Madhya Pradesh Forest Estates (मध्यप्रदेश मे वन संपदा)

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पर्यावरण की दृष्टि से एक तिहाई क्षेत्र में बंद होना चाहिए वनसंपदा राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृण और संपन्न बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है वन भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं भूमि के अपरदन को रोकते हैं तथा स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करने में भी बनो की महत्वपूर्ण भूमिका है !

वन संपदा की दृष्टि से मध्यप्रदेश समृद्धि राज्य राज्य का भौगोलिक क्षेत्रफल 308252 वर्ग किलोमीटर है ! मध्य प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2004 से 2005 के अनुसार छत्तीसगढ़ के विभाजन के पश्चात मध्यप्रदेश में 95211 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन अच्छादित है ! जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 30.9 प्रतिशत है

राज्य के कुल वन क्षेत्रों में 58.7 वर्ग किलोमीटर आरक्षित वन,35.8 हजार वर्ग किलोमीटर संरक्षित वन तथा 0.9 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अवतरित वनों के अंतर्गत आता है इस प्रकार मध्यप्रदेश में आरक्षित वन क्षेत्र 61.65 प्रतिशत, संरक्षित वन 37.3% , एवं अवर्गीकृत वन क्षेत्र 1.05 % है !

मध्य प्रदेश में वन पेटियां

वन घनत्व एवं विस्तार की दृष्टि से मध्यप्रदेश में मुख्यता तीन पेटियां हैं !

  1. विंध्यन कैमूर सारणी वन पेटी? यह पैटी उत्तर में दमोह सागर के पठार तक फैली है यहां पर विरल वन है !
  2. मुरैना एवं शिवपुरी पठार की पेटी? इस वन पेटी में मुरैना और शिवपुरी का भाग आता है यहां कटीले वृक्ष सर्वाधिक है !
  3. नर्मदा के दक्षिण में एक चोडी पेटी? नर्मदा नदी के दक्षिण में यह पेटी प्रदेश की पूर्वी सीमा से लेकर पश्चिम तक फैली है इसके अंतर्गत सतपुड़ा मैकल श्रेणी के वन, बघेलखंड का पठार और पहाड़ी भाग आता है !

वनों का प्रशासकीय प्रबंधनकीय वर्गीकरण (Administrative managerial classification of forests )

प्रशासकीय प्रबंधन की दृष्टि से मध्यप्रदेश में वनों का वर्गीकरण निम्नानुसार किया गया है इस आधार पर वनों को तीन भागों में विभाजित किया गया है !

1. संरक्षित वन ? 37.3 %
2. आरक्षित वन ? 61.65 %
3. अवर्गीकृत वन ?1.05 %

1. संरक्षित वन

संरक्षित वन राज्य के वन क्षेत्र के 37.3% अर्थत 35.8 वर्ग किलोमीटर पर अच्छादित है संरक्षित वन से आज से उस क्षेत्र से है जिसका प्रबंधन प्रशासन की देखरेख में होता है संरक्षित वन क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा रहती है परंतु इन्हें नष्ट करना दंडनीय अपराध माना जाता है संरक्षित वन क्षेत्रों में प्रशासनिक नियम कठोर नहीं रहता है इन वन क्षेत्रों में पशुचारण की सुविधा दी जाती है संरक्षित वन क्षेत्र में रहने वाले निवासी विशेष परिस्थिति में अनुमति द्वारा वन भी काट सकते हैं !

2. आरक्षित वन क्षेत्र

मध्यप्रदेश में आरक्षित वन क्षेत्र 58.7 हजार किलोमीटर क्षेत्र में स्थित है जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 61.65% है आरक्षित वन क्षेत्र में आवागमन पशुचारण लकड़ी काटना दंडनीय अपराध माना जाता है आरक्षित वन क्षेत्र मे प्रशासकीय नियम अत्यंत कठोर होते हैं !

3. अवर्गीकृत वन

मध्यप्रदेश में अवर्गीकृत वन 0.9 वर्ग किलोमीटर पर स्थित है मध्य प्रदेश में अवर्गीकृत वन कुल 1 क्षेत्र का 1.05 % पर आधारित है अवर्गीकृत बनो पर प्रशासन का ध्यान कम है इन वनों में पशुचारण की सुविधा है तथा इच्छा अनुसार बन काटे भी जा सकते हैं !

वन बृक्षों के आधार पर वनों का वर्गीकरण

1. सागौन वन- मध्यप्रदेश में सागवान के वन कुल वन क्षेत्रफल के 17.8% पर पाए जाते हैं सागौन वन जबलपुर होशंगाबाद बेतूल सागर छिंदवाड़ा और झाबुआ धार खंडवा जिले में स्थित है सागौन की लकड़ी इमारती उपयोग में आती है सागौन की लकड़ी से बना फर्नीचर हल्का और मजबूत होता है पता पूरे भारत में इस लकड़ी की मांग हैं !

2. सालवन- प्रदेश के कुल क्षेत्रफल के 16.54% क्षेत्र पर साल वन पाए जाते हैं साल की लकड़ी का उपयोग स्लीपर बनाने में किया जाता है साल वृक्ष का मध्य प्रदेश में प्रमुख क्षेत्र मंडला बालाघाट उमरिया सिंधी शहडोल है साल के वृक्ष पर आया घने होते हैं इन वनों में दिन में भी अंधेरा रहता है !

3. मिश्रित पर्णपाती वन- ये वन मुख्यता साज, धावडा, लडियां,बीजा,तेंदुआ, महुआ. बांध, पलाश, बबूल सनई,भिम्सा, अंजन, हर्रा,आदि वनोपज पैदा करते हैं मध्यप्रदेश में मिश्रित भिन्न मुख्यता बाला घाट होशंगाबाद मंडला एवं छिंदवाड़ा जिले में पाए जाते हैं !

जलवायु के आधार पर वनों के प्रकार

मध्यप्रदेश मानसूनी जलवायु वाला प्रदेश है मध्यप्रदेश में सामान्यता फंक्शन कटिबंधीय हैं इन दोनों को भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार तीन वर्गों में विभाजित किया गया है !

1. उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन-  यह 1 50 से 100 सेंटीमीटर वर्षा के क्षेत्र में पाए जाते हैं इस प्रकार के वन ग्रीष्म ऋतु में जल के अभाव के कारण पत्तियां गिरा देते हैं इन वनों में उत्तम इमारती लकड़ी पाई जाती है सागौन, शीशम .नीम पीपल आदि के वृक्ष इस वर्ग में आते हैं मध्यप्रदेश में उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों का विस्तार सागर, जबलपुर, छिंदवाड़ा ,दमोह, छतरपुर, पन्ना, बेतूल, सिवनी और होशंगाबाद जिले में पाया जाता है !

2. उष्णकटिबंधीय अर्ध पर्णपाती वन- यह 100 सेंटीमीटर से 150 सेंटीमीटर वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं मध्य प्रदेश के जिले मंडला बालाघाट सिन्धी और शहडोल में इन वनों का विस्तार है इन वनों में वीजा ,धारा,जामुन,महुआ सेजा,हर्रा,तिन्सा आदि के अतिरिक्त सागौन साल नीम आदि की भी बहुलता होती है !

3. उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन- यह वन 25 से 75 सेंटीमीटर वर्षा वाले स्थानों पर पाए जाते हैं इनमें सभी प्रकार के वृक्ष हैं इन वनों से हर्रा, कीकर, बबूल, पलाश .तेंदू. हल्दू,सिरिस आदि के वृक्ष पाए जाते हैं यह राज्य के श्योपुर, शिवपुरी, रतलाम,मंदसौर, नीमच, टीकमगढ़ दतिया ग्वालियर एवं खरगोन जिले में पाए जाते हैं !

मध्यप्रदेश मे वन संपदा 

वनो से प्रत्यक्ष लाभ 

  • बन बहुमूल्य लकड़ी का भंडार है वनों से राज्य सरकार को प्रतिवर्ष 50 करोड रुपए की आय प्राप्त होती है !
  • वन उत्तम चारागाह है इन से राज्य में पशुधन विकास में सहायता मिलती है !
  • वनों से अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां प्राप्त होती है जैन से प्रतिवर्ष राज्य को 5 करोड रुपए की आय प्राप्त होती है !
  • राज्य का 90% जलाने हेतु विधान वनों से प्राप्त किया जाता है !
  • जंगल में पाए जाने वाले जानवरों की खाल से प्रतिवर्ष 20 लाख रुपए की आय होती है !
  • वनों से प्राप्त चीड़ देवदार साल सागौन शीशम आदि लकड़ियां एवं अतिरिक्त गौण उत्पादनों से राज्य की सकल आय में 15% की बढ़ोतरी होती है !
  • प्रदेश के अनेक वन क्षेत्रों में पर्यटन स्थल विकसित किए गए हैं जो राज्य की आय का स्त्रोत है !
  • जो राज्य की जनजाति जनसंख्या को रोजगार एवं जीवकोपर्जन जंगलों से प्राप्त हुआ है !

वनों से अप्रत्यक्ष लाभ 

  • बनवार नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं वनों की सभ्यता के कारण तेज जल का प्रभाव शिथिल हो जाता है !
  • वन भूमि के कटाव को रोकने में काफी प्रभावशील सिद्ध हुए हैं !
  • राज्य में वनों की अधिकता के कारण जलवायु को सम बनाने में सहायता मिलती है !
  • वनों से गिरने वाली पत्तियां भूमि चोर भरता बनाने में सहायक सिद्ध हुई है !
  • वनों द्वारा अधिक वर्षा को आकर्षित करने एवं बाड़ की भयंकरता को कम कर अकाल की समस्या को भी कम किया जा सकता है !
  • बन प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ाने और पर्यावरण के संवर्धन में भी उपयोगी है !

वन संपत्ति 

वनसंपत्ती से मध्य प्रदेश सरकार को प्रतिवर्ष करो रुपए की आमदनी होती है वनों से प्राप्त होने वाली संविदा को दो भागों में बांटा जा सकता है !

1. मुख्य संपदा
2 गौंण संपदा

1. मुख्य संपदा 

वनों की मुख्य संपदा के अंतर्गत इमारती लकड़ी से प्राप्त होने वाले वन बृक्ष शामिल हैं जैसे सागोन,साल. हलदु,धौल, शीशम, सेमल आदि मध्य प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड रुपए की आय वनों द्वारा प्राप्त लकड़ियों से होती है !

  • सागौन- सागौन वन काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं सागौन बनो उसके लिए 75 से 125 सेंटीमीटर वर्षा पर्याप्त होती है सागौन की लकड़ी में एक ग्रेन होती है जिसके कारण सागौन की लकड़ी से बने समान में सुंदरता आ जाती है होशंगाबाद की बोरी घाटी में सर्वाधिक बहुतायत से सागोन वन पाए जाते हैं !
  • सालवन- मध्य प्रदेश के लाल और पीली मिट्टी वाले क्षेत्रों में साल वन पाए जाते हैं साल वनों के लिए औसत 125 सेंटीमीटर वर्षा वाला क्षेत्र चाहिए यह वन अधिक घने होते हैं साल की लकड़ी का निर्माण स्लीपर बनाने में किया जाता हैं !
  • बॉस- बॉस 75 सेंटीमीटर या अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में पाया जाता है मध्यप्रदेश में डैन्ट्रोकैलमस,स्ट्रीक्टस प्रकार का बास पाया जाता है मध्य प्रदेश में 50 लाख नेशनल टन बाँस का भंडार है बांस की लकड़ी से कागज का निर्माण भी किया जाता है ओरिएंट पेपर मिल अमलाई और नेपानगर अखबारी कागज के कारखाने में बांस का उपयोग किया जा रहा है !

2. गौण संपत्ति

गौण संपत्ति के अंतर्गत लॉक, तेंदूपत्ता कथा हर्रा विभिन्न प्रकार के गोंद दवाओं के लिए पौधे तथा विभिन्न प्रकार की घास प्रमुख है वस्तुओं के उत्पादन हेतु लाइसेंस उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिनसे वन विभाग निर्धारित शर्तों के साथ निश्चित धनराशि प्राप्त करता है वनों से प्राप्त होने वाले गौण उत्पादों पर कई उद्योग आधारित है !

  •  खैर वृक्ष- खैर वृक्ष का उपयोग कत्था बनाने में किया जाता है पाचन तंत्र की गड़बड़ियों में खैर के वृक्ष उपयोगी हैं जबलपुर सागर दमोह उमरिया और होशंगाबाद में खैर के वृक्ष पाए जाते हैं मध्यप्रदेश में शिवपुरी तथा बानमोर में कत्था बनाने का एक-एक कारखाना है इन कारखानों को शिवपुरी श्योपुर तथा गुना के वनों से खैर की लकड़ी प्राप्त होती है !
  • लाख= मध्य प्रदेश में प्रतिवर्ष 40000 टन लाख का उत्पादन होता है लाख मध्यप्रदेश में मंडला जबलपुर सिवनी शहडोल जिला होशंगाबाद के वनों में पाया जाता है मध्यप्रदेश में उमरिया में लाख बनाने का एक सरकारी कारखाना है इसके अतिरिक्त किसी अन्य कारखाने हैं जिनमें शीड लॉख और सेलाख बनता है !
  • हर्रा- मध्यप्रदेश में हरदा निकलने के अनेक कारखाने हैं हर र का प्रयोग चर्म शोधन में किया जाता है इससे चमड़ा साफ करने का एक लोशन बनाया जाता है हर्रा से 35 से 40% तक चर्म शोधन तत्व होते हैं हर्रा मुख्यता छिंदवाड़ा बालाघाट मंडला शिवपुर शहडोल के वनों से प्राप्त होता है !
  • तेंदूपत्ता- तेंदू पत्ते से बीड़ी बनाने का उद्योग मुख्यता सागर जबलपुर शहडोल एवं सिंधी दोगुना रीवा में स्केदीकृत है ! देश के बीड़ी पत्ता उत्पादन में लगभग 60% मध्यप्रदेश से प्राप्त होता है तेंदूपत्ता व्यवसाय में राज्य के 10 लाख आदिवासी मजदूर कार्य करते हैं 1988 से मध्यप्रदेश में तेंदूपत्ता के संदर्भ में नवीन नीति अपनाई गई जिसमें बिचौलियों के माध्यम से तेंदूपत्ता एवं अन्य वनोपज संग्रहण की प्रथा समाप्त कर दी गई !
  • भिलाला- भिलाला से स्याही और पेंट बनाने के काम में आता है छिंदवाड़ा में इसका एक कारखाना है !
  • गोंद- गौर साधारणता बबूल,धावड़ा सेनियल अदी वृक्षों से प्राप्त होता है खाने के अतिरिक्त गोंद का प्रयोग पेंट उद्योग पेपर प्रिंटिंग लघु उद्योग कॉस्मेटिक आदि में होता है !

वन अनुसंधान संस्थान एवं वन विद्यालय

भारत में फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट एंड कॉलेज देहरादून वन्य शोध और उपज प्रबंध संबंधी प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र है ! इस इंस्टिट्यूट तथा संबंधित विद्यालय के तत्वाधान में शोध विकास कार्य किया जाता है !

इस इंस्टिट्यूट के चारों क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में से एक मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित है इसका प्रशासनिक संचालन केंद्रीय कृषि और सिंचाई मंत्रालय द्वारा किया जाता है !

इस संस्थान में भूमि की प्रकृति के आधार पर पौधरोपण के परीक्षण हेतु भू संरक्षण, वन बनस्पति,वन प्रभाव एवं वनों की उपयोगिता के बारे में अनुसंधान किए जाते हैं !

मध्यप्रदेश में 1978 में स्वीडिश इंटरनेशनल डेवलपमेंट की सहायता से इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ फारेस्ट मैनेजमेंट की स्थापना की गई इसका एक क्षेत्रीय केंद्र भोपाल में स्थित है ! जिसमें भारतीय वन अधिकारियों को आधुनिक व्यापारिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है !

1979 में बालाघाट में वन राजिक महाविद्यालय स्थापित किया गया सन 1980 में दूसरा महाविद्यालय बेतूल में आरंभ किया गया 1 राज्य सेवा के लिए इन महाविद्यालय में 5 से 8 तथा वन क्षेत्र पालों के लिए 80 से 100 स्थान तक उपलब्ध होते हैं !

वनपालों में वन रक्षकों को स्थानीय वन विद्यालयों में प्रशिक्षण दिया जाता है यह वन विद्यालय शिवपूरी गोविंदगढ़ अमरकंटक एवं लखनादौन में स्थित है वन्य प्राणी संरक्षण हेतु कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में प्रशिक्षण की व्यवस्था है !

 वन विकास निगम 

मध्यप्रदेश वनों के संवर्धन एवं परिरक्षण के समायोजन हेतु सरकार ने 24 जुलाई 1975 में मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम की स्थापना की इस निगम के कार्य एवं उद्देश्य निम्नलिखित हैं !

  • वनोपज का आर्थिक दृष्टि से दोहन करना एवं सागोन बाँस जैसे उपयोगी प्रजातियों का वृक्षारोपण करना,वनो की वर्तमान फरकता में मात्रा और गुणवत्ता के अनुसार वृद्धि करना !
  • लुगदी पेपर तथा इससे संबंधित उद्योगों के लिए साधनों की व्यवस्था करना तथा उद्योगों के लिए उपयुक्त वनोपजों का वृक्षारोपण करना,पंप उद्योग इकाइयों से संबंधित वनोपज के प्रदाय की व्यवस्था करना !
  • कॉस्ट आधारित उद्योग के लिए साबुन वहां से एवं अन्य आवश्यक कच्चे माल का उत्पादन करना अथवा उत्पादन की व्यवस्था करना !

मध्य प्रदेश की नई वन नीति : 2005

4 अप्रैल 2005 को मध्य प्रदेश की नई वन नीति को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी प्रदान कर दी तथा इसे लागू करने को वन विभाग को अधिकृत कर दिया !

  • नई वन नीति का उद्देश्य प्रदेश के पारिस्थितिकीय आर्थिक सामाजिक और तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए वनों के संरक्षण संवर्धन और संवहनीय उपयोग के लिए युक्ति युक्त वैधानिक और संस्थागत ढांचे से वनों का प्रबंधन इस प्रकार करना है कि पर्यावरण सुरक्षा पारिस्थितिकीय संतुलन और भूजल संरक्षण के साथ-साथ आश्रित समुदायों की जरूरत की पूर्ति हो सके !
  • इससे बन संसाधनों के विकास के साथ-साथ इन समुदायों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकेगा और उनका आर्थिक एवं सामाजिक विकास सुनिश्चित हो सकेगा !
  • वन नीति में प्रवेश के उजड़े वनों को आवश्यकतानुसार उपचारित कर पुनः स्थापित करने राज्य की नदियों के जल से क्षेत्रों और विचरण के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में मृदा संरक्षण कार्य तथा जल ग्रहण क्षेत्र उपचार कर वृक्षआदि करने सड़को,रेल मार्ग किनारे तथा परती भूमि में रोपित वृक्षों के सुनिश्चित प्रबंधन तथा प्रतिष्ठानों पर वृक्षारोपण करने और शहरी क्षेत्रों में लागू डी प्रोटेक्शन एक्ट का विस्तार इन क्षेत्रों में भी करने, वन क्षेत्रों तथा वनों के बाहर के क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधानों के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकीय सुनिश्चित करने , और शहरी क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन एवं ग्राउंड वाटर डिस्चार्ज उनके लिए ग्रीन बेल्ट के विकास और विद्यमान ग्रीन बेल्ट के भूमि उपयोग का परिवर्तन नहीं करने का प्रावधान किया गया है !
  • स्मृति में वन भूमि पर गैर वानिकी कार्यों की अनुमति न देने और वनों में अवैध उत्खनन करने वालों के साथ ही इसके लिए प्रेरित करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की व्यवस्था की गई है !

नई वन नीति की अन्य प्रमुख बातें निम्नलिखित है !

  • अनियंत्रित चढ़ाई के नियंत्रण वन प्रबंधन इमारती लकड़ी जलाऊ लकड़ी बांस के उत्पादन आकाशीय वनोपज के उत्पादन सम्मानीय विदोहन मूल्य संवर्धन और सवनीय विदोहन करना !
  • लोकवाणी की कथा विस्तार वानिकी के तहत वृक्षारोपण को बढ़ावा देना !
  • वन आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करना !
  • संयुक्त वन प्रबंधन के लिए वनों की सीमा से 5 किलोमीटर की परिधि के अंदर सभी गांवों में ग्राम वासियों की समितियां गठित करने हेतु प्रोत्साहन देना !
  • स्थानीय लोगों की वन आधारित हो सकता हूं की पूर्ति के लिए प्रचलित निस्तार व्यवस्था को उपलब्धता एवं आवश्यकता के आधार पर पूरे वर्ष जारी रखने के अलावा वनों में गिरी पड़ी सुखी जलाऊ लकड़ी एवं वन सीमा पर 5 किलोमीटर की परिधि में स्थित ग्रामवासी को घरेलू उपयोग के लिए लेने की अनुमति प्रदान करना !
  • धनश्री समुदाय और भूमिहीनों के विकास तथा महिलाओं के सशक्तिकरण, जैव विविधता संरक्षण, वन्य प्राणी संरक्षण, इको टूरिज्म को प्रोत्साहित करना !
  • ? सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग अनुसंधान एवं विस्तार मानव संसाधन विकास वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से विभिन्न संचार माध्यमों का अधिकाधिक उपयोग कर व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करना !
  • वन क्षेत्र में शीघ्रातिशीघ्र व्यवस्थापन और सीमांकन तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की पहल के साथ सुरक्षा के लिए अवैध कटाई की रोकथाम और वन कर्मियों को पर्याप्त अधिकार देना !
  • संवेदनशील क्षेत्रों में पंचों की व्यवस्था विकसित पर समूह कश्ती का प्रयास और वन कर्मियों को शस्त्र उपलब्ध कराना !
  • वन सुरक्षा में स्थानीय समुदाय का अधिकाधिक सहयोग सुनिश्चित करने और वन अपराधियों के शीघ्र निराकरण के लिए जिला स्तर पर विशेष अदालतों की स्थापना करना !
  • उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में इससे पूर्व मध्य प्रदेश की 1952 की वन नीति लागू थी अनेक परिवर्तनों तथा राज्य की विशेषता भौगोलिक सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थिति की आवश्यकताओं के परीक्षेयमें इस नीति में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी !

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

 विष्णु गौर सीहोर, मध्यप्रदेश,  मुकेश जी लोधी,विदिशा

One thought on “Madhya Pradesh Forest Estates ( मध्यप्रदेश मे वन संपदा )”

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