Lokayukta ( लोकायुक्त ) 

प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग ने लोकायुक्त की महत्ता को समझते हुए अपने पहले प्रतिवेदन में 1966 में लोकपाल और लोकायुक्त नाम जैसी संस्थाओं पर विचार प्रस्तुत किया था

  • लोकायुक्त का सर्वप्रथम गठन महाराष्ट्र में 1971 में हुआ था
  • उड़ीसा में यह अधिनियम 1970 किया गया था परंतु उसे लागू 1983 में किया गया था उड़ीसा कानून बनाने वाला पहला राज्य था
  • भारत में सर्वप्रथम सन 1970 में उड़ीसा ने लोकपाल या लोकायुक्त संस्था की स्थापना के लिए कानून पारित किया था
  • राजस्थान में लोकायुक्त की स्थापना 1973 में हुई थी
  • अब तक 20 से अधिक राज्यों में लोकायुक्त का गठन किया जा चुका है
  • अलग-अलग राज्यों में लोकायुक्त को अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे महाराष्ट्र राजस्थान उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश आंध्र प्रदेश कर्नाटक और असम में लोकायुक्त एवं उपलोकायुक्त के नाम से जाना जाता है  इसी प्रकार केरल में पब्लिक मैन, तमिलनाडु में कमिश्नर ऑफ इंक्वायरी तथा जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार निरोधी अधिकरण के नाम से जाना जाता है

1 जनवरी 2014 को मनमोहन सिंह सरकार ने लोकपाल विधेयक पारित करते हुए अधिनियम पारित किया था

लोकपाल के संदर्भ में 2005 में गठित होने वाले दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग अध्यक्ष वीरप्पा मोइली ने अपने चौथे प्रतिवेदन में केंद्र के स्तर पर राष्ट्रीय लोकायुक्त राज्य स्तर पर राज्य लोकायुक्त स्थानीय स्तर पर स्थानीय लोकायुक्त को स्थापित करने का सुझाव दिया था

अपने चौथे प्रतिवेदन में आयोग ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय लोकायुक्त तीन व्यक्तियों की संस्था होगी जिसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश Eminment Jurist को एक सदस्य और केंद्रीय सतर्कता आयोग के अध्यक्ष को यहां पर पदेन सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए

राज्य लोकायुक्त 3 व्यक्तियों का एक कॉलेजियम होगा जिसमें अध्यक्ष जाना-माना न्यायविद् 1 सदस्य राज्य स्तरीय सतर्कता आयोग का अध्यक्ष जो पदेन सदस्य के रूप में कार्य करेगा और एक सदस्य जो जाना-माना न्यायविद या प्रशासक होगा

15वीं लोकसभा ने दिसंबर 2013 में नया लोकपाल विधेयक पारित किया है जिसके प्रावधान निम्नलिखित हैं

लोकपाल विधेयक 16 दिसंबर 2013 को राज्यसभा तथा 17 दिसंबर 2013 को लोकसभा में पारित किया गया और 1 जनवरी 2014 को राष्ट्रपति ने अपनी मंजूरी प्रदान की इस तरीके से आज की तारीख में यह अधिनियम देखने को मिलता है

लोकपाल और राज्य स्तर पर लोकायुक्तों के लिए यह अधिनियम केंद्रित है

इसमें लोकपाल जैसी संरचना होती है जिसमें एक व्यक्ति अध्यक्ष और 8 सदस्यों को अन्य व्यक्तियों के रूप में रखा जा सकता है जिसमें 50% एससी OBC महिलाएं इन समुदायों का प्रतिनिधित्व भी होना चाहिए

लोकपाल जैसी संस्था के चयन के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में चयन समिति होगी जिसमें लोकसभा के विपक्ष के नेता CJI या भारत के मुख्य न्यायाधीश के द्वारा निर्देशित सुप्रीम कोर्ट का कोई एक न्यायाधीश तथा जाना-माना न्यायविद जिसे राष्ट्रपति ने निर्देशित किया है

इस लोकपाल अधिनियम में लोकपाल को काफी हद तक अभियोजन के अधिकार और जांच तथा अन्वेषण के अधिकार दिए गए हैं जो एक सराहनीय कदम है यह अधिनियम प्रधानमंत्री अन्य मंत्रियों सांसदों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोप की जांच करने का अधिकार लोकपाल को प्रदान करता है लोकपाल प्रधानमंत्री की जांच के संदर्भ में कैमरे के सामने कार्रवाई करेंगे और पूरे बेंच के 2/3 बहुमत के आधार पर ही कोई फैसला होगा

 इस अधिनियम में यह प्रावधान दिया गया है कि अगर गलत तरीके से या बुरी नियत से यदि किसी व्यक्ति के द्वारा आरोप लगाया जाता है तो ऐसी परिस्थिति में 1 वर्ष की सजा और ₹100000 का जुर्माना है सामान्यता सभी सिविल सेवक (Civil servant) सभी इस के क्षेत्राधिकार में आते हैं लोकपाल सिविल सेवक को 7 वर्ष की सजा दे सकता है और यदि कोई अपराधिक मामला है एवं किसी व्यक्ति पर बार-बार भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं और भ्रष्टाचार साबित भी हो रहा है तो 10 वर्ष की सजा दी जा सकती है

यह अधिनियम 1 वर्ष की समय सीमा राज्यों को प्रदान करता है जो स्वयं के आधार पर अपने विधानमंडलों में चर्चा के माध्यम से लोकायुक्त का प्रारूप तैयार करेंगे

विदेशों से धन प्राप्त करने वाली संस्था FCRA एक्ट के दायरे में आते हैं और 1000000 से अधिक रूपए का अनुदान प्राप्त करते हैं उन्हें भी लोकपाल के क्षेत्राधिकार में रखा गया है

यह अधिनियम लोकपाल के अन्वेषण के लिए सीबीआई को भी उन से जोड़ता है अर्थात सीबीआई के रास्ते में लोकपाल जांच करवा सकता है ऐसे मामले जो लोकपाल के पास रखे जाएंगे उसकी जांच करने के लिए किसी भी जांच एजेंसी का सहारा ले सकती है जिसमें सीबीआई भी शामिल है

इस एक्ट में लोकपाल को प्रत्यक्ष रुप से सतर्कता का कार्य नहीं दिया गया है

लोकायुक्त की नियुक्ति ( Lokayukta Appointment )

लोकायुक्त की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल के द्वारा की जाती है तथा इसकी नियुक्ति के लिए राज्यपाल को राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता से परामर्श लेना अनिवार्य होता है

लोकायुक्त का कार्यकाल 8 वर्ष ( from 23 march 2018) अथवा 65 वर्ष की उम्र तक जो पहले हो निर्धारित है

लोकायुक्त के कार्य ( Lokayukta Work )

1.मंत्रियों तथा राज्य सरकार के विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायतों की प्राप्ति एवं उनका पंजीकरण करना!

2.प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना!

3.अन्वेषण के पश्चात मामले को निरस्त करना अथवा सक्षम अधिकारी को अग्रिम कार्यवाही की अनुशंसा करना!

4.दुर्भावनावश की गई शिकायतों के क्रम में शिकायतकर्ता को दंडित करना!

5.भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए स्वयं की पहल पर किसी प्रकरण में जांच आरंभ करना!

6.लोकायुक्त सचिवालय के कार्मिक एवं वित्तीय प्रशासन को संचालित करना!

महत्वपूर्ण एवं ध्यान रखने योग्य बिंदु-

विभिन्न राज्यों में लोकायुक्त के कार्य क्षेत्र में समानता नहीं है जैसे

1 हिमाचल प्रदेश आंध्र प्रदेश मध्य प्रदेश और गुजरात में मुख्यमंत्री को लोकायुक्त की परिधि में रखा गया है

2 महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश राजस्थान बिहार उड़ीसा में यह लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र से बाहर है

3 हिमाचल प्रदेश आंध्र प्रदेश गुजरात उत्तर प्रदेश व असम राज्य में विधानसभा सदस्यों को लोकायुक्त के दायरे में रखा गया है

4 अधिकांश राज्यों में लोकायुक्त किसी नागरिक द्वारा अनूचित प्रशासनिक कार्रवाई के विरुद्ध की गई शिकायत पर अथवा स्वयं जांच प्रारंभ कर सकता है

परंतु उत्तर प्रदेश हिमाचल प्रदेश असम राज्य में वह जांच प्रारंभ करने के लिए स्वयं पहल नहीं कर सकता है

राजस्थान में लोकायुक्त ( Rajasthan Lokayukta ) 

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Rajasthan Lokayukta office, Jaipur

राजस्थान में लोकायुक्त एवं उपलोकायुक्त अधिनियम 1973 को पारित हुआ था जो 3 फरवरी 1973 से लागू हुआ

राजस्थान प्रशासनिक सुधार समिति 1973 की सिफारिश पर 1973 को सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री आई डी दुआ को प्रथम लोकायुक्त व श्री के पी यू मेनन को प्रथम उप लोकायुक्त बनाया गया

23 अगस्त 1973 को प्रथम लोकायुक्त के रूप में श्री आई.डी. दुआ( सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश) की नियुक्ति की गई तथा 5 जून 1973 को श्री के पी मेनन को राज्य का पहला उप लोकायुक्त नियुक्त किया गया।

राज्य की शासन व्यवस्था में विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्त अधिकारियों, कर्मचारियों,मंत्रियों,अध्यक्षों के द्वारा निर्वहन किए गए कृत्यों के विरुद्ध जन- शिकायतों के निराकरण हेतू लोकायुक्त की नियुक्ति की गई है।

लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत मंत्रियों, प्रशासनिक कर्मचारियों-अधिकारियों , प्रमुख उप- प्रमुख, प्रधान, सरपंच, अध्यक्ष, और सचिवों आदि को शामिल किया गया है राजस्थान में लोकायुक्त का मुख्यालय जयपुर में स्थित है।

राजस्थान राज्य में राज्य विधान मंडल द्वारा इस अधिनियम को 24 वे गणतंत्र के अवसर पर पारित किया गया था

राजस्थान लोकायुक्त उपलोकायुक्त अधिनियम 1973

यह अधिनियम मंत्री और कुछ मामलों में सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एवं उससे संबंधित मामलों के लिए नियुक्त अधिकारियों के कार्यों के संदर्भ में जांच का अधिकार होगा। 

राजस्थान लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम 1973 के अंतर्गत एक लोक सेवक के संबंध में आरोप का अर्थ है यह होगा

लोक सेवक ने कुछ प्राप्त करके या कुछ ले कर के या स्वयं या दूसरे के द्वारा पक्षपात या दूसरों को अनावश्यक नुकसान करने या परेशान करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया है

लोकायुक्त का क्षेत्राधिकार ( Jurisdiction of Lokayukta )

  1. मंत्री के तहत एक मंत्री राज्यमंत्री उपमंत्री है इसमें मुख्यमंत्री लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार से बाहर है
  2. सेवक/अधिकारी अर्थ है किसी सार्वजनिक सेवा या पद पर नियुक्त व्यक्ति
  3. जिला परिषद के जिला प्रमुख जिला प्रमुख उप जिला प्रमुख पंचायत समिति के प्रधान और उपप्रधान है कोई भी स्थाई समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष है जो राजस्थान पंचायत समिति और जिला परिषद अधिनियम 1959 के तहत गठित की गई है
  4. राजस्थान राज्य में कोई भी स्थानीय प्राधिकारी जो कि सरकारी राजपत्र में राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित है
  5. कोई भी नियम जो कि राज्य सरकार द्वारा स्थापित हो तो उसके नियंत्रण में स्वामित्व में हो
  6. वह भी सरकारी कंपनी जोकि कंपनी एक्ट 1956 की धारा 617 के तहत गठित सरकार का स्वामित्व 51% कम से कम हो
  7. सचिव, अतिरिक्त सचिव मुख्य, संयुक्त सचिव

लोकायुक्त या उप लोकायुक्त को हटाना

संविधान के अनुच्छेद 311 के प्रबंध के अधीन रहते हुए लोकायुक्त या उप लोकायुक्त को उसके व्यवहार क्षमता के आधार पर राज्यपाल द्वारा अपने पद से हटाया जा सकता है परंतु उसकी नियुक्ति करने वाले पर अधिकारी के अधीनस्थ किसी प्राधिकारी द्वारा पदच्युत नहीं किया जाएगा

कार्यक्षेत्र ( Workspace )

लोकायुक्त संस्थान द्वारा राज्य के मंत्रियों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, लोकसेवकों, जिला परिषदों के प्रमुखों व उप प्रमुखों, पंचायत समितियों के प्रधानों व उप-प्रधानों, जिला परिषदों व पंचायत समितियों की स्थायी समितियों के अध्यक्षों, नगर निगमों के महापौर एवं उप महापौर, स्थानीय प्राधिकरण, नगरपरिषदों, नगरपालिकाओं व नगर विकास न्यासों के अध्यक्षों व उपाध्यक्षों, राजकीय कम्पनियों व निगमों अथवा मण्डलों के अध्यक्षों, अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्ध शिकायतों की जाँच की जाती है।

शिकायत कब 

 ऊपर वर्णित लोक सेवकों द्वारा किसी को अनुचित हानि या कठिनाई पहुँचाने, अपने या अन्य किसी व्यक्ति के लिए अवैध लाभ प्राप्त करने हेतु लोक सेवक के रूप में अपनी पदीय स्थिति का दुरूपयोग करने व अपने कृत्यों का निर्वहन करने में व्यक्तिगत हित या भ्रष्ट अथवा अनुचित हेतुओं से प्रेरित होने एवं लोक सेवक की हैसियत में भ्रष्टाचार या सच्चरित्रता की कमी का दोषी होने पर इनके विरूद्ध शिकायत की जा सकती है।

पाँच वर्ष से अधिक पुराने मामले की शिकायत नहीं की जा सकती।

इनके विरूद्ध इस संस्थान में शिकायत नहीं:-

1. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति या न्यायाधीश अथवा संविधान के अनुच्छेद 236 के खण्ड (ख) में यथा परिभाषित न्यायिक सेवा का सदस्य,
2. भारत में किसी भी न्यायालय के अधिकारी अथवा कर्मचारी,
3. मुख्यमंत्री, राजस्थान
4.महालेखाकार, राजस्थान,
5.राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अथवा सदस्य,
6. मुख्य निर्वाचन आयुक्त, निर्वाचन आयुक्त, प्रादेशिक आयुक्त तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राजस्थान,
7. राजस्थान विधानसभा सचिवालय के अधिकारी एवं कर्मचारी,सरपंचों, पंचों व विधायकों के विरूद्ध भी शिकायतें की जाती हैं किन्तु उनके विरूद्ध प्रसंज्ञान नहीं लिया जा सकता है क्योंकि वे अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं,
8.सेवानिवृत्त लोक सेवक ।

लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार का विस्तार निम्नलिखित को छोड़कर राजस्थान के समस्त लोक सेवकों पर है

लोकायुक्त की उपयोगिता ( Lokayukta Utility )

भारत में लोकायुक्त की उपयोगिता निम्नलिखित कारणों से है:-
1. ये जन शिकायतों के निराकरण हेतु सुगमतापूर्वक उपलब्ध हो सकते हैं ।

2. यह प्रशासनिक कुशलता एवं भ्रष्टाचार के निवारण नार्थ निवारणार्थ सुधारात्मक एवं औरत आत्मक दोनों ही प्रकार के प्रयास कर सकता है 
3. यह नागरिकों के न्यायोचित हितों के लिए अतिरिक्त गारंटी देता है ।
4. यह एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष संस्थाएं तथा कार्यवाही शीघ्र एवं सुगम है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

1. राजस्थान लोकायुक्त उप लोकायुक्त ऐसे आरोपों से जुड़ी किसी भी शिकायत की जांच नहीं करेगा जो 5 वर्ष बाद की गई हो
2. किसी लोक सेवक की जाँच लोकायुक्त या उपलोकायुक्त कर रहा हो तो सरकार लोक सेवक का खर्च वहन करेगी
3. किसी भी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण किसी लोक सेवक की झूठी शिकायत की गई है तो 3 साल का कारावास दिया जा सकता है
4. लोकायुक्त की जांच के बाद यदि कोई लोक सेवक के खिलाफ आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो लोकायुक्त उसे दंड नहीं दे सकेगा बल्कि वह उस की अनुशंसा राज्यपाल को करेगा, राज्यपाल यथाशीघ्र रिपोर्ट को राज्य विधानमंडल के पटल पर रख देगा
5.लोकायुक्त अपनी वार्षिक रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपता है
6. वर्तमान लोकायुक्त श्री S. S. कोठारी है (12वें)

Question – 

प्रश्न 1 लोकपाल जैसी संस्थाएं क्या आपके विचार में प्रशासन के विरुद्ध नागरिकों की शिकायतों को दूर करने के लिए सक्षम है यदि नहीं तो सुधारने के उपाय बताओ

उत्तर – 1 भारत में पूरी तरीके से भ्रष्टाचार कदाचार को दूर करने के लिए लोकपाल के पास अन्वेषण सतर्कता अभियोजन से संबंधित संस्थाएं होनी चाहिए संस्थाओं को पूर्ण अधिकार लोकायुक्तों को नहीं दिया गया है लोकपाल अधिनियम 2014 यद्यपि अन्वेषण और अभियोजन के कार्यों से जोड़ता है परंतु सतर्कता के स्तर पर इसमें बेहतर व्यवस्था नहीं की गई है

2 कोई भी संस्थानीकरण अपडेट नहीं है लोकायुक्त जैसी संस्थाएं सरकारी नीतियों कार्यक्रमों परियोजनाओं भविष्य की नीति परियोजनाओं में को स्वच्छ रखने वाली संस्था नहीं है अब तक राज्यों के लोकायुक्तों के अधिनियम और लोकपाल अधिनियम 2014 सरकारी कामकाज के तथ्यों आंकड़ों सूचनाओं को लोकपाल जैसी संस्थाएं अनिवार्य रूप से पहुंचा देना चाहिए इसकी व्यवस्था नहीं है न्यूजीलैंड का और लोकपाल पूरी दुनिया में एक सफल प्रमाण के रूप में देखा जाता है और वह सरकारी सूचनाओं को लोकपाल के पास उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय अभिलेखागार डाटा सेंटर स्थापित किया गया है

3 लोकपाल जैसी संस्थाओं को आम नागरिकों से जुड़ने के लिए उसे एक सक्रीय संस्था नहीं बनाया गया है राज्य के लोकायुक्त अधिनियम और लोकपाल अधिनियम 2014 में ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है जिससे स्वत लोकपाल लोकायुक्त क्षेत्रों में जाकर नागरिकों से शिकायत दर्ज करें

4 लोकायुक्त जैसी संस्थाओं को सशक्त बनाया जाए एक प्रमुख चुनौती है राज्यों के अब तक लोकायुक्तों के अधिनियम में उन्हें कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं दिया गया है यद्यपि लोकपाल अधिनियम 2014 इस विषय वस्तु पर थोड़ा बेहतर है इसमें बारंबार भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर 10 वर्ष की सजा का प्रावधान दिया गया है पूरी दुनिया के लोकपाल के पास ब्रिटेन के संसद आयुक्त protective general of Russia और चीन मैं 9 वर्ष तक कारावास की सजा देने की क्षमता रखते हैं इस विषय वस्तु पर लोकपाल अधिनियम सशक्त प्रतीत होता है

5 लोकपाल अधिनियम 2014 राज्य के लोकायुक्तों के मामले में अधिक उदारवादी प्रतीत होता है राज्यों को यह अवसर दिया गया है कि वह अपने तरीके से एक नियत समय काल में लोकायुक्त की व्यवस्था करेंगे परंतु कहने की आवश्यकता नहीं है कि जिस प्रकार पंचायती राज और नगरपालिका के लिए केंद्र ने एक सामान्य व्यवस्था को स्थापित करके राज्यों को उनकी भिन्नता के आधार पर अपने प्रावधान विकसित करने का अवसर दिया है वैसा अवसर लोकायुक्त के संदर्भ में भी दिया जाना चाहिए था यदि भारत के संविधान में शामिल किया जाता तो और बेहतर होता

6 लोकायुक्त जैसी संस्थाएं कितनी भी सशक्त और मजबूत क्यों न बनाई जाए यदि प्रशासन में सचरित्रता को देने के लिए शासन व्यवस्था में पारदर्शिता उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने के लिए सूचना का अधिकार ई गवर्नेंस सामाजिक लेखा परीक्षण सीटों की की सुरक्षा इत्यादि को सुनिश्चित करना आवश्यक है लोकायुक्त संस्था का यह कर्तव्य बनाया जाना चाहिए था जो इन विषय वस्तु पर जांच के उपरांत सुझाव प्रस्तुतीकरण करते हैं उसे अपनाकर वास्तविक अर्थों में सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है

जब तक उपयुक्त विषय वस्तु को ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक प्रयास नहीं किया जाएगा तब तक लोकायुक्त जैसी संस्थाओं संस्थाओं को अधिक है प्रासंगिक नहीं बनाया जा सकता

QUIZ

Specially thanks with Respects-

लोकेश स्वामी, रमेश डामोर सिरोही, OM PRAKASH BARMER, राजवीर प्रजापत चूरू, फूलचंद मेघवंशी, प्रभुजी स्वामी चूरु, Sandeep bedwal Jhunjhunu, प्रियंका गर्ग

5 thoughts on “Lokayukta ( लोकायुक्त )”

  1. क्या लोकायुक्त गेर सरकारी ‌‌‌।व्यकती के विरुद्ध कार्य वहीं
    कर सकते है

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