Disease & Health Care 

रोग एवं स्वास्थ्य देखभाल 

शरीर में होने वाली अनेक प्रकार की अनियमितताओं को मानव रोग कहा जाता है रोगों के उपचार के लिए दवाओं का प्रयोग सर्वप्रथम हिप्पोक्रेटस ने किया था इस कारण इन्हें औषधि विज्ञान का पिता कहा जाता है

रोग का कीटाणु सिद्धांत रोग अनेक सूक्ष्म जीव तथा हानिकारक पदार्थों से उत्पन्न होते हैं रॉबर्ट कोच ने यह प्रमाणित किया कि पशुओं में होने वाले एंथ्रेक्स रोग सूक्ष्म जीवी जीवाणु द्वारा होता है यह जीवाणु एंथ्रेक्स रोग सूक्ष्मजीवी था रॉबर्ट कोच का यही सिद्धांत रोग कीटाणु सिद्धांत कहलाता है

मानव रोगों को दो वर्गों में रखा गया है

  • जन्मजात रोग ( Congenital disease )
  • उपार्जित रोग ( Acquired disease )

1⃣ जन्मजात रोग ( Congenital disease )-  यह रोग गर्भावस्था तथा जन्म के समय ही जीवो में में विद्यमान रहते हैं यह रोग अनेक कारणों से हो सकते हैं जैसे गर्भावस्था के समय चोट या भूर्ण के गुण सूत्रों में असमानता आदि हीमोफीलिया अजय की विकार वर्णांधता आदि जन्मजात रोग

2⃣  उपार्जित रोग ( Acquired disease )- यह रोग जन्म के बाद तथा जीवन काल के दौरान शरीर में उत्पन्न होते हैं उपार्जित रोग दो प्रकार के होते हैं

▶ संक्रामक रोग
▶ असंक्रामक रोग

पैथोजन सुक्ष्म जीव जो रोग उत्पन्न करते है रोगों का अध्ययन पैथोलॉजी है

मानवों में रोग उत्पन्न करने के लिये विभिन्न कारको को उत्तरदायी माना जाता है, जिनमे निम्न है- 

  1. कवक जनित रोग ( Fungal diseases) –
  2. प्रोटोजोआ जनित रोग ( Protozoa-borne disease )
  3. जीवाणु जनित रोग ( Bacterial diseases )
  4. कर्मी जनित रोग ( Karmic disease)-
  5. वाइरस जनित रोग ( Viral Disease )-
  6. लैंगिक संसर्ग(STD) बीमारी ( Sexually Transmitted Infections (STD) )-
  7. छूने या स्पर्श होने वाले रोग ( Touching diseases )-

A. जीवाणु ( Bacterium )

अधिकतर जीवाणु जनित रोग एक्यूट रोग में आते हैं परंतु TB और कुष्ठ क्रोनिक में आते हैं

  • खोज- ल्यूवेनहॉक
  • जीवाणु जनित रोग

1. टायफाइड / मोतीझरा ( Typhoid / motijara )

यह रोग साल्मोनेला टाइफी द्वारा फैलाया जाता है इस में आंत्र संक्रमित हो जाती है इसकी जांच के लिए विडाल टेस्ट कराया जाता है

प्रभावित अंग- आंते (पाचन तंत्र)
माध्यम- दूषित जल
कारक- साल्मोनेला टाईफी
टीका- TAB/ O.T.V( oral typhoid Vaccine)
टेस्ट- विडाल टेस्ट

2. टी.बी / तपेदिक/ क्षयरोग ( TB / Tuberculosis )

प्रभावित अगं – फेफड़े( श्वसन तंत्र)
माध्यम- वायु
कारक- माइकोबैक्टीरिया टयूबर कुलोसिस
टीका- BCG ( Bacille calmette guerin)
DOTS ( Directly observed treatment , short- course)

3. काली खांसी/ कुकर खांसी ( Black cough )

प्रभावित अंग- फेफड़ा(श्वसन तंत्र)
कारण- हिमोफिलस परटुसिस
टीका- DTP( diphtheria, pertussis whooping cough and tetanus)

4. हैजा ( Cholera )- 

Vibrio कोलेराई के कारण फैलता है यह एक संक्रामक रोग है मनुष्य को चावल के मांड के समान उल्टी व दस्त आते हैं और 6 घंटे में उसकी मृत्यु हो जाती है अब इसका उन्मूलन कर लिया गया है
प्रभावित अंग – आंते ( पाचन तंत्र)
कारण- निर्जलीकरण
उपाय- ORS

5. निमोनिया ( Pneumonia )

प्रभावित अंग – फेफडा ( श्वसन तंत्र)
माध्यम- वायु

6. प्लेग ( Plague )

एपिसोड द्वारा फैलने वाला रोग है जो चूहों के संक्रमण से फैलता है इससे लसिका की गांठे फूल जाती हैं यह रोग महामारी के रूप में फैल चुका है अब इसका भी उन्मूलन किया जा चुका है

7. टिटनेस ( Tetanus )

यह रोग क्लोस्ट्रीडियम टेट्नाइ द्वारा फैलाया जाता है इस मे देह अकड जाती है जबड़े भिच जाते हैं इसलिए इसे लॉक जा भी कहते हैं इस रोग में तंत्रिका तंत्र बुरी तरह प्रभावित होता है जीवाणु टिटेनोस्पोरीन नामक पदार्थ बनाता है इसके बचाव के लिए कटने या छिलने के बाद या अंदरूनी चोट लगने के बाद 6 घंटे के भीतर एटीएस का इंजेक्शन लगवाना चाहिए

जीवाणु जनित रोगों के बचाव के लिए एंटीबायोटिक मेडिसिन दी जाती है

B. विषाणु ( Virus )

विषाणु जनित रोगों के लिए अभी तक किसी प्रकार की एंटीबायोटिक बनाना संभव नहीं हो पाया है इसलिए कैंसर को छोड़कर शेष सभी ऐसी बीमारियां जिनके लिए एंटीबायोटिक ना दी जा सके विषाणु जनित रोगों की कैटेगरी में आती है

खोज- इवालोवेस्की ने तंबाकू के पत्ते मे मोजेक रोग
विषाणु जनित रोग-

1. डेंगू / पीत ज्वर / हड्डी तोड़ बुखार ( Dengue / yellow fever / bone break fever )

डेंगू इसका वाहक क्यूलेक्स प्रजाति की मादा मच्छर है जिसे एडीज एजिप्टी कहते हैं यह भी एक विषाणु जनित रोग है जिसमें प्लेटलेट की भारी मात्रा में कमी हो जाती है

प्रभावित अंग- यकृत
वाहक- एडीज मच्छर
टेस्ट- टार्नीक्वेट टेस्ट

2. चिकनगुनिया ( Chikungunya )

प्रभावित अंग – यकृत
वाहक- एडिज मच्छर

3. चेचक ( Chicken pox )

यह वेरी ओला विषाणु से उत्पन्न होता है यह 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सामान्य तथा वयस्कों में कम परंतु घातक होता है संक्रमण मुखीय, नासा, कोशीय पदार्थों के मुक्त होने वाली तथा धब्बों से फैलता है  लाल रंग के धब्बे घावों में बदल जाते हैं निशान सबसे पहले चेहरे पर बाद में संपूर्ण शरीर पर परंतु उदर पर कम होते हैं चेचक के टीके की खोज एडवर्ड जेनर ने 1798 में की थी

प्रभावित अंग – त्वचा( स्थायी निशान)
कारक- वेरिओला वायरस

छोटी चेचक ( Small pox )

यह वेैरीसैला जूस्टर के द्वारा 14 से 16 दिनों की सुप्तावस्था के द्वारा फैलता है यह संसर्ग रोग है जो जाड़े और बसंत में होता है उपचर्मीय झुर्रियां तथा गुलाबी केंद्रकीय धब्बों की उदर माथे चेहरे पर उपस्थिति इसके लक्षण है असहजता दर्द होता है निशान द्रव्य युक्त पुटिकाओ तथा फिर धब्बों में परिवर्तित हो जाते हैं धब्बे बिना कोई निशान छोड़े समाप्त हो जाते हैं छोटी चेचक से प्रतिरक्षण हेतु एट्टीन्युएटिड वायरस प्रतिरक्षी उपलब्ध है

4. पोलियो ( Polio )

प्रभावित अंग -मेरूरज्जु( तंत्रिका तंत्र)
दवाई- साल्क वैक्सीन/OPV ( Oral polio Vaccine)
पोलियो दिवस- 24 अक्टूबर

5. स्वाइन फ्लू ( Swine flu )

प्रभावित अंग – फेफडा (श्वसन तंत्र)
कारक- H1 N1
वाहक- सुअर
दवा – टमी फ्लू

6. बर्ड फ्लू ( Bird flu )

कारक -H5 N1, H9 N2
वाहक- मुर्गी

7.AIDS- Acquired Immune Deficiency Syndrome

एड्स एक विषाणु जनित रोग है एड्स का विषाणु HIV विषाणु कहलाता है यह एक आरएनए विषाणु है सबसे पहले ल्युमोन टैगनियर 1984 में इंस्टिट्यूट ऑफ पेरिस में एड्स विषाणु की खोज की एड्स का विषाणु सर्वप्रथम बंदरों से मनुष्य में पहुंचा यह सबसे पहले अफ्रीकी मानवों में पाया गया इसका वायरस रिट्रोवाइरस प्रकार का होता है जो मानव कोशिका में रेप्लीकेशन करके स्वयं की कॉपी बनाता है इसका बाह्य स्तर ग्लाइकोप्रोटीन का होता है जो मैक्रोफेज और टी लिंफोसाइट की सतह पर उपस्थित CD4 ग्राही से चिपक जाता है

संक्रमण- यह समलिंगी या विषमलिंगी संभोग द्वारा, रक्त आदान-प्रदान द्वारा, संक्रमित सुइयों के द्वारा, संक्रमित माता से शिशु को
एड्स के लक्षण-  फेफड़ों में संक्रमण लगातार खांसी, छाती में दर्द में लगातार ज्वार है शरीर का वजन कम होना, पेट में दर्द, व्यवहारिक परिवर्तन, याददाश्त कमजोर होना
परीक्षण- रुधिर में HIV विषाणु पाया जाना, एलिजा टेस्ट या वेस्टर्न ब्लॉट मेथड द्वारा CD4 कोशिकाओं की संख्या द्वारा
उपचार – Zidovudine AZT नामक दवाई एड्स के उपचार में प्रयुक्त की जाती हैं डायडेनोसिन, लैमिवुडीन, स्टैवुडिन ट्रांसक्रिप्टेज बाधक है

8. सार्स ( Sars )

सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम इसरो का उन्मूलन कर लिया गया है परंतु यह एक विषाणु जनित रोग था  सभी प्रकार के फ्लू विषाणु जनित होते हैं

9. खसरा ( Measles )

यह रूबीओला विषाणु पो्लीनोसा मार्बीलोरम द्वारा होता है यह संपर्क, संक्रमणीय पदार्थों तथा शरीर के स्त्रावी पदार्थों द्वारा फैलता है विषाणु श्वसन तंत्र जाता कंजकि्टवा के द्वारा प्रवेश करता है इसे खुजली, झुर्रियां लाल दाग जो कानो के पीछे से प्रारंभ होकर माथे, चेहरे, पूरे शरीर पर फैलते हैं  इस रोग की जटिलता को रोकने के लिए MMR के टीके दिए जाते हैं (1 साल की उम्र) में टीकाकरण किया जाता है

C. प्रोटोजोआ जनित रोग ( Protozoa-borne disease )

ज्यादातर प्रोटोजोआ जनित रोग एंटअमीबा हिस्टोलिटिका के कारण होते हैं छोटे-छोटे बच्चों में अमीबिका पेचिस तथा दस्त के उदाहरण काला अजार इसकी वाहक रेत मक्खी है अफ्रीकन निद्रा रोग इसकी वाहक सीसी नामक मक्खी है जो लीसमानिया डोनोवानी तथा अन्य प्रजातियों द्वारा होता है

1. मलेरिया ( Malaria )

कारक- प्लाजमोडियम परजीवी ( प्रोटोजोआ)
वाहक- मादा ऐनोफेलिज मच्छर
दवा- कुनैन (क्लोरोकुनेन) सिनकोना वृक्ष की छाल से प्राप्त

D. कवक जनित रोग ( Fungal diseases )

कवक जनित अधिकतर रोग दाद खाज खुजली के रूप में त्वचा पर होते हैं इसके अलावा एथलीट फुट भी कवक जनित रोग है

E. कृमि जनित ( Worm-born )

फीता कृमि जिसका प्राथमिक परपोषी सूअर और द्वितीयक परपोषी मनुष्य है सूअर का अदरक का मांस खाने से टीनिएसिस रोग होता है लीवर फ्लूक द्वारा भेड़ों के लिवर में संक्रमण होता है गोलकृमि द्वारा मनुष्य की आंतों का संक्रमण किया जाता है

F. वायरस जनितरोग ( Virus borne disease )

वायरस रोग उत्पन्न करने वाले अति सूक्ष्म परजीवी हैं इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से ही देखा जा सकता है इनमें निर्जीव एवं सजीव दोनों के लक्षण पाए जाते हैं इनका अध्ययन जीव विज्ञान की एक पृथक शाखा विषाणु विज्ञान के अंतर्गत होता है पाश्चर इवनोव्स्की ने वायरस की खोज 1892 में की थी

हेपेटाइटिस ( Hepatitis ) — यह यकृत संबंधी रोग है रोगजनक हेपेटाइटिस वायरस संदूषित जल दूषित भोजन संक्रमित सुई आदि से फैलता है हेपेटाइटिस ए बी सी डी ई एवं जी प्रकार का होता है परंतु हेपेटाइटिस ए व बी मुख्य हैं उपचार – इंटरफेरॉन इंजेक्शन लगाया जा सकता है

रेबीज ( Rabies )

रोगजनक -रेहीब्डो वायरस
यह रोग संक्रमित कुत्ते बिल्ली भेड़िया बंदर आदि के काटने से फैलता है रेबीज को जल वित्तीय हाइड्रोफोबिया भी कहते हैं रोगी के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के क्षतिग्रस्त हो जाने से उसकी वेदना पूर्ण मृत्यु हो जाती है पाश्चर उपचार के रूप में उधर में 14 टीके तथा वर्तमान में प्रचलित पांच इंजेक्शन वाले टीके लगाए जाते हैं जो कि 0 ,3, 7 ,14 तथा 30 वे दिन लगाए जाते

पोलियो ( Polio )

रोगजनक एक प्रकार का एंटीवायरस है जो दूषित भोजन दूध एवं जल द्वारा संचालित होता है पोलियो अथवा पोलियो माय लेटेस्ट बच्चों में पाया जाने वाला भयंकर रोग है इसके वायरस संदूषित भोजन जल मिट्टी दूध आदि के माध्यम से बच्चे के शरीर में प्रवेश कर आंतों में वृद्धि करते हैं यहां से यह वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में पहुंचकर उसे क्षतिग्रस्त कर देते हैं जिसके फलस्वरुप पक्षाघात होने से बालक अपंग हो जाता है इसलिए पोलियो को बाल पक्षाघात भी कहते हैं उपचार –पोलियो वैक्सीन

Influenza ( फ्लू )
रोगकारक -अर्थोंमिक्सो वायरस
प्रभावित अंग -श्वास नली
संक्रमण- संक्रमित व्यक्तियों के कफ द्वारा संक्रमित होता है
उपचार -एंटीबायोटिक दवाएं

पीला ज्वर ( Yellow fever )

वायरस जनित संक्रामक रोग है
रोगकारक -आरबों वायरस
संक्रमण -ऐडीस मच्छर
उपचार टीके से पूर्ण बचाव इसका निर्माण मैक्स थीलर ने किया इस कार्य के लिए 1951 में नोबल पुरस्कार दिया गया

गलसुआ

रोगकारक -मम्म्स वायरस- पैरामिक्सओ
संक्रमण – रोगी की लार से
कर्ण के नीचे स्थित पेरोटिड ग्रंथि में सूजन आ जाती है
उपचार-नमक के पानी की सिकाई और टेरामाईसिन के इंजेक्शन

अवधि के आधार पर निम्न प्रकार के होते हैं—

1. क्रोनिक – जो रोग लंबे समय तक अथवा लंबे समय के दौरान अथवा फैलने में लंबा समय लेते हैं उन्हें क्रॉनिक डिजीज कहते हैं इन रोगों का निदान जल्दी नहीं हो पाता जब यह रोग पूरी तरह फैल जाते हैं तब प्रभाव में आते हैं इनका प्रभाव शरीर पर लंबे समय के लिए होता है तथा इनके इलाज में समय भी अधिक लगता है
जैसे TB,कुष्ठरोग, एड्स, कैंसर

2. एक्यूट डिजीज – ये रोग अचानक से फैलते हैं तथा कभी-कभी यह रोग महामारी के रूप में फैल जाते हैं अक्सर जीवाण्विक रोग ऐसी कैटेगरी में आते हैं उदाहरण प्लेग, कॉमन कोल्ड.

अनुवांशिकता के आधार पर लोगों का वर्गीकरण यह 2 प्रकार के होते हैं

1.अनुवांशिक(जन्मजात)- वे रोग जो गुणसूत्रों में परिवर्तन के कारण शिशुओं में उत्पन्न हो जाते हैं अथवा अनुवांशिक गड़बड़ियों के कारण उत्पन्न हो जाते हैं यह दो प्रकार के हो सकते हैं लैंगिक गुणसूत्रों में परिवर्तन के कारण तथा सोमेटिक क्रोमोसोम में परिवर्तन के कारण

Auto-Some में अनियमितता के आधार पर- सिकल सेल एनीमिया इस रोग में आरबीसी सिकलसेल के समान हो जाती है हंसीयाकार की हो जाती है यह 1 अनुवांशिक रोग है तथा ऐसी स्थिति में रक्ताल्पता पैदा हो जाती है 21 साल की उम्र तक मनुष्य की मृत्यु हो जाती है सिकल सेल एनीमिया के व्यक्ति मलेरिया के प्रति प्रतिरोधी होते हैं

थैलीसीमिया- यह भी रक्ताल्पता से संबंधित रोग है इसमें हीमोग्लोबिन विकृत हो जाता है

हीमोफीलिया – यह एक अनुवांशिक रोग है इसमें मनुष्य के शरीर में रुधिर का थक्का बनना बंद हो जाता है जिन 13 कारकों द्वारा रक्त का थक्का जमता है उसमें से एंटी हीमोफीलिया फैक्टर नामक कारक अनुपस्थित होता है

वर्णांधता- यह भी एक अनुवांशिक रोग है इस रोग से पीड़ित व्यक्ति लाल तथा हरे रंगों का विभेद नहीं कर पाता है क्योंकि कॉर्निया मे शंकु अनुपस्थित होते हैं

मनुष्य में हीमोफीलिया तथा वर्णांधता की वंशागति की समान ही होती है इसके लक्षण X क्रोमोसोम पर उपस्थित होते हैं इसलिए यह रोग स्त्रियों में बहुत कम पाया जाता है परंतु स्त्रियां इसकी वाहक अवश्य होती हैं यदि किसी सामान्य व्यक्ति की शादी वाहक महिला से करती जाती है तो उसकी 50% लड़कियां वाहक तथा 50% लड़के रोगी होंगे परंतु यदि किसी रोगी व्यक्ति की शादी वाहक महिला से करदी जाए तो 50% लड़कियां वाहक और शेष रोगी तथा 50% पुरुष रोगी और 50% पुरुष सामान्य होंगे

रसायनों के आधार पर ( Chemicals basis )

कुछ रसायनों द्वारा मनुष्य में विभिन्न प्रकार के रोग होते हैं जैसे एलर्जी अधिकतर मनुष्यों को किसी विशेष रसायन से एलर्जी होती है जब यह मनुष्य उस रसायन के संपर्क में आते हैं तो एलर्जी हो जाते हैं इन कारकों को एलर्जन्स कहते हैं

कुछ रसायनों द्वारा शरीर में कोशिका विभाजन अनियंत्रित हो जाता है इस स्थिति को कैंसर कहते हैं उन पदार्थों को कार्सिनोजेनिक पदार्थ कहा जाता है

कैंसर दो प्रकार के होते हैं

  1. स्थानीय कैंसर 
  2. मैलिग्नेंट कैंसर

स्थानीय कैंसर का इलाज गामा किरणों द्वारा तथा कीमोथेरेपी द्वारा किया जाता है परंतु मैलिग्नेंट कैंसर का कोई इलाज अभी तक संभव नहीं हो पाया है

ब्लड कैंसर इसमें डब्लू बी सी की मात्रा अनियमित रूप से बढ़ जाने के कारण इस रोग को ल्यूकिमियां भी कहते हैं इस के इलाज के लिए गोल्ड 198 के रेडियोधर्मी पदार्थ का इस्तेमाल किया जाता है

स्टीवन जॉनसन डिजीज जब शरीर में एंटीबायोटिक का साइड इफ़ेक्ट होता है तो शरीर में ऑटोइम्यून प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है और त्वचा पर टैन जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं समस्त त्वचा झढ़कर निकल जाती है

सिलिकोसिस खानों में काम करने वाले व्यक्तियों में यह बीमारी बहुत ज्यादा मात्रा में पाई जाती है फेफड़ों में एसबेस्टास के दूषण के कारण यह होता है

पोषक तत्वों की कमी के कारण

प्रोटीन की कमी के कारण प्रोटीन की कमी के कारण क्वाशियोरकर तथा मेरास्मस् डिजीज हो जाती हैं कि मेरासमास डिसीज़ अन्य खनिज पदार्थों की कमी के कारण भी होती है खनिज तत्वों की कमी के कारण शरीर कुपोषण का शिकार हो जाता है

विटामिन की कमी के कारण
विटामिन ए की कमी से रतौंधी
विटामिन बी की कमी से त्वचा संबंधित रोग बेरी बेरी विटामिन सी की कमी से स्कर्वी
विटामिन डी की कमी से हड्डियों के संबंधित रोग जैसे रिकेट्स हो जाते हैं
विटामिन ई की कमी से बांझपन
विटामिन के की कमी से खून का थक्का देरी में जमना
चित्रकूट त्रिपाठी

रोग की उत्पत्ति के कारक ( Disease Generation Factors )

(1) जैविक कारक – ऐसे जीव जो रोग के कारक बनते है उन्हें रोगजनक कहते हैं।जैसे-वायरस, जिवाणु, माइकोप्लाज्मा,फंजाई, प्रोटोजो ऑन्स, हेलमिन्थीज आदि।
(2) रासायनिक कारक – ऐसे रसायनिक पदार्थ जो शरीर में रोग उत्पन्न करते हैं जैसे प्रदूषक बीजाणु एवं परागकण शरीर मे उत्पन्न होने वाले यूरिया तथा यूरिक अम्ल आदि।

(3) पोषण कारक- पोषी पदार्थों की अधिकता या कमी से रोग जनक कारक की तरह कार्य करती है जैसे-खनिज वसा, प्रोटीन, विटमिन तथा कार्बोहाइड्रेट आदि।
(4)यांत्रिक कारक- घर्षण, चोट लगना, घाव होना ,हड्डियों में फेक्चर, मोच आदि।

(5)भौतिक कारक – गर्मी, सर्दी, विद्युत करंट, ध्वनि या विकिरणों द्वारा रोग उत्पन्न होना।
(6)पदार्थों की अधिकता या कमी- हार्मोन तथा एंजाइम की अधिकता या कमी से रोग।

टिके ( Vaccines )-

  • DPT (डिफ्थीरिया, परतुमिनुस , टिटनेस)
  • ATS (Anti -Toxoide-serum)
  • BCG(बेसिलस, केलमेट गुरिन,)
  • TAB( टाइफाइड ,पैरा टाइफाइड,)
  • AIDS (RP- 2001)

स्वास्थ्य देखभाल ( Healthcare )

मानव शरीर रोग एवं स्वास्थ्य देखभाल प्रतिरक्षा दो प्रकार की होती है
1.प्राकृतिक या जन्मजात प्रतिरक्षा
2.अर्जित प्रतिरक्षा

टीकाकरण या वैक्सीन– टीकाकरण में व्यक्ति के शरीर में रोग विशेष के दुर्बल अथवा मृत रोगाणु या उनके उत्पाद प्रविष्ट करवाए जाते हैं इन्हें नष्ट करने के लिए श्वेता को विशेष प्रकार के प्रोटीन पदार्थ उत्पन्न करते हैं जिन्हें प्रतिरक्षी पदार्थ कहते हैं भविष्य में प्राकृतिक रूप से उस रोग विशेष के रोगाणुओं के प्रविष्ट हो जाने पर प्रतिरक्षी पदार्थ उनकी पहचान कर उन्हें तुरंत नष्ट कर देते हैं

  • स्वतंत्रता के बाद के युग में स्वास्थ्य की देखभाल से संबंधी ढांचे में व्यापक विकास देखने को मिला।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के कार्य पर अपना ध्यान केंद्रित कर स्वास्थ्य सेवा योजना आरंभ करने की पहल करने वाले अनेक देशों में से भारत भी एक हैं।
  • स्वतंत्र भारत में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की आधारशिला “भोरे समिति” ने रखी थी।
  • स्वतंत्र भारत के समय देश की स्वास्थ्य सेवाओं का मूल स्वरूप मुख्य रूप से नगरीय जीवन और चिकित्सा पर आधारित था जो रोगी इन अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों पर आते थे उनकी चिकित्सा मात्र का रोग ठीक करने के लिए की जाती थी इन स्वास्थ्य सेवाओं की ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच अत्यंत सीमित थी। क्योंकि उस समय रोगों की रोकथाम संबंधित सेवाएं सीमित मात्रा में थी।
  • पहली पंचवर्षीय योजना में प्राथमिक,उच्चतर तथा अन्य प्रकार के चिकित्सा केंद्रों को जोड़ने का प्रयास किया गया।
  • इन परिवर्तनों के परिणाम स्वरूप मृत्यु दर,पोषण की कमी से होने वाली बीमारियों में भी कमी आई।
  • स्वास्थ्य सेवा योजना की तरह भारत में स्वास्थ्य कर्मचारियों की योजना पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। देश में अर्ध प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी और डॉक्टर तथा विशेषज्ञ की अधिकता जैसी विसंगतियाँ अब भी विद्यमान हैं।
  • तेजी से बदलते स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में यह आवश्यक है कि सभी कुशल तथा अर्ध कुशल कर्मचारी समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करें। जिससे उनका ज्ञान तथा निपुणता बढ़े।
  • भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद देश में जैव चिकित्सा अनुसंधान की प्रमुख संस्था है। जैव चिकित्सा तथा स्वास्थ्य प्रणाली अनुसंधान का कार्य,अनुसंधान संस्थान विश्वविद्यालय,चिकित्सा महाविद्यालयों और अन्य गैर सरकारी संगठनों द्वारा किया जाता है। इस समय अनेक एजेंसियां उन्हें धन प्रदान करती हैं जिनमें आईसीएमआर,डीबीटी,सीएसआईआर तथा सम्बद्ध मंत्रालय शामिल हैं।
  • स्वतंत्रता के समय संक्रामक रोग देश में रुग्णता तथा मृत्यु का प्रमुख कारण थे। यद्यपि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। लेकिन पिछले चार दशकों में संक्रामक रोगों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित अनेक कार्यक्रम आरंभ किए गए । इनमें मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम सबसे पुराना है। इसकी शुरुआत 1953 में की गई थी। और मलेरिया से होने वाली रुग्णता तथा मृत्यु दर को कम करने में विशेष सफलता प्राप्त हुई। पूर्वोत्तर राज्यों में होने वाली इस बीमारी की रोकथाम के लिए शत प्रतिशत सहायता प्रदान की जा रही है। अन्य रोगवाहक बीमारियों पर भी उचित ध्यान दिया जा रहा है । लेकिन काला अजर जैसे रोगों का पूर्व उभरना भी चिंता का विषय है।
  • आठवीं योजना में निम्न रोगों पर ध्यान दिया गया..टीबी,कोढ तथा एचआईवी आदि।
  • अगर पर्यावरण की निरंतर बिगड़ती स्थिति से सफाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली कि यह कमियां जारी रही तो भविष्य में संक्रामक रोगों की पूर्ण रोकथाम असंभव हो जाएगी।

पिछले 50 वर्षों में स्वास्थ्य सेवा की मूलभूत सुविधाओं तथा कर्मचारियों की संख्या में जनता के हित में व्यापक विस्तार हुआ है। प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाए गए और उन्हें लागू किया गया। योजना अवधियों में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च की जाने वाली राशि में औसतन काफी वृद्धि हुई है। लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र के आवंटन में उस अनुपात में वृद्धि नहीं की गई

जैसे- जनसंख्या बढ़ने ,नई रोगों के पनपने तथा लोगों की जीवनशैली बदलने के कारण उत्पन्न होने वाले संक्रामक तथा असंक्रामक रोगों की वृद्धि से इनकी देखभाल का बोझ बड़ा है। स्वास्थ्य सेवा के लिए उपयुक्त तकनीकों का विकास हुआ है। तथा लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुक हुए इन सब के कारण “जो संभव है और जो किया जा रहा है।” उनके बीच का अंतर और बढ़ गए हैं यह आवश्यक है कि आगामी दशकों में इस अंतर को कम किया जाएगा। और साथ ही साथ स्वास्थ्य सेवाओं में निष्पक्षता तथा श्रेष्ठता कि सुनिश्चित की जाएगी।।

Disease & Health Care important Question and Quiz

1. रोगाणु क्‍या हैं और उनका फैलाव कैसे होता है?

दुनिया में ज्यादातर रोगाणु मनुष्‍य के लिए हानिरहित हैं। कुछ प्रकार के रोगाणु जैसे भोजन पचाने में हमारी सहायता करने वाले हमें लाभ भी पहुंचाते हैं। परंतु रोगाणुओं के बारे में यह जानकारी होने का महत्‍व है कि वे आपके घर में कैसे फैलते हैं –  विशेषकर इसलिए कि कुछ साधारण स्‍वच्‍छता के कदमों से हम उनके पनपने को काबू में कर सकते हैं।

रोगाणु क्‍या हैं
रोगाणु (या रोगजनक, जैसा उन्‍हें कभी-कभी कहा जाता है) सूक्ष्‍म जीव होते हैं जो यदि हमारे शरीर में दाखिल हो जाएं तो बीमारी और संक्रमण पैदा कर सकते हैं।

सबसे साधारण प्रकार हैं:

  • बैक्‍टिरिया (जैसे साल्‍मोनेला जो भोजन की विषाक्‍तता पैदा कर सकता है)
  • विषाणु (जैसे राइनोवायरस जो आम सर्दी का कारण बनता है)
  • कवक (जैसे ट्रिकोफाइटोन जो एथलीट फुट का कारण बन सकता है)
  • परजीवी (जैसे जियारिडिया इंटेस्‍टिनालिस जो दस्‍त का कारण बन सकता है)

रोगाणु कैसे फैलते हैं?

आपके घर में जहां भी गर्मी और नमी है वहीं रोगाणु और कवक पनप सकते हैं। परंतु विषाणु अलग होते हैं। रोगाणु से आकार में सौ गुना तक छोटे विषाणु को बढ़ने के लिए एक जीवित पोषक के भीतर रहने की जरूरत होती है। इसी प्रक्रिया से वे बीमारी का कारण बनते हैं।

रोगाणु लोगों के हाथों, आमतौर पर संक्रमित लोगों या सतह को छूने से घर में चारों ओर फैल सकता है। रोगाणु हवा में छोटे धूल कणों पर या हमारे मुंह और नाक से खांसी, छींक या बातचीत के दौरान निकली पानी की बूंदों पर यात्रा कर सकते हैं। घर में रोगाणुओं के साधारण स्रोत हैं: संक्रमित भोजन और पानी। नियमित रूप से छुई जाने वाली सतहें जैसे दरवाजे के हत्‍थे, नल, टेलीविजन के रिमोट और टेलीफोन।

सफाई और कचरे के क्षेत्र जैसे कूड़ादान, हौदी और शौचालय।
घरेलू कचरा जैसे उपयोग किया या खराब भोजन, इस्‍तेमाल हुआ रुमाल और गंदे लंगोट। सफाई की वस्‍तु जैसे सफाई के कपड़े, स्‍पंज और गंदे टूथब्रश। पालतू और दूसरे जानवर जैसे चूहे और मक्खियां।अन्‍य लोग।

रोगाणु शरीर में कैसे प्रवेश करते हैं?
कई ऐसे तरीके हैं जिससे रोगाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।

  1. वे दूषित भोजन के साथ खाए जा सकते हैं।
  2. नाक और मुंह के माध्‍यम से सांस लेते समय हवा में मौजूद रोगाणु फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं।
  3. त्‍वचा पर मौजूद रोगाणु अनुपचारित चोट या घाव के माध्‍यम से प्रवेश कर सकते हैं।
  4. वे इंजेक्शन, शल्‍य चिकित्‍सा अथवा जानवर या कीड़े के काटने से हमारे रक्‍तप्रवाह में दाखिल हो सकते हैं।

अंतत: हमारे शरीर के तरल पदार्थों में मौजूद कुछ विशिष्‍ट रोगाणुओं को हम शारीरिक संपर्क के माध्‍यम से दूसरों को पारित कर सकते हैं।
क्‍या आप जानतें हैं… सही परिस्थितियों में, इस्चेरिचिया कोलाई (ई-कोलाई) जैसा रोगाणु प्रत्‍येक 20 मिनट में विभाजित होकर केवल आठ घंटों में एक रोगाणु से 17 मिलियन रोगाणु विकसित कर सकता है।

Quiz 

Questions – 46

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1. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये तथा नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनियेः सूची-I(व्याधि) सूची-II(कारक) A. पेप्टिक व्रण 1. वायरस B. डेंगू 2.प्रोटोज़ोआ C. फीलपाँव 3. कृमि D. मलेरिया 4. बैक्टीरिया कूटः

Correct! Wrong!

2. एंटीबायोटिक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. ये सामान्यतः बैक्टीरिया के महत्त्वपूर्ण जैव रासायनिक मार्ग को बंद कर देते हैं। 2. ये वायरस संक्रमण पर भी कारगर साबित होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Correct! Wrong!

3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. क्षय रोग वायु द्वारा संचरित हो सकता है। 2. हैजा दूषित पानी से संचरित हो सकता है। 3. एड्स केवल लैंगिक संपर्क से संचरित हो सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं

Correct! Wrong!

4. प्रतिरक्षा तंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. HIV संक्रमण में वायरस प्रतिरक्षा तंत्र पर आक्रमण करते हैं। 2. गंभीर संक्रामक रोग प्रतिरक्षा तंत्र की असफलता को दर्शाते हैं। 3. टीकाकरण का सामान्य नियम यह है कि शरीर में विशिष्ट संक्रमण प्रविष्ट कराकर प्रतिरक्षा तंत्र को मूर्ख बनाया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Correct! Wrong!

5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. वायरस मानव शरीर में प्रवेश करते हैं और अपनी जीवन प्रक्रिया के लिये हमारी मशीनरी का उपयोग करते हैं। 2. एडवर्ड जेनर ने चेचक के टीके की खोज की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Correct! Wrong!

6. निम्न में से विषाणु जनित रोगों का है

Correct! Wrong!

7. क्लोस्ट्रीडियम की प्रजातियों द्वारा फैलाए जाने वाला रोग है

Correct! Wrong!

8. ड्रैकन कुलस द्वारा फैलाए जाने वाला रोग है-

Correct! Wrong!

9. एड्स रोग के खोजकर्ता-

Correct! Wrong!

10. सर्वाधिक उत्परिवर्तन विषाणु है -

Correct! Wrong!

11. विज्ञान की वह शाखा जिसमें रोगों का अध्ययन किया जाता है -

Correct! Wrong!

12. विज्ञान की वह शाखा जिसमें कैंसर का अध्ययन किया जाता है -

Correct! Wrong!

13. शरीर के जोड़ो में गठिया रोग किस के जमाव से होता है ।

Correct! Wrong!

14_ पीला बुखार किस के द्वारा फैलता है।

Correct! Wrong!

15_. ह्यड्रोफोबिया किस के द्वारा होता है।

Correct! Wrong!

16_ सिलिकोसिस एक है।

Correct! Wrong!

17_पोलियों का टीका किस ने ख़ोज की।

Correct! Wrong!

18. छोटी माता चिकन पॉक्स रोग संचयन करने वाला वायरस है?

Correct! Wrong!

19. D P T का टीका किस रोग ग्रसित बीमारी होने पर लगाया जाता है?

Correct! Wrong!

20. कौनसा रोग होने पर आयरन की गोली दी जाती है?

Correct! Wrong!

21. छोटी आंत में संक्रमण के कारण टाइफाइड नामक बीमारी हो जाती है जो कि किस प्रकार के जीवाणु के द्वारा होती है?

Correct! Wrong!

22..इंफ्लूएन्जा विषाणु में होता है??

Correct! Wrong!

23.. बीसीजी का टीका कितनी उम्र में लगाया जाता है??

Correct! Wrong!

24.. पेनिसिलिन किससे प्राप्त की जाती हैं??

Correct! Wrong!

25.. पीत ज्वर संचारित किया जाता है??

Correct! Wrong!

26 ..बी-लसिकाणु के द्वारा होने वाली प्रतिरक्षा को क्या कहते हैं??

Correct! Wrong!

27.. पोलियो का विषाणु शरीर में किस प्रकार प्रवेश करता है??

Correct! Wrong!

28.. प्लेग किससे फैलता है??

Correct! Wrong!

29.. काली मौत किसे कहते हैं??

Correct! Wrong!

30.. निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है..

Correct! Wrong!

31.."ELISA" परीक्षण किसके निदान के लिए किया जाता है??

Correct! Wrong!

32. विभिन्न परजीवियों तथा उनसे होने वाले रोगों के संबंध में कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं? 1. कवक (फंजाई) - दाद (रिंगवर्म) 2. कृमि (हेल्मिंथ) - हाथी पाँव (फाइलेरिया) 3. विषाणु (वायरस) - एड्स कूटः

Correct! Wrong!

33. मलेरिया के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?

Correct! Wrong!

34. निम्नलिखित में से कौन-सा रोग प्लैज्मोडियम नामक प्रोटोज़ोआ से होता है?

Correct! Wrong!

35. निम्नलिखित में से कौन-से मानव में होने वाले जीवाण्वीय (जीवाणु द्वारा) रोग हैं? 1. टाइफॉइड 2. एड्स 3. मलेरिया 4. अतिसार पेचिश (डाइसेंटरी) कूटः

Correct! Wrong!

36. न्यूमोनिया रोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. यह एक विषाणु जनित रोग है। 2. इस रोग में मानव शरीर का फेफड़ा संक्रमित हो जाता है। 3. यह एक संक्रामक रोग है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

37. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. मधुमेह रोग से पीड़ित व्यक्ति को इसके नियंत्रण के लिये इंसुलिन लेना पड़ता है। 2. मधुमेह रोग में उपयोग लाया जाने वाला इंसुलिन जानवरों व सुअरों को मारकर उनके अग्नाशय से प्राप्त किया जाता था। 3. वर्तमान में जैव प्रौद्योगिकी की सहायता से जीवाणुओं द्वारा इंसुलिन का निर्माण किया जाता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

38. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं? 1. मानव शरीर में एलर्जी मास्ट कोशिकाओं से हिस्टैमिन और सीरोटोनिन जैसे रसायनों के निकलने के कारण होती है। 2. मानव प्रतिरक्षा तंत्र में लसीकाभ अंग (लिम्फ्वायड ऑर्गन), ऊतक कोशिकाएँ शामिल हैं। कूटः

Correct! Wrong!

39. एड्स के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः 1. एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूनो एफिसियेंसी सिंड्रोम है। 2. इस रोग में मानव शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्युनिटी सिस्टम) कमज़ोर हो जाता है। 3. इस रोग के लिये ज़िम्मेदार वायरस में आरएनए जीनोम को ढकने वाला आवरण होता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

40. एड्स की बीमारी का पता लगाने के लिये कौन-सा परीक्षण (टेस्ट) किया जाता है?

Correct! Wrong!

41. कैंसर रोग के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः 1. ट्यूमर (अर्बुद), कैंसर कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण खड़ी की गई कोशिकाओं का भंडार है। 2. ट्यूमर कोशिकाएँ अत्यावश्यक पोषकों के लिये सामान्य कोशिकाओं से स्पर्धा करती हैं और उन्हें भूखा मारती हैं। 3. शरीर में कैंसर का पता लगाने के लिये ऊतकों की बायोप्सी (जीवूतिपरीक्षा) और हिस्टोपैथोलॉजिकल (ऊतक विकृति) परीक्षण किया जाता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

42. धूम्रपान से शरीर के रक्त में किसकी मात्रा बढ़ जाती है?

Correct! Wrong!

43. जिन रोगियों की शल्यक्रिया (सर्जरी) हुई होती है, उन्हें पीड़ाहार के रूप में दिया जाता है-

Correct! Wrong!

44 कथनः अधिकांश परजीवी (पैरासाइट) रोगजनक होते हैं। कारणः परजीवी, परपोषी (होस्ट) के भीतर या उसके ऊपर रहकर उसे क्षति पहुँचाते हैं। कूटः

Correct! Wrong!

45. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. मानव में टाइफॉइड ज्वर एक जीवाणु जनित रोग है। 2. टाइफॉइड रोग द्वारा मानव शरीर का फेफड़ा संक्रमित होता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

46. विडाल परीक्षण’ का संबंध किस रोग से है?

Correct! Wrong!

Disease & Health Care Quiz ( मानव शरीर- रोग एवं स्वास्थ्य देखभाल )
VERY BAD! You got Few answers correct! need hard work.
BAD! You got Few answers correct! need hard work
GOOD! You well tried but got some wrong! need more preparation
VERY GOOD! You well tried but got some wrong! need preparation
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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

शाहीन कोटा, मोनिका वर्मा चित्तौडगढ, राजवीर प्रजापत, PRAKASH KUMAWAT, गंगासिंह जैसलमेर, श्याम सुंदर चौधरी, श्याम सुंदर चौधरी, निर्मला कुमारी, RAJPAL HANUMANGARH, दिनेश मीना झालरा टोंक, P K Nagauri, जेठाराम लोहिया जोधपुर

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