( भारतीय राजनीतिक विचारक-महात्मा गाँधी )

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महात्मा गांधी 1869 — 1948

राष्ट्रपिता पूजनीय बापू महात्मा गांधी राजनीति में संत, मानवतावादी दार्शनिक अराजकतावाद ई अनुभव वादी एवं राष्ट्रीय आंदोलन के निर्विरोध नेता के रूप में जाने जाते हैं जिन्होंने सत्य अहिंसा जैसे आदर्शों को व्यक्तिगत जीवन से सार्वजनिक जीवन तक विस्तृत करने का प्रयास किया।

फ्रांस की क्रांति में रूसो ,रूस की क्रांति में मार्क्स तथा अमेरिका की राजनीति में जो स्थान मार्टिन लूथर का रहा वही स्थान भारतीय राजनीति में गांधीजी का रहा।

गांधीजी के विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता को अन्ना हजारे का आंदोलन दर्शाता है। (Imp)

गांधीवाद का अस्तित्व- गांधी जी ने सन 1936 में सांवली सेवा संघ में अपने विचार प्रकट करते हुए कहा था गांधीवाद नामक कोई वस्तु नहीं है। (Imp)

महात्मा गांधी के प्रमुख कथन

  • “मशीनीकरण सांप की बाँवी की तरह है, जिसमें एक से लेकर सैकड़ों साँप हो सकते हैं। जहाँ मशीनें होती हैं, वहाँ बड़े शहर, ट्रॉम, रेले और बिजली की रोशनी होती है।”
  • “शैतान ब्रिटिश शासन के समक्ष समर्पण ईश्वर तथा मानव के विरुद्ध अपराध है।”
  • अपने 11 सूत्री मांग पत्र के गवर्नर जनरल इरविन के द्वारा ठुकराए जाने पर गांधीजी ने कहा- “मैंने रोटी मांगी, लेकिन मुझे पत्थर मिला।”
  • द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के असफल होने पर गांधी जी ने कहा- “सांप्रदायिक मतभेद की बर्फ का पहाड़ स्वतंत्रता के सूरज की गर्मी से पिघल जाएगा।”
  • “मेरी कमाई देश की सेवा के लिए है।”
  • कराची अधिवेशन, 1931 में कहा- “गांधी मर सकता है परंतु गांधीवाद सदा जीवित रहेगा।”
  • “सत्य ईश्वर एवं स्वयं साध्य है।”
  • “धर्म के बिना नैतिक जीवन बालू पर बने मकान जैसा है।”
  • “मैं ऐसे भारत के निर्माण का प्रयत्न करूंगा जिसमें निर्धन-से-निर्धन मनुष्य भी यह अनुभव करेगा कि यह मेरा अपना देश है, और इसके निर्माण में मेरा पूरा हाथ है।”
  • “विश्व के समस्त जीवन से प्रेम करो। धरती पर निम्नतम कोटि का प्राणी भी ईश्वर का प्रतिरूप है, इसलिए वह तुम्हारे प्रेम का अधिकारी है।”
  • “अहिंसा निर्बल व्यक्ति का आश्रय नहीं बल्कि शक्तिशाली का अस्त्र है।”
  • “स्वराज का पौधा उस देश में पनपता है जिसकी जड़ें अपनी परंपराओं से जुड़ी हो, परंतु वह इन परंपराओं की त्रुटियों के प्रति भी सजग हो और दूसरों से अच्छी बातें सीखने को तैयार हो।”
  • “सिद्धांतों के बिना राजनीति, श्रम बिना धन, आत्मा के बिना आनंद, चरित्र के बिना ज्ञान, नैतिकता के बिना वाणिज्य, मानवता के बिना विज्ञान और त्याग के बिना पूजा व्यर्थ है।”
  • “जहां वाद है, वहाँ विवाद है, उद्देश्य की प्राप्ति हेतु साधन भी पवित्र होने चाहिए व सत्य ही ईश्वर है।”
  • “जिस प्रकार वृक्ष और बीज का संबंध है, उसी प्रकार साधन और साध्य में है।”
  • “गीता को मैं सत्य के ज्ञान के लिए अद्वितीय पुस्तक मानता हुँ।”
  • “सृष्टि में एक मात्र सत्य की ही सत्ता है।”
  • “मेरे लिए धर्म-विहीन राजनीति का कोई अस्तित्व नहीं है। राजनीति धर्म के अधीन होती है। धर्म से अलग हुई राजनीति मृत्यु-जाल है, क्योंकि वह आत्मा को मारती है।”
  • “विरोधी को पीड़ा देकर नहीं, अपितु स्वयं को पीड़ा(कष्ट) में डालकर सत्य की रक्षा करना सत्याग्रह है। यह अन्य कुछ नहीं सत्य के लिए तपस्या है।”
  • “धर्म भगवान तक पहुंचने का पुल(सेतु) है।”

गांधीजी के बारे में विचार

  • “महात्माजी के दांडी यात्रा की तुलना ‘इल्बा’ से लौटने पर नेपोलियन के पेरिस मार्च और राजनीति सत्ता प्राप्त करने के लिए मुसोलिनी के रोम मार्च से की जा सकती है।” [सुभाषचन्द्र बोस]
  • “आने वाली पीढ़ियां शायद ही विश्वास करें कि इस प्रकार हाड़-मांस का मानव कभी पृथ्वी पर अवतरित हुआ था।” [अल्बर्ट आइंस्टीन]

गांधी जी द्वारा सत्याग्रह के लिए एकादशी का व्रत का प्रावधान किया गया यह महा व्रत प्रमुख हैं :-

1.अहिंसा
2.सत्य
3.अपरिग्रह
4.अस्तेय
5.ब्रह्मचर्य
6.शारीरिक श्रम
7.अस्वाद
8. निर्भीकता
9.स्वदेशी
10.अस्पृश्यत निवारण
11.सभी धर्मों का सम्मान

सत्याग्रह के साधन :-

1.उपवास
2.धरना
3.हड़ताल
4.सविनय कानून भंग
5.हिजरत या देश या सामाजिक बहिष्कार

गांधी जी के पांच महाव्रत :-

1.सत्य
2.अहिंसा
3.अपरिग्रह
4.ब्रह्मचर्य
5.चोरी न करना

गांधी जी द्वारा रचित पुस्तकें:-

  1. हिंद स्वराज
  2. सत्य के साथ प्रयोग आत्मकथा
  3. नॉन वायलेंस एंड पीस एंड वार
  4. सत्याग्रह
  5. सर्वोदय
  6. एथिकल रिलीजन
  7. ट्रुथ इज गॉड

समाचार पत्र का संपादन:-

  1. इंडियन ओपिनियन दक्षिण अफ्रीका में
  2. यंग इंडिया
  3. हरिजन
  4. नवजीवन
  5. हरिजन सेवक
  6. हरिजन बंधु

गांधी जी पर लिखित पुस्तकें :-

  1. द लाइफ ऑफ महात्मा गांधी :-1950 लुई फिशर
  2. पॉलिटिकल फिलोसोफी ऑफ महात्मा गांधी :-जी एन धवन
  3. गांधी एंड मार्क्स :-केएस मशरूवाला

Mahatma Gandhi Important Facts –

  • सन 19०6 उन्होंने दक्षिण अफ्रीका सरकार की “”एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट “”के विरुद्ध सफलतापूर्वक सत्याग्रह किया ( Imp.)
  • गांधी जी ने सत्याग्रह को नहीं बनाया बल्कि सत्याग्रह ने गांधीजी को महात्मा बना दिया- RR दिवाकर (Imp.)
  • “”इसके अध्ययन में मेरे संशयवाद को दूर कर दिया और मुझको अहिंसा में दृढ़ विश्वास करने वाला बना दिया!! महात्मा गांधी ने यह विचार- the kingdom of God is within you पुस्तक के बारे में टिप्पणी की है।
  • गांधीजी के अनुसार- लक्ष्य और साधन अन्त: संबंधित हैं ( Imp Net. 2010 )

 

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2 thoughts on “Indian Political Thinker-Mahatma Gandhi ( महात्मा गाँधी )”

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