( भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में गांधीवादी युग – डॉ राजेन्द्र प्रसाद )

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म- 3 दिसम्बर, 1884,को जीरादेयू, (बिहार) में हुआ था। डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। राजेन्द्र प्रसाद, भारत के एकमात्र राष्ट्रपति थे जिन्होंने दो कार्यकालों तक राष्ट्रपति पद पर कार्य किया

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद DR.Rajendra Prasad बेहद प्रतिभाशाली और विद्वान व्यक्ति थे उन्होने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई

अक्टूबर 1934 में बम्बई में हुए इंडियन नेशनल कांग्रेस के अधिवेशन की अध्यक्षता राजेन्द्र प्रसाद ने की थी।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति ( 26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962 )

राजेन्द्र प्रसाद गाँधी जी मुख्य शिष्यों में से एक थे, उन्होंने भारत की आजादी के लिए प्राण तक न्योछावर करने की ठान राखी थी स्वतंत्रता संग्राम के रूप में इनका नाम मुख्य रूप से लिया जाता है राजेन्द्र प्रसाद बिहार के मुख्य नेता थे नमक तोड़ो आन्दोलन व भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान इन्हें जेल यातनाएं भी सहनी पड़ी.

राजनीती में डॉ राजेन्द्र प्रसाद का पहला कदम –बिहार में अंग्रेज सरकार के नील के खेत थे, सरकार अपने मजदूर को उचित वेतन नहीं देती थी 1917 में गांधीजी ने बिहार आ कर इस सम्स्या को दूर करने की पहल की. उसी दौरान डॉ प्रसाद गांधीजी से मिले, उनकी विचारधारा से वे बहुत प्रभावित हुए

1919 में पूरे भारत में सविनय आन्दोलन की लहर थी गांधीजी ने सभी स्कूल, सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करने की अपील की जिसके बाद डॉ प्रसाद ने अंपनी नौकरी छोड़ दी चम्पारन आंदोलन के दौरान राजेन्द्र प्रसाद गांधी जी के वफादार साथी बन गए थे

गांधी जी के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने अपने पुराने और रूढिवादी विचारधारा का त्याग कर दिया और एक नई ऊर्जा के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया 1931 में काँग्रेस ने आन्दोलन छेड़ दिया था इस दौरान डॉ प्रसाद को कई बार जेल जाना पड़ा

1934 में उनको बम्बई काँग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था  वे एक से अधिक बार अध्यक्ष बनाये गए 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन में इन्होंने भाग लिया जिस दौरान वे गिरिफ्तार हुए और नजर बंद रखा गया

राजेन्द्र प्रसाद द्वारा लिखी गयी पुस्तकें-

  • चम्पारन में सत्याग्रह (1922),
  • इंडिया डिवाइडेड (1946),
  • महात्मा गांधी एंड बिहार,
  • सम रेमिनिसन्सेज (1949),
  • बापू के क़दमों में (1954)

डॉ राजेन्द्र प्रसाद को मिले अवार्ड व सम्मान:

सन 1962 में अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से नवाजा गया वे एक विद्वान, प्रतिभाशाली, दृढ़ निश्चयी और उदार दृष्टिकोण वाले व्यक्ति थे

गांधी के साथ संबंध:-

अपने समकालीन लोगों की तरह, डॉ राजेंद्र प्रसाद की राजनीतिक चेतना महात्मा गांधी द्वारा बहुत प्रभावित थी।  वे गाँधीजी से गहराई से प्रभावित थे। किस तरह से गाँधीजी ने लोगों की समस्याओं को उठाया और सभी तक पहुँचाया

इनकी मृत्यु- 28 फ़रवरी, 1963, सदाकत आश्रम, पटना में हुई थी।

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