( भारतीय राजनीतिक विचारक-राम मनोहर लोहिया )

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23 मार्च 1910 उत्तर प्रदेश के अकबरपुर नामक स्थान पर। मृत्यु 12 अक्टूबर, 1967 को मैं दिल्ली में।

1926 में पिताजी के साथ गौहाटी कांग्रेस अधिवेशन में गए।

1927 में इंटर पास किया तथा आगे की पढ़ाई के लिए कलकत्ता जाकर ताराचंद दत्त स्ट्रीट पर स्थित पोद्दार छात्र हॉस्टल में रहने लगे। विद्यासागर कॉलेज में दाखिला लिया।

अखिल बंग विद्यार्थी परिषद के सम्मेलन में सुभाषचंद्र बोस के न पहुंचने पर उन्होंने सम्मेलन की अध्यक्षता की।

1928 में कलकता में कांग्रेस अधिवेशन में शामिल हुए।

1928 से अखिल भारतीय विद्यार्थी संगठन में सक्रिय हुए। साइमन कमिशन के बहिष्कार के लिए छात्रों के साथ आंदोलन किया।

कलकत्ता में युवकों के सम्मेलन में जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष तथा सुभाषचंद्र बोस और लोहिया विषय निर्वाचन समिति के सदस्य चुने गए।

1930 में द्वितीय श्रेणी में बीए की परीक्षा पास की।

सप्तक्रांति सिद्धांत –

डॉक्टर लोहिया ने सप्तक्रांति का दर्शन दिया जिससे न्याय पूर्ण समाज की रचना संभव हो। ये सात सिद्धांत इस प्रकार हैं –

  • 1. निर्धन और धनिक के मध्य अंतर कम करना।
  • 2. कामगारों के लिए समान वेतनमान, समानता के अधिकारों का विस्तार आदि।
  • 3. उच्च जाति तथा निम्न जाति के मध्य असमानता की खाई कम करना ।
  • 4. स्त्री पुरुष में समानता स्थापित किए जाए।( सिमोन डी बुआ की पुस्तक “द सेकंड सेक्स” को आदर्श माना तथा उन्होंने सीता – राम राज्य की पैरवी की)।
  • 5. रंगभेद की समाप्ति।
  • 6. अणु अस्त्रों के विरुद्ध सत्याग्रह।
  • 7. व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए अहस्तक्षेप का सिद्धांत।

डॉक्टर लोहिया ने “विकेंद्रीकरण” का समर्थन किया उन्होंने लोकतंत्र की पिरामिड संरचना के स्थान पर “सागर तरंग व्यवस्था” का समर्थन किया।

चौखंभा सिद्धांत –

डॉक्टर लोहिया ने समाजवाद के लिए लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण पर बल दिया। उन्होंने पुलिस तथा प्रशासन के पंचायती करण का पक्ष लिया। लोहिया के शासन के चार स्तंभ – 1. ग्राम 2. मंडल (जिला) 3. प्रांत 4. केंद्र सरकार। अंततः उन्होंने विश्व सरकार की स्थापना का सुझाव दिया।

उन्होंने “एक व्यक्ति एक वोट” के सिद्धांत का समर्थन किया। विश्व सरकार की उन्होंने दो सदन बताए – उच्च सदन, निम्न सदन। उच्च सदन में प्रत्येक राष्ट्र का एकमत होगा तथा निम्न सदन में विश्व मतदान में निर्वाचित सदस्य बैठ सकेंगे। विश्व सरकार का आर्थिक संगठन भी होगा जिसके आर्थिक कोष से राष्ट्र अपने योगदान के अनुपात में ऋण ले सकेंगे। डॉक्टर लोहिया की विश्व सरकार के उद्देश्य विश्व में आवाजाही तथा निवास की स्वतंत्रता भी प्रदान करना है उन्होंने राष्ट्रों के कृत्रिम विभाजन का विरोध किया।

लोहिया ने 28 दिसंबर 1955 को सोशलिस्ट पार्टी का गठन किया। पिछड़े वर्गों की पैरवी हेतु उन्होंने “तीन आने बनाम पंद्रह आने” का सिद्धांत दिया। समाजवादी आंदोलन के दौरान लोहिया ने “मैनकाइंड” नामक मासिक पत्रिका का संपादन किया।

डॉ राम मनोहर लोहिया संबंधी अन्य अवधारणाएं – चार सूत्री योजना ( विश्व सरकार से संबंधित ), करुणा और क्रोध का दर्शन, छोटी मशीन की तकनीकी।

✍? अपनी पुस्तक “लोहिया एंड अमेरिकी मीट” में लोहिया ने गांधीजी और आइंस्टाइन को एक ही श्रेणी का विचारक मानना।

✍? डॉक्टर लोहिया ने समाजवादी पार्टी के पंचमढ़ी अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए “समान अप्रासंगिकता का सिद्धांत” दिया।

✍? डॉक्टर लोहिया ने अपना डेढ़ गुरु माना – एक महात्मा गांधी को तथा आधा पंडित जवाहरलाल नेहरू।

✍? प्रोफेसर उषा मेहता के अनुसार – “लोहिया गांधीवादियों में क्रांतिकारी तथा क्रांतिकारियों में गांधीवादी है।”

✍? मधु लिमये के अनुसार – “लोहिया अहिंसा तथा सविनय अवज्ञा के लिए प्रहलाद, सुकरात, मीराबाई तथा गांधी के सत्याग्रह की प्रतिमूर्ति थे।”

✍? श्रीपाद केलकर में लोहिया द्वारा वंचित, दलित, शोषित वर्ग की सेवा के लिए उन्हें “लघुत्तम मनुष्य की आवाज की संज्ञा दी।”

✍? डॉक्टर लोहिया ने कांग्रेस सोशलिस्ट (कलकत्ता) साप्ताहिक का संपादन किया। 1942 उषा मेहता के साथ आजाद हिंद रेडियो का संचालन भी किया।

✍? डॉक्टर लोहिया ने भारत पाकिस्तान विभाजन का विरोध किया तथा हिंदू मुस्लिम एकता का प्रयास किया उन्होंने मौलाना आजाद की पुस्तक “इंडिया विंस फ्रीडम”( India wins freedom ) के विरोध में “गिल्टी मैन ऑफ इंडियाज पार्टीशन” ( Gulty man of India’s partition ) नामक पुस्तक लिखी।

डॉक्टर लोहिया द्वारा लिखित पुस्तकें –

  • इतिहास चक्र (Wheel of History )
  • Will to power
  • Gulty man of India’s partition
  • Marx,Gandhi and socialism
  • 25000/- प्रतिदिन
  • The caste system
  • India,China and Northern frontiers
  • Interval during politics
  • Languages
  • Lohiya and American meet
  • Ram,Krishna and Shiv
  • जंगजू आगे बढ़े
  • क्रांति की तैयारी
  • आजाद राज कैसे बनें ?

 

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