6. संजय राष्ट्रीय उद्यान ( Sanjay National Park )

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संजय राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्थित है यह 466.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है ! संजय राष्ट्रीय उद्यान का कुछ भाग छत्तीसगढ़ में समाहित हो गया है हाल ही में इसे ?बाघ परियोजना में शामिल किया गया है !

इस राष्ट्रीय उद्यान मे ज्यादातर साल जंगलों से बना है।उद्यान मे बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांबर, जंगली सूअर, नीलगाय, चिंकारा, सिवेट, साही, गोह और पक्षियो के 309 प्रजातियाँ पयी जाती है। सबसे आकर्षक पक्षियों में गोल्डन हुडेड ओरियल, रैकेट पूंछ ड्रोंगो, भारतीय पित्त रूफुस-ट्रीपाइ, लेसर एडजुटेंट, लाल सिर वाला गिद्ध, सॅनरस गिद्ध, भारतीय सफेद पूंछ वाला गिद्ध, मिस्र का गिद्ध, नाईटजार्स और कई अन्य प्रजातियां हैं। 

7. माधव राष्ट्रीय उद्यान ( Madhav National Park )

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माधव राष्ट्रीय उद्यान’ मध्य प्रदेश के सबसे पुराने राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है। यह  शिवपुरी के उत्तर में स्थित है और पर्यटकों के लिए  वर्ष भर खुला रहता है ! माधव राष्ट्रीय उद्यान 337 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है !

माधव राष्ट्रीय उद्यान में जॉर्ज कैसल नामक भवन पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है ! या राष्ट्रीय उद्यान आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है

माधव राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार की पहाडियाँ, सूखे, मिश्रित और पतझड़ी वन और घास के बड़े मैदान झील के आस-पास हैं, जो अनेक प्रकार के वन्‍य जीवों का दृश्‍य उपलब्‍ध कराते हैं। अधिकांश जानवरों को बड़े आराम से इस उद्यान में घूमते हुए देखा जा सकता है, जैसे- छोटे चिंकारा, भारतीय गेजल और चीतलआदि।

‘माधव राष्ट्रीय उद्यान’ की स्थापना वर्ष  1958 में मध्य प्रदेश के राज्य बनने के साथ ही की गई थी। यह उद्यान मूल रूप से  ग्वालियर के महाराजा के लिए शाही शिकार का अभयारण्य था। इस उद्यान का कुल क्षेत्रफल 337 वर्ग कि.मी. है। ग्वालियर के माधवराव सिंधिया ने वर्ष  1918 में मनिहार नदी पर बांधों का निर्माण करते हुए सख्य सागर और माधव तालाब का निर्माण करवाया था, जो आज अन्य झरनों और नालों के साथ उद्यान के इकलौते बड़े जल निकाय हैं।

माधव राष्ट्रीय उद्यान को  1972 के ‘वन्‍य जीवन संरक्षण अधिनियम’ के तहत और भी अधिक सुरक्षित बनाया गया है। यहाँ की ऊंचाई 360-480 मीटर के आस-पास है।

माधव उद्यान में पाई जाने वाली प्रमुख प्रजातियाँ हिरण की हैं, जिसमें से अधिकांश जानवरों को बड़े आराम से घूमते देखा जा सकता है, जैसे- छोटे चिंकारा, भारतीय गेजल और चीतल। उद्यान में पाई जाने वाली अन्‍य प्रजातियाँ हैं-नील गाय, सांभर, चौंसिंघा या चार सींग वाला एंटीलॉप, ब्‍लैक बक, स्‍लॉथ बीयर, चीते और सभी जगह पाए जाते है !

माधव राष्ट्रीय उद्यान में कभी-कभी पेंथेरा ट्राइग्रिस, चीते, पेंथेरा पारडस, पट्टीदार हाइना,भेडिए (केनिस ओरियस) जंगली बिल्‍ली (फेलिस चौस), चीतल (एक्‍सिस एक्सिस), सांभर (सर्वस यूनिकलर), नील गाय, बोसेलेफस, ट्रेगोकेमेलस, चार सींग वाला एंटीलॉप, टेट्रासेरस क्‍वाड्रीकोर्निस, जंगली सुअर, सुस स्‍क्रोफा, चिंकारा (पर्वतीय गजेल), गजेला और घडियाल आदि भी पाये जाते हैं।

08. वन विहार राष्ट्रीय उद्यान ( Van Vihar National Park )

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‘वन विहार राष्ट्रीय उद्यान’ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक  तालाब के निकट पहाड़ी पर स्थित है। यह राष्ट्रीय उद्यान 4.45 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान को सन 1979 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया वन विहार राष्ट्रीय उद्यान नगरीय क्षेत्र के बीचों बीच स्थित मध्य प्रदेश का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है !

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में चिड़ियाघर प्रबंधन की आधुनिक अवधारणा के साथ शाकाहारी और मांसाहारी जीवों का ‘वन विहार राष्ट्रीय उद्यान’ प्राकृतिक निवास स्थान रहा है।

इस उद्यान में पाये जाने वाले मांसाहारी जानवरों में  बाघ, सफ़ेद बाघ, तेंदुआ, लकड़बग्घा और सुस्त भालू शामिल हैं।उद्यान के जंगली जानवरों को बड़े बाड़ों में कैद कर पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है। ‘वन विहार राष्ट्रीय उद्यान’ में  चीतल, सांभर, काले हिरण, नीले बैल, चौसिंघा, लंगूर, रेसस बंदर, साही, खरगोश जैसे जानवर आजादी से घूमते हुए देखे जा सकते हैं।

भोपाल स्थित इस राष्ट्रीय उद्यान में घड़ियाल,मगरमच्छ, कछुए और साँप की प्रजातियाँ भी पायी जाती हैं। सर्दियों के दौरान दक्षिण-पश्चिम सीमा पर ऊपरी घाटी में प्रवासी पक्षियों की कई किस्में दिखाई देती हैं।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान मे पक्षियों की लगभग दो सौ प्रजातियों को यहाँ उद्यान में देखा गया है। अक्सर देखे गए प्रवासी पक्षियों में पिनटेल, स्पॉट बिल, नंगे सिर वाले कलहंस, स्पुन बिल, चित्रित सारस, खुले चोंच वाला सारस और बैंगनी बगुला शामिल है

भोपाल के मध्य स्थान में बसा यह उद्यान रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से मात्र पाँच कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यह राष्ट्रीय उद्यान  वर्ष भर पर्यटकों के लिए खुला रहता है।

09. जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान ( Fossil National Park )

जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के  मंडला ज़िले में स्थित है। यह पौधों के जीवाश्म का राष्ट्रीय उद्यान है, जो ‘कान्हा राष्ट्रीय उद्यान’ और ‘बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान’ के बीच फैला हुआ है। जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान वर्ग 0.27 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है ! भारत में प्रमुख चार फॉसिल राष्ट्रीय उद्यान में से एक तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है !

जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान मंडला ज़िले में स्थित यह स्थान जीवाश्मों से समृद्ध है। यहाँ के जीवाश्म तकरीबन साठ लाख साल पुराने होने का अनुमान है। इन जीवाश्मों ने वनस्पति और जानवरों के जगत् की विकास प्रक्रिया के रहस्यों को प्रकट करने में काफ़ी मदद की है।

इस जीवाश्म उद्यान का प्रमुख स्थान ‘घुघ्वा’ है, जो 6.84 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है तथा तीन अन्य जुड़े स्थलों में- उमरिया-सिल्थेर (23.02 एकड़), देवरी खुर्द (16.53 एकड़) और बरबसपुर (21.35 एकड़) शामिल हैं।

यह स्थान बहुत बड़े जीवाश्म धड़, जीवाश्म फल और क्वार्ट्ज पत्थर की कई किस्मों से समृद्ध है। ‘घुघ्वा’ मे देखे गए हायफेनेड जीवाश्म, जो अभी भी अफ़्रीका महाद्वीप में रहते हैं, बताते हैं की किसी समय,भारत भी अफ़्रीका महाद्वीप का एक हिस्सा था। ‘घुघ्वा’ से चार कि.मी. दूर, उमरिया गाँव के निकट, उमरिया-सिल्थेर में अच्छी संख्या में जीवाश्म पाए जाते हैं। 

मंडला ज़िले में कई स्थानों पर जीवाश्म पाए गये हैं और इनमे डेक्कन अंतर-चट्टान की बनावट की श्रृंखला में वनस्पति शास्त्र से संबंधित प्राचीन अवशेष पाए गये हैं। इन जीवाश्मों ने हमेशा से हमारी पुरानी सभ्यता की वैज्ञानिक समझ बनाने में मदद की है।

10. ओमकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान ( Omkareshwar National Park )

ओम्कारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले में इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जलाशयों से घिरा  651 वर्ग कि.मी. का विशाल सघन वन क्षेत्र मे फैला हुआ है !

ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान,  दो वन्यप्राणी अभयारण्य , तथा दो संरक्षित इकाईयों के रूप में पर्यावरण पर्यटन के शोकीनों के लिये आकर्षण का केन्द्र बनने जा रहा है। यह वन क्षेत्र जहां विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों, बहुरंगी फूलों से लदी झाड़ियों, घास के हरे भरे मैदानों तथा बारहमासी कल कल बहते झरनों से भरा पड़ा है, वही इसमें विभिन्न प्रजातियों के वन्य जीवों को देखने का आनन्द लिया जा सकता है

राष्ट्रीय उद्यान का एक बड़ा आकर्षण बड़ी संख्या में खड़े अन्जन वृक्षें का विशाल समूह है जो वन रक्षा के लिये तैनात ब्लेक कमांण्डों बटालियन के तैनात होने का आभास होता है

ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान में इंदिरा सागर जलाशय से विस्थापित टाईगर, पेन्थर, निलगाय, सांभर, चीतल, चिंकारा बायसन जैसे वन्य जीवों का नया आवास ओंकारेश्वर राष्ट्रीय उद्यान देखे जा सकते हैं वन्य प्राणियों को सुरक्षित, प्राकृतिक और अनुकूल वातावरण देने संबंधी उपायों के साथ ही जलाशय के टापूओं पर विभिन्न पक्षी प्रजातियों को आकर्षित करने के उपाय भी किये जा रहे है।

11. डायनासोर जीवाश्म उद्यान (Dinosaur fossil garden )

डायनासोर जीवाश्म उद्यान मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर कुक्षी तहसील की बाग गुफाओं के करीब लगभग 108 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है !

डायनासोर जीवाश्म उद्यान में आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी में बताया गया है कि धार जिले के बाग क्षेत्र में वर्ष 2006 में डायनासोर के कम से कम 100 अंडे मिले थे जो दुर्लभ हैं।

अंडों के साथ डायनासोर के घरौंदे भी जीवाश्मकृत अवस्था में मिले हैं। इन जीवाश्मों को लगभग सात करोड़ वर्ष पुराना होने का अनुमान वैज्ञानिकों ने लगाया है।

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

विष्णु गौर सीहोर मध्यप्रदेश, मुकेश जी लोधी विदिशा , आदित्य जी बघेल सिवनी, रंजना जी सोलंकी,बड़वानी

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