Management tasks- Corporate Governance and Social Responsibility ( प्रबंधन के कार्य- निगमित शासन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व )

प्रश्न-1 कारपोरेट गवर्नेंस अर्थात निगमित शासन क्या है ?
उत्तर- सन 1929 में न्यूयाँर्क शेयर बाजार में ऊभरी व्यवस्था जिसके तहत पूंजीवादी विचारधारा के विपरीत कंपनी नीति और कार्यप्रणाली में सामाजिक सुधार लाने की समर्थक विचारधारा जो सबके हित की रक्षा से संबंधित है

प्रश्न-2 कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता क्यों है ?
उत्तर- कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता है क्योंकि कारपोरेट जगत समाज में रहकर ही लाभार्जन करता है यह नैतिकता का प्रश्न है कि जिस समाज से कारपोरेट जगत लाभ अर्जित करता है उसके हित का भी ध्यान रखें दूसरा प्रशासनिक सुधार आयोग ने भी कारपोरेट जगत को सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने के लिए सुझाव दिया

प्रश्न-3 कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत कीजिए ?
उत्तर- कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के पक्ष में तर्क
1-अस्तित्व और विकास के लिए
2-उचित फर्म का दीर्घकालीन हित
3-सरकारी विनियमन से बचाव
4-समाज का रखरखाव
5-व्यवसाय में संसाधनों की उपलब्धता
6-समस्याओं का लाभकारी अवसरों में रूपांतरण
7-व्यापारिक गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण
8-सामाजिक समस्याओं के लिए व्यवसाय उत्तरदाई

सामाजिक उत्तरदायित्व के विपक्ष में मुख्य तर्क
1-अधिकतम लाभ उद्देश्य पर अतिक्रमण
2-उपभोक्ताओं पर भार
3-सामाजिक दक्षता की कमी
4-विशाल जनसमर्थन का अभाव

प्रश-4 निगमित शासन के सिद्धांतों का उल्लेख करो ?
उत्तर- निगमित शासन सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के लिए लागू होता है
कारपोरेट गवर्नेंस के लिए निम्नांकित सिद्धांतों का पालन करना होगा—
1⃣शेयरधारकों के अधिकार का सिद्धांत– शेयर धारको को सूचना और लाभ में हिस्से का अधिकार होना चाहिए

2⃣शेयर धारकों के साथ समान व्यवहार का सिद्धांत– सभी वर्गों के शेयर धारकों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए

3⃣प्रकटीकरण और पारदर्शिता का सिद्धांत– उपक्रम संबंधित सभी सूचनाएं जो शेयरधारकों के हिस्से संबंधित होती है का प्रकटीकरण किया जाना चाहिए

4⃣निदेशक मंडलों के उत्तरदायित्व का सिद्धांत– निदेशक मंडल सशक्त और महत्वपूर्ण इकाई है जो नीतिगत निर्णय से उपक्रम की कार्यप्रणाली .छवि ,निष्पादन और कार्यकुशलता को प्रभावित करता है अतः निदेशक मंडल की उपक्रम और शेयरधारकों के प्रति जवाब देयता होनी चाहिए

प्रश्न-5 निगमित शासन क्या है इसके विकास को किस प्रकार बल प्राप्त हुआ ?
उत्तर- 21वी शताब्दी में जब वैश्विक व्यवस्था एकीकृत हो रही है जब प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था का प्रभाव संपूर्ण विश्व पर पड़ता है प्रभावितों में कामगार ,संचालक ,सरकार आदि के हित जुड़े होते हैं तो प्रशासन में पारदर्शिता जवाब देयता और सामाजिक उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाना आवश्यक है इस संदर्भ में पूंजीवादी धारणा के विपरीत बड़े व्यवसाय के अंतर्गत सर्वहित सुरक्षा हेतु कारपोरेट गवर्नेंस को लागू किया जाना अपेक्षित है

विकास यात्रा- यह विचार सन 1929 में न्यूयॉर्क शेयर बाजार धराशायी होने के दौरान आया कारपोरेट घरानों में उतार-चढ़ाव आया बहुतायत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों बाजारों में आई सन 1939 से 42 के द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान बाजार में विचलन बड़ा विकसित राष्ट्र की नामी गिरामी कंपनियों चपेट में आई उनके प्रबंध के स्तर में फेरबदल किया गया परिणाम अर्थव्यवस्था को जनहित के सापेक्ष स्थापित करने के लिए निगमित प्रशासन की आवश्यकता को महसूस किया गया इसी संदर्भ में UK में लंदन स्टॉक एक्सचेंज की विभिन्न रिपोर्टिंग काउंसिल ने कैडबरी की अध्यक्षता में निगमित प्रशासन का वित्तीय परिप्रेक्ष्य विषय पर समिति का गठन किया गया ऐसे ही प्रयास पूर्वी एशियाई देशों यूरोपीय देशों में हुए वर्ष 1998- 99 में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ने भी निगमित प्रशासन विषय पर सिद्धांतों को प्रस्तुत किया जिन्हें 2004 में पुनः संशोधित किया गया

इसके उपरांत निगमित प्रशासन के प्रयास 1997 में भारतीय उद्योग संघ और विनिवेश आयोग 1998-99 में सेबी तथा निजी क्षेत्र की कंपनियों के प्रयास के बाद वर्ष 2000 के दशक में विभिन्न व्यवसायिक घोटालों के परिपेक्ष्य में भारतीय पूर्व विदेश सचिव नरेश चंद्र की अध्यक्षता में कारपोरेट ऑडिट एंड गवर्नर समिति का गठन किया गया जिसकी रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की गई
इन प्रयासों से वर्ष 1998 में यूएस में रिबन की अध्यक्षता में निर्मित प्रशासन के अंकेक्षण की प्रभावशीलता को बढ़ाने संबंधी समिति का गठन किया और निगमित प्रशासन के संबंध में प्रथम कानून बनाने की वकालत की गई जिसका परिणाम वर्ष 2002 में निगमित प्रशासन के प्रति विश्वास जाहिर करने के लिए सर्बनेस- आँक्सले अधिनियम पारित किया गया

प्रश्न-6 निर्देशन प्रबंध का एक कार्य ,कार्य है कैसे स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर- प्रबंधक निर्देशक द्वारा कार्मिकों के वैयक्तिक प्रयासों और संगठनात्मक लक्ष्यों को समाकलित करता है और कार्य की सफलता सुनिश्चित करता है अतः यह प्रबंध का कार्यकारी दायित्व है!

प्रश्न-7 प्रबंध स्तर के आधार पर नियोजन के प्रकार बताइए ?
उत्तर- प्रबंध स्तर के आधार पर नियोजन के तीन प्रकार होते हैं
1-उच्च स्तरीय नियोजन
2-मध्य स्तरीय नियोजन
3-निम्न स्तरीय नियोजन

प्रश्न-8 नियोजन एक बौद्धिक प्रक्रिया है स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर- नियोजन के अंतर्गत लक्ष्यों का निर्धारण और उनकी प्राप्ति के संदर्भ में अनेक क्रियाएं निष्पादित करनी पड़ती हैं
जैसे–विभिन्न प्रकार के तथ्य आंकड़े और सूचनाओं का संकलन और उनका विश्लेषण करना होता है वर्तमान और भावी आवष्यकताओं का तुलनात्मक अध्ययन और विश्लेषण, विभिन्न विकल्पों की खोज और उनका विश्लेषण किया जाता है और सर्वश्रेष्ठ विकल्प का चुनाव किया जाता है जिसके लिए विवेक, दूरदर्शिता और चिंतन अपेक्षित होता है अतः उक्त सभी क्रियाएं मानसिक होने के कारण नियोजन एक बौद्धिक प्रक्रिया है

प्रश्न-9 समन्वय प्रबंध का कार्य नहीं है टिप्पणी कीजिए ?
उत्तर- समन्वय प्रबंध का पृथक कार्य नहीं है यह प्रबंध के प्रत्येक कार्य में अंतर्निहित होता है जैसे

1-नियोजन कार्य में विभिन्न इकाइयों की योजना और कार्यक्रमों तथा उद्देश्य व संसाधनों के मध्य समन्वय स्थापित किया जाता है,
2-संगठन निर्माण के अंतर्गत इकाइयों कार्य और कार्मिक व उनके अधिकारों के मध्य समन्वय किया जाता है
3-स्टाफिंग में सही स्थान पर सही व्यक्ति की नियुक्ति हेतु कार्मिकों की आवश्यकता व योग्यता भर्ती प्रशिक्षण इत्यादि गतिविधियों में समन्वय का होना आवश्यक है

प्रश्न-10 प्रबंध के कार्य की संक्षिप्त में विवेचना कीजिए ?
उत्तर-5..प्रबंध के कार्य के संबंध में विद्वानों में वैचारिक भिन्नता पाई जाती है आधुनिक प्रबंध के जनक फ्रांसीसी हेनरी फेयोल द्वारा अपनी कृति General & Industrial Manegement में प्रबंध के पांच कार्य हैं POCCoc (Planning, Organising, Commanding, Co-Ordinating,& Controlling) का उल्लेख किया जबकि गुलिक और उर्विक प्रबंध के कार्य को को POSDCORBसमाहित करते हैं

प्रबंध कार्य की विवेचना निम्न प्रकार से है—

1⃣ नियोजन- यह प्रबंध का आधारभूत और सर्वव्यापी प्रकृति का कार्य है नियोजन कार्य निष्पादन से पूर्व सोचने और रूपरेखा बनाने संबंधी कार्य है इसके अंतर्गत यह निर्धारित किया जाता है कि क्या, कैसे ,किससे और कब करना है इसके अंतर्गत उद्देश्यों का निर्धारण उद्देश्य प्राप्ति हेतु व्यूह रचना और कार्य निष्पादन तरीकों और कार्य से संबंधित नीतियों कार्य विधियों पद्धति इत्यादि को निर्धारित व निर्मित किया जाता है

2⃣ संगठन- इसके अंतर्गत निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु मानवीय और भौतिक संसाधनों की प्राप्ति तथा इन संसाधनों के मध्य संबंधों का एक ढांचा तैयार किया जाता है इसमें उद्देश्य पूर्ति की क्रियाओं की पहचान और उनका समूहीकरण, कार्मिकों के मध्य कार्यों का आवंटन और तदनुरूप अधिकार सत्ता और संसाधनों का आवंटन तथा कार्मिकों के मध्य संबंधों (उच्चस्थ -अधीनस्थ) का निर्धारण किया जाता है

3⃣ निर्देशन-निर्देशन कार्य द्वारा प्रबंध आवश्यक निर्देश जारी कर कार्मिकों को निर्धारित कार्य के निष्पादन के लिए प्रेरित करता है और उनका मार्गदर्शन व नेतृत्व करता है साथ ही उनके मनोबल को बनाए रखने का प्रयास करता है यह एक व्यापक प्रकृति का कार्य है इसके अंतर्गत संप्रेषण, पर्यवेक्षण ,अभिप्रेरण, इत्यादि कार्य सम्मिलित किए जाते हैं

4⃣ नियुक्तिकरण- नियुक्तिकरण प्रबंधन का कार्य फलन है इसके अंतर्गत मानव संसाधनों (कार्मिको) की आवश्यकता का अनुमान लगाया जाता है इसके बाद कार्मिकों की भर्ती ,चयन ,प्रशिक्षण कार्य निष्पादन ,मूल्यांकन ,पारिश्रमिक का भुगतान पदोन्नति ,वृति विकास इत्यादि कार्य किए जाते हैं सही व्यक्ति का चयन कर उसे उपयुक्त कार्य देना सफल नियुक्तिकरण का आधार माना जाता है

5⃣नियंत्रण– नियंत्रण कार्य में कार्य का निष्पादन निर्धारित मानकों के अनुसार सुनिश्चित किया जाता है इसके अंतर्गत यह देखा जाता है कि कार्य निर्धारित मानक और प्रक्रियाओं के अनुसार हो रहा है अथवा नहीं साथ ही यदि कोई विचलन(त्रुटि) हो तो उसे दूर करने के लिए सुधारात्मक कार्यवाही की जाती है

6⃣ निर्णयन- किसी कार्य के संबंध में उपलब्ध विभिन्न विकल्पों की लागत और लाभ के आधार पर तुलना करके सर्वश्रेष्ठ विकल्प का चयन करना निर्णयन है इसे नियोजन के उप कार्य के रूप में स्वीकार किया जाता है

7⃣ नवप्रवर्तन- नवीन विचारों, नवीन कार्यपद्धती और नवीन प्रणालियों को अपनाना नवप्रवर्तन है यह भी नियोजन कार्य से संबंधित कार्य के रूप में स्वीकार किया जाता है

8⃣ संप्रेषण- विचारों और संदेशों का दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य विनिमय और विचारों की समझ ही संप्रेषण है संप्रेषण कार्य द्वारा प्रबंधक अधीनस्थों को कार्य निष्पादन के संबंध में आदेश निर्देश देता है संप्रेषण को पृथक कार्य रूप में स्वीकार नहीं किया जाता बल्कि इसे निर्देशन का ही एक अभिन्न अंग माना जाता है

9⃣ अभिप्रेरण- अभिप्रेरण व्यक्ति में निहित आंतरिक और मनोवैज्ञानिक वें इच्छाएं और भावनाएं हैं जो उसे कार्य करने के लिए प्रेरित करती है प्रबंधक कार्मिकों को वित्तीय (मौद्रिक) और गैर वित्तीय (अमौद्रिक) साधनों से कार्य करने के लिए प्रेरित करता है अभिप्रेरण को निर्देशन कार्य में अंतर्निहित भाग के रूप में स्वीकार किया जाता है

? पर्यवेक्षण- प्रबंधक पर्यवेक्षण कार्य के अंतर्गत कार्मिकों के कार्यों का निरीक्षण करता है साथ ही उन्हें कार्य के संबंध में मार्गदर्शन परामर्श और सलाह देता है,इसे निर्देशन की विधि के रूप में स्वीकार किया जाता है

1⃣1⃣ प्रतिवेदन- प्रबंधन का इस कार्य के अंतर्गत अधीनस्थों के कार्यों का निरीक्षण कर के कार्य निष्पादन की वास्तविक स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत कराता है इसे नियंत्रण का ही एक भाग माना जाता है

1⃣2⃣ समन्वय- समन्वय प्रबंध का सार है विभिन्न सांगठनिक इकाइयों और कार्मिकों के मध्य अतिराव,दुहराव और संघर्ष को रोकने तथा सहयोग और सामंजस्य स्थापित करना प्रबंध का महत्वपूर्ण कार्य है।

 

Specially thanks to ✍ ममता शर्मा (With Regards )

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