Rajasthan Climate

( राजस्थान की जलवायु Part -1 )

जलवायु  – किसी भू भाग पर लंबी अवधि के दौरान विभिन्न समयों में विभिन्न वायुमंडलीय दशाओं की औसत अवस्था को उस भू भाग की जलवायु कहते हैं

जलवायु के निर्धारक घटक

  • तापक्रम वायुदाब आर्द्रता वर्षा वायु वेग
  • राज्य का अधिकांश भाग कर्क रेखा के उत्तर में उपोषण कटिबंध में स्थित है केवल डूंगरपुर बांसवाड़ा जिले का कुछ भाग ही उष्णकटिबंध में आता है

राजस्थान की लगभग 90% से अधिक वर्षा ग्रीष्मकालीन दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं से होती हैं। शीतकाल में न्यूनतम वर्षा वह भी पश्चिमी विक्षोभों से प्राप्त होती हैं। राजस्थान में वर्षाकाल अल्पावधि का होता है राजस्थान में मानसून 15 जून से 15 जुलाई के बीच पहुंचता है तथा सितंबर से पुनः लौटना प्रारंभ हो जाता है। अतः इन कुछ महीनों में ही वर्षा प्राप्त कर ली जाती हैं इसके साथ ही कभी-कभी दिसंबर-जनवरी में पश्चिमी विक्षोभ से ‘मावट’ के रूप में वर्षा होती हैं।

मानसून का जुआ:- राजस्थान में मानसून की प्रकृति की अनिश्चितता, कभी मानसून 10 जून से 30 जून के मध्य तो कभी-कभी अगस्त माह तक भी मानसून नहीं पहुंचता है। अतः इस अनियमितता के कारण राजस्थान के कृषि व आर्थिक क्रियाकलाप प्रभावित होते हैं इसलिए राजस्थान की अर्थव्यवस्था को ‘मानसून का जुआ’ कहा जाता हैं।

अधिकांश राजस्थान शीतोष्ण जलवायु कटिबंध में आता है । कर्क रेखा पर क्षेत्रफल में सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है। अरब सागर से राजस्थान की कुल दूरी 400 किमी. है । बंगाल की खाड़ी से राज्य की कुल दूरी 2900 किमी. है ।

अरावली पर्वतमाला की समुंद्रतल से औसत ऊंचाई 930 मीटर है । समुंद्रतल से राजस्थान के अधिकांश भाग की औसत ऊंचाई 370 मीटर है ।
सामान्यत समुंद्रतल से ऊंचाई बढ़ने जे समय तापक्रम घटता है जिसकी सामान्य ह्रास दर प्रति 165 मीटर की ऊंचाई पर 1 सेंटीग्रेट होती है समुन्द्र की गहराई को फेदोमीटर यंत्र से मापा जाता है तथा गहराई फेदम में मापी जाती है ।राजस्थान के सर्वाधिक नजदीक स्थित सागरीय भाग कच्छ की खाड़ी है ।

राजस्थान का औसत वार्षिक तापमान 37 – 38 से. है । तापमान मापी यंत्र थर्मामीटर होता है । राजस्थान के सर्वाधिक गर्म महीने मई – जून है । राजस्थान के सबसे ठंडे महीने दिसम्बर – जनवरी है । राजस्थान में सर्वाधिक तापमान का समय सायं 3 बजे का होता है । राजस्थान में सबसे कम तापमान का समय सुबह 5 बजे का होता है ।राज्य में सर्वाधिक दैनिक तापान्तर पश्चिमी क्षेत्र का रहता है । राजस्थान का पश्चिम शुष्क प्रदेश भारत का सबसे गर्म प्रदेश माना जाता है

राजस्थान में वर्षा का वार्षिक औसत 57-58 सेमी. है । वर्षा मापी यंत्र रेनो मीटर होता है । राज्य में सर्वाधिक वर्षा वाले महीने जुलाई – अगस्त है राज्य में सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र दक्षिण – पूर्वी क्षेत्र है ।राज्य में सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र उत्तर – पश्चिम क्षेत्र है । राज्य में सर्वाधिक वर्षा वाला जिला झालावाड़ (100 सेमी.) है। यहां 40 दिन तक वर्षा होती है । राज्य में सबसे कम वर्षा वाला जिला जैसलमेर (10 सेमी.) है । यहां वर्षा की अवधि मात्र 5 दिन है । सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान माउन्ट आबू – सिरोही (125 -150 सेमी.) है । सबसे कम वर्षा वाला स्थान सम (जैसलमेर- 5 सेमी.) है ।

राज्य में वर्षा के दिनों की औसत संख्या वर्षभर में 29 दिन है । राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा के बराबर औसत वर्षा वाला जिला अजमेर है 50 सेमी. वर्षा रेखा राज्य को दो भागों में विभाजित करती है । 50 सेमी. वर्षा रेखा के उत्तर पश्चिम में वर्षा कम होती है जबकि दक्षिण – पूर्व में अधिक होती है । जिस दिन 0.25 सेमी. से अधिक वर्षा हो उस दिन को वर्षा वाला दिन कहा जाता है । राज्य के दक्षिण भाग में अधिक वर्षा का कारण अरावली पर्वतों की ऊंचाई है ।

राज्य में बार – बार पड़ने वाले सूखे व अकाल का मुख्य कारण अनियमित वर्षा है ।दोगड़ा : – राज्य में होने वाली मानसून पूर्व की वर्षा को दोगड़ा कहा जाता है । वाष्पोत्सर्जन मापन यंत्र पोटो मीटर है । राज्य में वाष्पोत्सर्जन की सर्वाधिक दर वाला महीना जून है । एवं कम दर वाला महीना दिसम्बर है । राज्य में वाष्पोत्सर्जन की सर्वाधिक दर वाला जिला जैसलमेर है । एवं कम दर वाला जिला डूंगरपुर है ।

राजस्थान में सर्वाधिक आर्द्रता वाला महीना अगस्त एवं कम आर्द्रता वाला महीना अप्रेल है ।आर्द्रता मापन यंत्र हाइग्रोमीटर है ।राज्य में सर्वाधिक आर्द्रता वाला जिला झालावाड़ एवं न्यूनतम आर्द्रता वाला जिला जैसलमेर है । राज्य में सर्वाधिक ओलावृष्टि मार्च – अप्रेल के महीने में होती है  राज्य में अधिकतर ओलावृष्टि सर्दी के मौसम में होती है ।

  • अतिवृष्टि – राज्य में कई स्थानों पर 24 घंटे में 20-30 सेमी. वर्षा होती है , जिससे अतिवृष्टि की स्थिति देखने को मिलती है ।
  • खण्ड वृष्टि – राज्य के किसी गाँव / स्थान में सामान्यतया सूखा / वर्षा की कमी होती है , परन्तु वहां अचानक ही तेज वर्षा हो जाए , ऐसे स्थान को खण्ड वृष्टि कहते हैं ।
  • अनावृष्टि – जहां सामान्यतया वर्षा की कमी के कारण सूखे की स्थिति / अकाल की स्थिति आती हो , ऐसे स्थान को अनावृष्टि कहते है ।

राज्य में चलने वाली हवाओं की अधिकतम गति 120 -140 किमी. प्रति /घण्टा होती है । राज्य में सर्वाधिक आंधियां मई -जून के महीने में एवं धीमी गति से आंधियां नवम्बर के महीने में चलती है ।सर्वाधिक आँधियों वाले जिले श्री गंगानगर (27 दिन) , हनुमानगढ़ (24 दिन) है । न्यूनतम आँधियों वाले जिले झालावाड़ (3 दिन) , कोटा (5 दिन) है ।

राज्य में पौष मास में चलने वाली हवा को सीली के नाम से जाना जाता है । वाष्प के कणों के साथ चलने वाली लू को झाला के नाम से जाना जाता है । ज्येष्ठ मास में चलने वाली गर्म हवा को तवा के नाम से जाना जाता है । भयंकर आवाज के साथ तेज गति से चलने वाली हवा को अर्डाव के नाम से जाना जाता है ।

राजस्थान को वर्षा की दृष्टि से 3 प्रदेशों में बांटा गया है :-

  1. सामान्य वर्षा के प्रदेश (दक्षिण व दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान),
  2. मध्यम वर्षा के प्रदेश (पूर्वी राजस्थान)
  3. न्यून वर्षा के प्रदेश (पश्चिमी राजस्थान) में विभाजित किया जाता है।

खण्ड वृष्टि-: राजस्थान में वर्षा की असमानता राज्य के पूर्व या पश्चिम तक ही सीमित नहीं है वरन् गांव-गांव या क्षेत्र विशेष तक भी व्याप्त रहती हैं। कभी-कभी एक गांव में या गाँवों के समूह में या क्षेत्र विशेष में वर्षा एकाएक बहुत अधिक हो जाती हैं। जबकि फसल व खेत या क्षेत्र या गांव पूर्णतः तरह सूखे रह जाते हैं। इसे “खंड वृष्टि ” कहते हैं।

राजस्थान के जलवायु प्रदेश ( Rajasthan Climate Region )

जलवायु प्रदेश का अर्थ (Meaning of Climatic Region) पृथ्वी तल के वे विस्तृत भू भाग जहां जलवायु तत्वों में समांगता पाई जाती है, उसे जलवायु प्रदेश कहते हैं।

जलवायु प्रदेशों के नाम

  1. शुष्क जलवायु प्रदेश ( Dry climate region )
  2. अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश ( Semi-arid climate region )
  3. उप आर्द्र जलवायु प्रदेश (Sub-humid climate region )
  4. आर्द्र जलवायु प्रदेश ( Humid climate region )
  5. अति आर्द्र जलवायु प्रदेश ( Very humid climate region )

Dry climate region ( शुष्क जलवायु प्रदेश ): –

  • इसमें जैसलमेर (प्रतिनिधि नगर) दक्षिणी गंगानगर , पश्चिमी बीकानेर , हनुमानगढ़ , जोधपुर (फलौदी) आदि स्थान आते है ।
  • इस क्षेत्र की औसत वर्षा 10-20 सेमी. एवं तापमान शीतऋतु में 10-17 डिग्री से. एवं ग्रीष्मऋतु में 35 डिग्री से. तक होता है ।
  • इस क्षेत्र में छोटी पत्तियों वाली कंटीली वनस्पति पायी जाती है जिसे मरुदभिद / जिरोफाइट कहते है ।

Semi-arid climate region ( अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश ): –

  • इस क्षेत्र में गंगानगर , बीकानेर (प्रतिनिधि नगर) , बाड़मेर , चूरू , सीकर , झुंझुनू , जोधपुर , पाली , जालौर , नागौर , अजमेर , टोंक , दौसा व जयपुर आदि शामिल हैं ।
  • इस प्रदेश में औसत वर्षा 20-40 सेमी. एवं तापमान ग्रीष्मकाल में 32 डिग्री से. एवं शीतऋतु में 10-16 डिग्री से. तक रहता है ।
  • इस क्षेत्र में स्टेपी प्रकार की वनस्पति व घास के मैदान पाये जाते है ।
  • यहां प्राप्त होने वाले वृक्षों में आक , धोक , बबूल , खींप , जाल , रोहिड़ा , खेजड़ी आदि एवं सेवण व लावण नामक घास पायी जाती है 
  • राजस्थान की सर्वाधिक खारे पानी की झींले इसी क्षेत्र में मिलती है ।

Sub-humid climate region ( उप आर्द्र जलवायु प्रदेश ) : –

  • इसके अंतर्गत जयपुर (प्रतिनिधि) , अजमेर , पाली , जालौर , सिरोही , भीलवाड़ा , टोंक , अलवर आदि जिले आते है ।
  • इस क्षेत्र में औसत वर्षा 40-60 सेमी. एवं तापमान शीतकाल में 12-18 डिग्री से. व ग्रीष्मकाल में 28-32 डिग्री से. तक होता है ।
  • इस क्षेत्र में पर्वतीय वनस्पति एवं पतझड़ वनस्पति पायी जाती है । जिसमें आम , नीम , आंवला , खेर , बहड़ आदि वृक्ष प्रमुख है ।

Humid climate region ( आर्द्र जलवायु प्रदेश ): –

  • इसके अंतर्गत धौलपुर , सवाई माधोपुर (प्रतिनिधि नगर) , करौली , कोटा , बूंदी , टोंक , चितौड़गढ़ , राजसमन्द व उदयपुर आदि जिले आते है ।
  • इस क्षेत्र में औसत वर्षा 40-80 सेमी. एवं तापमान ग्रीष्मकाल में 32-34 डिग्री से. व शीतकाल में 14-17 डिग्री से. तक होता है ।
  • इस क्षेत्र में सघन पतझड़ वन पाये जाते है , जिनमें आम , बेर , इमली , नीम , बबूल , शहतूत , शीशम , गूगल , जामुन आदि वृक्ष पाये जाते है

Very humid climate region ( अति आर्द्र जलवायु प्रदेश ): –

इस प्रदेश में झालावाड़ (प्रतिनिधि नगर) , कोटा , उदयपुर का दक्षिणी भाग , आबू पर्वत (सिरोही) , डूंगरपुर एवं बांसवाडा आदि क्षेत्र शामिल है ।
इस क्षेत्र में औसत वर्षा 80-150 सेमी. व तापमान ग्रीष्मकाल में 30-38 डिग्री से. व शीतकाल में 14-18 डिग्री से. तक रहता है ।
इस प्रदेश की मुख्य वनस्पति सवाना तुल्य प्रकार की है , जिसमे जामुन , आम , शहतूत , सागवान , शीशम , बांस , महुआ आदि वृक्ष मुख्य रूप से उगाये जाते है ।

  • राजस्थान विषम जलवायु वाला प्रदेश है , परन्तु उदयपुर राज्य का एक मात्र ऐसा जिला है जहाँ की जलवायु सम जलवायु है ।
  • दूसरा सबसे ठंडा स्थान डबोक (उदयपुर) है ।
  • राज्य में भारतीय मौसम विभाग की वेधशाला जयपुर में स्थित है ।

राजस्थान में जून माह में न्यूनतम वायुदाब जैसलमेर जिले में संभावित है राजस्थान को दो भागों में बांटने वाली सम वर्षा रेखा 50 सेंटीमीटर की है राजस्थान में माउंट पश्चिमी विक्षोभ संबंधित है जब पुष्कर की पहाड़ियों में भारी वर्षा होती है तो बाढ़ बालोतरा जाती है 

राज्य की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक ( Factors Affecting Climate )

राज्य की जलवायु को मुख्यत 7 कारक प्रभावित करते है –

1. अक्षाशीय एवं देशांतरीय विस्तार : –
➡ राजस्थान अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार के आधार पर शीतोष्ण जलवायु वाला क्षेत्र है ।
➡ परंतु राज्य के दक्षिण अर्थात डूंगरपुर एवं बांसवाडा से कर्क रेखा गुजरती है जिससे यह क्षेत्र उष्ण कटिबंधीय जलवायु वाला क्षेत्र है ।
➡ इस प्रकार राजस्थान का दक्षिणी भाग ” उष्ण कटिबंधीय ” जलवायु वाला क्षेत्र एवं बाकी क्षेत्र ” उपोष्ण कटिबंध ” वाला क्षेत्र है ।

2. समुन्द्र तल से दूरी :
➡ भारतीय उपमहाद्वीप के आंतरिक भाग में स्थित होने के कारण राज्य की जलवायु पर सामुंद्रिक स्थिति का प्रभाव नही पड़ता है इसी कारण राजस्थान कु जलवायु उपोष्ण जलवायु है ।

3. अरावली पर्वतमाला की स्थिति : –
➡ राज्य में अरावली पर्वत माला का विस्तार दक्षिण – पश्चिम से उत्तर – पूर्व की ओर है जो अरब सागरीय मानसून के समान्तर है । इस कारण राज्य में अधिक वर्षा नही हो पाती है ।
➡ राज्य में वर्षा दक्षिण – पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से होती है । जिससे राज्य में अरावली पर्वत माला के पूर्व में वर्षा अच्छी होती है जबकि पश्चिमी भाग में न्यूनतम वर्षा होती है।

4. धरातलीय स्थिति : –
➡ राजस्थान की धरातलीय ऊंचाई 370 मी. से कम है एवं अरावली पर्वतमाला और दक्षिण – पूर्व क्षेत्र की धरातलीय ऊंचाई 370 मी. से अधिक है ।

5. वनस्पति तत्व : –
➡ राज्य के पश्चिमी क्षेत्र में न्यूनतम वन पाये जाते हैं इसी कारण यहां की जलवायु शुष्क है , इसके विपरीत अरावली पर्वतीय क्षेत्र एवं दक्षिणी – पूर्वी क्षेत्र में अधिक वन की सघनता वायुमंडलीय दशाओं को प्रभावित करती है ।

6. मृदा की संरचना : –
➡ राज्य के पश्चिमी भाग में रेतीली एवं मोटे कणों वाली मिट्टी पायी जाती है जो दिन में बहुत जल्दी गर्म एवं रात में बहुत जल्दी ठंडी हो जाती है इसलिए जैसलमेर में सर्वाधिक दैनिक तापान्तर पाया जाता है ।
➡ इसके विपरीत पूर्वी एवं दक्षिणी – पूर्वी राज्य में चिकनी दोमट व काली मिट्टी पायी जाती है जिसके कण बहुत हल्के होते है यह मिट्टी बहुत धीरे गर्म व बहुत धीरे ठंडी होती है इसलिए इस क्षेत्र की जलवायु आर्द्र बनी रहती है ।

7. समुन्द्र तल से ऊंचाई : –
➡ जो भाग समुंद्रतल से जितना ऊंचा होगा वहां की जलवायु ठंडी होगी ।

डॉ. ब्लादिमीर कोपेन की जलवायु वर्गीकरण वनस्पति के आधार पर ( Climate classification )

बलादिमीर कोपेन ने राजस्थान की जलवायु को चार जलवायु प्रदेशों में बांटा
1 AW
2 BSHW
3 Bwhw
4 Cwg

1 Aw- या (उष्णकटिबंधीय आद्र जलवायु प्रदेश) – राज्य के दक्षिणी भाग डूंगरपुर और बांसवाडा जिलों के अंतर्गत आते हैं

2-BSHW या (अर्ध शुष्क प्रदेश)- राजस्थान के सर्वाधिक भाग में पाई जाती है राज्य के चूरु नागौर सीकर झुंझुनूं जोधपुर बाड़मेर पाली सिरोही इसके अंतर्गत आते हैं

3-Bwhw ( जलवायु प्रदेश या शुष्क उष्ण मरुस्थलीय प्रदेश)-  इसके अंतर्गत राज्य के श्री गंगानगर हनुमानगढ़ बीकानेर जैसलमेर जोधपुर जिले का उत्तरी पश्चिम भाग्य के अंतर्गत आता है

4-Cwg प्रदेश (उप आद्र प्रदेश) – अरावली के दक्षिणी पूर्वी जिले इसके अंतर्गत आते हैं

राजस्थान में प्रवेश करने वाली हवाओं के नाम

भभूल्या- इसका शाब्दिक अर्थ है वायु का भंवर मरुस्थल में निम्न वायुदाब की केंद्र के कारण स्थानीय स्तर पर बनने वाले भवंरो को स्थानीय भाषा में भभूल्या कहा जाता है

पश्चिमी विक्षोभ- शीतकाल में पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर चलने वाली भूमध्यसागरीय पवनों को पश्चिमी विक्षोभ कहा जाता है इन्हीं के कारण राजस्थान में मावठ होती है  इन्हीं पवनों क्षोभ मे मंडल में 6 से 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर जेट स्ट्रीम कहा जाता है  इन पवनों का नाम जेट स्ट्रीम दूसरे विश्वयुद्ध के समय युद्ध विमान बी 32 जेट विमान के आधार पर रखा गया था

वज्र- इसका शाब्दिक अर्थ होता है छोटा तूफान जो पश्चिमी मरुस्थल में निम्न वायुदाब के कारण छोटे चक्रवात चलते हैं उन्हें स्थानीय भाषा में वज्र कहा जाता है

वज्रात- पश्चिमी राजस्थान में छोटे-छोटे चक्रवातों से मानसुन से पहले होने वाली वर्षा को स्थानीय भाषा में वज्रात कहा जाता है

पुरवइया – इसका शाब्दिक अर्थ होता है पूर्व दिशा की और चलनेवाली पवने  राजस्थान में ग्रीष्मकाल के समय पूर्व दिशा से आने वाली बंगाल की खाड़ी के मानसून को पुरवइया पवन कहा जाता है

सूर्या-  गर्मियों के समय आने वाली उत्तर-पश्चिमी गर्म हवाओं को स्थानीय भाषा में सूर्या कहा जाता है

समदरी- राजस्थान में ग्रीष्मकाल के समय समुंदर से आने वाली दक्षिणी-पश्चिमी हवाओं को स्थानीय भाषा में समदडरी कहा जाता है

सिली- इसका शाब्दिक अर्थ होता है ठंडी पवने, शीतकाल के समय राजस्थान में पौष महीने में चलने वाली ठंडी पवनों को सिली कहा जाता है

सिली मारबो- पोष माह मे चलने वाली ठंडी पवन से राजस्थान में रबी की फसल पर पाला पड़ता है जिससे पत्तियां मुरझाने लगती हैं इसी कारण इन्हे सीली मारबो कहते है

तुवा- गर्म पवने, पश्चिमी राजस्थान मे चलने वाली पवनो को तुवा या तवा कहते है

झाला- प. राजस्थान मे पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के कारण जो चमकती हुइ मृग मरीचिका दिखाई देती है उसे स्थानिय भाषा मे झाला कहते है

आथूणी- शाम के समय चलने वाली पवने इन्हे स्थानिय भाषा मे आथणी कहते है

अर्डाव- अर्थ चिल्लाना, पश्चिमी राजस्थान मे तेज के साथ आव करती हुई स्थानिय पवनो को अर्डाव कहते है

राज्य में उत्तर दिशा से प्रवेश करने वाली हवा को धरोड़ , धराऊ , उत्तरार्द्ध के नाम से जाना जाता है ।राज्य में दक्षिण दिशा से प्रवेश करने वाली हवा को लंकाऊ के नाम से जाना जाता है ।राज्य में पूर्व दिशा से प्रवेश करने वाली हवा को पुरवईया , पुरवाई , पुरवा , आगुणी के नाम से जाना जाता है । राज्य में पश्चिमी दिशा से प्रवेश करने वाली हवा को पच्छउ , पिछवाई , पिच्छवा , आथूणी के नाम से जाना जाता है ।

राज्य में उत्तर – पूर्व दिशा से प्रवेश करने वाली हवा को संजेरी के नाम से जाना जाता है । राज्य में उत्तर – पश्चिमी दिशा से प्रवेश करने वाली हवा को सुरया के नाम से जाना जाता है ।राज्य में दक्षिण – पूर्व दिशा से प्रवेश करने वाली हवा को चील के नाम से जाना जाता है ।राज्य में दक्षिण – पश्चिम दिशा से प्रवेश करने वाली हवा को समंदरी , समुंदरी के नाम से जाना जाता है ।

जून-जुलाई के महीनों में दक्षिणी-पूर्वी क्षेत्रों में आने वाला तूफान वज्र तूफान कहलाता है ।सर्वाधिक वज्र तूफान झालावाड़ व जयपुर जिलों में आते है ।सबसे कम वज्र तूफान बाड़मेर व बीकानेर जिलों में आते है ।

 

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No of Question-24

0%

Q.1 बंगाल की खाड़ी के मानसून से सर्वप्रथम वर्षा हाड़ौती क्षेत्र के किस जिले में होती है

Correct! Wrong!

Q.2 राजस्थान में शीतकाल में होने वाली वर्षा माउठ किन कारणों से होती है

Correct! Wrong!

Q.3 खड़ीन वर्षा जल संग्रहण की परंपरागत विधि पाई जाती

Correct! Wrong!

Q.4 प्राकृतिक वनस्पति के वितरण को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक कौन सा है

Correct! Wrong!

Q.5 अर्ध शुष्क मरुस्थलीय प्रकार की जलवायु में सामान्यतः वार्षिक वर्षा कितनी होती है

Correct! Wrong!

Q.6 अति आद्र् प्रकार की जलवायु में किस प्रकार की वनस्पति पाई जाती है

Correct! Wrong!

Q.7 ऐसा कौन सा जल वायु प्रदेश है जो वनस्पति विहीन है

Correct! Wrong!

Q.8 कोपेन के अनुसार b s h w जलवायु प्रदेश का प्रतिनिधित्व कौन सा जिला करता है

Correct! Wrong!

Q.9. निम्न में से राजस्थान के किस जिले में बांका पट्टी फैली हुई है

Correct! Wrong!

व्याख्या_ नागौर में अजमेर जिले में कूबड़ पट्टी फैली हुई है

प्र.10 राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा कितनी है-

Correct! Wrong!

प्र.11 राजस्थान में होने वाली शीतकालीन वर्षा 'मावट' के लिए चक्रवात कहां से आते हैं-

Correct! Wrong!

प्र.12 राजस्थान में किस स्थान पर सूर्य की सीधी किरणें गिरती हैं-

Correct! Wrong!

प्र.13 *कथन (A) राज्य के दक्षिणी और पूर्वी भागों में वर्षा की न्यूनतम अनिश्चितता पाई जाती है। कारण (R): राज्य में मानसून का प्रवेश दक्षिणी और पूर्वी भागों में होता है।

Correct! Wrong!

प्र.14 राजस्थान का सबसे गर्म एवं ठंडा महीना कौन सा होता है-

Correct! Wrong!

प्र.15 राजस्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक कौन सा है-

Correct! Wrong!

प्र.16 क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य का सबसे बड़ा कृषि जलवायु खंड कौन सा है-

Correct! Wrong!

प्र. 17 राजस्थान में "राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण" का गठन कब किया गया-

Correct! Wrong!

प्र.18 राजस्थान में 21 जून को कर्क रेखा पर सूर्यताप प्राप्ति की अवधि कितनी होती है-

Correct! Wrong!

प्र.19 राज्य की दक्षिणी-पश्चिमी सीमा से कच्छ की खाड़ी की दूरी कितनी है-

Correct! Wrong!

20. भूरी दोमट मिट्टी किस नदी बेसिन मे पाई जाती हैं

Correct! Wrong!

21. राजस्थान मे मिट्टी का अवनालिका अपरदन सर्वाधिक किस नदी मे होता हैं

Correct! Wrong!

22 जल द्वारा मिट्टी अपरदन मुख्य रूप से किन जिलो मे होता हैं

Correct! Wrong!

23 राज्य मे सर्वाधिक बीहड़ भुमी का विस्तार हैं

Correct! Wrong!

24 मिट्टी की लवणीयता कम करने के लिये किस का प्रयोग किया जाता हैं

Correct! Wrong!

Rajasthan Jalavayu Quiz ( राजस्थान की जलवायु ) in Hindi
VERY BAD! You got Few answers correct! need hard work.
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Specially thanks to ( With Regards )

विनोद कुमार गरासिया बाँसवाड़ा, Vikash Devthia, JETHARAM LOHIYA, Priyanka ji, कमल सिंह टोंक, विजय कुमार महला झुन्झुनू, मनीष शर्मा सिकराय दौसा, राकेश गोयल, Suresh kumar swami sikar, रामावतार दौसा

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