1. सवाई प्रताप सिंह – जयपुर नरेश सवाई प्रताप सिंह संगीत एवं चित्रकला के प्रकांड विद्वान और आश्रयदाता थे इन्होंने संगीत का विशाल सम्मेलन करवाकर संगीत के प्रसिद्ध ग्रंथ राधा गोविंद संगीत सार की रचना करवाई जिसके लेखन में इनके राजकवि देवर्षि बृजपाल भट्ट का महत्वपूर्ण योगदान रहा  इनके दरबार में 22 प्रसिद्ध संगीतज्ञ एवं विद्वानों की मंडली गंधर्व बाईसी थी

2. महाराजा अनूप सिंह- बीकानेर के शासक जो स्वयं एक विद्या अनुरागी तथा विद्वान संगीतज्ञ थे प्रसिद्ध संगीतज्ञ भाव भट्ट इन्हीं के दरबार में था

3. पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर- यह महाराष्ट्र के थे इन्होंने संगीत पर कई महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे तथा संगीत को जन-जन तक पहुंचाया

4. पंडित विष्णु नारायण भातखंडे -प्रसिद्ध संगीत सुधारक एवं प्रचारक इनका जन्म 1830 में हुआ

5. पंडित उदय शंकर– उदयपुर में जन्मे श्री उदय शंकर प्रख्यात कथकली नर्तक रहे हैं

6. पंडित रविशंकर.- मैहर के बाबा उस्ताद अलाउद्दीन खां के प्रमुख शिष्य प्रख्यात नृत्यकार पंडित उदय शंकर के अनुज पंडित रविशंकर वर्तमान में विश्व के शीर्षस्थ सितार वादक है उन्होंने भारतीय संगीत को विदेशों तक लोकप्रिय बनाया है इन्हें अमेरिका का प्रसिद्ध संगीत पुरस्कार ग्रैमी पुरस्कार मिल चुका है

7. पंडित विश्व मोहन भट्ट– जयपुर के विश्व प्रसिद्ध सितार वादक जिन्हें 1994 में स्पेनिश गिटार वादक के साथ जुगलबंदी कर कॉन्पैक्ट डिस्क प्रसिद्ध ग्रैमी पुरस्कार मिला उन्होंने एक नई राग गौरीम्मा का सृजन किया पंडित विश्व मोहन भट्ट ने पश्चिमी गिटार में 14 तार जोड़ कर इसे मोहन वीणा का रूप दिया जो वीणा सरोज एवं सितार का समिश्रण है इनके बड़े भ्राता पंडित शशि मोहन भट्ट भी प्रसिद्ध सितार वादक थे जिनका वर्ष 2001 में जयपुर में निधन हो गया

8. जहीरुद्दीन फैयाज उद्दीन डागर– प्रसिद्ध ध्रुपद गायक जिन्होंने द्रुपद में जुगलबंदी की परंपरा स्थापित की और द्रुपद को नया रूप दिया
जियाउद्दीन का पदम भूषण रहीमुद्दीन डागर सभी इसी घराने के हैं

9. बन्नो बेगम– जयपुर की प्रसिद्ध गायिका जो जयपुर की प्रसिद्ध गायिका व नर्तकी गौहर जान की पुत्री हैं

10. अमीर खुसरो– इसका जन्म उत्तर प्रदेश में 1253 ईस्वी में हुआ था खुसरो अलाउद्दीन खिलजी के दरबारी संगीतज्ञ थे इन्होंने इरानी और भारतीय संगीत शैलियों के संबंध से हिंदुस्तानी संगीत प्रारंभ किया तथा गायन की एक नई शैली कव्वाली विकसित की

11. राजा मानसिंह तोमर– ग्वालियर के शासक जो स्वयं भी एक अच्छे विद्वान और संगीतज्ञ थे उन्होंने बैजू बावरा के सहयोग से ध्रुपद गायन को परिष्कृत रूप प्रदान कर उसका पुनरुद्धार किया

12. तानसेन– मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में एक तानसेन भारत के अब तक के सबसे विद्वान संगीतज्ञ हुए हैं यह द्रुपद की गौहरवाणी के सर्वाधिक ज्ञाता थे

13. बैजू बावरा —ग्वालियर के शासक मानसिंह तोमर की दरबारी संगीतज्ञ तथा तानसेन समकालीन बैजू बावरा द्रुपद के सिद्धहस्त गायक थे

14. अल्लाह जिलाई बाई राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध गायिका मानी जाती है जो कि बीकानेर ज़िले से है।

राजस्थान का संगीत 

राजस्थान के प्रमुख संगीत के क्षेत्र जोधपुर ,जयपुर ,जैसलमेर तथा उदयपुर  माने जाते हैं।  ऐसा ही संगीत नज़दीक राष्ट्र पाकिस्तान (सिंध) में भी सुनने को मिलता है।

राजस्थान में संगीत अलग-अलग जातियों के हिसाब से है , जिसमें ये जातियां आती है -लांगा ,सपेरा , मांगणीयरभोपा और जोगी यहां संगीतकारों के दो परम्परागत कक्षाएं है एक लांगा और और दूसरी मांगणीयर।

राजस्थान में पारम्परिक संगीत में महिलाओं बका गाना जो हुत प्रसिद्ध है जो कि (पणीहारी) नाम से है।  इनके अलावा विभिन्न जातियों के संगीतकार अलग-अलग तरीकों से गायन करते हैं। सपेरा बीन बजाकर सांप को नचाता है तो  भोपा जो फड़ में गायन करता है।

राजस्थान के संगीत में लोकदेवताओं पर भी काफी गीत गाये गए हैं। जिसमें मुख्य रूप से पाबूजी ,बाबा रामदेव जी तेजाजी इत्यादि लोकदेवाताओं पर भजन गाये जाते है। ढोली समुदाय के लोग ब्याह शादियों में अपना संगीत प्रस्तुत करते है साथ ही समुदाय के लोग विशेषरूप से माजीसा के भजन करते हैं।

राजस्थान मानसून के आने पर भी कई प्रकार के गाने गाये जाते है जीरा ,पुदीना ,सांगरी इत्यादि पर गीत गाये जा रहे हैं।

 

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

चित्रकूट त्रिपाठी,

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