इस पोस्ट में मध्य प्रदेश की भौगोलिक स्थिति (Madhya Pradesh Bhogolik Status) को आसान भाषा मे वर्णित किया गया है जो आपको भविष्य की Exam like MPPSC, MPSI, PATWARI, Jail Prahari, Forest Gard, Mp police, MPANM, MPTET, दुग्ध संघ, Leabor inspector में अच्छे अंक दिलाने में सहायक सिद्ध होंगे

मध्यप्रदेश पूर्ण भू आवेष्ठित राज्य है राज्य की सीमा ना तो किसी समुद्री सीमा को छूती है और ना ही किसी अंतर्राष्ट्रीय सीमा को भू वैज्ञानिक दृष्टि से राज्य सर्वाधिक प्राचीनतम गोंडवानालैंड का भाग है ! दक्षिण पूर्व क्षेत्र मध्यप्रदेश का गोंडवाना क्षेत्र कहलाता है भौतिक संरचना की दृष्टि से भारत के पठार के उत्तरी भाग राज्य के अंतर्गत आता है गोंडवाना शैल समूह लोलर गोंडवाना मध्य गोंडवाना तथा अपर गोंडवाना समूह में बांटा गया है !

Madhya Pradesh Bhogolik Status

 

मध्य प्रदेश की भौगोलिक स्थिति ( Madhya Pradesh Bhogolik Status ) 

राज्य की वर्तमान भौगोलिक स्थिति 21°6´ उत्तरीअक्षांश से 26°30´ उत्तरी अक्षांश तथा 74°59´ पूर्वी देशांतर से 82°66´ पूर्वी देशांतर के मध्य है मध्यप्रदेश का कुल क्षेत्रफल 3,08,252 वर्ग किलोमीटर है जो भारत के कुल क्षेत्रफल का 9.38% हैं ! क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य देश में राजस्थान के बाद द्वितीय स्थान पर आता है इस का पूर्व से पश्चिम विस्तार 870 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण विस्तार 605 किलोमीटर है !?

पश्चिमी तथा पूर्वी सीमाएं क्रमशः गुजरात एवं मेकाल कैमूर की श्रेणियों द्वारा निर्धारित की जाती है! राज्य की सर्वाधिक सीमा उत्तर प्रदेश राज्य से मिलती है तथा न्यूनतम सीमा गुजरात के बड़ोदरा जिले से मिलती है कर्क रेखा नर्मदा नदी के समांतर प्रदेश को दो बराबर भागों में बांटती है राज्य की सीमा 5 राज्यों से के साथ मिलती है !

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Geological structure (भू-वैज्ञानिक संरचना)

राज्य संरचना की दृष्टि से प्रायद्वीपीय पठार का भाग है प्रायद्वीपीय पठार भु वैज्ञानिक इतिहास में कभी भी पूर्णता जलमग्न नहीं हुआ है ! केवल कुछ समय के लिए इस पठार का कुछ भाग छिछले समुद्र से ढका था इस कारण प्रदीप के पठार पर विभिन्न कालों की भूवैज्ञानिक संरचना का विकास हुआ है मध्यप्रदेश का अधिकांश भाग प्रदीप के पठार का हिस्सा होने के कारण यहां विभिन्न कालों की भूवैज्ञानिक संरचना देखने को मिलती है !

Old Union (पुरान संघ)

धारवाड़ शैल समूह की चट्टानें कालांतर में पर्वत निर्माणकारी क्रियाओं के द्वारा पुराने मोड़दार पर्वत में बदल गई अपरदन चक्र की क्रिया द्वारा यह मोड़दार पर्वत धीरे-धीरे समतल पर आया मैदान में बदल गए इन समप्राय मैदान में बौद्धिक एक आलू की चट्टानों के नीचे फुंसी पुरान संघ की चट्टानों का निर्माण हुआ !

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समय अवधि के आधार पर पुरान संघ की चट्टानों को निम्नलिखित दो भागों में बांटा गया है

1. कडप्पा शैल समूह

  • कडप्पा शैल समूह विंध्यन की अपेक्षा प्राचीन है कडप्पा शैल समूह की चट्टानें अत्यधिक टूटी एवं कायांतरित हैं यह चट्टानें मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के मैदान में पाई जाती हैं परंतु मध्य प्रदेश के बिजावर पन्ना तथा ग्वालियर में भिन्न का विस्तार देखने को मिलता है अतः यह चट्टानें मध्य प्रदेश की उत्तर पश्चिमी सीमा पर सेल,जैस्पर,होर्नस्टोन तथा पोर्सस्टोन के रुप में पाई जाती हैं !

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2. विंध्यन शैल समूह

  • विंध्यन शैल समूह की चट्टानों की मध्य प्रदेश में मोटर लगभग 42 मीटर है एंजल इस प्रकार की चट्टानों पर अंदर भूमि क्रियाओं का प्रभाव नहीं पड़ा है मध्यप्रदेश में चट्टानों का विस्तार सोहन के उत्तर पश्चिम में रीवा से लेकर चंबल के पश्चिम में राजस्थान तक है !

मध्य प्रदेश में विंध्यन शैल समूह की चट्टानों कोने में दो भागों में विभाजित किया गया जाता है !

A. लोअर विंध्यन

  • अलवर विंध्यन समूह की चट्टानें विंध्याचल श्रेणी में नर्मदा के उत्तर में पूर्व से पश्चिम तक फैली है सोन घाटी तथा बीमा घाटी में भिन्न का विस्तार देखने को मिलता है सोन घाटी में यह चट्टानें 914 मीटर मोटर चूने के पत्थर सेल द्वारा बालू पत्थर के रूप में मिलती है !

B अपर विन्ध्यन

  • अपर विन्धयन समूह की चट्टानों का विस्तार नर्मदा के उत्तर में कैमूर रिवा. तथा भंडेर सिरिज रूप में है इन चट्टानों में अल्प मात्रा में छोटे जंतुओं एवं वनस्पतियों के कुछ चिन्ह मिलते हैं इमारती पत्थर इस समूह की चट्टानों में बहुतायत मात्रा में मिलता है इसका प्रयोग उत्तरी भारत की ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण में हुआ है !

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मध्यप्रदेश में निम्न कालों की भूवैज्ञानिक संरचना पाई जाती है !

1. आद्य महाकल्प (आर्कियन)

  • आद्य महाकल्प ( आर्कियन) की चट्टानें पृथ्वी की प्रथम कठोर चटाने हैं पिन प्रारंभिक चट्टानों में जीवाश्म क्या विशेष नहीं मिलते हैं क्योंकि तत्कालीन समय में पृथ्वी पर जीवन का विकास नहीं हुआ था !
  • मध्यप्रदेश में इस युग की चट्टानें बुंदेलखंड क्षेत्र में बुंदेलखंड नीस के रूप में मिलती हैं इस क्षेत्र में आद्य महाकल्प की चट्टानों के साथ लंबी संकरी पहाड़ियों में गुलाबी ग्रेनाइट सील एवं डाएक के रूप में पाए जाते हैं !
  • मध्यप्रदेश में स्थित आद्य महाकल्प किस चट्टानों का निर्माण तरल लावा के ठंडे होने पर एवं क्षेत्र क्षेत्र में नीचे पान द्वारा हुआ है इन दोनों प्रकार की चट्टानों का प्रादेशिक एवं तापीय कायांतरण अधिक होने के कारण इनका विभेदीकरण कठिन है !

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2. धारवाड़ समूह

  • धारवाड़ समूह की चट्टानों का निर्माण आद्य महाकल्प की चट्टानों के अपरदन से निकले पदार्थों के द्वारा हुआ है ! अतिरिक्त आप एवं दाब के कारण इनका कायांतरण होने से यह चट्टाने अधिकतर फ़ाइलाइट्स सिस्ट तथा स्लेट के रुप में पाई जाती हैं!
  • मध्यप्रदेश में तो हर बार समूह की चट्टानें मुख्य रूप से जबलपुर बालाघाट जिला छिंदवाड़ा में मिलती है जबलपुर में इस शैल समूह गौर रवेदार डोलोमाइट वचूने का पत्थर संगमरमर नर्मदा की घाटी में पाया जाता है ! इसमें मैगनीज के निक्षेप मिलते हैं बालाघाट तरह अन्य निकटवर्ती भागों में धारवाड़ चट्टानों खिलडी सीरीज के रुप में उपस्थित हैं जिनमें अत्यधिक मोटी स्लेट तथा फाईलाइट की तहे मिलती हैं 

3. आर्य समूह

  • और इस समूह के अंतर्गत अपर कार्बोनिफेरस से लेकर अत्यंत नूतन मुक्तक को शामिल किया जाता है अपर कार्बोनिफेरस युग में दक्कन का पठार अंतर भूमि तेरी आंखों से प्रभावित हुआ था ! लेकिन पर्वत निर्माणकारी प्रक्रियाओं से यह क्षेत्र अछूता रहा परंतु अत्यधिक खिंचाव के कारण बीच-बीच में दरारें पड़ गई तथा शंकरा लंबा भू भाग इनके सहारे नीचे धंस गया !
  • मेम शंकर विभागों में मीठे जल की झील का निर्माण हो गया कालांतर में इन झीलो में नीछेपित पदार्थों से गोंडवाना शैल समूह की चट्टानों का निर्माण हुआ !

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विष्णु गौर सीहोर, मध्यप्रदेश

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