पर्यावरण उन परिस्थितियों तथा भौतिक दशाओं की प्रदर्शित करता है जो किसी एकाकी जीव या जीव समूह को चारों और से आकृत करती है उसे प्रभावित करती है। पृथ्वी के चारों ओर पाए जाने वाला वह आवरण जहां जीवन संभव है पर्यावरण कहलाता है इनवायरमेंट शब्द फ्रेंच भाषा के इनवाइर से बना है जिसका अर्थ है गिरा हुआ

पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है। परि + आवरण
परि का अर्थ-चारों और,आवरण का अर्थ-घेरा

पर्यावरण को समस्त भूमंडलीय विरासत और सभी संसाधनों की समग्रता के रूप में परिभाषित किया जाता है  इसमें वे सभी जैविक और अजैविक तत्व होते हैं जो एक दूसरे को प्रभावित करते हैं सभी जीवित तत्वों जैसे पशु-पक्षी पौधे वन जैविक तत्व हैं पर्यावरण अध्ययन के अंतर्गत इन्हीं जैविक और अजैविक घटकों के बीच अंतर संबंधों का अध्ययन किया जाता है

Types of Environment  

पर्यावरण दो प्रकार का होता है।

  1. भौतिक पर्यावरण ( Physical environment ):- जैसे भूमि,जल,वायु, आकाश,पर्वत,पठार,नदी,वन, समुद्र,सूर्य,प्रकाश आदि।
  2. सांस्कृतिक पर्यावरण ( Cultural environment ):- जैसे परिवार,समाज, राष्ट्र,भाषा,कला,संस्कृति, साहित्य,शिल्पी, राजनीतिक,अर्थव्यवस्था आदि

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-2 (क) के अनुसार प्रभावकारी दशाओं का वह संपूर्ण योग जिसमें जीवधारी निवास करते हैं। पर्यावरण कहलाता है।

पर्यावरण के क्षेत्र ( Environmental areas )

मोटे तौर पर पर्यावरण को निम्न चार भागों में बांटा जा सकता है।

1..स्थलमंडल
2..वायुमंडल
3..जलमंडल
4..जीवमंडल

क्षोभ मंडल ( Troposphere )

यह मंडल हमारी पृथ्वी पर एक चादर की भांति कार्य करता है यह रात में पृथ्वी को बहुत अधिक ठंडी होने से तथा दिन में पृथ्वी को बहुत अधिक गर्म होने से बचाता है मौसम संबंधित सभी घटनाएं इसी मंडल में होती हैं

समताप मंडल ( Stratosphere )

इस मंडल का ताप लगभग समान रहता है यह क्षोभ मंडल के ऊपर की परत होती है इसलिए यह वायुमंडल की समताप के रूप में जानी जाती है वायुयानों के उड़ान के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान होता है

ओजोन मंडल ( Mesosphere )

इस मंडल में ऑक्सीजन संघनित होकर ओजोन का निर्माण कर देती है ओजोन परत की ओजोन सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से हमारी सुरक्षा करती है पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करके पृथ्वी के धरातल पर पहुंचने से रोकती है यदि पराबैंगनी किरण मनुष्य के शरीर पर पड़ जाए तो स्किन कैंसर और स्किन बर्न जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है परंतु वायु प्रदूषण के कारण ऐसी गैसे उत्पन्न हो रही है जो इस परत को नष्ट कर रही है जिसे परत की मोटाई पतली हो रही है

और हानिकारक पराबैंगनी किरणें धरातल पर पहुंच रही है इनमें से मुख्य सीएफसी अर्थात क्लोरोफ्लोरोकार्बन है जब इस गैस को रेफ्रिजरेटर में भरा जाता है तब उस समय इस गैस के लीक होने के कारण यह गैस वायुमंडल में पहुंच जाती है तथा इसका 1 अणु मुक्त मूलक क्रिया विधि द्वारा ओजोन के लाखों अणुओ को नष्ट कर देता है इसलिए इसको अधिक प्रदूषक गैस माना गया है

जबकि कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों वायुमंडल के ऊपर परत का निर्माण कर देती हैं जिससे अवरक्त किरणें जो कि पृथ्वी को ठंडी कर रही होती है परावर्तित होकर पुनः पृथ्वी पर पहुंच जाती हैं और पृथ्वी का तापमान बढ़ा देती है जिससे वैश्विक तापवृद्धि की परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है इसे ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं तथा इन गैसों को ग्रीनहाउस गैस से कहते हैं

आयन मंडल ( Thermosphere )

इस प्रकार का मंडल ओजोन मंडल के ऊपर स्थित है इस मंडल में आवेश युक्त कण पाए जाते हैं संचार माध्यमों जैसे रेडियो टेलीविजन टेलीफोन आदि का टेलीकास्ट तथा ब्रॉडकास्ट इसी आयनमंडल की मदद द्वारा होता है

बहिर्मंडल ( Exosphere )

यह सबसे बाहरी परत होती है यहाँ ऑक्सीजन की मात्रा और सघनता बहुत कम होती है

पर्यावरण सभी जैविक तथा अजैविक अवयवों का सम्मिश्रण है

पर्यावरण के घटक तथा पर्यावरणीय कारक ( Environmental factors )

“चूँकि पर्यावरण भौतिक जैविक संकल्पना है। इसमें पृथ्वी के भौतिक जैविक तथा अजैविक सघटको को सम्मिलित किया जाता है।

अजैविक या भौतिक पर्यावरण ( Abiotic or Physical Environment )

  1. स्थलमंडल पर्यावरण
  2. वायुमंडलीय पर्यावरण
  3. जलमण्डलिय पर्यावरण

जैविक पर्यावरण ( Biological Environment )

  • वनस्पति पर्यावरण
  • जंतु पर्यावरण

यदि भौतिक या अजैविक तथा जैविक पर्यावरण को एक साथ मिलाकर देखा जाए तो बायोम की रचना होती है जैसे टुंड्रा बायोम शीतोष्ण बायोम उष्णकटिबंधीय बायोम

जैविक आवर्धन ( Biological magnification )

जीव जंतुओं की श्रृंखला में प्रत्येक जन्तु दूसरे जंतुओं को आहार के रूप में ग्रहण करता है इस कारण खाद्य श्रृंखला का निर्माण होता है और बहुत सारी खाद्य श्रृंखलाएं आपस में मिलकर खाद्य जाल का निर्माण करती हैं परंतु यदि किसी एक जीव में कोई ऐसा पदार्थ प्रवेश कर जाए जो उस जीव की श्रृंखला में ना हो तो वह पदार्थ सभी खाद्य जालों में अपने आप ही चला जाएगा अर्थात किसी खाद्य श्रृंखला अथवा खाद्य जाल में बाहरी पदार्थ का प्रवेश कर जाना जैविक आवर्धन कहलाता है

उदाहरण – हमारे द्वारा इस्तेमाल की गई पेस्टिसाइड पौधों से खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जाती है इस कारण आरसेनिक एंटी मनी जैसे जहरीली पदार्थ जो कभी किसी श्रृंखला में नहीं थे आज प्रत्येक जीव में पाए जाते हैं यही जैविक आवर्धन कहलाता है

वातावरण के जीव जंतुओं और उससे संबंधित परिस्थिति का अध्ययन करना पारिस्थितिक तंत्र कहलाता है
पारिस्थितिक तंत्र की संकल्पना सर्वप्रथम — ने दी खाद्य जाल प्रत्येक जीव भोजन के लिए एक दूसरे पर निर्भर रहता है उसकी इस निर्भरता से खाद्य श्रृंखला का निर्माण होता है और बहुत सी खाद्य श्रृंखला हैं आपस में मिलकर खाद्य जाल बनाती हैं उदाहरण

घास ➡टिड्डी ➡मेंढक ➡सांप ➡गिद्ध

ट्रोफिक लेवल ( Tropical level )-

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प्रत्येक जीव का वह लेबल जहां वह भोजन की आदतों के आधार पर एक दूसरे से पृथक हो जाता है टॉपिक लेवल कहलाता है जैसे पौधे उत्पादक होते हैं तथा इन्हें फर्स्ट ट्राफिक लेवल में रखा जाता है शाकाहारी जंतु जो सीधे पौधों को खाते हैं यह प्राथमिक उपभोक्ता कहलाते हैं इन्हें द्वितीयक ट्रॉफिक लेवल में रखा जाता है अंततः मांसाहारी जंतु जो सीधे जंतुओं को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं अथवा सर्वाहारी जंतु इन्हें ट्राफिक लेवल थर्ड में रखा गया है इन सबके ऊपर स्कैवेंजर या अपमार्जक यह हमारे प्रकृति के सफाई कर्मचारी होते हैं यह प्राकृतिक मृत और सड़े-गले पदार्थों को खाकर वायुमंडल में उनके घटकों को मुक्त कर देते हैं उदाहरण गिद्ध बाज इत्यादि

पिरामिड ( Pyramid )

पारिस्थितिक तंत्र का पिरामिड मुख्यता तीन प्रकार का होता है

  1. जैव ऊर्जा का पिरामिड
  2. जैव भार का पिरामिड
  3. जैव संख्या का पिरामिड

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जैव ऊर्जा का पिरामिड- यह सदैव सीधा बनता है क्योंकि प्रत्येक ट्राफिक लेवल अपने नीचे वाले ट्राफिक लेवल का केवल 10% ऊर्जा का इस्तेमाल कर पाता है

जैव भार का पिरामिड- यह पिरामिड सीधा या उल्टा बनता है

जैव मात्रा का पिरामिड – यह पिरामिड अधिकतर उल्टा बनता है परंतु कुछ विशेष परिस्थितियों में यह सीधा भी बन जाता है

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यदि किसी एक टॉपिक लेबल को समाप्त कर दिया जाए तो उसके ऊपर वाला टॉपिक सभी टॉपिक लेवल स्वता ही समाप्त हो जाएंगे और नीचे वाले की संख्या हद से ज्यादा बढ़ जाएगी इसे जैविक विस्फोट बोला जाता है
ऐसा ना हो इसके लिए प्रकृति में जैव विविधता पाई जाती है

पर्यावरण के संघटको तीन प्रमुख भागों में बांटा गया है

  • 1⃣ भौतिक या अजैविक संघटक इसके अंतर्गत है स्थलमंडल जलमंडल वायुमंडल शामिल है
  • 2⃣ जैविक संघटक इसके अंतर्गत पादप मनुष्य सहित जंतु तथा सूक्ष्म जीव है
  • 3⃣ ऊर्जा संगठक सौर ऊर्जा भूतापीय ऊर्जा को इसके अंतर्गत शामिल किया जाता है

मानव पर पर्यावरणीय प्रभाव 

जैव भौतिक सीमाओ द्वारा आचार परक नियंत्रण द्वारा संसाधनों की सुलभता द्वारा ?

पारिस्थितिक तंत्र ( Ecosystem )

अर्नेस्ट हीकल अनुसार जैविक और अजैविक समूह के पारस्परिक अंतर्संबंध प्रक्रिया से निर्मित तंत्र को पारिस्थितिक तंत्र व इसका अध्ययन करने वाली विज्ञान की शाखा को पारिस्थितिकी या इकोलॉजी कहते हैं।

Environmental Pollution ( पर्यावरण प्रदूषण )

ओडम के अनुसार वातावरणीय जल, वायु, मिट्टी आदि के भौतिक,रासायनिक व जैविक गुणों में अवांछनीय और हानिकारक परिवर्तन ही प्रदूषण है।अध्ययन की सुविधा के लिए पर्यावरण प्रदूषण को निम्न प्रकारों में विभाजित किया गया है।

  1. वायु प्रदूषण ( Air Pollution )
  2. जल प्रदूषण ( Water Pollution )
  3. मृदा प्रदूषण ( Soil Pollution )
  4. ध्वनि प्रदूषण ( Noise pollution )
  5. रेडियोधर्मी प्रदूषण ( Radioactive pollution )
  6. इलेक्ट्रॉनिक प्रदूषण ( Electronic pollution )

Air pollution ( वायु प्रदूषण )

यह प्रदूषण वायु के घटकों में परिवर्तन के कारण होता है अधिकतर Ghatak कार्बन डाइऑक्साइड सल्फर डाइऑक्साइड के रूप में जीवाश्म ईंधन के जलने से मुक्त होते हैं इन घटनाओं में बढ़ोतरी के कारण वायु प्रदूषित हो जाती है और ऐसी वायु से सभी जीव प्रभावित होते हैं  अम्लीय वर्षा वायु प्रदूषण के कारण ही होती है

अम्लीय वर्षा ( Acid rain )

जब जीवाश्म ईंधन का अधिक प्रयोग किया जाता है तब इसमें सल्फर डाइऑक्साइड और सल्फर ट्राइऑक्साइड अधिक मात्रा में मुक्त होती हैं यह गैसे वायु की नमी के साथ मिलकर बादलों में सल्फ्यूरिक एसिड का निर्माण करती है इस सल्फ्यूरिक एसिड के कारण वर्षा जल का ph मान 5 से 2.5 के बीच होता है PH का तटस्त मान 7 होता है इसे ही अम्लीय वर्षा कहते हैं

इसमें कम मान अम्लता का तथा अधिक मान क्षारीयता का प्रतीक होता है

सल्फर डाइऑक्साइड के निम्न स्रोत हैं

  • ताप शक्ति ग्रह जहां पर बिजली उत्पन्न करने हेतु भारी मात्रा में कोयला जलाया जाता है
  • स्वचालित वाहन
  • खनिज तेल शोधन शालाएं

हानियां

  • अम्ल वर्षा से कृषि फसलों वनों जलीय जीवन तथा मानव समुदाय को असाध्य क्षति होती है
  • भवनों के संक्षारण के कारण क्षति
  • मिट्टियों में होने वाले विभिन्न प्रक्रियाओं का अवनयन हो जाता है
  • अमेरिका तथा पश्चिमी यूरोपीय देशों में अम्ल वर्षा को लेक किलर कहा जाता है क्योंकि अम्ल वर्षा के कारण इन देशों के अधिकांश जिलों के जैविक समुदाय समाप्त हो गए हैं
  • सल्फर डाइऑक्साइड के कारण औद्योगिक क्षेत्रों में विषाक्त धूम कोहरे का निर्माण होता है जिसका कारण कई भयंकर रोग हो जाते हैं

अमेरिका जैसे विकसित देशों में इसके कारण बहुत से जिलों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से कम हुई है इसलिए वहां इसे लेक किलर भी कहा जाता है

Water Pollution ( जल प्रदूषण )

जल प्रदूषण के निम्न तीन प्रकार होते हैं

  1. भौतिक
  2. रासायनिक और
  3. जैविक प्रदूषण

यदि जल में कोई स्थूल कण मिला है जिसके कारण देखने में वह गंदा दिखाई देता है तब उसे भौतिक जल प्रदूषण कहते हैं
परंतु यदि इसमें कोई सूक्ष्मजीव हो तब ऐसा जल जैविक प्रदूषण मे आता है यदि जल में फैक्ट्रियों का रसायन या अन्य रसायन मिला हो और जल का ph परिवर्तित हो जाए तो ऐसा जल रासायनिक प्रदूषण की कैटेगरी में आता है

ध्वनि प्रदूषण ( Noise pollution )

हमारे कान 20 डेसिबल से 20000 डेसीबल तक की ध्वनि को आसानी से सुन सकते हैं परंतु यदि अधिक डेसिबल की ध्वनि लगातार सुनी जाए तो अनिद्रा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है इसे ध्वनि प्रदूषण का हा जाता है

ध्वनि प्रदूषण के मुख्य कारण DJ तथा टेप रिकॉर्डर का प्रयोग बड़ी बड़ी पार्टियों और डांस क्लब में बजने वाली एवं अन्य ध्वनि मंदिरों में चलने वाला भजन तथा मस्जिदों में चलने वाली नवाज मुख्य कारण है रेलवे स्टेशन पर स्टेशन आदि पब्लिक स्थानों पर तथा वीकल्स का शोर भी इसके कारण है

पर्यावरण निम्न कार्य करता है

  • यह संसाधनों की पूर्ति करता है
  • यह सौंदर्य विषयक सेवाएं भी प्रदान करता है
  • यह जैविक विविधता प्रदान करके जीवन का पोषण करता है
  • यह अवशेष को समाहित कर लेता है

पर्यावरण की समस्याएं पर्यावरण उक्त कार्यों को बिना किसी व्यावधान के तभी कर सकता है जब तक किए गए कार्य उसकी धारण क्षमता की सीमा में है  पर्यावरण में विद्यमान तत्व की मात्रा तथा गुणवत्ता में निश्चित अनुपात में अधिक अंतर आना ही पर्यावरण असंतुलन या पर्यावरण प्रदूषण है

औद्योगिकरण नगरीकरण वन विनाश जनसंख्या में तीव्र वृद्धि कीटनाशकों का प्रयोग भौतिक संस्कृति आधुनिक यातायात के साधनों के विकास के कारण दुर्गम क्षेत्रों में भी संसाधनों का दोहन आदि के कारण परयावरणीय समस्याएं उत्पन्न हुई वैश्विक उष्णता और ओजोन परत के क्षय ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है

United Nations environment programme – UNEP ( संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम )

इसकी स्थापना 1972 ईस्वी में की गई थी। इसका मुख्यालय नैरोबी केन्या में है। यह एजेंसी संयुक्त राष्ट्र संघ की महत्वपूर्ण एजेंसी है। जो पर्यावरण परिरक्षण के अंतर सरकारी उपायों के समन्वय के लिए उत्तरदायी हैं। ज्ञातव्य है कि “ग्लोबल-500 पुरस्कार इसी संस्था द्वारा प्रदान किया जाता है।

Earth Summit ( पृथ्वी शिखर सम्मेलन, 1992 )

स्टॉकहोम सम्मेलन की बीसवीं वर्षगांठ मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ शे ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनेरो में 1992 में पर्यावरण और विकास सम्मेलन आयोजित किया। इसे अर्थ समिट या पृथ्वी शिखर सम्मेलन कहा जाता है।

इसमें सम्मिलित देशों ने टिकाऊ विकास के लिए व्यापक कार्रवाई योजना “एजेंडा 21” स्वीकृत किया। एजेंडा 21 पारिस्थितिकी विनाश तथा आर्थिक असमानता को समाप्त करने पर बल देता है।

Bali Convention ( बाली सम्मेलन )

ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर कटौती के मामले में विश्वव्यापी सहमति कायम उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में वैश्विक सम्मेलन इंडोनेशिया के बाला द्वीप में 2007 में संपन्न हुआ। 192 देशों के प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

1997 ईस्वी में हुई क्योटो संधि से आगे की रणनीति बनाने के लिए इस सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा किया गया।  विश्व के प्रमुख 27 औद्योगिक देशों पर लागू क्योटो संधि की अवधि 2012 में समाप्त हो गई।

Copenhagen Convention ( कोपेनहेगन सम्मेलन )

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर 7 से 12 दिसंबर 2009 तक डेनमार्क की राजधानी में आयोजित किया गया जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन था जिसमें विश्व भर के लगभग 15000 अधिकारी, पर्यावरणविद और पत्रकारों ने भाग लिया। 192 देशों ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

Environment important Fact –

  • खाद्य श्रंखला का सबसे निचला स्तर है- उत्पादक
  • किस कारण से स्टोन केन्सर होता है- अम्ल वर्षा
  • पारिस्थितिकी विज्ञानं केंद्र कहा स्थित है- बेंगलुरु
  • जेवमात्रा का पिरामिड किस पारिस्थितिकी तंत्र में उल्टा होता है- तालाब
  • भोपाल गैस कांड किस गेस के रिसाव से सम्बंधित है- मिथाइल आइसोसाइनेट
  • ग्रीन हाउस गैसों को मोनिटर करने के लिए विश्व का प्रथम उपग्रह किस देस ने छोड़ा- जापान
  • किस प्रकार के कोयला में 90 प्रतिशत से भी अधिक कार्बन होता है- ऐंथ्रासाइट
  • कोन सा देश ग्रीन हाउस प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए कीए गए क़्योटो समझौता, 1977 से पीछे हट गया- USA
  • क्यूरी किसकी इकाई का नाम है- रेडियोएक्टिव धर्मिता
  • आहार श्रंखला में पादपो द्वारा प्रयुक्त सोर ऊर्जा की मात्रा कितनी होती है- 0.1प्रतिशत
  • सिगरेट के धुँए का मुख्य प्रदूषक क्या है- कार्बन मोनोआक्साइट
  • इकोलॉजी शब्द सर्वप्रथम किसने दिया- हैकल ने 1866
  • फॉदर आफ इकोलॉजी – अलेक्जेंडर, वॉन हंबोडल्ट
  • इन्डियन फॉदर आफ इकोलॉजी — रामदेव मिश्रा
  • पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का स्रोत है–सूर्य
  • सर्वप्रथम Ecosystem शब्द का प्रयोग किया- ए जी टेन्सले ने 1935 में
  • पारिस्थितिकी तंत्र में एकमात्र ऊर्जा का स्त्रोत – सूर्य
  • पारिस्थितिकी पिरामिड की अवधारणा सर्वप्रथम किसने दी- चार्ल्स एल्टन ने 1927 में
  • तालाब पारिस्थिकी तंत्र में संख्या का पिरामिड होता है- सीधे
  • पारिस्थिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह होता है- एक दिशीय
  • ऊर्जा प्रवाह के प्रारूप हेतु सार्वभौमिक मॉडल प्रस्तुत किया- ओडम 1968
  • समुद्र में डार्क जोन को कहते है- प्रोफण्डल जॉन
  • खाद्य श्रृंखला में अंतिम भोजक समूह है- विघटक जीव
  • मृदा कार्बनिक पदार्थो का लवण व ह्यूमस में बदलना कहलाता है- लवणीकरण
  • एक मगरमछ ने मेमने को खाया तथा बाघ ने मगरमछ को खाया, तो बाघ है- द्वितीयक उपभोक्ता

Quiz

Question – 42

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

प्रियंका गर्ग, शाही कोटा, राजवीर प्रजापत, चित्रकूट त्रिपाठी, दिनेश मीना झालरा टोंक, P K Nagauri,  ओम प्रकाश बिश्नोई साहु, चंद्रप्रकाश सोनी

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