Image result for Legal Rights

1. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम ( Consumer Protection Act ) 1986

  • विश्व में सर्वप्रथम 15 मार्च 1963 को United States of america में उपभोक्ता संरक्षण अधिकार अधिनियम लागू हुआ
  • तभी से संपूर्ण विषय में 15 मार्च विश्व उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है
  • स्वतंत्र भारत में उपभोक्ता आंदोलन प्रारंभ करने का श्रेय चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को जाता है
  • भारत में सर्वप्रथम उपभोक्ता आंदोलन महाराष्ट्र में 1904 में शुरू हुआ
  • संसद में 24 दिसंबर 1986 को उपभोक्ता संरक्षण कानून पास किया गया
  • जो 15 अप्रैल 1987 को जम्मू कश्मीर को छोड़कर समस्त भारत में लागू हुआ
  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत है संपूर्ण राजस्थान में एक त्रिस्तरीय अर्ध न्यायिक व्यवस्था स्थापित की गई
  • उपभोक्ता विवादों को निपटाने के लिए जिला और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर त्रिस्तरीय निवारण व्यवस्था स्थापित की गई
  • जिसमें सिर्फ स्तर पर राष्ट्रीय आयोग राज्य स्तर पर राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग और जिला स्तर पर जिला उपभोक्ता मंच स्थापित किए गए हैं
  • उपभोक्ता न्यायालयों का संगठन स्वरूप और क्षेत्राधिकार

जिला उपभोक्ता फोरम ( District Consumer Forum )

  • जिला उपभोक्ता फोरम की खंडपीठ में अध्यक्ष सहित तीन सदस्य होते हैं इन सदस्यों में एक महिला सदस्य होना अनिवार्य है
  • जिला उपभोक्ता फोरम पर 20 लाख रुपए तक के दावे किए जाते हैं

राज्य आयोग ( State commission ) 

  • इसमें एक अध्यक्ष तथा कम से कम 2 सदस्य होते हैं इसमें भी एक महिला सदस्य होना अनिवार्य है
  • राज्य आयोग का अध्यक्ष उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश होता है
  •  यहां पर जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा किए गए निर्णय के विरुद्ध अपील की जाती है
  • राज्य आयोग में 20 लाख से अधिक तथा एक करोड़ रुपए तक के दावे किए जाते हैं

राष्ट्रीय आयोग ( National commission )

  •  केंद्रीय स्तर पर देश में एक राष्ट्रीय आयोग स्थापित है इसका मुख्यालय दिल्ली में है इसमें एक अध्यक्ष तथा कम से कम 4 सदस्य होने चाहिए
  •  इसका अधिक सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होता है
  • इसमें भी एक महिला सदस्य होना अनिवार्य है यह आयोग राज्य आयोग द्वारा किए गए निर्णय के मामलों को सुनता है
  •  इस आयोग के निर्णय के विरुद्ध केवल सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है
  • राष्ट्रीय आयोग एक करोड़ से ऊपर की दावे सुनता है
  • राष्ट्रीय आयोग के निर्णय के विरुद्ध 30 दिन सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है

उपभोक्ता के अधिकार  ( Consumer rights )

1 सुरक्षा का अधिकार
2 सूचना का अधिकार
3 चयन का अधिकार
4 सुनवाई का अधिकार
5 शिकायत के समाधान
6 उपभोक्ता का शिक्षा का अधिकार

राजस्थान राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग जयपुर 1988 राजस्थान उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत 26 मई 1988 को राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग का गठन कर दिया गया
जिस के प्रथम अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री कृष्णमल लोढा थे
इसका मुख्यालय जयपुर में है इसकी एक सर्किट बेंच जोधपुर में है
राज्य के सभी जिलों एक
एक उपभोक्ता जिला मंच हैं
जबकि जयपुर में दो जिला मचं स्थापित किए गए हैं

सूचना का अधिकार ( Right to information )

भारत में सूचना का अधिकार को प्राप्त करने के आंदोलन की शुरुआत ब्यावर से 6 अप्रैल 1995 को मजदूर किसान शक्ति संघ की प्रिय नेता अरुणा राय द्वारा की गई

  • अगस्त 2004 में सूचना स्वतंत्रता अधिनियम में संशोधनों की सिफारिश पर सरकार को सौंपी गई
  • 11 मई 2005 को लोकसभा ने इस विधेयक को पारित कर दिया गया
  • 12 मई 2005 को संसद द्वारा पारित होकर 15 जून 2005 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई
  • सूचना का अधिकार अधिनियम में केंद्र सरकार राज्य सरकार स्थानीय शहरी निकाय पंचायती राज संस्थाएं वे सभी निकाय जो सरकार के अधीन आते हैं इन सभी संस्थाओं पर सूचना का अधिकार प्रभावी है

15 जून 2005 को जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में लागू होगा

राजस्थान में लोक सेवाओं को प्रदान करने की गारंटी अधिनियम 2011

  •  14 नवंबर 2011 से पूरे प्रदेश में लागू हुआ
  •  इस अधिनियम में 18 विभागों के 53 विषयों की 153 सेवाएं शामिल है
  •  राज्य विधानसभा द्वारा 29 अगस्त 2011 को इस अधिनियम को मंजूरी दी गई

अधिनियम के मुख्य प्रावधान

  • इसमें जनता से जुड़े 18 विभाग शामिल है जिला प्रशासन को भी इसमें शामिल किया गया है
  • इन 18 विभागों के तहत जनता से संबंधित प्रतिदिन के कार्य एवं कल्याणकारी योजनाओं के 53 विषयों की 153 सेवाओं को समयबद्ध एवं पारदर्शी रूप से निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराने की गांरटी
  • किसी विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी अपनी क्षेत्राधिकार में शामिल सेवाओं को निर्धारित समय में पूरा नहीं करता है उस पर ₹500 से लेकर अधिकतम ₹5000 तक का दंड प्रावधान है
  • यदि वह सेवा प्रदान करने में विलंब करता है तो प्रतिदिन ढाई सौ से लेकर पांच हजार रूपये का आर्थिक दंड शामिल है

 

राजस्थान जन सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012

  • यह अधिनियम राजस्थान में 1 अगस्त 2012 से लागू हुआ
  • अधिनियम आम आदमी की समस्याओं तथा अभाव अभियोग पर उनके अपने क्षेत्र में ही एक निश्चित समय सीमा में सुनवाई का अधिकार है
  • लोक सुनवाई अधिकारी सुनवाई का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के हर विभाग में एक लोक सुनवाई का अधिकारी नियुक्त है
  • इस से संतुष्ट ना होने पर अपीलीय अधिकारी के पास मामला जाएगा जो दोनों पक्षों को सुनकर मामला तय करेगा
  • यदि वह नहीं सुनता है तो उस पर ₹5000 का जुर्माना होगा

इनके क्षेत्राधिकार निम्न है

  1.  ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सेवक राजस्व मामले पटवारी
  2.  तहसील स्तर पर तहसीलदार
  3.  पंचायत समिति में बीडीओ
  4.  उपखंड स्तर पर एसडीओ
  5.  जिला स्तर पर SDM सभी विभागों के अधिकारी
  6.  जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी
  7. नगर पालिका अधिशासी अधिकारी
  8. नगर परिषद आयुक्त
  9.  नगर निगम सीईओ
  10. संभाग स्तर पर अतिरिक्त संभागीय आयुक्त वह सभी विभागों के संभाग स्तर के अधिकारी

इस अधिकार के क्षेत्र राजस्थान लोक सेवा प्रदान करने की गारंटी अधिनियम 2011 के लिए अधिसूचित 153 सेवाओं को प्राप्त करने वाली कठिनाइयों का समाधान राज्य एवं केंद्र की सभी जन कल्याणकारी योजनाओं तथा कार्यक्रमों की क्रिया को लाभ प्राप्त करने में आमजन की कठिनाइयों का निराकरण

इस अधिनियम के तहत तीन स्तर स्थापित किए गए हैं

पहला स्तर सूचना या सुगम केंद्र पर शिकायत संबंधी परिवारवाद सादे कागज पर या निर्धारित प्रारूप में दर्ज कराने की व्यवस्था होगी तथा रसीद भी मिलेगी लोक सुनवाई अधिकारी 15 दिन में सुनवाई वह निपटारा करेगा परिवारवाद कार्यकरणी खारिज करने का कारण लिखित रूप में स्पष्ट करना होगा

दूसरा स्तर लोक सुनवाई अधिकारी के निर्णय के खिलाफ 30 दिन में समय सीमा में सुनवाई नहीं होने पर प्रथम अपीलीय अधिकारी की अपील यहां निस्तारण 21 दिन में होगा

तीसरा प्रथम अपील के निर्णय के खिलाफ 30 दिन में या उसके आदेश का पालन नहीं होने पर द्वितीय अपील अधिकारी से अपील.

Play Quiz 

No of Questions – 20

[wp_quiz id=”380″]

 

Specially thanks to ( With Respects )

राजवीर प्रजापत चूरू, Pk Guru

Leave a Reply

Your email address will not be published.