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प्रदेश में अप्रैल 1959 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद का घटन किया गया। सन 1998 में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का गठन किया गया।

विद्युत उत्पादन ( Electricity Generation )

प्रदेश में उत्पादित विद्युत के दो मुख्य स्रोत है- ताप विद्युत और जल विद्युत

ताप विद्युत उत्पादन-

राज्य विद्युत उत्पादन निगम लि.- 14 जनवरी 2000 को यह अस्तित्व में आया। इसके अंतर्गत हरदुआगंज, पारीछा, चन्दौसी, पनकी, अनपरा, ओबरा आदि स्थानों पर कुल 29 इकाइयां कार्यरत है। जिनकी कुल क्षमता 4933 मेगावाट है।

हरदुआगंज ताप विद्युत गृह- राज्य की सबसे पुरानी इस गृह की स्थापना 1942 में अलीगढ़ की निकट की गई थी। एसक पुनरोद्धार 1968 में रूस के सहयोग से किया गया था।

चन्दौसी ताप विद्युत केंद्र- मुरादाबाद के चन्दौसी में दो यूनाइट स्थापित की गई है, जिसकी कुल क्षमता 100 मेगावाट है।

पारीक्षा ताप परियोजना- झांसी की निकट स्थित है। कुल क्षमता 640 मेगावाट है।

ओबरा ताप विद्युत केंद्र- इसकी स्थापना पूर्व सोवियत संघ की सहायता से की गई थी। इसकी कुल क्षमता 1382 मेगावाट है। सिंगरौली कोयला खान (सोनभद्र) इसके निकट है।

अनपरा ए ताप विद्युत केंद्र- सोनभद्र स्थित इस ताप विद्युत केंद्र की क्षमता डेढ़ हजार से अधिक मेगावाट है। यहीं पर अनपरा भी ताप विद्युत केंद्र भी है

पनकी विस्तार ताप परियोजना- कानपुर के पास स्थित इस परियोजना की क्षमता 210 मेगा वाट है।

राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम के केंद्र- NTPC की 7 कार्यरत व 3 निर्माणाधीन इकाईयां है। जो कि निम्न है-

  1. दादरी ताप विद्युत परियोजना (गौतम बुद्ध नगर)
  2. आंवला ताप विद्युत परियोजना (बरेली)
  3. ऊंचाहार ताप विद्युत परियोजना (रायबरेली)
  4. टांडा ताप विद्युत केंद्र (अंबेडकर नगर)
  5. शक्तिनगर सुपर ताप विस्तार परियोजना (सोनभद्र)
  6. औरैया ताप विद्युत केंद्र (औरैया)
  7. रिहंद ताप विद्युत केंद्र (सोनभद्र)
  8. मेजा संयुक्त ताप विद्युत गृह, इलाहाबाद (निर्माणाधीन)
  9. बिल्हौर थर्मल पावर प्लांट (निर्माणाधीन)
  10. टांडा विस्तार ताप विद्युत गृह (निर्माणाधीन)

जल विद्युत उत्पादन

रिहंद बांध जल विद्युत परियोजना- इस परियोजना में सोनभद्र जिले के पिपरी नामक स्थान पर रिहंद नदी पर एक बांध व गोविंद बल्लभ पंत सागर कृत्रिम झील बनाया गया है। जिसमें 50-50 मेगावाट विद्युत क्षमता वाली 6 इकाइयां लगाई गई है। इस केंद्र से पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग 20 जिलों को विद्युत उपलब्ध कराई जाती है।

ओबरा जल विद्युत केंद्र- रिहंद बांध से लगभग 25 किलोमीटर उत्तर में सोनभद्र के ओबरा नामक स्थान पर रिहंद नदी पर एक दूसरा बांध बनाया गया है जिसे ओबरा बांध कहते है। इसकी उत्पादन क्षमता 99 मेगा वाट है।

माताटीला जल विद्युत परि.- यह बांध झांसी के निकट बेतवा नदी पर बनाया गया है। इसे मध्य प्रदेश के सहयोग से निर्मित किया गया था। इसकी उत्पादन क्षमता 30.6 मेगा वाट है।

ऊपरी गंगा नहर पर स्थित गंगा विद्युत क्रम- हरिद्वार के पास से निकलने वाली इस नहर पर *पथरी व मोहम्मदपुर (सहारनपुर), निरगाज़नी व सलावा (मुजफ्फरनगर), भोला (मेरठ), पलरा (बुलंदशहर) तथा सुमेरा (अलीगढ) आदि छोटे-छोटे कई जल विद्युत केंद्र है जिन्हे संपूर्ण रूप से गंगा विद्युत क्रम कहा जाता है। इनकी कुल उत्पादन क्षमता 15.50 मेगा वाट है।

शीतला जल विद्युत परियोजना- निगम द्वारा 3.6 मेगा वाट के इस परियोजना का निर्माण झांसी में किया गया है।

पारीक्षा जल विद्युत केंद्र- झांसी के पास 2×110 मेगावाट क्षमता की यह परियोजना बेतवा नदी पर निर्माणाधीन है।

राजघाट जल विद्युत परियोजना- निगम द्वारा उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की इस संयुक्त परियोजना का निर्माण बेतवा नदी पर ललितपुर जिले में किया जा रहा है।

नरोरा परियोजना

प्रदेश के बुलंदशहर जिले के नरोरा नामक स्थान पर गंगा के निकट स्वदेशी डिजाइन, उन्नत दबाव युक्त तथा भारी जल आधारित 220-220 मेगावाट क्षमता वाले 2 रिएक्टर कार्यरत है। इन दोनों में प्रथम को जनवरी 1991 में तथा द्वितीय को जुलाई 1992 में चालू किया गया था। इतनी ही क्षमता के दो और रिएक्टरों के कार्य पूरा होने वाले हैं।

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चिराग बालियान मुज़फ्फरनगर

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