Public Administration Relationship with Other

( लोक प्रशासन का संबंध )

लोक प्रशासन का अन्य विज्ञानों के साथ संबंध ( Public Administration Relationship with Other Sciences )

  • लोक प्रशासन का विकास पांच चरणों में माना गया है
  • इन चरणों में लोक प्रशासन अपने अस्तित्व की पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था
  • लोक प्रशासन के पांचवें चरण में लोक प्रशासन ने अपनी अलग पहचान बनाई
  • इसी चरण के अंतर्गत लोक प्रशासन के अन्य सामाजिक विज्ञानों के साथ गहरे संबंध स्थापित हुए
  • जिनमें से निम्न विज्ञान संबंध प्रमुख है

लोक प्रशासन और राजनीति विज्ञान का संबंध ( Relation of Public Administration and Political Science )

  • राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन एक दूसरे के पूरक है
  • यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है कि राजनीति विज्ञान की शुरूआत कहां से हुई और लोक प्रशासन का अंत कहां हुआ
  • जो मूल रूप से राजनीतिज्ञ हैं वे प्रशासन से अच्छी तरह संबंध रखते हैं
  • ठीक इसी तरह जो प्रशासक हैं वे राजनीतिक स्वामियों को सलाह के द्वारा नीति निर्धारणमें अपनी भागीदारी निभाते हैं
  • जहॉ राजनीति प्रशासन का स्वरुप निर्धारित करती है
  • वहॉ प्रशासन को राजनीति उद्देश्य को पूरा करने के लिए भी कार्य करना पड़ता

मनोविज्ञान और लोक प्रशासन का संबंध ( Relationship to Psychology and Public Administration )

  • कैटलिन के अनुसार मनोविज्ञान का लोक प्रशासन के साथ व्यवहारिक दृष्टि से गहरा संबंध है
  • सामाजिक क्रिया कलापों के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए मनोवैज्ञानिक आधार नितांत आवश्यक है
  • लोक प्रशासन के अंतर्गत संचार नेतृत्व,प्रेरणा,मनोबल, अंत:व्यक्ति संबंधआदि के अध्ययन से लोक प्रशासन के साथ मनोविज्ञान का संबंध स्पष्ट कियाजा सकता है

लोक प्रशासन और अर्थशास्त्र का संबंध ( Relation of Public Administration and Economics )

  • अर्थशास्त्र व लोक प्रशासन के संबंधके बारे में कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में प्रशासन की कला का विवेचन किया है
  • अर्थशास्त्र की नीति को उसके आर्थिक परिणामों की दृष्टि से देखा जाना आर्थिक नीतियों का प्रशासनद्वारा क्रियान्वन
  • परस्पर विरोधी हितोंके मध्य लोक प्रशासन द्वारा संतुलन
  • नवीन आर्थिक विचारों द्वारा लोक प्रशासन के संगठन का प्रभावित किया जाना
  • यह सभी बिंदु को कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में बताएं हैं जो लोक प्रशासन और अर्थशास्त्र के मध्य संबंधोको प्रकट करते हैं
  • एक अर्थशास्त्र का अच्छा ज्ञानरखने वाला व्यक्ति अच्छा प्रशासक बन सकता है

लोक प्रशासन और विधि के मध्य संबंध (Relationship between public administration and law )

  • लोक प्रशासन और विधि के मध्य उतना ही निकट का संबंधहै जितना कि लोक प्रशासन और राजनीति विज्ञान के मध्य है
  • लोक प्रशासन कानून के अंतर्गत कार्यकरता है
  • लोक प्रशासन कानूनों का क्रियान्वन करता है लोक प्रशासन का कानून निर्माणमें हाथ
  • कानून द्वारा प्रशासन पर अंकुशआदि
  • लोक प्रशासन और विधि के मध्य संबंधो को स्पष्ट करते हैं

लोक प्रशासन का परिवेश के साथ सम्बन्ध ( Relationship with the Public Administration Environment )

  • लोक प्रशासन कई तत्वो से प्रभावित होता है जैसे पर्यावरण, संस्कृति ,राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिवेश
  • इस कारण लोक प्रशासन को समझनेके लिए सामाजिक, सांस्कृतिक ,आर्थिक ,राजनीतिक और वैधानिक तत्वों का अध्ययन करना आवश्यक है
  • यह सभी तत्व लोक प्रशासन को प्रभावित करते हैं सामाजिक मूल्य, धार्मिक विश्वास ,राजनीतिक व्यवस्था का स्वरूप, आर्थिक व्यवस्था का स्वरूप, वैधानिक व्यवस्था के स्वरूप आदि ने भारतीय प्रशासन को काफी हद तक प्रभावित परिवर्तित और विकसित किया है
  • भारत के लोक प्रशासन में आज जो भी लक्षण विद्यमान है उन सभी को इन तत्वों का प्रभाव माना जा सकता है
  • देश विशेष की राजनीतिक सामाजिक संवैधानिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां प्रशासन को न केवल प्रभावित करती है बल्कि उसकी कार्यप्रणाली और ढांचे को नया रूप प्रदान करती है

लोक प्रशासन की सामाजिक पारिस्थितिकी ( Social ecology of public administration )

  • किसी समुदाय का सामाजिक परिवेश उसके संस्थानों,संस्थागत नमूनों, वर्ग, जाति संबंधों,ऐतिहासिक वसियत,परंपराओं,धन मूल्य की व्यवस्था, विश्वास आदर्श आदि पर आधारित होता है यह सभी प्रशासन पर गहरा प्रभाव डालते हैं
  • लोक प्रशासन में मानवीय तत्व का विशेष प्रभाव रहता है इस कारण लोक प्रशासन का मानवीय तत्व समाज विशेष के ऊपज होता है विभिन्न सामाजिक व्यवस्थाएं और संस्थाएं लोक कर्मचारियों के चरित्र का निर्माण करती है
  • समाज में उत्पन्न सामाजिक आर्थिक विषमता को मिटाना और प्रशासन में समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रतिनिधित्व से प्रशासन पर प्रभाव पड़ता है इससे स्पष्ट होता है कि प्रशासन को सामाजिक परिवेश के अनुसार संचालित करना पड़ता है  समाज प्रशासन के अनुसार नहीं चलता बल्कि प्रशासन समाज के अनुसारचलता है

लोक प्रशासन की सांस्कृतिक पारिस्थितिकी ( Cultural ecology of public administration )

  • संस्कृति किसी समुदाय की जीवनशैली होती है  जिसका समुदाय के रहन सहन ,खान पान, पहनावा ,जीवन शैली पर विशेष प्रभाव पड़ता है 
  • संस्कृति द्वारा समाज में अनेक नागरिकों को अनेक आदर्शात्मक मूल्य प्रदान किए जाते हैं इनका लोक प्रशासन के संगठन पर भी प्रभाव पड़ता है
  • संस्कार संस्कृति और मान्यताओं को ध्यान में रखकर ही प्रशासनिक और वैधानिक कानूनो का निर्माण होता है
  • यही कारण है कि एक देश की प्रशासनिक व्यवस्था दूसरे देश की प्रशासनिक व्यवस्था से अलग होती है

लोक प्रशासन का राजनीतिक पारिस्थितिकी ( Political ecology of public administration )

  • लोक प्रशासन और राजनीतिक परिवेश का संबंध घनिष्ठ होता है यह दोनों ही एक दूसरे को प्रभावित करते हैं लोक प्रशासन की जड़े राजनीति में निहित होती है
  • राजनीति किसी देश का शासन माना जाता है जबकि शासन का क्रियात्मक रूप प्रशासन में देखने को मिलता है
  • राजनीतिक परिवेश में जब बदलाव आता है तो प्रशासनिक संस्थाओं में भी स्वाभाविक रुप से परिवर्तन आता है इसलिए यह कहा जा सकता है कि लोक प्रशासन द्वारा उसकी संस्थाओं पर उस देश की राजनीतिक परिस्थितियों का विशेष प्रभाव पड़ता है

लोक प्रशासन की आर्थिक पारिस्थितिकी (Economic ecology of public administration )

  • लोक प्रशासन में पहले राजनीतिक परिस्थितियोंको ही अत्यधिक महत्व दिया जाता था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से आर्थिक विकास के अनुसार नईं प्रशासनिक इकाइयों का गठन किया जाने लगा
  • प्रशासन को आर्थिक विकास की आवश्यकता के अनुसार ढाला गया इसके लिए समय-समय पर प्रशासनिक सुधार किए जाते हैं
  • किसी भी देश की योजना को लागू करने का दायित्व प्रशासन पर होता है प्रशासन का आर्थिक विकास में सहयोग ,आर्थिक व्यवहार का प्रशासन पर प्रभाव, प्रशासन नियम द्वारा आर्थिक जीवन का नियंत्रण वित्तीय प्रशासन और बजट प्रशासन में भ्रष्टाचार का मूल आधार आर्थिक आदि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो यह स्पष्ट करते हैं कि किसी भी प्रशासन पर उसके आर्थिक परिवेश पर निश्चित रुप से प्रभावपड़ता

लोक प्रशासन की कानूनी या वैधानिक पारिस्थितिकी (Legal or Legal Ecology of Public Administration ) 

  • किसी भी देश का प्रशासन वैधानिक व्यवस्था के अनुरुप ही होता है जहां संविधान के अनुसार शासन चलता है वहां प्रशासन का स्त्रोत भी सविधान ही होता है
  • सविधान की मूल भावना के आधार पर प्रशासन को कार्य करना पड़ता है इसकी सीमाएं वैधानिक कानूनो द्वारा निर्धारित और सीमित होती है अर्थात जैसा देश का संविधान है या देश की कानून है वैसा ही प्रशासन बन जाता है

लोक प्रशासन एक कला है (Public administration is an art )

  • लोक प्रशासन को एक कला के रूप में माना गया है लेकिन कुछ वैज्ञानिक इसे विज्ञान और कला दोनों ही मानते हैं इस बात को समझने के लिए पहले कला-विज्ञान के अर्थ को समझ लेना आवश्यक है उसके अनुसार ही प्रशासन के गुणों का परीक्षण कर कला और विज्ञान के गुणो या विशेषताओं से किया जाएगा
  • कला का सामान्य अर्थ किसी कार्य के बारे में आवश्यक ज्ञान प्राप्त करके उसे कुशलतापूर्वक करना है इसमें ज्ञान पक्ष की उतनी प्रधानता नहीं होती जितनी क्रियापक्ष की होती है
  • कला का अस्तित्व इस विचार में निहित है कि वह जीवन के कितना निकट है अर्थात जीवन के लिए कितना उपयोगी है
  • कला मे उपलब्धियों से अधिक क्षमताओं पर विशेष बल दिया जाता है इस कारण कला में मानव की मान्यताओं को विशेष स्थान प्राप्त है  लोक प्रशासन को अनेक विद्वानों ने कला माना है

ग्लैडन के अनुसारप्रशासन एक ऐसी विशिष्ट क्रिया है जिसमें विशेष ज्ञान और तकनीककी आवश्यकता होती है
ह्वाइट के अनुसारकिसी प्रयोजन अथवा लक्ष्य प्राप्तिके लिए अनेक व्यक्तियों को निर्देश देना उनके कार्य का समन्वय और नियंत्रण करना प्रशासन की एक कला है

  • लोक प्रशासन को कला मानने का प्रमुख कारण इसमें अभ्यास की आवश्यकता है जिस प्रकार संगीत नृत्य खेलोंआदि कलाओं में प्रवीणता प्राप्तकरने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है
  • ठीक उसी प्रकार कुशल प्रशासक बननेऔर उसकी दक्षता पानेके लिए समुचित प्रशिक्षण और दीर्घकालीन अभ्यास की आवश्यकता होती है प्रशासन के कला होने के सिद्धांत को प्राचीन समय से ही स्वीकार किया जाता रहा है

सुकरातप्रशासन को कला मानतेहुए उसके लिए एक विशेष प्रकार का प्रशिक्षण आवश्यक मानता है

इन सबसे स्पष्ट होता है कि लोक प्रशासन एक विशेष प्रकार की कला हैं

लोक प्रशासन के दर्शन की आवश्यकता

माशर्ल डिमॉकऐसे पहले दार्शनिक है
जिन्होंने प्रशासन को दर्शन मानने का समर्थनकिया था
उनकी पुस्तक प्रशासन का दर्शन की प्रस्तावना में प्रशासनिक दर्शन पर बलदिया गया था
उन्होंने प्रशासन का दर्शन पुस्तक में इस बात पर बल दिया कि यह प्रशासकोंमें आज की अपेक्षा व्यापक व्यावसायिक चेतना और निर्देशन तथा सामाजिक औचित्य की अधिक विश्वासपूर्ण भावना का संचारकरेगा
प्रशासन को दर्शन मानने वालों के अनुसार राज्य की नीतियों को सत्य निष्ठा लगन और कुशलता पूर्वक लागूकिया जाना चाहिए
लोक प्रशासन को उन सभी तत्वों अथवा कानूनोंकी ओर ध्यान देना चाहिए जो प्रशासकिय क्रिया में सम्मिलित होते हैं
आज लोक प्रशासन समाज का पूरक बन गया है
समाज में शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र है जिसका संबंध लोक प्रशासन से ना हो
ऐसी स्थिति में यह आवश्यक है कि लोक प्रशासन का अपना दर्शनहो
जिससे राज्य की नीतियों को सत्य निष्ठा और कुशलता पूर्वक लागूकिया जा सके

डिमॉक मैं लोक प्रशासन के दर्शन के संबंध में निम्न बिंदुओं को बताया है
प्रशासकिय कार्यों में निहित सभी तत्वों को प्रकाश में लाना चाहिए
निहीत तत्वों को संकलित करके उंहें उचित तथा एकीकृत पद्धति के अधीन लाना चाहिए
जहां कुछ सिद्धांत विकसित हो चुके हैं
वहां उन्हें भावी कार्यों के लिए मार्गदर्शक स्वीकार कियाजाना चाहिए
प्रशासन लक्ष्य तथा साधन दोनों से संबंधित है
इन दोनों का कुशलतापूर्वक समन्वय ही प्रशासन की उत्कृष्टता की कसौटी है
प्रशासन के दर्शनका इस ढंग से विचार किया जाना चाहिए कि वह वास्तविकता का वर्णन करें और कार्यपालिका को विश्वसनीय साधन प्रदान करें
अच्छे प्रशासन तंत्र द्वारा चेतना और व्यापक संतोष की भावना का संचार किया जाना चाहिए

लोक प्रशासन एक विज्ञान है ( Public administration is a science )

  • लोक प्रशासन को विज्ञान मानने से पहले विज्ञान के अर्थ को समझना आवश्यक है विज्ञान का अर्थ व्यवस्थित अथवा क्रमबद्ध ज्ञान है क्रमबद्ध विज्ञान को ही विज्ञान कहते हैं
  • विज्ञान की प्रमुख विशेषताएं होती हैं➖जैसे निरिक्षण और परीक्षण की पद्धति के आधार पर निकाले गए सुनिश्चित और सार्वभौम नियम
  • इन नियमों की अपरिवर्तनशीलता और सार्वभौमिकता
  • इन नियमों के आधार पर भविष्यवाणी कर सकने की क्षमता, विषय का वर्गीकरण और व्यवस्थित ज्ञान है  इन विशेषताओं के होने पर ही किसी विषय को विज्ञान कहा जा सकता है
  • विज्ञान की इन सभी विशेषताओं के आधार पर लोक प्रशासन को विज्ञान मानने में कई मत प्रचलित हुए

लोक प्रशासन को विज्ञान मानने के संबंध में तीन मत है
1. पहला मत इसे विज्ञान नहीं मानता है लोक प्रशासन को विज्ञान नहीं मानने वाले विचारक फाइनर मोरिस और कोहन सम्मिलित हैं 2. दूसरा मत इसे आंशिक रूप से विज्ञान मानता है इस मत के विचारक विल्सन विलोबी और बीयर्ड जैसे विचारक हैं
3. तीसरा मत इसे पूर्ण रुप से विज्ञान मानता है तीसरे मत के समर्थक विद्वान लोक प्रशासन को विज्ञान मानने के संबंध में निम्न तर्क देते हैं

  • लोक प्रशासन का एक सुव्यवस्थित ज्ञान है पिछले कई वर्षों में विभिन्न विद्वानों ने लोक प्रशासन के विभिन्न अंगों से संबंधित ज्ञान को क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित किया है
  • विज्ञान के अध्ययन में काम आने वाली पद्धतियां ➖अनुसंधान पर्यवेक्षण परीक्षण वर्गीकरण और समन्वय पद्धति लोक प्रशासन मे भी अपनाई जाती है तथ्यों का संग्रह ,संतुलन और विश्लेषणकरके पारस्परिक संबंध और समन्वयस्थापित करते हुए परिणाम नियम और सिद्धांत निकाले गए हैं
  • आज लोक प्रशासन में कुछ निश्चित सिद्धांतों का विकास हुआ है जो शाश्वत और निश्चित है

साइमन द्वारा प्रतिपादित प्रशासकीय नियमों और सिद्धांतों द्वारा पूर्व कल्पना आसानी से की जा सकती है

फिर भी कुछ हद तक इसके निर्णय और सिद्धांत इतने सटीक नहीं होते हैं जितने की भौतिक विज्ञान और अन्य विज्ञान के होते हैं  इसलिए यह एक वास्तविक विज्ञान ना होकर मात्र समाज विज्ञान की तरह का एक विज्ञान है

लोक प्रशासन की विकसित और विकासशील देशों में भूमिका

लोक प्रशासन की भूमिका विकसित और विकासशील देशों में बढ़रही है
विकासशील देशों में इसकी भूमिका अपेक्षाकृत अधिक निर्णायक है
विकासशील देशोंमें लोक प्रशासन को ऐसे कार्यभी करने पड़ते हैं जो इसके वैध दायरे से बाहर होते हैं
लोक प्रशासन के द्वारा किसी देश की व्यवस्था उस के ढांचे में परिवर्तन लाया जा सकता है
लोक प्रशासन के द्वारा किसी देश की सरकार द्वारा योजनाएं क्रियान्वित की जाती है

विकसित देशों में लोक प्रशासन की भूमिका
विकसित देशों के नेता परिपक्व होते हैं
वह सिर्फ नीति निर्माण में ही सक्रिय रुप से भाग नहीं लेते बल्कि नौकरशाही को भी निरंकुशहोने से रोकते हैं
राजनीतिज्ञ तथा प्रशासक के मध्य एक प्रकार का संतुलन पाया जाता है
विकसित देशों की नौकरशाही अधिक विशिष्ट और व्यावसायिक है
उन्हें न सिर्फ विकसित व्यवस्था के अंतर्गत बल्कि उच्चतम तकनीकी पर आधारित विकसित तकनीक के साथ जटिल कार्य को पूरा करना होता है
इस प्रकार नौकरशाही व्यवसायिक योग्यता के साथ-साथ विशिष्टता की वृद्धि लोक सेवा में करती है
यहां पर लोक प्रशासन का ढांचा वृद्धस्तरीय संगठनहै
जिसका ढांचा इस प्रकार का होता है जो पेचीदे कार्य को भी संपन्न करने में सफल हो सका है

विकासशील देशों में लोक प्रशासन की भूमिका 
विकासशील देशों में लोक प्रशासन की मूल विशेषता यह है कि उनकी राजनीतिक कार्यपालिका इतनी परिपक्व नहींहोती कि वे आर्थिक नीतियों का निर्माण कर सके
जब राजनीतिज्ञ नीति के निर्धारण और कार्यान्वयन में असफल हो जाते हैं तो प्रशासन नीति निर्माण और इसके कार्यान्वयन में अहम भूमिका निभाता है
इस प्रकार विकसित देशों की अपेक्षा विकासशील देशों के प्रशासक नीति निर्माण और क्रियान्वन में अधिक राजनीतिक शक्ति तथा सम्मान का प्रयोग करते है
राजनीतिज्ञों द्वारा प्रशासकों पर उचित नियंत्रण के अभावमें दोनों के मध्य एक प्रकार का असंतुलन पाया जाता है
जनता की आकांक्षाओं को देखते हुए प्रशासन से आशाकी जाती है कि वह समाज के कमजोर व पिछडे वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए उचित नीतियों और विधेयकों के कार्यक्रम पर विचार करें
आर्थिक क्षेत्र में प्रशासनके समस्त आर्थिक विकास से संबंधित कठिन कार्यहोते हैं
इससे प्रशासन से यह आशा की जाती है कि वह न केवल उत्तम उत्पादन से संबंधित निवेश नीतियों को लागू करें बल्कि संकट के समय स्वयं ही उद्यमों को सुचारु रुप से चलाएं
सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में योगदान के अतिरिक्त विकासशील देशों में लोक प्रशासन की मूल विशेषता इसका विकासोन्मुखी होना है
विकासशील देशों के प्रशासक सीधे तौर पर राजनीति में भागनहीं लेते बल्कि नीति के क्रियान्वयन के दौरान उन्हें अनेक ऐसी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है
जिनका सीधा संबंध कार्यपालिका से होता है
विकास कार्यों के मार्ग में मानव शक्ति का अभाव औपनिवेशिक काल की प्रशासनिक व्यवस्था प्रशासक तथा प्रशासित के मध्य अनुचित संबंध आदि विकासशील देशों की प्रशासनिक व्यवस्था के लक्षण या विशेषताएंहैं

लोक प्रशासन का महत्व

लोक प्रशासन के महत्व को निम्न तत्व के आधार पर समझा जा सकता है
लोक प्रशासन एक उपकरण के रूप में
विकास और परिवर्तनके एक उपकरणके रूप में
लोक कल्याणकारी राज्यमें लोक प्रशासन का महत्व और अध्ययन के विषय के रूपमें लोक प्रशासन.

लोक प्रशासनवर्तमान समय में एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूपमें काम कर रहा है
लोक प्रशासन का महत्व सरकार की सफलता-असफलता का दायित्वसकता है
लोक प्रशासन के महत्व प्रमुख है
शांति और लोक व्यवस्थाबनाए रखना और नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना किसी भी सरकार का महत्वपूर्ण कार्य है
इसके अतिरिक्त नागरिकों के आपसी विवादों को निपटानाभी सरकार का ही दायित्व है
सामाजिक आर्थिक तथा मानवीय विकासके लिए सरकार प्रयास करती है
परंतु इन प्रयासों को प्रशासन के अभाव में क्रियांवित करना असंभव है
प्रशासन नीतियों कानूनों नियमोंआदि के रूप में इन प्रयासों का क्रियान्वयनकरता है
सरकारों के कार्य में सभ्यता के विकासके साथ-साथ अनेक कार्यबढ़ते गए हैं
अनेक महत्वपूर्ण विभागों या कार्यालय को लोक प्रशासन की परिधि में लाया गया है
आधुनिक जटिलताके साथ साथ इसका अविरल विस्तार हो रहा है
इसके साथ लोक प्रशासन एक उपकरण के रूप में लोक प्रशासन का महत्व प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है
लोक प्रशासन की सामाजिक परिवर्तन तथा विकास के उपकरण के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका है
जब कभी लोग विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं तो लोक प्रशासन उनके मार्गदर्शनका कार्य करता है
विद्यालय महाविद्यालय विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थाओंको सुचारु रुप से चलाने के लिए प्रशिक्षित माननीय शक्ति की आवश्यकता पड़ती है
यह एक सुविकसित लोक प्रशासन के द्वारा ही संभव है
विकास के बुनियादी क्षेत्रों में सरकार के प्रयासों से लोक प्रशासन में विकास और परिवर्तन के उपकरण के रुप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
एक लोक कल्याणकारी राज्य-देश अपने नागरिकों की सुविधा के लिए अनेक कल्याणकारी सेवाएं और योजनाएंचलाता है
इनमें शिक्षा स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के उपाय मुख्य रूप से सामने आते हैं
इसके अतिरिक्त असहाय वृद्धो अनाथों विधवाओं की देखभाल तथा बढ़ती बेरोजगारी की समस्याके समाधान की जिम्मेदारी जी सरकार की ओर से प्रशासन द्वारा ही पूर्णहोती है
कल्याणकारी योजनाएं-कार्य लोक प्रशासन की प्रकृति पर निर्भर करते हैं
आज का राज्य एक प्रशासनिक राज्य हैं और प्रशासन विभिन्न लोक कल्याणकारी सेवाओंकी व्यवस्था करता है
इस कारण लोक प्रशासन का महत्वएक लोक कल्याणकारी राज्यमें और बढ़ जाताहै
लोक प्रशासन का महत्व इतना है कि सरकार की सफलता या असफलतालोक प्रशासन द्वारा सरकार की कल्याण कार्यों और अंय नीतियों और निर्णय के क्रियान्वन पर निर्भर है
आज लोक प्रशासन का अध्ययन आवश्यकहै
पश्चिमी देशों के साथ साथ हमारे देश में 1980के दशक से लोक प्रशासन का अध्ययन एक विषयके रूप में किया जा रहा है
अनेक विद्यालय विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर इसका अध्ययन किया जा रहा है

लोक प्रशासन ( Public administration ) important Question

Q-1. लोक प्रशासन में लोक शब्द का क्या तात्पर्य है ?
Ans- परंपरागत रूप से लोक शब्द का तात्पर्य सरकार/ शासन है जबकि आधुनिक संदर्भ में लोक में सरकार के साथ निजी संगठन ,नेटवर्क ,सिविल सोसाइटी ,अंतरराष्ट्रीय संगठन भी सम्मिलित है

Q-2. लोकस वह फोकस दृष्टिकोण क्या है ?
Ans-2. रोबोट गोलम्बयूस्की द्वारा लोक प्रशासन के क्षेत्र में प्रयुक्त दृष्टिकोण–
लोकस का अर्थ है–लोक प्रशासन का क्षेत्र निर्धारण जब की
फोकस का अर्थ है–लोक प्रशासन का अध्ययन बिंदु

Q-3 लोक प्रशासन के बढ़ते महत्व के कारण बताइए ?
Ans-3 समकालीन समय में लोक प्रशासन के बढ़ते महत्व के पीछे बहु विद कारक उत्तरदाई हैं यथा– वैज्ञानिक व तकनीकी विकास के क्रम में लोक प्रशासन के दायित्वों में वृद्धि ,कल्याणकारी राज्य की संकल्पना से सरकार के कार्यों में आशातीत वृद्धि ,औद्योगिक क्रांति जनित सामाजिक और आर्थिक समस्याओं में वृद्धि ,सूचना का अधिकार ,मानवाधिकारों व सूचना प्रौद्योगिकी का विकास, जनसंख्या वृद्धि और आपदा व संकटों से जनित समस्याओं समाज में नैतिक मूल्यों में गिरावट ,वर्ग संघर्ष इत्यादि चुनौतियों के संदर्भ में लोक प्रशासन के महत्व में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है

Q-4. लोक प्रशासन की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए??
Ans- लोक प्रशासन की प्रमुख विशेषताएं–
1-यह सरकारी तंत्र का भाग है
2-यह राजनीतिक पर्यावरण के अंतर्गत कार्य करता है
3-इसका मुख्य उद्देश्य लोकहित संवर्धन करना है
4-यह संवैधानिक और कानूनी सीमाओं के अंतर्गत क्रियाशील रहता है
5-यह निष्पादित व कानूनी सीमाओं के अंतर्गत क्रियाशील रहता है
6-यह सरकार के उद्देश्यों की प्राप्ति और नीति क्रियान्वयन संबंधी दायित्व से संबंधित है
7-यह सरकार के तीनों अंगों और उनके अंतर्संबंधों से संबंधित होता है

Q-5. लोक प्रशासन ( Public administration ) की प्रकृति की विवेचना कीजिए ?

Ans- लोक प्रशासन के उद्भव के समय से विद्वानों में यह द्वंद और मतभेद व्याप्त है कि यह कला है अथवा विज्ञान लोक प्रशासन को दो अर्थों में प्रयुक्त किया जाता है सरकारी कार्यों को संचालित करने वाली प्रक्रिया और अकादमिक विषय के रूप में बौद्धिक अनुसंधान से संबंधित गतिविधि प्रथम अर्थ के रूप में यह कला है लेकिन द्वितीय अर्थ से विवाद उत्पन्न होता है कि इसे विज्ञान माना जाए या नहीं
“”उक्त द्वंद की पृष्ठभूमि में लोक प्रशासन की प्रकृति को इस प्रकार समझा जा सकता है–

1 लोक प्रशासन कला  ( Public administration Art )- कला का तात्पर्य है सुव्यवस्थित अभ्यास परंपरागत रूप से लोक प्रशासन को कला (एल डी व्हाईट,डर्विक टीड) माना जाता है जिस के पक्ष में निम्न तर्क दिए जाते हैं—-

  • कला की भांति प्रशासन का अपना एक विशेष कौशल होता है, इस विशेष कौशल को अर्जित करने के लिए प्रशासकों को प्रशिक्षण अभ्यास और अनुभव की जरूरत होती है तभी कोई प्रशासक श्रेष्ठ प्रशासक बन सकता है
  • कला की तरह लोक प्रशासन का क्रमिक विकास हुआ है जो अभी भी जारी है
  • कला की भांति समय और परिस्थितियों के अनुरुप लोक प्रशासन के अंतर्गत प्रक्रिया पद्धतियों में परिवर्तन होता रहा है
  • लोक प्रशासन संगठन, संगठन के सदस्यों और कार्यकरण द्वारा कला की भांति स्वयं को अभिव्यक्त करता है
  • कला की तरह लोक प्रशासन में सर्जनात्मकता और नवाचारोन्मुखता तथा सिद्धांत व व्यवहार के अंतर्संबंधों की बोधगम्यता पाई जाती है

“”उपर्युक्त विवेचना से स्पष्ट होता है कि लोक प्रशासन एक कला है””

2 लोक प्रशासन विज्ञान नही ( No public administration science )- विज्ञान का तात्पर्य है किसी विषय का सुव्यवस्थित और क्रमबद्ध ज्ञान सार्वभौमिकता वस्तुनिष्ठता व प्रयोगधर्मिता “”विज्ञान की आधारभूत विशेषताएं हैं इन विशेषताओं के आधार पर लोक प्रशासन विज्ञान नहीं है क्योंकि””

  • लोक प्रशासन में सार्वभौमिकता का अभाव पाया जाता है क्योंकि प्रत्येक देश का प्रशासन अपने पर्यावरण और समाज से प्रभावित होता है अतः अलग-अलग राष्ट्रों का प्रशासन अलग-अलग स्वरुप में होता है
  • लोक प्रशासन के अंतर्गत प्रशासकों के निर्णय उनके अपने मूल्य से प्रभावित हैं अतः लोक प्रशासन में वस्तुनिष्ठता नहीं पाई जाती है
  • लोक प्रशासन का कार्यक्षेत्र संपूर्ण समाज है जिसके अंतर्गत नियंत्रित दशाओं में प्रयोग करना संभव नहीं होता अतः लोक प्रशासन में प्रयोगधर्मिता का अभाव पाया जाता है
  • लोक प्रशासन के अध्ययन की विषय वस्तु मानव की प्रशासनिक समस्याएं हैं और मानव व्यवहार में अनिश्चितता होती है अतः मानव व्यवहार के संबंध में भविष्यवाणी करना असंभव है

“”उपयुक्त विवेचन से स्पष्ट है कि लोक प्रशासन विज्ञान नहीं है””

लेकिन व्यवहारिक अनुभवों से सिद्धांतों (नियंत्रण का क्षेत्रदेश की एकता )का विकास और उनका संगठनों में अनुप्रयोग सीमित रूप में पूर्वानुमानीता विज्ञान की तरह विश्लेषणात्मक व समीक्षा तकनीकों का प्रयोग ज्ञान और अनुसंधान के मध्य अंतर संबंध व अंतर निर्भरता इत्यादि के आधार पर यह सामाजिक विज्ञानों की श्रेणी के रूप में स्वीकार किया जाता है अंततः यह कला और विज्ञान (सामाजिक विज्ञान) दोनों का ही समन्वित रूप है समकालीन समय में सुशासन और नव लोक प्रबंधन की संकल्पनाओं ने लोक प्रशासन के विज्ञान और कला के दांत को अर्थहीन कर दिया है गुड गवर्नेंस के कला पक्ष को जबकि नव लोक प्रबंधन इसके वैज्ञानिक और तकनीकी पक्ष को सशक्त कर रहे हैं

Specially thanks to ( With Regards )

Mamta Sharma kota