भारत की आजादी के समय राजस्थान मैं 19 रियासतें 3 छोटे ठिकाने (नीमराणा ,लावा, कुशलगढ) तथा अजमेर मेवाड़ा केंद्र शासित प्रदेश था इन रियासत, ठिकानो व केंद्र शासित प्रदेशों को एक सूत्र में पिरोकर राजस्थान निर्माण हुआ यह प्रक्रिया 18 मार्च 1948 से प्रारंभ होकर 1 नवंबर 1956 तक सात चरणों में पूरी हुई यही प्रक्रिया राजस्थान का एकीकरण कहलाती है

मेवाड़ महाराणा का राजस्थान यूनियन बनाने के लिए प्रयास

इस दिशा में सर्वप्रथम मेवाड़ के महाराणा भूपाल सिंह ने की पहल की थी उन्होंने राजस्थान की छोटी छोटी रियासतों को समाप्त कर उन्हें एक विशाल इकाई में गठित करने का अथक प्रयास किया था

के०एम०मुंशी को उन्होंने अपना संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया था प्रथम सम्मेलन उन्होंने 25 और 26 जून 1946 को राजस्थान गुजरात और मालवा के राजाओं का एक सम्मेलन उदयपुर में बुलाया था

इस सम्मेलन में 22 राजा महाराजा उपस्थित है महाराणा भूपाल सिंह द्वारा 25 व 26 जून 1946 को आयोजित किए गए,सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राजस्थान,गुजरात और मालवा के छोटे बड़े राज्यों को मिलाकर एक बड़ी इकाई राजस्थान यूनियन बनाने का था

उन्होंने नियुक्त किए गए अपने संवैधानिक सलाहकार के०एम० मुंशी की सलाह पर उक्त राजाओं का एक और सम्मेलन 23 मई 1947 को उदयपुर में आमंत्रित किया महाराणा भोपाल सिंह ने सम्मेलन में राजाओं को चेतावनी दी कि हम लोगों ने मिलकर अपनी रियासतों की Union नहीं बनाई तो सभी रियासतें जो प्रांतों के समकक्ष नहीं है,निश्चित रुप से समाप्त हो जाएगी श्री के०एम०मुंशी ने भी इस सम्मेलन में महाराणा की योजना का जोरदार समर्थन किया

फल स्वरुप जयपुर,जोधपुर और बीकानेर आदि बड़ी रियासत को छोड़कर शेष सभी  रियासतों ने सिद्धांत रूप से इस योजना में शरीक होना स्वीकार कर लिया सम्मेलन में प्रस्तावित राजस्थान यूनियन का विधान तैयार करने के लिए एक समिति काउंसिल ऑफ एक्शन का गठन किया समिति ने राजाओं एवं उनके प्रतिनिधियों के 14 फरवरी 1948 के सम्मेलन में यूनियन के विधान का एक प्रारूप प्रस्तुत किया

1. प्रथम चरण – मतस्य संघ 

  • तिथि – 18 मार्च 1948
  • शामिल होने वाली रियासतें – अलवर , भरतपुर(Bharatpur) , धोलपुर , करौली(Karauli) रियासत व नीमराना ठिकाना.

भारत सरकार ने 27 फरवरी 1948 अलवर भरतपुर धौलपुर करौली को एक नए राज्य का निर्माण करने का प्रस्ताव रखा। महाभारत काल में इस क्षेत्र को मत्स्य प्रदेश कहते थे। इस आधार पर मत्स्य संघ नाम दिया। क्षेत्रफल लगभग 12000 किलोमीटर जनसंख्या 1800000 और वार्षिक आय दो करोड़ रुपए थी।

  • राजधानी:- अलवर
  • प्रधानमंत्री :- शोभाराम कुमावत
  • राजप्रमुख :- धौलपुर के शासक उदय भान सिंह
  • उप राजप्रमुख :- करौली के राजा
  • मत्स्य संघ का नामकरण:- कन्हैया लाल माणिक्य लाल मुंशी ( के एम मुंशी ) के सुझाव पर किया गया
  • उद्घाटन:- केंद्रीय मंत्री एन वी गाडगिल ने किया

मंत्रिमंडल में अन्य सदस्य श्री भोलानाथ अलवर श्री युगल किशोर चतुर्वेदी भरतपुर श्री चिरंजी लाल शर्मा करौली डॉक्टर मंगल सिंह धौलपुर थे 
प्रशासक के रूप में एक ICS अधिकारी को लगाया।

2. द्वितीय चरण – राजस्थान संघ 

  • तिथि – 25 मार्च 1948
  • शामिल होने वाली रियासतें – बाँसवाड़ा , बूंदी, डूंगरपुर , झालावाड़ , कोटा , प्रतापगढ़, टोंक किशनगढ़ तथा शाहपुरा रियासतें व कुशलगढ़ ठिकाना. प्रदेश के नाम में राजस्थान शब्द पहली बार जुड़ा.
  • राजधानी:- कोटा
  • प्रधानमंत्री :- गोकुल लाल असावा (शाहपुरा )
  • राजप्रमुख :- कोटा नरेश भीम सिंह
  • उद्घाटन :- 25 मार्च 1948 केंद्रीय मंत्री NV Gadgil

3. तृतीय चरण – संयुक्त राजस्थान 

  • तिथि – 18 अप्रैल 1948
  • शामिल होने वाली रियासतें – उदयपुर ( Udaipur )

राजस्थान संघ या पूर्व राजस्थान संघ में उदयपुर रियासत का विलय कर ‘संयुक्त राजस्थान’ का निर्माण हुआ | पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा इसका उद्घाटन किया गया |

महाराणा मेवाड भूपालसिंह राजप्रमुख व् माणिक्यलाल वर्मा प्रधानमंत्री बने | उदयपुर को इस नए राज्य की राजधानी बनाया गया | कोटा महाराव भीमसिंह को उप-राजप्रमुख बनाया गया |

4. चतुर्थ चरण – वृहत राजस्थान 

  • तिथि- 30 मार्च 1949
  • शामिल होने वाली रियासतें – संयुक्त राजस्थान ( Rajasthan ) + जयपुर( Jaipur ) , जोधपुर ( Jodhpur ) , बीकानेर ( Bikaner ) व जैसलमेर ( Jaisalmer )

30 मार्च, 1949 में जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ बना था।  यही राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है।

देशी रियासतों जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर का विलय करवाकर तत्कालीन भारत सरकार ने 30  मार्च 1949 को वृहत्तर राजस्थान संघ का निर्माण किया, जिसका उदघाटन भारत सरकार के तत्कालीन रियासती और गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया।

हालांकि अभी तक चार देशी रियासतो का विलय होना बाकी था, मगर इस विलय को इतना महत्व नहीं दिया जाता, क्योंकि जो रियासते बची थी वे पहले चरण में ही ‘मत्स्य संघ’ के नाम से स्वतंत्र भारत में विलय हो चुकी थी।

जयपुर महाराज सवाईमानसिंह को आजीवन राजप्रमुख, उदयपुर महाराणा भूपालसिंह को महाराज प्रमुख, कोटा के महाराज श्री भीमसिंह को उपराजप्रमुख व श्री हीरालाल शास्त्री को प्रधानमंत्री बनाया गया |

श्री पी. सत्यनारायण राव की अध्यक्षता में गठित कमेठी की की सिफारिशों पर जयपुर को राजस्थान की राजधानी घोषित किया गया |

हाई कोर्ट जोधपुर में, शिक्षा विभाग बीकानेर में, खनिज और कस्टम व् एक्साइज विभाग उदयपुर में, वन और सहकारी विभाग कोटा में एवँ कृषि विभाग भरतपुर में रखने का निर्णय किया गया|

5. पंचम चरण – संयुक्त वृहत्तर राजस्थान

  • शामिल होने वाली रियासतें – वृहत्त राजस्थान व मतस्य संघ का विलय हुआ.

व्रहद राजस्थान के निर्माण के बाद रियासती विभाग ने 13 फरवरी 1949 को दिल्ली में मत्स्य संघ में सम्मिलित शासकों से बातचीत की तो पटेल को पता चला कि अलवर और करौली रियासत तो वह राजस्थान के साथ मिलने के लिए राजी हैं

भरतपुर और धौलपुर रियासत भाषाई आधार पर उत्तर प्रदेश राज्य में मिलना चाहती थी इसी कारण रसद विभाग ने भरतपुर और धौलपुर रियासत की जनता की राय जानने के लिए डॉक्टर शंकर देव राय समिति का गठन किस समिति ने अन्य दो सदस्य प्रभु दयाल और आर के सिंह को नियुक्त किया

और इस समिति के सदस्यों ने दो राज्यों का दौरा कर वहां की जनता की राय जानकर रिपोर्ट तैयार की जिसमें लिखा था कि दोनों रियासतों की अधिकांश जनता राजस्थान में मिलने के लिए पक्ष में किसी सिफारिश को ध्यान में रखते हुए 1 मई 1949 को मत्स्य संघ में बृहद राजस्थान संग मे मिलाकर इसका नाम सूक्त व्रहद राजस्थान संग किये जाने की विफक्ति जारी की जो 15 मई 1949 में यह भी निर्णय लिया गया

कि राजस्थान की राजधानी जयपुर महाराज प्रमुख भोपाल शिवराज सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री- हीरालाल लाल शास्त्री को राजस्थान यथावत बनेंगे
राजस्थान का एकीकरण का पांचवा चरण समाप्त हुआ

6. षष्ठम चरण – राजस्थान संघ

  • तिथि – जनवरी 1950
  • शामिल होने वाली रियासतें – संयुक्त वृहत्तर राजस्थान में सिरोही (आबू व दिलवाडा तहसील को छोड़कर ) रियासत का विलय हुआ

व्ह्र्द राजस्थान राजस्थान में सिरोही आबू देलवाड़ा को छोड़कर मिलाया 19 रियासत व 3 ठिकाने

मुख्यमंत्री – हीरालाल शास्त्री
राजप्रमुख – मान सिंह द्वितीय

इस दिन भारत का सविधान लागू हुआ राजस्थान का नाम रखा

7. सप्तम चरण –  वर्तमान स्वरुप में राजस्थान

  • तिथि – 1 नवम्बर 1956
  • शामिल होने वाली रियासतें – राजस्थान संघ + अजमेर-मेरवाड़ा + आबू , दिलवाड़ा तहसील व मध्य प्रदेश का सुनेल टप्पा. राज्य के सिरोंज को मध्य प्रदेश में मिलाया गया.

राज्य पुनर्गठन आयोग (श्री फजल अली की अध्यक्षता में गठित) की सिफारिशों के अनुसार सिरोही की आबू व् दिलवाडा तहसीलें, मध्यप्रदेश के मंदसोर जिले की मानपुरा तहसील का सुनेर टप्पा व अजमेर –मेरवाडा क्षेत्र राजस्थान में मिला दिया गया

राज्य के झालावाड जिले का सिरोंज क्षेत्र मध्यप्रदेश में मिला दिया गया | इस प्रकार विभिन्न चरणों से गुजरते हुए राजस्थान का वर्तमान स्वरूप 1 नवम्बर 1956 को अस्तित्व में आया।

रियासतों के बारें में जानकरी

  • क्षेत्रफल की दृष्टी से सबसे बड़ी रियासत – जोधपुर
  • क्षेत्रफल की दृष्टी से सबसे छोटी रियासत – शाहपुरा
  • जनसंख्या की दृष्टी से सबसे बड़ी रियासत – जयपुर
  • जनसंख्या की दृष्टी से सबसे छोटी रियासत – शाहपुरा
  • सबसे प्राचीन रियासत – मेवाड़ (उदयपुर)
  • सबसे नवीन और अंतिम रियासत – झालावाड़ (एक मात्र अंग्रेजो द्वारा
    निर्मित रियासत)
  • एक मात्र मुस्लिम रियासत – टोंक
  • जाटों की रियासत – भरतपुर और धोलपुर ( अन्य रियासतें राजपूतों की थी )
  • एकीकरण के अन्त में शामिल होने वाली रियासत – सिरोही

Rajasthan Integration Important Facts –

  • एनल्स एण्ड एन्टीक्यूटीज आफ राजस्थान (1828), कर्नल टाॅड ने राजस्थान नाम दिया
  • राजस्थान को राजपूताना नाम सन् 1800 जार्ज थाॅमस ने दिया
  • राजस्थान का निर्माण 18.03.1948 से प्रारम्भ होकर 01.11.1956 में पूरा हुआ
  • इस एकीकरण में सात चरण लगे एवं 8 वर्ष 5 माह एवं 14 दिन का समय लगा
  • राजस्थान की चार रियासतें डूंगरपुर, अलवर,भरतपुर,जोधपुर एकीकरण में शामिल नहीं होकर स्वतंत्र रहने की इच्छुक थी
  • राजस्थान के एकीकरण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता हैं
  • राजस्थान के एकीकरण के समय सरदार वल्लभभाई पटेल गृहमंत्री थें
  • मेवाड़ रियासत राजस्थान की सबसे प्राचीन रियासत थी
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान की सबसे बड़ी रियासत जोधपुर थी

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Question – 40

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Safat kandhari , P K Nagauri, Daya Ram Jat, चंद्रप्रकाश सोनी, प्रभुदयाल मूण्ड चूरु, 

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