Rajasthan Wildlife

( राजस्थान के वन्य जीव )

जयपुर के रामनिवास बाग में जंतुआलय की स्थापना की थी जो राजस्थान का प्रथम और सबसे बड़ा जंतुआलय है। जयपुर के अतिरिक्त उदयपुर में 1878, कोटा में 1954, जोधपुर में 1936, बीकानेर में 1922 में जंतुआलय की स्थापना की गई है।

मुकुंदरा हिल्स क्षेत्र में जवाहर सागर अभयारण्य, दर्रा अभयारण्य व राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य शामिल है । राजस्थान में 5 जन्तुआलय जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, कोटा व बीकानेर में है ।

राजस्थान में राष्ट्रीय उद्यान ( National Park in Rajasthan )

1. रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान ( Ranthambore National Park )

यह सवाई माधोपुर में स्थित है जो 392 वर्ग किलोमीटर में फैला है यह राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान है जिसे 1 नवंबर 1980 को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला विश्व वन्यजीव कोष के द्वारा चलाए गए टाइगर प्रोजेक्ट 1973 में इसे शामिल किया गया जो कि राजस्थान की पहली बाघ परियोजना मानी जाती है
यह देश की सबसे छोटी बाघ परियोजना है जिसे भारतीय बाघों का घर कहा जाता है इस राष्ट्रीय उद्यान में त्रिनेत्र गणेश जी का मंदिर जोगी महल न्याय की छतरी (32 खंभो की छतरी) स्थित है इस अभ्यारण्य में मुख्य रुप से बघेरा, बाघ, लकड़बग्घा, हिरण, नीलगाय आदि वन्य जीव पाए जाते हैं

2. केवलादेव घना पक्षी विहार ( Kevaladev ghana pakshi vihar )

भरतपुर में स्थित है जो NH 11 पर है (स्वर्णिम त्रिकोण परिपथ दिल्ली आगरा जयपुर) इसे अभ्यारण का दर्जा 1956 में और राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा 26 अगस्त 1981 में मिला यह राजस्थान का दूसरा राष्ट्रीय उद्यान है यूनेस्को द्वारा 1985 में से विश्व प्राकृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया गया
इस उद्यान को पक्षियों का स्वर्ग एवं एशिया की सबसे बड़ी पक्षी प्रजनन स्थल के नाम से जाना जाता है यहां का मुख्य आकर्षण साइबेरियन सारस और पाइथन पॉइंट पर मिलने वाला अजगर है  यह राष्ट्रीय उद्यान डॉक्टर सलीम अली की कार्यस्थली है इसमें राजस्थान की प्रथम वन्यजीव प्रयोगशाला और दूसरा सर्प उद्यान विकसित किया जा रहा है पहला सांप उद्यान कोटा में है

3. मुकुंदरा हिल्स / दर्रा अभयारण्य ( Mukundra Hills  )

झालावाड़ कोटा मे विस्तृत यह 274 वर्ग किलोमीटर में फैला है इस अभयारण्य में कोटा के महाराव मुकुंद सिंह द्वारा अबली मीणी महलो का निर्माण करवाया गया जिन्हें राजस्थान का दूसरा ताजमहल कहा जाता है इस अभयारण्य में सर्वाधिक हिरामन तोते मिलते हैं जिन्हें हिंदुओं का आकाश लोचन कहा जाता है
इसे राजस्थान का तीसरा राष्ट्रीय उद्यान 9 जनवरी 2012 को तीसरी बाघ परियोजना 10 अप्रैल 2013 को घोषित की गई इस अभयारण्य में सर्वाधिक देव वन मिलते हैं

Rajasthan Wildlife Important facts 

  • सन् 1972 में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अधिनियम बनाया गया, जिसकें अन्तर्गत राजस्थान में 33 आखेट निषिद्ध क्षेत्र घोषित किए गए।
  • सन् 2004 में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए नेचर गाई पॉलिसी बनाई गई, जिसे 2006 में जारी किया गया था।
  • राजस्थान में पहला वन्यजीव संरक्षण अधिनिमय, 1950बनाया गया।
  • वर्तमान में 1972 का अधिनियम लागू हैं।
  • 1972 का अधिनियम राजस्थान में सन् 1973 में लागू हुआ।
  • उत्तर भारत का पहला सर्प उद्यान कोटा में स्थापित हैं।
  • डॉक्टर सलीम अली पक्षी विशेषज्ञ हैं।सलीम अली इन्टरप्रिटेशन सेंटर केवलादेव अभयारण्य में स्थापित हैं।
  • राजस्थान में लुप्त होने वाले जीवों में पहला स्थान गोड़ावन का, डॉल्फिन मछली का, बाघोंका हैं।
  • सर्वांधिक लुप्त होने वाली जीवों का उल्लेख रेड डाटा बुक में, संभावना वाले येलो बुल में में उल्लेखित किये जाते हैं।
  •  कैलाश सांखला टाईगर मैन ऑफ इण्डिया जोधुपर के थे।
  • पुस्तक:- रिर्टन ऑफ द टाईगर, टाईगर
  • बाघ परियोजना कैलाष सांखला ने बनाई थी।
  • वन्य जीव सीमार्ती सूची 42 के अंतर्गत आते हैं।
  • सन् 1976के संशोधन के द्वारा इसे सीमावर्ती सूची में डाला गया हैं।
  • राजस्थान में जोधपुर पहली रियासत थी जिसने वन्य जीवों को बचाने के लिए कानून बनाया।
  • पहला टाईगर सफारी पार्क रणथम्भौर अभयारण्य में स्थापित किया गया था।
  • वन्य जीवों की संख्या की दृष्टि से राजस्थान का दूसरास्थान हैं।
  • सर्वांधिक वन्यजीव असम में हैं।
  • बीकानेर, जैसलमेर व बाड़मेर में गोड़ावन पक्षी सर्वांधिक पाये जातें हैं। सबसे अधिक जैसलमेर में पाये जाते हैं।
  • सर्वांधिक कृष्ण मृग डोलीधोवा (जोधपुर व बाड़मेर) में पाये जाते हैं।

Rajasthan Wildlife Important Question

प्रश्न-1. वन्य जीवों का मानव समाज में क्या महत्व है ?
उत्तर- मानव समाज का वन्य जीवों से अनादि काल से ही घनिष्ठ संबंध रहा है आज भी जल थल और वनों की यह अंगूठी संपदा प्रकृति का संतुलन और गौरव बनाए हुए हैं वन्य जीव मनुष्य के सच्चे साथी हैं वन्य प्राणी प्रकृति में स्वचालित व्यवस्था के एक घटक है जिसे समाज को अनेक लाभ प्राप्त हुए हैं

1-आर्थिक लाभ– वन्य जीव से हमें विभिन्न प्रकार के उत्पाद जैसे खाल सिंग हाथी दांत पंख आदि प्राप्त होते हैं जो कई वस्तुओं के उत्पादन में प्रयुक्त होते हैं इनके व्यापार से हमें आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं
2 पर्यटन के दृष्टिकोण से महत्व–वन्यजीवों के संरक्षण हेतु बनाए गए राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य चिड़ियाघरों आदि को देखने पर्यटक आते हैं जिससे लोगों को रोजगार मिलता है और आय प्राप्त होती है साथ ही इनसे हमारा मनोरंजन भी होता है
3 भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि–वन्यजीवों के अपशिष्ट से जमीन को उपजाऊ खाद मिलती है कई वन्यजीव जमीन को पोली करके उसकी उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं

4 वैज्ञानिक शोध और अनुसंधान में महत्व– वन्यजीवों का प्रयोग कई प्रकार के वैज्ञानिक शोध और अनुसंधान में किया जाता है इनकी शारीरिक रचना मनुष्य से मिलती-जुलती होने के कारण विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग वन्यजीव पर ही किए जाते हैं
5 वन्यजीव वनस्पति प्रकीर्णन में सहायक होते हे
6 प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में–वन्य प्राणियों का महत्व पूर्ण योगदान है वन्य प्राणी अपने क्रियाकलापों से किसी न किसी रूप में जंगल के पनपने में प्रकृति का सहयोग करते हैं जंगलों की सघनता वन्यजीवों की बहु संख्या पर निर्भर करती है और सघन वन वर्षा को आकर्षित करते हैं इससे पर्यावरण संतुलन बना रहता है

प्रश्न-2. राजस्थान में वन्य जीव बोर्ड का गठन कब किया गया ?
उत्तर-1..राजस्थान में वन्य जीव बोर्ड का गठन 7 नवंबर 1955 में किया गया जिसके तहत प्रथम बार राज्य के पास शिकारगाह को वन्यजीवों के लिए आरक्षित घोषित किया गया

प्रश्न-3 किस अधिनियम के द्वारा राज्य में वन्यजीवों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था ?
उत्तर- वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 के तहत भारत सरकार द्वारा 9 सितंबर 1972 को इस अधिनियम को लागू किया गया था राजस्थान सरकार द्वारा इस अधिनियम को 1 सितंबर 1973 से लागू किया गया

प्रश्न-4. हिरण और मृग में अंतर लिखिए ?
उत्तर- हिरण- यह खुर वाले पशुओं की श्रेणी के जानवर होते हैं यह घास फूस पत्तियां खाकर अपना जीवन यापन करते हैं यह जुगाली करते हैं यह अधिकत खुले क्षेत्र में अथवा घास के मैदानों में रहना पसंद करते हैं इनका मुख्य बचाव इनकी तीव्र गति होती है हिरण और मृग में अंतर होता है हिरण के सींग छल्लेदार होते हैं और गिरते नहीं हैं तथा इनकी सिंग के अंदर की हड्डी और ऊपर की खोल (मुख्य सिंग) के दो भाग होते हैं

मृग–वैसे तो हिरण के समान होते हैं और जुगाली भी करते हैं लेकिन हिरणों की भाँति इनके सिंग के दो भाग नहीं होते मृग के सिंग की एक ठोस हड्डी होती है इनके सिंग 1-2 वर्ष में गिरते रहते हैं और फिर नये आते रहते हैं यह अपने सींगों से अपनी रक्षा करते हैं और एक दूसरे से लड़ने में इनका उपयोग करते हैं यह शाकाहारी होते हैं और घास पत्तियां वह फल आदि खाते हैं हिरण श्रेणी के चार प्रकार के हिरण और मृग श्रेणी के दो प्रकार के मृग राज्य में पाए जाते हैं हिरण श्रेणी,  मृग श्रेणी
चिंकारा काला। सांभर
हिरण। चीतल
चोसिंगा
नीलगाय

प्रश्न-5.राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य कहां स्थित है ?
उत्तर- राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य यह राजस्थान यूपी और मध्यप्रदेश में विस्तृत है राजस्थान के कोटा बूंदी सवाई माधोपुर करौली और धौलपुर क्षेत्र में स्थित है इस अभ्यारण की स्थापना 1978 राजस्थान मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के संयुक्त की गई है राजस्थान सरकार द्वारा इसकी विधिवत घोषणा 7 दिसंबर 1979 को की गई यह राष्ट्र का सबसे बड़ा अभ्यारण है जो 5400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है चंबल घड़ियाल अभयारण्य जो 280 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है यह राणा प्रताप सागर से लेकर चंबल से यमुना के संगम तक फैला हुआ है मगरमच्छ के अतिरिक्त उदबिलाव चीतल गोह सर्प दुर्लभ पक्षी नदिय टर्न नदियों में पाए जाने वाला स्तनपाई गांगेय सूंस आदि पाए जाते हैं विंध्याचल पर्वत श्रंखला में ग्रेट बाउंड्री फाल्ट का निर्माण करता है यह संख्या में घटते जा रहे घड़ियालों की सुरक्षा और प्रजनन के लिए बनाय गया है कछुओं की 8.प्रजातियां बड़ी मछलियों की 13 जातियां और चपल गंगाई डॉल्फिन शिशुमार भी मिलती है डॉल्फिन जो की उत्तर भारतीय नदियों में पाए जाने वाला एक स्तनपाई है इस अभ्यारण की विशेषता है

प्रश्न-6 वन्यजीवों के संरक्षण और उनके आवासों को सुरक्षित करने हेतु किए गए प्रयासों का वर्णन कीजिए ?
उत्तर- 1-वन्यजीवों के प्रबंधन हेतु टास्क फोर्स की रिपोर्ट की क्रियान्वित करने हेतु एक कमेटी गठित की गई है
2-संपूर्ण प्रदेश में वन्यजीवों का आकलन भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से कराया गया है
3-काले हिरणों हेतु प्रसिद्ध तालछापर अभ्यारण के समग्र विकास हेतु एक योजना तैयार कर हैबिटेट सुधार हेतु कार्य किया जा रहा है
4-रणथंभौर और सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र में रेड अलर्ट घोषित कर उनकी सीमाओं को सील कर सुरक्षा गार्ड लगाए गए हैं जिससे यहां अनाधिकृत शिकार रोका जा सके
5-बाघ संरक्षण की दिशा में एक विशेष कदम टाइगर कॉरीडोर बनाना है इस योजना के बाद रणथंबोर अभयारण्य के टाइगर, गांधी सागर अभ्यारण तक विचरण कर सकेंगे

6-टाइगर कॉरीडोर के अंतर्गत रणथंबोर के बाद सवाई मानसिंह अभ्यारण होते हुए बूंदी के कवाँलजी रामगढ़ अभ्यारण धनेश्वर जवाहर सागर दरा अभ्यारण पहुंचेंगे यहां से मध्य प्रदेश के जंगलों तक जा सकेंगे
7-राज्य में ग्रासलैंड पारिस्थितिकीय और जीन पूल संरक्षण हेतु प्रोजेक्ट बस्टर्ड प्रारंभ करने की योजना है
8-राज्य के 10 मरुस्थलीय जिलो और पांच गैर मरुस्थलीय जिले और 7 वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र में j i c a की सहायता से राजस्थान फॉरेस्ट्री एंड बायोडायवर्सिटी प्रोजेक्ट वर्ष 2011 से 2019 की अवधि में संचालित किया जाएगा ।इसमें वृक्षारोपण जैव विविधता संरक्षण और भूजल संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन के कार्य कराए जाएंगे जोधपुर के गुडा बिश्नोई यान गांव में काले हिरणों को संरक्षण देने के लिए संरक्षित क्षेत्र विकसित किए जाने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है

9-बायोलॉजिकल पार्क की स्थापना जयपुर के नाहरगढ़ क्षेत्र के 7 किलोमीटर में की गई है जिसका उद्देश्य विलुप्त होती प्रजातियों का संरक्षण करना है
10-राज्य में गिद्ध संरक्षण हेतु रेस्कयू सेंटर जोधपुर में स्थापित किया गया है
11-गिद्धों के संरक्षण के संवर्धन हेतु राज्य का पहला कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र जोहड़ बीड़ बीकानेर में बनाया गया है
12-राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण हेतु जून 2013 में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड प्रोजेक्ट शुरू किया गया है
13-उदयपुर के गुलाब बाग में बनेगा विश्व स्तरीय बर्ड पार्क यह पाक गुलाब बाग के 5.11 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित होगा जिसमें 11 पक्षी घर बनाए जाएंगे

14-तेंदूऐ संरक्षण हेतु राज्य में प्रोजेक्ट लियोपार्ड प्रारंभ किया जाएगा इसकी घोषणा बजट 2017-18 में की गई है यह प्रोजेक्ट 8 अभयारण्यों व संरक्षण क्षेत्र में संचालित किया जाएगा
15-धौलपुर में वन विहार अभयारण को स्लोथ बीयर सेंचुरी के रूप में विकसित किया जाएगा
16-हनुमानगढ़ के पीलीबंगा तहसील के बडोपल गांव में प्रदेश की दूसरी बड़ी सेंचुरी बनाई जाएगी
17-कुंभलगढ़ और टाडगढ रावली अभ्यारण को वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 की धारा 35(1 )के अनुसार राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर इसका नाम कुंभलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान रखने का निर्णय किया है आशय अधिसूचना 23 नवंबर 2011 को जारी की गई है

7. भारत मे सर्वप्रथम वन नीति कब घोषित की गई ?
उत्तर- भारत मे सर्वप्रथम1894 में वन नीति घोषित की गई।स्वतंत्रता के बाद 1952 में राष्ट्रीय वन नीति घोषित की गई। इस वन नीति के अनुसार देश की कुल भूमि के 33 प्रतिशत भाग पर वन होने चाहिए।

8. राजस्थान का राज्य पशु कौन हैं ?
उत्तर- 30 जून ,2014 को बीकानेर में हुई कैबिनेट बैठक में ऊँट को राजकीय पशु घोषित किया गया। चिंकारा वन्यजीव श्रेणी में राजकीय पशु रहेगा जबकि ऊँट पशुधन श्रेणी में राजकीय पशु रहेगा।

9. राजस्थान में कितने राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य व आखेट निषिद्ध क्षेत्र है।
उत्तर – राज्य में 3 राष्ट्रीय उद्यान , 26 वन्यजीव अभ्यारण्य , 10 कन्जर्वेशन रिज़र्व व 33 आखेट निषिद्ध क्षैत्र है। जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर व उदयपुर में 5 जंतुआलय है। राज्य में जयपुर जंतुआलय में मगरमच्छ का प्रजनन कार्य तथा जोधपुर जंतुआलय में गोडावण का प्रजनन सफलता पूर्वक किया जा रहा है।

10. राजस्थान में मृगवन बताइये ?
उत्तर – राजस्थान में कुल 7 मृगवन है।

  1. चित्तौड़गढ़ दुर्ग मृगवन, चित्तौड़गढ़(1969)
  2. सज्जनगढ़ मृगवन, उदयपुर(1984)
  3. पंचकुंड पुष्कर मृगवन,अजमेर (1985)
  4. मचिया सफारी मृगवन ,जोधपुर (1985)
  5. अशोक विहार मृगवन, जयपुर (1986)
  6. संजय उद्यान मृगवन, शाहपुरा,जयपुर(1986)
  7. अमृता देवी मृगवन खेजड़ली, जोधपुर(1986)

11. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के बारे में विस्तार से बताइये ?
उत्तर- इसे 1955 में वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित किया गया तथा राष्ट्रीय उद्यान 1 नवम्बर,1980 को घोषित किया गया। इस वन प्रदेश के उत्तर में बनास नदी तथा दक्षिण में चम्बल नदी द्वारा घिरा हुआ लगभग 392 वर्ग किमी. के क्षैत्रफल में फैला हुआ है।
यह राजस्थान का पहला राष्ट्रीय उद्यान है।

विश्व वन्यजीव कोष के सहयोग से 1973-74 में बाघ परियोजना प्रारम्भ की गई। राजस्थान में प्रोजेक्ट टाइगर अभियान श्री कैलाश चंद सांखला के प्रयासों से प्रारंभ किये गए। अतः इन्हें टाइगर मैन के नाम से भी जाना जाता है। इस उद्यान में त्रिनेत्र गणेश मंदिर, रणथम्भौर दुर्ग, जोगी महल, पद्मला तालाब आदि अन्य देखने योग्य जगह है।

2005 में इस राष्ट्रीय उद्यान से बाघ गायब होने के कारण चर्चा में रहा। रणथंभौर बाघ परियोजना में विश्व बैंक एवं वैश्विक पर्यावरण सुविधा की सहायता से 1996-1997 से इंडिया ईको डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चलाया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों सहयोग एवं जागृति पैदा करना है। 

इस राष्ट्रीय उद्यान को देखने के लिए देश विदेश से लेकर अनेकों पर्यटक आते है इस उद्यान की यात्रा अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने की तथा 2005 में भारत के प्रधानमंत्री मन मोहन सिंह ने भी इस उद्यान की यात्रा की।

यह राष्ट्रीय उद्यान दो पर्वत मालाओं के संगम पर है एक राजस्थान की अरावली पर्वतमाला तथा दूसरी मध्यप्रदेश की विंध्याचल पर्वतमाला पर है। इस राष्ट्रीय उद्यान में बाघों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में सांभर, जंगली सूअर, लकड़बघ्घा, सियार , नीलगाय, तेंदुए, चीतल, रीछ, जरख, सियागोश, लोमड़ी आदि पाए जाते है।

 

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No of Question- 28

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Specially thanks to ( With Regards )

ममता शर्मा, राजवीर चुरु, विनोद कुमार गरासिया बाँसवाड़ा सुरेश बिश्नोई, विजय कुमार महला झुन्झुनू, कमल सिह राजावत Tonk, रोहिताश कुमार स्वामी सीकर,Ashok prajapat, Ajay meena , चन्द्रेश कुमार करौली , ओमप्रकाश ढाका चूरू, भवानी सिंह जोधपुर, पुष्पेन्द्र कुलदीप झुन्झुनू, प्रकाश दाधीच, मेड़ता सिटी, नागौर, सुभाष शेरावत 

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