Public Administration Concepts

( लोक प्रशासन अवधारणाएं – शक्ति, सत्ता एवं वैधता )

शक्ति (Power)

1 अर्थ और परिभाषा➖

उस सामाजिक स्थिति का घोतक है जिसमें कोई व्यक्ति विशेष सामाजिक विरोध की स्थिति में भी अपनी इच्छा और आदेशों का पालन करवाने में सफल हो जाता ह। यह नकारात्मक संकल्पना है

शक्ति की अवधारणा सकारात्मकता एवं नकारात्मकता पूर्ण होती है यदि शक्ति में वैद्यता जुड़ जाए तो सकारात्मकता रूप में उभरती है अन्यथा शक्ति दिशाहीन होती है जो विनाशकारी भी सिद्ध हो सकती है शक्ति व्यक्ति की योग्यता को प्रदर्शित करती है

शूमैन का कथन है कि– शक्ति व्यक्तियों पर नियंत्रण एवं प्रभाव डालने संबंधी होती है

समाजशास्त्री वैबर–शक्ति को आरोपण के रूप में अभिव्यक्त करते हैं यह आरोपण बाध्यकारी रूप में होता है यह अवधारणा अनेक विद्वानों द्वारा विवेचित की गई है

शक्ति के संबंध में विद्वान बर्नार्ड शा का मत है कि–शक्ति कभी भ्रष्ट नहीं करती बल्कि जब यह अज्ञानी में निहित होती है तभी भ्रष्ट होने की संभावना बढ़ जाती है

आर्गेन्सकी के मतानुसार– शक्ति अन्य व्यक्तियों को अपने लक्ष्यों के अनुरूप प्रभावित करने की क्षमता है । शक्ति एक सापेक्ष शब्द है
यथा–राजनीतिक शक्ति, आर्थिक शक्ति ,सामाजिक शक्ति इत्यादि

इसके संबंध में विस्तृत विवेचन *””हॉब्स अरस्तु मैक्यावली लॉसवेल,मैरियम के सिद्धांतों””में दिखाई देती है

2 शक्ति की विशेषता➖

1- बाध्यकारी स्थिति का होना
2- कार्य करवाने की भावना पर आधारित
3- फोलेट की शक्ति की अवधारणा के तहत शक्ति के ऊपर की स्थिति उभरती है
4- बल प्रयोग तत्व की संभावना रहती है
5- यह अस्थाई व वैयक्तिक होती है

3 शक्ति के महत्वपूर्ण घटक-

1- प्रभाव
2- बाध्यता
3- अपने हित को किसी भी प्रकार साधना

4 शक्ति की अवधारणा के प्रमुख सिद्धांत➖

1-अभिजात्य वर्ग सिद्धांत इस सिद्धांत के समर्थक रोबट मिशेल्स पैरेंटो, गिटानो, मोस्को C w मिल्स है।इसमें शक्ति की स्थिति अल्पसंख्यक

2- मैक्स वेबर का शक्ति मॉडलइस सिद्धांत का अन्य नाम त्रियामी या शून्य सिद्धांत ह, इस सिद्धांत में शक्ति दलगत आधार पर दल के सदस्यों में निहित होती है

3- स्थिर विचारधारा पर आधारित सिद्धांत इस सिद्धांत के प्रतिपादक कार्ल मार्क्स हैं इस सिद्धांत में आर्थिक शक्ति प्रदान अन्य गौण और अन्य शक्तियां भी आर्थिक शक्ति पर निर्भर होती है

4- चर विचारधारा पर आधारित सिद्धांतइस सिद्धांत के प्रतिपादक टालकॉट पारहंस है। इस सिद्धांत में शक्ति का आधार समाज है समाज व्यक्ति का चयन करता है जो शक्ति का उपयोग उनके हित में कर सके

5 शक्ति की अवधारणा को निम्न प्रतिमानों के द्वारा समझा जा सकता➖

1-सामाजिक संदर्भ आधारित
2-उत्तर आधुनिक आधारित
3-आंतरिक चेतना आधारित
4-संगठनिक विचारधारा पर आधारित

 

सत्ता /प्राधिकार(Authority )

1 अर्थ और परिभाषासत्ता संगठन का प्राण तत्व आत्मा है किसी प्रशासकीय संगठन के अंतर्गत उच्च अधिकारी द्वारा सत्ता के आधार पर ही अधीनस्थों से संगठनात्मक कार्यकरण का निष्पादन करवाया जाता है सत्ता को प्रबंध की कुंजी माना जाता है

फेयोल के अनुसार➖सत्ता आदेश देने का अधिकार तथा उसे पालन करवाने की शक्ति है

साइमन के अनुसार➖ सत्ता मुख्यतः निर्णय लेने की शक्ति से संबंधित है जिससे दूसरे व्यक्तियों की क्रियाओं को निर्देशित किया जाता है

पेटरसन के अनुसार➖ आदेश देने और उसके पालन की आज्ञा का अधिकार सत्ता कहा जाता है

डेविस के अनुसार➖ सत्ता निर्णय लेने और आदेश देने का अधिकार है

प्लेटो का कथन है➖ बुद्धिजीवी मानव के पास ही सत्ता नहीं होनी चाहिए

थियो हैमेन के अनुसार ➖ सत्ता वह वैधानिक शक्ति है जिसके आधार पर अधीनस्थों को काम करने के लिए कहा जाता है तथा उन्हें बाध्य किया जा सकता है और आदेश के उल्लंघन पर आवश्यकता अनुसार प्रबंधक उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकता है यहां तक कि उनको कार्य से भी पृथक कर सकता है

स्मिथबर्ग एव थाम्पसन, साइमन➖ ने कार्य विभाजन व सत्ता को किसी भी संगठन की महत्वपूर्ण विशेषता माना है

संक्षेप में➖सत्ता आदेश देने निर्णय लेने और उनके पालन करवाने की वह शक्ति स्थिति या अधिकार है जो अधीनस्थों द्वारा स्वीकार कर लिए जाने पर अर्थपूर्ण बन जाता है और संगठनात्मक लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अधीनस्थों द्वारा जिसका पालन आवश्यक होता है सत्ता पद में निहित होती है

2 सत्ता की विशेषताएं➖

1- सत्ता एक प्रबंधकीय अधिकार है जिसका प्रत्यायोजन ऊपर से होता है
2- सत्ता निर्णय लेने अधीनस्थों को कार्य सोचने और अधीनस्थों से कार्य निष्पादन की अपेक्षा रखने का अधिकार है
3- सत्ता पद में निहीत होती है अतः यह पदाधिकारी को प्राप्त अधिकार है
4- सत्ता स्वरुप में वैधानिक होती है अर्थात शक्ति का वैधानिक स्वरूप सत्ता है
5- सत्ता संगठन के निर्माण का आधार है
6- संगठन में सत्ता का क्षेत्र शीर्ष पर व्यापक जबकि अधीनस्थ स्तरों पर क्रमशः संकुचित होता जाता है
7- सत्ता प्रबंधात्मक कार्यों की कुंजी है

3 सत्ता के स्त्रोत किसी संगठन के संदर्भ में सत्ता के 3 स्त्रोत माने जाते हैं जो इस प्रकार हैं➖

  1. कानून अथार्थ देश की सर्वोच्च विधि (संविधान) सत्ता का मूल स्त्रोत है
  2. परंपरा अर्थात सांगठनिक परंपरा ,रीति रिवाज, नियम संहिता,कार्यविधि इत्यादि
  3. प्रत्यायोजन अर्थात प्रत्यायोजन पदसोपनीय संगठनों में एक प्रशासनिक किया है इसके अंतर्गत उच्चस्थों द्वारा अधीनस्थ कार्मिकों को दायित्व निर्वहन हेतु सत्ता का हस्तांतरण किया जाता है

मिलेट के अनुसार➖ निम्न क्षेत्रों में प्राधिकार आवश्यक होता है
1- कार्यक्रम प्राधिकार
2- सांगठनिक प्राधिकार
3- बजटीय प्राधिकार

प्राधिकार के वितरण पर आधारित प्रकार➖
1- ब्यूरो प्रकार का प्राधिकार
2- बोर्ड आयोग प्रकार का प्राधिकार

सत्ता की अवधारणा (Concept of power) 

1 परंपरागत/ स्थिति गत विचारधारा➖ शास्त्री विचारकों (फेयोल मैक्स वेबर गुलिक,उर्विक मूने और रैले) मैं इस विचारधारा का समर्थन किया है यह विचारधारा सत्ता को एक कानूनी स्थिति मानती है अर्थात सत्ता का स्त्रोत कानून है
हेनरी फेयोल के अनुसार– सत्ता आदेश देने का अधिकार और दिए गए आदेश का पालन करवाने की शक्ति है इस प्रकार की सत्ता प्रकृति में बाध्यकारी और उल्लंघन स्थिति में दंडात्मक स्वरुप में होती है इस सत्ता का प्रभाव ऊपर से नीचे की ओर होता है इसे टॉप डाउन अथॉरिटीकहा जाता है

2 स्वीकृति विचारधाराव्यवहार वादियों (चेस्टर बर्नार्ड, साइरन) द्वारा समर्पित विचारधारा है इस विचारधारा की मान्यता है कि सत्ता का स्त्रोत अधीनस्थों की स्वीकृतिहै
चेस्टर बर्नार्ड कहता है कि➖ संगठन में सत्ता ऊपर नहीं नीचे रहती है बर्नाड़ के अनुसार सत्ता तभी अर्थपूर्ण होगी जब आदेश को स्वीकार किया जाए और उसका पालन किया जाए इस संदर्भ में बर्नाड़ तटस्थता के क्षेत्र की अवधारणा देते हैं

बर्नार्ड आदेश को तीन वर्गों में बांटते हैं➖
1- पूर्णत: अस्वीकार्य प्रकृति के आदेश
2- तटस्थ प्रवृत्ति के आदेश अथार्थ ऐसे आदेश जो न तो स्वीकार किए जाते हैं और ना ही अस्वीकार
3- निर्विवाद रुप से स्वीकार्य आदेश तृतीय श्रेणी के आदेश ही प्रतिष्ठा के क्षेत्र में आते हैं जो निर्विवाद रुप से स्वीकार किए जाते हैं

बर्नार्ड़ के अनुसार अधीनस्थ किसी संचार को प्राधिकार तभी स्वीकार करेगा जब निम्न स्थितियां होंगी➖
1- कार्मिक संचार समझता हो
2- कार्य संगठन के उद्देश्य के साथ असंगत न हो
3- कार्मिक के व्यक्तिगत हितों के अनुकूल हो और
4- कार्मिक शारीरिक ,मानसिक रूप से सक्षम हो

साइमन ने–इसे स्वीकृति क्षेत्र
राँबर्ट टेननकाँम न➖इसे स्वीकृति का दायरा का है

3 सक्षमता विचारधारा➖

यह विचारधारा मानती है कि प्राधिकार का उद्भव पदाधिकारी के वैयक्तिक गुणो, योग्यताओं, क्षमताओं और अनुभव पर आधारित है अधीनस्थ प्राधिकार को किसी भी की औपचारिक स्थिति के कारण स्वीकार नहीं करते बल्कि उसकी क्षमताओं और अनुभव के कारण स्वीकार करते हैं इसे कार्यात्मक सत्ता के नाम से भी जाना जाता है

सत्ता के प्रकार (Types of power)

1 सूत्र सत्ता/रेखा प्राधिकार लाइन और रेखायह संगठन के उद्देश्य की प्राप्ति के संबंध में आदेश देने और उसका पालन करवाने की सत्ता है यह प्रकृति में दबाव कार्य व बाह्यकारी होती है यह संगठन के अंतर्गत उच्चस्थो और अधीनस्थों के मध्य विद्यमान होती है

2 स्टाफ सत्ता➖यह वह अधिकार सत्ता है जो परामर्श देने सहायता करने और अन्य विभागों की सेवाएं देने हेतु संगठन में विद्यमान रहती है अथार्थयह परामर्शकारी सत्ता है जो संगठनात्मक लक्ष्यों /उद्देश्यों की प्राप्ति के क्रम में परामर्श उपलब्ध करवाती है यह प्रकृति में अबाध्यकारी और असंचलात्मक होती है

3 कार्यात्मक सत्तासूत्रसत्ता द्वारा स्टाफ सत्ता को दिशा निर्देश देने की सत्ता का प्रत्यायोजन ही कार्यात्मक सत्ता है अर्थात यह किसी विशिष्ट कार्य क्षेत्र में निर्णय लेने की अधिकार सत्ता है इसे थियों हैमैन द्वारा सीमित सत्ता कहा है अर्थात इस में निर्णय लेने का ऐसा अधिकार किसी क्रिया विशेष तक सीमित रहता है

4 बिखरी सत्ता मुख्य कार्यकारी को प्राप्त सत्ता का जब दो अधीनस्थ अधिकारी परस्पर सहमति से अध्यारोपण करते हैं और उपयोग में लेते हैं तो इसे बिखरी सत्ता कहा जाता है मुख्य कार्यकारी तथा प्रबंधकों का व्यक्तित्व ,संगठन का वातावरण और सत्ता के प्रयोग से पैदा होने वाली जोखिम इस सत्ता को सीमित करती है

मैक्स वेबर और सत्ता

मैक्स वेबर के अनुसार➖ सत्ता उस सामाजिक स्थिति का घोतक है जिसमें अनुयाई स्वैच्छिक रूप से आदेश का पालन करते हैं आदेश का स्वेच्छा से पालन करने का कारण है आदेशक के प्रति दायित्व बोध और आदेश की विधिकत्ता में विश्वास

मैक्स बैवर सत्ता के तीन प्रकार स्वीकार करते हैं

1  परंपरागत सत्ता➖ यह सत्ता परंपरागत प्रथाओं मूल्य विश्वासों और सामाजिक रीति रिवाजों पर आधारित होती है इस प्रकार की सत्ता का पालन दीर्घकाल से प्रवर्तित परंपराओं की पवित्रता में विश्वास के कारण किया जाता है

2 चमत्कारिक सत्ता➖ यह सत्ता किसी व्यक्ति में निहित अतिमानवीय गुणों में विश्वास पर आधारित सकता है न कि किसी पद या नियमों पर आधारित इसमें अधीनस्थ आदेश का पालन चमत्कारी शक्ति मान कर स्वीकार करते हैं जब नेता/उच्चस्थ में इस शक्ति की कमी होने लगती है तो उसे सत्ता से वंचित कर दिया जाता है यह अपेक्षाकृत अधिक अस्थाई प्रकार का प्राधिकार है

3 वैधानिक सत्ता ➖ वैधानिक सत्ता तार्किकता पर आधारित सत्ता है राष्ट्र का संविधान या संगठन का कानून इस सत्ता का स्त्रोत है इस सत्ता के आदेश का पालन आदेश की वस्तुनिष्ठता के कारणहोता है इस सत्ता का संगठन में प्रत्यायोजन किया जा सकता है
?मैक्स वेबर के अनुसार➖ यह सत्ता करिश्माई प्राधिकार की तुलना में अधिक स्थाई और परंपरागत प्राधिकार की तुलना में अधिक बौद्धिक है सत्ता प्राप्त व्यक्ति किसी औपचारिक पद पर पदासीन होता है इसमें समस्त आदेश लिखित रूप में होते हैं

मेरी पार्कर फोलेट और सत्ता

फोलेट के अनुसार➖ सत्ता कार्य करवाने की सत्ता है यह परिवर्तन लाने की क्षमता से युक्त होती है

फोलेट द्वारा वर्णित सत्ता के प्रकार

1 अवपीडक सत्ता➖ इसे फोलेट किसी के ऊपर सत्ता के रूप में मानती है यह दबाव कारी ,बाध्यकारी ,दंडात्मक उत्पन्नक और तानाशाहीप्रकृति की सत्ता है

2 सहसत्ता➖ फोलेट इस सत्ता को किसी के सत्ता के रूप में स्वीकार करती है यह संयुक्त रूप से स्वत: विकसित सत्ता है यह समझ को बेहतर बनाकर सहकारी प्रयास को प्रोत्साहित करती है परिणाम स्वरुप संगठन में मतभेद और संघर्ष की स्थिति की संभावना लगभग समाप्तहो जाती है

फोलेट कहती है कि➖ संगठन में अवपीड़ित सत्ता को पूर्णत: रोक पाना तो संभव नहीं है लेकिन एकीकरण, चक्रीय व्यवहार परिस्थिति के नियम का उपयोग करके इसे कम किया जा सकता है

फोलेट मतानुसार➖ अंतिम सत्ता एक भ्रम है इनका मानना है कि सत्ता कार्य से संबंधित है और कार्य से विभिन्न रूप से जुड़ी होती है

फोलेट का यह भी मानना है➖ कि सत्ता का प्रत्यायोजन एक कल्पना मात्र है यह कार्य से जुड़ी सत्ता है यह ज्ञान और योग्यता से जुड़ी सत्ता है किसी व्यक्ति विशेष को जैसे ही उत्तर दायित्व सौंपा जाता है उसे उत्तरदायित्व से जुड़ी सत्ता स्वत ही प्राप्त हो जाती है

निष्कर्षत:– यह संगठन में किसी व्यक्ति का उत्तरदायित्व किसी व्यक्ति विशेष /पद के प्रति ना होकर उस सौंपे गए कार्य के प्रति होता है

फोलेट का मत है कि➖ संगठन में कोई किसी को आदेश नहीं दे और ना ही किसी से आदेश ग्रहण करना चाहिए आदेश देने पर व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचती है और संगठन में प्रतिरोध उत्पन्न होते हैं

वह कहती है कि➖ व्यक्ति को परिस्थितियों से आदेश ग्रहण करने तथा परिस्थिति के अनुसार व्यक्ति को अपना कार्य करना चाहिए इसे स्थिति का नियम कहा जाता है

साइमन और सत्ता

साइमन मतानुसार➖ प्राधिकार निर्णयन शक्ति अथार्थ निर्णय लेने की शक्ति है जो अन्य लोगों के कार्य का मार्गदर्शन करती है

साइमन प्राधिकार के संबंध➖ में स्वीकृति का क्षेत्र की अवधारणा का प्रतिपादन करते हैं साइमन मतानुसार अधीनस्थ उच्चस्थों के निर्णय और निर्देशन के अनुरूप व्यवहार करते हैं लेकिन उच्चस्थ की सत्ता अधीनस्थों की स्वीकृति पर निर्भर है

साइमन के अनुसार➖ संगठन में प्राधिकार का प्रभाव अधोगामी ,उर्ध्वगामी और क्षेतिज तीनों प्रकार का होता है

साइमन प्राधिकार के तीन कार्य बतलाते हैं➖
1- उत्तर दायित्व सौंपना
2- निर्णयन और
3- समन्वय

साइमन अनुसार सत्ता पालन के निम्न कारण हैं➖

1-विश्वास- स्वयं के हित संगठन और कर्मचारियों के प्रति विश्वास
2-एकरूपता-संगठनात्मक एकरूपता नियमों और प्रक्रियाओं में एकरूपता, मानवीय मूल्यों और व्यवहार की एकरूपता
3-दबाव/दंड- दंड सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के हो सकते हैं

साइमन पांच प्रकार के दबाव स्विकार करते हैं➖

1- सामाजिक दबाव,
2- मनोवैज्ञानिक दबाव ,
3- संगठनात्मक दबाव
4- उद्देश्य प्राप्ति का दबाव
5- आवष्यकताओं का दबाव

4-वैधानिकता- विधि का शासन, कानून की सर्वोच्चता नियमों और प्रक्रियाओं की मान्यता

अमिताई एटिजयोमी के अनुसार सत्ता के प्रकार

1- अवपीडक सत्ता( बल प्रयोग प्राधिकार)- भय और दंड पर आधारित सत्ता है
2- मानकीय सत्ता-निश्चित मानकों पर आधारित है
3- पारितोषिक/उपयोगितावादी सत्ता-भौतिक पुरस्कारों की पूर्ति पर आधारित होती है

सत्ता के कार्य

सत्ता के मुख्य रूप से तीन कार्य हैं➖
1- यह उन लोगों को कुछ उत्तरदायित्व शक्ति है जो सत्ता का प्रयोग करते हैं
2- यह क्रियाओं के बीच समन्वय स्थापित करती है
3- यह निर्णय लेने में विशेषज्ञता को काम में लाती ह

सत्ता की सीमाएं 

व्यक्तियों की योग्यता, तकनीकी ज्ञान ,क्षमता अनुभव विश्वास कानून आर्थिक दशाएं प्रकृति आदि वह घटक है जो अधिकार सत्ता को सीमित करने की क्षमता रखते हैं

अथार्त तकनीकी सीमाएं, जैविक सीमाएं ,कानूनी सीमाएं, मनोवैज्ञानिक सीमाएं ,आर्थिक, सीमाएं प्राकृतिक सीमाएं और अन्य सीमाएं–जैसे श्रम संघों की कार्यवाही सामाजिक परंपरा और प्रथा ,व्यवहार आदि भी सत्ता को सीमित करते हैं

संक्षिप्त में सत्ता की सीमाएं➖

1- कानूनी भाषा की अस्पष्टता
2- सामाजिक मूल्यों में सत्ता का संगत ना होना
3- संसाधनों की कमी
4- संगठनात्मक वातावरण- गुटबंदी,सामूहिक सौदेबाजी, अनोपचारिक स्थिति
5- राजनीतिक हस्तक्षेप
6- मनोवैज्ञानिक कारक- व्यक्ति की सोच और मन:स्थिति, उत्साह निश्चय अंतर्वैयक्तिक संबंध
7- प्राकृतिक कारक-भौगोलिक स्थिति जलवायु प्राकृतिक संकट
8- संचार की अस्पष्टता और कमी
9- निष्ठा सदाचरण और समर्पण क्षमता में कमी

शक्ति और सत्ता में अंतर

सत्ता और शक्ति दोनों समानार्थक शब्द प्रतीत होते हैं लेकिन इन में आधारभूत अंतर पाया जाता है सत्ता शक्ति से व्यापक अवधारणा है
सत्ता स्थिति गत और वैधानिक और संस्थागत होती है यह संगठन की संरचना से जुड़ी अवधारणा है

सत्ता का निवास स्थल पदों में निहित होता है इसका प्रभाव ऊपर से नीचे की दिशामें होता है
?सत्ता से अनिवार्यता उत्तरदायित्व का पहलू जुड़ाहोता है

इसके विकास का आधार संगठनात्मक संरचना होती है

यह उच्चस्थ और निम्नस्थ के मध्य शक्ति के बंटवारे पर आधारित होती है

जब की शक्ति *संस्थागत के स्थान पर व्यक्तिगत आधार रखती है

इसका स्वरूप ना तो वैधानिक होता है ना ही स्थिति गत

इससे उत्तरदायित्व जुड़ा हुआ नहीं होता

यह संगठन संरचना से जुड़ी अवधारणा नहीं है सत्ता के अस्तित्व पर ही शक्ति का दीर्घकाल तक अस्तित्व रह सकता है

इसका उद्गम व्यक्तिगत होता है और व्यक्तिगत स्थिति के कारण ही अंतर भी होता है

इसका संबंध दो व्यक्तियों के मध्य क्षमता के विभाजन से है

 

Public Administration Concepts ( अवधारणाएं – शक्ति, सत्ता एवं वैधता ) important Question with answer 

प्रश्न-1. साइमन के अनुसार सत्ता के कार्य बताइए ?
उत्तर-1. साइमन सत्ता के तीन कार्यों का उल्लेख करता है
1- उत्तर दायित्व सौंपना
2- निर्णय करना
3- समन्वय करना

प्रश्न-2. जॉर्ज बर्नार्ड शा ने शक्ति को किस प्रकार परिभाषित किया ?
उत्तर-2. जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का मत है कि शक्ति कभी भ्रष्ट नहीं करती बल्कि जब यह अज्ञानी में निहित होती है तभी भ्रष्ट होने की संभावना रहती है

प्रश्न-3. सत्ता के पालन का कारण स्पष्ट कीजिए और सत्ता के कार्यों का उल्लेख कीजिए ?
उत्तर-3. सत्ता का पालन व्यक्ति निम्नलिखित कारणों से करते हैं
1- विश्वास
2- एकरूपता
3- दबाव
4- वैधानिकता

सत्ता के कार्य➖
सत्ता के मुख्य रूप से तीन कार्य हैं
1- यह उन लोगों को कुछ उत्तरदायित्व सौपती है जो सत्ता का प्रयोग करते हैं
2- यह क्रियाओं के बीच संबंध में स्थापित करती है
3- यह निर्णय लेने में विशेषज्ञता को काम में लाती है

प्रश्न-4.. प्रत्यायोजनकी अवधारणा को समझाइए ?
उत्तर-4.. संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु उच्चस्थ या एक इकाई द्वारा अधीनस्थ या दूसरी इकाई को कर्तव्य उत्तरदायित्व और सत्ता का हस्तांतरण प्रत्यायोजन है इसकी एक निश्चित प्रक्रिया होती है जिसमें क्रमशः कर्तव्यों का हस्तांतरण कर्तव्य के निर्वाह हेतु सत्ता सौपना और सत्ता का सदुपयोग सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायित्व का निर्धारण किया जाता है इस का दोहरा स्वरुप होता है अर्थात अंतिम उत्तरदायित्व प्रत्यायोजक में निहित होता है जबकि क्रियात्मक उत्तरदायित्व प्रत्यायोजी का होता है प्रत्यायोजन में लोच शीलता निहित होती है जिसे परिस्थिति के अनुसार घटाया बढ़ाया या वापस लिया जा सकता है

प्रश्न-5. शक्ति और वैधता से सत्ता का निर्माण होता है स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर-5. सत्ता का आधार वैधता ही होता है यह वैद्यता कानून परंपरा और प्रत्यायोजन से प्राप्त होती है सत्ता पद के साथ जुड़ी रहती है और जब तक पद रहता है तब तक सत्ता बनी रहती है पदमुक्त तो सत्ता क्षीण हो जाती है। सत्ता और शक्ति यद्यपि समानार्थी प्रतीत होते हैं परंतु इनमें से तांत्रिक और व्यवहारिक दोनों स्तर पर विनीता निहित होती है सत्ता को वैधता कानून देता है लेकिन शक्ति पर कानून लागू नहीं होता सत्ता प्रत्यायोजन का आधार बन सकती है लेकिन शक्ति नहीं सत्ता जवाबदेयता के बिना नहीं हो सकती परंतु शक्ति का जवाबदेयता से कोई संबंध नहीं होता ।

अनेक प्रशासनिक चिंतकों का इन के मध्य अंतर के बारे में कथन है यथा➖

हेनरी फेयोल के अनुसार➖ सत्ता आदेश देने का अधिकार और आज्ञा का पूर्णता पालन करवाने की शक्ति है

बायर्सटीड के अनुसार➖ सत्ता शक्ति के प्रयोग का संस्थागत अधिकार है परंतु स्वयं शक्ति नहीं है

कार्ल. जे पैट्रिक के अनुसार➖ सत्ता शक्ति के साथ चलती है

मेरी पार्कर फ़ोलेट के अनुसार➖ शक्ति कार्य करने की योग्यता है वही सत्ता, संस्थागत रूप में प्राप्त अधिकार है

अतः कहा जा सकता है कि शक्ति में वैधता के पुट का जुड़ाव सत्ता के निर्माण का आधार बनता है सत्ता से ही शक्ति में अनुशासन संबंधी और उत्तरदायित्व की भावना का विकास होता है

PLAY QUIZ 

NO OF QUESTION – 18

0%

प्र.1 भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के तहत यह उल्लेखित है कि प्रत्येक राज्य हेतु एक विधानमण्डल होगा ?

Correct! Wrong!

प्र.2 "लोकतंत्र का संरक्षक" किसे कहा जाता है ?

Correct! Wrong!

प्र.3 भारत में लोक सेवा का जनक किसे कहा जाता है ?

Correct! Wrong!

प्र.4 'सिविल सेवा अधिनियम' कब पारित किया गया ?

Correct! Wrong!

Q.5-मैक्स वेबर सत्ता के कितने प्रकार स्वीकार करते हैं?

Correct! Wrong!

Q.6-साइमन कितने प्रकार के दबाव स्वीकार करते हैं?

Correct! Wrong!

Q.7-साइमन के अनुसार सत्ता का कार्य नहीं है?

Correct! Wrong!

Q.8-शक्ति के कितने सिद्धांत हैं?

Correct! Wrong!

Q.9-प्राधिकार के वितरण पर आधारित कितने प्रकार हैं?

Correct! Wrong!

प्रश्न=10-प्रत्यायोजन से लाभ है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=11-निम्नलिखित में से सत्ता के प्रमुख स्रोत हैं?

Correct! Wrong!

प्रश्न=12-निम्नलिखित में से किसे प्रत्यायोजित नहीँ किया जा सकता हैं ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=13-स्टाफ अधिकार सत्ता का लक्षण हैं ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=14-सत्ता शक्ति के प्रयोग का संस्थागत अधिकार है परन्तु स्वयं शक्ति नहीँ हैं । कथन किसका हैं ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=15- किसके अनुसार सत्ता आदेश देने का अधिकार और उसे पालन करवाने की शक्ति है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=16- संगठन का स्वयं के कार्यों के लिए जनता के प्रति उत्तरदाई होना किस प्रकार का उत्तरदायित्व का प्रकार है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=17- मिलेट के अनुसार सत्ता का प्रकार नहीं है?

Correct! Wrong!

प्रश्न=18- संगतता का सिद्धांत जिसके अनुसार सत्ता और उत्तरदायित्व समान मात्रा में होना चाहिए इस सिद्धांत के प्रतिपादक हैं?

Correct! Wrong!

Public Administration Concepts Quiz 01( अवधारणाएं - शक्ति, सत्ता ) in hindi
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मोहन दान चारण जैसलमेर, Phoolchand Meghvanshi,Bundi, चंद्रप्रकाश सोनी पाली, ममता शर्मा