Rajasthan Tourist Places

( राजस्थान में पर्यटन स्थल )

राजस्थान अपने गौरवपूर्ण अतीत वीरों की अमर गाथा से गुंजित प्राचीन भव्य स्मारकों किलो तथा अनुपम स्थापत्य कला के प्रति महलों मंदिरों हवेलियों रीति रिवाजों रंगीले त्योहारों तथा मोहक रंग बिरंगी पोशाकों के लिए प्रसिद्ध है  राजस्थान सैलानियों के लिए एक स्वर्ग है

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Rajasthan best tourist places ( कुछ विशेष पर्यटन स्थल )

Ajmer tourist place  

राजस्थान का हृदय, राजस्थान का नाका, भारत का मक्का कहलाने वाले इस नगर की स्थापना चौहान राजा अजयराज ( अजयपाल) ने 1113 ई.मे की। अजमेर मे खुलेगा अल्पसंख्यक विवि-: देश मे अल्पसंख्यक के लिए पांच यूनिवर्सिटी खोली जाएगी । इनमे एक अजमेर मे भी बनेगी।

khwaja Garib Nawaz Dargah

सोनीजी की नसियांँ :-  मूलचन्द सोनी द्रारा निर्माण कार्य 1864 मे प्रारम्भ व उसके पुत्र टीकमचंद द्रारा 1865 मे पूर्ण भगवान ऋषभदेव का मंदिर, लाल रंग का होने के कारण इसे ‘ लाल मंदिर’ भी कहते हैं। इस स्थान पर सिद्धकूट चैतनालय (दिगम्बर जैन मंदिर) स्थित हैं।

तारागढ़:- अजयमेरू व गढबीढली, ‘ राजस्थान का जिब्राल्टर ( विशप हैबर द्रारा दिया गया नाम)’ आदि। तारागढ़ दुर्ग का सबसे उँचा भाग ‘ मीरान साहब’ (तारागढ़ के प्रथम गवर्नर मीर सैयद हुसैन खिंगसवार) की दरगाह कहलाता है।

मेवाड़ के महाराणा पृथ्वी राज ने महल आदि बनवाकर अपनी पत्नी ताराबाई के नाम पर इसका नामकरण तारागढ़ किया। ख्वाजा साहब की दरगाह, तीर्थराज पुष्कर,अढा़ई दिन का झोपड़ा आदि दर्शनीय स्थल है।

Bharatpur tourist place

‘राजस्थान का प्रवेशद्रार’ के नाम से प्रसिद्ध भरतपुर की स्थापना जाट राजा सूरजमल द्रारा की गई। भारत मे लक्ष्मण जी का एकमात्र मंदिर व गुप्तकालीन मूर्तिया के कारण विशिष्ट पहचान रखता है।

  • बयाना का किला :- प्राचीनकाल मे शेणितपुर, बाणपुर, श्रीपुर एवं श्रपंथ कहा जाने वाला बयाना के एक ऊँचे पहाड़ पर.हैं।
  • डीग:- भरतपुर से लगभग 37 km उतर -पश्चिम की ओर स्थित’ जलमहलों की नगरी ‘ के रुप मे प्रसिद्ध स्थल है।
  • मोती झील:- यह 3km.भरतपुर से आगे हैं जल सिंचाई के लिए।
  • सेवर :- राष्टीय सरसों अनुसंधान केन्द्र स्थित हैं।
  • नौटंकी:- भरतपुर का प्रसिद्ध लोकनाट्य। रुपवास,लक्ष्मण मंदिर, उषा मंदिर, नोह, गंगा मंदिर आदि स्थल हैं।
  • केवलादेव (घना) राष्ट्रीय उद्दान:- पर्यटन परिपथ ‘ स्वर्ण- त्रिकोण’ पर स्थित भारत का सबसे बडा़ पक्षी अभयारण्य विश्व मे ‘ पक्षियों का स्वर्ग’ कहलाता है। सन् 1964 मे इसे अभयारण्य और 1981 मे इसे राष्ट्रीय उद्दान का दर्जा दिया गया।

Banswara tourist place

  • ‘ सौ द्रीपों का शहर ‘ के उपनाम से प्रसिद्ध बाँसवाड़ा क नाम यहाँ के प्रतापी शासक बोसना के कारण पडा़। बाँसवाडा राज्य की नींव महारावल जगमलसिंह ने डाली।
  • अर्थूणा:- बाँसवाड़ा से 55km.’ परमारों की राजधानी’ के रुप मे विख्यात नगर हैं।इसका प्राचीन नाम ‘ उत्थुनक’ हैं।
  • तलवाड़ा के प्राचीन मंदिर:- बाँसवाड़ा से 15km दूर 11वीं शताब्दी के आसपास निर्मित है
  • घोटिया अम्बा:- बाँसवाड़ा से 30km दूर बागीदौरा पंचायत मे स्थित हैं।
  • त्रिपुरा सुन्दरी:- तलवाड़ा से 5kmदूर प्राचीन त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर स्थित हैं। इसमे सिंह पर सवार भगवती माता की अष्टादश भुजा की मूर्ति हैं भुजा-18 हैं।
  • पाराहेड़ा, बोरखेड़ा, भवानपुरा, छींच का ब्रह्माजी मंदिर आदि दर्शनीय है

Bikaner tourist place

बीकानेर की स्थापना राव जोधा के संस्थापक के पुत्र राव बीका ने 1465ई.मे की। पहले ‘ राती घाटी’ तथा बाद मे ‘ ऊन का घर’ के नाम से प्रसिद्ध बीकानेर रियासत जांगल देश के नाम से जानी जाती थी।

  • जूनागढ किला ( Junagadh Fort ) :- लाल पत्थरों से बने 1078 गज की परिधि मे फैले इस भव्य किले का निर्माण राजा रायसिंह ने करवाया।
  • कोलायत:- बीकानेर से लगभग 51 km दूर कोलायत स्थित हैं महर्षि कपिल की तपोभूमि हैं।
  • भांडासर जैन मंदिर:- भगवान सुमतिनाथजी का है।
  • मुकाम:- नोखा से 15km दूर विशनोई समाज के संस्थापक जाम्भोजी की तपोभूमि के रुप मे प्रसिद्ध हैं।
  • देशनोक:- यहां करणी माता का विशाल मंदिर स्थित हैं ,चूहों का मंदिर भी कहते है।
  • गजनेर अभयारण्य, लालगढ़ महल, गजनेर झील,लूणकरणसर झील आदि।
  • राजस्थान राज्य अभिलेखागार संस्थान: – 1955 मे स्थापना की गई।

Baron tourist place

वराहनगरी के रुप मे प्रसिद्ध बांरा का क्षेत्र 15वीं शताब्दी मे सौलंकी राजपूतों के अधीन था। इस समय इस मे 12 गांव आते थे। इसलिए बांरा कहलाया था। जिले का गठन 10 अपैल, 1991 को 28 वे जिले के रुप मे किया।

  • भण्डदेवरा( रामगढ.):- खजूराहो शैली पर आधारित दसवीं सदी मे वाममार्गीय कलाओ से निर्मित शिवमंदिर। यह ‘ मिनी खजुराहो’ कहलाता है।
  • लक्ष्मी नारायण का मंदिर ( तेली का मंदिर):- मांगरोल तहसील के श्रीनाल गांव मे हैं इह शिखर बंध मंदिर के तोरण द्रार पर हाथी बने हैं।
  • सीताबाड़ी- यह स्थल लव -कुश की जन्मस्थली व राम सेना से उनके समर का साक्षी हैं। सहरिया जनजाति का कुम्भ हैं।

Pratapgarh tourist place

राज्य के 33वें जिले के रुप मे प्रतापगढ़ 26 जनवरी,2008 से अस्तित्व मे आया था। इसमे 5तहसील, चार उपखंड को शामिल किया गया थाउल्लेखनीय हैं कि प्रतापगढ़ की स्थापना 1699 ई.मे प्रतापसिंह द्रारा की गयीं थे। प्रतापगढ़ अपनीपाकृतिक दृशयावली, सुनारों की थेवा कला तथा तरल हींग के लिये पूरे राजस्थान मे जाना जाता हैं प्रतापगढ़ की मुख्य भाषा मालवी हैं जिसे रागड़ी भी कहते है और वागड़ी, भीली भी कहते थे।

  • थेवा कला:- प्रतापगढ़ की काँच व सोने पर की गई मीनाकारी कला जिसमे प्रमुखत: हरे रंग का प्रयोग होता हैं।
  • देवगढ.- राज्य की दुसरी पवन ऊर्जा परियोजनाओं हैं।
  • गोतमेशवर:- अरनोद तहसील मे स्थित गोतम ऋषि की तपस्थली मानी जाती थी।
  • जाखम बांध परियोजना, जानागढ.,नीनोर,सीतामाता का मेला, दीपनाथ महादेव का मेला आदि प्रमुख हैं।

Bhilwara tourist place

‘ राजस्थान का मैनचेस्टर (टेक्टाइल सिटी),वस्त्र नगरी’ के रुप मे प्रसिद्ध ऐतिहासिक अवशेषों की गवाही देता हैं। यह क्षेत्र 9 वीं से 12वीं शताब्दी मे निर्मित प्राचीन मंदिरों से परिपूर्ण हैं। इस जिले का नाम भीलवाड़ा यहां स्थित सुप्रसिद्ध टकसाल ‘ भीलाड़ी’ के कारण पडा़।

  • भीलवाड़ा मे बनेगी मेमू कोच फैक्ट्री :- राजस्थान की पहली मेनलाइन यूनिट मेमू ट्रेनो की कोच फैक्ट्री।
  • मेनाल:- माण्डलगढ़ से लगभग 20km. इस प्राकृतिक स्थल मे 12वीं शताब्दी मे निर्मित कई मंदिर हजारेश्वर मंदिर, नीलकण्ठेशवर महादेव मंदिर, रुठी रानी का महल हैं यहां 250 फीट ऊँचाई से गिरता मेनाली नदी का जलप्रपात दर्शनीय हैं।
  • बागोर:- यह स्थल भीलवाड़ा जिले से लगभग 25km. दूर कोठारी नदी के किनारे स्थित हैं।
  • आंगूचा:- यहां एशिया मे सीसे एवं जस्ते के श्रेष्ठ अयस्क भंडार पाये जाते है।
  • आसीन्द:- यहां खारी नदी के तट पर स्थित सवाई भोज ( गुर्जरो का तीर्थ स्थल है।
  • बिजोलिया:- यहां राजस्थान का ही नहीं बल्कि भारत का प्रथम अहिसात्मक किसान आंदौलन प्रारंभ हुआ जो 44 वर्षों तक चला।

Jodhpur

जोधपुर का मेहरानगढ़ दुर्ग जिसे मयूरध्वज गढ़ मोरध्वज गढ़ गढ़ चिंतामणि भी कहते हैं। 1459 में राव जोधा द्वारा दुर्ग का निर्माण किया गया दुर्ग चारों और 20 से 150 फुट ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है।

इस किले में मोती महल जिसका निर्माण सुरसिंह द्वारा करवाया गया। अजीत सिंह द्वारा बनवाए गए फतेह महल, अभय सिंह द्वारा बनवाए फूलमहल ,तख्तत सिंह के बनवाए सिंगार महल दर्शनीय है। मानसिंह द्वारा स्थापित पुस्तक प्रकाश नामक पुस्तकालय भी देखने योग्य है।

इस किले में देखने योग्य प्राचीन तोपें है जिनमें किलकिला, शंभू बाण,गजनी खान, जम जमा कड़क बिजली, बगस वाहन, बिच्छू बाण, नुसरत, गुब्बार, नागफली ,मागवा ,व्याधि ,मिरक, चंग ,मीर बख्श ,रहस्य कला तथा गजक प्रसिद्ध तोपे है।

किले में अन्य प्रमुख भवन ख्वाबगाह का महल ,तखत विलास ,दौलत खाना ,चोखेलाव महल, बिचला महल, रनिवास, सिलहखाना ,तोपखाना, सिणगार चौकी और नागणेची माता का मंदिर भी देखने योग्य है ।

जोधपुर के मंदिर

ओसिया के मंदिर जोधपुर से 57 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में स्थित ओसियां में आठवीं शताब्दी के वैष्णव और जैन मंदिर समूह गुर्जर प्रतिहार कला के केंद्र है

यहां लगभग 16 हिंदू मंदिर और जैन मंदिरों के अवशेष है वैष्णो मंदिरों में हरिहर मंदिर व सूर्य मंदिर जैन मंदिरों में महावीर का मंदिर शाक्त मंदिरों में पीपल माता तथा सचिया माता के मंदिर प्रमुख है

हरिहर मंदिर विष्णु के नरसिंह रूप व हरिहर स्वरुप को अधिक विस्तृत रूप से प्रस्तुत करते हैं सूर्य मंदिर पंचायतन प्रकार का है, पीपल माता के मंदिर में कुबेर और महिषमर्दिनी की प्रतिमाएं बनी हुई है

पहाड़ी पर सचिया माता महिषमर्दिनी का मंदिर बना हुआ है

मंडोर

मंडोर में आठवीं ,नौवीं ,दसवीं शताब्दियों के गुर्जर प्रतिहार नरेशों के समय मैं कई मंदिरों का निर्माण हुआ ह मंडोर में वैष्णव मंदिर के अवशेष तथा तोरणद्वार के दो कृष्ण लीला युक्त स्तंभ जोधपुर संग्रहालय में देखने योग्य है

जोधपुर में अन्य मंदिरों में चामुंडा देवी का मंदिर मेहरानगढ़ दुर्ग ,मुरली मनोहर मंदिर, आनंदघन मंदिर ,बाणगंगा मंदिर बिलाड़ा ,ब्रह्माणी का मंदिर फलोदी, रणछोड़ जी मंदिर जोधपुर ,घनश्याम मंदिर जोधपुर, लटियाल जी का जैन मंदिर कापरडा ,आई माता का मंदिर बिलाड़ा ,और महामंदिर जोधपुर दर्शनीय है

उम्मेद भवन पैलेस जोधपुर महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा बनवाया गया छोटी सी पहाड़ी पर छितर के पत्थर से निर्मित होने से इसे छीतर पैलेस भी कहते हैं 18 नवंबर 1928 को उम्मेंद सिंह द्वारा इसकी नींव रखी गई जो 1940 में बनकर पूर्ण हुआ ।यह अकाल राहत कार्यों के तहत संपन्न हुआ।उस समय 1.21 करोड रुपए की लागत से बना। इसमें संग्रहालय, थिएटर, केंद्रीय हॉल, उद्यान दर्शनीय है।

राई का बाग़ पैलेस जोधपुर महाराजा जसवंत सिंह प्रथम की रानी हाडी जी ने 1663 में निर्माण करवाया। महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय इस महल के अष्टकोणीय बंगले में अधिकांश समय रहते थे ।1883 में दयानंद सरस्वती इसी महल में बैठकर राजा को उपदेश सुनाते थे।

जोधपुर की हवेलियों में पुष्प हवेली ,पाल हवेली, पोकरण की हवेली ,बड़े मियां की हवेली, पच्चीसा हवेली और राखी हवेली प्रमुख है।

पुष्प हवेली विश्व का ज्ञात एकमात्र ऐसा भवन है जो एक ही नक्षत्र पुष्य नक्षत्र से बना हुआ है इसका निर्माण महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय के कामदार रघुनाथमल जोशी भूरुजी ने करवाया था ।

खीचन में लाल पत्थरों की गोलेछा व टाटिया परिवारों की हवेलियां भी दर्शनीय है घंटाघर जोधपुर, गमता गाजी जोधपुर ,गूलर कालू का दान जोधपुर की मीनारें भी प्रसिद्ध है

जोधपुर में पंच कुंडा की छतरियां जोधपुर महारानियों की छतरी ,जसवंत थड़ा जोधपुर महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय का का समाधि स्थल, जिसका निर्माण महाराजा सरदार सिंह द्वारा करवाया गया इसे राजस्थान का ताजमहल भी कहते हैं ।

इनके अलावा सेनापति की छतरी, कीरत सिंह सोढा की छतरी ,मामा भांजा की छतरी ,गोरा धाय की छतरी , कागा की छतरी ,ब्राह्मण देवता की छतरी भी दर्शनीय है

एक चट्टान बाबरी मन डोर मंडोर पर्वतमाला के नीचे चट्टान खोदकर अंग्रेजी के एल अक्षर के आकार की बावड़ी का निर्माण ईसा की सातवीं सदी में किया गया चट्टान में ही सीढ़ियां काटकर प्रवेश मार्ग बनाया गया। इसी में 20-25 फीट गहरा कुआं खोदा गया इस पर एक लेख खुदा हुआ है और ऊपर की और चट्टान पर सप्त मातृकाओं सहित शिव की आकृतियां उत्कीर्ण है लोग इसे रावण की चंवरी के नाम से पुकारते हैं।

चांद बावड़ी जोधपुर महाराजा जोधा की सोनगरी रानी चांदकुँवरी ने बनवाई थी इसे चौहान बावड़ी भी कहते हैं। अन्य बावड़ियों में नजर जी की बावडी, तापी बावड़ी, जालप बावड़ी ,तुवर जी का झालरा भी दर्शनीय है।

जोधपुर में रानीसर तालाब राव जोधा की पटरानी जसमादे ने 1459 में बनवाया था बालसमंद झील एवं बालसमंद उद्यान 1159 में बनवाया गया

कायलाना झील जोधपुर के प्रशासक सर प्रताप सिंह ने निर्माण करवाया। जोधपुर को पेयजल उपलब्ध करवाने हेतु महत्वपूर्ण है।

मंडोर में महाराजा अजीतसिंह तथा महाराजा अभयसिंह द्वारा देवताओं की साल का निर्माण करवाया गया एक विशाल चट्टान को काटकर 16 बड़ी मूर्तियां बनाई गई इन में चामुंडा, महिषासुर मर्दिनी ,जालंधरनाथ, गोसाई रावल मल्लीनाथ, पाबु हड़बूजी, रामदेवजी,जांभोजी, मेहाजी और गोगा जी की मूर्तियां शामिल है।

काला गोरा भैरू तथा विनायक की मूर्तियां भी स्थापित की गई है। यहां 33 करोड़ देवी देवताओं की गद्दी भी दर्शनीय है। संतो के कमरे में 16 ऐसे विशालकाय चित्र है जो एक ही चट्टान को काटकर बनाए गए हैं ।

यहां पर ताना पीर की दरगाह, मकबरे ,जैन मंदिर, गामा गाजी की मस्जिद है नागा दड़ी सरोवर प्रमुख पर्यटक स्थल है।

राजस्थान में पर्यटन का महत्व ( Importance of tourism in Rajasthan )

  • यह उद्योग यहां के निवासियों के लिए रोजगार का साधन है
  • इस रोजगार द्वारा विदेशी मुद्रा के अर्जन में सहायता मिलती है
  • यहां के दर्शनीय स्थलों का व्यापारिक केंद्र के रूप में विकास होता है
  • यहां पर बनी हुई वस्तुओं से निर्यात की संभावना बढ़ती है
  • राज्य के प्रति दूसरे राज्यों ओर देशों का आकर्षण बढ़ता है
  • राज्य की शिल्प कला तथा हस्तकला को प्रोत्साहन मिलता है
  • राज्य में परिवहन तथा संचार साधनों का विकास होता है
  • राज्य में व्यापार तथा उद्योगों का विकास होता है
  • राज्य में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होती है एवं राज्य में पारस्परिक सौहार्द्र एवं सद्भावना का वातावरण बनता है

महाराणा प्रताप संग्रहालय ( Maharana Pratap Museum )-  हल्दीघाटी राजसमंद में प्रताप की 406 वीं पुण्यतिथि पर इस संग्रहालय का उद्घाटन किया गया इसके योजनाकार मोहन श्रीमाली है  अंतरराष्ट्रीय पर्यटन संस्थान की स्थापना राज्य में पर्यटन का आधारभूत ढांचा तैयार करने हेतु 2001 में की गई थी

राजस्थान पर्यटन को वर्ष 2005 में लंबे अंतराल के बाद सर्वश्रेष्ठ विजुअल एडवरटाइजिंग के द्वारा प्रतिष्ठित गैलरियों एक्सप्रेस ट्रेवल टूरिज्म पुरस्कार प्राप्त हुए हैं  भारतीय पर्यटन विकास निगम अक्टूबर 1966 में केंद्र सरकार द्वारा पर्यटन ढांचे की विस्तृत विकास सहित देश को विश्व में पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने हेतु निगम की स्थापना की गई

रोपवे- जालौर के सुंधा माता मंदिर से जोड़ा गया रोपवे राजस्थान में सर्वप्रथम बनकर तैयार हुआ

जल महल योजना- जयपुर में जल महल उसके आसपास के क्षेत्र में जल महल पर्यटन परियोजना को मंजूरी दी गई

हेरिटेज होटल – राज्य के प्राचीन खेल और हवेलियों में संरक्षित समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से पर्यटकों को परिचित कराने उसका संरक्षण करने तथा पर्यटकों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हेरिटेज होटल योजना शुरू की गई है इसमें 1950 से पूर्व के खिलाड़ियों को हेरिटेज होटल में परिवर्तित किया जा सकता है

मेवाड़ कांपलेक्स योजना – 18 जनवरी 1997 को महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके जीवन से संबंधित स्थानों गोगुंदा हल्दीघाटी पर्यटन विकास हेतु प्रारंभ योजना

हाडोती कांपलेक्स योजना-  यह दक्षिण पूर्वी राजस्थान के झालावाड़ कोटा बूंदी सवाई माधोपुर जिलों की ऐतिहासिक पुरातात्विक धरोहर में स्मारकों का पुनरुद्धार हेतु पर्यटन विकास की महत्वकांक्षी योजना है

सांस्कृतिक धरोहर सेवा वाहिनी- विद्यार्थियों को राजस्थान की गौरवमई सांस्कृतिक धरोहर का अध्ययन करवाकर ऐतिहासिक स्मारकों का पुनरुद्धार में योगदान देने हेतु यह योजना शुरू गई है इस योजना हेतु राज्य के 36 विद्यालयों का चयन किया गया है ऐसी योजना शुरू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है

मरु सर्किट ( Dead circuit )- राज्य के पश्चिमी मरुस्थलीय जिलों जैसलमेर जोधपुर बाड़मेर बीकानेर के पर्यटन स्थलों के विकास हेतु सर्किट के रूप में जापान की संस्था वित्तीय सहायता से विकसित किया जा रहा है  इसमें नागौर शेखावाटी को भी शामिल किया गया है

हाथी गांव की स्थापना-  आमेर के निकट कुंडा ग्राम में नेशनल हाईवे 8 पर हाथियों को प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराने में पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु हाथी गांव बनाने का कार्य शुरु किया गया है

पर्यटन सर्किट ( Tourism circuit )

पर्यटन विकास हेतु राजस्थान को निम्न पर्यटन क्षेत्रों में बांटा गया है

हाड़ोती सर्किट इसमें बूंदी झालावाड़ कोटा बरान आते हैं
मेवाड़ सर्किट इसके अंतर्गत उदयपुर चित्तौड़गढ़ भीलवाड़ा राजसमंद आते हैं
वागड़ सर्किट इसमें डूंगरपुर बांसवाड़ा आते हैं
गोंडवाना सर्किट इसमें पाली सिरोही जालौर आते हैं
मेवाड़ा सर्किट इसमें अजमेर पुष्कर नागौर आदि आते हैं
शेखावाटी सर्किट इसमें सीकर झुंझुनू आता है

पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले मेले एवं उत्सव ( Rajasthan tourism department )

मेले एवं उत्सव –         स्थान       महीना

ऊंट महोत्सव ——बीकानेर—– जनवरी
मरू महोत्सव —– जैसलमेर—- जनवरी-फरवरी
हाथी महोत्सव ——जयपुर——मार्ग
मेवाड़ महोत्सव —- उदयपुर——-अप्रैल
ग्रीष्म महोत्सव —-माउंट आबू— जून
मारवाड़ महोत्सव — जोधपुर——अक्टूबर
शेखावाटी महोत्सव — सीकर—– फरवरी
शरद महोत्सव —- माउंट आबू—– दिसंबर
बूंदी महोत्सव —— बूंदी——— दिसंबर
अलवर महोत्सव —-अलवर——-फरवरी
गणगौर मेला —— जयपुर——-मार्च-अप्रैल
तीज सवारी ——-जयपुर—– जुलाई-अगस्त
पुष्कर मेला —–पुष्कर(अजमेर)— नवंबर
बेणेश्वर मेला —- डूंगरपुर———- फरवरी
नागौर मेला —– नागौर———जनवरी-फरवरी
कजली तीज —– बूंदी———अगस्त
चंद्रभागा मेला — झालावाड़—-अक्टूबर-नवंबर
ब्रिज महोत्सव — भरतपुर——फरवरी
कैलादेवी मेला —- करौली—–अप्रैल
ग्रीष्म महोत्सव —-जयपुर—-मई-जून
डीग महोत्सव——-भरतपु—– जन्माष्टमी
बाड़मेरबैलूनमहोत्सव –बाड़मेर—— अप्रैल
जैसलमेर पतंग महोत्सव — जैसलमेर—फरवरी
मीरा महोत्सव — चित्तौड़गढ़——–अक्टूबर
पतंग उत्सव —–जयपुर——–जनवरी

पर्यटन की दृष्टि से राजस्थान में सिर्फ भारत अपितु विश्व के पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट स्थान रखता है घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए वहां पर्यटन आकर्षण के बहुत से केंद्र हैं

कुछ प्रमुख आकर्षण:-

शाही रेलगाड़ी पैलेस ( On Wheels and Rajasthan Royals of Wheel )

किले महल एवं हवेलियां मेले एवं त्यौहार हस्तशिल्प हेरिटेज होटल एडवेंचर टूरिज्म ग्रामीण एवं इको टूरिज्म धार्मिक पर्यटन और मंदिरों के लोकगीत और शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य इस राज्य में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं और राज्य में रोजगार व राज्य में अप्रत्यक्ष रूप से वृद्धि करते हैं वर्ष 2012 के दौरान माह सितंबर 2012 तक 365 लाख पर्यटन

राजस्थान भ्रमण के लिए राज्य पर्यटन विभाग द्वारा जयपुर में ग्रेट इंडियन सेल 2012 का दिनांक 15 अप्रैल 2012 का आयोजन किया गया
विदेशी पर्यटकों की उपलब्धि को मध्य नजर रखते हुए आवास योजना का राज्य में विस्तार किया गया है

राज्य में विशेष धार्मिक मेलों और त्योहारों के सफल आयोजन के लिए जायरीन तथा श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु राज्य स्तरीय मेला प्राधिकरण गठित किया गया है पुरातत्व एवं संग्रहालय पुरातत्व संग्रहालय विभाग पूरे प्रदेश में पुरातत्व सर्वेक्षण खुदाई कार्य कर रहा है

राज्य में वर्तमान में 17 राज्य राजकीय संग्रहालय 2 कला दीर्घा 328 संरक्षित स्मारक वह 47 पुरास्थल अस्तित्व में है वर्ष 2013 -14 में संचालित गतिविधियां इस प्रकार है बूंदी में रानी जी की बावड़ी, 84 खंभों की छतरी और सुख महल में संयुक्त रूप से प्रवेश टिकट प्रारंभ कर दिया है
तथा जयपुर के सिसोदिया रानी बाग एवं विद्याधर बाग में भी प्रवेश टिकट प्रारंभ कर दिया है

पर्यटन उद्योग ( Tourism industry )

आधुनिक उद्योगों की भांति पर्यटन भी एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्रिया के अनुरूप विकसित हो चुका है इसलिए इसे पर्यटन उद्योग कहा जाता है पर्यटन विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उद्योग है लेकिन भारत का इस आय में मात्र 2% का ही हिस्सा है भारत में तीन प्रमुख पर्यटक राज्य राजस्थान गोवा तथा कश्मीर है एक अध्ययन के अनुसार ऐसा अनुमान है कि भारत में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में से एक तिहाई संख्या पर्यटकों की राजस्थान में आती है

राज्य की राजधानी जयपुर एक गुलाबी नगर के नाम से विश्व प्रसिद्ध है जो विश्व के खूबसूरत में नियोजित नगरों में से एक है जहां एक और यह राज्य वीर योद्धा वर्षों की शौर्य गाथा से परिचित कराता है वहीं दूसरी और असंख्य कवियों दस्तकारों शिल्पियों तथा इतिहासकारों पर भी गर्व करता है इन्हीं तथ्यों के परिणाम स्वरुप श्री सी वी रमन ने आइलैंड ऑफ ग्लोरी अर्थात रंग श्री द्वीप की संज्ञा प्रदान की

पर्यटन उद्योग से होने वाले लाभ ( Tourism industry )

  • इससे विदेशी मुद्रा का अर्जन होता है
  • राज्य की संस्कृति व हस्तकला का विकास होता है
  • पर्यटक भी राज्य की संस्कृति स्थानीय भाषाओं संगीत साहित्य कला व लोग जीवन से परिचित हो जाते हैं
  •  इससे पारंपरिक सद भावना जागृत होती है मित्रता बढ़ती है
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होती है और आर्थिक विकास होता है
  • जनता के जीवन स्तर में सुधार दृष्टिगत होता है
  • इससे उत्तम कोटि की वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रोत्साहन मिलता है फल स्वरुप विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन में वृद्धि तथा उनकी किस्म में सुधार होता है
  • परिवहन में संदेश वाहन के साधनों का विकास भी अपरिहार्य हो जाता है अर्थात यह उद्योग पनप नहीं सकता
  • पर्यटन उद्योग पर्यटन स्थलों में इस उद्योग से स्थानीय लोगों को रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होते हैं

राज्य में पर्यटन को मार्च 1989 में उद्योग का दर्जा प्रदान किया गया

 

 

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

चित्रकूट त्रिपाठी, चंद्रप्रकाश सोनी पाली, Rajpal G Hanumangarh, ज्योति प्रजापति, प्रभुदयाल मूण्ड चूरु, प्रीति जी मिश्रा, M L Meena

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