उत्तरदायित्व का अर्थ और परिभाषा➖ उत्तरदायित्व का अर्थ है उत्तर+दायित्वसंगठन में किसी अधिकारी को दी गई प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग ना हो इसके लिए व्यक्ति को उत्तर देना पड़ता है जिसे जवाबदेहीता कहा जाता है

प्रशासनिक कार्य सामूहिक रूप से निष्पादितकिए जाते हैं और संबंधित को दायित्व लेना पड़ता है

दायित्व का अर्थ है➖ संगठन में कार्य निष्पादन की सफलता-असफलता के लिए जिम्मेदारी

दूसरे शब्दों में➖किसी अधिकारी विशेष को कार्य विशेष के लिए जिम्मेदार बनाया जाता है तो वह उत्तरदायित्व है

उदाहरणार्थ➖किसी कार्यालय में लेखाकार द्वारा गबन किया जाता है तो उसका उत्तरदाई अध्यक्ष को माना जाता है

सत्ता और उत्तरदायित्व अंतर निर्भर और अंतर संबंधित होते हैं इनका आपस में अनुपात समान होनाचाहिए यदि समान अनुपात नहीं होगा तो सत्ता का दुरुपयोग और उत्तरदायित्व से बचने की स्थिति उभरेगी

इस संबंध में लार्ड एक्टन का कथन है कि➖ सत्ता भ्रष्ट करती है और पूर्ण सत्ता पूर्णतया भ्रष्ट करती है उत्तर दायित्व हमेशा पद के साथ जुड़ा रहता है इसे अलग नहीं किया जा सकता है

थियो हेमन उत्तरदायित्व के संबंध में कहते हैं कि➖उत्तरदायित्व उच्चस्थ के प्रति अधीनस्थ द्वारा सत्ता के प्रयोग के संबंध में बंधन है

फेयाल के अनुसार➖ प्राधिकार और उत्तरदायित्व अंतर संबंधित एवं समानुपातिक रूप से समान होने चाहिए

उर्विक के अनुसार➖ तदनुरूपता का सिद्धांत मानता है कि सभी स्तरों पर प्राधिकार और उत्तरदायित्व ,सहावसानी परस्पर समान होते हैं

हैमेन के अनुसार➖ उत्तरदायित्व अधीनस्थ पर अपने प्राधिकारों के इच्छित कार्यों को करने का बंधन है

जॉर्ज आर. टेरी. के अनुसार➖ सौपें गए कार्य को अपनी श्रेष्ठतम योग्यता से करने के एक व्यक्ति के बंधन को ही उत्तरदायित्व कहा जाता है

संक्षेप में➖सत्ता और उत्तरदायित्व के मध्य संतुलन आवश्यक है ऐसा व्यक्ति जिसके पास सत्ता तो है लेकिन वह किसी के प्रति उत्तरदाई नहीं है तो संगठन के उद्देश्य की प्राप्ति नहीं हो सकती है

1- उत्तरदायित्व के गुण ➖
1- यह सत्ता के साथ जुड़ा रहता है
2- यह सत्ता के दुरुपयोग पर अंकुश का आधार है
3- यह संगठन को कार्य निष्पादन के प्रति जवाबदेह बनाता है
4- यह उच्चस्थ द्वारा नियंत्रण पद्धति को सार्थक बनाता है

2- उत्तरदायित्व की विशेषताएं➖
1-यह कार्य को निष्पादित करने के संबंध में एक बंधन है
2-यह बंधन नैतिक और कानूनी दोनों प्रकार का हो सकता है
3-यह अधिकारी और अधीनस्थों के औपचारिक संबंधों से उत्पन्न होता है
4-उत्तरदायित्व अहस्तांतरित प्रकृति का होता है
5-उत्तरदायित्व विशिष्ट या सामान्य प्रकार का हो सकता है
6-उत्तरदायित्व के साथ प्राधिकार होना आवश्यक है (संवादिता का सिद्धांत)

उत्तरदायित्व के प्रकार

विषय वस्तु के आधार पर उत्तरदायित्व के प्रकार इस प्रकार हैं➖➖

राजनीतिक उत्तरदायित्व ➖ राजनीतिक कार्यपालिका सर्वोच्च स्तर पर कार्य संपादित करने वाली निकाय है यह संस्था ही कानून निर्माण कार्यक्रम और नीति निर्माण का कार्य करती है उनके उत्तरदायित्व निर्धारण का प्रश्न उभरता है तो प्रशासनिक तंत्र राजनीतिक तंत्र के प्रति और राजनीतिक तंत्र विधायिका और जनता के प्रति उत्तरदाई होता है

जैसे– मंत्रिमंडल के प्रति प्रशासनिक तंत्र का उत्तरदायित्व

अर्थात– कानून, नीति और कार्यक्रमों का निर्माण करने वाले संस्था के प्रति संगठन का उत्तरदायित्व राजनीतिक उत्तरदायित्वहोता है

संस्थागत उत्तरदायित्व ➖ संगठन का स्वयं के कार्य के लिए जनता के प्रति उत्तरदाई होना संगठनात्मक उत्तरदाई है संस्था जनता के मध्य रहकर कार्य संपादित करती है अगर इन दोनों तत्वों के मध्य तालमेल नहीं बनाया जाएगा तो उत्तरदायित्व निर्धारण कठिन होगा

इसकी अभिव्यक्ति–एकल खिड़की व्यवस्था, शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना में देख सकते हैं

पेशेवर/व्यवसायिक उत्तरदायित्व➖पेशेवर मूल्य, मापदंड , नियमों और आचार संहिता के प्रति उत्तरदायित्व व्यवसायिक उत्तरदायित्व है संगठन में स्थानीय ,राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का जुड़ाव होता है वर्तमान वैश्विक जुड़ाव के दौर में प्रत्येक गतिविधि का प्रभाव सभी स्तरों पर पड़ता है इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति और कार्मिक जिसका जुड़ाव पेशागत है उसका सभी स्तरों के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व बनता है कि वह अपनी गतिविधि को नैतिकता के मापदंड के निकटतम बनाए रखें यह विचार द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोगने भी प्रस्तुत किया है

प्रकृति के आधार पर उत्तरदायित्व के प्रकार इस प्रकार हैं➖➖

1- अंतिम उत्तरदायित्व➖ संगठन के शीर्षतम अधिकारी का संगठन के कार्य को पूरा करने की सामान्य अपेक्षा ही अंतिम उत्तरदायित्व है इसका प्रत्यायोजन संभव नहींहै

2- क्रियात्मक उत्तरदायित्व ➖ यह अप्रत्यक्ष रूप से कार्य से जुड़ा होता है यह कार्य निष्पादन हेतु उत्तरदाई व्यक्ति पर क़ानूनी बाध्यता आरोपित करता है इसका प्रत्यायोजन किया जा सकता है

सत्ता और उत्तरदायित्व

सत्ता और उत्तरदायित्व के मध्य धनिष्ठा का संबंध है संगतता का सिद्धांत मानता है कि➖ सत्ता और उत्तरदायित्व समान मात्रा में होने चाहिए सत्ता के अभाव में उत्तरदायित्व अर्थहीन हो जाएगा और उत्तरदायित्व के बिना सत्ता खतरनाक साबित होती है

यदि सत्ता उत्तरदायित्व के अनुपात से अधिक होगी तो संगठन में सत्ता का दुरुपयोग होगा, संगठन में अराजकता अव्यवस्था और निरंकुशता का साम्राज्य बड़ेगा यदि सत्ता उत्तरदायित्व से कम होगी तो कार्य के लिए उत्तरदाई कार्मिक उलझन की स्थिति में रहेंगे और संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति संभव नहीं होगी अतः संगठन पतनोन्मुखी की दिशा में अग्रसर होगा

उत्तरदायित्व हेतु नियंत्रण➖ प्रशासक को उनके उत्तरदायित्व का प्रज्ञान अनेक प्रकार के ऐसे नियमों से कराया जाता है जो उस पर लागू होते हैं

आधुनिक लोकतांत्रिक शासन में यह नियंत्रण➖अनेक स्थानों पर व्यक्तियों से अद्भुत होते हैं
यथा– मतदाता या लोक संसद या विधायिका प्रशासकीय मालिक व्यावसायिक संस्थान और न्यायालय

प्रशासन किसके प्रति उत्तरदाई➖➖उपयुक्त शक्तियों में से किसके प्रति कितना प्रशासन का उत्तरदायित्व होगा यह देश की संवैधानिक व्यवस्था पर निर्भर करता है

उदाहरण के लिए➖ संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रशासन विधायिका के प्रति वैसे और उतना उत्तरदाई नहीं होता जितना और जैसे इंग्लैंड जैसे संसदीय व्यवस्था वाले देशों में

स्विट्जरलैंड में➖ जनता और मतदाताओं का प्रशासन पर जितना व्यापम नियंत्रण है वैसा उन देशों में नहीं जहां लोकतंत्र अप्रत्यक्ष है

संक्षेप में➖सत्ता और उत्तरदायित्व में घनिष्ठ संबंध है वस्तुतः सत्ता किसी उत्तरदायित्व को पूरा करने का ही माध्यम है

सत्ता और उत्तरदायित्व में अंतर 

1- सत्ता का प्रत्यायोजन संभव है उत्तरदायित्व का प्रत्यायोजन नहीं किया जा सकता
2- इसका प्रभाव ऊपर से नीचे की ओर होता है जबकि उत्तरदायित्व का प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर होता है
3- सत्ता का संबंध उच्च स्तर से होता है उत्तरदायित्व का संबंध अधीनस्थों से होता है
4- सत्ता दूसरों से कार्य निष्पादन कराने से संबंधित है उत्तरदायित्व कार्य निष्पादन से जुड़ा एक बंधन है

उत्तरदायित्व और जवाबदेही में संबंध 

सामान्यता उत्तरदायित्व और जवाबदेही को एक ही अर्थ में प्रयुक्त किया जाता है लेकिन दोनों के मध्य आधारभूत अंतर होता है जो इस प्रकार है➖

1- उत्तरदायित्व का स्त्रोत सत्ता है–जबकि जवाबदेही का स्त्रोत उत्तरदायित्व है
2- उत्तरदायित्व नैतिक और अनौपचारिक होता है–जबकि जवाबदेही कानूनी और औपचारिक होता है
3- उत्तरदायित्व कार्य के प्रति होता है–जवाबदेही अधीनस्थों की उच्च अधिकारियों के प्रति होती है
4- उत्तरदायित्व व्यक्तिगत और सामूहिक रूप में होता है– जवाबदेही प्रकृति में व्यक्तिगत होती है
5- उत्तरदायित्व स्वायत्तता पर अंकुश आरोपित करता है– जवाबदेही अधिकारों पर नियंत्रण और नियमन आरोपित करती है
6- उत्तरदायित्व व्यक्तिनिष्ठ रूप में होता है–जबकि जवाबदेही वस्तुनिष्ठ रूप में होती है

प्रत्यायोजन (Delegation)

मनुष्य एक विवेकशील और बौद्धिक प्राणी है लेकिन इसकी अपनी बौद्धिक योग्यता और शारीरिक क्षमताओं की शारीरिक सीमाएं होती है यह इन सीमाओं से परे जाकर किसी कार्य का निष्पादन नहीं कर सकता

कार्यधिक्ता की स्थिति में कार्यभार को कम करना आवश्यक होता है जिससे मनुष्य की कार्य क्षमता को उच्च स्तर पर स्थापित किया जा सके इसी संदर्भ में किसी भी संगठन में प्रत्यायोजन की अनिवार्यता सुनिश्चित होती है इसे कार्यों का हस्तांतरण भार्रापण इत्यादि नामों से भी जाना जाता है

प्रत्यायोजन का अंग्रेजी शब्द Delegation Delegate से निकलता है ,Delegate का अर्थ है दूसरों के विचारों की अभिव्यक्ति करने वाला अधिकृत व्यक्ति

किसी संगठन के संदर्भ में प्रत्यायोजन का अर्थ है उच्च स्तर अधिकारियों द्वारा अधीनस्थों को कार्य सत्ता और जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया

अन्य शब्दों में➖कार्यभार को कम करने के लिए अन्य व्यक्तियों को अपने कार्यभार का कुछ भाग आवश्यक अधिकारियों सहित सौपना प्रत्यायोजन कहलाता है

प्रत्यायोजन➖ अधीनस्थों को शक्ति उत्तरदायित्व और अधिकार को प्रदान कर कार्य करवाने की प्रक्रिया है

प्रत्यायोजन के द्वारा➖ कार्य को अन्य के साथ बांटकर संपन्न किया जाता है प्रत्यायोजन अधीनस्थों को शक्ति उत्तरदायित्व और अधिकारों को प्रदान कर कार्य करवाने की प्रक्रिया है

थियो हैमेन के अनुसार➖ सत्ता के प्रत्यायोजन का अर्थ अधीनस्थों को निर्धारित सीमाओं में कार्य करने हेतु अधिकार प्रदान करने से है

मिलेट के अनुसार ➖ सत्ता के प्रत्यायोजन का अर्थ दूसरों को कर्तव्य सौप देने से कुछ अधिक है प्रत्यायोजन का सार है दूसरों को स्वविवेक सौपना ताकि वह अपने कर्तव्य से संबंधित विशिष्ट समस्याओं को सुलझाने में अपने निर्णय का प्रयोग कर सकें

हैमेन के अनुसार ➖ सत्ता के हस्तांतरण का अर्थ केवल यह है कि अधीनस्थों को एक निर्धारित सीमा में कुछ करने की सत्ता सौंप दी जाए प्रत्यायोजन की इस प्रक्रिया के कारण अधीनस्थ अपने उच्च अधिकारी से सत्ता प्राप्त करता है लेकिन उच्च अधिकारी के पास सत्ता अभी भी मौलिक रुप से बनी रहती है वह उसे पूरी तरह से नहीं त्याग देता

एल.ए.एलन के अनुसार➖ प्रत्यायोजन एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक उच्च अधिकारी अपने कुल कार्य को स्वयं के और अपने अधीनस्थों के मध्य वितरित करता है जिससे कि क्रियात्मक और प्रबंधकीय विशिष्टीकरण की प्राप्ति की जा सके

एफ. जी. मूरे के अनुसार ➖ प्रत्यायोजन का अर्थ अन्य व्यक्तियों को कार्य का वितरण करना है और उसे करने हेतु अधिकार प्रदान करना है

उक्त परिभाषाओं के आधार पर प्रत्यायोजन के निम्नलिखित तत्व उजागर होते हैं–
1- अधिकारों का सोपना
2- कार्य का वितरण करना और
3- उत्तरदायित्व निर्धारित करना

प्रत्यायोजन की आवश्यकता और महत्व

1- प्रत्यायोजन संगठन के शीर्ष पर कार्यधिक्ता के भार को कम करता है और संगठनात्मक कार्य कुशलता को स्थापित करता है
2- कार्मिकों को अधिकार और दायित्व सौंपकर उनमे प्रबंधक के गुणों का विकास करता है और नेतृत्व की दूसरी पंक्ति को विकसित करता है
3- यह कार्मिकों में उत्तर दायित्व बोध और अभिरुचि को उत्तरोत्तर बढ़ाता है
4- यह अधीनस्थों के नैतिक स्तर पर मनोबल को बढ़ाता है
5- यह मानवीय पूर्णता अथार्थ मानव की सीमित बौद्धिक योग्यता और क्षमताओं को पूरकता देता है
6- यह प्रशासनिक उलझन की स्थिति में लाल फीताशाही के दोष से बचाता है और तकनीकी जटिलताओं के निदान में सहायक है
7- यह निर्णय प्रक्रिया को स्थानीय परिस्थितियों और मागों के समरूप बनाता है
8- प्रत्यायोजन के प्रयोग से संगठन के विभिन्न स्तरों को अधिक समुचित रीती से प्रयुक्त किया जा सकता है और मुख्य प्रशासक अधिक महत्वपूर्ण प्रश्नों पर अपना ध्यान लगाने में समर्थ होता है
9- इस प्रणाली के अंतर्गत उत्तरदायित्व की भावना और प्रत्येक कर्मचारी की कार्य शक्ति में वृद्धि होती है
10- संगठन द्वारा की गई सेवाओं में सुधार होता है और कुशलता मितव्यता और शीघ्रता से कार्य संपन्न होता है

11- संगठन के प्रत्येक स्तर के कार्य और उत्तरदायित्व स्पष्ट हो जाते हैं जिससे कार्य संचालन का प्रभावी नियंत्रण संभव होता है

12- निर्णय में कम से कम देरी आती है

प्रत्यायोजन की विशेषता 

1- प्रत्यायोजन अधिकार कार्य और दायित्व के वितरण से संबंधित है
2- यह दोहरे स्वरुप में होता है अथार्थ वरिष्ठ अधिकारी अधीनस्थों को सत्ता सौंपने के साथ-साथ कुछ सत्ता अपने पास भी रखता है
3- प्रत्यायोजन में आंशिक सत्ता का हस्तांतरण होता है अर्थात वरिष्ठ पदाधिकारी अपने सभी दायित्वों को अधीनस्थ को नहीं सौपता
4- प्रत्यायोजन केवल क्रियात्मक उत्तरदायित्व का हस्तांतरण है अंतिम उत्तरदायित्व प्रत्यायोजन का ही होता है
5- प्रत्यायोजन के अंतर्गत परिवर्तन तत्व भी प्रभावी रहता है अर्थात प्रदत सत्ता को घटाया बढ़ाया या पुनः वापस लिया जा सकता है
6- प्रत्यायोजन संगठनात्मक लक्ष्यों की दिशा में उर्ध्वगामी अधोगामी और क्षितिज तीनों विधि द्वारा प्राप्त होती है

प्रत्यायोजन की प्रक्रिया के निम्नलिखित चरण है➖

1- अधीनस्थ से अपेक्षित परिणाम को निर्धारित करना
2- अधीनस्थ को कार्य सोपना
3- कार्य निष्पादन के लिए सत्ता का प्रत्यायोजन करना
4- प्रदत्त कार्य को पूरा करने के लिए उत्तरदाई बनाना
5- प्रत्यायोजन के परिणामों के मूल्यांकन के लिए नियंत्रण व्यवस्था को स्थापित करना

न्यूमैन के अनुसार प्रत्यायोजन की प्रक्रिया के चरण➖
1- कार्यपालिका अपने तुरंत के अधीनस्थों को कर्तव्य देती है
2- इन कर्तव्य को करने के लिए सत्ता प्रदान करना
3- इन कर्तव्यों की संतोषजनक संपनता के लिए प्रत्येक अधीनस्थों को कार्यपालिका के प्रति उत्तरदाई बनाना

प्रत्यायोजन के प्रकार

प्रत्यायोजन की प्रकृति विषय वस्तु और उसमें उपस्थित सरिता आदि के कारण उसे कुछ वर्गों में विभक्त किया जा सकता है जैसे लिखित अथवा लिखित या मौखिक प्रत्यायोजन औपचारिक या अनौपचारिक प्रत्यायोजन सामान्य अथवा विशिष्ट प्रत्यायोजन पूर्ण अथवा आंशिक प्रत्यायोजन सशर्त अथव अशर्त प्रत्यायोजन आदि

1 पूर्ण और आंशिक प्रत्यायोजन➖निर्णय लेने की संपूर्ण सत्ता को अधीनस्थ को सौंपना पूर्ण प्रत्यायोजन कहलाता है लेकिन जब सौपें गए दायित्व/ कार्यों के संदर्भ में प्रत्यायोजि को प्रत्यायोजक के परामर्श और मार्गदर्शन के अनुसार निर्णय लेना पड़ता है तो उसे आंशिक प्रत्यायोजन कहते हैं

2 सशर्त और शर्त हिन प्रत्यायोजन➖ सशर्त प्रत्यायोजन में प्रत्यायोजि को कुछ शर्तों के साथ कार्य और दायित्व सौंपा जाता है और प्रत्यायोजक निर्धारित शर्तों के परिपेक्ष्य में नियंत्रण करता है जबकि बिना शर्त के प्रत्यायोजि को स्वतंत्र रूप से कार्य और दायित्व के संबंध में निर्णय शक्ति सौपना शर्त हिन प्रत्यायोजन है

3 औपचारिक व अनौपचारिक प्रत्यायोजन➖संगठन के नियमो कानूनो व संहिताओ के आधार पर किया गया प्रत्यायोजन औपचारिक प्रत्यायोजन है। यह लिखित प्रकृति का प्रत्यायोजन है जबकि सांगठनिक अनोपचारिक परंपराओं प्रथाओं रीति रिवाजों और आपसी सद्भाव के आधार पर मौखिक रूप से किया गया प्रत्यायोजन अनौपचारिक प्रत्यायोजन कहलाता है

4 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रत्यायोजन➖ प्रत्यक्ष प्रत्यायोजन में प्रत्यायोजक द्वारा प्रत्यायोजी के बीच प्रत्यक्ष रुप से कार्य और दायित्व को सौंपा जाता है जबकि अप्रत्यक्ष प्रत्यायोजन में प्रत्यायोजक और प्रत्यायोजी के बीच मध्यस्थ के रूप में कोई तीसरा व्यक्ति शामिल होता है और इसी के माध्यम से प्रत्यायोजन संभव होता है

5 स्थाई और अस्थाई प्रत्यायोजन ➖ स्थाई प्रत्यायोजन में सत्ता और दायित्व स्थाई रूप से सौप दिए जाते हैं यह प्रत्यायोजन दीर्घकालिक प्रकृति का होता है अस्थाई प्रत्यायोजन में समय और परिस्थिति की आवश्यकता के अनुसार कुछ समय विशेष के लिए सत्ता और दायित्व सौंपा जाते हैं और कार्य की पूर्ण समाप्ति पश्चात यह प्रत्यायोजन समाप्त हो जाता है

6 सामान्य और विशिष्ट प्रत्यायोजन➖ सामान्य प्रत्यायोजन में कार्य से संबंधित संपूर्ण गतिविधियों को हस्तांतरित कर दिया जाता है जबकि विशिष्ट प्रयोजन में कार्य से संबंधित संपूर्ण गतिविधियां न सोप कर केवल कार्य से संबंधित आवश्यक और विशिष्ट क्रियाएं सौंपी जाती है

7 लिखित और मौखिक प्रत्यायोजन➖ लिखित प्रत्यायोजन औपचारिक प्रकृति का प्रत्यायोजन है जो विधिवत और लिखित आदेशों में किया जाता है जबकि मौखिक प्रत्यायोजन अनौपचारिक अलिखित प्रकृति का होता है यथा- टेलीफोन दिया गया प्रत्यायोजन

8 सरल और जटिल प्रत्यायोजन➖ सरल और प्रत्यायोजन में प्रत्यायोजन प्रक्रिया सरल होती है किसी औपचारिक की आवश्यकता नहीं होती जबकि जटिल प्रत्यायोजन की प्रक्रिया में अनेक प्रकार की अनौपचारिकताए संपन्न करनी पड़ती है

10 दिशा के आधार पर प्रत्यायोजन ➖ दिशा के आधार पर चार प्रकार का प्रत्यायोजन होता है
1-उर्द्धगामी प्रत्यायोजन- नीचे से ऊपर की ओर अथात अधीनस्थ इस तरह से उच्च स्तर की और दायित्व और सत्ता का हस्तांतरण उर्ध्वगामी प्रत्यायोजन है

2- अधोगामी प्रत्यायोजन संगठन में ऊपर से नीचे के स्तर अर्थात उच्च अधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थों को दायित्व और सत्ता सपना अधोगामी प्रत्यायोजन है

3- क्षितिज आकार/ सम स्तरीय प्रत्यायोजन– संगठन के अंतर्गत समान स्तर के अधिकारियों के मध्य दायित्व और सत्ता का हस्तांतरण सम स्तरीय प्रत्यायोजन है

4- बाह्य और पार्श्व प्रत्यायोजन– सांगठनिक इकाई द्वारा संगठनेतर इकाई को दायित्व और सत्ता सौंपना बाह्य प्रत्यायोजन है संगठन द्वारा निकटवर्ती पहचान वाले संगठन को किया गयाप्रत्यायोजन पार्श्व प्रत्यायोजन है

प्रत्यायोजन के सिद्धांत 

प्रत्यायोजन के कुछ सिद्धांत हैं जिनका पालन किए बिना कोई भी प्रत्यायोजन प्रभावी और कारगर नहीं हो सकता प्राय प्रत्यायोजन प्रक्रिया अपनाते समय अधोलिखित सिद्धांतों को अपनाना चाहिए

1- प्रत्यायोजन संगतता के नियम पर आधारित होना चाहिए ,अथार्थ सत्ता और उत्तरदायित्व के बिच समता हो

2- प्रत्यायोजन स्पष्ट और लिखित होना चाहिए

3- प्रत्यायोजन विशिष्ट औपचारिक उचित और योजना बंद होना चाहिए

4- प्रत्यायोजन क्रियात्मक कार्य /दायित्व का ही होना चाहिए अंतिम उत्तरदायित्व का नहीं यह प्रत्यायोजक के पास ही होना चाहिए

5- संप्रेषण व्यवस्था खुली और अबाध होनी चाहिए

6- प्रत्यायोजन किसी व्यक्ति विशेष को नहीं ,पदस्तर को होना चाहिए

7- प्रत्यायोजन श्रृंखला यथासंभव लघु (छोटी )हो

8- प्रत्यायोजन अधीनस्थों की योग्यताओं क्षमताओं पर आधारित होनी चाहिए

9- प्रत्यायोजन नियोजित व्यवस्थित आदेश की एकता के सिद्धांत पर आधारित और फीडबैक व्यवस्था से युक्त होनी चाहिए

10- प्रत्यायोजी को प्रत्यायोजन के सभी पक्षों अधिकारों की सीमा दायित्व इत्यादि की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए

11- प्रत्यायोजन में अपेक्षित परिणामों के परिप्रेक्ष्य में ही दायित्व और कर्तव्य को सौंपा जाना चाहिए

12- प्रत्यायोजन करते समय सत्ता के स्वीकृति सिद्धांत की सीमाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए

प्रत्यायोजन की सीमाएं

प्रत्यायोजन करते समय निम्नलिखित से संबंधित सत्ता को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता➖

1- प्रथम पंक्ति अथार्थ निकटतम अधीनस्थों के कार्यों के पर्यवेक्षण की सत्ता

2- एक निश्चित मात्रा से अधिक व्यय करने की अनुमति और सामान्य वित्तीय पर्यवेक्षण की सत्ता
3- नियम और कायदे कानून बनाने की सत्ता
4- नवीन नीतियों को स्वीकृति देने और पुरानी नीतियों से प्रस्थान संबंधित सत्ता
5- विशिष्ट उच्च पदों पर नियुक्ति संबंधी सत्ता
6- निकटस्थ अधीनस्थों द्वारा लिए गए निर्णय के खिलाफ अपील सुनने की सत्ता
7- निकटस्थ मातहतों के निरीक्षण और संगठन में संबंधी संबंधी दायित्व का प्रत्यायोजन नहीं किया जा सकता
8- अन्य को प्राप्त सत्ता अर्थात जो सत्ता स्वयं के पास नहीं है उसे प्रत्यायोजित नहीं किया जा सकता

यह सभी अधिकार मुख्य प्रशासक के पास ही रहने चाहिए

प्रत्यायोजन प्रक्रिया के तत्व 

प्रत्यायोजन की एक सुनिश्चित प्रक्रिया है जिसमें निम्नलिखित तीन तत्व निहित होते हैं➖

  • प्रथम- कार्य अथवा कर्तव्य का स्थांतरण किया जाता है
  • द्वितीय- हस्तांतरित कर्तव्य के निष्पादन के लिए सत्ता सौपना
  • तृतीय-प्रदत सत्ता का कर्तव्य के संपादन में उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायित्व निश्चित करना

प्रत्यायोजन की बाधाएं

प्रत्यायोजन करते समय मुख्यतः दो प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ता है➖
1- संगठनात्मक बाधाएं
2- व्यक्तिगत बाधाएं ( प्रत्यायोजक संबंधी बाधा, प्रत्यायोजी संबंधी बाधा)

1  संगठनात्मक बाधाएं➖
1- सुस्थापित और विकसित संगठनात्मक विधियों और क्रिया विधियों का अभाव
2- समन्वय और संचार साधनों की कमी
3- कार्य की प्रकृति अथार्थ कार्यों में एकरूपता होना तथा कार्यों में दोहराव ना होना
4- विशिष्ट कार्यक्रम और कार्य क्षेत्र में विभिन्न कारकों के कारण केंद्रीयकरण की मांग
5- संगठन का छोटा आकार और संकुचित भौगोलिक बिखराव
6- सत्ता और उत्तरदायित्व के बीच क्षमता की अस्पष्टता

7- संगठनात्मक जोखिम और संकटकालीन परिस्थितियों

8- नियंत्रण और फीडबैक तंत्र की दुर्बलता
9- संगठन की कम आयु

2 व्यक्तिगत बाधाएं ➖

व्यक्तिगत बाधाएं दो प्रकार की हैं प्रत्यायोजक संबंधी और प्रत्यायोजी संबंधी

1-प्रत्यायोजक संबंधी बाधाएं–

  1. प्रत्यायोजक में अहंकार की भावना
  2. अधीनस्थों के प्रति विश्वास की कमी
  3. अधीनस्थों की योग्यता पर संदेह
  4. निर्देशन योग्यता की कमी
  5. स्वयं को श्रेष्ठ समझना और सत्तावादी मानसिकता

2-प्रत्यायोजी संबंधी बाधाएं–

  1. आत्मविश्वास की कमी
  2. आलोचना का डर
  3. कार्यभार की अधिकता
  4. जिम्मेदारी को टालने की प्रवृत्ति
  5. पुरस्कार और प्रोत्साहन की कमी
  6. आलोचना का पात्र बनने का भय
  7. योग्यता और क्षमता की कमी

प्रभावी प्रत्यायोजन के संदर्भ में सुझाव 

1- यथासंभव प्रत्यायोजन सुस्पष्ट रूप से लिखित औपचारिक ,नियोजित और व्यवस्थित होना चाहिए
2- अपेक्षित परिणामों के परिपेक्ष्य में कार्य दायित्व और सत्ता का प्रत्यायोजन किया जाए
3- प्रत्यायोजन आदेश की एकता के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए
4- संप्रेषण व्यवस्था खुली और अबाध रूप से होनी चाहिए
5- उचित नियंत्रण और फीडबैक तथा निष्पादन मूल्यांकन तंत्र की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए
6- प्रत्यायोजन अधीनस्थों की योग्यता और सक्षमता के अनुरूप किया जाना चाहिए
7- सफल और प्रभावी प्रत्यायोजन को पुरस्कृत किया जाना चाहिए
8- अधिकार और दायित्व में संगतता तथा समता होनी चाहिए
9- प्रत्यायोजन पश्चात अधीनस्थों के कार्यक्रम में अनावश्यक हस्तक्षेप की प्रवृति से बचना चाहिए
10- प्रत्यायोजन के उद्देश्य और लक्ष्य का आशय स्पष्ट निर्धारण किया जाना चाहिए
11- प्रत्यायोजन के संदर्भ में अधीनस्थों को समुचित शिक्षण और प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए
12- संगठन में उच्चस्थ अधीनस्थों को प्रत्यायोजन के महत्व और लाभों से अवगत कराया जाना चाहिए
13- संगठन के अंतर्गत सद्भाव विश्वास और टीम भावना का वातावरण स्थापित किया जाना चाहिए

 

Public Administration Responsibility & Delegation important Question & Quiz

प्रश्न-1. प्रत्यायोजन पर एक टिप्पणी लिखिए ?
उत्तर-1. कार्यभार को कम करने के लिए अन्य व्यक्तियों को अपने कार्य का कुछ भाग आवश्यक अधिकारों से ही सौंपना प्रत्यायोजन कहलाता है

प्रश्न-2. प्राधिकार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-2. प्राधिकार आदेश देने निर्णय लेने और उनके पालन करवाने की वह शक्ति ,स्थितियां, अधिकार है जो अधीनस्थों द्वारा स्वीकार कर लिए जाने पर अर्थपूर्ण बन जाता है और संगठनात्मक लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अधीनस्थ द्वारा जिसका पालन आवश्यक होता है

प्रश्न-3. उत्तरदायित्व से आप क्या समझते हैं प्रशासन में उत्तरदायित्व और नियंत्रण कैसे सुनिश्चित होता है ?

उत्तर-3. किसी व्यक्ति पर कुछ कार्य करने या ना करने किसी विशेष प्रकार से करने या ना करने की जिम्मेदारी ही उत्तरदायित्व कहलाती है! प्रशासन में उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रशासकों को उनके उत्तरदायित्व का प्रज्ञान अनेक ऐसे नियमों से कराया जाता है जो उन पर लागू होते हैं आधुनिक लोकतांत्रिक शासन में प्रशासन पर नियंत्रण अनेक संस्थाओं या व्यक्तियों से अद्भुत होता है जैसे संसद या विधायिका से मतदाताओं या लोक से प्रशासकीय मालिकों से व्यवसायिक संस्थाओं से और नियमों से

प्रश्न-4. शक्ति की अवधारणा से आप क्या समझते हो ?

उत्तर-4. शक्ति उस सामाजिक स्थिति का घोतक है जिसमें कोई व्यक्ति सामाजिक विरोध की स्थिति में भी स्वइच्छा और आदेशों का पालन करवाने में सफल हो जाता है यह एक नकारात्मक संकल्पना है क्योंकि इसमें बल प्रयोग का तत्व संभावित होता है यह एक साक्षेप अवधारणा है यथा राजनीतिक शक्ति आर्थिक शक्ति सामाजिक शक्ति इत्यादि यह अस्थाई अवैधानिक और संस्थागत के स्थान पर व्यक्तिगत होती है शक्ति का दीर्घकालीन अस्तित्व सत्ता पर निर्भर करता है

प्रश्न-5. सत्ता और उत्तरदायित्व अवधारणा का वर्णन कीजिए क्या यह दोनों एक साथ जाते हैं ?

उत्तर-5. सत्ता एक सकारात्मक संकल्पना है जो आदेश देने निर्णय लेने और उनके पालन करवाने का अधिकार रखती है यह पद में निहित होती है यह प्रत्यायोजनीय और वैज्ञानिक स्वरूप में होती है संगठन के अंतर्गत सत्ता वस्तुनिष्ठ और उत्तरदायित्व से जुड़ी अवधारणा है यह संगठन में शीर्ष पर व्यापक रुप में जबकि अधीनस्थ स्तरों पर क्रमशः कम होती है कानून सांगठनिक परंपरा रीति रिवाज नियम संहिता और प्रत्यायोजन सत्ता के मुख्य स्त्रोत हैं

उत्तरदायित्व का अर्थ है उत्तर+ दायित्व किसी अधिकारी विशेष को कार्य विशेष के लिए जिम्मेदार बनाना उत्तरदायित्व कहलाता है यह कार्य को निष्पादित करने के संदर्भ में नैतिक और कानूनी बंधन है यह अधिकारी और अधीनस्थों के औपचारिक संबंधों से उत्पन्न होता है यह अहस्तांतरित प्रकृति का होता है यह विशिष्ट या सामान्य स्वरुप में होता है उत्तरदायित्व के साथ प्राधिकार जुड़ा हुआ होता है

सत्ता और उत्तरदायित्व के मध्य घनिष्ठता का संबंध है संगतता का सिद्धांत मानता है कि सत्ता और उत्तरदायित्व समान मात्रा में होने चाहिए सत्ता के अभाव में उत्तरदायित्व अर्थहीन हो जाएगा और उत्तरदायित्व के बिना सत्ता खतरनाक साबित होगी यदि सत्ता उत्तरदायित्व के अनुपात से अधिक होगी तो संगठन में सत्ता का दुरुपयोग होगा संगठन में अराजकता अव्यवस्था और निर्भयता का साम्राज्य पड़ेगा यदि सत्ता उत्तरदायित्व से कम होगी तो कार्य के लिए उत्तरदाई कार्मिक उलझन की स्थिति में रहेंगे और संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति संभव नहीं होगी अंततः संगठन पतनोन्मुख की दिशा में अग्रसर होगा अतः कहा जा सकता है कि सत्ता और उत्तरदायित्व संगठन के अंतर्गत संगतता के सिद्धांत के अनुरूप साथ साथ चलते हैं

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NO OF QUESTION-16

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Specially thanks to ( With Regards )

Mamta Sharma, prabhu swami , phoolchand ji , Rakesh Goyal, चंद्रप्रकाश सोनी पाली

 

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