Madhya Pradesh Awards

( मध्यप्रदेश के प्रमुख सम्मान )

मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय सम्मान

Mahatma Gandhi Award ( राष्ट्रीय महात्मा गांधी सम्मान )

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 125वें जन्म वर्ष की पावन स्मृति में गांधी विचार दर्शन के अनुरूप समाज में रचनात्मक पहल, साम्प्रदायिक सद्भाव एवं सामाजिक समरसता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने महात्मा गांधी के नाम पर इस क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय सम्मान श्महात्मा गांधी सम्मान’ वर्ष 1995 में स्थापित किया है।

गांधी सम्मान का मूल प्रयोजन गांधी जी की विचारधारा के अनुसार अहिंसक उपायों द्वारा सामाजिक और आथिर्क क्रांति के क्षेत्र में संस्थागत साधना को सम्मानित और प्रोत्साहित करना है। गांधी सम्मान की पुरस्कार राशि 10 लाख रुपये है। सम्मान के अंतर्गत नकद राशि एवं प्रशस्ति पट्टिका अर्पित की जाती है।

गांधी सम्मान का निर्णय प्रतिवर्ष उच्चस्तरीय विशिष्ट निर्णायक समिति द्वारा किया जाता है। चयन प्रक्रिया के अंतर्गत प्रतिवर्ष देश में गांधी जी के विचार एवं आदर्शों के अनुसार रचनात्मक कार्य करने वाली संस्थाओं, स्वतंत्रता संग्राम सैनिकों, समीक्षकों, समाजशास्त्रियों, बुद्धिजीवियों, केन्द्र तथा राज्य सरकारों के अलावा समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापनों के माधयम से इस सम्मान के लिए अनुशंसा/नामांकन करने का अनुरोध निर्धारित प्रपत्र में किया जाता है।

गांधी सम्मान द्वारा सुविचारित तथा सुनियोजित ,श्रृंखला के तहत यह प्रयत्न किया जाता है कि समूचे देश में गांधी जी के आदर्शों और विचारों के अनुसार सामाजिक तथा आथिर्क क्षेत्र में जो सर्वोत्कृष्ट रचनात्मक साधना और अवदान अजिर्त किया गया है उसकी राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान बने और ऐसी संस्थाओं तथा उनके साधानारत मनीषियों का समूचे प्रदेश की ओर से सम्मान किया जाये !

गांधी सम्मान संस्था के समग्र रचनात्मक अवदान के लिए है, उसकी किसी एक पहल अथवा गतिविधि के लिए नहीं। यह सम्मान विविधा क्षेत्रों में रचनात्मक उपलब्धि के लिए है, शोधा अथवा अकादेमिक कार्यों के लिए नहीं। निर्णायक समिति का गठन राज्य शासन द्वारा किया जाता है। निर्णय की घोषणा के पूर्व संबंधित संस्था से सम्मान ग्रहण करने की स्वीकृति प्राप्त की जाती है।

यदि निर्णायक समिति किसी वर्ष विशेष में गांधी सम्मान के लिए संस्था को उपयुक्त नहीं पाती है तो उस वर्ष सम्मान किसी भी संस्था को नहीं दिया जाता है। सम्मान, संस्था द्वारा किए गए रचनात्मक कार्य एवं अनुदान की मान्यता के रूप में दिया जाता है !

प्रारंभ में इस सम्मान की राशि ₹5 लाख थी जिसे बढ़ाकर वर्तमान में 10 लाख रुपए कर दिया गया है पहला पुरस्कार 1995-96 कस्तूरबा गांधी स्मारक ट्रस्ट इंदौर को दिया गया था तथा वर्तमान में यह दूधाटोली इंस्टिट्यूट गढ़वाल को दिया गया है !

Kabir Award ( राष्ट्रीय कबीर सम्मान )

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग ने साहित्य और सृजनात्मक कलाओं में उत्कृष्टता तथा श्रेष्ठ उपलब्धि को सम्मानित करने, साहित्य और कलाओं में राष्ट्रीय मानदण्ड विकसित करने की दृष्टि से अखिल भारतीय सम्मानों और राज्य स्तरीय सम्मानों की स्थापना की है।

उत्कृष्टता और सृजन को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की अपनी सुप्रतिष्ठित परम्परा का अनुसरण करते हुए मध्यप्रदेश शासन ने भारतीय कविता के लिए राष्ट्रीय कबीर सम्मान की स्थापना की है। महान संत कवि कबीर ने सदियों पहले कविता का पुनराविष्कार किया था और उसे नयी निभीर्कता दी थी।

देश के अनेक भागों में वे आज भी सबसे लोकप्रिय कवि हैं। इस सम्मान के अंतर्गत एक लाख पचास हजार रुपये की राशि और सम्मान पट्टिका भेंट की जाती है।

प्रक्रिया के अनुसार संस्कृति विभाग सभी भारतीय भाषाओं के कवियों, साहित्यकारों, समीक्षकों और साहित्यिक संस्थाओं आदि से उनके रचनात्मक वैशिष्ट्य, ज्ञान और साहित्य संसक्ति का लाभ लेते हुए सम्मान के लिए उपयुक्त कवियों के नामांकन का अनुरोध करता है।

ये नामांकन संकलित करके विशेषज्ञों की चयन समिति के सामने अंतिम निर्णय के लिए रखे जाते हैं। इस समिति में राष्ट्रीय ख्याति के साहित्यकार और विशेषज्ञ शामिल होते हैं। चयन समिति को यह स्वतंत्रता है कि अगर कोई नाम छूट गया हो तो अपनी तरफ से उसे जोड़ लें। राज्य शासन ने चयन समिति की अनुशंसा को अपने लिए बंधनकारी माना है और सदैव निरपवाद रूप से इसका पालन भी किया है।

प्रारंभ में इस सम्मान की राशि ₹1.5 लाख थी जिसे बढ़ाकर वर्तमान में तीन लाख रूपय कर दिया गया है पहला पुरस्कार 1986- 87 में श्री गोपाल कृष्ण अर्जुन को दिया गया था तथा वर्तमान में यह पुरस्कार कवि मंगेश पाडगावकर को दिया गया है !

Maithilisharan Gupt Award ( राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान )

मध्यप्रदेश शासन ने साहित्य और कलाओं को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से अनेक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मानों की स्थापना की है। हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में वार्षिक सम्मान का नाम खड़ी बोली के शीर्ष प्रवर्तक कवि श्री मैथिलीशरण गुप्त की स्मृति में रखा गया है। यह सम्मान वर्ष 1987-88 से प्रारम्भ किया गया है। इस सम्मान के अन्तर्गत एक लाख रुपये की राशि तथा प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है।

राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान का उद्देश्य हिन्दी साहित्य में श्रेष्ठ उपलब्धि और सृजनात्मकता को सम्मानित करना है। सम्मान का निकष असाधारण उपलब्धि, रचनात्मकता, उत्कृष्टता और दीर्घ साहित्य साधना के निरपवाद सर्वोच्च मानदण्ड रखे गये हैं। सम्मान के लिये चुने जाने के समय रचनाकार का सृजन-सक्रिय होना अनिवार्य है।

मध्यप्रदेश शासन ने यह नीतिगत निर्णय लिया है कि वह निर्णायक समिति की अनुशंसा को स्वीकार करेगा और अनुशंसा उसके लिए बंधनकारी होगी। प्रसंगवश यहाँ यह उल्लेख भी आवश्यक है कि सम्मान केवल सृजनात्मक कार्य के लिए है, शोध अथवा अकादेमिक कार्य के लिए नहीं।

कवि के अपने समूचे कृतित्व के आधार पर ही सम्मान देय है न कि किसी एक अथवा विशिष्ट कृति के आधार पर निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुसार राज्य शासन देश के काव्य प्रेमियों, कवियों, आलोचकों और संस्थानों आदि से नामांकन आमंत्रित करता है। प्राप्त नामांकन को जूरी के समक्ष अन्तिम निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जाता है। चयन समिति में राष्ट्रीय ख्याति के साहित्यकार और विशेषज्ञ शामिल होते हैं।

चयन समिति को यह स्वतंत्रता है कि अगर कोई नाम छूट गया हो तो अपनी तरफ से उसे जोड़ लें। प्रारंभ में इस सम्मान की राशि 1 लाख थी जिसे बढ़ाकर वर्तमान में ₹2 लाख कर दिया गया है पहला पुरस्कार 1970 सर तहसील में श्री शमशेर बहादुर सिंह को दिया गया था तथा वर्तमान में यह पुरस्कार रमेश चंद्र शाह को दिया गया है !

राष्ट्रीय इकबाल सम्मान :-

साहित्य और कलाओं के क्षेत्र में उत्कृष्टता और सृजनात्मकता को सम्मानित करने की अपनी परम्परा के अनुसार मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 1986-87 में, उर्दू साहित्य में रचनात्मक लेखन के लिए इक़बाल सम्मान स्थापित किया है। इस सम्मान में एक लाख रुपये की राशि के साथ प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। पुरस्कार उर्दू के सुप्रसिद्ध कवि अल्लामा इकबाल के नाम पर स्थापित किया गया है जिन्होंने बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक चार दशकों में उर्दू कविता को नये आयाम दिये।

देश के अधिकतम भागों के साथ-साथ विदेश में भी अल्लामा इक़बाल को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। प्रारंभ में सम्मान की राशि ₹100000 थी जिसे बढ़ाकर वर्तमान में ₹200000 कर दिया गया है पहला पुरस्कार 1986-87 में अली सरदार जाफरी को दिया गया था तथा वर्तमान में यह पुरस्कार गोपीचंद नारंग को दिया गया है !

राष्ट्रीय कालिदास सम्मान ( Kalidas award )

मध्यप्रदेश शासन ने सृजनात्मक कलाओं में उत्कृष्टता और श्रेष्ठ उपलब्धि को सम्मानित करने और इन कलाओं में राष्ट्रीय मानदण्ड विकसित करने की दृष्टि से कालिदास सम्मान के नाम से शास्त्रीय संगीत, रूपंकर कलाओं, रंगकर्म और शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में एक-एक लाख रुपये के चार वाषिर्क सम्मान स्थापित किए हैं। प्रारम्भ में यह सम्मान बारी-बारी से दिए जाते थे।

वर्ष 1986-87 से उक्त चारों कला क्षेत्रों में अलग-अलग सम्मान दिये जाने लगे हैं। कालिदास सम्मान का निष्कष असाधारण सृजनात्मकता, उत्कृष्टता और दीर्घ कला साधना के निरपवाद मानदण्ड रखे गए हैं। चयन की निश्चित प्रक्रिया से यह स्पष्ट है कि कला का एक राष्ट्रीय मानदण्ड विकसित करने के इस विनढा प्रयत्न में सभी स्तरों पर विशेषज्ञों की हिस्सेदारी है और इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है कि जहाँ एक ओर कलात्मक उपलब्धियों के लिए एक व्यापक मत संग्रह सन्दर्भ के लिए उपलब्ध रहें,

वहीं सम्मान से विभूषित किए जाने वाले कलाकार का चयन असंदिग्ध निष्ठा और विवेक वाले विशेषज्ञ पूरी निष्पक्षता और निर्भयता के साथ ऐसे मानदण्डों के आधार पर करें जो उत्तारदायी जीवन दृष्टि, गम्भीर कलानुशासन और सौन्दर्यबोध पर आश्रित हैं। प्रक्रिया के अनुसार संस्कृति विभाग निर्धारित कलानुशासन में कलाकारों, विशेषज्ञों, रसिकों और संगठनों से अपने रचनात्मक वैशिष्ट्य ज्ञान और संसक्ति का लाभ लेते हुए सम्मान के लिए उपयुक्त कलाकारों के नामांकन करने का अनुरोध करता है।

ये नामांकन संकलित करके विशेषज्ञों की चयन समिति के सामने अंतिम निर्णय के लिए रखे जाते हैं। चयन समिति का निर्णय शासन के लिए बंधनकारी होता है। प्रारंभ में सम्मान की राशि ₹100000 थी जिसे बढ़ाकर वर्तमान में ₹200000 कर दिया गया है !

सर्वप्रथम राष्ट्रीय कालिदास सम्मान (शास्त्रीय नृत्य) के लिए दूसरी रुकमणी देवी अरुंडेल 1983-84 में दिया गया था तथा वर्तमान में यह सम्मान डॉक्टर सरोजना बैधनाथ को दिया गया है !

सर्वप्रथम राष्ट्रीय कालिदास सम्मान (शास्त्रीय संगीत )के क्षेत्र में सन 1980-81राशि में पंडित सेंमनुगुड़ी श्रीनिवास अय्यर को दिया गया था तथा वर्तमान में यह सम्मान डॉक्टर एन राजम को दिया गया है !

सर्वप्रथम राष्ट्रीय कालिदास सम्मान (रूपंकर कलाएं) सम्मान प्रो के जी सुब्रमण्यम को सन 1981-82 में दिया गया था तथा वर्तमान में यह सम्मान श्री कृष्ण कन्हाई को दिया गया है !

राष्ट्रीय कालिदास सम्मान (रंगकर्म कलाएं) के क्षेत्र में सर्वप्रथम श्री शंभू मित्र को 1982 की राशि में दिया गया था तथा वर्तमान में श्री एच.कन्हाई को दिया गया है !

Lata Mangeshkar Award ( राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान )

सुगम संगीत के लिए दिया जाने वाला राष्ट्रीय अलंकरण है। संगीत के क्षेत्र में कलात्मक श्रेष्ठता को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से 1984 में लता मंगेशकर सम्मान स्थापित किया गया इसके अंतर्गत सम्मानित कलाकार को दो लाख रुपये की राशि और प्रशस्ति पट्टिका भेंट की जाती है।

यह सम्मान बारी-बारी से संगीत रचना और गायन के लिए दिया जाता है। सम्मान उत्कृष्टता, दीर्घसाधाना और श्रेष्ठ उपलब्धि के भरसक निविर्वाद मानदंडों के आधार पर सुगम संगीत के क्षेत्र में देश की किसी भी भाषा के गायक अथवा संगीत रचनाकार को उसके सम्पूर्ण कृतित्व पर दिया जाता है,

न कि किसी एक कृति के आधार पर। सम्मान केवल सृजनात्मक कार्य के लिए है, शोधा अथवा अकादेमिक कार्य के लिए नहीं। सम्मान के लिये चुने जाने के समय कलाकार का सृजन-सक्रिय होना आवश्यक है।

संस्कृति विभाग देश भर के सुगम संगीत के क्षेत्र में संबंधित कलाकारों, विशेषज्ञों, संस्थाओं तथा समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापनों के माध्यम से पाठकों एवं कला रसिकों को नामांकन एवं अनुशंसा के लिए निर्धारित प्रपत्र जारी करता है।

प्रारंभ में सम्मान की राशि ₹1 लाख थी जिसे बढ़ाकर वर्तमान में ₹2 लाख कर दिया गया है पहला पुरस्कार 1984- 85 मैं श्री नौशाद को दिया गया था तथा श्री राकेश रोशन 2011-12 को तथा वर्तमान में यह पुरस्कार हरि हरन को दिया गया है !

राष्ट्रीय देवी अहिल्या सम्मान :-

देवी अहिल्या बाई कुशल शासिका, न्यायविद, सच्ची समाज सेविका और कलाप्रिय विदुषी थीं। वे स्नेह, दया और धर्म की प्रतिमूर्ति थीं। अहिल्याबाई महिला शक्ति की प्रतीक हैं। उनका जीवन और कार्य समस्त स्त्री जाति के लिए एक उदाहरण है। उनकी स्मृति में देश की सृजनशील महिलाओं के सम्पूर्ण अवदान के लिए देवी अहिल्या सम्मान दिया जाना सुनिश्चित किया गया है।

मध्यप्रदेश शासन ने आदिवासी, लोक एवं पारम्परिक कलाओं के क्षेत्र में महिला कलाकारों की सृजनात्मकता को सम्मानित करने के लिए वर्ष 1996-97 से देवी अहिल्या सम्मान स्थापित किया है। इस सम्मान से विभूषित कलाकार को एक लाख रुपये की राशि और प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है।

देवी अहिल्या सम्मान सृजनात्मक, उत्कृष्टता, दीर्घ साधना और कलाकार की वर्तमान में सृजन सक्रियता के मानदण्डों के आधार पर दिया जाता है। सम्मान दिये जाने के समय चुने गये कलाकार का सृजन सक्रिय होना अनिवार्य है।

इस सम्मान के प्रारंभ में राशि ₹100000 थी जिसे बढ़ाकर वर्तमान में ₹200000 कर दिया गया है पहला पुरस्कार 1996-97 संविधान में में श्रीमती तीजन बाई को दिया गया था तथा वर्तमान में यह पुरस्कार गुलाबो (कालबेलिया नृत्य) राजस्थान को दिया गया है !

राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान ( Sharad Joshi Award )

उत्कृष्ट सृजन को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की अपनी सुप्रतिष्ठित परम्परा का अनुसरण करते हुए मध्यप्रदेश शासन ने हिन्दी व्यंग्य, ललित निबन्ध, संस्मरण, रिपोर्ताज, डायरी, पत्र इत्यादि विधाओं में रचनात्मक लेखन के लिए राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान स्थापित किया है।

यह गौरव की बात है कि शरद जोशी मध्यप्रदेश के निवासी थे, जिन्हें उनकी सशक्त और विपुल व्यंग्य रचनाओं ने साहित्य के राष्ट्रीय परिदृश्य पर प्रतिष्ठित किया। शरद जोशी ने व्यंग्य को नया तेवर और वैविध्य दिया तथा समय की विसंगति और विडम्बना को अपनी प्रखर लेखनी से उजागर करते हुए समाज को दृष्टि और दिशा प्रदान करने का उत्तारदायी रचनाकर्म किया।

उनकी व्यंग्य रचनाओं ने हिन्दी साहित्य की समृद्धि में अपना सुनिश्चित योगदान दिया है। राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान का उद्देश्य साहित्य की ऐसी विधाओं की श्रेष्ठतम प्रतिभाओं को सम्मानित करना है जो कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना आदि केन्द्रीय विधाओं में रचना न करते हुए भी अन्य सर्जनात्मक विधाओं के माध्यम से साहित्य की समृद्धि और बहुलता में अपना योगदान देती हैं।

निश्चय ही यह सम्मान रचनात्मक उत्कृष्टता, सुदीर्घ साधना और असाधारण उपलब्धि के निविर्वाद मानदण्डों पर ही देय है। इसमें सम्मान राशि ₹100000 प्रदान की जाती है सम्मान के अन्तर्गत 51 हजार रुपये की राशि और प्रशस्ति पट्टिका दी जाती थी लेकिन वर्तमान में इस राशि को बढ़ाकर ₹1 लाख कर दिया गया है पहला पुरस्कार 1986 786 में श्री हरिशंकर परसाई को दिया गया था तथा वर्तमान में यह पुरस्कार के पी सक्सेना को दिया गया है !

राष्ट्रीय कुमार गन्धर्व सम्मान ( Kumar Gandhavva award )

मध्यप्रदेश शासन ने संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ट युवा प्रतिभा को सम्मानित और प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 1992-93 से वार्षिक राष्ट्रीय सम्मान स्थापित किया है। इस सम्मान का नाम संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के अद्वितीय गायक पण्डित कुमार गन्धर्व की स्मृति में रखा गया है।

कलाकार को सम्मान स्वरूप इक्यावन हजार रुपये की राशि और सम्मान पट्टिका अर्पित की जाती है।सम्मान के समय कलाकार की आयु सीमा 25 से 45 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। यह सम्मान भारतीय शास्त्रीय संगीत; हिन्दुस्तानी संगीत और कर्नाटक संगीतद्ध के लिए प्रतिवर्ष बारी-बारी से शास्त्रीय गायन और वादन में दिया जाता है।

राष्ट्रीय कुमार गन्धर्व सम्मान का निकष सृजनात्मक उत्कृष्टता, प्रखर प्रयोगशीलता, निरन्तर सृजन सक्रियता और भावी संभावनाओं के निविर्वाद मानदण्ड रखे गये हैं। प्रक्रिया के अनुसार संस्कृति विभाग शास्त्रीय संगीत के कलाकारों, विशेषज्ञों, रसिकों, संगठनों और समाचार-पत्रों में प्रकाशित विज्ञापनों के माध्यम से उनके रचनात्मक वैशिष्ट्य ज्ञान और संसक्ति का लाभ लेते हुए उनसे सम्मान के लिए उपयुक्त कलाकारों के नामांकन करने का अनुरोध करता है।

ये नामांकन विशेषज्ञों की चयन समिति के सामने अंतिम निर्णय के लिए रखे जाते हैं। इस समिति में राष्ट्रीय ख्याति के कलाकार और विशेषज्ञ होते हैं। चयन समिति को यह स्वतंत्रता है कि अगर कोई नाम छूट गया हो तो उसे अपनी तरफ से जोड़ ले। राज्य शासन ने चयन समिति की अनुशंसा को अपने लिए बंधनकारी माना है और सदैव निरपवाद रूप से उसका पालन किया है।

मध्यप्रदेश के लिए यह गौरव की बात है कि उसके अन्य अनेक राष्ट्रीय सम्मानों की तरह राष्ट्रीय कुमार गन्धर्व सम्मान शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में युवा कलाकार को दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान है। कुमार जी की अद्वितीय प्रतिभा के लिए यह मध्यप्रदेश की विनढा श्रद्धांजलि है।

प्रारंभ में सम्मान की राशि ₹50000 थी जिसे बढ़ाकर वर्तमान में ₹100000 कर दिया गया है पहला पुरस्कार 1992- 93 में श्री विजय चक्रवर्ती को दिया गया था पंडित संजीव अभ्यंकर 2008-09 एवं वर्तमान में यह पुरस्कार श्री बेदनाथ (2012-13)को दिया गया है !

राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान ( Kishore kumar award )

मधयप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग ने उत्कृष्टता और सृजन को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की अपनी सुप्रतिष्ठित परम्परा का अनुसरण करते हुए सिनेमा के क्षेत्र में निर्देशन, अभिनय, पटकथा तथा गीत लेखन के लिए वार्षिक राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान की स्थापना की है। यह सम्मान उत्कृष्टता, दीर्घ साधाना, श्रेष्ठ उपलब्धि के मानदण्डों के आधार पर देय है।

सम्मान के लिये चुने जाने के समय निर्देशक, कलाकार, पटकथाकार तथा गीतलेखक का सृजन-सक्रिय होना अनिवार्य है। प्रख्यात पार्श्व गायक एवं हरफनमौला कलाकार स्वर्गीय किशोर कुमार खण्डवा, मधयप्रदेश के रहने वाले थे।

उन्होंने सिनेमा के क्षेत्र में अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय देते हुए न सिर्फ हिन्दुस्तान, बल्कि विश्व के अनेक देशों में जो जगह बनायी उससे न सिर्फ यश स्थापित हुआ, बल्कि मधयप्रदेश के गौरव में श्रीवृद्धि हुई। उन्हीं की स्मृति में राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान स्थापित किया गया है।

इस सम्मान के अंतर्गत दो लाख रुपये की राशि और सम्मान पट्टिका भेंट की जाती है। प्रारंभ में इस सम्मान की राशि ₹200000 थी जिसे बढ़ाकर वर्तमान में ₹400000 कर दिया गया है पहला पुरस्कार 1997 98 में श्री ऋषिकेश मुखर्जी को दिया गया था तथा पुरस्कार 2011-12 में सलीम खान को तथा वर्तमान में पुरस्कार श्री समीर को दिया गया है !

राष्ट्रीय इकबाल सम्मान ( Iqbal award )

साहित्य और कलाओं के क्षेत्र में उत्कृष्टता और सृजनात्मकता को सम्मानित करने की अपनी परम्परा के अनुसार मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 1986-87 में, उर्दू साहित्य में रचनात्मक लेखन के लिए इक़बाल सम्मान स्थापित किया है। इस सम्मान में एक लाख रुपये की राशि के साथ प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है।

पुरस्कार उर्दू के सुप्रसिद्ध कवि अल्लामा इकबाल के नाम पर स्थापित किया गया है जिन्होंने बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक चार दशकों में उर्दू कविता को नये आयाम दिये। देश के अधिकतम भागों के साथ-साथ विदेश में भी अल्लामा इक़बाल को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। इकबाल सम्मान में ₹200000 राशि प्रदान की जाती है !

राष्ट्रीय तुलसी सम्मान ( Tulsi award )

मध्य प्रदेश शासन ने आदिवासी लोक और पारम्परिक कलाओं में उत्कृष्टता और श्रेष्ठ उपलब्धि को सम्मानित करने और इन कलाओं में राष्ट्रीय मानदण्ड विकसित करने की दृष्टि से तुलसी सम्मान के नाम से एक लाख रुपये का एक वार्षिक पुरस्कार स्थापित किया है। यह सम्मान तीन वर्ष में दो बार प्रदर्शनकारी कलाओं और एक बार रूपंकर कलाओं के क्षेत्र में दिया जाता है।

तुलसी सम्मान का निकष असाधारण सृजनात्मकता, उत्कृष्टता और दीर्घ साधना के निरपवाद सर्वोच्च मानदण्ड रखे गये हैं। चयन की निश्चित प्रक्रिया से यह स्पष्ट है कि कला के विवादित राष्ट्रीय मानदण्ड विकसित करने के इस विनढा प्रयत्न में सभी स्तरों पर विशेषज्ञों की हिस्सेदारी है और इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है

कि जहाँ एक ओर कलात्मक उपलब्धियों के बारे में एक तरह का व्यापक मत संग्रह संदर्भ के लिए उपलब्ध रहे, वहीं सम्मान से विभूषित किये जाने वाले कलाकार या मण्डली का चयन असंदिग्धा निष्ठा और विवेक वाले विशेषज्ञ पूरी निष्पक्षता, वस्तुपरकता और निर्भयता के साथ

ऐसे मानदण्डों के आधार पर करें जो उत्तरदायी जीवन दृष्टि, गंभीर कलानुशासन और सौन्दर्यबोध पर आश्रित हैं। तुलसीदास सम्मान में ₹200000 राशि प्रदान की जाती है !

डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा सृजन-सम्मान ( Dr Shankar Dayal Sharma creation award )

भारत सरकार की हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में विश्वविद्यालय स्तरीय ग्रंथ निर्माण योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से 1969 में मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी की स्थापना की गई उच्च शिक्षा के माध्यम परिवर्तन मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराने में एकेडमी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है

उद्देश्य और उपलब्धि को लक्ष्य करते हुए एकेडमी के प्रबंधक मंडल ने इसी की विस्तारित योजना के रूप में चयनित लेखकों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है ! हिंदी में विश्वविद्यालय स्तरीय विविध विषयों की पुस्तकों के लिए खान के प्रति प्रति शासकों की रूचि बढ़ाने की दृष्टि से एक आदमी अपने लेखकों को पुरस्कृत और सम्मानित करती रही है

वर्ष 1986 में राज भवन में आयोजित सम्मान समारोह में पूर्व राष्ट्रपति एवं पुनर्गठित मध्य प्रदेश के प्रथम शिक्षा मंत्री स्व. श्री डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा के नाम पर स्थापित सृजन सम्मान में एक आदमी ने 5 संख्याओं के लेखकों को सम्मानित किया था पुस्तक की गुणवत्ता के साथ-साथ उसका लोकप्रिय होना और अधिक पुस्तकों की बिक्री भी इंस को निर्धारित करने वाले कारको में प्रमुख थी !

अपना लेखकों को सम्मानित करने की परंपरा कुछ समय के लिये अपरिहार्य कारणों से स्थगित रहे किंतु राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक समिति ने एक बार पुनः सभी अकादमियों के लेखकों को सम्मानित करने की घोषणा फिर से लागू करने की अनुशंसा की !

मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी ने कार्यसमिति की 13 सितंबर 2003 की बैठक में निर्णय लिया कि प्रतिवर्ष एकेडमी के चुनिंदा पांच लेखकों को हिंदी में पुस्तकों का लेखन के लिए प्रतिलेखन 21000 अभिनंदन किया जाएगा 2008 से राशि बढ़ाकर 31000 कर दी गई !

साहित्य, रूपंकर और प्रदर्शनकारी कलाएं ( Literature, form, and Performing arts )

मध्यप्रदेश में साहित्य और विभिन्न कलाओं के क्षेत्र में जो सृजन कार्य हो रहा है उसके समुचित सम्मान की आवश्यकता असंदिग्ध है। राज्य शासन ने समग्र योगदान के आधार पर साहित्य, प्रदर्शनकारी कलाओं और रूपंकर कलाओं में एक-एक राज्यस्तरीय शिखर सम्मान स्थापित किया है। प्रत्येक सम्मान की राशि 62 हजार रुपए है।

शिखर सम्मान केवल मध्यप्रदेश के कलाकारों और साहित्यकारों को ही देय है। मध्यप्रदेश के साहित्यकार/कलाकार से अभिप्राय प्रदेश के स्थायी निवासी की वैधानिक अर्हताओं के अलावा उन व्यक्तियों से भी है जिन्होंने प्रदेश में कला की सुदीर्घ साधना की और जिन्होंने प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बना लिया है अथवा यहीं बस गए हैं।

संस्कृति विभाग प्रमुखत: प्रदेश में महत्वपूर्ण साहित्यकारों, कलाकारों, विशेषज्ञों, संस्थाओं आदि की प्रतिवर्ष विधावार सूचियाँ बनाता है। लोक और नागर प्रदर्शनकारी कलाओं के चक्र में प्रतिवर्ष संगीत, नृत्य, रंगमंच और लोककलाओं के क्षेत्र में क्रमानुसार वर्ग-विशेष के पुरस्कार के लिए एक कलानुशासन को चुना जाता है और उससे संबंधित सूची में शामिल व्यक्तियों और संस्थाओं से निर्धारित प्रपत्र पर समयावधि के अन्दर नामांकन भेजने को कहा जाता है।

रूपंकर कलाओं के अन्तर्गत वर्ग विशेष में नागर अथवा लोक रूपंकर कलाओं के लिए नामांकन आमंत्रित किए जाते हैं। सामान्यत: तीन वर्ष के चक्र में एक वर्ष लोक रूपंकर कलाओं को सम्मान के लिए चुना जाता है।

साहित्य में भी इसी तरह प्रतिवर्ष नामांकन आमंत्रित करने की प्रक्रिया का अनुसरण किया जाता है। साहित्य के क्षेत्र में पाँच वर्ष में एक बार यह सम्मान उर्दू साहित्य के लिए दिया जाता है। संकलित नामांकन विशेषज्ञों की एक चयन समिति के समक्ष विचारार्थ रखे जाते हैं।

वर्ष विशेष के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा गठित चयन समिति में दूसरे कलानुशासन के ऐसे विशेष भी शामिल किए जाते हैं, जिनकी संबंधित कला में गहरी रुचि हो। चयन समिति को अनुशंसित नामों के अलावा, अपने विवेक से अन्य नाम चुनने की भी स्वतंत्रता है।

मध्यप्रदेश शासन का प्रयत्न है कि साहित्य और कलाओं के क्षेत्र में प्रदेश की सृजन प्रतिभा ने जो श्रेष्ठ अजिर्त किया है उसकी व्यापक पहचान बने और ऐसे कला साहित्य मनीषियों को, जो मध्यप्रदेश की समकालीन संस्कृति को अपने मूल्यवान अवदान से समृद्ध कर रहे हैं, एक कल्याणकारी राज्य, समूचे प्रदेश के नागरिकों की ओर से सम्मानित करें। राज्य शासन ने चयन समिति की अनुशंसा को अपने लिए बंधनकारी माना है।

शिखर सम्मान संबंधित क्षेत्र में सृजनात्मकता, उत्कृष्टता, दीर्घसाधना और वर्तमान में सृजन-सक्रियता के निविर्वाद मानदण्डों के आधार पर दिया जाता है। यह सम्मान कलाकार/साहित्यकार के समग्र रचनात्मक अवदान के लिए देय है न कि उसकी किसी कृति विशेष के लिए। शिखर सम्मान सिर्फ सृजनात्मक उपलब्धियों के लिए है, शोध अथवा अकादमिक कार्य के लिए नहीं।

शिखर सम्मान (साहित्य के क्षेत्र में) :- सर्वप्रथम श्रीकांत वर्मा को 1980- 81 में दिया गया था तथा वर्तमान में डॉक्टर आनंद कुमार पालिसी 2007-08 को दिया गया है !

शिखर सम्मान (रूपंकर कलाओ के क्षेत्र में) :- सर्वप्रथम यह सम्मान वर्ष 1980-81 में डॉक्टर डी जे जोशी को दिया गया था तथा वर्तमान में यह सम्मान 2007-08 में डॉक्टर लक्ष्मीनारायण भावसार को दिया गया है !

शिखर सम्मान (प्रदर्शनकारी कलाओं के क्षेत्र में):- सर्वप्रथम यह पुरस्कार वर्ष 1980-81 में पंडित कार्तिक राम को दिया गया था तथा वर्ष 2007 -08 में यह पुरस्कार श्री बसंत रामभाऊ सैबलीकर को दिया गया है !

मध्य प्रदेश के जनजातीय सम्मान

मध्यप्रदेश शासन, आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा रानी दुर्गावती राष्ट्रीय सम्मान, वीर शंकर शाह-रघुनाथ शाह राष्ट्रीय सम्मान, ठक्कर बापा राष्ट्रीय सम्मान एवं जननायक टंट्या भील राज्य स्तरीय सम्मान वर्ष 2008 से स्थापित हैं। सम्मान की स्थापना का उद्देश्य जनजातीय समाज की विशिष्ट विभूतियों के रचनात्मक अवदान से समाज को परिचित कराना है। सम्मान का समन्वय, संयोजन कार्य ‘वन्या’ के माध्यम से किया जा रहा है।

रानी दुर्गावती राष्ट्रीय सम्मान:-

यह सम्मान आदिवासी एवं पारम्परिक सृजनात्मक कला, शिल्प, समाज सेवा, प्रशासन में अद्वितीय उपलब्धि एवं योगदान के लिए आदिवासी महिला को दिया जाता है। इस राष्ट्रीय सम्मान के अन्तर्गत रुपये 2 लाख की सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। यह सम्मान किसी एक कृति, रचना या उपलब्धि के लिए न होकर सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिए दिया जाता है।

  • वर्ष 2008- श्रीमती रोज़ केरकेट्टा, झारखण्ड सम्मानित।
  • वर्ष 2009- श्रीमती भूरी बाई, झाबुआ एवं श्रीमती दुर्गा बाई व्याम, सुनपुरी, डिण्डौरी संयुक्त रूप से सम्मानित।

वीर शंकर शाह-रघुनाथ शाह राष्ट्रीय सम्मान:-

यह सम्मान भारतीय साहित्य में जनजातीय जीवन की सांस्कृतिक परंपरा और विशिष्टताओं पर लेखन के लिए तथा आदिवासी पारम्परिक कलाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय साधना के लिए दिया जाता है।

इस राष्ट्रीय सम्मान के अंतर्गत रुपये 2 लाख की सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। यह सम्मान किसी कृति, रचना या उपलब्धि के लिए न होकर सुदीर्घ साधाना एवं उपलब्धि के लिए दिया जाता है।

  • वर्ष 2008- श्री किनफाम सिं नोंगकिनरिह, मेघालय सम्मानित।
  • वर्ष 2009- श्री जिव्या सोमा माषे, महाराष्ट्र एवं डॉ. महेन्द्र कुमार मिश्रा, भुवनेष्वर को संयुक्त रूप से। (घोषणा)

ठक्कर बापा राष्ट्रीय सम्मान:-

यह सम्मान गरीब, पीड़ित, पिछड़े आदिवासी समुदाय की ममतापूर्ण सेवा एवं सुदीर्घ साधाना के लिए व्यक्ति/संस्था को दिया जाता है। इस राष्ट्रीय सम्मान के अन्तर्गत रुपये 2 लाख की सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। यह सम्मान किसी एक कृति या उपलब्धि के लिए न होकर सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिए दिया जाता है।

  • वर्ष 2008- स्वामी विवेकानन्द मेडिकल मिषन, केरल सम्मानित।
  • वर्ष 2009- वनबंधु परिषद, कोलकाता (घोषणा)

जननायक टंट्या भील राज्य स्तरीय सम्मान:-

यह सम्मान शिक्षा और/या खेल गतिविधियों में उल्लेखनीय साधना तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आदिवासी युवा को दिया जाता है। इस सम्मान के अंतर्गत रुपये 1 लाख सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाती है। यह सम्मान किसी एक उपलब्धि के लिए न होकर शिक्षा और/या खेल गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए, सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिए दिया जाता है।

  • वर्ष 2008- श्री राजाराम मौर्य, देवास सम्मानित।
  • वर्ष 2009 एवं 2010 – प्रक्रियाधीन

विष्णु कुमार अनुसूचित जाति समाज सेवा सम्मान:-

मध्यप्रदेश के अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों की नि:स्वार्थ सेवा के लिए व्यक्ति/स्वयंसेवी संस्था को अनुसूचित जाति कल्याण विभाग द्वारा यह राज्य स्तरीय सम्मान दिया जाएगा।

इस राज्य स्तरीय सम्मान के अंतर्गत रुपये 1.00 लाख की सम्मान निधि एवं प्रशस्ति पट्टिका प्रदान की जाएगी। विष्णु कुमार अनुसूचित जाति समाज सेवा सम्मान किसी एक उपलब्धि के लिए न होकर अनुसूचित जाति के समग्र उत्थान के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन और असाधारण उपलब्धि के लिये देय होगा।

मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् के पुरस्कार ( Madhya Pradesh Sahitya Parishad Award )

मध्यप्रदेश साहित्य परिषद की स्थापना वर्ष 1954 में हुई मुख्यालय भोपाल।म.प्र. साहित्य परिषद की स्थापना का उद्देश्य म.प्र. के साहित्य का सृजन, संरक्षण, प्रोत्साहन, प्रचार-प्रसार, प्रबंध, सम्मान एवं पुरस्कार प्रदान करना है।

मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् द्वारा निम्न अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक  पुरस्कार दिए जाते हैं-

अखिल भारतीय पुरस्कार ( All India Award )

  1. भवानी प्रसाद मिश्र पुरस्कार :- कविता
  2. वीरसिंह देव पुरस्कार:-उपन्यास
  3. गजानन माधव मुक्तिबोध पुरस्कार :- कहानी
  4. सेठ गोविन्ददास पुरस्कार:- नाटक, एकांकी
  5. रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार :-आलोचना
  6. पदुमलाल पुन्ना लाल बख्शी पुरस्कार:-व्यंग्य, ललित निबंध, संस्मरण, रेखचित्र, यात्रा, आत्मकथा रिपोतार्ज

प्रादेशिक पुरस्कार ( Regional award )

  • माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार- कविता
  • बालकृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार- गीत प्रबंध
  • सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार-  कहानी
  • विश्वनाथ सिंह पुरस्कार- उपन्यास
  • नंद दुलारे बाजपेयी पुरस्कार- नाटक एकांकी
  • मुकुटधर पाण्डेय पुरस्कार- सृजनात्मक चिंतन, ललित निबंध
  • हरि कृष्ण प्रेमी पुरस्कार – नाटक-एकांकी
  • माधव राव सप्रे पुरस्कार- प्रदेश की विभूति, इतिहास, स्थान पर लिखी गई कृति के लिए
  • .रामविलास शर्मा पुरस्कार- लेखक की श्रेष्ठ पहली कृति के लिए
  • दुष्यंत कुमार पुरस्कार- 35 वर्ष से कम आयु के लेखक की पहली कृति
  • शरद जोशी पुरस्कार- व्यंग्य
  • राजेन्द्र माथुर पुरस्कार- रेखाचित्र, संस्मरण, यात्रा, आत्मकथा, पत्र, रिपोतार्ज
  • ईसुरी पुरस्कार- लोकभाषा कृति
  • रविशंकर शुक्ल पुरस्कार- बाल साहित्य ( 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए)
  • ताम्ब्रे पुरस्कार- मराठी साहित्य (सम्पूर्ण सर्जनात्मक विधाए)
  • अनिल कुमार पुरस्कार- प्रदेश की लघु पत्रिका

 

Quiz 

Question -10 

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Q.1 मध्य प्रदेश साहित्य परिषद के द्वारा "लेखक की श्रेष्ठ पहली कृति" पर कौनसा पुरस्कार दिया जाता है ?

Correct! Wrong!

Q.2 साहित्य परिषद द्वारा "प्रदेश की लघु पत्रिका" के लिए कौनसा पुरस्कार दिया जाता है ?

Correct! Wrong!

Q.3 मध्य प्रदेश साहित्य परिषद द्वारा कौन सा पुरस्कार बाल साहित्य (12 वर्ष तक के बच्चों के लिए) दीया जाता है ?

Correct! Wrong!

Q.4 माखनलाल चतुर्वेदी प्रादेशिक पुरस्कार प्रदान किया जाता है ?

Correct! Wrong!

Q.5 राजेंद्र माथुर पुरस्कार दिया जाता है ?

Correct! Wrong!

Q.6 माधवराव सप्रे पुरस्कार साहित्य परिषद द्वारा किस विधा के लिए प्रदान किया जाता है ?

Correct! Wrong!

Q.7 ताम्ब्रे पुरस्कार दिया जाता है ?

Correct! Wrong!

Q.8 वीर सिंह देव पुरस्कार प्रदान किया जाता है ?

Correct! Wrong!

Q.9 मध्य प्रदेश साहित्य परिषद का मुख्यालय कहां पर स्थित है ?

Correct! Wrong!

Q.10 मध्य प्रदेश साहित्य परिषद की स्थापना किस वर्ष हुई थी ?

Correct! Wrong!

Madhya Pradesh Famous Awards Quiz ( मध्यप्रदेश के प्रमुख सम्मान )
खराब ! आप कुछ जवाब सही हैं! कड़ी मेहनत की ज़रूरत है
अच्छा ! आपने अच्छी कोशिश की लेकिन कुछ गलत हो गया ! अधिक तैयारी की जरूरत है
बहुत अच्छा ! आपने अच्छी कोशिश की लेकिन कुछ गलत हो गया! तैयारी की जरूरत है
शानदार ! आपका प्रश्नोत्तरी सही है! ऐसे ही आगे भी करते रहे

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

विष्णु गौर सीहोर, मध्यप्रदेश