Mughal Empire-Aurangzeb and other rulers

( औरगंजेब और अन्य मुगल शासक )

औरंगजेब का जन्म 1618 ई. में उज्जैन के निकट ‘ दोहद ‘नामक स्थान पर मुमताज महल के गर्भ से हुआ था । लेकिन औरंगजेब का अधिकांश बचपन नूरजहाँ के पास बीता

पिता- शाहजहां, माता- मुमताज महल

औरंगजेब का विवाह फारस के राजघराने के शाहनवाज की पुत्री दिलरस बानो बेगम (राबिया- उद् -दोरानी )से हुआ था । औरंगजेब की पुत्री का नाम मेहरून्निसा था ।

औरंगजेब दक्षिण का सूबेदार दो बार नियुक्त हुआ था
पहली बार -1636 -1644 ई. ।
दूसरी बार -1652 -1657 ई. ।

वह गुजरात, मुल्तान व सिन्ध का गवर्नर भी रहा । औरंगजेब का पहला युद्ध ओरछा के जुझार सिंह के विरूद्ध हुआ था । औरंगजेब का राज्याभिषेक दो बार हुआ था

  1. सामूगढ़ के युद्ध के बाद 1658 में आगरा में
  2. दौराई के युद्ध के बाद 1659 में दिल्ली में।

औरंगजेब ने 1659 ई. में राज्याभिषेक के समय औरंगजेब ने ‘अब्दुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब बहादुर आलमगीर पादशाह गाजी ‘की उपाधि धारण की

औरंगजेब ने जहाँआरा को ‘साहिबत -उज् -जमानी ‘की उपाधि प्रदान की

औरंगजेब ने

1. दरबारी संगीत पर प्रतिबन्ध लगाया
2. संगीत विभाग व इतिहास विभाग को समाप्त किया।
3. औरंगजेब के काल मे संगीत पर सर्वाधिक फ़ारसी भाषा में पुस्तकें लिखी गई।

औरंगजेब ने 1679 ई. में पुनः जजिया कर तथा तीर्थ कर लगाया। 1699 ई. में औरंगजेब ने मराठों के साथ चल रहे युद्ध को धर्मयुद्ध की संज्ञा दी। सिक्ख विद्रोह औरंगजेब के काल में एक मात्र विद्रोह था जो धार्मिक कारणों से हुआ। सिक्खो ने औरंगजेब के विरूद्ध सबसे अंत मे विद्रोह किया।

औरंगजेब को इस्लामिक कट्टरता के कारण जिन्दापीर और सादगी पूर्ण जीवन के कारण ‘शाह दरवेश’ कहा जाता था। मिर्जा मुहम्मद काजिम औरंगजेब के समय प्रथम व अंतिम सरकारी इतिहासकार।

औरंगजेब द्वारा औरंगाबाद में अपनी बेगम ‘राबिया दुर्रानी’ की स्मृति में निर्मित इसे बीबी का मकबरा व द्वितीय ताजमहल भी कहा जाता है।

औरंगज़ेब के शासन में मुग़ल साम्राज्य अपने विस्तार के चरमोत्कर्ष पर पहुंचा। वो अपने समय का शायद सबसे धनी और शातिशाली व्यक्ति था जिसने अपने जीवनकाल में दक्षिण भारत में प्राप्त विजयों के जरिये मुग़ल साम्राज्य को साढ़े बारह लाख वर्ग मील में फैलाया और 15 करोड़ लोगों पर शासन किया जो की दुनिया की आबादी का 1/8 था।

औरंगज़ेब ने पूरे साम्राज्य पर फ़तवा-ए-आलमगीरी (शरियत या इस्लामी क़ानून पर आधारित) लागू किया और कुछ समय के लिए ग़ैर-मुस्लिमों पर अतिरिक्त कर भी लगाया। ग़ैर-मुसलमान जनता पर शरियत लागू करने वाला वो पहला मुसलमान शासक था।

मुग़ल शासनकाल में उनके शासन काल में उसके दरबारियों में सबसे ज्यादा हिन्दु थे। और सिखों के गुरु तेग़ बहादुर को दाराशिकोह के साथ मिलकर बग़ावत के जुर्म में मृत्युदंड दिया गया था।

मुहतसिब – औरंगजेब द्वारा इस्लाम के प्रचार के लिए नियुक्त अधिकारी।

विजयें

बीजापुर (1686):– बीजापुर के शासक सिकन्दर आदिलशाह ने आत्म समर्पण कर दिया इसे खान की उपाधि दी गई।

गोलकुण्डा (1687):- यहाँ का सुल्तान अबुल हसन कुतुबशाह था। उसने शासन की जिम्मेदारी मदन्ना एवं अकन्ना नामक ब्राहमण को सौंप दी थी।

औरंगजेब की दक्षिण नीति के परिणाम

  • दक्षिण के शिया राज्यो का विनाश अनुचित।
  • मुगलो की आर्थिक स्थिति का शोचनीय होना।
  • कृषि, वाणिज्य-व्यापार औऱ उद्योगों को भारी क्षति।
  • सेनिको और जमीदरो कि लूटपाट ।
  • उतरी भारत मे अशान्ति अराजकता औऱ विद्रोह ।
  • मुगल सेना में असंतोष कानून और शांति व्यवस्था का विहंग होना ।
  • मुगल प्रतिष्ठा को गहरा आघात ।
  • भारतीय संस्कृति और कला का हास् ।
  • कृषको और साधारण जनता की विकट समस्या ।
  • मुगल सम्राज्य के पतन के उत्तरदायी कारण।

ओरंगजेब द्वारा गोलकुंडा पर आक्रमण के कारण

  • गोलकुंडा के सुल्तान बीजापुर की सहायता करते थे ।
  • गोलकुंडा एक धन सम्पन्न राज्य था यहाँ हिरे जवाहरात की खाने थी।

मुगल दरबार मे दलबंदी के प्रमुख नेताओं एवं अमीरों के नाम।

  • जुल्फिकार खा,।
  • गाजीउद्दीन फिरोज।
  • जंगचिंकूलीच खा,।
  • मुनीम खा,।

ओरंगजेब के समय हुए प्रमुख विद्रोह

1. जाटो का विद्रोह

  • ओरंगजेब वके खिलाफ पहला संघठित विद्रोह मथुरा-आगरा व दिल्ली के आस पास बसे जाटो ने किया। जाटो ने आर्थिक कारणों से विद्रोह किया।
  • जाट विद्रोह की शुरुआत 1669 ई में मथुरा के पास तिलपत के जाट जमीदार गोकुला के नेतृत्व में हुई।
  •  जाट विद्रोह को सतनामियों ने भी समर्थन दिया।
  • 1686 में जाटों ने पुनः विद्रोह कर दिया इस बार नेतृत्व की बागडोर राजाराम एवं रामचिरा ने सम्भाली राजाराम ने मुगल सेनापति युगीर खाँ की हत्या कर दी तथा 1688 ई0 में अकबर के मकबरे में लूटपाट की।
  • मनूची ने लिखा है कि ’’राजाराम ने अकबर के मकबरे को खोदकर जला दिया’’
    • औरंगजेब के पौत्र बीदर बक्श और आमेर नरेश विशन सिंह ने राजाराम को मार डाला।

2. सतनामी विद्रोह

  • 1672 ई में नारनोल (हरियाणा) नामक स्थान पर वीरभान के नेतृत्व में सतनामी किसानों व मुगलों के बीच युद्ध हुआ।
  • नारनोल (पटियाला) एवं मेवात (अलवर) सतनामी बैराग्यों में से एक थे जो अपने बाल मुड़ाकर रखते थे। इसी कारण इन्हें मुडिया भी कहा जाता था।
  • सतनामी विद्रोह की शुरुआत एक सतनामी व मुगल सैनिक अधिकारी के बीच झगड़े के कारण हुई।1659 ई0 में उधो बैरागी नामक साधू एक चेले ने काजी की हत्या कर दी इस विद्रोह का तात्कालीक कारण एक मुगल पैदल सैनिक द्वारा उनके एक सदस्य की हत्या था।
  • सतनामी विद्रोह में राजपूत जमीदारों ने मुगलो का साथ दिया।

3. अफगान विद्रोह

  • 1668 ई में भागू नामक एक युसुफजई सरदार ने मुहम्मद शाह नामक व्यक्ति को राजा घोषित कर स्वयं को उसका वजीर घोषित किया व अफगान विद्रोह की शुरुआत हुई।

4. बुंदेला विद्रोह

  • मुगलो व बुंदेलों के बीच पहला संघर्ष मधुकर शाह के समय शुरू हुआ।
  • बुंदेला शासक वीर सिंह ने जहाँगीर के कहने पर 1602 ई में अबुल फजल की हत्या कर दी।

5. शहजादा अकबर का विद्रोह

  • अकबर औरंगजेब का पुत्र था। उसने शिवाजी के पुत्र शम्भाजी के साथ मिलकर औरंगजेब के विरूद्ध षडयंत्र किया परन्तु औरंगजेब ने बड़े बुद्धिमानी से शम्भाजी को अलग कर दिया। 
  • मेवाड़ व मारवाड़ के दुर्गादास के सहयोग से शहजादा अकबर ने 1681 ई में अपने को बादशाह घोषित कर दिया तथा ओरंगजेब की सेना पर अजमेर के पास आक्रमण किया। अकबर 1681 ई0 में भागकर फारस चला गया

6. सिक्ख विद्रोह

  • सिक्खों ने ओरंगजेब के खिलाफ सबसे अंत मे विद्रोह किया।
  • सिक्ख विद्रोह ओरंगजेब के काल का एक मात्र विद्रोह था जो धार्मिक कारणों से हुआ।

औरंगजेब की मृत्यु अहमदनगर में 3 मार्च 1707 में हुई। इसे दौलताबाद में मुस्लिम फकीर बुरहानुद्दीन की कब्र में दफना दिया गया इस समय उसके तीन पुत्र जीवित थे- मुअज्जम, आजम एवं कामबक्श

औरंगजेब के मृत्यु के समय मुअज्जम अफगानिस्तान में जमरुद नामक स्थान पर था। वह सीधा दिल्ली आया लाहौर के निकट उसने बहादुरशाह के नाम से अपने को बादशाह घोषित कर लिया।

आजम ने आगरा पर अधिकार करने के लिए जजाऊ के पास अपना शिविर लगाया फलस्वरूप जजाऊ का युद्ध हुआ।

जजाऊ का युद्ध (1707):- आगरा के पास स्थित इसी स्थान पर बहादुर शाह ने आजम को पराजित कर मार डाला।

बीजापुर का युद्ध (1709):- यह युद्ध बहादुरशाह और कामबक्श के बीच हुआ। इसमें भी बहादुर शाह की विजय हुई। इस प्रकार बहादुर शाह दिल्ली का शासक बना।

धार्मिक नीति

औरंगजेब एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था। उसने गद्दी पर बैठते ही कुरान के नियमों का पालने करते हुए 80 प्रकार के करों को समाप्त कर दिया।

इन करों में-

1. आबवाब-उपरिकर
2. पानडारी-चुंगीकर
3. राहदारी-परिवहन

कर शामिल थे।

उसने सिक्कों पर कलमा खुदवाना, नौरोज मनाना, भांग की खेती करना आदि पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया। राज्याभिषेक के 11वें वर्ष झरोखा दर्शन, संगीत निषेध जबकि 12वें वर्ष तुलादान प्रथा बन्द कर दी।

1689 ई0 जजिया को पुनः लागू कर दिया। इसे लागू करने का विरोध मेवाड़ के शासक राज सिंह ने किया था। उसे कई मन्दिरों के तुड़वाने का आरोप लगाया जाता है जिसमे मथुरा का केशवराय मन्दिर और बनारस का विश्वनाथ मन्दिर प्रसिद्ध है। उसने लोगों के आचरण पर नजर रखने के लिए एक अधिकारी मुहतसिब की नियुक्ति की।

Mughal Empire-Aurangzeb important facts 

  • ओरंगजेब को जिन्दापीर क्यों कहा जाता है➡कट्टरता के कारण।
  • मीना मस्जिद का निर्माण किसने करबाया➡ओरंगजेब।
  • जागीरदारी समस्या बनी किसके समय➡बहादुर शाह प्रथम।
  • किन मुगलो ने अपने सद्रो को हटाया➡अकबर, औरंगजेब। 
  • किस बादशाह ने अकबर के मकबरे के चित्रों को चूने से पुतबा दिया था➡औरंगजेब।
  • किस शासक के काल मे चित्रकला महलो से निकलकर आम जनता की पहुँच में आ गई➡औरंगजेब। 
  • हनाफी फिक के सिद्धान्तों का चित्रण पहली बार हुआ➡औरंगजेब।
  • एक नई तकनीकी सिहायी कलम का विकास किस मुगल शासक के काल मे हुआ➡औरंगजेब
  • औरंगजेब सबसे कट्टर शासक था लेकिन सर्वाधिक हिन्दू सरदार 33 प्रतिशत इसी के काल में थे।
  • शाहजहाँ के युग में इसके बाद हिन्दू सरदारों की संख्या 24 प्रतिशत थी।
  • औरंगजेब ने इतिहास की पुस्तकों को लिखने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था परन्तु सर्वाधिक इतिहास की पुस्तकें इसी के काल में लिखी गई।
  • खाफीखाँ ने अपनी पुस्तक मुन्तखब-उल-लुबाब छिप करके के लिखा।
  • औरंगजेब ने संगीत पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। परन्तु संगीत की सर्वाधिक पुस्तकें इसी के काल में लिखी गई। वह स्वयं ही वीणा बजाता था। मनूची लिखता है कि सम्राट संगीत सुनता भी था।
  • इसी के समय में सिक्खों के गुरु तेग बहादुर को 1675 में फाँसी दे दी गई।
  • शिवा जी के पुत्र शम्भा जी को भी 1689 में फांसी दे दी।

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1 उत्तराधिकार युद्ध के समय ओरंगजेब कहा का सूबेदार था

Correct! Wrong!

2 किस मुग़ल बादशाह का दिल्ली में दो बार राज्यभिषेक हुवा

Correct! Wrong!

3 दक्कन से जजिया करा कब हटाया

Correct! Wrong!

4 ओरंगजेब का जजिया क्र लगाने का उददस्य था

Correct! Wrong!

5 मारवाड़ का मुगलो से स्वंत्रता संघर्ष कितने वर्ष चला

Correct! Wrong!

6 अजीत सिंह को मारवाड़ क शासक किसने स्वीकार किया

Correct! Wrong!

7 ओरंगजेब को राज्य के किस क्षेत्र की अच्छी जानकारी थी

Correct! Wrong!

8 ओरंगजेब के विरुद्ध मराठो की कितनी पीढ़ियों ने संघर्ष किया

Correct! Wrong!

9 गंज ए सवाई था

Correct! Wrong!

10 जाट जाति का प्लेटो की उपाधि किसको दी गई

Correct! Wrong!

11. औरंगजेब के शासनकाल के आरम्भ में सिखों के गुरु कौन थे?

Correct! Wrong!

12. किस मुगल बादशाह को ‘जिन्दा पीर’ कहा जाता था?

Correct! Wrong!

13. जागीरदारी संकट सर्वप्रथम किस मुगल बादशाह के शासनकाल में उत्पन्न हुआ?

Correct! Wrong!

Mughal Empire-Aurangzeb Quiz 1 ( मुगल काल- औरगजेब एवं अन्य शासक )
खराब ! आप कुछ जवाब सही हैं! कड़ी मेहनत की ज़रूरत है
अच्छा ! आपने अच्छी कोशिश की लेकिन कुछ गलत हो गया ! अधिक तैयारी की जरूरत है
बहुत अच्छा ! आपने अच्छी कोशिश की लेकिन कुछ गलत हो गया! तैयारी की जरूरत है
शानदार ! आपका प्रश्नोत्तरी सही है! ऐसे ही आगे भी करते रहे

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CONTINUES…..

अकबर द्वितीय अंग्रेजों के सरंक्षण में रहने वाला प्रथम मुगल बादशाह था।  ईरान का नेपोलियन की उपाधि नादिरशाह की है। बहादुर शाह द्वितीय अंतिम मुगल बादशाह जिन्हें जफर के नाम से भी जाना जाता है।

शासक –                उपनाम

बहादुर शाह शाह    ए बेखबर
जहाँदार शाह         लम्पट मूर्ख
फरुखशियर          घृणित कायर
मुहम्मद शाह         रंगीला

रफी उद् दरजात सबसे अल्पकाल (3 माह 4 दिन) के लिए शासन करने वाला मुगल शासक था। मुहम्मद शाह के शासन काल में उर्दू साहित्य का सर्वाधिक विकास हुआ।

बहादुरशाह प्रथम (1707-12)

  • अन्य नाम:- शाह आलम प्रथम
  • उपाधि:- शाहे-बेखबर

बहादुर शाह ने अपने समकालीन सभी शक्तियों से मेल-मिलाप की नीति अपनायी। मराठों को दक्कन की सरदेशमुखी दे दी परन्तु चौथ का अधिकार नही दिया केवल सिखों का विरोध बन्दा बहादुर के नेतृत्व में जारी रहा।

बहादुर शाह के दरबार में 1711 ई0 में एक डच प्रतिनिधि मण्डल जोशुआ केटेलार के नेतृत्व में आया। इस प्रतिनिध मण्डल के स्वागत में एक पुर्तगाली स्त्री जुलियाना की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसे ’’बीबी, फिदवा आदि उपाधियाँ दी गयी थी।

1712 में बहादुर शाह की मृत्यु हो गयी इस कारण पुनः गृह युद्ध छिड़ गया। इसी गृह युद्ध के कारण उसका शव दस सप्ताह बाद ही दफनाया जा सका।

बहादुर शाह के चार पुत्र थे जहाँदार शाह, अजीम उस शान, रफी उसशान, और जहानशाह। इस उत्तराधिकार संघर्ष में जहाँदार शाह विजयी हुआ क्योंकि उसे अपने सामन्त जुल्फिकार खाँ का समर्थन मिला।

जहाँदार शाह (1712-13)

जहाँदार शाह को गद्दी इसलिए प्राप्त हुई क्योंकि उसे इरानी गुट के जुल्फिकार खाँ का समर्थन प्राप्त था। इसके समय की प्रमुख घटनायें निम्नलिखित है-

  • जजिया कर समाप्त कर दिया गया।
  • मराठों को चौथ और सरदेशमुखी इस शर्त पर दी गयी की उसकी वसूली मुगल अधिकारी करेंगे और बाद में उसे मराठें को दे देगें।
  • जयसिंह को मिर्जा राजा की उपाधि दी।

इसके समय भी केवल सिक्ख ही असन्तुष्ट रहे बाकी सभी वर्गों से इसने मेल-मिलाप की नीति अपनायी। जहाँदार शाह लालकुँवर नामक वेश्या पर आसक्त था।

जहाँदार के भतीजे फरुखसियर ने सम्राट के पद का दावा किया और उसके दावे को सैयद-बन्धुओं ने समर्थन दिया। इस प्रकार जहाँदार को पराजित कर उसकी हत्या कर दी गयी तथा फर्रुखसियर शासक बना।

फर्रुखसियर (1713-19)

फर्रुखसियर को गद्दी सैयद बन्धुओं अब्दुल्ला खाँ हुसैन खाँ के कारण प्राप्त हुई। अब्दुल्ला खाँ को वजीर का पद तथा हुसैन को मीर बक्शी का पद मिला। फर्रुखसियर ने जयसिंह को सवाई की उपाधि दी।

गद्दी पर बैठते ही जजिया को हटाने की घोषणा की तथा तीर्थ यात्री कर भी हटा दिये। 1717 ई0 में एक फरमान के जरिये अंग्रेजों को व्यापारिक छूट प्रदान की गई (दक्षिण में)। इसे कम्पनी का मैग्नाकार्टा कहा गया।

1716 ई0 में बन्दा बहादुर को दिल्ली में फाँसी दे दी गयी। सैयद बन्धुओं में छोटे भाई हुसैन ने मराठा पेशवा बालाजी विश्वनाथ से एक सन्धि की जिसके तहत दक्षिण का चौथ और सरदेशमुखी वसूलने का अधिकार मराठों को मिल गया। बदले में शाहू 15000 घुड़सवारों के साथ सैयद बन्धुओं को समर्थन देने के लिए तैयार हो गया परन्तु इस सन्धि पर हस्ताक्षर करने से मना करने पर फर्रुखसियर की हत्या कर दी गयी।

मुगल साम्राज्य के इतिहास में किसी अमीर द्वारा शासक की हत्या का यह पहला उदाहरण है। इसके बाद रफी-उस-शान के पुत्र रफी उद्दरजात को शासक बनाया गया।

रफीउद्दरजात (28 फरवरी 1719- 4 जून 1719)

यह सबसे कम समय तक शासन करने वाला मुगल शासक था। इसके समय की सबसे प्रमुख घटना निकूसियर का विद्रोह था। निकूसियर औरंगजेब के पुत्र अकबर का पुत्र था। इसकी मृत्यु क्षयरोग से हुई।

रफीउद्दौला (6 जून 1719-17 सितम्बर 1719)

उपाधि:- शाहजहाँ द्वितीय

सैय्यद बन्धुओं ने इसे भी गद्दी पर बैठाया, यह अफीम का आदी था। इसकी मृत्यु पेचिश से हुई।

मुहम्मद शाह (1719-48)

  • अन्य नाम:- रौशन अख्तर
  • उपाधि:-रंगीला

मुहम्मद शाह, बहादुर शाह के सबसे छोटे पुत्र जहानशाह का पुत्र था। इसे रंगीला की उपाधि दी गयी थी।

इसके काल की प्रमुख घटनायें निम्नलिखित हैं-

  • सैय्यद बन्धुओं का पतन।
  • स्वायत्त राज्यों का उदय-जैसे-हैदराबाद, अवध, बंगाल, बिहार आदि।
  • विदेशी आक्रमण नादिरशाह द्वारा 1739 में।
  • बाजीराव प्रथम द्वारा 1737 ई0 में दिल्ली पर चढ़ाई।

कुल मिलाकर मुहम्मद शाह के समय में ही प्रान्तीय राजवंशों का उदय हुआ एवं दिल्ली सल्तनत की सत्ता वास्तविक रूप में छिन्न-भिन्न हो गई।

अहमद शाह (1748-54)

मुहम्मद शाह की मृत्यु के बाद उसका एक मात्र पुत्र अहमदशाह गद्दी पर बैठा। इसका जन्म एक नर्तकी से हुआ था। इसके समय में मुगल अर्थ व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई। सैनिकों को वेतन देने के लिए पैसा नहीं बचा। फलस्वरूप कई स्थानों पर सेना ने विद्रोह कर दिया।

इसके समय में राजकीय काम-काज इसकी माँ ऊधमबाई देख रही थी। इसी के समय में अहमद शाह अब्दाली ने अपना प्रथम आक्रमण 1747 में किया। इसके वजीर इमादुलमुल्क ने अहमदशाह को गद्दी से हटवाकर जहाँदार शाह के पुत्र आलमगीर द्वितीय को गद्दी पर बैठाया।

आलमगीर द्वितीय(1754- 1758)

इसी के काल में अब्दाली दिल्ली तक आ गया। प्लासी के युद्ध के समय यही दिल्ली का शासक था। इसकी हत्या इसके वजीर इमादुल मुल्क ने कर दी।

शाहजहाँ तृतीय (1758-59)

आलमगीर द्वितीय के समय उसका पुत्र अली गौहर बिहार में था जहाँ उसने शाह आलम द्वितीय के नाम से स्वयं को सम्राट घोषित किया। इसी समय दिल्ली में इमादुलमुल्क ने कामबक्श के पौत्र शाहजहाँ तृतीय को सिंहासन पर बिठा दिया।

इस प्रकार पहली बार दिल्ली की गद्दी पर दो अलग-अलग शासक सिंहासनरुढ़ हुए।

शाह आलम द्वितीय (1759-1806)

  • अन्य नाम:-अली गौहर

इसी के समय में पानीपत का तृतीय युद्ध 1761 ई0 में हुआ। बक्सर का युद्ध 1764 ई0 में हुआ। इस युद्ध में पराजय के बाद शाह आलम द्वितीय ने क्लाइव को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्रदान की।

इसी के बाद यह अंग्रेजों के संरक्षण में 1765 से 72 तक इलाहाबाद में रहा। 1772 में मराठा सरदार महाद जी सिंधिया इसे दिल्ली ले आये परन्तु नजीबुद्दौला के पौत्र गुलाम कादिर ने 1788 ई0 में शाहआलम को अन्धा बना दिया।

1803 ई0 में अंग्रेज सेनापति लेक ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया। अब मुगल शासक केवल अंग्रेजों के पेंशनर बनकर रह गये।

अकबर-द्वितीय (1806-37)

इसने राजा राम मोहन राय को राजा की उपाधि। 1835 ई0 से मुगलों के सिक्के चलने बन्द हो गये। एमहस्र्ट पहला अंग्रेज गर्वनर जनरल था जिसने अकबर द्वितीय से बराबरी के स्तर पर मुलाकात की।

बहादुरशाह-द्वितीय (1837-57)

यह अन्तिम मुगल बादशाह था। 1857 ई0 का विद्रोह इसी के समय में हुआ। इसे ही इस विद्रोह का नेता बनाया गया। इसके दो पुत्रों को गोली मार दी गयी। जबकि इसको हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया गया।

वहीं 1862 ई0 में इसकी मृत्यु हो गयी। बहादुर शाह एक अच्छा गजल लेखक था उसने जफर नाम से अनेक शायरी लिखी।

उसकी एक प्रसिद्ध नज्म है-

’’न किसी की आँख का नूर हूँ। न किसी के दिल का करार हूँ।।
जो किसी के काम न आ सका। मैं वह बुझता हुआ चिराग हूँ।।

मुगल दरबार में विभिन्न गुट

उत्तर कालीन मुगल दरबार में मुख्य रूप से चार गुट कार्य कर रहे थे। इनमें हिन्दुस्तानी अथवा भारतीय, तुरानी, ईरानी और अफगानी प्रमुख थे।

हिन्दुस्तानी गुट:-  इस गुट के नेता सैय्यद बन्धु थे। सैय्यद बन्धु भारतीय इतिहास में राजा बनाने वाले के नाम से विख्यात है। इन्होंने कुल चार लोगों फर्रुखसियर, रफी- उद्दरजात, रफी-उद्दौला एवं मुहम्मद शाह को राजा बनाया।

सैय्यद बन्धु दो भाई अब्दुल्ला खाँ बाराहा (हसन अली) एवं हुसैन अली खाँ बाराह थे। बाराहा शब्द इनके गाँव बाढ़ा से बिगड़ कर बना हुआ शब्द था। यह गाँव पटियाला के समीप था। सैय्यद बन्धुओं में बड़े भाई अब्दुल्ला खाँ को वजीर का पद दिया गया जबकि छोटे भाई हुसैन खाँ को मीर-बक्शी का।

सैय्यद बन्धुओं के विरोधी नेताओं में तूरानी दल के चिनकिलच खाँ, अमीन खाँ का प्रमुख योगदान था। इन्हीं के प्रयासों से मुहम्मद शाह रंगीला के समय में इन दोनों भाइयों की हत्या कर दी गयी। पहले छोटे भाई को मारा गया फिर बड़े भाई को जहर दे दिया गया।

तुरानी गुट- ये मध्य एशिया के सुन्नी मुसलमान थे। सैय्यद बन्धुओं के पतन के बाद मुगल दरबार में इसी गुट का बोल बाला था। इस गुट में निजामुलमुल्क, अमीन खाँ और जकारिया खाँ शामिल थे।

ईरानी गुट- ये शिया मुसलमान थे। इस गुट में जुल्फिकार खाँ, सआदत खाँ अमीर खाँ, इसहॉक खाँ प्रमुख थे।

अफगानी गुट- इस गुट में ’अली मुहम्मद खाँ एवं मुहम्मद खाँ बंगस प्रमुख थे।

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No of Questions- 17

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1 बहादुरपुर का युद्ध कब हुआ था

Correct! Wrong!

2 औरंगजेब ने कन्धार अभियान कब किया था

Correct! Wrong!

3 शाहजहां की अधिनता बीजापुर के किस शासक ने स्वीकारी थी---

Correct! Wrong!

4 औरंगजेब का पक्ष किसने लिया था

Correct! Wrong!

5 औरंगजेब की पूर्ण विजय हुई थी।

Correct! Wrong!

6 शाहजहा की मृत्यु हुई थी

Correct! Wrong!

7 शाहजहां की माता का नाम क्या था

Correct! Wrong!

8 ओरंगजेब ने क्या नहीं किया था

Correct! Wrong!

9 औरंगजेब काल में किस जाट क विद्रोही को बंदी बनाकऱ मार डाला था मुगलो ने

Correct! Wrong!

10 सतनामी विद्रोह में मारे गये थे

Correct! Wrong!

11.किस एक ने दाराशिकोह ने लिखा था?

Correct! Wrong!

12. किस मुगल शासक ने मनसबदारी प्रथा में दोअस्पा, सिह अस्पा श्रेणी के प्रवर्तक है?

Correct! Wrong!

13.जेम्स प्रथम के रुप में सर टाँमस रो कितने समय तक जहाँगीर के दरबार में रहा-

Correct! Wrong!

14.औरगजेब के आदेश पर किसका मारा गया है?

Correct! Wrong!

15. निजाम उल मुल्क की उपाधि दी गई थी

Correct! Wrong!

16. नादिरशाह कहाँ का नरेश था।

Correct! Wrong!

17.ओरंगजेब की मृत्यु कब हुई।

Correct! Wrong!

Mughal Empire-Aurangzeb Quiz 2 ( मुगल काल- औरगजेब एवं अन्य शासक )
खराब ! आप कुछ जवाब सही हैं! कड़ी मेहनत की ज़रूरत है
अच्छा ! आपने अच्छी कोशिश की लेकिन कुछ गलत हो गया ! अधिक तैयारी की जरूरत है
बहुत अच्छा ! आपने अच्छी कोशिश की लेकिन कुछ गलत हो गया! तैयारी की जरूरत है
शानदार ! आपका प्रश्नोत्तरी सही है! ऐसे ही आगे भी करते रहे

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कमलनयन पारीक अजमेर, RAMURAM LAMROD, लोकेश स्वामी, Puspendra Kuldeep jhunjhunu, भँवर सिंह जी बाड़मेर, ANEESH KHAN, जुल्फिकार अहमद दौसा, Rafik khan nagour, Priyanka varma, शाहीन (कोटा), P K Nagauri

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