Gurjar Pratihar Vansh ( गुर्जर प्रतिहार )

प्रतिहार शब्द का अर्थ :- द्वारपाल अथवा रक्षक।

क्षेत्र- जोधपुर के दक्षिणी भाग से गुजरात के गुर्जरात्र क्षेत्र में।

गुर्जरात्र प्रदेश में निवास करने के कारण गुर्जर तथा 7 वीं से 11 वीं शताब्दी के मध्य विदेशी आक्रमणों से भारत की पश्चिमी सीमाओं की रक्षा करने के कारण प्रतिहार कहलाये।

कपूर मंजरी तथा काव्य मीमांसा के लेखक राजशेखर ने गुर्जर प्रतिहार वंश के बारे में जानकारी दी है

राजपूताने में पश्चिमी भूभाग पर गुर्जर प्रतिहार राजवंशो का एकाधिकार स्थापित हुआ, सर्वप्रथम 8 वीं शताब्दी में गुजरात राज्य में इस राजवंश की स्थापना हुई. यह राजवंश भगवान श्री राम के भाई लक्ष्मण के वंशज होना स्वीकार करते थे. अनेक इतिहासकारों ने इन्हें सूर्यवंशी होना माना.

ग्वालियर के शिलालेख में इस वंश के शासक वत्सराज को क्षत्रिय बताया गया है. ठीक इसी प्रकार राजशेखर ने गुर्जर प्रतिहार वंश के राजा महेंद्र पाल ने रघु कुल बताया गया है

अनेक इतिहासकारों ने गुर्जर प्रतिहार राजवंश के राजाओं को सर्वप्रथम मारवाड़ के होना बताया. मारवाड़ के पश्चात उन्होंने उज्जैन तथा कन्नौज पर अपना एकाधिकार स्थापित किया. जोधपुर के शिलालेखों से ज्ञात होता है कि *छठी शताब्दी में इस वंश के राजाओं ने अपना राज्य स्थापित किया जिसे गुर्जरत्रा कहा जाता था.

चीनी यात्री ह्वेनसांग ने गुर्जर प्रतिहार वंश की राजधानी भीनमाल को पीली भोलो शब्द से संबोधित किया ।

स्मिथ तथा स्टेन्फोलो ने भी भीनमाल व श्रीपाल शब्द का संबोधन किया

घटियाला का शिलालेख- जोधपुर (समाचार पत्र) इसी प्रकार मुंबई गजेटियर (निक्सन) ने भी गुर्जर प्रतिहार वंश के राजाओं को एक विदेशी जाति के रूप में स्वीकार किया. जिनका राज्य राजपूताने में पश्चिमी भूभाग पर स्थापित था

मुहणोत नेणसी ने गुर्जर प्रतिहार वंश की 26 शाखाओं का उल्लेख किया है⚫

गुर्जर प्रतिहार वंश के शासकों के लिए (जोधपुर) वाउक का शिलालेख महत्वपूर्ण माना जाता है इस शिलालेख में एक ब्राह्मण पुरुष हरिश्चंद्र तथा क्षत्रिय रानी भद्रा की संतान माना गया है

राजा हरिश्चंद्र गुर्जर प्रतिहार वंश के आदि पुरुष माने जाते हैं जिन्होंने सर्वप्रथम माड़ल्यूपुर( मंडोर) को जीतकर गुर्जर प्रतिहार राजवंश की राजधानी को स्थापित किया. इसके पश्चात अनेक कमजोर शासको की हमे जानकारी प्राप्त होती है. 

  • कुलदेवी- चामुंडा माता

अग्निकुल के राजपूतो में सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रतिहार वंश था जो गुर्जरी की शाखा से संबधित होने के कारण इतिहास में गुर्जर प्रतिहार कहा जाता है | पुलेकेशिन द्वितीय के ऐहोल लेख में गुर्जर जाति का सर्वप्रथम उलेख हुआ है |

इस वंश की स्थापना हरिचन्द्र नामक राजा ने  की किन्तु इस वंश का वास्तविक प्रथम महत्वपूर्ण शासक नागभट्ट प्रथम था |वत्सराज के समय से ही कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष शुरू हुआ |

हरिशचंद्र के बारे में प्रथम लिखित साक्ष्य बाणभट्ट रचित हर्षचरित्र में। हरिश्चंद्र की दो पत्नियां होने के कारण यह दो शाखाओं में विभक्त हो गया।

  • ब्राह्मण पत्नी:- उज्जैन शाखा
  • क्षत्रिय पत्नी (क्षत्राणी):-  मंडोर शाखा

अन्ततः शासक नागभट्ट प्रथम के समय गुजरात तक साम्राज्य विस्तार होने के कारण दोनों शाखाओं को सम्मिलित कर लिया गया। और राजधानी (भीनमाल) जालौर कर दी गई।

गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक ( Ruler of Gurjhar Pratihar Dynasty )

Nagabhata-1 ( नागभट्ट-1 730-760 )

यह शासक रज्जित का पोता था, जो इस वंश का सबसे योग्य तथा वास्तविक उल्लेखनीय शासक हुआ, इनके शासन काल में मॉडल्यपुर का सविस्तार हुआ, लेकिन इस राजा ने मेड़ता को नई राजधानी बनाया

गुर्जर प्रतिहार वंश के वास्तविक संस्थापक जालौर दुर्ग के निर्माता, मंडोर के बाद मेड़ता को द्वितीय तथा भीनमाल को तृतीय राजधानी बनाने का श्रेय।  मेवाड़ नरेश बप्पा रावल की सहायता से अरब आक्रमणकारी “जुनैद” को पराजित करने का साक्ष्य।  ग्वालियर प्रशस्ति में उसे म्लेच्छो का नाशक बताया गया   है |नागभट्ट प्रथम को ग्वालियर प्रशस्ति में नारायण की उपाधि से विभूषित किया गया है

  • अन्य नाम:- नागावलोक
  • संज्ञा:- मेलेच्छों के विनाशक।

नागभट्ट प्रथम ने जीवन के अंतिम दिनों राजपाट को छोड़कर आध्यात्मिक जीवन अपना लिया तथा मण्डोर में ही इनकी मृत्यु हो गई.

नागभट्ट के बाद उनका भतीजा  कुक्कुक  सिंहासन पर बैठे (760-783) इसके बाद इसका छोटा भाई देवराज सिंहासन पर बैठा  देवराज के पश्चात उनका पुत्र वत्सराज(783-795) उज्जैन के सिंहासन पर बैठा 

राजा कुक्कुक के शासन काल में व्यापार में अपार वृद्धि हुई. इस राजा ने बाजारों की स्थिति की सुदृढ़ किया तथा इस राजा की जानकारी हमें घटियाला के शिलालेख से ज्ञात होती है जिसमें इस राजा को न्यायप्रियता का रक्षक बताया गया है

राजा वाउक ने मंडोर में विष्णु मंदिर बनवाया तथा मंडोर के परकोटे का पुनर्निर्माण करवाया

Vatsaraj ( वत्सराज 783-795 ई. )

इस वंश का चौथा शासक वत्सराज था | वह एक शक्तिशाली शासक था जिसे प्रतिहार साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जा सकता है |उसने पाल शासक धर्मपाल को पराजित किया किन्तु राष्ट्रकूट शासक ध्रुव से पराजित हुआ |

कन्नौज पर अधिकार करने हेतु समकालीन पाल (बंगाल) व राष्ट्रकूटों (दक्षिण भारत ) के साथ 150 वर्षों तक चलने वाले त्रिपक्षीय संघर्ष के शुभारंभ कर्त्ता का श्रेय।

इस राजा का शासनकाल कला, संस्कृति के प्रोत्साहन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है इसी के शासनकाल में उद्योतन सूरी ने कुबलेमाला ग्रंथ लिखा तथा आचार्य जिनदत्त सूरी ने हरिवंश पुराण की रचना की.

इसी शासक ने ओसिया में एक महावीर मंदिर का निर्माण कराया जो पश्चिमी राजस्थान का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है. इसी शासक ने बंगाल के पाल राजाओं को पराजित किया. लेकिन दक्षिण की राष्ट्रकूट शक्ति का शासक राजा ध्रुव भारत के हाथों यह पराजित हुआ

इसने भंडी जाती को परास्त किया इस बात की पुष्टि  ओसियां अभिलेख और दौलतपुर अभिलेख से मिलती है इन अभिलेखों के अनुसार इसने मध्य राजस्थान पर शासन किया 

दरबारी विद्वान ( Court scholar ) :-

1. उधोतन पूरी ( जैन विद्वान )

  • पुस्तक:- कुवलयमाला( रचना राजधानी भीनमाल में ) मरु प्रदेश व मरु भाषा का प्रथम साक्ष्य इसी पुस्तक में।

2. जिनेसन सूरी :-

  • ग्रंथ:- हरिवंश पुराण
  • उत्तरी भारत में ओसिया (जोधपुर) में प्रथम महावीर जैन मंदिर का निर्माण इसी काल में।
  • आभानेरी (दौसा) राजगढ़ (अलवर) से प्राप्त मंदिरों के पूरा अवशेषों इसी समय के।

वत्सराज की मृत्यु के पश्चात उसका पुत्र नागभट्ट द्वितीय गुर्जर प्रतिहार सिंहासन पर बैठा 

Nagabhata-2 ( नागभट्ट-2 795-833 ई.)

वत्सराज के बाद उसका पुत्र नागभट्ट द्वितीय (795-833 ई.) गद्दी पर बैठा | उसने कन्नौज पर अधिकार करके उसे प्रतिहार साम्राज्य की राजधानी बनाया | अन्य बहुत से विजय प्राप्त की

गुर्जर प्रतिहार वंश के शासकों ने इस को साम्राज्यवादी नीति का परिचालक कहा जाता है

उपाधि:- परमभट्टारक, महाराजाधिराज, परमेश्वर

पुस्तक:- वलीप्रबन्ध

मृत्यु:- गंगा में जल समाधि द्वारा।

Rambhadra ( रामभद्र 833-836)

रामभद्र के 3 वर्ष के निर्बल् शासन के पश्चात मिहिर भोज प्रथम (836 से 885 ईसवी) शासक बना

Mihir bhoj ( मिहिर भोज 836-885 ) – 

अपने पिता रामदेव की हत्या कर मिहिरभोज प्रतिहार साम्राज्य का शासक बना, उसका मूल नाम मिहिर था और भोज कुल नाम या उपनाम मिहिर भोज प्रथम इस वंश का सर्वाधिक महत्वपूर्ण शासक था | 

उसने चंदेलों को परास्त करके बुंदेलखंड पर पुनः गुर्जर प्रतिहारों की सत्ता स्थापित की। रामभद्र के शासनकाल में मंडोर के प्रतिहारो ने गुर्जरत्रा भाग पर अपना अधिकार कर लिया था। परंतु भोज ने अवसर मिलते ही मंडोर के प्रतिहारो को पराजित करके राजपूताना पर पुनः अपना अधिकार कायम कर लिया। इसकी पुष्टि 846 ई. के दौलतपुर लेख तथा प्रतापगढ़ अभिलेख से भी होती है।

लेखो के अतिरिक्त कल्हण तथा अरब यात्री सुलेमान के विवरणों से भी हमे उसके काल की घटनाओं की जानकारी मिलती है | भोज को अपने समय के दो प्रबल शक्तियों – पाल नरेश देवपाल तथा राष्ट्रकूट नरेश ध्रूव से पराजित होना पड़ा |

भोज 1 अपनी साहित्यिक अभिरुचि और वैष्णव धर्म के संरक्षण के लिए भी याद किया जाता है   उसके कुछ सिक्कों में विष्णु के अवतार वराह के चित्र तथा ‘आदिवराह’ की उपाधि मिलती है

भोज वैष्णव धर्मानुयायी था | उसने आदिवराह तथा प्रभास जैसी उपाधियाँ धारण की जो उसके चलायें गये चाँदी के “द्रम्म” सिक्को पर भी अंकित है | उसने राष्ट्रकूट शासक कृष्ण द्वितीय को हराकर मालवा प्राप्त किया | मालवा और गुजरात पर प्रभुत्व करना राष्ट्र्कुटो का वास्तविक उद्देश्य था |

Mahendra Pal-1 ( महेंद्र पाल-1 885-910 )

भोज 1 के उत्तराधिकार महेंद्रपाल 1 ने मगध तथा उत्तरी बंगाल तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया ! महेंद्रपाल कर्पूरमंजरी नाटक के रचयिता राजशेखर का शिष्य और संरक्षक था  राजशेखर ने महेंद्र पाल को निर्भयराज रघुकुल तिलक चुंडामणी आदि की संज्ञा दी !

893 ईसवी के एक प्रतिहार अभिलेख से दंडपाशिक नामक पुलिस अधिकारी का उल्लेख मिलता है । प्रतिहारों की अश्वसेना तत्कालीन भारत में सर्वश्रेष्ठ थी।

Mahipal-1 ( महीपाल-1 910-945 )

महेंद्र पाल 1 के उत्तराधिकार भोज 2 ( 910-12 ईस्वी ) को हराकर महिपाल 1 सिंहासनारूढ़ हुआ, राजशेखर महिपाल 1 का भी दरबारी रहा और उसने महिपाल को आर्याव्रत का महाराजाधिराज की संज्ञा दी ! महिपाल 1, राष्ट्रकूट नरेंश इंद्र से बुरी तरह पराजित हुआ

राष्ट्रकूटों ने कन्नौज पर अधिकार कर लिया किंतु शीघ्र ही महिपाल 1 ने उसे हथिया लिया। अरब यात्री अलमसूदी 915 ई मे महिपाल 1 के राज्यकाल में प्रतिहार राज्य की यात्रा की

काव्यमीमांसा, हरविलास और भुवनकोष (यह तीनों काव्य ग्रंथ है )आदि ग्रंथों की रचना की कर्पूरमंजरी प्राकृत भाषा में लिखा गया है अन्य सभी रचनाएं संस्कृत में है

महिपाल प्रथम के बाद गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य का विघटन शुरू हो गया 963 ईस्वी में कृष्ण तृतीय (राष्ट्रकूट शासक )ने प्रतिहार राजाओं को पराजित किया।

महेंद्र पाल-2 (945-948), देवपाल, महिपाल-2, विजय पाल-960ई.

Rajyapal ( राज्यपाल )

महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के समय 1018 ई में प्रतिहार शासक राज्यपाल बिना लड़े भाग खड़ा हुआ, बाद में उसने महमूद गजनबी की अधीनता स्वीकार कर ली

त्रिलोचनपाल

1019 ईस्वी में उसके पुत्र त्रिलोचन पाल को पराजित किया।

यशपाल:- अंतिम गुर्जर प्रतिहार शासक।

प्रतिहारों के सामंत प्रतिहार वंश की विघटन के बाद स्वतंत्र होने लगे जिनमें से मुख्य गुजरात के चालुक्य ,जेजाकभुक्ति के चंदेल ग्वालियर के कचछपघात,डाहल के कलचुरि, मालवा के परमार व शाकंभरी के चौहान आदि थे इस वंश का अंतिम शासक यशपाल 1036 ईस्वी था

अलमसूदी सुलेमान अबू जैद आदि अरब यात्रियों ने गुर्जर प्रतिहारों को जुज्र है

इतिहास के स्रोत्र ( History Source )

  • मिहिरभोज का ग्वालियर अभिलेख
  • समकालीन राष्ट्रकूटों के लेख
  • प्रतिहारों के सामंतों के लेख

साहित्यिक स्रोत ( Literary Sources )

  • महेंद्र पाल द्वारा रचित
  • कर्पूरमंजरी
  • बाल रामायण
  • जननायक रचित पृथ्वीराज विजय
  • कश्मीरी कवि कल्हण द्वारा रचित राजतरंगिणी

मंडोर के प्रतिहार ( Mandor Pratihar )

प्रतिहारों की 26 शाखाओं में मंडोर के प्रतिहार सबसे प्राचीन एवं महत्वपूर्ण शाखा थी। *इनके बारे में हमें जोधपुर एवं घटियाले के शिलालेख से थोड़ी जानकारी मिलती है।

जोधपुर का शिलालेख 836 ई. का है। घटियाली से दो शिलालेख मिले हैं – 836 ई. का और दूसरा 861 ई. का इनसे पता चलता है कि प्रतिहारों के गुरु हरिश्चंद्र नामक ब्राह्मण के दो पत्नियां थी। एक ब्राह्मणी और दूसरी क्षत्राणी। ब्राह्मण पत्नी से उत्पन्न संतान ब्राह्मण प्रतिहार कहलाई और क्षत्राणी पत्नी भद्रा की संतान क्षत्रिय प्रतिहार हुए।

भड़ौच के गुर्जर प्रतिहार:-

सातवीं और आठवीं सदी के कुछ दान पत्रों से पता चलता है कि भडोच और उसके आसपास के क्षेत्रों पर गुर्जर प्रतिहारों का शासन था।
जय भट्ट चतुर्थ इस शाखा का अंतिम शासक प्रतीत होता है। भडोच के गुर्जरों की राजधानी नांदीपुरी थी

प्रतिहार वंश का महत्व ( Pratihar Vansh Importance )

प्राचीन भारतीय इतिहास में गुर्जर प्रतिहार वंश का बड़ा महत्व है।हर्ष की मृत्य के पश्चात उतर भारत की जो राजनीतिक एकता छीन भिन्न हो गयी थी उसे पुनः स्थापित करने में भी इस वंश ने सफल प्रयत्न किया था।

इसके प्रतापी नरेशो ने उत्तरी भारत के अधिकांश भाग को बहुत समय तक अपने अधीन रखा।दीर्घकाल तक इसने सिंध प्रदेश से आगे बढ़ती हुई मुस्लिम शक्ति को रोके रखा और उत्तरी भारत मे विस्तार न होने दिया।महान विजेता होने के साथ ही प्रतीहार नरेश महान साहित्य प्रेमी ,कला प्रेमी औऱ धर्मालु शासक थे।परिणामस्वरूप इनके शासनकाल में भारतीय संस्कृति की बड़ी उन्नति हुई।

Quiz 

Question -38

(1) ग्वालियर शिलालेख में नागभट्ट प्रथम को किस उपाधि से सम्मानित किया है

Correct! Wrong!

(2) किस प्रतिहार शासक के शासनकाल में उद्योतन सूरी ने कुवलय माला ग्रंथ की रचना की?

Correct! Wrong!

(3) किसके शासनकाल में त्रिपक्षीय संघर्ष (राष्ट्रकूट, पाल, व प्रतिहार) संघर्ष प्रारंभ हुआ

Correct! Wrong!

(4) किस शासक ने आदिवराह की उपाधि धारण की तथा वराह नामक मुद्राएं चलाई

Correct! Wrong!

(5) सातवीं सदी का प्राचीनतम विष्णु मंदिर, जो मंडोर से प्राप्त हुआ,किस कला को प्रदर्शित करता है

Correct! Wrong!

(6) निम्न में से वह शासक जिसने अरब आक्रमणकारियों को अपने राज्य में बढ़ने नहीं दिया तथा यह शासक अरबों का शत्रु कहा गया

Correct! Wrong!

(7) प्रतिहारों को वैदिक क्षत्रियों का वंशज किसने कहा बताया

Correct! Wrong!

(8) गुर्जर प्रतिहार वंश का प्रथम, योग्य,उल्लेखनीय,वह प्रतापी शासक था

Correct! Wrong!

(9) जोधपुर से प्राप्त घटियाला शिलालेख में किस प्रतिहार राजा की जानकारी मिलती है

Correct! Wrong!

(10) मुहणोत नेणसी ने प्रतिहारों की कितनी शाखाओं का वर्णन किया है

Correct! Wrong!

(11) छठी शताब्दी के आसपास गुर्जरात्रा प्रदेश पर शासन था

Correct! Wrong!

(12) नागभट्ट द्वितीय किस वंश का शक्तिशाली व प्रतापी शासक था

Correct! Wrong!

(13) ओसिया के कलात्मक मंदिरों का निर्माण कराया

Correct! Wrong!

(14) मंडोर के प्रतिहार वंश का मूल पुरुष कौन था

Correct! Wrong!

(15) गुर्जर प्रतिहार अपनी उत्पत्ति मानते थे

Correct! Wrong!

(16) ग्वालियर प्रशस्ति किस शासक द्वारा अरबों के दमन का उल्लेख करती है

Correct! Wrong!

प्रश्न=17-उद्धोतन सूरी किसका दरबारी कवि था?

Correct! Wrong!

प्रश्न=18-पाल शासकों देवपाल व विग्रह पाल के समकालीन प्रतिहार शासक था?

Correct! Wrong!

प्रश्न=19-राजशेखर दरबारी कवि था?

Correct! Wrong!

प्रश्न=20-प्रतिहार साम्राज्य का पतन शुरू हुआ?

Correct! Wrong!

21. मिहिरभोज के ग्वालियर अभिलेख के अनुसार प्रतिहारों की उत्पत्ति निम्न में से किसी एक से हुई है

Correct! Wrong!

22. निम्न रचनाओं में से कौन सी एक संस्कृत में रचित नहीं है

Correct! Wrong!

23. सुलेमान और अलमसूदी निम्न में से किसके काल में भारत आए क्रमशः

Correct! Wrong!

Q 24. भड़ोच के गुर्जर प्रतिहार राजवंश की राजधानी थी

Correct! Wrong!

Q 25 कवि राजशेखर ने प्रतिहार नरेश महेंद्र पाल के लिए लिखा था

Correct! Wrong!

Q 26. ग्वालियर प्रशस्ति में म्लेच्छों का नाशक कहा गया है

Correct! Wrong!

Q 27. प्रतिहार वंश का सर्वश्रेष्ठ शासक हैं A मिहिर B भोज C मिहिर भोज D कालाभोज

Correct! Wrong!

प्रश्न=28- गुर्जर प्रतिहार शासक किस नाम से जाने जाते है??

Correct! Wrong!

प्रश्न=29- गुर्जरों को किस शासक ने पराजित किया?

Correct! Wrong!

प्रश्न=30- आदिवराह की उपाधि किस राजपूत शासक ने धारण की?

Correct! Wrong!

प्रश्न=31- चीनी यात्री जिसने भीनमाल की यात्रा की थी?

Correct! Wrong!

प्रश्न=32- मंडोर के प्रतिहार माने जाते हैं?

Correct! Wrong!

प्रश्न=33-वह गुर्जर प्रतिहार शासक जिसने कन्नौज विजय के उपलक्ष्य में परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर की उपाधि धारण की?

Correct! Wrong!

प्रश्न=34- प्रतिहार शिलालेखों में पदाधिकारियों का उल्लेख मिलता है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=35-किस राजा के वंशज गुर्जर प्रतिहार कहलाये?

Correct! Wrong!

प्रश्न=36-?प्रतिहार वंश का अंतिम शासक था-*

Correct! Wrong!

प्रश्न=37-किस प्रतिहार राजा के काल मे ग्वालियर प्रशस्ति की रचना की गयीं?*

Correct! Wrong!

प्रश्न=38-राजस्थान के प्रतीहार वंश के संस्थापक हरिश्चन्द्र की राजधानी थी।

Correct! Wrong!

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

दिनेश मीना झालरा टोंक, कुम्भा राम हरपालिया, चित्रकूट त्रिपाठी, नवीन कुमार, चंद्रप्रकाश जी सोनी पाली, मदन जी, Daya Ram Jat Nagaur, P K Nagauri, Nagaur

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