Drainage System of Rajasthan

( राजस्थान की अपवाह प्रणाली )

राजस्थान की अधिकांश नदिया बरसाती है। माही व चम्बल प्रमुख बारहमासी नदियां है बनास व लूनी नदी बरसाती नदिया है।

अपवाह तंत्र की दृष्टि से राजस्थान की नदियों को तीन भागों में बांटा गया है

  • अरब सागर की नदियां 17%
  • अंतः प्रवाह की नदियां 60%
  • बंगाल की खाड़ी 23 %

राजस्थान की अधिकांश नदियां अंतः प्रवाही है क्योंकि यहां मरुस्थल का सर्वाधिक विस्तार है अरावली राजस्थान में जल विभाजक रेखा है क्योंकि यह बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की नदियों को अलग करती है

  • राजस्थान में सतही जल या नदी जल देश की कुल जल का 1 . 16%
  • राजस्थान में भूमिगत जल देश के कुल भूमिगत जल का 1.67 %
  • नाडा या रेल – जालौर में लूनी नदी के अपवाह क्षेत्र को कहते हैं
  • कर्क रेखा को दो बार काटने वाली नदी माही नदी है
  • माघ पूर्णिमा को बेणेश्वर धाम डूंगरपुर में आदिवासियों का कुंभ का आयोजन किया जाता है इस स्थल को त्रिवेणी संगम के नाम से भी जाना जाता है

आंतरिक जल प्रवाह की नदियां ( Rivers of internal water flows )

 वे नदिया जो राज्य में आप के प्रवाह क्षेत्र में ही विलुप्त हो जाती है तथा जिनका जल समुद्र तक नही जा पाता है। ये नदियां काकनी,कांतली,साबी,घग्घर,मेंथा,बाँडी, रूपनगढ़ आदि।

बांगल की खाड़ी का अपवाह तंत्र    

“बीका को बाप बकरी पचा गयो”    —   

  • बी    —    बनास
  • का    —    कालीसिँध
  • को    —    कावेरी
  • बा    —    बाणगंगा
  • प    —    परवन
  • बकरी–    बेड़च
  • प    —    पार्वती
  • चा    —    चम्बल
  • गयो    —    गंभीरी

अन्त: प्रवाह की नदियाँ    

“काका रूस गया घर मेँ”    —   

  • का    —    कातंली
  • का    —    काकनेय
  • रू    —    रूपनगढ़
  • स    —    साबी
  • गया    —    X
  • घ    —    घग्घर
  • र    —    रूपारेल
  • मेँ    —    मेन्था

अरब सागरिय अपवाह तंत्र की नदियाँ    

“मालू सोजा नहीँ तो सांप खा जायेगा”    

  • मा    —    माही
  • लू    —    लूनी
  • सो    —    सोम
  • जा    —    जाखम
  • नही तो    —    X
  • सा    —    साबरमती
  • प    —    पश्चिमी बनास
  • खा    —    खारी
  • जायेगा    —    X

काकनेय/ काकनी नदी ( Kaknayi )

जैसलमेर के कोटड़ी गॉव से होता है जैसलमेर मे बुझ झील को जल देने के पश्चात मीठा खाड़ी नामक स्थान पर विलुप्त हो जाती है

उपनाम – काकनेय, काकनी, मसुरदी।

स्थानीय भाषा मे इसे मसुरदी नदी कहा जाता है ।

कांतली नदी ( Kantli River )

उद्गम – सीकर जिले की खण्डेला पहाड़ियों से होता है । 

सीकर मे बहने के पश्चात झुंझुनू मे बहती हुई मन्दरेला नामक स्थान पर विलुप्त हो जाती है यह नदी झुंझुनू जिले को दो भागो मे बांटती है
इसकी लम्बाई लगभग 100 किमी.है

नदियों के निकट स्थित अभयारण्य ( Sanctuary near rivers )

  1. राष्टीय चम्बल धड़ियाल अभयारण्य :- चम्बल नदी
  2. जवाहर सागर अभयारण्य :- चम्बल नदी
  3. शेरगढ़ अभयारण्य (बारां):- परवन नदी
  4. बस्सी अभयारण्य (चितौड़गढ):- ओऱई व बामनी का उदगम
  5. भेसरोडगड़ (चितौड़गढ़):- चम्बल व बामनी का संगम

Drainage System of Rajasthan important fact – 

  • राज्य की सर्वाधिक लम्बी नदी सर्वाधिक सतही जल वाली नदी चम्बल है।
  • राज्य के कोटा सम्भाग में सर्वाधिक नदिया है।
  • सर्वाधिक बांध चम्बल नदी पर है।
  • चम्बल नदी पर भैंसरोडगढ़ के निकट चूलिया जल प्रपात तथा माँगली नदी पर बूंदी में प्रसिद्ध भीमलत प्रपात है।
  • राज्य में लगभग 60%आंतरिक जल प्रवाह प्रणाली विद्यमान है।
  • सर्वाधिक जिलो में बहने वाली नदियां :-चम्बल, बनास ,लूनी।
  • अन्तर्राजिय सिमा बनाने वाली राज्य की एक मात्र नदी चम्बल है।
  • चम्बल,सोम और जाखम नदियों के संगम पर स्थित बेणेश्वरधाम धाम वनवासियों का महातीर्थ है।
  • सोम नदी के किनारे डूंगरपुर में देव सोमनाथ मंदिर है

 

Quiz 

Question – 65

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

धर्मवीर शर्मा अलवर, अजय मीणा, Mahendra Chauhan, नवीन कुमार, जोगाराम बेनिवाल बाड़मेर, पुष्पेन्द्र कुलदीप झुन्झुनू, सोहन शेरावत जयपुर, P K Nagauri, महेन्द्र चौहान, भवानी सिंह जोधपुर, सुभाष शेरावत 

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