से जाना जाता है| इसे HAL द्वारा विकसित ध्रुव हेलीकाप्टरों में लगाया गया है|

इन मिसाइलों के प्रक्षेपण के लिए एक थर्मल इमेजर से लैस विशेष वाहन नामिका (NAMICA-Nag Missile Carrier) का भी विकास किया गया है|

पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लांचर Pinaka Multi Barrel Rocket Launcher

पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट प्रणाली को जिसे भारतीय सेना के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित किया गया है| ये प्रणाली अधिकतम 40-65 किमी. तक के पाने लक्ष्यों को भेद सकती है| इस प्रणाली से 44 सेकंड में 72 रॉकेट दागे जा सकते हैं, जो 4 वर्ग किमी. के क्षेत्र को तबाह कर सकते हैं| इसके अलग-अलग राकेटों को अलग-अलग दिशा में भी दागा जा सकता है| इस प्रणाली की गतिशीलता के लिए इसे एक टाट्रा (Tatra) ट्रक पर लगाया जाता है| पिनाका मिसाइल प्रणाली का विकास 1986 में शुरू हुआ था और दिसम्बर 1992 में इस पर काम पूरा हुआ|

निर्भय  मिसाइल Nirbhay Missile

17 अक्टूबर, 2014 को भारत ने DRDO द्वारा स्वदेशी तकनीकी से विकसित देश की पहली अध्वनिक (subsonic) मिसाइल निर्भय का परीक्षण किया| टर्बोजेट इंजन और ठोस प्रणोदकों पर आधारित इस मिसाइल की रफ़्तार 0.65 मैक है| यह मिसाइल 450 किग्रा. तक के पेलोड के साथ 800-1000 किमी. की दूरी तक मार करने में सक्षम है| इस मिसाइल में एक खास तरह का फायर एंड फोरगेट सिस्टम लगा है, जिसे जाम नहीं किया जा सकता। यह मिसाइल उच्च तकनीक पर आधारित है, इसे सामान्य मिसाइलों की तरह ही प्रक्षेपित किया जाता है, लेकिन एक निश्चित ऊंचाई पर पहुँचने के बाद इसमें लगे पंख खुल जाते हैं, और यह एक विमान की तरह काम करने लगती है|

निर्भय मिसाइल कई विशेषताओं से युक्त है, जैसे यह कम ऊंचाई पर उडती है जिसकी वजह से यस राडार के पकड़ में आसानी से नहीं आती| इसे दूर से नियंत्रित किया जा सकता है, लक्ष्य के पास पहुँचाने के बाद ये उसके इर्द-गिर्द चक्कर लगा सकती है और सटीक मौके पर हमला कर सकती है| ये मिसाइलें काफी कुशल हैं, जिन्हें भिन्न-भिन्न पेलोड के साथ विभिन्न प्लेटफार्म से प्रक्षेपित किया जा सकता है| इस मिसाइल को प्रमुख तौर पर वायु सेना और नौसेना के लिए विकसित करने की योजना है|

प्रहार मिसाइल Prahaar Missile

प्रहार कम दूरी की (Short-Range Ballistic Missile, SRBM) बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिया विकसित किया गया है| यह मिसाइल 250 सेकेंड के भीतर, 150 किमी की दूरी तक अपने लक्ष्यों को भेद सकती है| इस नई मिसाइल से वर्तमान मल्टी बैरल रॉकेट प्रणाली वाली पिनाका और परमाणु सामग्री ले जाने में सक्षम पृथ्वी मिसाइलों के बीच के अंतर को दूर किया जा सकेगा। पिनाका 40 किलोमीटर तक जबकि पृथ्वी 350 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद सकती है। एक चरण वाले ठोस ईंधनों से युक्त यह मिसाइल 200 किग्रा. तक का पेलोड ले जा सकने में सक्षम है| इस मिसाइल का पहला परीक्षण जुलाई 2011 में किया गया था|

शौर्य मिसाइल  Shaurya Missile

सतह से सतह पर वार करने में सक्षम मध्यम दूरी की मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल ‘शौर्य’ का सफलतापूर्वक परीक्षण सितम्बर 2011 में किया गया था| इस मिसाइल का पहला परीक्षण 2004 में किया गया था| शौर्य मिसाइलों की मारक क्षमता 700 किमी. है| दो चरणों वाले ठोस प्रणोदकों से युक्त यह मिसाइल 500-800 किग्रा. तक का पेलोड ले जा सकती है| यह मिसाइल जमीन के अलावा पानी के भीतर से भी छोड़ी जा सकती है|

सागरिका मिसाइल Sagarika (K-15) Missile

भारत ने समुद्र से प्रक्षेपित की जा सकने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (Sea Launched Ballistic Missile, SLBM) का भी विकास किया है| सागरिका का परीक्षण 2008 में किया गया था| DRDO द्वारा विकसित यह मिसाइल 500-800 किग्रा. के पेलोड के साथ 700 किमी. की दूरी तक के लक्ष्यों को निशाना बना सकती है| इसमें दो चरणों वाले ठोस प्रणोदकों का इस्तेमाल होता है| शौर्य मिसाइल इसका जमीनी संस्करण ही है|

सूर्य मिसाइल Surya Missile

भारत एक अंतर-महाद्वीपीय दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (Intercontinental Range Ballistic Missile-IRBM) विकसित करने का प्रयास कर रहा है, जो एक MIRV मिसाइल होगी| यह मिसाइल 2500 किमी. के पेलोड के साथ 8000-10000 किमी. की दूरी तक लक्ष्यों को भेदने में सक्षम होगी| इसका पहला परीक्षण 2015 में होने की सम्भावना है|

ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र BrahMos Missile (PJ-10)

ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के द्वारा विकसित की गयी पराध्वनिक (supersonic) मिसाइल है| यह अब तक की सबसे आधुनिक मिसाइल प्रणाली है, जिसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है| इसकी गति और सटीकता के कारण, ब्रह्मोस को सबसे दुर्जेय क्रूज मिसाइलों में से एक माना जाता है। 12 फरवरी 1998 को भारत में डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिशिया (DRDO and Mashinostroyenia-NPOM) के बीच एक समझौता हुआ और *ब्रह्मोस एयरोस्पेस (BrahMos Aerospace) का गठन किया गया| ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा (Brahmaputra and Moscow) नदी पर रखा गया है। इस सयुंक्त उपक्रम का उद्देश्य था विश्व के सबसे पसले सुपरसोनिक मिसाइलों को विकसित करना और बेचना|

डीआरडीओ के डा. ए. शिवथानु पिल्लई (Dr. A. Shivathanu Pillai) और एनपीओ के डॉ. हर्बर्ट येफ्रेमोव (Dr. *Herbert Yefremov) ने इस मिसाइल को विकसित करने में अहम् भूमिका निभाई|

ब्रह्मोस मिसाइल का पहला परीक्षण 12 जून 2001 को, उड़ीसा तटीय क्षेत्र में चाँदीपुर के एकीकृत परीक्षण स्थल (Interim Test Range off

The Chandipur coast in Orissa – ITR) से किया गया| अब तक इसके कई संस्करण विकसित किये जा चुके हैं| रैमजेट तकनीक पर आधारित ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल 200-300 किग्रा पेलोड के साथ 300 किमी की दूरी पर अपने लक्ष्यों को भेद सकती है| इस मिसाइल को जमीन से, हवा से, पनडुब्बियों से, युद्ध पोतो से अर्थात कहीं से भी प्रक्षेपित किया जा सकता है| ब्रह्मोस के मेनुवरेबल संस्करण का भी परीक्षण किया जा चुका है, जिससे प्रक्षेपित किये जाने के बाद अपने लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही इसका मार्ग बदला जा सकता है|

भारत की भविष्य में ब्रह्मोस-2 नाम से हाइपर सोनिक मिसाइल मिसाइल बनाने की भी योजना है, जो 7 मैक की गति से अपने लक्ष्यों को भेदने में सक्षम होगी| इस मिसाइल का विकास भारत को बिना रूस की सहायता से अपने दम पर करना होगा, क्योंकि रूस ने अंतरराष्ट्रीय  मिसाइल तकनीक नियंत्रण संधि (Missile Technology Control Regime-MTCR) पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसके कारण वह 300 किमी से अधिक मारक क्षमता वाली मिसाइल के विकास में अन्य देशों को मदद नहीं दे सकता है।

ब्रह्मोस मिसाइलों को थल सेना एवं नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

? भारतीय रक्षा प्रौद्योगिकी?

✍ रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के लिए रक्षा अनुसंधान एवं संगठन की स्थापना वर्ष 1958 में क़ी गई।
इस समय इसे कुछ अन्य प्रोद्योगिकीय संस्थानों के साथ मिलाकर स्थापित किया गया।
✍1980 में स्वतंत्र रक्षा अनुसंधान एव विकास विभाग को गठित किया गया।
✍ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के प्रमुख एवं महानिदेशक रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार होते हैं इस संगठन का मुख्यालय नई दिल्ली में है ।

Defense technology important facts and Quiz ( महत्वपूर्ण बिंद ✍

  1. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO-डीआरडीओ) की स्थापना वर्ष 1958 में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की अध्यक्षता में की गई थी
  2. DRDO का मुख्य कार्य रक्षा के संदर्भ में अनुसंधान डिजाइन तथा विकास कार्यक्रमों को संचालित करना है
  3. भारत का एकीकृत प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP) 1982-83 में आरंभ हुआ था
  4. 1980 में स्वतंत्र रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग का गठन किया गया जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है
  5. वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR)की स्थापना 1942 में हुई थी इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है
  6. CSIR-वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद का अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होता है
  7. भारत का पहला प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल पृथ्वी हैं पृथ्वी जमीन से जमीन पर मार करने वाली बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र है जिसकी मारक क्षमता 250 किलोमीटर है पृथ्वी का प्रथम परीक्षा 25 फरवरी 1988 को चांदीपुर अंतरिम परीक्षण केंद्र से किया
  8. अग्नि जमीन से जमीन पर मार करने वाली बैलेस्टिक मिसाइल है जिस की मारक क्षमता 3500 किलोमीटर तक है अग्नि प्रथम का सफल परीक्षण 22 मई 1989 को किया गया
  9. त्रिशूल कम दूरी का जमीन से हवा में मार करने वाला प्रक्षेपास्त्र है इसकी मारक क्षमता 9 किलोमीटर है. त्रिशूल का पहला सफल परीक्षण 5 जून 1989 को किया गया
  10. नाग एक टैंक रोधी निर्देशित प्रक्षेपास्त्र है जिसकी मारक क्षमता 4 किलोमीटर है नाग का प्रथम सफल परीक्षण 24 नवंबर 1990 को किया गया नाग को दागो और भूल जाओ टैंक रोधी प्रक्षेपास्त्र भी कहा जाता है
  11. आकाश जमीन से हवा में वार करने वाली बहूलक्षीय प्रक्षेपास्त्र है जिसकी मारक क्षमता 25 किलोमीटर है आकाश का प्रथम सफल परीक्षण 14 अगस्त 1990 को चांदीपुर में किया गया
  12. अस्त्र भारत का प्रथम हवा से हवा में मार करने वाला प्रक्षेपास्त्र है
  13. युद्धक टैंक अर्जुन का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के द्वारा किया गया जिसे 1996 में सेना को समर्पित किया गया
  14. तेजस स्वदेश निर्मित प्रथम हल्का लड़ाकू विमान है
  15. प्रथम चालक रहित भारत विमान लक्ष्य है
  16. निशांत स्वदेशी तकनीक से निर्मित पायलट रहित प्रशिक्षण विमान है.
  17. ब्ह्मोस अति-स्वन क्रूज प्रक्षेपास्त्र (सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल) है ब्रम्होस मुख्यतः एक पोतनाशक प्रक्षेपास्त्र है
  18. भारत ने p8i एयर क्राफ्ट किस देश से प्राप्त किये हैं➖अमेरिका
  19. भारत का पहला स्वदेशी एयर क्राफ्ट कैरियर कोनसा हैं ➖INS विक्रांत।
  20. DRDO की स्थापना कब हुई➖1958
  21. आकाश में कौन सी टेक्नोलॉजी प्रयुक्त की गइ➖रामजेट टेक्नोलॉजी
  22. आकाश मिसाइल की मारक क्षमता ➖25 km.
  23. पृथ्वी मिसाईल का प्रथम परीक्षण कब किया गया ➖फरवरी 1998 में चांदीपुर में।
  24. पृथ्वी मिसाईल की मारक क्षमता कितनी हैं➖40 से अधिकतम 250km.
  25. भारत की टैंक रोधी मिसाईल कोनसी हैं➖नाग।
  26. नाग मिसाईल की मारक क्षमता ➖4km.
  27. समुन्द्र के भीतर से सागरिका का पहला परीक्षण हुआ➖2008
  28. वह मिसाईल जो अपने लक्ष्य को खोजकर प्रहार करती है क्या कहलाती हैं➖ क्रूज मिसाईल
  29. अग्नि V की मारक क्षमता कितने किमी तक बढ़ाने का प्रावधान है➖ 5000 से 8000km.
  30. समेकित निर्देशित प्रक्षेपात्र विकास कार्यक्रम IGMDP की नींव किसने रखी थी ➖ इंदिरा गाँधी ने
  31. तेजस ने पहली उड़ान कब भरी ➖2005
  32. तेजस की गति कितनी है➖600k/h.
  33. कौनसा विमान रडार की पकड़ में नहीं आता➖ निशांत
  34. भारत ने आई ० एल०8 विमान किस देश से प्राप्त किया है➖2003 रूस से
  35.  पिद्दोरा किस प्रकार की मिसाइल प्रणाली हैं➖ जमीन से आकाश में मार करने वाली
  36. शौर्य मिसाईल का प्रथम सफल परीक्षण कब हुआ ➖2008 में
  37. स्वदेश निर्मित प्रथम हल्का लड़ाकू विमान कोनसा है➖ तेजस
  38. रुस्तम किस प्रकार का विमान है ➖ स्वदेशी मानव रहित विमान।
  39. सुखोई 30 किस देश द्वारा विकसित किया गया➖रूस द्वारा
  40. कोनसा टैंक अँधेरे में भी काम करता हैं➖अर्जुन टैंक
  41. अर्जुन की गति कितनी हैं➖70km/h.
  42. भीष्म टैंक का विकास कहां हुआ➖ रूस में।
  43. भारत ने रूस से कितने भीष्म टैंक ख़रीदे हैं➖300 टैंक
  44.  भीष्म टैंक कितनी दूरी तक प्रक्षेपात्र दाग सकता हैं➖4km
  45. अपर्णा की मुख्य विशेषता क्या हैं ➖अपर्णा रडार शत्रु युद्धपोत का पता लगा सकता है और युद्धपोत को आत्मरक्षा की चेतावनी दे सकता हैं।
  46. रोहिणी रडार के नौ सैनिक संस्करण का नाम क्या रखा ➖खेती
  47. रोहिणी की प्रमुख विशेषता क्या है ➖भारत का त्रि आयामी रडार हैं
  48. अर्जुन टैंक में कोनसी सुविधा उपलब्ध है➖ पेरानामिक साईट सुविधा जिससे टेंक के भीतर बैठकर चारो और निगरानी की जा सकती हैं
  49. भारत की सबसे उन्नत रडार कोनसी है➖बेटल फ़ील्ड
  50. सर्विलांस रडार प्रणाली ली हैं➖ फाल्कन रडार
  51. अवाक्स किस देश से ली गयी प्रणाली है➖इजराइल से
  52. अवाक्स प्रणाली किस विमान में प्रयोग की गई हैं➖ टोही विमान से
  53.  मंगलयान किस देश का प्रथम अंतर् उपग्रह विमान हैं➖भारत
  54. मंगलयान का प्रक्षेपण कब किया गया ➖5 नवम्बर 2013
  55. चन्द्रमा पर भारत के दूसरे मिशन का क्या नाम है ➖चन्द्रयान 2
  56. दक्षेस देशो के लिये भारत का कौनसा उपग्रह प्रस्तावित हैं➖सार्क सेटेलाइट
  57. भरतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति का गठन कब हुआ➖1962
  58. भातीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक कोन थे➖डॉ विक्रम साराभाई

 

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No of Question – 56

0%

प्रश्न=1- IGMDP का पूरा नाम क्या है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न= 2- DRDO के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ?

Correct! Wrong!

प्रश्न =3- DRDO के प्रमुख उद्देश्य क्या है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=4-IGMDP द्वारा देश मे पहली मिसाईल कौन सी थी ?

Correct! Wrong!

प्रश्न= 5- कम दुरी के लिए अग्नि l का विकास किस सन् मे शुरू किया गया?

Correct! Wrong!

प्रश्न=6- अग्नि ll की मारक क्षमता कितनी है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=7- अग्नि lll कितने टन तक का पेलोड ले जाने मे सक्षम है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=8- MIRV का पूरा नाम क्या है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=9- किन मिसाईलो मे अवरक्त प्रतिविम्ब (llR) का प्रयोग किया जाता है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=10- ब्रह्मोस मिसाईल का पहला परीक्षण कब एंव कहाँ किया गया ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=11- आई जी एम डी पी?

Correct! Wrong!

प्रश्न=12- त्रिशूल मिसाइल है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=13- मिसाइलों का पिता?

Correct! Wrong!

प्रश्न=14- Patna मिसाइलों में सम्मिलित नहीं है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=15- त्रिशूल मिसाइल को विकसित किया गया?

Correct! Wrong!

प्रश्न=16- आई जी एम डी पी परिवार के अंतर्गत आने वाली एकमात्र टैंक रोधी मिसाइल है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=17- कपूथका है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=18- डीआरडीओ द्वारा निर्मित पहला हल्का हेलीकॉप्टर है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=19- डीआरडीओ की स्थापना?

Correct! Wrong!

प्रश्न =20- स्थापना के साथ डीआरडीओ का महानिदेशक किसे बनाया गया?

Correct! Wrong!

प्रश्न=21- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की स्थापना कब की गई?

Correct! Wrong!

प्रश्न=22- भारत का पहला प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=23- किसको को दागो और भूल जाओ टैंक रोधी प्रक्षेपास्त्र भी कहा जाता है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=24-CSIR-वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद का अध्यक्ष होता है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=25- भारत का प्रथम हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=26- स्वदेश निर्मित प्रथम हल्का लड़ाकू विमान है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=27- ब्रह्मोस जो एक प्राध्वनिक मिसाइल है किस देश के साथ भारत ने इसको विकसित किया ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=28-DRDO का मुख्यालय है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=29- भारत में बनी पहली पनडुब्बी कौन सी थी?

Correct! Wrong!

प्रश्न=30-हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड का मुख्यालय कहाँ पर है ?

Correct! Wrong!

31.भारत का पहला स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत है-?

Correct! Wrong!

32."C-17ग्लोब मास्टर"है-?

Correct! Wrong!

33.'शहाब-3 व हौत' प्रक्षेपात्र संबंधित है-?

Correct! Wrong!

34.भारत का पहला सामरिक अड्डा बनाया जा रहा है-?

Correct! Wrong!

35."निशांत" है-?

Correct! Wrong!

36.एक्स-51 क्या है-?

Correct! Wrong!

37.भारत की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल है।

Correct! Wrong!

38. सतह से सतह पर मारने वाली भारतीया रक्षा मिसाइल को सी है।

Correct! Wrong!

39.भारत की टैंक प्रतिरोधी मिसाइल है।

Correct! Wrong!

40.DRDO के द्वारा कौन सा मिसाइल कार्यकर्म बंद कर दिया गया है ।

Correct! Wrong!

41. भारत की लघु दूरी प्रक्षेपात्र है।

Correct! Wrong!

42.अग्नि का नाम जुड़ा है।

Correct! Wrong!

प्रश्न=43-कथन A सागरिका पनडुब्बी द्वारा प्रक्षेपित किया जाने वाला प्रक्षेपास्त्र हैं। कथन B पृथ्वी मिसाइल के समान हैं। कथन C -INS अरिहंत पर स्थापित किया जायेगा ।

Correct! Wrong!

प्रश्न=44-कथन A बेलिस्टिक पथ पर गति करने के कारण इन प्रेक्षेपास्त्रों को बेलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र कहते है। कथन B इनको राडार से पहचान कर् नष्ट करना बड़ा मुश्किल है ।

Correct! Wrong!

प्रश्न=45- कथन A टेसीथॉमस को अग्नि पुत्री कहते हैं । कथन B ये अग्नि 5 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर थी।

Correct! Wrong!

प्रश्न=46-वायु सेना का गरुड़ व navy का वरुण युद्धाभ्यास किस देश की सेना के साथ होता है

Correct! Wrong!

प्रश्न=47-T90 टेंक का भारत में नामकरण किया गया है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=48- निम्नलिखित मे से भारतीय प्रक्षेपास्त्रों के पूर्ण स्वदेशी कार्यक्रम का निर्माता कौन कहलाता है

Correct! Wrong!

प्रश्न=49-भारतीय सुरक्षा के सन्दर्भ मे ध्रुव क्या है।

Correct! Wrong!

प्रश्न=50-अग्नि ll प्रक्षेपास्त्र का परास है लगभग-

Correct! Wrong!

प्रश्न=51-निम्नलिखित मे से कौन-सा आधुनिक टैंक हैं।

Correct! Wrong!

प्रश्न 52 आईएनएस किलटन के बारे में असत्य कथन कौनसा है-

Correct! Wrong!

प्रश्न 53 भारत में परमाणु हथियारों के उपयोग कें निर्णय हेतु कितनी स्तरीय व्यवस्था है?

Correct! Wrong!

प्रश्न 54 भारत की परमाणु नीति के कुछ तथ्य: 1) भारत युद्ध की स्थिति में परमाणु हथियार का इस्तेमाल पहले नहीं करेगा। 2) जैविक व रासायनिक हथियारों के हमले की स्थिति में भारत ने परमाणु हमले का विकल्प खुला रखा है। 3) भारत उन देशों के विरुद्ध परमाणु हथियार का उपयोग नहीं करेगा जो परमाणु शक्ति सम्पन्न न हो निम्न कूट की सहायता से सत्य कथन का चयन करें-

Correct! Wrong!

प्रश्न 55 भारत नें पहली पनडुब्बी किससे प्राप्त की और क्या नाम रखा?

Correct! Wrong!

प्रश्न 56 निम्न में से हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है-

Correct! Wrong!

Defense technology Quiz ( रक्षा प्रौद्योगिकी )
VERY BAD! You got Few answers correct! need hard work.
BAD! You got Few answers correct! need hard work
GOOD! You well tried but got some wrong! need more preparation
VERY GOOD! You well tried but got some wrong! need preparation
AWESOME! You got the quiz correct! KEEP IT UP

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Specially thanks to post and quiz writers ( With Regrads )

P K Nagauri, हरिओम शर्मा धौलपुर, प्रीति मिश्रा अहमदाबाद, चंद्रप्रकाश सोनी पाली, पन्ना चुरू, रमेश डामोर सिरोही, प्रियंका जी गर्ग, मोनिका वर्मा चित्तौडगढ, रणजीत सिंह भरतपुर, देवकी नन्दन राठौर