इस पोस्ट में मध्यप्रदेश की जलवायु (Madhya Pradesh Climate) को आसान भाषा मे वर्णित किया गया है जो आपको भविष्य की Exam like MPPSC, MPSI, PATWARI, Jail Prahari, Forest Gard, Mp police, MPANM, MPTET, दुग्ध संघ, Leabor inspector में अच्छे अंक दिलाने में सहायक सिद्ध होंगे

Madhya Pradesh Climate

जलवायु मौसम की दशाओं का सामान्यकृत स्वरुप है इस में वर्ष भर या इस से भी लंबी काल की औसत दशाओं को महत्व दिया जाता है मौसम की दशाओं के अंतर्गत तापमान वर्षा आद्रता वायुदाब,वायु दिशा, वायु वीछोप आदि तत्वों की औसत दशा ज्ञात की जाती है मौसम के अंतर्गत अल्पकालीन और जलवायु में दीर्घकालीन दशाओं के सामान्यीकरण का समग्र स्वरुप होता है !

मध्य प्रदेश भारत का दूसरा बड़ा राज्य है इसकी विशालता के कारण राज्य के विभिन्न विभागों में भिन्न-भिन्न प्रकार की जलवायु दशाएं पाया जाना स्वाभाविक है मध्यप्रदेश की जलवायु (Madhya Pradesh Climate) मानसूनी है कर्क रेखा प्रदेश के लगभग मध्य भाग से गुजरती है 28 मार्च के बाद सूर्य उत्तरायण होने लगता है अतः प्रदेश गर्म होने लगता है सूर्य की किरणें लंबवत होती हैं तथा 21 जून को कर्क रेखा के निकट सूर्य लंबवत होता है !

तेज धूप से राज्य का तापमान बढ़ता जाता है जिससे उत्तर- पश्चिम भाग में न्यून वायुदाब के केंद्र स्थापित हो जाते हैं इस काल में हिंद महासागर पर अपेक्षाकृत तापमान कम और वायुदाब अधिक होता है वायुदाब का ढाल पश्चिम की ओर होता है और वायु भी उसी दिशा में बहती है जून तक उत्तर पश्चिम का निम्न वायुदाब केंद्र इतना तीव्र हो जाता है कि ना केवल सीमावर्ती समुद्र की हवाएं स्थल की ओर आने लगती हैं बल्कि हिंद महासागर के दक्षिणी भाग में हवाएं आकर्षित होने लगती हैं !

समुद्र से आने वाली इन मानसूनी हवाओं से मध्य प्रदेश में वर्षा होती है 21 सितंबर के उपरांत सूर्य दक्षिणायन होने लगता है सूर्य की किरणें तिरछी होने लगती है जिसके फलस्वरुप प्रदेश का तापमान गिरने लगता है हिंद महासागर पर सूर्य की किरणें अपेक्षाकृत सीधी पड़ती हैं व तापमान अधिक होता है जिसके फलस्वरुप न्यून वायुदाब पाया जाता है !

जनवरी माह में लगभग 225 मिली बार की समदाब रेखा भारत के बिल्कुल दक्षिणी भाग में तथा हिंद महासागर से गुजरती है अतः पवनों की दिशा स्थल की की ओर तथा उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम की ओर हो जाती है यह शुष्क मानसून होता है जो केवल कहीं-कहीं स्थानीय बरसा प्रदान करता है !

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इन दिनो उत्तर-पश्चिमी भारत में जाड़े के मौसम में चक्रवात से कुछ वर्षा अवश्य हो जाती है जाड़े और गर्मी दोनों ही मौसम में वायुदाब की रेखाएं पूर्व से पश्चिम की ओर हो जाती है जुलाई में जब 1000 मिली बार की समदाब रेखा मध्यप्रदेश के बीच से गुजरती है तो पवनों की दिशा पश्चिम और दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की ओर हो जाती है !

जनवरी में 1030 मिली गौर की समदाब रेखा पर मध्य प्रदेश को काटती हुई जाती है परंतु इस समय पवनो की दिशा उत्तर और उत्तर -पश्चिम से दक्षिण -पश्चिम की ओर होती है मध्य प्रदेश समुद्र से दूर होने के कारण याद समुद्री प्रभाव नहीं पहुंचता फल स्वरुप तटीय क्षेत्रों की तुलना में यहां वर्षा भी कम होती है और वार्षिक व दैनिक तापांतर भी अधिक पाया जाता है !

मध्यप्रदेश में तापमान का वितरण ( Distribution of temperature in Madhya Pradesh )

मध्य प्रदेश में तापमान का सीधा संबंध समुद्र की निकटता तथा समुद्र तल की ऊंचाई से होता है प्रस्तुत तालिका में प्रदेश के प्रमुख नगरों के मासिक तापमान प्रस्तुत है जैसा ऊपर लिखा जा चुका है कि मार्च में सूर्य के उत्तरायण होते ही संपूर्ण मध्यप्रदेश में तापमान बढ़ने लगता है किंतु उसका वितरण असमान है !

ग्वालियर नगर में मार्च का अधिकतम तापमान 32.9° सेल्सियस रहता है मध्य प्रदेश के पश्चिमी जिले नीमच का मार्च में अधिकतम तापमान 32.7° सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 16.8° सेल्सियस रहता है !

दक्षिणी मध्य प्रदेश के नगर खंडवा में मार्च महा का अधिक तापमान 36.4° सेल्सियस रहता है संपूर्ण मध्य प्रदेश में मई का महीना सबसे गर्म होता है इस माह का ग्वालियर का अधिकतम तापमान 42.6° सेल्सियस इसी प्रकार खंडवा का 41.9° सेल्सियस सतना का 48° डिग्री सेल्सियस तथा नीमच का 40 डिग्री सेल्सियस रहता है मई, माह को राज्य में सर्वाधिक तापमान खजुराहो में 49.2° सेल्सियस अंकित किया गया है !

मार्च से मई तक तापमान तेजी से बढ़ता है मई तक तापमान की विवरण स्थिति बहुत बंद हो जाती है राज्य में मई का सर्वाधिक तापमान और सबसे कम पचमढ़ी में रिकॉर्ड किया गया है सामान्यता मध्य प्रदेश के उत्तरी और पश्चिमी जिलों में मई का तापमान अधिकतम होता है तथा दक्षिण व दक्षिण पूर्व की ओर कम हो जाता है मानसून के कारण मध्य प्रदेश के अधिकांश भागों में मई का औसत तापमान जून से भी अधिक होता है !

Most Important Reasoning Questions : 1

जून में मानसून के आते ही तापमान अचानक गिरने लगता है तथा जून की तुलना में जुलाई का तापमान बहुत कम हो जाता है राज्य में सर्वाधिक तापमान ग्वालियर में जुलाई का अधिकतम तापमान सेल्सियस 34.1° है जबकि पचमढ़ी में 31.9° सेल्सियस है ! सितंबर तक तापमान में अधिक भिन्नता नहीं होती है, किंतु सितंबर-अक्टूबर में जब आकाश स्वच्छ होता है तब तापमान में हल्की वृद्धि हो जाती है !

अक्टूबर माह में ग्वालियर का अधिकतम तापमान 33.2° सेल्सियस और 31.9° न्यूनतम सेल्सियस है पचमढ़ी में अक्टूबर का अधिकतम तापमान 31.8° सेल्सियस और न्यूनतम 14.8° सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है !

मध्यप्रदेश में जनवरी की अपेक्षा दिसंबर माह में न्यूनतम तापमान अंकित किया गया है ग्वालियर का न्यूनतम तापमान 7.2° सेल्सियस पाया जाता है जबकि जनवरी में न्यूनतम तापमान 7.5° सेल्सियस रहता है उत्तरी भागों का तापमान दक्षिण की तुलना में कम रहता है दक्षिणी नगर खंडवा का जनवरी का न्यूनतम तापमान 12° सेल्सियस है जबकि ग्वालियर नगर का जनवरी में तापमान खंडवा से काफी कम अर्थात 7.5° सेल्सियस रहता है !

औसत अधिकतम तथा न्यूनतम दैनिक तापांतर में कुछ विशेषताएं दृष्टिगोचर होती हैं वह सब अधिकतम तथा न्यूनतम तापमान सबसे कम दिसंबर माह में मिलता है यह केवल कुछ स्थानों जैसे सागर में जनवरी में पाया जाता है सागर में जनवरी माह का न्यूनतम तापमान 11.6° सेल्सियस और दिसंबर माह का न्यूनतम तापमान 12.9° सेल्सियस रहता है !

इसके विपरीत अधिकतम सबसे कम तापमान जनवरी में पचमढ़ी का 24.70° सेल्सियस,ग्वालियर में 23.20 सेल्सियस,नीमच में 22.40° सेल्सियस है ! इसी प्रकार अधिकतम दैनिक तापमान अधिकतम स्थानों पर मई में पाया जाता है मध्य प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान 33.90° सेल्सियस है !

मध्य प्रदेश के लगभग सभी स्थानों में दैनिक तापांतर मार्च में सबसे अधिक होता है क्योंकि इस माह में आकाश स्वच्छ रहता है वह वायु में आर्द्रता बहुत कम पाई जाती है भोपाल और पचमढ़ी में जनवरी का दैनिक तापांतर अधिकतम रहता है क्योंकि जाड़े की वर्षा के कारण रात्रि का तापमान बहुत अधिक गिर जाता है !

मध्य प्रदेश में वर्षा (Rain in Madhya Pradesh)

मध्य प्रदेश मानसून से वर्षा प्राप्त करता है अधिकांश वर्षा जून से सितंबर के मध्य होती है इन 4 महीनों के राज्य को 80% से 92% तक वर्षा प्राप्त होती है यह वर्षा होना फोर्म द्वारा होती है जिन्हें दक्षिण-पश्चिमी मानसून कहते हैं !

दिसंबर जनवरी में कुछ वर्षा चक्रवातों से होती है अन्य महीनों में बहुत कम वर्षा होती है मध्य प्रदेश में मानसून की वर्षा बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों क्षेत्रों से उठने वाली हवाओं से होती है पश्चिमी भाग जब अरब सागर की मानसून हवाओं से जल प्राप्त करते हैं उसी समय बंगाल की खाड़ी से उठने वाली हवाओं से पूर्वी भाग में वर्षा होती है इन दोनों ही क्षेत्रों में उत्तर पश्चिमी भागों तक पहुंचते-पहुंचते कम जल रह जाता है ग्वालियर और चंबल संभाग में औसत वार्षिक वर्षा बहुत कम होती है भिंड में 55 सेंटीमीटर वर्षा अंकित की गई हैं !

मध्यप्रदेश में औसत वार्षिक वर्षा में स्थानीय भिन्नता बहुत अधिक पाई जाती है भिन्नता का मुख्य कारण प्रदेश की भौगोलिक बनावट है इसी के फलस्वरुप कांग्रेस की सेवाएं बहुत अधिक बनावट हैं इसी के फलस्वरुप समवृष्टि की रेखाएं बहुत अधिक मोड़दार घाट हैं 60 सेंटीमीटर की समृद्धि रेखा मध्यप्रदेश को पूर्वी व पश्चिमी भागों में विभाजित करती है यह रेखा सतना,पन्ना ,दमोह, सागर, रायसेन, होशंगाबाद, होती हुई बेतूल तक जाती है !

इस औसत वर्षा का महत्व इसलिए भी है कि पूर्वी भाग मुख्यता चावल व पश्चिमी भाग गए हैं वह चमार के प्रदेश हैं इसलिए पूर्वी भाग से तीन अपेक्षाकृत अधिक वर्षा के क्षेत्र हैं मंडला बालाघाट को घेरती हुई 139.7 सेंटीमीटर वर्षा का क्षेत्र है पश्चिमी मध्य प्रदेश की अपेक्षा कम वर्षा वाले वाक्य मध्य महादेव की पहाड़ी पर लगभग 200 सेंटीमीटर वर्षा होती है !

पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत वर्षा वार्षिक 60 सेंटीमीटर से कम होती जाती है औसत वर्षा उत्तर तथा पश्चिम की ओर कम होती जाती है मालवा और बुंदेलखंड के पठार पर औसत वर्षा 45 सेंटीमीटर 60 सेंटीमीटर तक होती है !

उत्तर में चंबल का निचली घाटी अर्थात ग्वालियर भिंड मुरैना शिवपुरी में 45 से 55 सेंटीमीटर के लगभग वर्षा होती है पश्चिमी जिलों जैसे नीमच मंदसौर रतलाम झाबुआ और खंडवा में औसत वर्षा 50 सेंटीमीटर से कम होती है !

दूसरे शब्दों में कहा जाता है कि 60 सेंटीमीटर से कम वर्षा वाले क्षेत्र अधिकतम पश्चिमी मध्य प्रदेश में है !

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मध्यप्रदेश में ऋतुएं ( Seasons in Madhya Pradesh )

मध्यप्रदेश में सामान्यता 3 ऋतु होती हैं ग्रीष्म ऋतु वर्षा ऋतु तथा शीत ऋतु !

1. ग्रीष्म ऋतु (Summer season)

  • मध्यप्रदेश में ग्रीष्म ऋतु मार्च के मध्य से जून के मध्य तक रहती है यह साधारणता उसके प्रकार की होती है !
  • ग्रीष्म ऋतु में मार्च के बाद तापमान में निरंतर वृद्धि होती जाती है तथा मई में लगभग संपूर्ण मध्य प्रदेश का तापमान 29.40 सेल्सियस से ऊपर रहता है !
  • मई में उत्तर पश्चिमी मध्य प्रदेश अपेक्षाकृत सूखा रहता है तथा जहां वनस्पति भी कम है अधिकतम तापमान का केंद्र होता है ग्वालियर मुरैना बदरिया को घेरती हुई 42.50° सेल्सियस की समताप रेखा मिलती है !
  • 40 डिग्री सेल्सियस की समताप रेखा में मंडला, शहडोल,सिवनी, छिंदवाड़ा, बैतूल,शाजापुर, देवास, इंदौर,धार,उज्जैन, झाबुआ, रतलाम,नीमच,मंदसौर जिले शामिल है यहां ऊंचाई व समुद्र की निकटता के कारण तापमान अधिक नहीं बढ़ पाता !
  • संपूर्ण मध्यप्रदेश में अप्रैल-मई में 2.5 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा नहीं होती पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत वर्षा 2.5 – 12.5 सेंटीमीटर हो जाती है इस ऋतु में आद्रता बहुत कम रहती है आकाश स्वच्छ रहता है बहुत तेज धूल भरी हवाएं चलती हैं !

Sunlight and earth’s heat budget ( सूर्यताप व पृथ्वी का उष्मा बजट )

2. वर्षा ऋतु (Rainy Season)

  • मध्य प्रदेश में जून के मध्य तक वर्षा ऋतु प्रारंभ हो जाती है जून से वायु में आर्द्रता बढ़ने लगती है क्योंकि सागर के ऊपर से आने वाली हवाएं उत्तर पश्चिमी भारत व पाकिस्तान के न्यून वायुदाब केंद्र की ओर आकर्षित होने लगती हैं !
  • संपूर्ण पश्चिमी मध्य प्रदेश में हवाओं की दिशा पश्चिम व दक्षिण से होती है यह हवाएं नर्मदा व ताप्ती की घाटियों तथा दक्षिण में पेंच नदी की घाटी से प्रवेश करती है जिनसे निकटवर्ती पर्वतीय वह मुझे पठारी प्रदेशों में अधिक वर्षा होती है !
  • वर्षा आर्द्रता तथा धूप की कमी के कारण तापमान गिरने लगता है तथा जून 1 जुलाई के तापमान में पर्याप्त अंतर आ जाता है उत्तर के भागों में तापमान 26.6 डिग्री सेल्सियस से 29.4 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहता है जबकि दक्षिण में 23.9 डिग्री सेल्सियस से 26.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है !
  • यह अंतर जुलाई में दक्षिणी भागों में अधिक वर्षा के कारण पाया जाता है जुलाई के पश्चात औसत मासिक तापमान लगभग स्थिर रहता है 
  • मध्य प्रदेश में वर्षा ऋतु के 4 माह में औसतन 60 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा होती है यह घटकर पश्चिमी एवं उत्तरी पश्चिमी भाग में (ग्वालियर,मुरैना, श्योपुर शिवपुरी) में 45 से 50 सेंटीमीटर तक रह जाती है धार.बड़वानी .झाबुआ खरगोन एवं पश्चिमी मंदसौर में भी 50 से 60 सेंटीमीटर तक वर्षा होती है !
  • सितंबर के अंतिम दिनों में मानसून का वेट कम होने लगता है तथा स्वच्छ आकाश का समय बढ़ने लगता है साथ ही वर्षा की मात्रा में घटती जाती है अक्टूबर में औसत वर्षा कम होती है तथा तापमान में वृद्धि होती है !

Important Post – Bharat ki Jalvayu Objective Questions

शीत ऋतु (Winter season)

  • सितंबर में सूर्य के दक्षिणायन होने के साथ ही औसत तापमान में गिरावट आने लगती है वर्षा तथा आद्रता की अधिकता के कारण भी ऐसा होता है अक्टूबर में संपूर्ण मध्य प्रदेश का तापमान 20.9 डिग्री सेल्सियस से 26.6 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहता है !
  • जनवरी में 21.1 डिग्री सेल्सियस की रेखा मध्यप्रदेश को उत्तरी व दक्षिणी दो भागों में विभक्त कर देती है संपूर्ण उत्तरी मध्य प्रदेश में तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से 18 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहता है दक्षिणी भाग में तापमान बढ़ता जाता है बालाघाट सिवनी छिंदवाड़ा बैतूल खंडवा व खरगोन में तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से 20 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहता है !
  • शुष्क मौसम स्वच्छता शिवम मंद हवा में शीत ऋतु की मुख्य विशेषताएं हैं रात्रि का तापमान गिरने से मुझे पठारी का पहाड़ी भागों में स्थानीय रूप से पाला व कोहरा पड़ता है दिसंबर में जनवरी में उत्तर पश्चिम में मध्यप्रदेश में हल्की वर्षा चक्रवातों से हो जाती है यह चक्रवात अधिकतर पश्चिम की ओर से आते हैं !
  • यह चक्रवात अपने साथ उत्तर के उत्तर एक सीट वायु को आकर्षित कर लेते हैं जिससे शीत लहर भी आ जाती है इन चक्रवातों के कारण कभी-कभी ओले भी गिरते हैं तथा वायु की गति भी अधिक हो जाती है चक्रवातों के कारण मौसम अचानक परिवर्तित हो जाता है ! 

Important Questions Test on Madhya Pradesh Climate – Start Test

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

विष्णु गौर सीहोर, मध्यप्रदेश

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