Table of Contents

राजस्थान की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएं

➡ बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना से तात्पर्य उन नदी घाटी परियोजनाओं से हैं जिनसे एक साथ कई उद्देश्य की पूर्ति होती है इन परियोजना से विभिन्न प्रकार के इतने अधिक लाभ मिलते हैं कि जिन के संदर्भ में स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि “यह परियोजनाएं मेरे लिए आधुनिक भारत के मंदिर और तीर्थ स्थल है।”

राजस्थान राज्य से संबंधित कुछ प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं निम्नलिखित है।

1. भाँखड़ा नांगल बहुउद्देशीय परियोजना-

  • ? यह भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है।
  • ? यह परियोजना राजस्थान पंजाब एवं हरियाणा की संयुक्त परियोजना है और तीनों के प्रयासों से बनी है।
  • ? इस परियोजना में राजस्थान का हिस्सा 15•2 % है।
  • ? बहुउद्देशीय परियोजना से राज्य के श्रीगंगानगर जिले को सर्वाधिक लाभ दिलाएं जिससे वहां के बंजर भूमि को कृषि योग्य भूमि में परिणत किया जा सका हैं।
  • ? इस परियोजना से विद्युत तैयार की जाती है नांगल विद्युत गृह से राजस्थान को विद्युत भी मिलती है राज्य के बीकानेर एवं रतनगढ़ शहर को इस परियोजना से विद्युत दी जाती है।

2. चंबल परियोजना –

  • ?चंबल परियोजना मध्य प्रदेश एवं राजस्थान राज्य की संयुक्त परियोजना है इस परियोजना के अंतर्गत राणा प्रताप सागर बांध गांधी सागर बांध तथा जवाहर सागर बांध का निर्माण किया गया इस परियोजना में मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्य का हिस्सा 50-50% है इस परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुर तहसील में चंबल नदी पर 1960 ईस्वी में गांधी सागर बांध बनाया गया इस बांधने एक कृत्रिम झील का निर्माण किया है जो 660 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है इस परियोजना का निर्माण तीन चरणों में किया गया
  • प्रथम चरण
    1.गांधी सागर बांध का निर्माण
    2.गांधी सागर विद्युत गृह का निर्माण
    3.कोटा सिंचाई बांध (कोटा बैराज) का निर्माण
    4.कोटा बैराज के दाएं तरफ नहर का निर्माण
  • द्वितीय चरण
    1.राणा प्रताप सागर बांध का निर्माण
    2.राणा प्रताप सागर विद्युत गृह का निर्माण
  • तृतीय चरण
  • 1.. जवाहर सागर बांध का निर्माण
    2..जवाहर सागर विद्युत गृह का निर्माण
  • ➡ प्रथम चरण का निर्माण 1964 ईस्वी में तथा द्वितीय चरण का निर्माण कार्य 1970 में पूर्ण हो गया तृतीय चरण का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है इस परियोजना से 386 मेगावाट विद्युत पैदा हो रही है

3. इंदिरा गांधी नहर परियोजना-

यह परियोजना विश्व की सबसे बड़ी (मानव निर्मित) सिंचाई परियोजना है। इसे राजस्थान की मरू गंगा व जीवन रेखा भी कहा जाता है यह परियोजना पूर्व में राजस्थान नहर परियोजना के नाम से जानी जाती थी

यह नहर पंजाब में सतलज एवं व्यास के संगम पर स्थित हरि के बांध से निकाली गई हरि के बांध से रामगढ़ तक इस नहर की लंबाई 449 किलोमीटर है इस परियोजना का शिलान्यास 20 मार्च,1958 को तत्कालीन गृहमंत्री श्री गोविन्द वल्लभ पंत ने किया

थार मरुस्थल की बेकार पड़ी उर्वरा शक्ति को सक्रिय करने के लिए बीकानेर रियासत के मुख्य अभियंता कंवर सेन ने हिमाचल के पानी को थार मरुस्थल तक लाने की अनुमति परियोजना का प्रारंभ 1949 में भारत सरकार को विचारार्थ रखा।

यही योजना इंदिरा गांधी नहर के लिए आधार बनी, यह परियोजना 2 नवंबर 1984 तक राजस्थान नहर परियोजना के नाम से विख्यात थी तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के निधन के बाद परियोजना का नाम बदलकर उनकी स्मृति में इंदिरा गांधी नहर परियोजना किया गया।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना एशिया की बड़ी मानव निर्मित नहर परियोजनाएं है इनकी गलती विश्व की सबसे लंबी वह बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाओं में होती है।

इस योजना के प्रमुख उद्देश्य मरुस्थल में सिंचाई माना एवं पशुओं के लिए पीने का पानी पशुपालन,वृक्षारोपण, विद्युत उत्पादन पर्यटन विकास ,मंडी विकास ,पशु चारा विकास आदि रखे गए हैं

इंदिरा गांधी नहर परियोजना से लाभान्वित जिलों में गंगानगर हनुमानगढ़ बीकानेर बाड़मेर जैसलमेर जोधपुर सम्मिलित है इन्दिरा गांधी नहर परियोजना में सर्वाधिक कमाण्ड क्षेत्र क्रमशः जैसलमेर व बीकानेर जिले का है।

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के दो भाग हैं- राजस्थान फीडर व मुख्य नहर

इस परियोजना को दो चरणों में बांटा गया है-

प्रथम चरण :- परियोजना के प्रथम चरण के अन्तर्गत 204 किमी. लम्बी राजस्थान फीडर नहर पंजाब के हरिकै बैराज से लेकर हनुमानगढ़ के पास मसीतावाली गांव तक बनाई गई। राजस्थान फीडर नहर की 170 किमी. लम्बाई पंजाब व हरियाणा में तथा शेष 34 किमी. राजस्थान में हैं।

इसके अलावा 189 किमी. मुख्य नहर मसीतावाली से लेकर छतरगढ़ तक तथा 3109 किमी. वितरिकाओं का निर्माण प्रथम चरण में किया गया। राजस्थान फीडर की गहराई 21 फीट व राजस्थान की सीमा पर फीडर के तले की चौड़ाई 134 फीट है। प्रथम चरण का समस्त कार्य 1992 में पूर्ण हो चुका है।

द्वितीय चरण :- परियोजना के द्वितीय चरण में 256 किमी. लम्बी मुख्य नहर (189 किमी. से 445 किमी. पूगल से जैसलमेर में मोहनगढ़ तक) तथा 5756 किमी. वितरिकाओं तथा 7 लिफ्ट नहरों के निर्माण का कार्य शामिल किया गया है।

द्वितीय चरण में वितरण प्रणाली की कुल प्रस्तावित लम्बाई 5959 किमी. है तथा कुल प्रस्तावित सिंचित क्षेत्र 14.10 हैक्टेयर है। 256 किमी. मुख्य नहर का निर्माण कार्य दिसंबर,1986 में सम्पन्न हुआ। 1 जनवरी, 1987 को मोहनगढ़ के समीप नहर के अंतिम छोर तक पानी पंहुच गया।

1998 से इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के द्वितीय चरण के अन्तर्गत वनारोपण व चरागाह विकास कार्यक्रम Overseas Economic Cooperation Fund ( OECF ) संस्था (जापान) के आर्थिक सहयोग से चलाया जा रहा है। इन्दिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में वृक्षारोपण कार्य के लिए वन सेना का गठन किया गया है।

4. जवाई बांध

  • पश्चिमी राजस्थान में लूनी की सहायक जवाई नदी पर एरिनपुरा के निकट जवाई बांध बनाया गया इससे से जोधपुर सुमेरपुर और पाली शहर को पेयजल आपूर्ति तथा पाली जालौर जिले में सिंचाई होती है।

5. माही बजाज सागर परियोजना-

  • यह परियोजना राजस्थान एवं गुजरात राज्य की संयुक्त परियोजना है इस परियोजना की नियम 1986 ईस्वी में तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने रखी थी योजना का नाम सुप्रसिद्ध स्वतंत्र सेनानी एवं राष्ट्रीय नेता जमना लाल बजाज के नाम पर रखा गया। अंतर्राज्जीय और बहुउद्देशीय माही बजाज सागर परियोजना मध्य प्रदेश और गुजरात की सीमा से लगे राजस्थान के दक्षिणी भाग में बांसवाड़ा जिले में स्थित है बहुउद्देशीय परियोजना का कार्य 1959-69 सन में प्रारंभ हुआ। इस परियोजना को वर्ष 1971 ईस्वी में केंद्रीय जल आयोग ने अपनी स्वीकृति प्रदान की अतः वास्तविक रूप से 1972 में इसका निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ।

6. जाखम सिंचाई परियोजना-

  • जाखम माही नदी की सहायक नदी है प्रतापगढ़ में जाखम नदी पर जाखम बांध बनाया गया इस सिंचाई परियोजना से उदयपुर चित्तौड़ प्रतापगढ़ में सिंचाई सुविधा मुहैया कराई जाती है।

7. बीसलपुर सिंचाई परियोजना-

  • टोंक जिले के बीसलपुर गांव में बनास नदी पर बांध का निर्माण किया गया,राजस्थान के जयपुर,अजमेर,ब्यावर, किशनगढ़, टोंक आदि की पेयजल और सिंचाई की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बीसलपुर परियोजना महत्वपूर्ण है।

8⃣ सोम,कमला-अम्बा सिंचाई परियोजना

  • दक्षिणी राजस्थान की जनजाति बहुल बांगड़ क्षेत्र की समृद्धि के लिए सोम कमला अंबा सिंचाई परियोजना भाग्य रेखा है सोम नदी पर कमला अंबा गांव के समीप बांध का निर्माण किया गया है इससे डूंगरपुर और उदयपुर के अनेक गांवों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है।

9⃣ मेजा बांध परियोजना-

  • भीलवाड़ा जिले में मांडलगढ़ तहसील के मेजा गांव के निकट कोठारी नदी पर मेजा बांध का निर्माण किया गया,मेजा बांध भीलवाड़ा का प्रमुख पेयजल स्रोत है भीलवाड़ा के आस-पास के गांव में सिंचाई सुविधा भी मुहैया होती है मेजा बांध क्षेत्र में गर्मियों में जल सूख जाने के कारण खीरा,ककड़ी, तरबूज, खरबूज की खेती होती है।

1⃣0⃣ सिद्धमुख परियोजना-

  • इस परियोजना से हनुमानगढ़ जिले की नोहर व भादरा तहसीलें तथा चुरू की तारानगर तथा सादुलपुर तहसीलों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है इस परियोजना में राजस्थान रावी, व्यास नदियों के अतिरिक्त पानी का उपयोग करेगा जो उसके हिस्से में दिसंबर 1981 में पंजाब हरियाणा और राजस्थान के बीच हुए एक समझौते के अंतर्गत मिला है।

1⃣1⃣नर्मदा परियोजना-

  • सरदार सरोवर नर्मदा परियोजना गुजरात राज्य की एक बड़ी परियोजना है नर्मदा जल में राजस्थान का भी हिस्सा है इस परियोजना से राजस्थान के जालौर बाड़मेर जिले के गांवों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है।

1⃣2⃣ जवाई बांध-

  • पश्चिम राजस्थान में लूनी की सहायक जवाई नदी पर एरिनपुरा के निकट जवाई बांध बनाया गया इस बाँध से जोधपुर,सुमेरपुर और पाली शहर को पेयजल आपूर्ति तथा पाली जालौर जिला में सिंचाई होती हैं।

1⃣3⃣ पाँचना परियोजना-

  • करौली जिले के गुड़ला गांव के समीप पांच नदियों यथा बरखेड़ा, भद्रावती,माची,भैसावट, अटा के संगम पर बांध बनाया गया,पांचना परियोजना से करौली जिले की टोडाभीम,नादौती, हिंडोन तथा सवाई माधोपुर में गंगापुर तहसील में सिंचाई सुविधा मुहैया है।

1⃣4⃣ मोरेल बांध-

  • यह बांध दौसा जिले के लालसोट कस्बे से 16 किलोमीटर दूर मोरेल नदी पर मिट्टी से बनाया गया है

1⃣5⃣ व्यास परियोजना-

  • यह पंजाब हरियाणा और राजस्थान की संयुक्त परियोजना है
  • इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य रावी,व्यास,सतलज नदियों के जल का उपयोग करना है राजस्थान में इस परियोजना से इंदिरा गांधी नहर परियोजना को स्थायी रूप से पानी की आपूर्ति की जाती है।
  • इस परियोजना के तीन चरण है प्रथम चरण में व्यास, सतलज लिंक नहर का निर्माण किया गया हैं। द्वितीय चरण में पोंग बांध की स्थापना की गई है। प्रथम चरण में सतलज लिंक नहर का निर्माण कार्य पंजाब के अंतर्गत हैं इससे राजस्थान को कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल रहा है द्वितीय चरण के अंतर्गत व्यास नदी पर पोंग नामक स्थान पर एक बांध एवं एक विद्युत गृह का निर्माण किया गया,जिससे राजस्थान को सिंचाई सुविधा हेतु जल एवं 150 मेगावाट विद्युत उपलब्ध कराई जा रही है।
  • राजस्थान को व्यास परियोजना से प्रत्यक्ष रुप से सिंचाई का लाभ तो नहीं मिल रहा है लेकिन इंदिरा गांधी नहर परियोजना को इससे स्थाई रूप से जल की आपूर्ति हो रही है इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य इंदिरा गांधी नहर को शीतकाल में जल की आपूर्ति निरंतर बनाए रखना है।

1⃣6⃣ पार्वती परियोजना-

  • इस परियोजना के अंतर्गत धौलपुर के निकट पार्वती नदी पर एक जलाशय का निर्माण किया गया, इस जलाशय का अपवाह क्षेत्र 795 वर्ग किलोमीटर है इससे एक नहर निकाली गई जिससे 35000 एकड़ भूमि की सिंचाई की जा रही है 1959 ईस्वी में आरंभ हुई इस परियोजना की मुख्य नहर की लंबाई 56 किलोमीटर है।

1⃣7⃣ ओरई परियोजना-

  • द्वितीय पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान चित्तौड़गढ़ जिले में ओरई नदी पर एक बांध का निर्माण किया गया इससे एक मुख्य नहर निकाली गई जिसकी लंबाई 34 किलोमीटर है इस परियोजना से चित्तौड़ भीलवाड़ा जिले में गेहूं गन्ना कपास तिलहन फसलों हेतु सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है इस बांध के निकट पर्यटन स्थल का विकास किया गया है।

1⃣8⃣सेई परियोजना-

  • यह परियोजना उदयपुर जिले के कोटडा तहसील में सेई बांध के पानी को जवाई नदी में मिलाने के लिए क्रियान्वित की गई इसके अंतर्गत सेई न के पानी को एक सुरंग के माध्यम से जवाई नदी में मिलाने का प्रावधान था

??????

मोरेल बांध (सवाई माधोपुर) गुड्डा बांध (बूंदी) बांकली बांध (जालौर,पाली)पार्वती बांध (धोलपुर) मेजा बांध (भीलवाड़ा) खारी बांध (आसींद के पास) पश्चिमी बनास योजना (सिरोही) गंभीरी योजना (चित्तौड़गढ़) बिलास सिंचाई योजना (कोटा) इंदिरा गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना (सवाई माधोपुर) पिप्पलाद लिफ्ट सिंचाई योजना (सवाई माधोपुर) सोम कमला अंबा सिंचाई योजना (डूंगरपुर) पांचना परियोजना (सवाई माधोपुर) बीसलपुर परियोजना (टोंक)।

Play Quiz

No of Questions – 46

[wp_quiz id=”1221″]

Specially thanks to Quiz and Post Makers ( With Regards )

चंद्रप्रकाश सोनी पाली, राजवीर प्रजापत, दिनेश मीना झालरा,टोंक, लोकेश कुमार, प्रकाश कुमावत, पूनम नेठराना, PRABHU DAYAL MUND,Ratangarh, P K Nagauri

Leave a Reply