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उच्च न्यायालय ( High Court )

भारत में उच्च न्यायालय संस्था का सर्वप्रथम गठन सन 1862 में हुआ जब कलकत्ता, बम्बई, मद्रास उच्च न्यायालयों की स्थापना हुई। सन 1866 में चौथे उच्च न्यायालय की स्थापना इलाहाबाद में हुई।

भारत के संविधान में प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गई है लेकिन 7 वें संशोधन अधिनियम अधिनियम 1956 में संसद को अधिकार दिया गया कि वह दो या दो से अधिक राज्यों एवं एक संघ राज्य क्षेत्र के लिए एक साझा उच्च न्यायालय की स्थापना कर सकती है।

इस समय देश में 24 उच्च न्यायालय हैं ( सन 2013 में तीन उत्तर पूर्वी राज्यों मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा मैं अलग उच्च न्यायालयों की स्थापना के कारण है इनकी संख्या 24 हो गई )। इनमें से तीन साझा उच्च न्यायालय हैं। केवल दिल्ली ऐसा संघ राज्य क्षेत्र है जिसका अपना उच्च न्यायालय ( 1966 से ) है।

दिल्ली के अलावा अन्य संघ राज्य क्षेत्र विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों के न्यायिक क्षेत्र में आते हैं। संसद एक उच्च न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र का विस्तार, किसी संघ राज्य क्षेत्र में कर सकती है अथवा किसी संघ राज्य क्षेत्र को एक उच्च न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र से बाहर कर सकती है।

 भारतीय संविधान के भाग 6 के अध्याय 5 में अनुच्छेद 214 से लेकर अनुच्छेद 232 तक राज्यों के उच्च न्यायालय के संगठन एवं प्राधिकार संबंधी प्रावधानों का वर्णन दिया गया है
 अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य मे एक उच्च न्यायलय की की व्यवस्था की गई है लेकिन अनुच्छेद 231 के अनुसार संसद दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की व्यवस्था कर सकती है वर्तमान में देश में 24 उच्च न्यायालय हैं इनमें से 3 साझा उच्च न्यायालय हैं
 केवल दिल्ली एक ऐसा संघ राज्य क्षेत्र है जिसका अपना उच्च न्यायालय 1966 से है

उच्च न्यायालय ( High Court ) का गठन

 संविधान के अनुच्छेद 216 में उच्च न्यायालय के गठन का उल्लेख किया गया है इसमें यह कहा गया है कि प्रत्येक उच्च न्यायालय मुख्य न्यायमूर्ती और अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति समय-समय पर करेगा
 सर्वोच्च न्यायालय की तरह उच्च न्यायालय की स्थिति में अन्य न्यायाधीशों की संख्या संविधान द्वारा निश्चित नहीं की गई है
 यही कारण है कि सिक्किम में सबसे कम न्यायाधीश हैं तथा उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक न्यायाधीश हैं
 राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 223 के अंतर्गत कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश से तथा अनुच्छेद 224 के अंतर्गत अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति करने का अधिकार है

उच्च न्यायालय से सम्बंधित अनुच्छेद 214- 232 (Article related to High Court ) 

अनुच्छेद 214- राज्यों के लिए उच्च न्यायालय
अनुच्छेद 215- उच्च न्यायालय अभिलेखों के न्यायालय के रूप में
अनुच्छेद 216- उच्च न्यायालय का गठन
अनुच्छेद 217- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद के लिए नियुक्ति तथा दशाएं
अनुच्छेद 218- उच्च न्यायालय में उच्चतम न्यायालय से संबंधित कतिपय प्रावधानों का लागू होना
अनुच्छेद 219- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का शपथ ग्रहण
अनुच्छेद 220- स्थायी न्यायाधीश बहाल होने के बाद प्रैक्टिस पर प्रतिबंध
अनुच्छेद 221- न्यायाधीशों का वेतन इत्यादि
अनुच्छेद 222- किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण
अनुच्छेद 223- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति
अनुच्छेद 224- अतिरिक्त एवं कार्यवाहक न्यायाधीशों की नियुक्ति

अनुच्छेद 224(A)- उच्च न्यायालयों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति
अनुच्छेद 225- उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार
अनुच्छेद 226- कतिपय याचिकाएं जारी करने की उच्च न्यायालयों की शक्ति
अनुच्छेद 226(A)- अनुच्छेद 226 के तहत केंद्रीय अधिनियमों की संवैधानिक वैधता पर विचार नहीं किया जाना (निरस्त)
अनुच्छेद 227- उच्च न्यायालय का सभी न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति
अनुच्छेद 228- उच्च न्यायालयों में कतिपय मामलों का स्थानांतरण
अनुच्छेद 228(A)- राज्य अधिनियमों की संवैधानिक वैधता से संबंधित प्रश्नों के विस्तारण के लिए विशेष प्रावधान (निरस्त)
अनुच्छेद 229- पदाधिकारी तथा सेवक एवं उच्च न्यायालय में व्यय
अनुच्छेद 230- उच्च न्यायालयों में क्षेत्राधिकार संघीय क्षेत्रों तक विस्तार
अनुच्छेद 231- दो या अधिक राज्यों के लिए एक साझे उच्च न्यायालय की स्थापना
अनुच्छेद 232- व्याख्या (निरस्त)

उच्च न्यायालय का गठन (अनुच्छेद 216)- 

अनुच्छेद 216 के अनुसार उच्च न्यायालय का गठन एक मुख्य न्यायाधीश तथा ऐसे अन्य न्यायाधीश रूप से मिलकर किया जाएगा जिन्हें राष्ट्रपति समय-समय पर नियुक्त करें।

न्यायधीशों की नियुक्ति (अनुच्छेद 217)-

अनुच्छेद 217 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा उस राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाएगी। उच्च न्यायालयों के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा उस राज्य के राज्यपाल का परामर्श लेगा।

योग्यता –

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. कम से कम 10 वर्ष तक अधीनस्थ न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर रहा हो अथवा किसी भी उच्च न्यायालय में लगातार 10 वर्ष तक वकालत की हो अथवा राष्ट्रपति की दृष्टि में वह पारंगत अथवा प्रतिष्ठित अधिवक्ता हो।
  3. न्यायाधीश बनने के लिए कोई न्यूनतम आयु सीमा निश्चित नहीं है अथवा 62 वर्ष की आयु पूरी न किया हो।

कार्यकाल (Tenure)

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल 65 वर्ष की आयु होता है जबकि अन्य न्यायाधीशों का कार्यकाल 62 वर्ष की आयु होता है।

शपथ-पत्र (Affidavit)

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य न्यायाधीशों को शपथ उस राज्य का राज्यपाल दिलाता है।

त्यागपत्र

मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीश राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र देते हैं।

स्थानांतरण

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में राष्ट्रपति के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से स्थानांतरण किया जा सकता है।

वेतन एवं भत्ते

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन तथा भत्ते को निर्धारित करने की शक्ति संसद को दी गई है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को वेतन 90000 रु प्रतिमाह तथा अन्य न्यायाधीश को वेतन 80000 रु प्रतिमाह मिलता है।

उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार उच्च न्यायालय अपनी शक्तियों का प्रयोग निम्नलिखित क्षेत्र अधिकारों के अंतर्गत करता है:–

  1. प्रारंभिक क्षेत्राधिकार (अनु. 226)
  2. अपीलीय क्षेत्राधिकार (अनु. 228)
  3. अधीक्षक संबंधी क्षेत्राधिकार (अनु. 227)
  4. अंतरण संबंधी क्षेत्राधिकार (अनु. 228)
  5. प्रशासकीय अधिकार
  6.  न्यायिक पुनरावलोकन

राजस्थान उच्च न्यायलय ( Rajasthan High Court )

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राजस्थान में न्यायिक व्यवस्था ( Judicial system) के उच्च स्तर पर राजस्थान उच्च न्यायलय है
संविधान के अनुच्छेद 214 के तहत राजस्थान उच्च न्यायलय का उद्घाटन सवाई मानसिहं जयपुर द्वारा 29 अगस्त 1949 को किया
मुख्य न्यायाधिश कमल कांत वर्मा तथा अन्य 11 न्यायाधीशों को महाराजा मानसिंह ने शपथ दिलाई थी
1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन के बाद सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर 1958 को उच्च न्यायालय का स्थानांतरण जोधपुर कर दिया 

जयपुर खंडपीठ 1958 में समाप्त कर दी गई थी । 31 जनवरी 1977 को जयपुर में पुनः खंडपीठ स्थापित की गई थी
राजस्थान उच्च न्यायालय में 50 न्यायाधीशों का पैनल रखा गया है लेकिन नया न्यायाधीश 50% ही हैं

उच्च न्यायालय एवं सभी अधीनस्थ न्यायालयों की प्रशासनिक व्यवस्था उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के निर्देशन में रजिस्ट्रार देखते हैं

राज्य में जिला स्तर पर दीवानी मामलों के लिए जिला न्यायालय तथा फौजदारी मामलों के लिए सेशन कोर्ट है
न्यायिक व्यवस्था में सबसे निचले स्तर पर मुंसिफ मजिस्ट्रेट होता है
राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रथम न्यायाधीश कमल कांत वर्मा थे
न्यायाधीश श्री कैलाश नाथ वांचू मुख्य न्यायाधीश के पद पर सर्वाधिक लंबी अवधि तक पदासीन रहे थे
सरत कुमार घोष राजस्थान की मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं और राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके थे

1 नवंबर 1956 को राजस्थान को ‘A’ श्रेणी राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद इसमें 7 न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश सहित) ही रह गई।

2015 में न्यायाधीशों की कुल संख्या 40 से 50 कर दी गई थी ।

  • संसद उच्चन्यायालय के क्षेत्राधिकार का विस्तार कर सकती है।
  • 15वें संविधान संशोधन 1963 द्वारा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु  60 से 62 वर्ष की गई।
  • उच्चन्यायालय के न्यायाधीश अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को देते है। अधीनस्थ न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है
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Rajasthan High Court

High Court retailed important Question  

1. राजस्थान के प्रथम व वर्तमान न्यायधीश कौन है ?
उत्तर- राजस्थान के प्रथम न्यायधीश कमल कांत शर्मा थे। तथा वर्तमान में प्रदीप नान्द्रजोंग है।

2. वर्तमान में भारत मे कितने उच्च न्यायालय है ?
उत्तर – वर्तमान में कुल 24 न्यायायल है।

3. किस अनुच्छेद के अनुसार न्यायधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय स्थानांतरण कौन कर सकता है ?
उत्तर- अनुच्छेद 222 के अनुसार न्यायधीशों का एक उच्च न्यायलय से दूसरे उच्च न्यायालय स्थानांतरण केवल भारत का राष्ट्रपति ही कर सकता है।

4. कोनसा अनुच्छेद कहता है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा ?
उत्तर- अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य में एक उच्च न्यायालय होगा। लेकिन अनुच्छेद 231 के अनुसार 2 या 2 से अधिक राज्यो व केंद्र शासित प्रदेशों का एक उच्च न्यायालय हो सकता है।

5. राजस्थान में उच्च न्यायालय विस्तार से बताइये ?
उत्तर- भारत में सर्वप्रथम उच्च न्यायालय की स्थापना 1861 अधिनियम के तहत कलकत्ता , मद्रास ,बम्बई में तीनों जगह एक साथ 1862 मे की गई।

राजस्थान में भी अनुच्छेद 214 के अनुसार जयपुर में 1949 को की गई । जिसे 1958 को जोधपुर में स्थानांतरित कर दिया गया ।जिसकी एक खंडपीठ जयपुर में 1977 में स्थापित की । अतः वर्तमान में मुख्यपीठ जोधपुर में व खंडपीठ जयपुर में है। 

उच्च न्यायालय का गठन :- इसका गठन एक मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायधीश से मिलकर होता है।
Note:- उच्च न्यायालय में अन्य न्यायधीशो की संख्या में परिवर्तन केवल राष्ट्रपति ही कर सकता है।

  • न्यायधीश की नियुक्ति- राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • शपथ- मुख्य न्यायाधीश राज्यपाल के समक्ष तथा अन्य न्यायधीश मुख्य न्यायाधीश के समक्ष शपथ ग्रहण करते है।
  • कार्यकाल – सभी न्यायधीश 62 वर्ष तक की उम्र प्राप्त करने तक
  • त्यागपत्र- सभी न्यायधीश राष्ट्रपति को देते है।

Note:- अनु. 226 के अनुसार उच्च न्यायालय अनु. 32 में उपस्थित सभी रिट जारी कर सकता है।

न्यायधीशो की योग्यताएं-

(१) वह भारत का नागरिक हैओ।
(२) वह कम से कम 10 वर्ष तक उच्च न्यायालय में अधिवक्ता रहा हो।
(३) किसी भी न्यायालय में 5 वर्ष तक न्यायधीश के पद पर काम कर चुका है।
(४) राष्ट्रपति की नजर में श्रेष्ठ विधिवेत्ता हो।

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

राजवीर प्रजापत चूरू, कमल सिंह टोंक, विजय कुमार महला झुन्झुनू, OM PRAKASH BARMER, राकेश गोयल, फूलचंद मेघवंशी, प्रियंका गर्ग, बिजेन्द्र सिंह जी मीणा, मुकेश पारीक ओसियाँ, दीपक मीना जी सीकर, नवीन कुमार, पूनम छिंपा नेठराना ( हनुमानगढ़ ) 

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