Organization theory unity command

लोक प्रशासन एवं प्रबंधन (संगठन के सिद्धांत-आदेश की एकता )

आदेश की एकता (unity command)

यह अवधारणा सैन्य संगठनों से ली गई है आदेश की एकता का सिद्धांत One Boss One Subordinate की अवधारणा पर आधारित है

इसका अभिप्राय है➖एक अधीनस्थ को उसके निकटतम/ तात्कालिक उच्च अधिकारी से ही आदेश ग्रहण करना चाहिए हेनरी फेयोल इस के प्रबल समर्थक हैं

इनका मत है कि➖यदि इस सिद्धांत का उल्लंघन होगा तो संगठन में अनुशासन व्यवस्था समाप्त हो जाएगी आदेशों की अवज्ञा होगी और स्थायित्व खतरे में पड़ जाएगा

परिचय➖आदेश की एकता के सिद्धांत का संक्षिप्त और सरल शब्दों में वर्णन किया जाए तो इसका यह अर्थ है कि किसी कर्मचारी को मात्र एक अधीनस्थ से ही आदेश मिलना चाहिए ताकि अधीनस्थ एकाग्रता बनी रहे और भ्रम दोहराव और अति राव की स्थिति पैदा ना हो

आदेश की एकता का अर्थ➖ आदेश की एकता का अर्थ है संगठन के अंतर्गत कार्य करने वाला कोई भी कर्मचारी अपने से ऊंचे एक से अधिक अधिकारी से आदेश ग्रहण नहीं करेगा यदि संगठन में किसी व्यक्ति से दो परस्पर विरोधी आदेशों को मानने के लिए कहा जाता है तो उसके परिणाम स्वरुप भ्रम और अकुशलता उत्पन्न होती है

संक्षेप में आदेश देने वाले के एक होने के कारण इसे आदेश की एकता (unity of command ) कहा जाता है

आदेश की एकता की परिभाषा➖ इस संबंध में “पिफनर,प्रेस्थस और फेयोल” की परिभाषाएं उल्लेखनीय है

पिफनर तथा प्रेस्थस के अनुसार➖आदेश की एकता से यह आशय है कि किसी संगठन का प्रत्येक सदस्य एक और केवल एक वरिष्ठ अधिकारी के प्रति जवाबदार होगा

फेयाल के अनुसार ➖ किसी कर्मचारी को केवल एक ही उच्च अधिकारी द्वारा आदेश दिया जाना चाहिए

आदेश की एकता के सिद्धांत की आवश्यकता ( The need of principle Of unity of command)

आदेश की एकता के सिद्धांत की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से उत्पन्न हुई है➖

  • किसी संगठन की संरचना दोहरे नियंत्रण के अनुकूल नहीं होती
  • एक ही व्यक्ति या विभाग के ऊपर जब दों अधिकारी सत्ता का प्रयोग करते हैं तो उनमें गड़बड़ी पैदा होने लगती है
  • किसी संगठन के प्रत्येक सदस्य को एक और केवल एक नेता के प्रति ही उत्तरदाई होना चाहिए
  • यदि आज्ञा प्रसारित करने वाले कर्मचारियों की संख्या 1 से अधिक हो तो उनमें विरोध अथवा भ्रांति उत्पन्न करवाकर अधीन कर्मचारी उसका लाभ उठा सकता है
  • यदि किसी संगठन में कर्मचारी अनेक अधिकारियों से आदेश ग्रहण करता है तो इस बात की संभावना हो सकती है कि उसे विरोधी आदेश प्राप्त हो और वह कठिन स्थिति में पड़ जाए
  • आदेश की एकता के अभाव में भ्रम उत्पन हो सकता है और उत्तरदायित्व का निश्चित करना कठिन हो सकता है

आदेश की एकता की विशेषताएं (Characteristics of order unity)

  • यह पद सोपानिक संगठनों से जुड़ा हुआ सिद्धांत है
  • इस सिद्धांत की मान्यता है कि एक कार्मिक को निकटस्थ अधिकारी से ही आदेश मिलने चाहिए
  • यह सत्ता उत्तर दायित्व और नेतृत्व को परिभाषित करता है
  • यह उच्च स्तर के प्रति अधीनस्थ की जवाबदेहीता को निर्धारित करता है

आदेश की एकता के गुण ( Merits of order unity )

1- यह संगठन में सत्ता के सूत्रों को स्पष्ट करता है
2- यह संगठन में अनुशासन और नियंत्रण की व्यवस्था को सुनिश्चित करता है
3- संगठन में संघर्ष और विवादों को उत्पन्न होने से रोकता है
4- यह संगठनात्मक उद्देश्यों में एकरूपता स्थापित करता है
5- यह सिद्धांत संगठन के अंतर्गत मितव्ययिता और कार्यकुशलता को स्थापित करता है
6- यह संगठन में प्रभावशाली संप्रेषण और पर्यवेक्षण को सुनिश्चित करता है
7- इस सिद्धांत से प्रशासन में कार्य कुशलता का विकास होता है
8- यह स्केलर पद्धति के अनुकूल है
9- कर्मचारियों में आज्ञा के संबंध में भ्रांति उत्पन्न नहीं होती इस कारण से प्रशासन के कार्यों में देरी नहीं होती
10- इसमें प्रत्येक कर्मचारी अपने तात्कालिक उच्च अधिकारी को अच्छी तरह से जानता है उसे यह पता रहता है कि उसे किस से आदेश ग्रहण करने हैं और वह किसके प्रति उत्तरदाई है

आदेश की एकता के दोष (Defects of order unity)

आदेश की एकता की कई आधारों पर आलोचना भी हुई है जो निम्न प्रकार है➖

1- इस सिद्धांत को कि आदेश की श्रंखला में एक व्यक्ति को केवल एक अधिकारी के ही आदेश मानने चाहिए प्रशासन में सार्वदेशिक रुप से लागू नहीं किया जा सकता

इसके कुछ अपवाद नहीं हो सकते हैं जैसे जिला स्तर पर एक तकनीकी कर्मचारी अपने तकनीकी विभाग के उच्च अधिकारी और सामान्य अधिकारी (कलेक्टर) दोनों का आदेश ग्रहण कर सकता है

2- यह संगठन में विशिष्टीकरण और पहल शक्ति को हतोत्साहित करता है
3- यह सार्वभौमिक रूप से उपयोगी सिद्धांत नहीं है साथ ही संगठन को रूढ़िवादी बनाता हे

4- टेलर ने इस सिद्धांत की आलोचना करते हुए लिखा है कि➖ इससे सैनिक प्रकार की चौधराहट का विकास होता है एक व्यक्ति को अपने कार्य के लिए विभिन्न टेक्नीशियन से निर्देश प्राप्त करने पड़ते हैं इसके बिना एक कर्मचारी दक्ष नहीं हो सकता!

टेलर कार्यात्मक फॉर्ममिन शिप सिद्धांत का प्रतिपादन करते हैं➖ जिसमें एक श्रमिक (अधीनस्थ )8 पर्यवेक्षकों से विशिष्टीकरण से युक्त आदेश प्राप्त करते हैं

सेकलर हड़सन ने➖ इसका विरोध अनुभव के आधार पर किया है इनकी मान्यता है कि अनुभव ने इसे अनुपयोगी, असंभव और काल्पनिक सिद्ध किया है

उनका मत है➖प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक उच्च अधिकारी की अवधारणा जटिल सरकारी स्थितियों में शायद ही कहीं वास्तव में पाई जाती है शासन में स्थित प्रशासक के कई स्वामी रहते हैं और वह उनमें से किसी की भी उपेक्षा नहीं कर सकता एक से वह नीति संबंधी आदेश प्राप्त करता है, दूसरे से कार्मिक, तीसरे से बजट,चोथेे से वितरण और उपकरण संबंधी

व्यवहारिक स्थिति में आदेश की एकता का सिद्धांत लागू करना कठिन है क्योंकि एक अधीनस्थ कार्य के विभिन्न भागों के संबंध में अलग-अलग उच्च स्तर से विशिष्टीकरण से युक्त आदेश प्राप्त करता है

मिलेट➖द्वैध पर्यवेक्षण की संकल्पना प्रतिपादित करते हैं और दो प्रकार के परीक्षणों का उल्लेख करते हैं
1- तकनीकी
2- प्रशासनिक

संक्षेप में➖नवीन लेखकों की दृष्टि से यह सिद्धांत पुराना पड़ गया है विशेषज्ञ की संख्या और महत्त्व में वृद्धि और प्रशासन के क्षेत्र में बढ़ती जटिलता ने आदेश की एकता के सिद्धांत को लगभग समाप्त कर दिया है

इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस के पालन से संगठन में एकता और स्थिरता बनी रहती है यह नियंत्रण को बड़े प्रभावशाली रूप से स्थापित करता है संगठन को अधिक शक्तिशाली और कार्यकुशल बनाता है

 

Organization theory unity of command important question and quiz

Q-1. आदेश की एकता सिद्धांत के दो लाभ बताइए ?
Ans-1.आदेश की एकता उत्तरदायित्व की अनिश्चितता संघर्षों और विवादों की समाप्ति और
?प्रभावशाली नियंत्रण, पर्यवेक्षण और संप्रेषण को सुनिश्चित करती है

Q-2. नियंत्रण के विस्तार क्षेत्र से आप क्या समझते हैं ?
Ans-2..अधीनस्थ कार्मिक कि वह अधिकतम संख्या जिसे एक उच्चाधिकारी प्रभावशाली रूप से निर्देशित नियंत्रित और पर्यवेक्षित कर सकने में सक्षम हो

Q-3. पदसोपान की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ?
Ans-3. इसके अंतर्गत सांगठनिक इकाइयों के मध्य कार्यों का विभाजन किया जाता है
– इसमें संगठन का आकार पिरामिड जैसा होता है
– प्रत्येक स्तर पर कार्मिकों के दायित्व और अधिकारों का स्पष्ट रुप से निर्धारण किया जाता है
– यह आदेश की एकता के सिद्धांत का पालन करती है
– इसके अंतर्गत उचित प्रक्रिया के सिद्धांत का पालन किया जाता है

Q-4. नियंत्रण का क्षेत्र और पदसोपान के मध्य संबंध को स्पष्ट कीजिए ?
Ans-4. नियंत्रण के क्षेत्र का पदसोपान व्यवस्था से घनिष्ठ संबंध होता है संगठन में पदसोपान का आकार नियंत्रण के विस्तार क्षेत्र पर निर्भर करता है और दोनों के मध्य व्युत्क्रमानुपाती संबंध पाया जाता है नियंत्रण के विस्तार क्षेत्र के छोटा होने पर पदसोपान श्रंखला लंबा कार रूप में होती है और यदि नियंत्रण का विस्तार क्षेत्र विस्तृत है तो पदसोपान का आकार छोटा होता है इस प्रकार नियंत्रण का विस्तार क्षेत्र पदसोपान को लंबा कार, चपटाकार और पिरामिड आकार रूप में स्थापित करता है

Q-5. नियंत्रण का क्षेत्र सिद्धांत को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना करते हुए इस धान के महत्व को स्पष्ट कीजिए?
Ans-5. नियंत्रण का विस्तार क्षेत्र का उद्भव ग्रेक्यूनास के ध्यान के विस्तार क्षेत्र से हुआ है नियंत्रण का क्षेत्र सिद्धांत का तात्पर्य है अधीनस्थों की वह अधिकतम संख्या जिसे एक उच्चाधिकारी प्रभावशाली रूप से निर्देशित नियंत्रित और पर्यवेक्षित कर सकता है

गुलिक मतानुसार➖ नियंत्रण क्षेत्र के निर्धारक तत्वों में कार्य ,समय और स्थान है

प्रोफेसर जियाउद्दीन खान➖ चार तत्व को स्वीकार करते हैं जो नियंत्रण के विस्तार क्षेत्र को प्रभावित करते हैं
1- वैयक्तिक पृष्ठभूमि
2- मानवीय पृष्ठभूमि
3- प्राविधिक पृष्ठभूमि
4- संगठनात्मक पृष्ठभूमि

सामान्यतः नियंत्रण के विस्तार क्षेत्र को निम्न तत्व प्रभावित करते हैं➖ ?

1-कार्य- कार्य की सरल प्रकृति ,दैनिक प्रकृति के कार्य व पद्धतियों के मानकीकरण की स्थिति में नियंत्रण का क्षेत्र विस्तृत किया जा सकता है

2-समय- यदि संगठन पुराना है तो उसकी परंपराएं और रीति-रिवाज विकसित होंगे कार्मिक कार्यों के संपादन के अभ्यस्त होंगे।ऐसी स्थिति में नियंत्रण का क्षेत्र विस्तृत रखा जा सकता है लेकिन संगठन नव स्थापित है तो उसमें समस्याओं के पुनरावृति होगी उसके रीति रिवाज और परंपरा विकसित होने से नियंत्रण का क्षेत्र छोटा रखना ही उचित रहता है

3-स्थान- संगठन की इकाइयां भौगोलिक रूप से दूर अवस्थित नहीं होने पर उन पर प्रभावी पर्यवेक्षण रखा जा सकता है अतः नियंत्रण का विस्तार विस्तृत रहता है विपरीत स्थिति में यह छोटा होगा

4-व्यक्तित्व- यदि संगठन में नियंत्रण कर्ता और अधीनस्थ दोनों योग्य और प्रतिभाशाली व्यक्तित्व से युक्त हैं तो नियंत्रण क्षेत्र विस्तृत होगा और विपरीत स्थिति में नियंत्रण का क्षेत्र छोटा रखना ही उपयुक्त होगा

5-प्रत्यायोजन की मात्रा- यदि संगठन में उच्च अधिकारी प्रत्यायोजन अधिक मात्रा में करता है तो उसके पास समय की उपलब्धता होगी परिणाम स्वरुप वह अधिक अधीनस्थों को नियंत्रित कर सकता है

6-विकेंद्रीकरण- विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया में नियंत्रण का विस्तार क्षेत्र अधिक रहता है

7-पर्यवेक्षण तकनीके- आधुनिक पर्यवेक्षण तकनीकों-फेक्स, टेलीफोन का प्रयोग करने पर यह विस्तृत रूप में होगा लेकिन परंपरागत तकनीकों के द्वारा पर्यवेक्षण किया जा रहा है तो यह क्षेत्र सीमित रूप में होगा

8-अन्य कारक- उचित संप्रेषण व्यवस्था, स्पष्ट नियोजन, स्टाफ अभिकरणों की सेवाएं इत्यादि नियंत्रण के विस्तार क्षेत्र को विस्तृत करते हैं

नियंत्रण की समस्या पद सोपान क्रम वाले संगठनों में पाई जाती इसका महत्व निम्न बिंदुओं से स्पष्ट होता है➖????

1- किसी संगठन के स्तरों की संख्या का निर्धारण इससे होता है
2- पदसोपान और नियंत्रण के क्षेत्र में निकट का संबंध है
3- अधिकारियों के नियंत्रण क्षेत्र को ध्यान में रखकर सीढ़ियों का निर्धारण
4- कर्मचारियों पर प्रभावशाली नियंत्रण की युक्ति
5- विलंब और अकुशलता पर रोक तथा कार्य की गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण पर निर्भर
6- सांगठनिक लक्ष्य की प्राप्ति को सुनिश्चित करता है
7- इस संगठन में बेहतर कार्य निष्पादन को सुनिश्चित करता है
8- संगठन में समन्वय और एकरूपता को स्थापित करता है
9- संगठन में अनुशासन के वातावरण को स्थापित करता है
10- यह संगठन में साम्राज्य निर्माण की प्रगति पर अंकुश स्थापित करता है

प्रश्न-6. नियंत्रण की सीमा के महत्व को स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर-1..नियंत्रण की सीमा के महत्व को संगठन में स्तरों का निर्धारण चित्रण के क्षेत्र का पदसोपान से संबंध आधिकारिक नियंत्रण की सीढ़ियों का निर्धारण कर्मचारियों पर प्रभाव कारी नियंत्रण की युक्ति और विलंब व अकुशलता पर रोक के रूप में देखा जा सकता है

प्रश्न-7. गैंग प्लांक क्या है ?
उत्तर-2. गैंग प्लांक एक प्रकार की पुल व्यवस्था है जिसका आशय स्तर छंलाग (Level Jumping)है इस व्यवस्था द्वारा एक विभाग या उप विभाग दूसरे विभाग या उप विभाग के कर्मचारी से संपर्क स्थापित कर सकता है यह आडा़ या तिरछा कैसा भी हो सकता है

प्रश्न-8. आदेश की एकता के सिद्धांत को अपनाने के प्रमुख कारणों का विवेचन करें ?
उत्तर-3. आदेश की एकता के नियम का पालन क्यों आवश्यक है इसके प्रमुख कारण निम्न प्रकार हैं
1- किसी संगठन की संरचना दौहरे नियंत्रण के अनुकूल नहीं
2- दो से अधिक अधिकारियों द्वारा सत्ता के एक व्यक्ति पर प्रयोग से गड़बड़ी पैदा होती है
3- यदि आज्ञा प्रसारित करने वाले अधिकारियों की संख्या 1 से अधिक है तो उनमें विरोध या भ्रांति उत्पन्न करवा कर अधीनस्थ कर्मचारी उनसे लाभ उठा सकता है
4- दो व्यक्तियों द्वारा एक व्यक्ति पर आदेश लागू करने पर अधीनस्थ को विरोधी आदेश प्राप्त हो सकते हैं
5- आदेश की एकता के अभाव में भ्रम उत्पन हो सकता है

प्रश्न-9. वी. ए. ग्रेक्यूनास के सूत्र की व्याख्या कीजिए ?
उत्तर-4.ग्रेक्यूनास ने नियंत्रण के क्षेत्र की जटिलता को गणितीय सूत्रों द्वारा स्पष्ट किया

ग्रेक्यूनास मानता है कि➖ नियंत्रण के क्षेत्र को केवल उच्चस्थ अधीनस्थों के एकल संबंध ही प्रभावित नहीं करते बल्कि इनके बीच निर्मित संबंध भी प्रभावित करते हैं इनका मानना है कि अधीनस्थों की संख्या में गणितीय दर(1,2,3,4…….) से वृद्धि होती है लेकिन इनके मध्य संबंधों में वृद्धि गुणोत्तर दर(2,4,6,8,10…..)से होती है

ग्रेक्यूनास तीन प्रकार के संबंधों का उल्लेख करते हैं➖
1- प्रत्यक्ष एकल संबंध–उच्चस्थ के अधीक्षकों के साथ संबंध=n(अधीनस्थों की संख्या)

2- प्रति संबंध–अधीनस्थों के परस्पर अंतर्संबंध=n(n-1)

3- प्रत्यक्ष समूह संबंध– उच्चस्थ के अधीनस्थ के साथ संभावित संबंध=n(2n-1)

ग्रेक्यूनास द्वारा कुछ संबंधों की व्याख्या के लिए निम्न सूत्र प्रतिपादित किया है➖
Total Relationship=n(2n/2+n-1)

प्रश्न-10. पदसोपान से क्या तात्पर्य है इसके अर्थ सहित परिभाषा कीजिए इसके प्रकारों को बताते हुए इसके गुण और दोषों की व्याख्या कीजिए?
उत्तर-5. संगठनात्मक सिद्धांतों में पदसोपान प्रमुख सिद्धांत है* शास्त्रीय चिंतक हेनरी फेयोल द्वारा इसे स्केलर चेन जब की मूरे और रेल द्वारा इसे स्केलर प्रोसेस कहा गया है

पदसोपान का परिचय➖ प्रशासन में ढांचे का निर्माण पदसोपान प्रणाली के आधार पर होता है यह संगठन में कार्यरत कर्मचारियों के मध्य संगठन के कार्य और सत्ता का विभाजन है इस विवाचन के फलस्वरुप सत्ता पर आधारित एक ऐसे प्रशासनिक ढांचे का निर्माण होता है जिसमें उच्च अधिकारी और निम्न अधिकारियों के मध्य संबंधोंका वर्णन एक सोपानात्मक ढांचे में दर्शाया जाता है

वास्तव में पदसोपान उच्च और अधीनस्थ कर्मचारियों के मध्य स्पष्ट विभेदो का नाम है

पद सोपान का अर्थ➖ पदसोपान का शाब्दिक अर्थ है श्रेणीबद्ध प्रशासन अंग्रेजी में इसे हाय शर्कीकहते हैं जिसका मतलब है निरंतर उच्चतर शासन अथवा नियंत्रण इस अर्थ में प्रत्येक उच्च अधिकारी अपने तात्कालिक अधीनस्थ कर्मचारी को आज्ञा देता है अथार्थ उच्चतर का निम्न स्तर पर शासन! संगठन में प्राधिकार और उत्तरदायित्व के आधार पर पदों और कर्तव्य की उत्तरोत्तर व्यवस्था करना ही पदसोपान है

यह नियंत्रण और निर्देशन की केंद्रीय कृत व्यवस्था है श्रम विभाजन प्रत्यायोजन नियंत्रण का विस्तार क्षेत्र आदेश की एकता उचित प्रक्रिया का सिद्धांत पदसोपान से जुड़े सिद्धांत हैं

पदसोपान की परिभाषा➖ कोई संगठन पदसोपान के सिद्धांत पर आधारित है ,कहने का तात्पर्य यह है कि उसमें सत्ता नीचे से शिखर की ओर उतरती चलीजाती है इस संबंध में अर्थ आलम और एल.डी.ह्वाइट की परिभाषा उल्लेखनीय है

अर्थ आलम के अनुसार ➖ पदसोपान निम्न और उच्च व्यक्तियों का श्रेणी बंद रूप में व्यवस्थित संगठन है

एल. डी. ह्वाइटके अनुसार ➖ पदसोपान संगठन के ढांचे में ऊपर से लेकर नीचे तक उत्तरदायित्व के अनेक सोपानों द्वारा उच्च और अधीनस्थ संबंधों का सार्वभौमिक प्रयोग ही है

पदसोपान के प्रकार
पिफनर,प्रेस्थस और शैडवुड मैं पदसोपान प्रणाली के चार प्रकार बताए हैं➖

1- कार्य आधारित पद सोपान– कार्य आधारित पद सोपान में कर्मचारी का स्थान उसके द्वारा किए जा रहे कार्यों और उसके अधिकारों और कर्तव्यों द्वारा निर्धारित होता है

2- प्रतिष्ठा आधारित पद सोपान– प्रतिष्ठा आधारित पद सोपान में स्थिति कार्यों और उत्तरदायित्व के आधार पर ना होकर व्यक्ति के पद के आधार पर होती है

3- कुशलताओं का पद सोपान– कुशलताओं के पद सोपान में योग्यता और दक्षता पर बल दिया जाता है

4- वेतन आधारित पद सोपान– वेतन आधारित पदसोपान में सर्वोच्च वेतन पाने वाला सर्वोच्च शिखर पर और निम्न वेतन पाने वाला निम्न शिखर पर होता है

पदसोपान प्रणाली के गुण➖
1- आदेश की एकता के सिद्धांत का पालन करता है
2- नेतृत्व का निर्धारण
3- समग्रीकरण
4- उचित मार्ग द्वारा कार्य
5- यह संगठन में प्रत्यायोजन को आसान बनाता है
6- यह संगठन में आदेश, संचार और फीडबैक का मार्ग सुनिश्चित करता है
7- यह संगठन में समन्वय और अनुशासन को स्थापित करता है 8-यह संगठन की सभी इकाइयों और पद स्तरों को एक इकाई के रूप में एकीकृत करता है
9- 8च्च इस तरह पर कार्यभार को कम करता है और विकेंद्रीय कृत निर्णयन को स्थापित करता है

इस प्रणाली के आधार पर एक व्यक्ति केवल एक ही व्यक्ति के अधीन रहकर कार्य करता है संगठन को विभिन्न स्तरों में विभाजित करके यह निश्चित कर दिया जाता है कि कौन किसका नेतृत्व करेगा

विभिन्न इकाइयां परस्पर एकीकृत और सुसंबंध होती है प्रत्येक कार्य अपने निर्धारित मार्ग अथवा उचित माध्यम द्वारा संपन्न होता है इस प्रक्रिया द्वारा अधिकारी अपने अधीनस्थ को कुछ शक्तियां प्रत्यायोजित कर सकता है इसके द्वारा ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर की ओर संचार का महत्व प्रशस्त होता है समूचे विभाग की कार्यवाहियों में संबंध में स्थापित होता है

पदसोपान प्रणाली के दोष➖
1- यह संगठन में लालफीताशाही (कार्य में अनावश्यक देरी )लाता है
2- यह संगठन में नवाचार और सर्जनात्मकता को हतोत्साहित करता है
3- यह संगठन में उच्चस्थ- अधीनस्थ संबंधों को स्थापित करता है जो मानवीय गरिमा के विरुद्ध है
4- इसमें अधीनस्थों को पहल शक्ति प्राप्त ना होने से उन में उत्साह और मनोबल क्षीण प्रकृति का होता है
5- यह संगठन में कठोरता को स्थापित करता है
6- यह औपचारिक संबंधों पर आधारित होता है
7- इस में लचीलेपन का अभाव पाया जाता है

कार्य करने में उचित माध्यम की प्रक्रिया अपनाने पर अनावश्यक विलंब होता है, पदसोपान से लालफीताशाही और नौकरशाही में वृद्धि होती है

नियमों पर कठोरतापूर्वक बल दिए जाने के कारण सोहार्द पूर्ण मानवीय संबंधों का विकास नहीं हो पाता इससे प्रशासनिक संगठन में लचीलेपन का अभाव पैदा होता है जिससे संगठन के लोगों में आपसी जीवंत संबंधों का भली-भांति विकास नहीं हो पाता

गैंग प्लांक

पदसोपान व्यवस्था में निहित दोषों को दूर करने के लिए फैयाल ने एक पुल व्यवस्था का निर्माण किया है जिसे “”गैंग प्लांक”” कहते हैं जिसका तात्पर्य है लेवल जंपिंग (Level Jumping) यह समन्वय की एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें एक विभाग या उप विभाग का कर्मचारी सीधे-सीधे भी दूसरे उपविभागीय विभाग के कर्मचारियों से संबंध स्थापित कर सकता है यह पुल व्यवस्था आडी या तिरछी कैसी भी हो सकती है

संक्षेप में➖ पदसोपान पद्धति में दोषो की अपेक्षा गुण अधिक हैं इस पद्धति में यह सुनिश्चित और स्पष्ट हो जाता है कि कौन किसके अधीन है और कौन किस को आदेश देगा इससे संगठन के उद्देश्य की पूर्ति में बहुत सहायता मिलती है

 

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NO OF QUESTION- 18

0%

1. प्रशासन सम्बन्धी एकीकृत दृष्टिकोण के अनुसार प्रशासन मे निहित है -

Correct! Wrong!

2. लोक प्रशासन के क्षेत्र संबधी संकुचित दृष्टिकोण के समर्थक है -

Correct! Wrong!

3. प्रशासन का लक्षण नही है -

Correct! Wrong!

4. पोस्टकार्ड मे S संकेताक्षर का अर्थ है -

Correct! Wrong!

5. पोस्टकार्ड दृष्टिकोण मे कितनी तकनीको का उल्लेख है -

Correct! Wrong!

6. लोक प्रशासन प्रत्यक्षतः सम्बन्धित है -

Correct! Wrong!

7. पाठ्यक्रम के रूप मे तुलनात्मक लोक प्रशासन को किस वर्ष मान्यता प्राप्त हुई -

Correct! Wrong!

8. वर्तमान राज्य को, प्रशासकीय राज्य की उपमा देने वाले विद्वान है -

Correct! Wrong!

9. श्री महादेव प्रसाद शर्मा, लोक प्रशासन को विषय रूप मे मानते है -

Correct! Wrong!

10. विकास प्रशासन मे 4P मे सम्मिलित नही है

Correct! Wrong!

11. "पद सोपान व्यवस्था में एक तरह तो संगठन की एकरूपता बनी रहती हैं तथा दूसरी तरफ सत्ता का हस्तांतरण भी होता रहता हैं" यह कथन किसका है?

Correct! Wrong!

12. पिफ्नर तथा शेरवुड ने पद सोपान को कितने भागों में बांटा हैं?

Correct! Wrong!

13. पद सोपान प्रणाली के बारे में यह कथन किसका है?"यह एक धागा है जिसके द्वारा विभिन्न हिस्से एक साथ सिले जाते है"।

Correct! Wrong!

14. कौनसा पद सोपान प्रणाली का दोष नहीं है?

Correct! Wrong!

15. फेयोल के अनुसार एक बडे उधम के शिखर पर स्थित प्रबंधक के नीचे कितने कर्मचारी होने चाहिए?

Correct! Wrong!

16. संबंध के मुख्य रूप से कितने प्रकार है

Correct! Wrong!

17. 1-नियंत्रक का व्यक्तितव 2-कार्य 3 समय 4-स्थान 5-नियंत्रक की पारिवारिक परिस्थितियाँ निम्नलिखित में से कौन कौन नियंत्रण के क्षेत्र पर प्रभाव डालते है

Correct! Wrong!

18. 'गैग प्लांक'व्यवस्था किससे संबंधित हैं

Correct! Wrong!

Organization theory Quiz ( लोक प्रशासन एवं प्रबंधन संगठन के सिद्धांत )
VERY BAD! You got Few answers correct! need hard work.
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Specially thanks to ( With Regards ) 

ममता शर्मा, ममता मीना जयपुर, ओमप्रकाश सहारण बाडमेर