अंतराष्ट्रीय सम्बन्धो का आदर्शवादी उपागम ?

  • प्रथम विश्वयुद्ध से पहले अंतराष्ट्रीय अध्ययन ऐतिहासिक उपागम पर ही निर्भर रहा।
  • प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात राज्यों के बीच हिंसक संघर्षों को टालने के लिए नई अंतर्दृष्टि व विश्लेषणों के प्रयोग को प्रोत्साहित किया गया,फलस्वरूप आदर्शवादी उपागम सामने आया।
  • वुडरो विल्सन के 14 सूत्री कार्यक्रम तथा 1919 में लीग ऑफ नेशन्स की स्थापना ने आदर्शवादी विचार धारा को गति प्रदान की।
  • आदर्शवादी विचाधारा की जड़ें उदारवाद, फ्रांसीसी क्रांति तथा सेंट साइमन, ग्रेशियश, काँट जैसे विचारकों के लेखों में निहित थी।
  • आधुनिक काल मे वुडरो विल्सन,ग़ांधी, अल्ड्स हक्सले व मीड जैसे विद्वानों ने आदर्शवादी विचारधारा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • आदर्शवादी विचारधारा ने शीघ्र ही संघवाद,विधिवाद,मानववाद व शांतिवाद जैसे दर्शनो के पहलुओं को अपने मे समाविष्ट कर लिया।
  • आदर्शवादी मनुष्य को आवश्यक रूप से भला,नैतिक व स्वार्थ हीन प्राणी मानते हैं,जो सहयोगी व्यवहार करने मे सक्षम होता है।
  • आदर्शवाद के अनुसार युद्ध तथा संघर्ष मनुष्य के सुधारवादी प्रयासों से टाले जा सकतें हैं।

 

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No of Questions-64

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रवि जी जोधपुर, नेमीचंद जी चावला टोंक, कैलाश जी गहलोत, सरला जी चौहान, भरतसिंह जी भीलवाड़ा, कृष्णा जी परिहार, नरपत जी सोलंकी, नवीन कुमार जी, मनीष जी शर्मा, मुकेश पारीक ओसियाँ, नरेश जी अखावत 

One thought on “International Politics Study ( अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के अध्ययन के उपागम )”

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