District administration ( जिला प्रशासन )

Related image
District administration

भारत में प्रशासन की क्षेत्रीय इकाई के रूप में जिले का लंबा इतिहास है जो मौर्यकाल से शुरू होता है मुगल काल के दौरान जिले को सरकार कहा जाता था और इसके प्रमुख को करोड़ी फौजदारी कहते थे लेकिन आज का जिला प्रशासन और जिलाधीश ( Collector) के पद का विकास भारत में British East India Company के समय में हुआ था

भारत में कलेक्टर पद का सृजन 1772 ईस्वी में तत्कालीन गवर्नर जनरल Warren Hastings ने किया था जिले का स्पष्ट रूप से प्रयोग सर्वप्रथम ब्रिटिश काल में किया जाने लगा ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित जिला भारतीय प्रशासन की रीड की हड्डी के रूप में जाना जाने लगा.

संविधान में जिला शब्द का अनुच्छेद 233 में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति ( Appointment of judges) के प्रश्न में प्रयोग किया गया है

जिला प्रशासन में जिला कलेक्टर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है जिला कलेक्टर भारतीय प्रशासनिक सेवा ( IAS )का अधिकारी होता है जिला स्तर पर जिला कलेक्टर राज्य सरकार की आंख कान तथा हाथों के रूप में कार्य करते हैं केन्द्र सरकार की अनुमति के बिना उसे पद विमुक्त नहीं किया जा सकता है। 

कलक्टर अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह चार रुपों मे करता है
1- कलक्टर (राजस्व संग्राहक )
2- जिलाधिकारीके रूप मे
3  जिला मजिस्ट्रेट के रुप में
4- विकास अधिकारी के रुप में

जिले मे कानून व्यवस्था बनाए रखना कलक्टर की जिम्मेदारी है जिले मे पुलिस का मुखिया Police Officer होता है।
कमीश्नरेट प्रणाली मे SP को कानून व्यवस्था लागू करने मे स्वायत्तता होती है राजस्थान मे जयपुर व जोधपुर मे कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है ।
उपखंड अधिकारी को SDM SDO कहा जाता है यह RAS होता है

तहसीलदार तहसील का मुखिया होता है तहसीलदार अरबी भाषा का शब्द है
कार्य  – 1– भू-राजस्व , 2– भू-अभिलेख

 

जिला प्रशासन के उद्देश्य ( Objectives of District Administration )

1 कानून और व्यवस्था ( Law & Order) लागू करना
2 सरकार का भू राजस्व एकत्रित करना
3 जिले की नगरीय व ग्रामीण जनता का कल्याण.

जिलाधीश ( District collector )

जिलाधीश जिला स्तरीय प्रशासन का प्रधान होता है वह जिले में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ विभिन्न विकास कार्यों एवं राजस्व मामलों की देख-रेख करता है जिलाधीश के अधीन उपखंड स्तर पर उपखंड अधिकारी एवं तहसील स्तर पर तहसीलदार प्रशासनिक नियंत्रण व क्रियान्वयन एवं राजस्व संबंधी मामलों की देख-रेख के लिए उत्तरदाई होते हैं

उपखंड अधिकारी ( Subdivision Officer )

राजस्थान के समस्त जिलों को उप खंडों में विभाजित किया गया है प्रत्येक उपखंड उपखंड अधिकारी के अधीन होता है यह राज्य प्रशासनिक सेवा का अधिकारी होता है उपखंड अधिकारी अपने क्षेत्र के प्रशासन से संबंधित लगभग सभी महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन जिलाधीश के निर्देशन में करते हैं

तहसीलदार ( Tehsildar )

उपखंड स्तर के नीचे के राजस्व प्रशासन हेतु राज्य में प्रत्येक उपखंड को तहसीलों में बांटा गया है तहसीलों का प्रमुख अधिकारी तहसीलदार होता है तहसीलदार की नियुक्ति राजस्व मंडल द्वारा की जाती है यह राजस्थान तहसीलदार सेवा के सदस्य होते हैं अधीनस्थ सेवा के अधिकारी होते हुए भी तहसीलदार एक राजपत्रित अधिकारी होता है राजस्थान तहसीलदार सेवा पर नियंत्रण 1956 में राजस्व मंडल को सौंपा गया था

पटवारी ( Patwari )

राजस्व प्रशासन की मुख्य एवं न्यूनतम इकाई ग्राम या गांव होता है गांव का प्रशासक पटवारी होता है प्रत्येक तहसील विभिन्न पटवार क्षेत्रों में विभाजित होती है प्रत्येक पटवार क्षेत्र का प्रमुख अधिकारी पटवारी होता है पटवारी कार्यालय उसके कार्य क्षेत्र के प्रमुख गांव में होता है और वह उसी गांव में निवास करता है पटवारी के पद मुगल काल में प्रचलन में आया था पटवारी सरकारी प्रतिनिधि के रूप में भारत की ग्रामीण जनता के प्रत्यक्ष निकटतम रहा है पटवारी राजस्व प्रशासन में सबसे महत्वपूर्ण होता है

 

District administration ( जिला प्रशासन ) important Question for main exam-

1. शासन सचिवालय का मुखिया कोन होता है ?
उत्तर – शासन सचिवालय का मुखिया मुख्य सचिव होता है जो सामान्यतः भारतीय प्रशासनिक सेवा का वरिष्ठतम अधिकारी एवं मुख्यमंत्री का विश्वास पात्र होता है।

2. गुप्तकाल व हर्ष के समय जिले को तथा जिलाधिकारी को किस नाम से जानते थे ?
उत्तर- गुप्तकाल तथा हर्ष के समय जिले को “विषय” कहा जाता था तथा जिलाधिकारी को”विषयपति”के नाम से जाना जाता था।

3. जिला प्रशासन के विभिन्न स्तर बताइये ?
उत्तर- इसके 3 स्तर होते हैं।
(१) जिला – इस स्तर पर जिलाधीश/ जिला कलेक्टर जिला प्रशासन का प्रधान होता है।
(२) उपखण्ड- इस स्तर पर उपखंड अधिकारी/SDO होता है
(३) तहसील- इस पर तहसीलदार होता है।

4. जिला प्रशासन के मुख्य उद्देश्य बताइये ?
उत्तर- जिला प्रशासन के उद्देश्य :- (१) कानून व्यवस्था बनाये रखना।
(२) सरकार का भु-राजस्व एकत्रित करना।
(३) जिले की ग्रामीण व नगरीय जनता का कल्याण।
(४) समय – समय पर लोकसभा, विधानसभा एवम स्थानीय निकायों के चुनाव करवाना आदि।

5. उपखंड अधिकारी की भूमिका एवं कार्य बताइये ?

उत्तर- उपखण्ड अधिकारी अपने उपखण्ड का भु-राजस्व अधिकारी के रूप में:-
(१) भु-अभिलेख तैयार करना।
(२) सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकना।
(३) उपखंड के कृषि उत्पादन का आकलन करना।
(४) भू-राजस्व वसूली के सम्बंध में दिशा निर्देश देना।
(५) अपने उपखंड में भू-राजस्व से सम्बंधित कानूनों की पालना पर निगरानी रखना।
(६) राजस्व प्रशासन के निम्न स्तरीय अधिकारी जैसे पटवारी, कानूनगो, तथा भु-अभिलेख निरीक्षक पर नियंत्रण एवं निरीक्षण करना।

न्यायिक अधिकारी के रूप में:- भूमि, सीमा विवाद, चारागाह , भु-अभिलेख तथा पंजीकरण, भु-राजस्व ,सम्पति विभाजन आदि से सम्बंधित विवादों का निपटारा करता है।

उपखंड अधिकारी दंडनायक(SDM के रूप में:- अपने क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाये का कार्य करता है।इसके लिए उन्हें पुलिस थानों व चौकियों का निरीक्षण, फौजदारी प्रशासन का संचालन तथा धारा 144 लागू करने का अधिकार प्राप्त है।

प्रशासनिक अधिकारी के रूप में :- गांवों आर्थिक , सामाजिक व विकास कार्यक्रमों को संचालित करने का दायित्व उपखंड
अधिकारी का होता है

Specially thanks to ( With Regards )

ओम प्रकाश सहारण बाड़मेर, कमल सिंह टोंक, राकेश गोयल, प्रियंका गर्ग, राजवीर प्रजापत, गंगा सिंह जैसलमेर

One thought on “District administration ( जिला प्रशासन ) in Hindi”

Comments are closed.