Governor ( राज्यपाल )

भारत का संविधान संघात्मक है। इसमें संघ तथा राज्यों के शासन के सम्बन्ध में प्रावधान किया गया है। अनुच्छेद153 के तहत् प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होना आवश्यक है। संविधान के भाग 6 में राज्य शासन के लिए प्रावधान है। यह प्रावधान जम्मू-कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों के लिए लागू होता है। Jammu and Kashmir की विशेष स्थिति के कारण उसके लिए अलग संविधान है। संघ की तरह राज्य की भी शासन पद्धति संसदीय है।

राज्यपाल राज्य का प्रथम व्यक्ति होता है। लेकिन वास्तविक शक्तियां मुख्यमंत्री के पास होती है। राज्य की सारी कार्यकारी शक्तियां राज्यपाल के पास होती है और सभी कार्य उन्हीं के नाम से होते हैं। राज्यपाल विभिन्न कार्यकारी कार्यो के लिए महज अपनी सहमति देता है।

 Indian Constitution के मुताबिक, राज्यपाल स्वतंत्र रूप से कोई भी बड़ा निर्णय नहीं ले सकता है। राज्य की कार्यकारी शक्तियां मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के अधीन होती है संविधान के अनुसार, राज्यपाल राज्य स्तरपर संवैधानिक प्रमुख होता है

राज्य की कार्यपालिका ( Executive) का प्रमुख राज्यपाल होता है, जो कि मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करता है। कुछ मामलों में राज्यपाल को विवेकाधिकार दिया गया है, ऐसे मामले में वह मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना कार्य करता है।

भारत में 7 केंद्र शासित राज्य हैं जिनमें से 3 केंद्र शासित राज्यों में उप राज्यपाल का पद है वह 3 केंद्र शासित राज्य ( Union territory) निम्न है अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह ,दिल्ली और पुडुचेरी बाकी चार केंद्र शासित राज्यों में प्रशासक होते हैं वहां पर उप राज्यपाल का पद नहीं होता है। वह 4 केंद्र शासित राज्य है। चंडीगढ़ , दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली, लक्ष्यदीप।

राज्यपाल अपने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी होते हैं। इनकी स्थिति राज्य में वही होती है जो केन्द्र में राष्ट्रपति की होती है। केन्द्र शासित प्रदेशों में उपराज्यपाल होते हैं।

राज्यपाल की योग्यता:-

अनुच्छेद 157 के अनुसार राज्यपाल पद पर नियुक्त किये जाने वाले व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यताओं का होना अनिवार्य है–

  • वह भारत का नागरिक हो
  • वह 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो
  • वह राज्य सरकार या केन्द्र सरकार या इन राज्यों के नियंत्रण के अधीन किसी सार्वजनिक उपक्रम में लाभ के पद पर न हो
  • वह राज्य विधानसभा का सदस्य चुने जाने के योग्य हो।

राज्यपाल की नियुक्ति

संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार- राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा प्रत्यक्ष रूप से की जाएगी, किन्तु वास्तव में राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा प्रधानमंत्री की सिफ़ारिश पर की जाती है। राज्यपाल की नियुक्ति के सम्बन्ध में निम्न दो प्रकार की प्रथाएँ बन गयी थीं-

  • किसी व्यक्ति को उस राज्य का राज्यपाल नहीं नियुक्त किया जाएगा, जिसका वह निवासी है।
  • राज्यपाल की नियुक्ति से पहले सम्बन्धित राज्य के मुख्यमंत्री से विचार विमर्श किया जाएगा।

यह प्रथा 1950 से 1967 तक अपनायी गयी, लेकिन 1967 के चुनावों में जब कुछ राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारों का गठन हुआ, तब दूसरी प्रथा को समाप्त कर दिया गया और मुख्यमंत्री से विचार विमर्श किए बिना राज्यपाल की नियुक्ति की जाने लगी।

राज्यपाल की शक्तियाँ और कार्य

राज्यपाल की शक्तियों और कार्यों को व्यापक रूप से दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है –

A. राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में शक्तियाँ और कार्य, और
B. केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में शक्तियाँ और कार्य।

1. कार्यालीक शक्तिया

  • अनुच्छेद 154:- राज्य कार्य पालिका शक्ति राज्यपाल में नहित होती हे।
  • अनुच्छेद 164:- मुख्यमंत्री व मंत्रियो की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती हे।
  • अनुच्छेद 165:- राज्य महादिवक्ता(एडवोकैट जनरल) की नियुकि राज्यपाल द्वारा की जाती हे।
  • अनुच्छेद 166:- राज्य सरकार के समस्त कार्य राज्य पाल के नाम से किये जाते हे ।
  • सभी राज्य स्तरीय आयोगों के अध्य्क्ष अव सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती हे
  • राज्य में स्थित सभी विश्व् विधाल्यो का कुलाधिपति राज्यपाल होता हे हे। तथा उपकुलाधिपति (कुलपति) की नियुक्ति राज्य पाल द्वारा की जाती हे
  • नोट:- विधि विश्व् विधालयो का कुलाधिपति मुख्य न्यायाधीश होता हे।केंद्रीय विश्व विधालयो का कुलाधिपति राष्ट्रपति या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त व्यक्ति होता हे। दिल्ली विश्व विधालयो का कुलाधिपति उपराष्ट्रपति होता हे।

2. न्यायिक शक्ति(Judicial power)

  • अनुच्छेद 161:- राज्यपाल द्वारा सजा माफ़ करना।
  • अनुच्छेद219:- उच्च न्यायालयो क्व न्याधिशो को पद की शपथ दिलाना।
  • अनुच्छेद 233:- जिला न्याधिशो की नियुक्ति करना।

3. वित्तीय शक्तिया( Financial power)

  • राज्य में धन विदेयक व वित्त पर पहले हश्ताक्षर राज्यपाल द्वारा किया जाते हे।
  • अनुच्छेद 202:- राज्य सरकार का वार्षिक वित्तीय विवरण(बजट) राज्यपाल के नाम से ही प्रस्तुत किया जाता हे ।
  • राज्यपाल स्थानीय संस्थओं को वित्तीय संशाधन उपलब्ध करवाने हेतू राज्य वित्त आयोग का गठन करता हे ।
  • अनुच्छेद 243 I:- ग्रामीण आस्थायो के लिए
  • अनुच्छेद 243 y:- शहरी संस्थाओं के लिए।

नोट:- राज्य की आकस्मिक निधि कोष पर राज्यपाल का तथा संचित निधि कोष पर विधान मंडल का नियंत्रण होता हे।

4. स्वविवेकिय शक्तियां

भारतीय संविधान में सिर्फ राज्यपाल को ही स्वविवेक की शक्तियां प्रदान की गई हैं लेकिन संविधान में स्वविवेक की शक्तियों को परिभाषित नहीं किया गया इन्हें न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती अनुच्छेद 167 राज्य के प्रशासनिक मामलों की जानकारिया/ सूचना प्राप्त करने का अधिकार है जम्मू कश्मीर राज्य के राज्यपाल को राज्य का राज्यपाल शासन लागू करने की शक्ति प्रदान की गई है

5 विधायी शक्तियां

राज्यपाल विधानमंडल का अंग होता है अनुच्छेद 174 वह विधानमंडल का सत्र आहूत करता है सत्रावसान तथा विधानसभा को भंग करता है प्रत्येक नई विधानसभा के पहले व प्रतिवर्ष पहले सत्र को संबोधित करता है विधानमंडल में संदेशों को भेज सकता है

अनुच्छेद 171 राज्य विधानमंडल के 1 / 6 सदस्यों को मनोनीत करता है जो कला, विज्ञान, साहित्य, समाज सेवा और सहकारिता के क्षेत्र से होते हैं विधानमंडल के सदस्यों की अयोग्यता का निर्धारण राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग की राय से राज्यपाल करेगा

नोट राज्य विधानमंडल के किसी सदस्य की दल बदल संबंधी योग्यता का निर्धारण संबंधित सदन के अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा

  • अनुच्छेद 202 राज्यपाल वार्षिक वित्तीय विवरण को विधानसभा में रखवाता है
  • अनुच्छेद 200 राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को अनुमति प्रदान करता है या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखता है या रोक सकता है और यदि धन विधेयक नहीं है तो उसे पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है
  • अनुच्छेद 213 अध्यादेश जारी कर सकता है

नोट – राज्यपाल अध्यादेश को स्वयं वह वापस ले सकता है

राज्यपाल राज्य का संवैधानिक मुखिया होता है राज्य का प्रथम नागरिक राज्यपाल होता है राज्यपाल को उस राज्य के मुख्य न्यायधीश द्वारा सपथ दिलाई जाती है राज्य की आकस्मिक निधि पर राज्यपाल का नियंत्रण होता है

पदाधिकारियों का वरियता अनक्रम मे राज्यपाल का 4th स्थान है।

देश में सर्वाधिक कार्यकाल(24वर्ष)वाला मुख्यमंत्री ज्योति बसु (प.बंगाल)था तो सबसे कम कार्यकाल (24घंटे) वाला मुख्यमंत्री जगदम्बिका पाल( UP )था।

अंतर्राज्यीय परिषद की उपसमिति ने 7 दिसंबर 1991 को अपनी बैठक में राज्यपाल के चयन में उनके कार्यकाल के बारे में कुछ सिफारिशें कि जो निम्न है-

  • राज्यपाल की नियुक्ति मुख्यमंत्री के परामर्श से हो इसके संविधान के अनुच्छेद 155 में संशोधन किया जाए ।
  • राज्यपाल सामाजिक व प्रशासनिक साफ रखने वाला व्यक्ति है।
  • राज्यपाल कार्यमुक्त होने पर उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को छोड़कर किसी दूसरे पद पर नियुक्त न हो
  • सरकारिया आयोग की महत्वपूर्ण सिफारिश यह है कि राजनीति में सक्रिय व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त नहीं किया जाएगा

मुख्यमंत्री से सूचना प्राप्त करना

राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री से सूचनाएं प्राप्त करना भी विवेकाधिकार के अंतर्गत आता है। अनुच्छेद 167 ( ए )के अनुसार यह मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि वह मंत्रिमंडल के राज्य प्रशासन संबंधी तथा नये विधेयकों संबंधी निर्णयों से राज्यपाल को अवगत कराएं। अनुच्छेद 167 (C) के अंतर्गत राज्यपाल को अधिकार है कि ऐसा विषय जिस पर संबंधित मंत्री ने तो निर्णय लिया है। पर मंत्रिमंडल के विचारार्थ प्रस्तुत नहीं किया गया हो को मुख्यमंत्री से अपने पास विचारार्थ मंगवा सकता है।

राजस्थान के राज्यपाल ( Governor )

  • राज्य में राज्यपाल का पद राजप्रमुख रूप में सृजित हुआ 30 मार्च 1949 से 1 November 1956 तक यह पद
    राजप्रमुख नरेश जयपुर सवाई मानसिंह

    सृजित रहा

  • राज्य के एकमात्र राजप्रमुख नरेश जयपुर सवाई मानसिंह को बनाया गया जो 1956 तक कार्यरत रहे
  • राजस्थान में 1 नवंबर 1956 के राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर राज्य प्रमुख एवं महाराज प्रमुख के पदों को समाप्त कर इस पद का गठन किया गया।
  • संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल होता है।राज्य में राज्यपाल की “संवैधानिक प्रमुख” की स्थिति होती है। भारत का राष्ट्रपति राज्य के राज्यपाल को नियुक्त करता है।
  • राज्यपाल विधानसभा में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है। तथा मुख्यमंत्री की सलाह से वह अन्य मंत्रियों को नियुक्त करता है। अनुच्छेद 154 के तहत् राज्य की कार्यपालिका की शक्ति राज्यपाल में निहित होती है।
  • राज्य के एकमात्र उप राजप्रमुख महाराव भीम सिंह कोटा नरेश थे

    गुरुमुख निहाल सिंह
  • राजस्थान के प्रथम व सर्वाधिक कार्यकाल वाले राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह थे
  • भारत की प्रथम महिला राज्यपाल सरोजिनी नायडू उत्तर प्रदेश (भारत की कोकिला के नाम से प्रसिद्ध इनके जन्मदिन 13 फरवरी को National Women’s Day के रुप में मनाया जाता है) की थी सरोजिनी नायडू  ने राज्यपाल के पद को सोने के पिंजरे में कैद करके रखी गई चिड़िया है कहा।
  • राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल थी
  • डॉ संपूर्णानंद:- प्रथम बार 1967 में राष्ट्रपति शासन लागू।
  • सरदार जोगेंद्र सिंह:- प्रथम राज्यपाल जो अपने पद से त्यागपत्र दिया।
  • डॉक्टर मरीचन्ना रेड्डी:- इनके काल में राज्य में आखिरी बार राष्ट्रपति शासन लागू।
  • निर्मल चंद्र जैन & शैलेंद्र कुमार सिंह :- जिनकी पद पर रहते हुए मृत्यु हुई।
  • श्रीमती प्रभा राव:- राज्य की प्रथम महिला राज्यपाल जिसकी पद पर रहते मृत्यु हुई।
  • राम नायक:-उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
  • राजस्थान के प्रथम राज्यपाल जिनकी मृत्यु पद पर रहते हुए दरबार सिंह थे जो 1 मई 1998 से 24 मई 1998 तक कार्यरत रहे
  • राजस्थान में प्रथम राष्ट्रपति शासन 13 मार्च 1967 शत-शत के समय राज्यपाल डॉक्टर संपूर्णानंद थे
  • राजस्थान के वर्तमान राज्यपाल श्रीमान कल्याण सिंह है
  • राजस्थान में राष्ट्रपति शासन 4 बार लागू किया गया।
    राजस्थान में राष्ट्रपति शासन अधिक समय तक मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के समय चौथी बार रहा था। बाबरी मस्जिद विवाद के कारण *15 सितम्बर 1992 से 3 दिसम्बर 1993 तक उस समय राज्य के राज्यपाल एम.चेनारेड्डी थे।
  • राजस्थान राज्य के सबसे कम कार्यकाल वाले राज्यपाल श्री दरबारा सिंह हैं। प्रथम राज्यपाल जिनकी पद पर रहते हुए मृत्यु हुई। उनका कार्यकाल 01-05-1998 से 25-05-1998 तक रहा।
  • राज्यपाल द्वारा विधानमंडल- के पास पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकता
  • शिवराज पाटिल को और श्री राम नाईक- को राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था
  • राज्यपाल-श्री दरबार सिह श्री निर्मल चंद जैन श्री शैलेन्द्र सिह और श्रीमती प्रभा राव का राज्यपाल के पद पर रहते हुए कार्यकाल के दौरान निधन हो गया था
  • राज्य की सर्वाधिक समय- तक रहे राज्यपाल सरदार गुरुमुख निहाल सिंह थे
  • राजस्थान में राज्यपाल को- प्रशासनिक सहायता प्रदान करने के लिए एक राज्यपाल सचिवालय कार्यरत है सचिवालय का प्रमुख राज्यपाल का सचिव होता है जो भारतीय प्रशासनिक सेवा का वरिष्ठ अधिकारी होता है
  • जगत नारायण- राजस्थान के प्रथम कार्यवाहक के रूप में राज्यपाल बने थे
  • वेदपाल त्यागी-के समय दूसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था
  • राज्यपाल रघुकुल तिलक- के समय तीसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था

नोट:- राज्यपाल राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति देता है।
परंपरागत रूप से राज्य राजस्थान के राज्यपाल ग्रीष्मकाल में कुछ समय माउंट आबू सिरोही में बिताते हैं ।
राजस्थान के राज्यपाल सभी राज्य विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होते हैं।

Important Question For RAS Main Exam

प्रश्न-1. राज्यपाल की शक्तियों को कितनी श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है ?
उत्तर-1. राज्यपाल की शक्तियों को अनुच्छेद 163 के तहत दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है
प्रथम- वे शक्तियां जिनका प्रयोग वह मुख्यमंत्री अथवा मंत्रिपरिषद की सलाह से करता है
द्वितीय- वे शक्तियां जिनका प्रयोग व स्वविवेक के आधार पर करता है

प्रश्न-2. राज्य में राज्यपाल की नियुक्ति से पूर्व राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य की मुख्यमंत्री से सलाह लेना आवश्यक है ?
उत्तर-2. राज्यपाल की नियुक्ति से पूर्व राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से सलाह लेना एक परंपरा है संवैधानिक आवश्यकता नहीं साथ ही यह भी परंपरा है कि राज्यपाल उस राज्य का निवासी ना हो यथा राजस्थान के निवासी को राजस्थान का राज्यपाल न नियुक्त किया जाए इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्यपाल को उस राज्य की राजनीतिक दल बंदी से दूर रखना है

प्रश्न-3. राज्यपाल की कार्यकारी शक्तियों की विवेचना कीजिए ?
उत्तर-3. संविधान के अनुच्छेद 154 के अनुसार राज्य की समस्त कार्यकारी शक्तियां राज्यपाल में निहित होती है
राज्यपाल की कार्यकारी शक्तियां प्रमुख रूप से निम्न है–
अनुच्छेद 164 के तहत- राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है और उसकी सलाह से मंत्री परिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है उन सभी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाता है और उनके मध्य कार्य का विभाजन करता है मुख्यमंत्री और मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत ही पद धारण करते हैं

राज्यपाल सामान्यतः- विधानसभा में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है किसी भी दल को विधानसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त ना होने पर राज्यपाल स्वविवेक से उस दल के नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए आमंत्रित करता है जो उसकी राय में विधानसभा में बहुमत सदस्य का विश्वास प्राप्त कर लेता है

 राज्यपाल राज्य- के सभी विश्वविद्यालयों का पदेन कुलाधिपति होता है और विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति करता है
राज्यपाल- मंत्री परिषद के कार्य संचालन के नियमों का निर्माण करता है

राज्यपाल- मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद के सदस्यों को पद वह उसकी गोपनीयता की शपथ दिलाता है आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पदच्युत करता है और उनके त्याग पत्र स्वीकार करता है

वह राज्य के महाधिवक्ता- ( अनुच्छेद 165 )और लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसादपर्यंत अपने पद पर बना रहता है जबकि लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों को संविधान में विहित प्रक्रिया से राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है

राज्यपाल राज्य- मामलों के प्रशासन और विधान के प्रस्ताव से संबंधित कोई भी सूचना मुख्यमंत्री से मांग सकता है

प्रश्न-4. राज्यपाल के संबंध में राजमन्नार समिति रिपोर्ट की क्या सिफारिशें थी ?
उत्तर-4. राज्यपाल के संबंध में राजमन्नार समिति रिपोर्ट कि निम्न सिफारिशें थी
राज्यपाल की नियुक्ति- सदैव राज्य मंत्रिमंडल से परामर्श करके की जानी चाहिए
एक बार राज्यपाल पद-पर रह चुके व्यक्तियों को किसी पद पर दूसरे कार्यकाल अथवा सरकार के अधीन किसी अन्य पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए

संविधान में विशेष प्रावधान- शामिल किए जाने चाहिए जो राष्ट्रपति को राज्यपालों के लिए निर्देश देने का अधिकार प्रदान करें

संविधान में शामिल इस- प्रावधान को तत्काल निकाल दिया जाना चाहिए कि मंत्रिमंडल राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत पद पर रहेगा

राज्यपाल को राज्य- विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करना चाहिए यदि मुख्यमंत्री किसी मत्री को बर्खास्त करने की सलाह राज्यपाल को देता है तो उसे मुख्यमंत्री की की सलाह माननी चाहिए

यदि राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बहुमत खो दिया है तो राज्यपाल को तत्काल विधान सभा का अधिवेशन बुलाकर मुख्यमंत्री को बहुमत साबित करने का निर्देश देना चाहिए

 प्रश्न-5. राज्यपाल की स्थिति व भूमिका पर टिप्पणी कीजिए ?
ऊतर-5. सरोजिनी नायडू के अनुसार राज्यपाल उस पक्षी की भांति यह जो सोने के पिंजरे में बंद है राज्यपाल की भूमिका बुद्धिमान परामर्शदाता और एक माध्यम की सी है वह सामान्यतः मंत्रिमंडल की सलाह के अनुसार कार्य करता है लेकिन वह विधेयकों को पुनर्विचार के लिए रोक सकता है ताकि जल्दबाजी से निर्णय लिया जाए और राज्य के संरक्षक के रूप में कार्य करता है उसे सक्रिय राजनीति से अलग रखना चाहिए क्योंकि किसी दल विशेष का प्रतिनिधित्व करते हुए एक सक्रिय राजनीति के समस्त जनता का विश्वास पात्र नहीं बन सकता

कार्यपालिका के संवैधानिक अध्यक्ष के रूप में- राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रधान है संसदीय प्रणाली होने के कारण राज्यपाल कार्यपालिका का नाम मात्र का अध्यक्ष होता है जिसे प्रशासनिक कार्य मंत्रिपरिषद के परामर्श के अनुसार करने होते हैं

राज्यपाल व्यवहारिक रूप- से राज्य के मुख्य कार्यपालक की भूमिका का भी निर्वाह करता है राष्ट्रपति शासन के दौरान वह राज्य का वास्तविक प्रशासक होता है

राज्यपाल केंद्र के अभिकर्ता के रूप- में संविधान के कुछ अनुच्छेदों की व्यवस्था के अनुसार राज्यपाल केंद्र और राज्य के मध्य एक कड़ी के रुप में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है संविधान के अनुच्छेद 160 के अनुसार राष्ट्रपति राज्यपाल को आकस्मिक स्थिति के संबंध में कार्य करने का अधिकार दे सकता है जिस के संबंध में संविधान मोन है

संविधान के अनुच्छेद 155- के अनुसार राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति केंद्रीय मंत्रिपरिषद की अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है

अनुच्छेद 156 के अनुसार- राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर बना रह सकता है राष्ट्रपति ही राज्यपाल को पद मुक्त कर सकता है उसे समय से पूर्व वापस बुला सकता है और एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरण कर सकता है सामान्यतः राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है पर अपने कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वह अपने पद पर तब तक बना रह सकता है जब तक किसी अन्य व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त कर दिया जाए

राज्यपाल व्यवस्थापिका- का प्रमुख होता है उसे राज्य विधान सभा का अधिवेशन बुलाने उसका सत्रवाहन को स्थगित करने और किसी भी समय विधानसभा को भंग करने का अधिकार है यह सब कार्य व अनुच्छेद 174 के तहत कर सकता है

संविधान के अनुच्छेद 200- के तहत विधानमंडल द्वारा पारित कोई भी विधेयक तब तक कानून का रूप धारण नहीं कर सकता जब तक राज्यपाल उस पर अपनी स्वीकृति नहीं देता वह चाहे तो विधेयक पर हस्ताक्षर कर सकता है या सदन के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है यह विधेयक को राष्ट्रपति के पास विचार प्रेषित कर सकता है ऐस विधेयक को यदि विधान सभा द्वारा संशोधन संहिता संशोधन द्वारा राज्यपाल के पास भेजा जाता है तो राज्यपाल को उस पर हस्ताक्षर करना आवश्यक होता है

Governor important facts and Quiz 

  •  राज्यपाल पद हेतु न्यूनतम आयु कितनी होती है— 35 वर्ष
  •  राज्यपाल विधानसभा में कितने आंग्ल-भारतीयों की नियुक्ति कर सकता है— एक
  • भारत की पहली महिला राज्यपाल कौन थी— Sarojini naidu
  • राज्यपाल सोने के पिंजरे में निवास करने वाली चिड़िया केसमान है’ ये शब्द किसके हैं— सरोजनी नायडू
  •  किसकी अनुमति के बिना राज्य की विधानसभा में कोई धन विधेयक पास नहीं होता है— Governor
  • राज्यपाल द्वारा जारी किया गया अध्यादेश किसके द्वारा मंजूर किया जाता है— Legislature द्वारा
  • राज्य सरकार को कौन भंग कर सकता है— राज्यपाल
  • राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति कौन करता है— राज्यपाल
  • राज्यपाल की मुख्य भूमिका क्या है— केंद्र व राय के मध्य की कड़ी
  • किसी राज्य के राज्यपाल को शपथ ग्रहण कौन कराता है— उस  राज्य का मुख्य न्यायाधीश

POST WRITTEN BY ( With Regards & Specially thanks ),

विजय कुमार महला झुन्झुनू ,राकेश गोयल, रमेश जी सिरोही, विनोद कुमार गरासिया, Mamta Sharma , Gang Singh, Jetharam Lohiya, ज्योति प्रजापति, पूनम छिंपा नेठराना ( हनुमानगढ़ ), Reena Pargi Banswara, सुभाष शेरावत, B.s.meena, Jagtar