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पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यको ( Programs and Schemes PART 02 )

भारतीय संविधान की उद्देशिका नागरिकों को सामाजिक आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय उपलब्ध कराने का संकल्प व्यक्त करती है। संविधान के भाग 16 के अनुच्छेद 330 व 342 के तहत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों के संबंध में कुछ विशेष प्रावधान किया गया है।

♻ अनुसूचित जाति एवं जनजातियों संबंधित प्रावधान ♻

अनुसूचित जाति- अनुच्छेद 366 परिभाषा खंड है जो भाग 19 (प्रकीर्ण)के अंतर्गत लिया गया है। अनुच्छेद 366 के उपखण्ड 24 में अनुसूचित जातियों को परिभाषित किया गया है जिसके लिए अनुच्छेद 341 (अनुच्छेद- 341 राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी भी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के संबंध में उस राज्य के राज्यपाल से परामर्श लेकर के किसी जाति,मूलवंश,जनजाति, उनके भाग को अनुसूचित जाति के रूप में निर्धारित कर सकता है।) का संदर्भ लिया गया है,और कहा गया है,अनुसूचित जातियों से ऐसी जातियां,मूलवंश, जनजातियां या उनके भाग अभिप्रेत हैं जिन्हें अनुच्छेद 341 के अंतर्गत अनुसूचित जाति समझा जाता है।

अनुसूचित जनजाति- अनुच्छेद 366 के उपखंड 25 के तहत अनुसूचित जनजातियों को परिभाषित किया गया है, जिसके लिए अनुच्छेद 342 (अनुच्छेद 342- राष्ट्रपति किसी भी राज्य, संघ राज्य क्षेत्र के संबंध में संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करके उस राज्य की किसी जनजाति या जाति समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में निर्धारित कर सकता है।) का संदर्भ लिया गया है,और कहा गया है-अनुसूचित जनजातियों से ऐसी जनजातियों और जनजाति समुदाय या उनके भाग अभिप्रेत हैं,जिन्हें अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजाति समझा जाता है।

संसद को यह अधिकार है कि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की सूची में किसी भी जाति को सम्मिलित या बाहर कर दें।

♻ स्थानों का आरक्षण (रिजर्वेशन ऑफ़ सीट्स)- ♻

  • अनुसूचित जाति के लिए अनुच्छेद 330 तथा अनुसूचित जनजाति के लिए अनुच्छेद 332 के तहत लोकसभा व राज्यसभा के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में स्थानों(सीटों)के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
  • आरक्षित स्थानों की संख्या में समय-समय पर परिवर्तन किया जा सकता है
  • वर्तमान समय में लोकसभा की 543 सीटों में से अनुसूचित जाति के लिए 79 तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 40 स्थान आरक्षित किया गया है।

♻ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयोग ♻

  • ➡ अनुच्छेद 338 -SC तथा ST के लिए विशेष अधिकार नियुक्त करने का प्रावधान किया गया था,65 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1990 द्वारा अनुच्छेद 338 में संशोधन किया गया, इन दोनों वर्गों के लिए 7 (अध्यक्ष+ उपाध्यक्ष +5 अन्य सदस्य) सदस्यीय राष्ट्रीय आयोग राष्ट्रपति द्वारा गठित करने का प्रावधान किया गया।
  • ➡ परंतु अनुसूचित जनजातियों की आवश्यकता और समस्याओं में भिन्नता होने के कारण,89 वे संविधान संशोधन अधिनियम,2003 द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग में व्यापक बदलाव किए गए। अनुच्छेद 338 के शीर्षक को बदलकर “राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग” कर दिया गया तथा एक नया अनुच्छेद 338 (क) को जोड़कर एक “राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग” के गठन का प्रावधान किया गया।
  • ➡ दोनों आयोग की संरचना-7 सदस्य (अध्यक्ष, केंद्रीयमंत्री,+ उपाध्यक्ष,राज्यमंत्री + पांच सदस्य (भारत सरकार के सचिव),समय सीमा- 3 वर्ष।
  • ➡ अनुछेद 339 – राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के बारे में रिपोर्ट देने के लिए एक आयोग का प्रावधान है।,(नियुक्ति-राष्ट्रपति)
  • ➡ संविधान में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के लिए भाग 16 के अतिरिक्त अन्य भागों के तहत भी कुछ प्रावधान दिए गए हैं-
  • ➡ अनु.46- राज्यों को यह निर्देश दिया गया कि वह जनता के कमजोर वर्गों विशेष रूप से SC,ST के लिए शिक्षा और धन संबंधी हितों की अभिवृद्धि करेगा, तथा सामाजिक अन्याय और शोषण से उनकी रक्षा करेगा।
  • ➡ अनुच्छेद 164 – छत्तीसगढ़,झारखंड,मध्य प्रदेश और उड़ीसा राज्य में जनजातियों के कल्याण के लिए एक मंत्री का प्रावधान किया गया है।
  • ➡ अनुच्छेद 15(4)- राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि वह SC&ST,अन्य पिछड़े वर्गों के लिए कोई विशेष प्रावधान किया गया है।
  • ➡ अनुच्छेद-16 के खंड(क) व खंड(ख)के तहत SC ST के लिए सरकारी नौकरियों में क्रमशः पदोन्नति में तथा बकाया रिक्तियों में विशेष आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
  • ➡ अनुच्छेद 245 – संघीय सरकार ST के कल्याण तथा अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के लिए राज्यों को भारत की संचित निधि से सहायता अनुदान दे सकती हैं।
  • ➡ लोकसभा तथा राज्यसभा की विधानसभाओं में SC तथा ST आरक्षण संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 330 तथा अनुच्छेद 332 तथा आंग्ल भारतीय समुदाय के सदस्यों के मनोनीत संबंधी प्रावधान अनुच्छेद 331 तथा 333 संविधान के प्रारंभ से 10 वर्ष (1960 तक) के लिए किया गया था।
  • ➡ वर्तमान में 95 संविधान संशोधन अधिनियम 2009 द्वारा इस अवधि को 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।-(अनुच्छेद-334)

♻ पिछड़े वर्गों संबंधी प्रावधान ♻

  • ➡ अनुच्छेद-15(4),16(4) तथा 340 आदि के तहत पिछड़े वर्गों के बारे में विशेष प्रावधान किया गया है–
  • ➡ पिछड़ा वर्ग- ऐसी जातियों को शामिल किया जाता है जो सामाजिक एवं शैक्षणिक दोनों दृष्टि से पिछड़े हैं, निर्धारण – केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
  • ➡ अनुच्छेद 340- राष्ट्रपति को पिछड़े वर्गों की दशाओं और कठिनाइयों का अन्वेषण कर उसके सुधार हेतु सिफारिश करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग नियुक्त करने करने की सलाह दी गई
  • 1 29 जनवरी 1953 को काका कालेलकर की अध्यक्षता में काका कालेलकर आयोग
    2. 20 सितंबर 1978 को बी पी मंडल की अध्यक्षता में मंडल आयोग
  • ➡ काका कालेलकर आयोग – ने पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए सामाजिक तथा शैक्षणिक मानदेय निर्धारित कर सरकारी सेवाओं में उनके लिए आरक्षण की सिफारिश किया था लेकिन सामाजिक तथा शैक्षणिक मानदंड स्पष्टतया परिभाषित नहीं होने के कारण इस सिफारिश को अमान्य कर दिया गया।
  • ➡ बी पी मंडल आयोग द्वारा 31 दिसंबर 1980 को प्रस्तुत रिपोर्ट में सरकारी सेवाओं में पिछड़े वर्ग के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की गई थी जिसे स्वीकार कर 8 सितंबर 1993 से लागू किया गया।

♻ पिछड़ा वर्ग के कार्य ♻

  • ➡ सामाजिक तथा शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की दशा तथा उनकी कठिनाइयों की जांच करना
  • ➡ सामाजिक तथा शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों की दशा को सुधारने के लिए अनुदान दिए जाने की सिफारिश करना
  • ➡ सामाजिक तथा शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की दशा को सुधारने के लिए राष्ट्रपति से उपायों की सिफारिश करना ।

 

OBC, अल्पसंख्यक निशक्तजन एवं निराश्रित हेतु कार्यक्रम

1. कमजोर एवं पिछड़े वर्गों के कल्याण की योजनाएं :-

? राजस्थान सरकार ने भारत के संविधान के भाग 4 – ‘राज्य के नीति निदेशक तत्व’ से संबंधित अनुच्छेद 46 अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों की शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि के लिए पिछड़ी जाति कल्याण विभाग की स्थापना प्रथम पंचवर्षीय योजना के प्रारंभ में वर्ष 1951-52 में की गई। वर्ष 1955-56 में वि्भाग का नाम समाज कल्याण विभाग किया गया। राज्य सरकार ने 21 फरवरी 2007 को ‘सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग’ कर दिया है। जिसने इन वर्गों के लिए निम्न योजनाएं चला रखी हैं

☯ अनुप्रति योजना : (2005-06)

1⃣ संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षायें उत्तीर्ण करने पर (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति तथा विशेष पिछड़ा वर्ग हेतु)

  • प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 65000/₹
  • मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 30000/-₹
  • साक्षात्कार में उत्तीर्ण होने पर 5000/-₹

2⃣ राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर (अनुसूचित जाति एवं विशेष पिछड़ा वर्ग हेतु)

  • प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 25000/-₹
  • मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 15000/-₹
  • साक्षात्कार में उत्तीर्ण होने पर 5000/-₹
  • आवासीय विद्यालय योजना : 1997

यह राजस्थान सरकार की योजना है जो 1997-98 से प्रारंभ की गई हैं। राजस्थान के अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के गरीब बालक/बालिकाओं के लिए के. एफ. डब्ल्यू जर्मन के आर्थिक सहयोग से 10 आवासीय विद्यालय तथा 4 आवासीय विद्यालय राज्य सरकार के द्वारा खोले गए।

☯ अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाएं

राजस्थान सरकार ने प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग के आर्थिक उत्थान हेतु राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड का गठन किया है।

☯ गांधी कुटीर योजना (नवंबर 2000) व ‘अपना घर’ योजना (मार्च 2000)

आर्थिक दृष्टि से कमजोर एवं अल्प आय वर्ग के आवासीय समस्या के समाधान के लिए 14 नवंबर 2000 से ‘गांधी कुटीर योजना’ तथा जिन गरीब परिवारों के पास स्वयं का आवास उपलब्ध नहीं है उन्हें स्वयं का आवास उपलब्ध करवाने के लिए 30 मार्च 2000 से ‘अपना घर’ योजना लागू की गई है।

♻ दिव्यांग जनों के लिए संवैधानिक व सांविधिक प्रावधान ♻

  • संविधान की प्रस्तावना में सभी नागरिकों के लिए समता की भावना
  • संविधान के भाग 3 में वर्णित मूल अधिकार सभी नागरिकों को समान रुप से प्राप्त हैं जिनमें दिव्यांग जनों का भी उल्लेख किया गया है
  • संविधान के अनुच्छेद 246(G),246(W) से संबंध अनुसूची 11,12 में दिव्यांग जनों का विशेष उल्लेख है
  • भारतीय पुनर्वास परिषद अधिनियम 1992 का संबंध दिव्यांग जनों से है
  • दिव्यांगजन अधिनियम 1995 में दिव्यांग जनों गैर भेदभावपूर्ण सामाजिक सुरक्षा प्राप्त

 ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत गरीब परिवारों को 5 लाख तक का अस्पताल का खर्च उपलब्ध कराया जाएगा और आरोग्य की दिशा में यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होगा

अनुसूचित जाति/ जनजाति कल्याण कार्यक्रम/संगठन –

राजस्थान अनुसूची जाति, जनजाति वित विकास सहकारी निगम लिमिटेड -राजस्थान में अनुसूचित जाति के लोग जो लोग कोगरीब रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहेै है इनके आर्थिक उत्थान हेतू 28 मार्च 1980 को राजस्थान अनुसूचित जाति सहकारी विकास निगम लिमिटेड की स्थापना की गई है, जिसकेे नाम को 24अक्टुबर 1993 को संशोधित कर राजस्थान अनुसूचित जाति, जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड किया गया।
उदेश्य -: अनुसूचित जाति के लक्षित व्यकतियो को आर्थिक संसाधन उपलब्ध करवाकर उन्हें स्वावलंबी बनाना। अनुसूचित जाति के लक्षित परिवारों के युवक-युवतियों को विभिन्न रोजगार हेतु दक्षता, शैक्षणिक एवं तकनीकी उन्न्यन हे प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना।

अनुसूचित जाति के लघु व सीमान्त कृषको को कृषि विकास हेतु उन्नत कृषि यंत्र एवं सिंचाई सुविधाओं उपलब्ध कराना। अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विकास करना।

 

दिव्यांग जनों के अधिकारों के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया गया सभी सरकारी भवन जून 2019 तक दिव्यांग जनों के लिए सुलभ बनाए जाने का निर्देश दिया गया सार्वजनिक परिवहन के 10% साधनों को मार्च 2018 तक दिव्यांग जनों के लिए सुलभ बनाने का निर्देश दिया गया।

♻ दिव्यांगजन एवं उनकी समस्याएं ♻

  • ➡ दिव्यांगता शरीर की भौतिक एवं मानसिक रूप से अविकसित अवस्था होती है
  • ➡ दिव्यांगजन अधिनियम 1995 दिव्यांगता की परिभाषा वर्णित की गई है
  • ➡ दिव्यांग जनों की दशा समाज में दयनीय,समाज द्वारा दिव्यांग जनों का तिरस्कार और उपेक्षा की समस्या
  • ➡ देश में दिव्यांग जनों की संख्या लगभग 2•68 करोड़ जो देश की कुल जनसंख्या का 2•21 प्रतिशत है

♻ दिव्यांग जनों के लिए संवैधानिक व सांविधिक प्रावधान ♻

  • ➡ संविधान की प्रस्तावना में सभी नागरिकों के लिए समता की भावना
  • ➡ संविधान के भाग 3 में वर्णित मूल अधिकार सभी नागरिकों को समान रुप से प्राप्त हैं जिनमें दिव्यांग जनों का भी उल्लेख किया गया है
  • ➡ संविधान के अनुच्छेद 246(G),246(W) से संबंध अनुसूची 11,12 में दिव्यांग जनों का विशेष उल्लेख है
  • ➡ भारतीय पुनर्वास परिषद अधिनियम 1992 का संबंध दिव्यांग जनों से है
  • ➡ दिव्यांगजन अधिनियम 1995 में दिव्यांग जनों को गैर भेदभावपूर्ण, सामाजिक सुरक्षा प्राप्त हैं।

♻दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रमुख प्रावधान♻

  • ➡ दिव्यांगता की परिभाषा को व्यापक करते हुए इसके प्रकारों की संख्या 7 से बढ़ाकर 21 कर दी गई है
  • ➡ दिव्यांगता को परिभाषित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है
  • ➡ दिव्यांग जनों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 3% से बढ़ाकर 4% आरक्षण कर दिया गया है
  • ➡ दिव्यांग जनों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य निधि का निर्माण किया गया

♻दिव्यांग जनों के लिए संचालित की जा रही सरकार की प्रमुख योजनाएं♻

  • ➡ दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा दिव्यांग जनों के लिए सुगम्य भारत अभियान संचालित किया जा रहा है।
    ➡ दिव्यांग जनों के लिए वर्ष 2016 से सुगम में पुस्तकालय ऑनलाइन मंच की शुरुआत की गई।
  • ➡ सरकार द्वारा वेब आधारित विशिष्ट दिव्यांग पहचान कार्ड प्रारंभ किया जा रहा है इससे दिव्यांग जनों को अलग अलग दिव्यांग प्रमाण पत्र लेकर इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा
  • ➡ सरकार द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए स्वालंबन स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की गई

♻दिव्यांग जनों के लिए सरकारी नीतियों होने के बावजूद भी कठिनाइयां♻

  • ➡सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन सही तरीके से ना होना
  • ➡ सरकारी नौकरियों में दिव्यांग जनों के लिए पूर्व में आरक्षित 3% सीटों के बावजूद केवल 1% सीटें भरी गई
  • ➡ सरकार की नीतियों को बनाते समय दिव्यांग जनों की उपेक्षा जैसे आधार कार्ड बनाते समय कुछ दिव्यांग जनों के अंगुलियां नहीं थी।

♻दिव्यांग जनों की समस्या का समाधान♻

  • ➡ सरकारी नीतियों का सही तरीके से अनुपालन होना चाहिए
  • ➡ दिव्यांग जनों की सहायता एवं सहायक उपकरणों के संबंध में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना चाहिए
  • ➡संविधान प्रदत्त अधिकारों का सही रूप में क्रियान्वन किया जाए ताकि दिव्यांग जनों को उसका लाभ प्राप्त हो
  • ➡सरकार को दिव्यांग जनों के पंजीकरण के लिए अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है,दिव्यांगजनों को समाज में एक अपमान की दृष्टि से देखा जाता है इसीलिए सरकार इसे की नीतियों से ही दूर नहीं किया जा सकता बल्कि इसमें समाज की सकारात्मक भूमिका होनी चाहिए साथ ही साथख इसमें गैर संगठनों को भी आगे आना चाहिए।
  • ➡ दिव्यांग जनों की सहायतार्थ सभी को आगे आना चाहिए।

Specially thanks to Post writer ( With Regards )

दिनेश मीना झालरा,टोंक, ओमप्रकाश जी साहू, Prabhu dayal mund Ratangarh,

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