नवीन लोक प्रशासन का परिचय ( Introduction to the New Public Administration )

इसकी शुरुआत 1960 में हुई। सातवे दसक में कुछ युवा विद्वानों ने लोक प्रशासन में मूल्यों व नैतिकता पर बल देना प्रारंभ किया।कहा जाने लगा कि कार्यकुशलता तथा मितव्यवता ही समस्त लोक प्रशासन का लक्ष्य नहीं है। उसे मूल्योंमुखी होना चाहिए। इस नवीन प्रवृति को ही नव लोक प्रशासन कहते हैं। इसकी शुरुआत अमेरिका ने की।

लोक प्रशासन के क्षेत्र में 1968 के बाद नवीन विचारों का सूत्रपात हुआ इन्हीं नवीन विचारों को नवीन लोक प्रशासन की संज्ञा दी गई 1971 मैं फ्रैकमेरीनी द्वारा संपादित पुस्तक नवीन लोक प्रशासन मिन्नोब्रुक परिपेक्ष्य के प्रकाशन के साथ ही नवीन लोक प्रशासन को मान्यता प्राप्त हुई

नवीन लोक प्रशासन के उदय और विकास में मील का पत्थर साबित हुई निम्न घटनाए

  • 1967 में सार्वजनिक सेवाओं संबंधी उच्च शिक्षा पर हनी प्रतिवेदन
  • दिसंबर 1967 में फिलाडेल्फिया में हुए लोक प्रशासन के सिद्धांत और व्यवहार संबंधित सम्मेलन
  • 1968 में आयोजित मिन्नो ब्रूक सम्मेलन
  • 1971 में फ्रैंक मेदिनीके संपादन में प्रकाशित नवीन लोक प्रशासन की दिशाएंमिन्नोब्रूक परिप्रेक्ष्य
  • 1971 में ड्वाहट वाल्डो द्वारा संपादित उथल-पुथल के काल में लोक प्रशासन का प्रकाशन.

नवीन लोक प्रशासन की विषय वस्तु ( Content of New Public Administration ) 

  • नवीन लोक प्रशासन मूल्यो के नए तथ्यों को प्रश्रय देता है वह मानववाद ,विकेंद्रीकरण, प्रत्यायोजन, बहु वाद ,व्यक्तिगत हित, वृद्धि ,व्यक्तिगत गरिमाआदि का समर्थन करता है
  • वह इस मत को अस्वीकार करता है कि प्रशासन मूल्यों के प्रति तटस्थ होता है
  • वह नागरिक सहभागिता और सड़क छाप अधिकारी तंत्र पर नियंत्रण का पक्ष पोषण करता है
  • वह नौकरशाही के जनता के प्रति उत्तरदायी पर जोर देता है

नवीन लोक प्रशासन की विषय वस्तु को निम्न बिंदुओं द्वारा समझा जा सकता है
प्रासंगिकता-Relevance
मूल्य-Values
सामाजिक समानता-Equity.
परिवर्तन-Change

प्रासंगिकता ( Relevance )
प्रासंगिकता शब्द लोक प्रशासन की वर्तमान परिस्थितियों में उत्पन्न समस्याओं से जुझ़ने की क्षमताकी ओर संकेत करता है
60 के दशक में परिस्थितियों के अनुसार लोक प्रशासन की क्षमता के सिद्धांतों पर अनेक मौलिक प्रश्न उठाए गए
सामाजिक और राजनीतिक विज्ञानके रुप में लोक प्रशासन की उपयोगिता आदि प्रश्नों पर गंभीरता से विचार किया गया

मूल्य (value)➖
नवीन लोक प्रशासन के विद्वानों ने मूल्य तटस्थ को त्यागने पर जोर दिया
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रशासन को उन्ही मूल्यों को अपनाना चाहिए
जो समाज में उत्पन्न समस्याओं के समाधान करें
साथ ही कमजोर वर्गों के लिए प्रयासकरें

सामाजिक समानता ( social equality )➖
सामाजिक समानता के विचारों का विस्तार ही लोक प्रशासन का मौलिक आधार है
नवीन लोक प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया कि लोक प्रशासन समाज के दलित और वंचित वर्गके लोगों की आर्थिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पीड़ाको समझें और उचित कदम उठाएं
समाज का वर्तमान ढांचा और संस्थाएं निहित स्वार्थों की चक्की में पिस रहे हैं
विशेषाधिकार का त्याग करने को तैयार नहीं है

परिवर्तन ( Change )
नवीन लोक प्रशासन ने सामाजिक परिवर्तन पर जोर दिया
जब तक लोकप्रशासन सामाजिक समानता और सामाजिक परिवर्तन के लिए कार्य नहींकरता तब तक अभीजात्यों की पकड़ से छुटकारामिल पाना असंभव है

इस प्रकार सामाजिक परिवर्तन के लिए एक मजबूत परिवर्तन उन्मुख की नवीन लोक प्रशासन की अनिवार्य विषय वस्तु है

नवीन लोक प्रशासन की विशेषताएं ( Features of New Public Administration)

ग्राहक-उन्मुखता
उत्तरदायित्व
लोचदार प्रशासनिक ढांचा
जन सहभागिता

नवीन लोक प्रशासन की सर्वाधिक प्रमुख विशेषता ग्राहक-उन्मुखता है पूर्व में लोक प्रशासन ग्राहक उन्मुखता पर ज्यादा ध्यान नहीं देता था
इसके विपरीत चीन लोक प्रशासन ग्राहकोन्मुखता पर विशेष ध्यान देता है चीन का मानना है कि लोक प्रशासन की उत्पत्ति ग्राहकों के लिए ही हुई है
इसलिए नागरिकों की आवश्यकता और इच्छा अनुसार सेवा लोक प्रशासन द्वारा की जानी चाहिए ग्राहकोंन्मुखता के लिए लोक प्रशासन को जन आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी होना चाहिए
प्रशासन को नागरिकों की आवश्यकता अनुसार स्वयं को ढालना चाहिए ग्राहकोन्मुखता तथा उत्तरदायित्वकी स्थापना के लिए लोचदार प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता होती है
लघु विकेंद्रित तथा नमनशील श्रेणियां प्रशासनिक संगठनों के लिए ज्यादा उचित हो सकती है क्योंकि यह विभिन्न वर्ग के लोगों के लाभ या उन्नति के लिए उपयुक्त हो सकती है
निर्णय निर्माण में जन सहभागिता के द्वारा ही लोचदार उत्तरदायी तथा ग्राहकोन्मुखी प्रशासन का निर्माण संभव है ऐसी सभ्यता विशेषकर लघु स्तर पर सहभागिताको सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संस्थागत व्यवस्था की है संक्षेप में लोक प्रशासन सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील है
सन्दर्भ ,सदाचरण, नीतिशास्त्र और मूल्य,नवीनता या मौलिकता, संबंधित व्यक्ति के प्रति चिंता ,सामाजिक एकता, बहूवाद, वैयक्तिक गरिमा, आदि लोक प्रशासन के तत्व हैं नवीन लोक प्रशासन नौकरशाही के जनता के प्रति उत्तरदायित्वका समर्थन करता है

नवीन लोक प्रशासन की आलोचना ( Criticism of the New Public Administration )

नवीन लोक प्रशासन लोक प्रिय प्रकृति का है जो कि राजनीतिक प्रकृति के अंतर्गत आता है
इसके अतिवादी तत्वों को विधानमंडल और जनमतके द्वारा ही लागू किया जा सकता है
इसमें राजनीतिक संस्थाओं प्रक्रिया और नेतृत्वसे संबंधित विषय वस्तु पर अपना अधिकार करलिया है
जो कि एक प्रकार का अतिक्रमण है
इसमें किसी व्यवहारिक तथा लक्ष्य आधारित सिद्धांत की खोज के प्रयत्न नहीं किए गए
नवीन लोक प्रशासन के विचारकों ने विकास के लिए आवश्यक तकनीकी की अनदेखी की है
इन सभी आलोचनाओं के बावजूद नवीन लोक प्रशासन ने पारंपरिक सिद्धांत को झटका दिया
नवीन लोक प्रशासन ने लोक प्रशासन को उस समय उत्प्रेरित किया जिस समय इस विषय का आत्म बल गिरा हुआ था आज
नवीन लोक प्रशासन का अपना एक स्थान है और इसका सीधा संबंध समाज से जुड़गया है

New public administration important Question 

Q-1. प्रशासन शब्द से क्या तात्पर्य है ?
Ans-1..एडमिनिस्ट्रेशन(Administration) शब्द “”लैटिन भाषा के Ad+Ministrare”” शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ है लोगों की देखभाल करना या एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे व्यक्ति की सेवा करना अतः प्रशासन का मूल अभिप्राय एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के हित की दृष्टि से उसकी सेवा करना है

Q-2. नवीन लोक प्रशासन क्या है ?
Ans-2. नवीन लोक प्रशासन मूल्यों के नेतत्व को प्रश्रय देता है और मानववाद,विकेंद्रीकरण, प्रत्यायोजन ,बहूवाद ,व्यक्तिगत वृद्धि ,वैयक्तिक गरिमा आदि का समर्थन करता है इसकी विषय वस्तु के मूल तत्व ,प्रासंगिकता, मूल्य ,समानता और परिवर्तन

Q-3. राजनीति और प्रशासन के विरोधाभास की व्याख्या कीजिए ?
Ans-3. राजनीति और प्रशासन के मध्य संबंध का परंपरागत दृष्टिकोण संकिणतावादी है ! इस दृष्टिकोण के अनुसार राजनीति को सत्ता का विज्ञान मानते हुए मूल रूप से नीति निर्धारक कला माना गया है जबकि लोक प्रशासन इसके अनुसार केवल सरकारी कर्मचारियों का क्षेत्र है जिनकी अपनी भूमिका इतनी सीमित होती है कि वह नीति निर्माण में कोई महत्वपूर्ण भाग नहीं लेते 

वुडरो विल्सन ने– प्रशासन के विषय क्षेत्र को राजनीति से बाहर माना है ब्लंट शैली और गुडनाऊ ने– भी राजनीतिक प्रशासन के द्धैतभाव को स्वीकारा है

“”राजनीतिज्ञ और प्रशासकों के मध्य अंतर को अग्रतालिका द्वारा समझा जा सकता है””

राजनीतिज्ञ
1- अविशेष चुनाव का आधार लोकप्रियता
2- गैर तकनीकी
3- दलगत भावना से कार्य करते हैं ,अस्थाई
4- जनता से अधिक संपर्क
5- कानून बनाने में अधिक साझेदार ,अधिक नीति निर्धारण का काम
6- अधिकतम निर्णय करते हैं
7- समन्वय में बनाए रखने का काम करते हैं
8- लोकमत से प्रभावित होते हैं

प्रशासक
1- विशेष नियुक्ति का आधार,
2- विशेष ज्ञान तकनीकी
3- दलगत भावना से परे रहते हैं ,स्थाई
4- जनता से कम संपर्क
5- कानून को कार्यान्वित करने में अधिक साझेदार ,नीतियों के कार्यान्वयन का काम
6- अधिकतर परामर्श करते हैं
7- वास्तविक कार्य करते हैं
8- अध्ययन और अनुसंधान द्वारा तकनीकी आंकड़ों से प्रभावित होते हैं

Q-4 .प्रशासन के एकीकृत और प्रबंधात्मक दृष्टिकोण को समझाइए ?
Ans-4..प्रशासन के सामान्यता दो दृष्टिकोण प्रचलित हैं
1 एकीकृत और
2प्रबंधात्मक

1 एकीकृत दृष्टिकोण के अनुसार– प्रशासकीय में व्यस्त प्रत्येक व्यक्ति को प्रशासन का अंग माना जाता है अर्थात इसमें निरीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करने वाले व्यक्तियों से लेकर निम्नतर स्तर तक के कर्मचारी प्रशासन में सम्मिलित माने जाते हैं “व्हाइट इस मत के प्रमुख समर्थक हैं”

2 प्रबंधात्मक दृष्टिकोण के अनुसार– प्रशासन का उद्देश्य कार्य कराने की क्षमता द्वारा पूर्ण हो सकता है इस दृष्टिकोण के अनुसार प्रबंधक वर्ग जो निर्देश देते हैं निरीक्षण करके नियंत्रण करते हैं योजना बनाते हैं कार्य में समन्वय करते हैं वित्तीय नियंत्रण करते हैं उन्हें ही प्रशासन का अंग माना जाता है कोई भी दृष्टिकोण अपने आप में पूरा नहीं है तथा प्रशासन में एकरूपता लाने के लिए दोनों ही दृष्टिकोण आवश्यक है

Q-5. नवीन लोक प्रशासन की आलोचनात्मक विवेचना करते हुए समकालीन समय में इसकी उपयोगिता को बताइए?
Ans-5. 1960 के दशक में अमेरिका के अंतर्गत लोक प्रशासन की सैद्धांतिक और व्यवहारिक कमियों के कारण लोक प्रशासन में एक नवीन विचार का उदय हुआ *”जिसे नव लोक प्रशासन” कहा जाता है

मिन्नोब्रुक सम्मेलन (1968) के अंतर्गत नव लोक प्रशासन के चार लक्ष्य स्वीकार किए गए
1- प्रासंगिकता
2- मूल्य
3- सामाजिक समता
4- परिवर्तन

नवीन लोक प्रशासन की विशेषताएं ( Features of New Public Administration )इस प्रकार ह
1- बदलते पर्यावरण के अनुरूप प्रशासनिक संगठनों में सुस्पष्ट मानकों का निर्धारण करना ताकि प्रशासनिक कार्यकरण की प्रासंगिकता को सुनिश्चित किया जा सके
2- प्रशासन की निर्णय प्रक्रिया में अधिकतम जन भागीदारी को सुनिश्चित करना
3- प्रशासनिक संरचना में सुधारों को अपनाना चाहिए
4- लोक प्रशासकों को राजनीतिक तटस्थता के आधार पर कार्य करना चाहिए लेकिन सामाजिक और विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में तटस्थता के स्थान पर सक्रियता दिखलाई जानी चाहिए
5- जटिल और बढ़ते दायित्वों की अनुपूर्ति के लिए आधुनिक प्रबंध के तकनीकों और प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाना चाहिए
6- प्रशासक जनता के प्रति ग्राहकोन्मुखी दृष्टिकोण रखें और संवेदनशील व्यवहार करें

नवीन लोक प्रशासन की आलोचकों द्वारा निम्न प्रकार से आलोचना की जाती है-

1- अराजकतावादी दर्शन है क्योंकि यह राजनीतिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कार्य क्षेत्र में अतिक्रमण करती है
2- यह आदर्शवादी और लक्ष्योन्मुखी विचारधारा है लेकिन लक्ष्यों की प्राप्ति के साधनों पर इसमें कुछ भी नहीं कहा गया अतः यह शब्दों में क्रांति और तकनीकों में यथास्थितिवादी है
3- यह आनुभविक दृष्टिकोण और सिद्धांत तथा तकनीकी एवं कौशल की उपेक्षा करता है

नवीन लोक प्रशासन की उपयुक्त कमियों के बावजूद “इसका महत्व इस बात में है कि””
1- इसने लोक प्रशासन को नवीन पहचान दी है
2- लोक प्रशासन का सामाजिक उपादेयता की दृष्टि से मूल्यांकन शुरू किया गया
3- लोक प्रशासन को संगठन के स्थान पर सामाजिक संस्था के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया
4- इसने लोक प्रशासन की विषय वस्तु को व्यापकता दी, लोक प्रशासन में मूल्य और नैतिकता को समाहित किया गया

नवीन लोक प्रशासन दर्शन वर्तमान में कई दृष्टिकोणों से उपयोगी है—
1- तृतीय विश्व के देशों के औपनिवेशिक मानसिकता वाले प्रशासन तंत्र में संवेदनशीलता और जनोन्मुखता नवाचार सर्जनात्मकता सुनिश्चित करने के लिए नव लोक प्रशासन की आवश्यकता है
2- आज वैश्विक मानव समाज कई चुनौतियों से लड़ रहा है यथा नागरीकरण ,पर्यावरण प्रदूषण ,जनसंख्या विस्फोट अपराधों का बढ़ता ग्राफ सार्वजनिक नैतिकता का हास मानवाधिकारों का उल्लंघन इत्यादि इन समस्याओं के परिपेक्ष्य में लोक प्रशासन के अंतर्गत नवीन संगठन और संरचना तथा कार्य विधियों (नवीन लोक प्रशासन) की आवश्यकता है

निष्कर्षत:-नवीन लोक प्रशासन एक उपयोगी विचार है जो आज सुशासन के अंतर्गत सुनिश्चित हो रहा है

Q.6 नवीन लोक प्रशासन की चार आधारभूत विशेषताओं का निरूपण कीजिए

  1. नव लोक प्रशासन मानवीय व्यवहार, दृष्टिकोण एवं मानवीय संबंधों का समर्थक है।
  2. यह राजनीति तथा प्रशासन के विभाजन को नहीं स्वीकारता है।
  3. यह ग्राहक केंद्रित दृष्टिकोण पर बल देता है।
  4. यह मूल्य से परिपूर्ण शासन, जनसहभागिता व उत्तरदायित्व पर बल देता है।

Q.7 नवीन लोक प्रशासन के चार लक्ष्य बताए 

  1. मूल्य (Value)- यहाँ मूल्य का मतलब मानकीय सिद्धांतो को आत्मसाध करना है।
  2. सामजिक समता–  यह सिद्धांत न्याय व् समता पर विश्वास रखता है। समाज के वंचित लोगो को समाज की मुख्य धारा में लाना चाहिये।
  3. परिवर्तन(Change)-सामाजिक समता के उद्देश्य को पूरा करने के लिए सामजिक परिवर्तन अपरिहार्य हो जाता है।
  4. प्रासंगिकता- एक व्यवहार परक लोक प्रशासन समाज की मांग है।

Q.8 नवीन लोक प्रशासन की आलोचना किन आधारों पर की जाती है ?

  1. यह प्रति प्रत्यच्छवादी,प्रति सैद्धांतिक व प्रति प्रबंधक है।
  2. यह परिवर्तन तथा तकनीक यथास्थित है।
  3. नवीन लोक प्रशासन ने राजनितिक संस्थानों,प्रक्रिया व् नेतृत्व से सम्बंधित विषयवस्तु पर अधिकार कर लिया है,जो कि एक प्रकार का अतिक्रमण कहा जा सकता है।
  4. नवीन लोक प्रशासन द्वारा प्रशासन के क्षेत्र में बताए गए बदलाव के प्रचार से एक श्रम की स्थिति उत्त्पन्न कर दी है।

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No of Question 23

0%

1.लोक नीति निर्माण में प्रथम चरण में तैयार किया जाता है-

Correct! Wrong!

2. लोक नीतियों का निर्माण करते समय मानदंड या मानक बनाया जाता है-

Correct! Wrong!

3. लोकनीति के क्रियान्वयन में मुख्य बाधा या बाधाएं है-

Correct! Wrong!

4. लोक नीतियों के निर्माण,क्रियान्वय में महत्वपूर्ण भूमिका है-

Correct! Wrong!

प्रश्न=5- प्रशासन के लिए आवश्यक तत्व नहीं हैं ?

Correct! Wrong!

6-प्रशासन का अर्थ कार्य करना नहीं, वरन कार्य कराना हैं-यह वक्तव्य निम्नलिखित में से किससे सम्बन्धित हैं ?

Correct! Wrong!

7-आजकल लोक प्रशासन का झुकाव निम्नलिखित में से किस ओर अधिक हैँ?

Correct! Wrong!

8 -लोक प्रशासन के क्षेत्र के बारे में' POSDCORB दृष्टिकोण के समर्थक हैं ?

Correct! Wrong!

9-पोस्डकोर्ब दृष्टिकोण के प्रमुख आलोचक हैं ?

Correct! Wrong!

10-नवीन लोक प्रशासन का अत्यधिक जोर हैं ?

Correct! Wrong!

11-नवीन लोक प्रशासन का लक्षण हैं ?

Correct! Wrong!

12-निजी प्रशासन का प्रमुख गुण हैं ?

Correct! Wrong!

13 -किस विद्वान को भारत में लोक प्रशासन विषय के पितामह होने का गौरव प्राप्त हैं ?

Correct! Wrong!

14-उत्कृष्ट प्रशासन की कसौटी हैं ?

Correct! Wrong!

15. लोक प्रशाशन का जनक किसे माना गया हे

Correct! Wrong!

16.लोक प्रशाशन के विकास के तृतीय चरण की मुख्य विशेषता क्या थी

Correct! Wrong!

17. एक स्वतंत्र अध्यन विषय के रूप में प्रशाशन का प्रारभ हुआ

Correct! Wrong!

18. लोक प्रशाशन को व्यापक और सकुचित दोनों रूपो में परिभाषित किस ने किया

Correct! Wrong!

19. नवीन लोक प्रशाशन के अग्रणी लेखक हे

Correct! Wrong!

20 निम्न में से कौन विधायी नियंत्रण का अंग नही हे

Correct! Wrong!

21.निम्न में से कौन प्रशाशन पर नियंत्रण का अंग नही हे

Correct! Wrong!

22.न्यायिक सक्रियता सम्बंधित हे

Correct! Wrong!

23.प्रशाशन पर नियंत्रण न होने पर सबसे अधिक प्रभाव किस पर पड़ता हे

Correct! Wrong!

24. निम्न में से कौन नवीन प्रशासन का लषय नही हे

Correct! Wrong!

New public administration Quiz in hindi
VERY BAD! You got Few answers correct! need hard work.
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GOOD! You well tried but got some wrong! need more preparation
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Specially thanks to ( With Regards ) – Mamta Sharma kota , रमेश डामोर सिरोही, चंद्रप्रकाश सोनी बाली पाली, प्रकाश कुमावत

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