स्वतंत्रता शब्द अंग्रेजी के Liberty से बना है, लिबर्टी लेटिन भाषा के Liber से बना है इसका अर्थ है, बंधनों का अभाव।

स्वतंत्रता से संबंधित परिभाषाएं ( Definitions of liberty )

  • हॉब्स के अनुसार -“स्वतंत्रता, विरोध की अनुपस्थिति है।”
  • लॉक के अनुसार-” जहां कानून नहीं होता वहां स्वतंत्रता नहीं होती है।”
  • ग्रीन का विचार है कि- “स्वतंत्रता,उचित प्रतिबंधों की व्यवस्था है।”
  • जीडीएच कॉल के अनुसार– “बिना किसी बाधा के अपने व्यक्तित्व को प्रकट करने के अधिकार का नाम स्वतंत्रता है।”
  • पोलार्ड के अनुसार-“समानता के अभाव में स्वतंत्रता भ्रम है।”
  • लेनिन का कथन है कि– “राजनीतिक अथवा नागरिक स्वतंत्रता, आर्थिक स्वतंत्रता के अभाव में अर्थहीन है।”
  • लॉस्की के अनुसार- “स्वतंत्रता का अर्थ उस वातावरण की व्यापकता से है, जिसमें मनुष्य अपने विकास को पूर्ण करते हैं।”
  • बार्कर के अनुसार-“मिल खोखली स्वतंत्रता का पैगंबर है।”
  • सीले का कथन है-“स्वतंत्रता, अतिशासन का विलोम है।”

समकालीन उदारवादी चिंतन एवं स्वतंत्रता की अवधारणा ( Contemporary liberal thinking and concept of liberty )

समकालीन उदारवाद के अंतर्गत जो सिद्धान्त व्यक्ति की नकारात्मक स्वतंत्रता पर बल देता है और अहस्तक्षेप की नीति को उचित ठहराने के लिए नए आधार प्रस्तुत करता है उसे ‘स्वेच्छातंत्रवाद’ की संज्ञा दी जाती है। इस धारणा के प्रतिपादक- आइजिया बर्लिन, मिल्टन फ्रीडमैन, रॉबर्ट नॉजिक एवं एफ. ए. हेयक है।

  • सी. बी. मैक्फर्सन और जॉन रोल्स समतावादी के प्रतिनिधि हैं।
  • आइजिया बर्लिन ‘राजनीतिक स्वतंत्रता’ को नकारात्मक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहते हैं की राज्य केवल यह कर सकता है की जहाँ तक हो सके, वह व्यक्ति की स्वयं-निर्धारित गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध न लगाए।
  • एफ. ए. हेयक ने “वैयक्तिक स्वतंत्रता” का प्रतिपादन करते हुए इस बात पर बल दिया की इसे स्वतंत्रता की तीन अन्य धारणाओ से पृथक किया जाना चाहिए। तीन अन्य धारणाएं हैं- राजनीतिक, आंतरिक एवं शक्ति रूपी स्वतंत्रता।
  • मिल्टन फ्रीडमैन ने ” प्रतिस्पर्धात्मक पूंजीवाद” का समर्थन किया है। जिसमे निजी उद्यम को स्वतंत्र विनिमय (Free Exchange) का पूरा अवसर हो।
  • सी. बी. मैक्फर्सन ने नकारात्मक स्वतंत्रता या अहस्तक्षेप का विरोध करते हुए कहा की यह स्वतंत्रता की जड़ और यांत्रिक संकल्पना है जो व्यक्ति को एकदम बाजार व्यवस्था की दया पर छोड़ देती है और उसे अपनी विवशता के लिए अपने आपको जिम्मेदार ठहराया जाता ह।

प्रमुख रचनाएँ ( Major Compositions )

  1. आइजिया बर्लिन- टू कॉन्सेप्ट ऑफ लिब्रिटी (1958)
  2. एफ.ए. हेयक- द कांस्टीट्यूशन ऑफ लिबर्टी (1960)
  3. मिल्टन फ्रीडमैन- कैपिटलिज्म एण्ड फ्रीडम (1962)
  4. रॉबर्ट नॉजिक- एनार्की, स्टेट एण्ड यूटोपिया (1974)

स्वतंत्रता के प्रकार ( Types of liberty )

01.नैसर्गिक (प्राकृतिक) स्वतंत्रता ( Natural liberty )- स्वतंत्रता प्रकृति की देन है। प्रत्येक व्यक्ति जो चाहे करें और उसके कार्यों में अन्य कोई व्यक्ति हस्तक्षेप ना करें अर्थात ‘स्वतंत्रता जन्मसिद्ध अधिकार है।’

02. व्यक्तिगत स्वतंत्रता ( Personal liberty )- व्यक्तिगत स्वतंत्रता का आशय है कि व्यक्ति को उन कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए, जिनका संबंध उसके अस्तित्व एवं विकास से है। आहार, आवास, आवरण तथा पारिवारिक जीवन एवं धर्म संबंधी कार्य इसी क्षेत्र में आते हैं। व्यक्तिवादियों और बहुलवादियो ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समर्थन किया है।

03. नागरिक स्वतंत्रता ( Civil liberties ) – समाज या राज्य के सदस्य के रूप में व्यक्ति नागरिक स्वतंत्रता का उपयोग करता है। प्रत्येक राज्य में नागरिकों को कई अधिकार प्रदान किए जाते हैं, जैसे अभिव्यक्ति का अधिकार, भाषण एवं लेखन का अधिकार, धर्म का अधिकार, आर्थिक संपत्ति का अधिकार आदि। जिस राज्य में नागरिक स्वतंत्रता का स्तर जितना ऊंचा होता है, वह राज्य उतना ही अधिक लोकतंत्रात्मक एवं लोककल्याणकारी होता है। भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों के संविधान में नागरिक अधिकारों का उल्लेख मिलता है।

04. राजनीतिक स्वतंत्रता ( Political liberty )- इसमें नागरिकों को अपने राज्य के क्रिया-कलापों तथा शासन कार्य में भाग लेने का अधिकार होता है। इस प्रकार की स्वतंत्रता केवल प्रजातंत्रीय व्यवस्था में ही संभव है। इसका तात्पर्य है कि जनता अपनी इच्छा अनुसार अपना शासक चुन सके और निर्वाचित शासक जनता के प्रति उत्तरदायी हो।
राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए चार अधिकारों को अनिवार्य समझा जाता है, ये है-

  • मतदान का अधिकार
  • निर्वाचित होने का अधिकार
  • सरकार की आलोचना का अधिकार
  • योग्यता अनुसार पद प्राप्त करने का अधिकार

05. सामाजिक स्वतंत्रता ( Social liberty )- सामाजिक स्वतंत्रता से अभिप्राय है कि समाज के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को अपना विकास करने का समान अवसर हो। इसका अर्थ है कि समाज में ऊंच-नीच की भावना नहीं होनी चाहिए, जाति-धर्म या धन के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

06. आर्थिक स्वतंत्रता ( Economic liberty )- राजनीतिक स्वतंत्रता आर्थिक स्वतंत्रता पर अवलंबित होती है। किसी भी व्यक्ति का विकास तब तक संभव नहीं है जब तक की उस की अपेक्षाये तथा आवश्यकताएं ठीक प्रकार से पूर्ण नहीं हो जाती। इन अपेक्षाओं की संतुष्टि के लिए आर्थिक स्वतंत्रता आवश्यक है। यह तभी संभव है जबकि प्रत्येक व्यक्ति को उसकी योग्यता अनुसार जीविकोपार्जन का साधन सुलभ हो

  • आर्थिक क्षेत्र में नकारात्मक स्वतंत्रता और सकारात्मक स्वतंत्रता एक दूसरे का विपरीत पक्ष प्रस्तुत करती है-
  • नकारात्मक संदर्भ में- आर्थिक स्वतंत्रता का अर्थ मनुष्य की आर्थिक गतिविधियां किसी प्रतिबंध से न बंधी हो, से लगाया जाता है।
  • आर्थिक स्वतंत्रता की सकारात्मक संकल्पना में- सर्वसाधारण की आर्थिक असमर्थता के निराकरण की मांग करती है। वह समाज के आर्थिक ढांचे में ऐसी परिवर्तन की मांग करती है, जिससे धनवान और निर्धन वर्गों में ऐसा अंतर न रहे किसने एक वर्ग दूसरे वर्ग का शोषण करें।

07. राष्ट्रीय स्वतंत्रता ( National liberty )- राष्ट्रीय स्वतंत्रता का अर्थ है राष्ट्र की आजादी। इसका तात्पर्य संप्रभुता के बाह्य पक्ष से है जिसका निष्कर्ष है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों एवं संबंधों के निर्धारण में प्रत्येक राष्ट्र स्वतंत्र है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता का महत्व तभी है जब अंतरराष्ट्रीय शांति हो। अंतर्राष्ट्रीय विधि राष्ट्रीय स्वतंत्रता पर एक प्रतिबंध है।

08. नैतिक स्वतंत्रता ( Moral liberty )- नैतिक स्वतंत्रता का तात्पर्य व्यक्ति की उच्च मानसिक स्थिति से हैं जिसमें वह अनुचित लोभ-लालच के बिना अपना सामाजिक जीवन व्यतीत करने की योग्यता रखता हो। विवेकी व्यक्ति ही नैतिक दृष्टि से स्वतंत्र कहलाता है। प्लेटो, ग्रीन, कांट व बोसांके ने वैयक्तिक विकास के लिए नैतिक स्वतंत्रता पर बल दिया है।

 

Quiz 

Question- 49 

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मुकेश पारीक ओसियाँ, नवीन कुमार जी झुंझुनू, इंद्रा जी जोधपुर, अनुराधा जी राय, संजू जी परिहार, नरेश जी अखावत, नेमीचंद जी चावला, इंद्रा, राजेन्द्र श्योराण

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