2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल जनसंख्या 6.85 करोड़ है इसमें से 122.21 लाख ( 17.8 प्रतिशत) अनुसूचित जाति तथा 92.38 लाख (13.46% )अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या है तथा कुल जनसंख्या में अनुसूचित जाति की साक्षरता दर 41.06 % तथा अनुसूचित जाति की साक्षरता दर 44.34% है

‘अनुसूचित जातियां’ शब्द लगभग आधी शताब्दी से प्रचलित है इसका पहली बार प्रयोग 1935 में भारत सरकार अधिनियम में किया गया था अप्रैल 1936 में ब्रिटिश सरकार ने भारत सरकार (अनुसूचित जाति) आदेश जारी किया था जिसमें असम, बंगाल, बिहार, मध्य प्रांत, मद्रास, उड़ीसा, पंजाब को संयुक्त प्रांत के तत्कालीन प्रांतों की कुछ जातियां तथा जनजातियों को अनुसूचित विनीदृष्टि किया गया था

इसके पहले यह जातियां दलित(Depressed) कहलाती थी तथा 1931 की जनगणना में दलित वर्ग को सुव्यवस्थित ढंग से वर्गीकृत किया गया था और 1936 में जारी की गई अनुसूचित जातियों की सूची दलित वर्गों की पहली सूची जैसी थी

1950 में जो सूची बनाई गई वह पहली सूची में संशोधन करके बनाई गई थी तथा इन सूचियों को अनुच्छेद 341 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित किया गया था इसी बीच गैर सरकारी इस्तेमाल में हरिजन शब्द काफी प्रचलित हुआ था

अनुसूचित जाति नाम की उत्पत्ति प्रशासनिक है ना कि सामाजिक, अनुसूचित जातियों की उत्पत्ति ही जाति प्रथा की अत्यधिक भेदभाव वाली और अमानवीय प्रकृतियों के परिणाम स्वरुप हुई है अस्पृश्यता से प्रव्यक्त आनुष्ठानिक पवित्रता/प्रदूषण जाति प्रथा की अत्यधिक भेदभाव वाली प्रकृति का अपरिहार्य आधार है

भारत सरकार – 20 सितंबर 1976 एवं राजस्थान सरकार 27 जुलाई 1977 में जारी आदेश अनुसार अनुच्छेद 341 राष्ट्रपति को किसी भी जाति मूल वंश या जनजाति को अनुसूचित जाति घोषित करने के लिए सशक्त करता है

अस्पृश्यता के विरुद्ध विधान और सिविल अधिकारों की रक्षा 

1. 1955 के अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम- को व्यापक रूप से संशोधित करके 1976 को अस्पृश्यता (अपराध) संशोधन तथा प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम 19 नवंबर 1976 से लागू हुआ  इस अधिनियम अस्पृश्यता (अपराध) के आधार पर किसी को उन अधिकारों का जो अस्पृश्यता उन्मूलन के स्वरुप उसे प्राप्त हुए हैं उनका उपभोग करने से वंचित करने वाले को दण्ड या शास्ति की व्यवस्था की गई है

2. 1951 के लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम- की आठवीं धारा में इस बात का उपबंध है कि जो व्यक्ति इस अधिनियम के तहत दोषी पाया गया तो दोष सिद्धि की तिथि से आगामी 6 वर्षों तक के लिए संसदीय या विधानसभा के चुनाव नहीं लड़ सकता है
तथा 1955 का P C R अधिनियम राज सरकार द्वारा प्रशासित किया जा सकता है इस अधिनियम की धारा 15ए(4) के उपबंधों के अनुसार सरकार प्रतिवर्ष संसद के सामने धारा 15 ए के उपबंधों के कार्यकरण की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करती है

3 सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955- की धारा 15ए(2) के उपबंध के अनुसार राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन को केंद्रीय सहायता दी जाती है संविधान के अनुच्छेद 17 के अंतर्गत अस्पृश्यता का उन्मूलन कर दिया गया है
बाद में इस अधिनियम में संशोधन करके इसे सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 की संज्ञा दी गई है जिसके अंतर्गत अस्पृश्यता बरतने को असंगेय और अक्षमनीय अपराध बनाया गया है

4 अनुसूचित जाति और जनजाति (क्रूरता निवारण) अधिनियम 1989- 31 जनवरी 1990 को अनुसूचित जातियों और जनजातियों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को रोकने के लिए तथा उसके प्रति लोगों को निर्भय करने के लिए इस अधिनियम को पारित किया गया था

5. राजस्थान अनुसूचित जाति आयोग- राजस्थान में अनुसूचित जातियों को दी जाने वाली सुविधाओं को उचित लाभ दिए जाने हेतु विचार करने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा अनुसूचित जाति आयोग का 30 नवंबर 2011 को गठन किया गया
इस आयोग में 3 सदस्य होते हैं जिसमें एक अध्यक्ष एक उपाध्यक्ष और एक सदस्य होगा जिनका मनोनयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है

6. सम्बल ग्राम विकास योजना 1997- यह योजना वर्ष 1997 में लागू शत-प्रतिशत राज्य योजना है अगस्त 2009 से ऐसे गांव जिनकी अनुसूचित जाति की जनसंख्या जनगणना वर्ष 2001 के अनुसार 40% या उससे अधिक है को संबल ग्राम माना गया है ऐसे गांव की संख्या 4110 हैं  एक सम्बल ग्राम में एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹500000 की राशि स्वीकृत की जा सकती है इस स्वीकृत राशि से पक्की सड़क, पानी की जीएलआर पाइप लाइन, बिजली के खंबे, विद्यालय भवन का निर्माण करवाया जा सकता है

उक्त के अतिरिक्त कार्य हेतु निदेशालय से पूर्वानुमति ली जानी होती है

7. अंबेडकर पुरस्कार योजना 2005- बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की वर्ष 2005 में 114 वी जयंती समारोह में विभाग की ओर से प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर विभिन्न क्षेत्रों में अंबेडकर पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के छात्र छात्राओं को जिन्होंने कक्षा 10वीं व 12वीं में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए हैं को अंबेडकर शिक्षा पुरस्कार स्वरुप 51000 रूपये दिए जाते हैं

8. अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना 2013- छुआछूत उन्मूलन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के युवक/युवतियों द्वारा स्वर्ण हिन्दू जातियों के युवक/युवतियो से विवाह करने पर दंपति को अंतरजातीय विवाह योजना अंतर्गत दिनांक 31 मार्च 2013 तक वितरण हेतु प्रोत्साहन राशि ₹50 हजार प्रति युगल एवं दिनांक 1 अप्रैल 2013 से विवाहित प्रकरणों हेतु प्रोत्साहन राशि ₹500000 देने का प्रावधान किया गया है

जनजातीय विकास हेतु प्रमुख संस्थाएं

1. वनवासी कल्याण परिषद, उदयपुर- आदिवासी लोगों में चेतना का संचार और हर संभव तरीके से सहायता दिलाने के लिए आदिवासी कल्याण परिषद उदयपुर का गठन किया गया जिसका प्रसिद्ध नारा आदिवासी को गले लगाओ है

2 जनजाति विकास विभाग, 1975- अनुसूचित जाति जनजाति क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास विकास की विभिन्न योजनाओं का निर्माण, समन्वय, नियंत्रण एवं निर्देशन जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के प्रशासन एवं जीवन स्तर को उन्नत करने के उद्देश्य से इसकी स्थापना की गई

3 अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम 1989- यह देश में अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक विकास के लिए प्रयत्नशील सभी एजेंसियों के लिए एक शीर्ष संस्थान के रूप में कार्य करता है

4. राजस्थान अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग 2001- राज्य की अनुसूचित जाति एवं जनजाति की समस्याओं के समाधान एवं इन वर्गों के सर्वांगीण विकास की योजनाओं को मॉनिटरिंग एवं आवश्यक सुझाव देने हेतु इसका गठन किया गया

5. बहुउद्देशीय वृहद समितियां (LAMPS) 1974- जनजातियों की अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति एक स्थान पर हो, उनकी ऋण एवं विपणन की आवश्यकताओं की पूर्ति विशेष रूप से इन्हीं समितियों द्वारा की जाती है बहुउद्देशीय समितियों की नीति भी जनजाति उन्मुख (ट्राइबल ओरिएंटेड) होनी चाहिए इनके लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में जनजातियों के प्रतिनिधियों को रखा जाना आवश्यक होता है

6. ट्राइबल कोआपरेटिव मार्केटिंग डेवेलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (Tribal cooperative marketing development federation of india : TRIFED)-  जनजातियों को व्यापारियों के शोषण से बचाने और उनके छोटे-छोटे वनोंत्पाद एवं फालतू खेतिहर उत्पादों के यथोचित मूल्य की प्राप्ति को सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने 1987 में ट्राईफेड का गठन किया
इसकी प्राधिकृत शेयर पूंजी 20 करोड़ है अप्रैल, 1988 से यह प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है

अपने प्रथम कार्य वर्ष में इसने 12 वस्तुओं का व्यापार हाथ में लिया था लगभग सभी वस्तुओं की जो ऊंची कीमत जनजाति को दी जाती है वह पीछे के सो वर्षों में उन्हें कभी नहीं प्राप्त हुई थी

अपने द्वित्तीय वर्ष 1989-90 में इसे निर्यात के स्त्रोत एजेंसी नियुक्त किया गया  तिलहन के बीजों और अन्य वस्तओं का संग्रह करने तैयार करने और उनका भंडारण करने की शीर्ष केंद्रीय एजेंसी भी घोषित किया गया

7. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति वित्त विभाग निगम- एन एस एफ डी सी (National schedule cast and schedule tribe finance and development corporation: NSFDC) – भारत सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25 के अंतर्गत नेशनल शेड्यूल कास्ट शेड्यूल ट्राइब फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कारपोरेशन की स्थापना की गई जिसमें 8 फरवरी 1989 से अपना कार्य किया इसका प्रत्येक प्राधिकृत शेयर 1000 रुपए का है और समादत शेयर पूंजी 50 करोड़ है जो सबकी सब सरकार द्वारा धारित है

8. जनजातीय सलाहकार समिति- संविधान की पांचवी अनुसूची में दिए गए प्रावधानों के अनुसार आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उड़ीसा तथा राजस्थान जैसे जनजाति क्षेत्र वाली सभी राज्यों में जनजातीय सलाहकार समिति का गठन किया गया

जनजाति सलाहकार समिति में अधिक से अधिक 20 सदस्य होते हैं इसमें दो तिहाई सदस्य विधान सभा में अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व करते हो ऐसे रखे जाते हैं तथा इन से संबंधित नियमों को बनाने में राज्यपाल अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है तथा राज्य का मुख्यमंत्री ही इन समितियों एवं संगठनों का अध्यक्ष होता है

ढेवर कमीशन – ने भी इस परम्परा का समर्थन करते हुए सुझाव दिया है कि किसी भी जनजातीय सलाहकार समिति का अध्यक्ष ऐसे ही व्यक्ति को होना चाहिए जिसका प्रभाव सभी विभागों पर हो क्योंकि कल्याण योजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया में विभिन्न विभागों की सेवाओं तथा उनकी सहायता की आवश्यकता पड़ती है

9. माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान उदयपुर- उदयपुर में आयड़ नदी के किनारे स्थित इस संस्थान की स्थापना 2 जनवरी 1964 को जनजाति लोगों की विकास जीवन स्तर एवं सामाजिक सांस्कृतिक दृष्टि से राष्ट्रीय धारा में जोड़ने हेतु की गई थी 1979 में यह संस्थान जनजाति विकास निगम के अधीन चला गया
जनजाति विकास के क्षेत्र में अनुसंधान प्रशिक्षण नीति विश्लेषण एवं परामर्श सेवाओं के लिए यह भारत के आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थानों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है

संस्थान का मुख्य उद्देश्य- जनजाति विकास हेतु केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं अन्य संस्थाओं की विभिन्न योजनाओं की क्रियान्विति एवं प्रभावों का मूल्यांकन करना, जनजातियों की भावी विकास, जरूरतों की पहचान करना तथा राज्य की जनजाति समुदायो के आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं पर प्रगतिशील अध्ययन और चिंतन को प्रोत्साहित करना है

संस्था की कार्यप्रणाली- संस्थान अपने मूल्य उद्देश्य की प्राप्ति हेतु चार प्रमुख प्रशाखाओं के माध्यम से कार्यरत है संस्थान की लगभग समस्त गतिविधियां इन्ही चारों प्रशाखाओं के माध्यम से संचालित की जाती है

10. राजस्थान जनजाति क्षेत्रीय विकास सहकारी संघ (राजस संघ) उदयपुर, मार्च 1976- राजस्थान के दक्षिणी भाग में रहने वाले आदिवासियों के विकास एवं कल्याण हेतु 27 मार्च 1976 में सहकारी अधिनियम 1965 के अधीन राजस संघ को शीर्ष संस्था के रूप में पंजीकृत किया गया

एक वर्ष बाद ही सहरिया परियोजना क्षेत्र भी कार्य क्षेत्र में सम्मिलित कर लिया गया राजस संघ का मुख्य कार्यालय उदयपुर में है

जनजातीय उपयोजना क्षेत्र की 27 एवं सहरिया क्षेत्र की दो कुल 29 पंचायत समितियां 23 तहसीलों में 268 लैंपस के माध्यम से एवं सीधे राजस संघ के द्वारा अपने उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है

राजस संघ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य-
1. अपने कार्य क्षेत्र में लोगों के लिए संचित सेवाओं की व्यवस्था करना
2. उन्हें ऋण ग्रस्तता से राहत दिलाना
3. व्यापारियों एवं साहूकारों द्वारा शोषित किए जाने से बचाना
4. विकास के अंतर को कम करने के लिए एवं निर्धनता उन्मूलन के कार्य करना
5. कृषि एवं अन्य उत्पादन, उपाधि, विपणन, प्रसंस्करण तथा विक्रय को और आदानों, उपभोग माल को संगठित करना, बढ़ावा देना, अच्छे बीज एवं उपभोक्ता माल, स्वशासी निकायों के एजेंट के रूप में कार्य करना

सरकार ने जनजाति लोगों को सुविधाएं पहुंचाने एवं उनका विकास करने के लिए आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए निम्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई है~

1. ट्राइबल सब प्लान एरिया योजना~ इस योजना के द्वारा जनजातीय क्षेत्र में सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, सामाजिक सेवा, ग्रामीण विकास, कृषि विकास और सहायक सेवाओं का विकास करना है ।
2. आई आर डी पी योजना~ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने के लिए आईआरडीपी योजना चलाई गई है!
3. मॉडिफाइड एरिया डेवलपमेंट एप्रोच~ इस कार्यक्रम के तहत 10000 की आबादी वाले 44 मांडा ब्लाक 7 जिलों में जहां 50% जनजाति निवास करती हो इस कार्यक्रम की क्रियान्विति के लिए चुने गए हैं मांडा क्लस्टर योजना के अंतर्गत 9 जिलों का चयन किया गया है इसमें 161 गांव और 37185 लोगों को लाभांवित किया गया है माडा योजना पर नवी पंचवर्षीय योजना (1997 से 2000) में 30.5 करोड़ रुपए खर्च किए गए है।

4. बिखरी हुई जनजाति जनसंख्या के विकास की योजना ~ 13.53 लाख की बिखरी हुई जनजाति के लोगों के कल्याण के लिए योजना चलाई गई है यह योजना मांडा भांडा कलस्टर एवं शहरी विकास कार्यक्रम से अलग लोगों के लिए है।

5. सहरिया विकास कार्यक्रम~ बारां जिले के किशनगंज एवं शाहाबाद पंचायत समितियों के सहरिया जनजाति के लोगों के लिए उनके कल्याण के लिए योजना चलाई गई है। इसके द्वारा इनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु कृषि पशुपालन ,शिक्षा ,चिकित्सा, शिक्षा में सुधार करता है शायरियां विद्यार्थी निशुल्क शिक्षा ,भोजन, आवास ,किताबें ,वर्दी आदि प्राप्त करते हैं ।सहरिया लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में 25% आरक्षण का प्रावधान रखा गया है। नवी योजना में सहरिया विकास कार्यक्रमों पर 5.62 करोड रुपए व्यय किए गए हैं।

अन्य कार्यक्रम~ राजस्थान में जनजाति क्षेत्र के विकास के लिए महाराष्ट्र पैटर्न को क्रियान्वित करने का निर्णय लिया गया है-

  • रेमम कार्यक्रम
  • नारू बीमारी उन्मूलन कार्यक्रम
  • जनजातियों के लिए प्रादेशिक विकास सहकारिता संगठन
  • रोजगार गारंटी कार्यक्रम
  • कृषि और पशुपालन कार्यक्रम
  • वृक्षारोपण कार्यक्रम

 रोजगार कार्यक्रम

  • रुख भायला कार्यक्रम
  • एकलव्य योजना निशुल्क
  • शिक्षा योजना पुस्तके आवास
  • सामाजिक और समाज विकास कार्यक्रम

विशिष्ट कार्यक्रम

  • आय और संसाधन विकास कार्यक्रम
  • विशेष क्षेत्र विकास कार्यक्रम
  • पूर्ण रोजगार संभावनाएं बनाने की कार्य योजना(fwp,) (nrep) (irdp) (rlegp) (jry) अनुसूचित जाति कल्याण कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है।
  • जनजाति विकास के लिए 7 वी योजना में 431 करोड़ रुपए व्यय हुए किए गए जबकि आठवीं योजना में 1535 करोड रुपए व्यय किए गए।
  • वर्ष 1994-95 में आपणी दुकान योजना प्रारंभ

 जनजाति क्षेत्रीय विकास सहकारी संघ की राज्य सरकार ने स्थापना 1976 में उदयपुर मुख्यालय बनाकर की। इसके द्वारा जनजातीय क्षेत्र के आदिवासियों को उचित मूल्य पर रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुएं एवं खाद्यान्न के वितरण की व्यवस्था है। इसका क्षेत्र जहां जनजाति उपयोजना क्रियान्वित हो रहा है, उन सभी जिलों की 23 पंचायत समिति में फैला है तथा सहरिया क्षेत्र की शाहाबाद एवं किशनगंज की दो पंचायत समितियों का समावेश है। इस के 6 क्षेत्रीय कार्यालय डूंगरपुर, बांसवाड़ा,उदयपुर, प्रतापगढ़ ,बारा, आबूरोड में स्थापित किए गए है।

शिक्षा से संबंधित योजनाएं

1. कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय- इसका प्रारंभ 2005-06 में ST, SC एवं अल्पसंख्यक वर्ग एवं BPL वर्ग की बालिकाओं के लिए किया गया था  दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली और कभी भी नामांकित में होने वाली या ड्रॉपआउट एसटी, एससी, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक बालिकाओं को इन आवासीय विद्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिया जाता है तथा स्थान रिक्त होने पर अन्य जाति की गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की बालिकाओं को प्रवेश दिया जाता है

इसके लिए ब्रिज कोर्स से कक्षा 5 उत्तीर्ण होना अनिवार्य है इसमें विद्यालय के अंदर हॉस्टल सुविधा, भोजन, ड्रेस, स्टेशनरी आदि निशुल्क व्यवस्था की जाती है  इसके आवेदन जिला परियोजना समन्वयक /बीआरसी एफ कार्यालय में किया जाता है

नोट- यह योजना कार्यालय सीकर एवं झुंझुनू को छोड़कर समस्त जिले में हैl

2. कक्षा 11 व 12 में अध्यनरत जनजाति छात्राओं को आर्थिक सहायता- यह योजना 2010-11 में जन जाति की छात्राओं को उच्च शिक्षा हेतु प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राजकीय विद्यालयों में लागू की गई इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए छात्राओं को राजकीय विद्यालय में अध्ययनरत होना अनिवार्य है
जिनके माता पिता आयकरदाता है उन्हें यह सुविधा प्राप्त नहीं होती है
इस योजना के तहत उच्च शिक्षा हेतु ₹350 प्रतिमाह के हिसाब से 10 माह हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है तथा इसका आवेदन संबंधित प्रधानाचार्य कार्यालय में किया जाता है

3. मांबाड़ी केंद्रों का संचालन- इसका प्रारंभ 2007-08 में अनुसूचित क्षेत्र की जनजाति बालक-बालिकाएं एवं सहरियां बालक-बालिकाएं जो स्कूल नहीं जा पाते हैं को शिक्षा से जोड़ने हेतु ग्राम के स्थानीय जनजाति व्यक्ति द्वारा अध्यापन कराने हेतु संचालन किया गया
मांबाड़ी केंद्र में छात्र-छात्राओं को खाना, पोशाक, स्टेशनरी एवं कक्षा 1 से 3 में अध्ययन के साथ शारिरिक स्वच्छता आदि सुविधाएं दी जाती है
इसका आवेदन संबंधित केंद्र के अध्यापक के पास की जाती है

 

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No of Questions-43

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Specially thanks to Quiz and Post Makers ( With Regards )

राजपाल हनुमानगढ़, चंद्रप्रकाश सोनी पाली, P K Nagauri, पूनम हनुमानगढ़, PKGURU, राजवीर प्रजापत, दिनेश मीना झालरा,टोंक, लोकेश कुमार

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