Palace and Havelis

( राजस्थान के महल और हवेलियाँ )

Palace 

सुनहरी कोठी  ( Golden Mansion )

स्थिति= टोंक जिले में

इसका निर्माण 1824 ईस्वी में अमीर खाँ पिंडारी द्वारा करवाया गया। इस शीश महल के मान भी जानी जाती है। ये दो मंजिला कोठी है, इसकी दूसरी मंजिल का निर्माण इब्राहिम अली खां ने करवाया था।

इस कोठी पर स्वर्ण की नक्काशी का कार्य भी इब्राहिम खाँ द्वारा करवाया गया। तब से इसे सुनहरी कोठी कहा जाने लगा. अतः सुनहरी कोठी का निर्माता इब्राहिम खाँ हो ही मानते है।

जलमहल ( Jal mahal )

  • The Island palace
  • स्थिति = जयपुर-आमेर मार्ग

जलमहल मानसागर झील में स्थिति है सवाई जयसिंह ने जयपुर की जलापूर्ति हेतु गर्वावती नदी के पानी को रोककर इसका निर्माण करवाया था।

ध्यान रहे – इसका पूर्ण रूप से निर्माण सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था।

जग मंदिर ( Jag mandir )

लोकप्रिय शब्दों में जग मंदिर, झील गार्डन पैलेस, पिछोला झील के चार द्वीपों में से एक पर स्थित है। मेवाड़ राजवंश के तीन सिसोदिया राजपूत राजाओं ने महल का निर्माण किया।

महाराणा अमर सिंह ने पहली बार 1551 में महल का निर्माण शुरू किया। बाद में, महाराणा कर्ण सिंह ने 1620 और 1628 के बीच कुछ काम कराया। महाराणा जगत सिंह प्रथम ने (1628-1652) महल के निर्माण कार्य को पूरा किया।

यह जग मन्दिर के रूप में अंतिम राजा महाराणा जगत सिंह के नाम पर नामित किया गया। जग मंदिर में गुल महल मुगल राजकुमार खुर्रम के लिए बनाया गया था।

महल के शीर्ष पर इस्लामी वर्धमान के साथ एक गुंबद है। इमारत के अंदर, हॉल, स्वागत क्षेत्र, अदालतें, और आवासीय स्थान हैं। कुंवर पाडा का महल या युवराज पैलेस जग मंदिर के पश्चिम में स्थित है। मंडप शानदार हाथी संरचना के पत्थर के साथ सजाया गया है।

यहाँ महल में एक फूल बगीचा भी है। यात्री बगीचे में बोगनवेलिया, चमेली, काई गुलाब, फ्रैंगीपानी के पेड़ों और खजूर के पेड़ो को देख सकते हैं।

जगनिवास ( Jug Niwas )

जगनिवास महल का निर्माण महाराणा जगत सिंह ने 1746 ई. में करवाया था महाराणा उदयसिंह ने इसकी मरम्मत करवाई। वर्तमान में यहां होटल लैक पैलेस संचालित है।

Havelis

जैसलमेर की हवेलियाँ ( Jaisalmer havelis )

1. पटवों की हवेली ( Haveli of patwon )

यहाँ की पटवों की हवेली अपनी शिल्पकला, विशालता एवंअद्भुत नक्काशी के कारण प्रसिद्ध है पटवों की हवेली को सेठ गुमानचन्द बापना  ने 18 वीं सदी के उत्तरार्द्ध में बनवाया था। जैसलमेर की सबसे बड़ी यह पाँच मंजिला हवेली शहर के मध्य स्थित है

इस हवेली के जाली-झरोखे बरबस ही पयर्टकों को आकर्षित करते हैं।

2. सालिमसिंह की हवेली ( Salem Singh’s Haveli )

पटवों की हवेली के अतिरिक्त जैसलमेर में स्थित सालिमसिंह की हवेली का शिल्प-सौन्दर्य भी अद्वितीय है इसका निर्माण जैसलमेर राज्य के दीवान सालिम सिंह ने 1815 ई. में करवाया था इस नौ खण्डी हवेली के प्रथम सात खण्ड पत्थर के और ऊपरी दो खण्ड लकड़ी के बनेहुए थे। बाद  में  लकडी़  के  दोनों  खण्ड  उतार लिये गए।

3. नथमल  की  हवेली –

जैसलमेर राज्य के प्रधानमंत्री नथमलजी द्वारा 19वीं शताब्दी में निर्मित नथमल की हवेली भी शिल्पकला कीदृष्टि से अपना अनूठा स्थान रखती है  इस हवेली का शिल्पकारी का कार्य हाथी और लालू नामक दो भाइयों ने इस सकंल्प के साथ शुरू किया था कि वे हवेली में प्रयुक्त शिल्प  को दोहराएंगे  नहीं, इसी कारण इसका शिल्प अनूठाहै।

शेखावाटी की हवेलियाँ ( Shekhawati Havelis )

ये अपने भित्तिचित्रों के लिए विख्यात हैं शेखावाटी की हवेलियाँ स्वर्णनगरी के रूप में विख्यात हैं

  • नवलगढ़ (झुंझुनूं)  में सौ से ज्यादा हवेलियाँ अपनी शिल्पसौन्दर्य बिखेरे हुए हैं यहाँ की हवेलियों में रूप निवास,भगतो की हवेली, जालान की हवेली, पोद्दार की हवेली और भगेरियाँ की हवेली प्रसिद्ध हैं।
  • बिसाऊ (झुंझुनूं) में नाथूराम पोद्दार की हवेली, सेठजयदयाल केठिया की, हीराराम बनारसी लाल की हवेली तथा सीताराम सिंगतिया  की हवेली प्रसिद्ध है।
  • झुंझुनूं में टीबड़ेवाला की हवेली तथा ईसरदास  मोदी  की हवेली अपने शिल्प वैभव के कारण अलग ही छवि लिए हुएहैं।
  • मण्डावा (झुंझुनूं) में सागरमल लाडिया, रामदेव चौखाणी तथा रामनाथ गोयनका की हवेली, डूंडलोद (झुंझुनूं) मेंसेठ लालचन्द गोयनका,  मुकुन्दगढ़ (झुंझुनूं) में सेठ राधाकृष्ण एवं केसरदेव कानोड़िया की हवेलियाँ प्रसिद्ध है
  • चिड़ावा(झुंझुनूं) में बागड़िया की हवेली, डालमिया की हवेली प्रसिद्ध है।
  • महनसर (झुंझुनूं) की सोने -चाँदी की हवेली प्रसिद्ध है।
  • श्रीमाधोपुर(सीकर) में पंसारी की हवेली ( Pansari haveli ) प्रसिद्ध है।
  • लक्ष्मणगढ़ (सीकर) केडिया एवं राठी की हवेली प्रसिद्ध है।
  • सीकर में गौरीलाल बियाणी की हवेली ( Gaurilal Biyani Ki Haveli ) प्रसिद्ध है।
  • रामगढ़ (सीकर)में ताराचन्द रूइया की हवेली समकालीन भित्तिचित्रों के कारण प्रसिद्ध है
  • फतेहपुर (सीकर) में नन्दलाल देवड़ा,कन्हैयालाल गोयनका  की हवेलियाँ भी भित्तिचित्रों केकारण प्रसिद्ध है।

झुंझुनूं जिले की ये ऊँची-ऊँची हवेलियाँ बलुआ पत्थर,ईंट, जिप्सम एवं चूना, काष्ठ तथा ढलवाँ धातु के समन्वयसे निर्मित अपने अन्दर भित्ति  चित्रों की छटा लिये हुए हैं।

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

गजेंद्र शर्मा, P K Nagauri

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