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Indian Political Thinker-Arvindo Ghosh

( भारतीय राजनीतिक विचारक-अरविन्दो घोष )

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✍? जन्म 15 अगस्त 1872 कलकत्ता, मृत्यु 5 दिसंबर 1950 पुदुच्चेरी।

✍? घोष एक आध्यात्मिक राजनीतिज्ञ थे उन्होंने भारतीय राष्ट्रवादी चिंतन में भारतीय सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना हेतु प्रयास किए। अध्यात्म तथा योग के भारत में कर्तव्य जागरण करके स्वाधीनता हेतु उन्होंने प्रेरित किया। घोष के अनुसार भारत की स्वतंत्रता से संसार के आध्यात्मिक जागरण की शक्ति प्राप्त होगी।

✍? घोष के प्रमुख राजनीतिक विचार-

✍? राष्ट्र एवं राष्ट्रीयता – भारत राष्ट्र का संबंध सनातन धर्म से रहा है। हिंदू राष्ट्र सनातन धर्म की उत्पत्ति है। हिंदू राष्ट्र भारत का उत्थान होगा तो सनातन धर्म हिंदू भी दीर्घजीवी होगा। उनके शब्दों में – “राष्ट्र क्या है ?हमारी मातृभूमि क्या है ? वह भूखंड नहीं है वाक विलास नहीं है और ना ही मन की कोरी कल्पना है। वह महाशक्ति है जो राष्ट्र की निर्मात्री कोटि-कोटि जनता की सामूहिक शक्तियों का समाविष्ट रूप है।” राष्ट्र भारत माता का रूप है, यह परम कल्याणकारी है। भारत माता दुर्गा स्वरूप चंडी है जो असुरों ( ब्रिटिश शासन )का मान मर्दन करने की शक्ति धारण करती है । उनके शब्दों में – “राष्ट्रीयता क्या है ? राष्ट्रीयता एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, राष्ट्रीयता एक सिद्धांत है, जो ईश्वरप्रदत्त है, राष्ट्रीयता एक सिद्धांत है जिसके अनुसार हमें जीना है हमें स्मरण रखना चाहिए कि हम निमित्त मात्र हैं भगवान के साधन मात्र हैं।” घोष दासता की बेड़ियों से जकड़ी भारत माता को स्वतंत्र कराने हेतु भारतीय पुत्रों से आह्वान करते हैं – “भारतवासियों भारत की आध्यात्मिक उन्नति, तप, गुरु परंपरा तथा प्राचीन अस्मिता ही हमें स्वाधीन तथा महान बना सकती है।” हमारा राष्ट्रवाद ईश्वर की इच्छा का परिणाम है।

✍? राज्य संबंधी विचार – अरविंद राज्य को एक सुविधा मानते हुए व्यक्ति के प्रम कल्याण को राज्य का ध्येय मानते हैं। राज्य साध्य नहीं साधन है। उनके राज्य संबंधी विचार उनके पुस्तक “द आइडियल ऑफ ह्यूमन यूनिटी” (The ideal of human unity) मैं वर्णित है। उन्होंने राज्य को एक अंग न मानकर यंत्र मना है ।उन्होंने राज्य के सावयवी सिद्धांत की आलोचना की। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है अतः उसे दबाव की शक्ति से नहीं शासित किया जाए। उन्होंने राज्य को बाधाएँ, समस्याएं तथा न्याय रोकने का साधन माना है। अरविंद घोस राज्य के सकारात्मक कार्यों का समर्थन नहीं करते। राज्य केवल बाधाएं दूर करें तथा अन्याय को रोकें, उसे न तो शिक्षा का प्रबंध करना चाहिए, नहीं धर्म विशेष का सरंक्षण करना चाहिए। वे हरबर्ट स्पेंसर के “सरवाइवल ऑफ द फिटेस्ट” (Survival of the fittest) के सिद्धांत की समानता रखते हैं। अरविंद “व्यक्तिवादी” थे, आर्थिक व्यक्तिवादी नहीं। उन्होंने कल्याणकारी समाजवाद का समर्थन किया। व्यक्तियों के हितों पर राज्यों का नियंत्रण नहीं होना चाहिए। व्यक्ति का उद्देश्य परम चेतना की प्राप्ति है जबकि राज्य का उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक गतिविधि में वृद्धि करना है।

✍? स्वतंत्रता संबंधी विचार – अरविंद व्यक्ति स्वतंत्रता को सर्वोच्च मानते थे। उन्होंने स्वतंत्रता के 3 प्रकार बताए – 1. राष्ट्रीय स्वतंत्रता, 2. आंतरिक स्वतंत्रता, 3. व्यक्तिगत स्वतंत्रता।

✍? स्वराज्य संबंधी विचार – उनके अनुसार स्वराज्य प्राप्ति हेतु विदेशी सत्ता से घृणा की आवश्यकता नहीं बल्कि भारत की अध्यातम शक्ति को जगाकर स्वराज्य प्राप्त किया जाएगा।

✍? लोकतंत्र पर विचार – अरविंद घोष विकेंद्रीकृत शासन का समर्थन करते हैं। वे लोकतंत्र को अच्छे दृष्टिकोण से नहीं देखते हैं क्योंकि लोकतंत्र के नाम पर विशिष्ट वर्ग द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं तथा समानता के साथ घोर अत्याचार होता है और बहुमत के प्रतिनिधित्व द्वारा छलावा करके शक्तिशाली अल्पतंत्र का शासन किया जाता है।

✍? विश्व संघ का विचार – अरविंद मानववादी दृष्टिकोण समर्थक हैं। इसके लिए उन्होंने स्वतंत्र राष्ट्रों के विश्व संघ की स्थापना पर बल दिया।

✍? पूंजीवाद पर विचार – अरविंद पूंजीवादी शोषण के कटु आलोचक थे क्योंकि पूंजीवादी अर्थव्यवस्था केंद्रीयकरण तथा एकाधिकार की जन्मदात्री है। अरविंद ने समाजवाद का समर्थन किया।

✍? निष्क्रिय प्रतिरोध पर विचार – अरविंद उग्र राष्ट्रवादी थे। उन्होंने नरमपंथियों की दया, प्रार्थना तथा प्रतिनिधित्व पर तनिक भी विश्वास नहीं था। उन्होंने एक ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए निष्क्रिय प्रतिरोध का समर्थन किया। निष्क्रिय प्रतिरोध अहिंसक ही हो यह आवश्यक नहीं। राष्ट्र अपनी स्वाधीनता हेतु हिंसा पर उतर सकता है। निष्क्रिय प्रतिरोध के लिए कई कार्यक्रम घोषित किए –

  1. स्वदेशी का प्रचार तथा विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
  2. राष्ट्रीय शिक्षण, व्यावसायिक, न्याय प्रणाली का विकास।
  3. सरकारी अदालतों का बहिष्कार।
  4. जनता का सरकार से असहयोग।
  5. निष्क्रिय प्रतिरोध अडंगा लगाने वालों का सामाजिक बहिष्कार।

उन्होंने “कर चुकाने” से भारतीयों को नहीं रोका; क्योंकि कराधान नहीं होने का अर्थ होगा – कानून की प्रत्यक्षत: अवज्ञा।

अरविंद घोष की प्रमुख कृतियां –

  • The life devine ( द लाइफ डिवाइन )
  • Essay on Gita ( एस्से ऑन गीता )
  • The synthesis of yoga ( द सिंथेसिस ऑफ योगा )
  • Savitri( सावित्री )
  • The human cycle ( द ह्यूमन साइकिल )
  • The ideal of human unity ( द आइडियल ऑफ ह्यूमन यूनिटी )

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No of Questions-30

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प्रश्र 1) अरविन्द को पूर्वी व पश्चिमी प्रतिभाओं का उत्कृष्टतम संश्लेषण मानते थे ?

Correct! Wrong!

प्रश्र 2) निम्नलिखित में से कौन गरमपंथी विचारधारा के कट्टर समर्थक थे ?

Correct! Wrong!

प्रश्र 3)अरविन्द घोष प्रभावित हुए ?

Correct! Wrong!

प्रश्र 4) अरविंद घोष के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र 5)किसके अनुसार 'हमारा शत्रु व विरोधी कोई नही ,बल्कि हमारी अपनी कमजोरी स्वार्थ एवं पाखंड है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र 6) अरविंद के अनुसार में 'ब्रिटिश साम्राज्य का मुकाबला है ' ?

Correct! Wrong!

प्रश्र 7 अरविंद ने राजनीति को धर्म के संबंध को माना है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र 8) किसने कहा था कि ' स्वराज की प्राप्ति , ईश्वर में विश्वास द्वारा ही संभव है '।

Correct! Wrong!

प्रश्र 8) अरविन्द ने किस में लिखते हुए कहा कि 'एक पराश्रित देश अपनी शक्ति खो देता है'।

Correct! Wrong!

प्रश्र 9) किसने नारा दिया था कि 'नियंत्रण नहीं , तो सहयोग नहीं।'

Correct! Wrong!

प्रश्र 10) किसने कहा था कि व्यक्ति के विकास के लिए परिवार समुदाय व राष्ट्र आवश्यक है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र 11) अरविंद ने "आँरविले " नामक आश्रम कि स्थापना कहां पर कि थी ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=12.निम्न में से किसे पांडिचेरी का सन्त कहा जाता है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=13.निम्न में से बंग -भंग आंदोलन प्रेरित था ।

Correct! Wrong!

प्रश्न=14.निम्न में से कोनसा अरविंद के चिंतन से सम्बंधित नही है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=15.अरविंद ने किस पुस्तक में लिखा कि "राष्ट्रवाद राष्ट्र में निहित दैवी का साक्षात्कार करने की उत्कृष्ट अभिलाषा है।जिसके द्वारा राष्ट्र दिव्य एकता का अनुभव कर सकता हैं।राष्ट्रवाद के उस आदर्श में जो भारत विश्व के सामने रखेगा उसमे जाति, वर्ग,पंथ और आर्थिक स्तर पर निरपेक्ष, मौलिक एकता,मानव के बीच होगी ।"

Correct! Wrong!

प्रश्न=16.अरविंद ने ओरविले नामक आश्रम की स्थापना कब की थी ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=17. निम्न में से कोनसा अधिकार अरविंदो घोष द्वारा बताए गए मौलिक अधिकारों में नही है- अ) अभिव्यक्ति का अधिकार ब) सभा करने का अधिकार स) संगठन बनाने का अधिकार द) शिक्षा प्राप्ति का अधिकार✔

Correct! Wrong!

प्रश्न=18. गांधीजी ने सत्याग्रह पर बल दिया उसी प्रकार अरविंदो घोष ने बल दिया

Correct! Wrong!

प्रश्न=19. अरविंद घोष ने अपनी किस पुस्तक में कहा की राष्ट्र कि धर्म की भांति उपासना की जानी चाहिए

Correct! Wrong!

प्रश्न=20. अपने किस पत्र में अरविंदो घोष ने राष्ट्रवाद को देवीदर्शन (भारत माता) के रूप में परिभाषित किया

Correct! Wrong!

प्रश्न=21. अरविन्द घोष का सम्बन्ध था-

Correct! Wrong!

प्रश्न=22. अरविन्द घोष किस विचारधारा के पोषक थे ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=23. अरविन्द घोष 'लोट्स एण्ड डैगर' नामक एक गुप्त संगठन के सदस्य कब बने थे ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=24. 'लोट्स एंड डैगर' संगठन कहाँ संचालित था ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=25. अरविंद घोष को किसने 'वसुंधरा का पथ प्रदर्शक तारा' तथा 'हमारे युग का अवतार' कहा है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=26. अरविन्द घोष का राष्ट्रवाद है -

Correct! Wrong!

प्रश्न=27. भारत में राष्ट्रवाद का पैगम्बर किसे कहा गया है ? अ) राम मनोहर लोहिया को ब) महात्मा गांधी जो स) अरविन्द घोष को✔ द) इनमे से कोई नही

Correct! Wrong!

प्रश्न=28. " भारत में 19 वीं शताब्दी , अन्धानुकरण , आत्मविस्मरण तथा कृत्रिमता की थी " । यह कथन किसके द्वारा कहा गया है ? अ) रोमेन रोला ने ब) अरविन्द घोष ने✔ स) नेहरू जी ने द) तिलक ने

Correct! Wrong!

प्रश्न=29. पुडुचेरी का संत किसे कहा गया है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=30. निम्न में से अरविन्द घोष ने कौनसे कांग्रेस अधिवेशन में भाग नही लिया -

Correct! Wrong!

Indian Political Thinker-Arvindo Ghosh Quiz ( अरविन्दो घोष )
VERY BAD! You got Few answers correct! need hard work.
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GOOD! You well tried but got some wrong! need more preparation
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AWESOME! You got the quiz correct! KEEP IT UP

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

पूनम छिंपा हनुमानगढ़, नेमीचंद जी चावला टोंक, नवीन कुमार जी, मुकेश पारीक ओसियाँ, अर्जुन जी कोटा, मनीष जी शर्मा

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