1. गागरोण का साका 

  1. प्रथम 1423 में ई. में अचलदास खींची के शासन काल मे माण्डू के सुल्तान होशंगशाह के आक्रमण के समय हुआ था.
  2. 2 साका 1444 में माण्डू के सुल्तान महमुद ख़िलजी के आक्रमण के समय हुआ था।

2. रणथम्भौर का साका

1301 में अलाउदीन ख़िलजी के ऐतिहासिक आक्रमण के समय हुआ था. इसमें हम्मीरदेव चौहान विश्वास घात के कारण वीरगती को प्राप्त हुआ तथा उनकी पत्नी रंगा देवी ने जौहर किया था. यह राजस्थान का प्रथम जोहर कहलाता है।

3.जालोर का साका

कान्हड़देव के शासन काल मे 1311-12 में अलाउद्दीन ख़िलजी के आक्रमण के समय हुआ था.

1⃣ यह 1303 मे राणा रतन सिंह के शासन काल मे अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर आक्रमण के समय हुआ था।

2⃣1534 में राणा विक्रमादित्य के शासन काल मे गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के आक्रमण के समय हुआ इसमे रानी कर्मवती ने जोहर किया था।

3⃣ यह 1567 मैं राणा उदय सिंह के शासन काल मैं अकबर के आक्रमण के समय हुआ था जिसमें जयमल ओर फत्ता के नेतृत्व में चित्तौड़ कि सेना ने मुगल का जमकर मुकाबला किया और महिलाओं ने जोहर किया।

Question and Quiz

प्रश्न 01. राजस्थान में 1857 की क्रांति में कितनी सैनिक छावनियां थी वह नीमच छावनी का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर राजस्थान में 1857 में 6 सैनिक छावनियां थी व नीमच छावनी नेतृत्व हीरासिंह ने किया

प्रश्न 02  दुधवा खारा आंदोलन के बारे में बताइए ?
उत्तर  बीकानेर रियासत के (वर्तमान चूरू जिले के) दूधवाखारा व कांगड़ा गांव के किसानों ने जागीरदारों के अत्याचार एवं शोषण के विरुद्ध किसानों ने आंदोलन किया यही दुधवा खारा आंदोलन है

प्रश्न 3. राजस्थान में किस रियासत में ढाई साके हुए है और इन्हें ढाई साका क्यों कहा जाता है?
उत्तर राजस्थान में जैसलमेर में ढाई साके हुवे है,
ढाई साका इसलिए कहा जाता है क्योंकि जो तीसरा साका था उसमें वीरों ने केसरिया तो पहना लेकिन रानियों ने जौहर नहीं किया इसलिए इसे अर्द्ध साका ही कहा जाता है, ध्यातव्य है कि जिसमें वीर केसरिया पहनते हैं वह रानी जौहर करती है उसे शाका कहते हैं।

प्रश्न 04 डाबड़ा कांड के बारे में बताइए ?
उत्तर – 13 मार्च 1947 को डीडवाना परगना के डाबरा गांव में श्री मोतीलाल चौधरी के घर पर किसान सभा, मारवाड़ लोक परिषद की ओर से एक सम्मेलन बुलाया गया था। डाबड़ा के जागीरदारों ने उन पर लाठी, हथियारों से आक्रमण कर दिया व नेताओं की पिटाई की, इस कांड में चुन्नीलाल शर्मा रुधाराम, रामूराम, पन्नाराम व नंदराम किसान शहीद हो गए

प्रश्न 05 राजस्थान में हुए मीणा आंदोलन के बारे में विस्तार से बताईए?

उत्तर  राजस्थान में मीणा जाति के लोग बड़े मेहनती निष्ठावान व्यक्तित्व के धनी है। राजस्थान के कई भागों में शासन किया था लेकिन कालांतर में मीणाओं का शासन समाप्त हो जाने के कारण है अपनी आजीविका कमाने के लिए चोरी और लूटपाट करने लगे।
सन् 1924 के क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट तथा जयपुर राज्य के जयराम पेशा कानून 1930 के तहत है उन्हें जयराम पेशा मानकर सभी स्त्री-पुरुषों को रोजाना थाने पर उपस्थिति देने के लिए पाबंद किया। मीणा समाज ने इसका तीव्र विरोध किया। इसी के लिए मीणा जाति सुधार कमेटी एवं 1933 में मीणा क्षत्रिय महासभा का गठन किया |

जयपुर के जैन संत मगन सागर की अध्यक्षता में अप्रैल 1944 में मीणों का एक विशाल अधिवेशन है नीमकाथाना में हुआ, जहां पंडित बंशीधर शर्मा की अध्यक्षता में ‘राज्य मीणा सुधार समिति’ का गठन किया गया। इस समिति ने 1945 में जयराम पेशा कानून वापस लेने की मांग करते हुए समिति के संयुक्त मंत्री श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल के नेतृत्व में आंदोलन चलाया। जुलाई, 1946 में सरकार ने स्त्रियों बच्चों को पुलिस थाने में उपस्थितिदेने से मुक्त कर दिया। बाद में कभी भी अपराध नहीं करने वाले को जयराम पेशा कानून के तहत रजिस्टर में नाम दर्ज करवाने में सरकार ने छूट दी।

28 अक्टूबर 1946 को एक विशाल सम्मेलन बागावास में आयोजित कर चौकीदार मीणा ने स्वेच्छा से चौकीदारी के काम से इस्तीफा दिया तथा इस दिन को ‘मुक्ति दिवस’ के रुप में मनाया। मीणा द्वारा लगातार प्रयास करने पर सन 1952 में यह जयराम पेशा संबंधी काला कानून रद्द हुआ।

Q-6 गिरधारी पूरा गांव कांड के बारे में बताइए?
Ans- गिरधारीपुरा गांव का कांड बिजोलिया किसान आंदोलन से संबंधित है!
1897 के दौरान गिरधारीपुरा गांव के सरपंच गंगाराम धाकड़ के पिता मेहर जी धाकड़ का नुक्ता (मृत्युभोज) के दिन धाकड़ किसान एकत्रित हुए, और सभी किसानों ने निर्णय लिया कि ठाकुर कृष्ण सिंह की शिकायत मेवाड़ महाराणा फतहसिंह से करे नानजी पटेल और ठाकरे पटेल कृष्ण सिंह की शिकायत लेकर उदयपुर मेवाड़ पहुंचे महाराणा फतेह सिंह ने दोनों पटेल से मिलने से इंकार कर दिया उधर कृष्ण सिंह ने दोनों को बिजोलिया से हमेशा के लिए निष्कासित करवा दिया!

Q-7 कुशारियां कांड का वर्णन कीजिए?
Ans- कोसरिया किसानों से स्थानीय ठाकुर जबरदस्ती खेती करवाते थे! विजय सिंह पथिक के कहने पर इन किसानों ने इस्तीफे दे दिए, जबकि माणिक्य लाल वर्मा ऐसा नहीं चाहते थे और माणिक्य लाल वर्मा के अनुसार ठाकुर ने पड़ोस के गांव से मजदूर बुलाकर खेती प्रारंभ करवा दी, विजय सिंह पथिक अपने नैतिक हार समझते हुए आंदोलन से अलग हो गए!

Q-8 विजय सिंह पति के बारे में आप क्या जानते हैं?
Ans- विजय सिंह पथिक का मूल नाम भूप सिंह था यह gudavalli गांव, बुलंदशहर उत्तर प्रदेश से थे! विजय सिंह पथिक एक क्रांतिकारी विचारक थे! Yah गोपाल सिंह खरवा के साथ राजस्थान आए राजस्थान में अंग्रेजों के विरुद्ध गतिविधिय फैलाते हुए गिरफ्तार हो गए और उन्हें गिरफ्तार करके टॉडगढ़ जेल में डाल दिया गया यहां से भागकर चित्तौड़ के उमा जी खेड़ा गांव पहुंचे यहां पर इन्होंने विज्ञा प्रसारिणी सभा का गठन किया इस सभा के अध्यक्ष हरिभाऊ केलकर थे इसी सभा में बिजोलिया से निष्कासित सीताराम दास के मुलाकात विजय सिंह पथिक से हुई!

1916-17 के दौरान पथिक ने उपरमाल पंच बोर्ड की स्थापना की इस बोर्ड का अध्यक्ष श्री मन्ना पटेल को बनाया गया इसी बोर्ड के जरिए पथिक ने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए प्रताप नामक समाचार पत्र में क्रांतिकारी लेख छपवाए! यह समाचार पत्र हिंदी भाषा का साप्ताहिक समाचार पत्र था जो कानपुर उत्तर प्रदेश से प्रकाशित होता था इस पत्र के प्रधान संपादक गणेश शंकर विद्यार्थी थे

Q-9 बेंगू किसान आंदोलन का वर्णन कीजिए?
Ans-Bengu पहले भीलवाड़ा में आता था वर्तमान में चित्तौड़गढ़ में आता है इस किसान आंदोलन की शुरुआत मेनाल भेरुकुंड से हुई है! bengu में आंदोलन का नेतृत्व विजय सिंह पथिक के कहने पर रामनारायण चौधरी ने किया! 1921 में स्थानीय ठाकुर अनूप सिंह ने की जनता से 25 कर हटा लिए!

अंग्रेज अधिकारी ट्रेंस वह मेवाड़ ने बोल्शेविक समझौता कहकर अस्वीकार कर दिया और अमरचंद राणावत की नियुक्ति कर दी इसने 25 के बजाय 35 कर लगा दिए! इन उनके खिलाफ गोविंदपुरा गांव में किसान इकट्ठा हुए थे जहां घेरकर ट्रेंस के आदेश पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गई इसमें रूपा जी और कृपा जी धाकड़ शहीद हुए थे! यह घटना 13 जुलाई 1923 की है इस घटना की जांच के लिए ट्रेंस आयोग का गठन भी किया गया!

 

प्रश्न 10. चित्तोडगढ में कितने जोहर हुए वर्णन करो❓
चितौड़ में सर्वाधिक तीन साके हुए है।

प्रश्न 11 जैसलमेर के ढ़ाई साके से क्या तात्पर्य है?
उत्तर*जैसलमेर में ढाई साके होना माना जाता है क्योंकि इसके तीसरे साके वीरों ने केसरिया तो किया था किंतु जोहर नही हुआ इसलिए इसे आधा सा का माना जाता हैं
1 अलाउद्दीन ख़िलजी के आक्रमण के समय हुआ था.
2⃣यह फिरोजशाह तुगलक के आक्रमण के समय हुआ थ

1/2- यह लूणकरण के शासन काल मे कन्धार के शासक अमीर अली के आक्रमण के समय हुआ था।

 

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No of Question- 52

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Specially thanks to post Writer’s ( With Regards )

निर्मला कुमारी, प्रभुजी स्वामी चूरु, दुर्गेश कुमार मीणा, Phool chand ji

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