इस पोस्ट में हमने धरती के वीर पुत्र, स्वाभिमानी, अपने असूलों के मालिक, आवाम के दिलो के बादशाह, अपनी आन के पक्के और दौरे अजीम शख्शियत वीर शिरोमणि Maharana Pratap Singh से जुड़े कुछ अहम पहलुओं को सम्मिलित किया है जिन्होंने अपने राजपूती आन बान और शान के लिए अपना सर्वस्व जीवन न्यौछावर कर दिया

महाराणा प्रताप का जीवन परिचय

इनका जन्म 9 मई 1540 ईस्वी को कुंभलगढ़ के कटार गढ़ बादल महल में सिसोदिया राजपूतों के वंश में हुआ | लेकिन इनकी जयंती प्रतिवर्ष हिन्दू पंचाग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है Maharana Pratap Singh राणा उदय सिंह का जेष्ट पुत्र थे उनकी माता का नाम जयवंता बाई जो पाली नरेश अखेराज सोनगरा चौहान की पुत्री थी 

कहते है संतान की पहली गुरु मा होती है उसी का जीवंत उदाहरण महारानी जयवंता बाईसा है जिन्होंने बचपन से ही महाराणा प्रताप को ऐसे आदर्शों और संस्कारों से पोषित किया कि कुँवर प्रताप को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप बना दिया

कहते है पूत के पग पालने में ही दिख जाते है वैसे ही महाराणा प्रताप भी अपने बाल्यकाल में ही ढाल चलाना, तलवारबाजी, अन्य अस्त शस्त्र चलाने में महारथ हासिल कर लिया था पितातुल्य रावत चूडावत ने महाराणा प्रताप को हर कला और राजनीतिक कार्यो में निपुण बनाया

महाराणा प्रताप के गुरु आचार्य राघवेंद्र ने महाराणा प्रताप को सभी शस्त्रों, राजनीतिक और धार्मिक शिक्षा देकर एक महान शख्सियत बनाया और ये उनके जीवन पर्यंत राजनीतिक सलाहकार और सभा के अहम हिस्से थे

इनका विवाह बिजोलिया के सामंत राव माम्रव सिंह और हंसा बाई की पुत्री अजबदे पंवार से हुआ | अजयदे महाराणा प्रताप की सबसे प्रिय एवं मुख्य पत्नी थी ये वीर और अच्छी तलवारबाज होने के साथ साथ राजनीतिक मामलों में भी महाराणा प्रताप का सहयोग करती थी, इन्ही से 16 मार्च 1959 ईस्वी में अमर सिंह का जन्म हुआ, जो अपने पिता की तरह वीर पराक्रमी थे |

Maharana Pratap biography Questions Part 01st

महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक

राणा उदय सिंह की मृत्यु होली के दिन 28 फरवरी 1572 ईसवी को गोगुंदा में हुई राणा उदयसिंह की सबसे प्रिय पत्नी रानी धीर बाई जी बहुत ही महत्वाकांक्षी महिला थी वो शुरू से ही अपने पुत्र जगमाल को मेवाड़ के उत्तराधिकारी बनाना चाहती थी और राणा जी मृत्यु के पश्चात छल पूर्वक जगमाल को मेवाड़ के राजा बना दिया था

इस घटना के बाद महाराणा प्रताप अपने पूरे परिवार के साथ भीलराज राणा पुंजा के पास गोगुन्दा पहाड़ी जगलो में चले गए और गोगुन्दा महादेव जी बाबड़ी पर भील पुंजा सरदार ने 28 फरवरी 1572 ईसवी में अपना अंगूठा चिर कर रक्त से राजतिलक किया था

इधर जगमाल ने अकबर से हाथ मिला लिया था इसी के चलते रावत कृष्णदास चूंडावत, राजा रामशाह तोमर, रावत सांगा और प्रताप के मामा मानसिंह सोनगरा चौहान ने कुँवर प्रताप को मेवाड़ महाराणा बनाने बनाने का निर्णय लिया और जगमाल को मेवाड़ के सिंघासन से उतारकर 1 मार्च 1573 को पूरे विधिविधान के साथ कुंभलगढ़ दुर्ग में धूमधाम के साथ राज्याभिषेक किया गया

अकबर द्वारा महाराणा प्रताप को भेजे गए संधि प्रस्ताव

विश्व के प्रमुख युद्धों में हल्दीघाटी का युद्ध मे शुमार है युद्ध से पूर्व 1572 में अकबर ने अपने सामंत जलाल खान को महाराणा प्रताप के पास उसकी अधीनता स्वीकार ने के प्रस्ताव के साथ भेजा जिसे महाराणा प्रताप ने यह कहकर ठुकरा दिया कि बप्पा रावल के वंशज मातृभूमि से कभी कोई समझौता करने वाले नही है

उसके 4 माह बाद पुनः राजा मानसिंह को 1973 लेकिन वो भी असफल रहा और उसके बाद 1973 में भगवान दास को प्रताप को मनाने भेजा लेकिन उसकी भी दाल नही गल पाई  और अंत मे 25 दिसम्बर 1976 को अपने वित्त मंत्री टोडरमल को प्रताप के पास भेजा परंतु प्रताप ने अकबर की अधीनता स्वीकार करने से साफ मना कर दिया और कह दिया कि हम राजपूत युद्ध के लिए तैयार है लेकिन अपनी स्वतंत्रता के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे

Guhil-Sisodia Dynasty Part 3 ( मेवाड़ के गुहिल-सिसोदिया वंश )

हल्दीघाटी का युद्ध

जब अकबर के द्वारा किये गए सभी प्रयास विफल रहे तो उसने 80000 सैनिकों के साथ मानसिंह, अरशद खा और सलीम के साथ 3 अप्रैल 1976 को मेवाड़ पर आक्रमण के लिए भेज दिया 21 जून 1576 को Maharana Pratap Singh ( 20000 सैनिकों और भीलों के साथ) और अकबर के सेनापति मानसिंह के मध्य हुआ (कुछ इतिहासकार जैसे ए एल श्रीवास्तव इसकी तारीख 18 जून बताते है)

इस भयंकर युद्ध मे महाराणा प्रताप के वीर सैनिकों ने अकबर की विशाल सेना ने दांतो तले चने चब्बा दिए थे इस युद्ध मे एक मात्र मुगल और प्रताप के मित्र हाकिम खान सुर ने साथ दिया

इसी युद्ध मे महाराणा प्रताप के प्रिय घोड़े चेतक का पिछला पैर बुरी तरह से घायल हो गया और महाराणा प्रताप की अवस्था भी बहुत ही गंभीर हो चुकी थी उसी समय झाला मन्नाजी ने महाराणा प्रताप का मुकुट उन से ले लिया और उनको सौगंध देकर चले जाने को कहा

उधर महाराणा प्रताप के भाई शक्तिसिंह ये नजारा देखकर आत्मगिलानी से भर गया और उधर चेतक एक नाले को पार करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गया और उसी स्थान बाड़ोली में स्वामी भक्त चेतक की छतरी बनाई गई

इस युद्ध का कोई निर्णय नही निकला ना अकबर की जीत हुई ना महाराणा प्रताप की हार

हल्दीघाटी युद्व के बाद Maharana Pratap Singh का संघर्ष

हल्दीघाटी के युद्ध में हुई क्षति से महाराणा प्रताप के बहुत बढ़ा आघात था उधर अकबर ने मेवाड़ के बहुत से स्थानों पर अपना आधिपत्य कर लिया था महाराणा प्रताप जगलो में रहने लगे और घास की रोटी से अपना जीवन गुजराना शुरू किया

और साथ ही साथ मुगलों पंर छापामार आक्रमण करके परेशान करते रहे लेकिन धन के अभाव के चलते विकट समस्याओं का समाना करना पड़ रहा था इसी समय मेवाड़ के वित्त मंत्री और नगर सेठ भामाशाह जी अपनी सम्पूर्ण सम्पति 2 लाख सवर्ण मुद्राओं के साथ उपस्थित हुए और मेवाड़ की स्वतंत्रता की अरदास की

और आज भी मेवाड़ के उदारकर्ता के रूप में दानवीर शिरोमणि भामाशाह के नाम से पूजे जाते है भामाशाह मेवाड़ का द्वितीय उद्धारक है

दिवेर का युद्ध 1582 

मेवाड़ का मेराथन दिवेर का युद्ध राजसमंद 15 अक्टूबर 1582 अकबर के चाचा सेरमा सुल्तान खान और राणा प्रताप के मध्य हुआ जिसमें राणा प्रताप को विजय प्राप्त हुई इसी समय कमलमीर पर आक्रमण किया वहां का सेनानायक अब्दुल्ला मारा गया और  दुर्ग पर प्रताप का अधिकार हो गया थोड़े ही दिनों में एक के बाद एक करके प्रताप ने 32 दुर्गों पर अधिकार कर लिया और साथ ही साथ पुनः उदयपुर पर भी अपना अधिकार कर लिया

Maharana Pratap MCQ Questions

महाराणा प्रताप का निधन

1597 ईस्वी में धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते हुए Maharana Pratap Singh की चोट लगने से 19 जनवरी 1597 में चावंड में मृत्यु हो गई  महाराणा प्रताप की समाधि बाडोली में जो चावंड से से 11 मील दूर है जहां 8 खंभों की छतरी है

वीर महाराणा प्रताप से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  1. महाराणा प्रताप का घोड़ा -चेतक
  2. सेनापति – झाला बीदा
  3. हरावल- सेना हाकिम खान सूर
  4. भील सेना- पूंजा भील
  5. हाथी – रामप्रसाद, लुणा
  6. अकबर ने राम प्रसाद का नाम बदलकर पीर प्रसाद किया,
  7. चेतक के घायल होने पर झाला बीदा ने महाराणा प्रताप का राज तिलक धारण किया
  8. महाराणा प्रताप के सौतेले भाई शक्ति सिंह ने बलीचा में उनकी मदद की,
  9. अकबर ने उदयपुर को जीतकर उसका नाम मोहम्मदाबाद कर दिया

महाराणा प्रताप के बारे में ओर गहनता से पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करे

  1. महाराणा प्रताप ( PART 01 )
  2. वीर योद्धा महाराणा प्रताप ( PART 02 )

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