Madhya Pradesh Painter

( मध्यप्रदेश के प्रमुख चित्रकार )

Vishnu Chincholkar ( विष्णु चिंचोलकर )

चित्रकला में आधुनिक प्रयोगों के लिए विष्णु चिंचोलकर अग्रणी रहे हैं उनका जन्म 1917 में देवास के पास एक गांव में हुआ था उन्होंने इंदौर स्कूल ऑफ आर्ट्स से विवीदवत शिक्षा ग्रहण की चित्र कला के क्षेत्र में प्रसिद्ध चित्रकार श्री देवलालीकर का भी मार्गदर्शन उन्हें प्राप्त हुआ वह मध्यप्रदेश के शीर्ष चित्रकारों में गिने जाते हैं

श्री चिंचोलकर लैंडस्केप पोर्ट्रेट बनाने में सिद्धहस्त माने गए हैं इस क्षेत्र में उन्होंने नवीन प्रयोग को भी किए हैं पेड़ की शाखाओं पत्तियों,बांस के टुकड़ों पत्थरों के टुकड़ों आम की गुठलियों आदि से भी उन्होंने कलात्मक वस्तुओं का निर्माण किया है उन्होंने कुछ समय माइकल ब्राउन के साथ भी काम किया 1964 में उन्होंने ग्रुप ग्रुप फ्राइडे के नाम से कलाकारों का एक ग्रुप बनाया 

Syed Haider Raza ( सैयद हैदर रजा ) 

श्री हैदर रजा का जन्म नरसिंहपुर जिले के बावरिया ग्राम में 1922 में हुआ था 1939 में उन्होंने दमोह से मैट्रिक परीक्षा पास की यहीं रहते हुए उन्होंने रामायण एवं गीता का भी अध्ययन किया सन 1939 में नागपुर में कला विश्वविद्यालय में प्रवेश किया उन्होंने मुंबई के जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स से भी शिक्षा प्राप्त की सन 1950 में उन्हें फ्रांसीसी छात्रवृत्ति प्राप्त हुई !

प्रारंभ में राजा ने प्राकृतिक दृश्यों का चित्रण किया धीरे-धीरे उन्होंने आंतरिक भागों को अपने कैनवास पर उतारा उनकी कला में पूर्व और पश्चिम का अद्भुत समन्वय है गहरे मखमली रंगों का ध्व्नयनात्मक प्रभाव उनकी कला की विशेषता है वे चटकदार और समृद्धि रंग योजना का प्रयोग करते हैं

उनके उल्लेखनीय क्षेत्रों में अटल शून्य की अनंत बिंदु, अनसुनी, आवाज, मां, राजस्थान,सफेद फूल, फर्टिलिटी,नाग,अंकुरण,स्पंद,इत्यादि है  1956 में इन्हें प्रोदिलाक्रिटिक पुरस्कार प्राप्त हुआ इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले बे अकेले गैर फ्रांसीसी व्यक्ति थे 1950 में उन्होंने फ्रांसीसी कलाकार जॉनी मेंजिला से विवाह कर लिया और फ्रांस में ही रहने लगे आप की गणना प्रथम पंक्ति के फ्रेंच कलाकारों की जाती है !

रजा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के बर्कले परिसर के कला विभाग में अतिथि प्रवक्ता भी रहे ! रजा ने भारत और पेरिस के अतिरिक्त अमेरिका जर्मनी इटली स्विजरलैंड एवं फ्रांस के अनेक शहरों में अपने चित्रों की प्रदर्शनी लगाई सन 1981 में भारत सरकार ने श्री रजा को पद्मश्री की उपाधि से विभूषित किया सन 1983 में ललित कला अकादमी ने उन्हें फेलो चुनाव 1992 में मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें कालिदास सम्मान से नवाजा !

Devyani krishna ( देवयानी कृष्ण )

इनका जन्म इंदौर में हुआ उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा श्री देवलालीकर से प्राप्त हुई 1940 में जे जे स्कूल ऑफ आर्ट टीचर डिप्लोमा प्राप्त किया देवयानी की कला कला संग्रहालय एवं प्रदर्शनियों के दौरान केवल कृष्ण से हुई और 1941 में दोनों ने विवाह कर लिया 1942 मैं दोनों ने एक संयुक्त चित्र प्रदर्शनी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में लगाई !

इन्होंने तिब्बत के प्रकृति एवं जन जीवन के चित्र बनाएं हैं 1946 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय चित्र प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ उन्होंने अपने पति के साथ नार्वे स्टॉकहोम, चेकोस्लोवाकिया, रोमानिया, हंगरी, स्वीडन,डेनमार्क, नीदरलैंड,जर्मनी,इटली, मियामी में एकल चित्र प्रदर्शनी लगाई देवयानी खिलौने भी बनाती थी यही कारण है कि उनके चित्रों में खिलौनों का भी प्रभाव दिखाई पड़ता है !

Narayan Shridhar Bendre ( नारायण श्रीधर बेंद्रे )

श्री बेंद्रे का जन्म इंदौर में 1910 को हुआ आगरा से स्नातक होने के बाद उन्हें चित्रकारी के क्षेत्र में प्रारंभिक मार्गदर्शन देवलालीकर जी से प्राप्त हुआ उन्होंने इंदौर कला शिक्षा संस्थान में भी शिक्षा ग्रहण की !

1934 में उन्हें जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स डिप्लोमा प्राप्त किया 3 वर्ष तक कश्मीर सरकार के विजिटर्स ब्यूरो में कलाकार पत्रकार के पद पर कार्य करते रहे अतिथि कलाकार के रूप में वे शांतिनिकेतन भी रहे चित्रकला के अध्ययन के लिए अमेरिका इंग्लैंड फ्रांस व हॉलैंड ग्ये न्यूयॉर्क में उन्हें अरमिन लैंडडेक से विधिवत कला तकनीकी सीखें !

उन्होंने प्राय सभी माध्यमों में कार्य किया किंतु उन्हें सर्वाधिक तेल चित्र ही बनाए हैं उन्होंने चित्रों में जल रंगों जैसी सफुर्ती और ओजस्विता दिखाई देती है काले रंग का उन्होंने संतुलन के साथ खुलकर प्रयोग किया

उनके उत्कृष्ट चित्रों में आवश्यकता से मुक्ति, पटना, आवास,दार्जिलिंग की चाय, बागवान में युक्ति,ग्रामीण जीवन आदि के अतिरिक्त कश्मीर की घाटी,नैनीताल की झील,अमरनाथ, हिमालय,प्रार्थना सभा में गांधी जी,बुद्ध पूजा,स्टेशन पर दो यात्री,बसंत, उमर, खैयाम की रुबाइयों आदि प्रसिद्ध है मैं अपने जीवन काल में लगभग 30 पुरस्कार प्राप्त हुए 1969 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री की उपाधि प्रादान की !

Maqbool Fida Hussein ( मकबूल फिदा हुसैन )

श्री हुसैन का जन्म महाराष्ट्र के सोलापुर में पंडरपुर नामक ग्राम में 1916 में हुआ था उनका जीवन होती है तो संघर्षशील रहा उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय इंदौर में गुजारा है इंदौर में ही देवलालीकर से उन्होंने चित्रकला की शिक्षा के बाद में से मुंबई आकर फिल्मों में होर्डिंग बनाने लगे किंतु उन्होंने अपने आपको चित्रकला की मुख्यधारा से जुड़े रखा 1950 में उनके चित्रों की एकल प्रदर्शनी लगी !

हुसैन साहब के संपूर्ण जीवन का प्रार्थमिक प्रतीक भारतीय स्त्री है जिसमें असीम करुणा और प्रेम है उन्होंने अनेक सुंदर पोर्ट्रेट तथा दृश्य चित्र बनाएं हुसैन साहब घोड़ों को रेखांकित करने वाले प्र ज्ञात कलाकार हैं घोड़ा तो उनका प्रतीक ही बन गया है गणेश जी उनके चित्रों के प्रिय विषय रहे हैं उन्होंने हाल ही में गज गामिनी नाम से चित्रों की श्रृंखला प्रकाशित की थी और एक फिल्म का निर्माण भी किया था श्री फु सेन को एक मनमौजी कलाकार के रूप में जाना जाता है जो की शैली में बने नहीं है और नितांत निधि ढंग से अपना कार्य करते हैं !

पद्मश्री पद्मभूषण एवं कालिदास सम्मान आदि अनेक विशिष्ट सम्मान से अलंकृत श्री हुसैन की ख्याति विश्वव्यापी है उनके अनेक प्रदर्शन या चीन अमेरिका इराक और यूरोपीय देश में लग चुकी है आजकल अपने कुछ चित्रों के कारण भी काफी चर्चा में है उन्होंने हैदराबाद में नए कलाकारों को प्रशिक्षित करने के लिए एक संस्था भी स्थापित की है !

Devakrishna Jaishankar Joshi ( देवकृष्ण जयशंकर जोशी )

श्री जोशी का जन्म 1911 में महेश्वर में हुआ था उन्होंने इंदौर कला विद्यालय में देवलालीकर से शिक्षा प्राप्त की श्री जोशी प्रभावशाली चित्रकला के बेजोड़ सर जप्त है उन्होंने लगभग 3000 क्षेत्रों तथा मूर्तियों का निर्माण किया कला क्षेत्र में उनका एक स्कूल भी है !

आप की प्रमुख कृतियां हैं -चूड़ियां खरीद की दुल्हन, लाल पगड़ी, साप्ताहिक, बाजार गोरी त्यौहार आदि 1984 में उनका देहांत हो गया उनकी कृतियां आज भी अनेक शासकीय एवं निजी संग्रहालय में देखी जा सकती है !

Lakshmi Shankar Rajput ( लक्ष्मी शंकर राजपूत )

श्री राजपूत का जन्म 1919 में इंदौर में हुआ था आपने इंदौर में श्री देवलालीकर से और मुंबई में जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स से कला की शिक्षा प्राप्त की आरंभ में श्री राजपूत ने एकेडमी पद्धति के चित्र बनाए किंतु बाद में उन्होंने प्रभाववादी को अपना लिया वर्ष आगमन उनका अत्यंत सुंदर और प्रसिद्ध क्षेत्र है जिस पर उन्हें बाड़ दा खेल पुरस्कार मिला था मध्य प्रदेश की झांकी पर भी उन्हें पुरस्कार प्राप्त हुआ !

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

विष्णु गौर सीहोर, मध्यप्रदेश