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Rajasthan Dynasty ( राजस्थान राजवंश )

  • परमार राजवंश
  • जाट वंश
  • यादव वंश
  • भीनमाल के चावड़ा
  • टोंक का मुस्लिम राज्य
  • नागौर
  • झुंझुनू

परमार राजवंश ( Parmar Vansh )

‘परमार’ शब्द का अर्थ ‘ शत्रु को मारने वाला’ होता हैं। चन्द्रबरदाई के पृथ्वीराज रासो मे परमारो की उत्पित अग्निकुण्ड से बताई गई हैं।उदयपुर प्रशस्ति, पिंगल सूत्रवृति, तेजपाल अभिलेख मे परमारो को ‘ब्राह्म क्षत्रकुलीन’ बताया गया हैं।

परमारों मे आबू के परमार, मारवाड़ के परमार, सिंध के परमार,गुजरात के परमार, बागड़ के परमार, मालवा के परमार आदि शाखाएं हुई, जिनमें से आबू के परमार एवं मालवा के परमार प्रमुख हुए।

आबू के परमार ( Abu Parmar )

आबू के परमारों का मूल पुरुष धूमराज के नाम से विख्यात हैं इनकी वंशावली उत्पलराज से आरंभ होती है। आबू के परमारों की राजधानी – चन्द्रावती थी।

सिंधराज – परमार एक प्रतापी शासक हुआ। जो ‘ मरुमण्डल का महाराजा’ कहलाता था। 1002 ई. के दान पात रस से पता चलता है कि आबू पर धरणीवराह ने पुन: अधिकार कर लिया।

जालोर के परमार ( Jalore’s Parmar )

जलोर के परमार आबू के परमारों के ही वंशज थे जालौर से मिले 1087 ई. के शिलालेख में वाकपतिराज चंदन देवराज अपराजित विज्जल धारावर्ष और विसल के नाम मिलते है ।

वागड़ के परमार ( Vagad Paramar )

वागड़ के परमार मालवा के परमार कृष्णराज के दूसरे पुत्र डम्बरसिंह के वंशज थे इनके अधिकार मे dhungarpur- बांसवाड़ा
का राज्य था जिसे वागड़ कहते थे  arthunha इनकी राजधानी थी

धनिक ,कंकदेव, सत्यराज , चामुंडराज, विजयराज आदि इस वंश के शासक हुये, चामुंड राज ने 1079 में arthuna में मंडलेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया 1179 ई में गुहिल शासक सामंतसिंह ने परमारो से वागड़ छीन कर वहाँ गुहिल वंस का शासन stapit कर दिया

करौली का यादव वंश ( Yadav dynasty of Karauli )

राजस्थान में जैसलमेर के बाद यदुवंशी क्षत्रियों का दूसरा राज्य करौली था। करौली रियासत का कुछ भाग मत्स्य जनपद में तथा कुछ भाग सुरसेन जनपद में आता था। करौली के यादव वंशी राजा स्वयं को कृष्ण भगवान के वंशज मानते थे।

करौली के यादव अपने नाम के आगे सिंह न लिखकर पाल लिखते थे, क्योंकि सिंह गाय को खा जाता है और पाल का सामान्य अर्थ गाय को पालने वाला होता है।

Vijaypal ( विजयपाल )- 

करौली के यादव शाखा का मूल पुरुष/ आदि पुरुष/ संस्थापक विजयपाल था, जिसने 1040 ईस्वी में अपने राज्य की राजधानी मथुरा से हटाकर बयाना( विजय मंदिर गढ़) को बनाया।

Timan Pal ( तिमनपाल ) –

तिमनपाल ने ‘तिमनगढ़ दुर्ग’ बनवाकर उसे अपनी नई राजधानी बनाई । 1196 ईस्वी में मोहम्मद गोरी ने तिमनगढ़ दुर्ग पर आक्रमण कर यहां के शासक कुंवरपाल को हराकर तिमनगढ़ दुर्ग को जीत लिया अतः यहां से कुछ यादव परेशान होकर तिजारा व अलवर चले गए जो वहां “खाने- खाना” के नाम से पुकारे जाने लगे।

तिमनगढ़ का किला

यह दुर्ग यादव वंश के शासक तिमनपाल ने उस समय बनवाया था जब उसके मुख्य सा साम्राज्य बयाना पर दिल्ली के शासकों का अधिकार हो गया था। तिमनगढ़ का दुर्ग बयाना से कुछ ही दूरी पर है, लेकिन करौली जिले के क्षेत्र में पड़ता है।

इसे तेहनगढ़/तोहनगढ भी कहते हैं । तिमनगढ़ दुर्ग वर्तमान में घने जंगलों के बीच निर्जन अवस्था में खड़ा है। इसी दुर्ग में मूर्ति और जानवरों के अंग तस्कर ‘वामन नारायण घीया’ के द्वारा अपना मुख्य केंद्र बनाने के कारण चर्चा में रहा।

Arjun Pal ( अर्जुन पाल )- 

1327 ईस्वी में अर्जुनपाल ने तिमनगढ़ दुर्ग को मुस्लिमों से छीनकर यहां पर पुनः यादव का शासन स्थापित किया। अर्जुनपाल ने 1348 ई.में लीसिल नदी के तट पर कल्याणपुर कस्बा बसाया।

कल्याणपुर कस्बा वर्तमान में करौली के नाम से जाना जाता है। अर्जुनपाल ने ही यहां हनुमान जी की माता ‘अंजनी माता का मंदिर’ बनवाया।

Haravakshpal ( हरवक्षपाल ) – 

हरवक्षपाल ने 15 नवंबर, 1817 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधि कर अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार कर ली। करौली राजस्थान की पहली रियासत थी जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ सहायक संधि की।

नोट:- 19 जुलाई 1997 ईस्वी को करौली राजस्थान का 32 वाँ जिला बना।

 

जाट वंश ( Jat Dynasty )

भरतपुर का जाट वंश ( Bharatpur Jat Dynasty )

राजस्थान के पूर्वी भाग-भरतपुर,धौलपुर ,डीग आदि क्षेत्रों पर जाट वंश का शासन था ।औरंगजेब की मृत्यु के आसपास जाट सरदार चूड़ामन ने थून में किला बनाकर अपना राज्य स्थापित कर लिया था। चूड़ामन के बाद बदनसिंह को जयपुर नरेश सवाई जयसिंह ने डीग की जागीर दी एंव ब्रिजराव की उपाधि प्रदान की ।।

बदनसिंह ने 1725 ई. में डीग के महलों का निर्माण करवाया । महाराज सूरजमल ने सोथर के निकट दुर्ग का निर्माण करवाया जो बाद में भरतपुर दुर्ग के नाम से प्रसिद्ध हुआ । बदनसिंह ने उसे अपनी राजधानी बनाया । इसने जीते जी अपने पुत्र सूरजमल को शासन की बागडोर सौंप दी । सूरजमल ने 12 जून ,1761 ई. को आगरे के किले पर अधिकार कर लिया । उसके बाद उनके पुत्र जवारसिंह भरतपुर के राजा बने 

चूड़ामन जाट 1695-1721 ई)

1688ई.मे राजाराम की मृत्यु के बाद उसके भतीजे चूड़ामन जाट ने नेतृत्व की बागडोर सम्भाली औरंगजेब की मृत्यु तक विद्रोह करता रहा।उसनें भरतपुर मे जाट राज्य की स्थापना की धीरे -धीरे जाट शक्ति संगठित होती गई और औरंगजेब की मृत्यु के आसपास जाट सरदार चूड़ामन ने थून मे किला बनाकर अपना राज्य स्थापित कर लिया था।

मुहम्मदशाह के आदेश पर सवाई जयसिंह ने चूड़ामन को परास्त कर थून का किला छीन लिया। 1721 ई.मे चूड़ामन ने विष खाकर आत्महत्या कर ली।

Raja Surajmal ( राजा सूरजमल 1755−1763 )

भारत के इतिहास में सूरजमल को ‘जाटों का प्लेटो’ कहकर भी सम्बोधित किया गया है। राजा सूरजमल के दरबारी कवि ‘सूदन’ ने राजा की तारीफ में ‘सुजानचरित्र’ नामक ग्रंथ लिखा।

पानीपत की लड़ाई

सन 1761 में पानीपत का ऐतिहासिक युद्ध हुआ, जिसमें राजपूत−जाट−मराठा जैसे शक्तिशाली और वीर सैनिकों के होते हुए भी देश को हार का सामना करना पड़ा। मुख्य कारण हिन्दू शासकों का आपस में मेल न होना था। 

मृत्यु सं. 1820 (ता. 25 दिसंबर सन् 1763 रविवार) में हुई थी। उस समय उसकी आयु 55 वर्ष की थी।  सूरजमल ब्रजभाषा साहित्य का प्रेमी और कवियों का आश्रयदाता था। उसके दरबार में अनेक कवि थे, जिनमें सूदन कवि का नाम प्रसिद्ध था।

सूरजमल की कई रानियाँ थी; जिनमें किशोरी और हंसा प्रमुख थीं। उसके 5 पुत्र थे, जिनके नाम निन्नांकित हैं −

  • जवाहर सिंह
  • रतन सिंह
  • नवल सिंह
  • रणजीत सिंह
  • नाहर सिंह।

सूरजमल के बाद जवाहर सिंह जाटों का राजा हुआ। जाटों की आरंभिक राजधानी डीग थी किंतु सूरजमल ने भरतपुर के कच्चे क़िले को पक्का बनाकर वहाँ अपनी राजधानी बनाई थी।

टोंक का मुस्लिम राज्य ( Muslim state of Tonk )

 सातवीं शताब्दी में एक ब्राह्मण ने 12 गांव को मिलाकर टोंक की पृष्ठभूमि तैयार की टोंक राज्य का संस्थापक अमीर खां पिंडारी था 17 नवंबर 1817 को अमीर खां ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि की। जिसके तहत् उसे टोंक का नवाब की उपाधि(पहला नवाब) एवं राज्य देकर सम्मानित किया गया।

राजस्थान में अंग्रेजों द्वारा टोंक में एकमात्र मुस्लिम राज्य की स्थापना की गई आमिर खां के पश्चात वजीर खां नवाब बना, इसके समय में 1857 का विद्रोह हुआ, नवाब इब्राहिम अली खान एकमात्र नवाब था जो लार्ड लिटन के दरबार तथा लार्ड कर्जन के दिल्ली दरबार में सम्मिलित हुआ

इब्राहिम अली खां ने टोंक में सुनहरी कोठी का निर्माण कराया जो पिच्चकारी व मीनाकारी के लिए प्रसिद्ध है। टोंक के इस तीसरे नवाब को अंग्रेजों ने कैद करके बनारस में नजरबंद किया था

इसी नवाब के दौरान इराक ईरान मिश्र भारत के विभिन्न शहरों से अरबी एवं फारसी भाषा के विद्वानों को बुलाकर धार्मिक एवं ऐतिहासिक पुस्तकों का लेखन एवं अनुवाद करवाया। जिन्हें टोंक लाकर शाही महल में रखा।

राजस्थान सरकार ने 1978 में इस लाइब्रेरी को अरबी फारसी शोध संस्थान के रूप में स्थापित किया। जब 1947 में देश विभाजन हुआ तो यहां के नवाब मोहम्मद सहादत अली खान ने भारत संघ में मिलने का फैसला किया

भीनमाल के चावड़ा ( Bhenamal Chawada )

चावड़ा राजपूतों का सबसे प्राचीन राज्य भीनमाल था इसके अन्य दो राज्य काठियावाड़ तथा अन्हिलवाड़ा थे। यह अपने आपको भगवान शंकर की संतान मानते हैं। भीनमाल के चावड़ों ने गुर्जरों से राज्य छीना।

चीनी यात्री ह्वेनसांग 641 ईस्वी में भीनमाल आया। भीनमाल में रहने वाले कवि माघ ने अपने ग्रंथ शिशुपाल वध में यहां का शासक सुप्रभदेव को बताया। इस वंश के नाश होने का संकेत कलचुरी के दान पत्र में मिलता है।

भीनमाल पर अरब आक्रमण की भी जानकारी मिलती है। अरबों के द्वारा नष्ट किए गए चारों के बचे हुए राज्यों को प्रतिहारों अपने अधिकार में ले लिया।

नागौर वंश ( Nagaur Dynasty )

महाभारत में नागौर का अहिच्छत्र राज्य के रूप में उल्लेख मिलता है। अर्जुन ने जीतकर अपने गुरु द्रोणाचार्य को समर्पित किया। यह क्षेत्र छापर चूरु के नाम से जाना गया,जो प्राचीन काल में द्रोणपुर के नाम से जाना जाता था।

बिजोलिया अभिलेख 1170 ईस्वी में नागौर का उल्लेख किया गया है। प्राचीन समय में यह कस्बा नागपुर नाम से भी जाना गया। जो चौहानों द्वारा शासित था। नागौर की पहचान जाटों के रोम के रूप में की जाती हैं।

7वीं सदी के लगभग यहां नागवंशी जाटों ने शासन किया। चौहानों ने भी राज्य कायम किया। जो सपादलक्ष में सम्मिलित किया गया। नागौर मध्य एशिया के मुस्लिम आक्रमणकारियों का मुख्य केंद्र रहा।

नागौर मीरा और अबुल फजल का जन्म स्थल भी रहा। नागौर में पार्श्वनाथ,चारभुजा मंदिर तथा सूफी संत तारकिन दरगाह बड़े प्रसिद्ध स्थल है।

झुंझुनू वंश ( Jhunjhunu Dynasty )

झुंझुनू का नाम एक प्रसिद्ध जाट लड़ाका जुझार सिंह नेहरा के नाम पर पड़ा। चौहानों वंशो का शासन था सिद्धराज एक प्रसिद्ध शासक थे।1450 ईस्वी में मोहम्मद खान एवं उसके पुत्र समस खान ने चौहानों को पराजित कर झुंझुनू पर अधिकार कर लिया।

मोहम्मद खान झुंझुनू का पहला नवाब बना। 1459 ईस्वी में उसका पुत्र समस खान झुंझुनू का नवाब बना 280 वर्ष तक नवाबों ने शासन किया।रोहिल्ला खान झुंझुनू का अंतिम नवाब था

 

Quiz 

Question – 57 

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

रमेश डामोर सिरोही, प्रभुदयाल मूण्ड चूरु, दिनेश मीना, Chandraprakash Soni, PK GURU, चित्रकूट त्रिपाठी, P K Nagauri, Nagaur

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