सिंधु घाटी सभ्यता का क्षेत्रफल लगभग 1299600 वर्ग किमी है इसका आकार त्रिभुजाकार है  रेडियो कार्बन-14(C 14) तिथि निर्धारण विधियों में सर्वाधिक प्रचलित विधि है इस पद्धति के अनुसार हड़प्पा सभ्यता की तिथि 2350 ईशा पूर्व से 1750 ईसा

पूर्व मानी गई है जो सर्वाधिक मान्य हैं सिंधु कालीन तिथि उत्खनन के आधार पर 2500 ईसा पूर्व निर्धारित की गई है 

सिंधु सभ्यता का सर्वप्रथम रहस्योद्घाटन 1856 में बर्टन और विलियम बर्टन ने किया।  यह एक कांस्य युगीन सभ्यता है जिसे आद्य इतिहास के अंतर्गत माना जाता है  सिंधु सभ्यता की तीन राजधानियां कालीबंगा हड़प्पा और मोहनजोदड़ो है  

 

सर्वप्रथम 1921 ईस्वी में रायबहादुर दयाराम साहनी ने तत्कालीन भारतीय पुरातत्व विभाग के निर्देशक सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में हड़प्पा नामक स्थल की खुदाई कर इस सभ्यता की खोज की थी सिंधु सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता इसलिए कहा जाता है क्योंकि सिंधु सभ्यता की सर्वप्रथम महत्वपूर्ण खोज हड़प्पा में हुई थी

हड़प्पा के पश्चात 1922 ईस्वी में राखल दास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो नामक स्थल की खोज की सिंधु सभ्यता के अन्य नदी- घाटियों तक विस्तृत स्वरुप का पता चलने के कारण इसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से अधिक जाना जाता है हड़प्पा को इस नगरी सभ्यता का उत्खनन स्थल होने के कारण नामकरण का यह सम्मान प्राप्त हुआ है

भारत में सर्वाधिक सैंधव स्थल गुजरात में प्राप्त हुए हैं  मोहनजोदड़ो मृतकों का टीला भी कहा जाता है तथा कालीबंगा का अर्थ- काले रंग की चूड़ियाँ होता है सिंधु सभ्यता की प्रमुख विशेषता नगर निर्माण योजना थी एक सुव्यवस्थित जल निकास प्रणाली, इस सभ्यता के नगर निर्माण योजना की प्रमुख विशेषता थी

हड़प्पा सभ्यता का समाज मातृसत्तात्मक था एवं कृषि एवं पशुपालन के साथ-साथ उद्योग एवं व्यापार अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार थी  विश्व में सर्वप्रथम यहीं के निवासियों ने कपास की खेती प्रारंभ की थी तथा मेसोपोटामिया में कपास के लिए सिंधु शब्द का प्रयोग किया था तथा यूनानियों ने इसे ‘सिंडन’ कहा जो सिंधु का यूनानी रूपांतरण है

हड़प्पा सभ्यता में आंतरिक तथा विदेशी दोनों प्रकार का व्यापार होता था, माप तौल की इकाई सम्भवत 16 अनुपात में थी हड़प्पा सभ्यता में प्रशासन वणिक वर्ग द्वारा चलाया जाता था इस सभ्यता में मातृ देवी की उपासना का प्रमुख स्थान था तथा साथ ही पशुपति, लिंग, योनि, वृक्षों एवं पशुओं की पूजा की जाती थी पशुओं में कूबड़ वाला सांड सर्वाधिक महत्वपूर्ण पशु था और उसकी पूजा का प्रचलन था

इस काल में किसी भी मंदिर Image result for Indus Valley Civilizationके होने का अवशेष प्राप्त नहीं हुआ है

सिंधु सभ्यता के निवासी मिट्टी के बर्तन-निर्माण, मुहूर्त के निर्माण, मूर्ति-निर्माण की कलाओ में प्रवीण थे एवं मुहरे अधिकांशत: सेलखेड़ी की बनी होती थी हड़प्पा सभ्यता की लिपि भाव-चित्रात्मक है यह लिपी प्रथम में दाएं से बाएं तथा दूसरी पंक्ति में बाएं से दाएं लिखी गई है इस लेखन पद्धति को बुस्त्रोफेदम और आज तक इसको पढ़ा नहीं जा सका है

हड़प्पा सभ्यता में शव को दफनाने एवं जलाने की प्रथा प्रचलित थी

सिंधु सभ्यता के निर्माता 4 प्रजातियां थी

  1. प्रोटो-आस्ट्रेलाइड
  2. भूमध्यसागरीय 
  3. अल्पाइन
  4. मंगोलायड

 

सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल, उत्खननकर्ता, ईस्वी, नदी, वर्तमान स्थिति एवं प्राप्त महत्वपूर्ण साक्ष्य

1. हड़प्पा- 

खोज/ उत्खनन कर्ता एलेग्जेंडर कनिंघम इन्हें भारतीय पुरातत्व का जनक कहा जाता है यह भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के पहले डायरेक्टर जनरल थे 1921 ईस्वी में सर जॉन मार्शल के निर्देशन में राय बहादुर दयाराम साहनी ने इस स्थल का उत्खनन रावी नदी के पास जो ( वर्तमान पाकिस्तान के साहिवाल जिले( पहले मांटगोमरी जिला ) ) करवाया।

सर जॉन मार्शल भारत में कार्य करने वाले पहले पेशेवर पुरातत्वविद् थे  उत्खनन कर्ता दयाराम साहनी एवं माधोस्वरुप वत्स ने  यहां पर साक्ष्य के रूप में तांबे का पैमाना, तांबे की इक्कागाड़ी, तांबा गलाने की भट्टी, अन्नागार मिला है वर्तमान में सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा नगर धोलावीरा है।

2. मोहनजोदड़ो-

मोहनजोदड़ो 1922 से 1925 ईस्वी में राखल दास बनर्जी नई स्थल की खोज की यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना जिले में सिंधु नदी के तट पर स्थित है मोहनजोदड़ो ही एकमात्र ऐसा स्थान है जहां से 1 स्तूप का अवशेष मिला है पाकिस्तान में स्थित सिंधु सभ्यता का यह एकमात्र स्थल था जिसका 7 बार उत्थान और 7 बार पतन हुआ मोहनजोदड़ो सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा नगर था

यहां पर साक्ष्य के रूप में स्नानागार, अन्नागार, पुरोहित आवास सभा, भवन, कांसे की नर्तकी की मूर्ति, पशुपति की मूर्ति, सूती धागा आदि प्राप्त हुए हैं

3.चन्हूदड़ों- 

चन्हूदड़ो 1938 ईस्वी में MG मजूमदार, मैके ने खोज की सिंधु नदी के बाएं तट पर स्थित है यह एक प्रसिद्ध औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध था चन्हुदड़ो एकमात्र पुरास्थल है जहां से वक्राकार ईंटें मिली है कांसे की गाड़ियां मिली है  चन्हूदड़ो व लोथल में मनका निर्माण का कारखाना मिला है यहां पर साक्ष्य के रूप में मनका का बनाने का कारखाना, दवात काजल, कंधा प्राप्त हुए हैं

4. रंगपुर –

1953-54 में रंगनाथ राव द्वारा मादर नदी जो वर्तमान में गुजरात का काठियावाड़ जिले अहमदाबाद में मादर नदी के तट पर की गई
यहां पर साक्ष्य के रूप में ईद का दुर्ग और चावल की भूसी प्राप्त हुई यह 15 अगस्त 1947 के बाद भारत में खोजा गया प्रथम सिंधु स्थल है

5. रोपड़-

1953-55 में यज्ञदत्त शर्मा द्वारा सतलुज नदी के किनारे जो पंजाब का रोपड़ जिले में स्थित है पर खोज की गई  यहां पर साक्ष्य के रूप में मानव के साथ कुत्ते को दफनाने का प्राप्त हुआ है

6. लोथल-

रंगनाथ राव द्वारा 1955-62 में भोगवा नदी के किनारे जो गुजरात में खंभात की खाड़ी के अहमदाबाद जिले मैं खोज गया है  इसमें साक्ष्य के रूप में जहाजों की गोदी (डॉकयार्ड), युग्मित शवाधान, रंगाई के कुंड, हाथी दांत का पैमाना आदि प्राप्त हुए हैं हड़प्पा कालीन व्यापारिक गतिविधियों की राजधानी है लोथल के कब्रिस्तान में पुरुष महिलाओं को एक साथ दफनाने के साक्ष्य तथा चावल के प्रथम साक्ष्य मिले हैं

7. कोटदीजी-

1955 में फैजल अहमद के द्वारा सिंधु नदी के पास जो वर्तमान में सिंध प्रांत काे खैरपुर स्थान पर खोजा गया था यहां पर साक्षी के रूप में पत्थर के वानाग्र प्राप्त हुए हैं

8. आलमगिरी-

1958 यज्ञदत्त शर्मा द्वारा हिंडन नदी के तट पर जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला में प्राप्त हुआ यहां पर सांप तथा रीछ की मृण्मूर्ति प्राप्त हुई है

9. कालीबंगा-

कालीबंगा 1953 ईस्वी में अमलानंद घोष ने खोज की, बी बी लाल एवं बी के थापर के निर्देशन में 1961 उत्खनन हुआ हनुमानगढ़ जिले में सरस्वती नदी ( घग्घर नदी ) के तट पर स्थित कालीबंगा का अर्थ है काले रंग की चूड़ियां यहां भूकंप का प्राचीनतम साक्ष्य मिला है  
यहां पर साक्ष्य के रूप में जूते, खेत, अग्नि वैदिया, पकी ईंटे, अलंकृत फर्श प्राप्त हुए हैं

दयाराम साहनी के अनुसार यह हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के बौद्ध सिंधु सभ्यता की तीसरी राजधानी थी कालीबंगा सिंधु सभ्यता का एक मात्र स्थल है जहां मातृदेवी की मूर्तियां प्राप्त नहीं हुई है

10. धोलावीरा-

जे पी जोशी के द्वारा 1967-68 में गुजरात के कच्छ जिला में खोजा गया जे पी जोशी डॉक्टर आर एस बिष्ट ने 1990 ईस्वी में यह उत्खनन प्रारंभ किया धोलावीरा में स्थित मानसर अभी तक खोजा गया भारत मैं बड़ा सिंधुनगर है यह चौथा विशालतम हड़प्पा नगर है इस प्रकार के अन्य तीन नगर मोहनजोदड़ो हड़प्पा एवं बहावलपुर में गेनेड़ीवाल (यह तीनों नगर पाकिस्तान में है) यहां साक्ष्य के रूप में पॉलिशदार श्वेत पाषाण खण्ड, स्टेडियम सैन्धव लिपि के 10 बड़े अक्षर, लम्बा जलाशय के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं

11.बनावली-

1973-74 में रविन्द्र सिंह बिष्ट के द्वारा रंगाई नदी के किनारे जो वर्तमान में हरियाणा का हिसार जिला है खोजा गया यहां पर साक्ष्य के रूप में मिट्टी का खिलौना, हल, जौ, मातृदेवी की मूर्ति प्राप्त हुई

बालाथल सिंधु सभ्यता के क्षेत्र से बाहर अभी तक ज्ञान सबसे पुराना ग्रामीण अधिवास

सिंधु सभ्यता संबंधित विचारधाराएं ( Indus civilization ideologies )

  1. विद्वान मार्टिमर व्हीलर, डी एच गार्डन, मार्शल, क्रेमर आदि ने सिंधु सभ्यता का उदय मेसोपोटामिया संस्कृति से हुआ बताया है
  2. राखल दास बनर्जी ने सिंधु सभ्यता द्रविड़ सभ्यता का विस्तार बताया था
  3. अमलानंद घोष एवं एलविन्स ने राजस्थान, गुजरात, सिंध पंजाब और बलूचिस्तान में पूर्व-हड़प्पा संस्कृति ‘सोढी’ से उदित हुई है
  4. आर. पी. चंदा, फेयरसर्विस ने सिंधु सभ्यता का संस्थापक ऋग्वेद में उल्लिखित ‘पाठी’ थे
  5. राव, अग्रवाल व फेयरसर्विस ने भारत की धरती पर फलित ग्रामीण संस्कृति बतायां है
  6. बनर्जी एवं शास्त्री ने ऋग्वेद में वर्णित ‘दास’ अथवा ‘दस्यु’ सिंधु सभ्यता के विचारक थे

Important questions of Sandhu civilization ( सैन्धव सभ्यता के महत्वपूर्ण प्रश्न )

  1. सैन्धव सभ्यता में चांदी का प्राचीनतम साक्ष्य-  मोहनजोदड़ो 
  2. सैन्धव सभ्यता में चांदी के मुकुट के साक्ष्य-  कुणाल 
  3. सैन्धव सभ्यता में बाजरे का साक्ष्य- रंगपुर 
  4. सैन्धव सभ्यता में गेहूं की खेती का साक्ष्य –  हुलास (U P) 
  5. सैन्धव सभ्यता में चना & सरसो का साक्ष्य – कालीबंगा 
  6. सैन्धव सभ्यता में किले के अंदर अन्नागार – मोहनजोदड़ो 
  7. सैन्धव सभ्यता में सबसे बड़ा अन्नागार- हड़प्पा 
  8. सैन्धव सभ्यता में सबसे छोटा अन्नागार- मोहनजोडरो 
  9. सैन्धव सभ्यता में लकड़ी का अन्नागार- लोथल 
  10. सैन्धव सड़के किससे निर्मित थी – कच्ची मिट्टी 
  11. सैन्धव सभ्यता में पक्की मिट्टी की सड़कें कहाँ से प्राप्त हुई – कालीबंगा 
  12. सैन्धव सभ्यता में मकानों की खिड़की किस ओर खुलती थी- गली की ओर 
  13. सैन्धव सभ्यता में सड़क की ओर खिड़की किस स्थल में खुलती थी- लोथल 
  14. सैन्धव भवनों का निर्माण कैसी ईंटो से होता था- पक्की ईट 
  15. सैन्धव सभ्यता में कच्ची ईंटो से निर्मित भवन किस स्थल से प्राप्त- कालीबंगा 
  16. सैन्धव सभ्यता में मृण्मूर्तियों पर सर्वाधिक अंकित पशु- कूबड़दार बेल 
  17. सैन्धव सभ्यता में मुहरों पर सर्वाधिक अंकित पशु- एक श्रृंगी पशु 
  18. सैंधव सभ्यता का प्रसासनिक नगर-  हड़प्पा 
  19. सैंधव सभ्यता का आध्यात्मिक नगर- मोहनजोदड़ो 
  20. सैंधव सभ्यता का आद्योगिक नगर- चन्हूदड़ो 
  21. सैंधव सभ्यता का अर्ध औद्योगिक नगर- हड़प्पा 
  22. सैंधव सभ्यता के किस स्थल से एक मुहर मिली है जिस पर गरुड़ पक्षी सांप को पकड़े हुए है-  हड़प्पा 
  23. सैंधव सभ्यता के किस स्थल से एक मुहर मिली है जिस पर एक व्यक्ति दो बाघो से लड़ रहा है– मोहन जोदड़ो 
  24. सैंधव सभ्यता के किस स्थल से एक ईंट मिली है जिस पर बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पदचिन्ह है – चन्हूदड़ो 
  25. सैंधव सभ्यता के किस स्थल से पंचतंत्र की चालाक लोमड़ी के साक्ष्य मिले है- लोथल 
  26. सैंधव सभ्यता के किस स्थल से मालिक के साथ कुत्ता दफनाने का साक्ष्य मिला है- रोपड़ 
  27. सैंधव सभ्यता के किस स्थल से मालिक के साथ बकरी दफनाने का साक्ष्य मिला है- लोथल 
  28. सैंधव सभ्यता से लकड़ी की नाली के साक्ष्य- कालीबंगा
  29. सैंधव सभ्यता से पक्की मिट्टी की नाली के साक्ष्य- चन्हूदड़ो
  30. सैंधव सभ्यता की जुड़वा राजधानी- हड़प्पा व मोहनजोदड़ो
  31. सैंधव सभ्यता की तीसरी राजधानी-कालीबंगा
  32. सैंधव सभ्यता से एक युग्म शवाधान का साक्ष्य-कालीबंगा
  33. सैंधव सभ्यता से तीन युग्म शवाधान का साक्ष्य- लोथल
  34. सैंधव सभ्यता से कलश शवाधान का साक्ष्य- सुरकोतदा व मोहनजोदड़ो
  35. सैंधव सभ्यता में एक ही रक्षा प्राचीर से घिरी बस्ती के साक्ष्य- लोथल व सुरकोतदा
  36. सैंधव सभ्यता में दुर्ग के द्विभागिकरण के साक्ष्य- काली बंगा
  37. सैंधव सभ्यता में तीन भागों से घिरा नगर- धोलावीरा
  38. सैंधव सभ्यता में किले बंधी का अभाव किस स्थल से- चन्हूदड़ो व मोहनजोदड़ो
  39. सैन्धव सभ्यता में राज्यसभा के अवशेष के साक्ष्य- धोलावीरा
  40. सैन्धव सभ्यता में पुरोहित राजा की मूर्ति के साक्ष्य- मोहनजोदड़ो
  41. सैन्धव सभ्यता में शासक या प्रशासकीय भवन के साक्ष्य- लोथल

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No of Question-43

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

Chandra Gupt, लोकेश स्वामी, कमलनयन पारीक अजमेर, B L BHATI, भगवाना राम पीलवा जोधपुर, महेन्द्र चौहान

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